हिमांशु जोशी की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

       कर्म से परिणाम अवश्य सामने आता है। ये सत्य है। कर्म अपना असर अवश्य देता है।‌यही कर्म की सच्चाई है। ऐसे ही समस्या होती है । समस्या कुछ भी हो सकती है ‌। परन्तु समाधान अवश्य होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
      कर्म है तो परिणाम भी सम्भव है, और जहाँ समस्या है, वहाँ समाधान भी अवश्य सम्भव है यह जीवन का अटल सत्य है। संसार का प्रत्येक कार्य किसी न किसी कर्म का परिणाम होता है। बिना प्रयास के सफलता की कल्पना करना केवल एक भ्रम है। जो व्यक्ति कर्मशील होता है, वही अपने लक्ष्य के निकट पहुँचता है। समस्याएँ जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। वे हमें रोकने नहीं, बल्कि परखने और मजबूत बनाने के लिए आती हैं। यदि समस्या है, तो यह भी निश्चित है कि उसका कोई न कोई समाधान अवश्य होगा। आवश्यकता केवल धैर्य, विवेक और सही दिशा में प्रयास करने की है। कर्म और समाधान दोनों ही सकारात्मक सोच पर आधारित होते हैं। जब हम निराशा के बजाय आशा को चुनते हैं, तो कठिन से कठिन परिस्थिति भी सरल लगने लगती है। हर समस्या अपने साथ एक अवसर भी लेकर आती है—कुछ नया सीखने का, स्वयं को बेहतर बनाने का हमें कभी भी समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। निरंतर कर्म करते रहें और विश्वास रखें कि हर प्रयास का फल अवश्य मिलेगा, और हर समस्या का समाधान भी अवश्य निकलेगा।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

।   यह प्रमाणित है कि कर्म , समस्याएं और समाधान जीवन  का एक चक्र है क्योंकि कर्म ही समस्याओं का कारण है और कर्म ही समाधान का एकमात्र माध्यम सा उपाय है, देखा जाए गलत कर्म समस्याओं को जन्म देता है जबकि निष्काम कर्म  और सत्य कर्म समस्याओं को दूर करते हैं और अच्छे परिणाम भी देते हैं बशर्ते हम ऐसे कर्म करें जिससे समस्याओं का समाधान संभव हो सके, तो आईये आज इसी बात पर चर्चा करतें हैं कि कर्म है तो परिणाम  भी संभव  है, समस्या है तो समाधान भी सम्भव है, मेरे ख्याल में जीवन में कोई भी चुनौती बिना समाधान के नहीं आती लेकिन यदि हो तो उसका हल भी समस्या के साथ ही छिपा होता है बस हमें जरूरत है धैर्य की तथा सही कर्म करने की क्योंकि सही कर्म ही भाग्य का निधार्रण करता है और जीवन की बाधाओं को दूर करता है, यह भी सत्य है कि हर समस्या का समाधान अवश्य होता है लेकिन जरूरत होती है नजरिया बदलने की हाथ पर हाथ रखकर बैठने  से समस्या बढती है लेकिन कर्म करने से हल निकलता है क्योंकि जब तक जीवन है समस्याएं तो आएगी मगर उनको हल करने का समाधान भी हमारे कर्म और पुरूषार्थ में ही निहित है,  मेरे ख्याल में कर्म सिद्धांत के अनुसार हर क्रिया का फल निश्चित होता है जबकि अच्छे कर्मों से सुख और बुरे कर्मों से समस्याएं या कष्ट आना संभव है लेकिन उनका हल भी समस्याओं के अन्दर ही होता है बशर्ते हम उन्हें हल करना सीख लें,  समस्या पर शिकायत करने की बजाय समाधान का हिस्सा बनने का प्रयास करें , निष्काम कर्म की भावना से किए गए प्रयास ही समस्या का समाधान करते हैं, जीवन में कोई भी चुनौती बिना समाधान के नहीं आती इसलिए यदि समस्या है तो उसका हल भी उसी के गर्भ में छिपा होता है बस धैर्य और कड़ी मेहनत व ईमानदारी भाग्य को बदल कर रख देती है,आखिरकार यही कहुँगा कि परिणाम किसी कार्य या समस्या का अंतिम नतीजा है जबकि समाधान उस समस्या को दूर करने या सुधारने का उपाय है , हाँ परिणाम अक्सर क्या हुआ है बताता है और समाधान इसे कैसे ठीक करें उस पर हमारा ध्यान केंद्रित करता है जिसका लक्ष्य स्थिति को सुधारना होता है इसलिए हमें कर्म ही ऐसे करने चाहिए की समस्याएं  कम से कम उतपन्न हों  अगर समस्याएं उतपन्न हो भी जाती हैं तो समाधान ऐसे ढूढों  की उनका नामोनिशान मिट जाए लेकिन  इसके लिए हमारे कर्म बेहतर होने चाहिए फल की चिंता किये बिना मेहनत, ईमानदारी निश्चित लक्ष्य तथा निडरता ही सभी समस्याओं का  हल व परिणाम है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -जम्मू व कश्मीर

        यह सच है हम जो भी कार्य करते हैं वही हमारे जीवन में कर्म का परिणाम बनकर अवश्य लौटता है।  अतः बुरे नकारात्मक कर्म से दुख और अच्छे कर्म की सकारात्मकता से सफल सुख की प्राप्ति होती है। हमें कोई भी कार्य केवल परिणाम पर ही मुख्यत: फोकस करके नहीं करना चाहिए; क्योंकि यदि परिणाम फल की प्राप्ति वांछनीय नहीं होती तो व्यक्ति  निराश होकर बैठ जाता है पर जब कर्म को ही अधिकार मानकर पूर्णता मनोयोग से विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहेंगे तो परिणाम बेहद आशातीत, ऐतिहासिक सुखकारी होते हैं । कर्म कोई भी हो सहज नहीं होता। समस्याओं की नींव पर कर्म फल का सुंदर महल तैयार होता है। कोई भी समस्या है तो उसका समाधान खोजने की पूरी जिम्मेदारी हमारी ही है-- बिना घबराए, जल्दबाजी न करके, परिस्थितियों को शान्त दिल से उसके कारण को उपचार विचार कर आवश्यकतानुसार कार्य में बदलाव या सर्वोत्तम विकल्प खोज कर समस्या समाधानित हो ही जाती है। जीवन जगत में कार्य के दौरान आने वाली बाधाओं को दूर करना भी एक कौशल ही है।बगुले की तरह एकाग्रचित और हंस की तरह विवेकी होने पर कर्म- परिणाम तथा समस्या- समाधान संभव है।

 - डॉ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

           कर्म कोई भी और कैसा भी हो, परिणाम तो देता ही है। भले ही देर हो जावे। कहा भी गया है, " कर्म का फल, आज नहीं तो कल।" इसीलिए अच्छा यही है कि कर्म पर ध्यान दिया जावे क्योंकि कर्म अच्छे तो परिणाम भी अच्छा ही मिलेगा और बुरे कर्म हुए तो परिणाम भी बुरा ही मिलेगा। इसमें कोई सिफारिश नहीं चलती। जैसे को तैसा। यह कर्म की बात हुई। समस्या को लेकर भी हम घबरा जाते हैं। उदास हो जाते हैं। दुखी हो जाते हैं। विचलित हो जाते हैं। जबकि हर समस्या का समाधान भी संभव है। बस धैर्य के साथ उसे जानने और पहचानने की आवश्यकता होती है। हाँ, यह बात जरूर है कि इसमें लापरवाही नहीं चलती।उचित तो यह होगा कि कार्य के प्रारंभ में ही उस कार्य में आने वाली संभावित समस्याओं और उसके निदान के उपायों की भी तैयारी रखी जाये। जल्दबाजी में हम इन विकल्पों पर गंभीरता से चिंतन-मनन नहीं करते और फिर बाद में यही परेशानी का सबब बनते हैं।

  - नरेन्द्र श्रीवास्तव

 गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

                एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है "हाथ पर हाथ धरे रखकर बैठे रहना"  - - कुछ न कुछ करेंगे तो परिणाम भी मिलेंगे - - - नहीं करेंगे तो समाधान कभी नहीं मिलेगा। मानव जीवन समस्याओं से भरा रहता है। समस्याओं से जूझते रहना यही परम धर्म है मानव मात्र का। समस्या - कर्म - समाधान इन तीन चक्रों में इंसान का जीवन परिचालित रहता है।" दुनियां में हम आये हैं तो जीना ही पड़ेगा "  - - यह गीत बड़ा सार्थक है कर्म की प्रधानता बताने में।" कर्म प्रधान विश्व रचि राखा" - - आपके प्रारब्ध में आपके कर्म का लेखा-जोखा सदैव परिचालित रहता है। यही निरंतरता जीवन का आधार होती है जिसे हम जीवन-चक्र कहते हैं। जीवन-चक्र प्रकृति का आधार होता है। जरूरत इस बात की होती है कि हमारी तात्कालिक बुद्धि इन अनमोल अनिवार्यताओं को खोज  निकालें और कर्म व करम की तारतम्यता बनाये रखें। "कोटि-कोटि भूमि  - - जिसमें असंख्य प्राणी" - - इतने असीमित असीमता में अपने कर्म खोज लेना और तद्नुसार अपने जीवन का उद्देश्य पूर्ण करना यही मानव जीवन का सबसे बड़ा कारक होता है। समस्या हैं तो समाधान भी अवश्य होंगे। कर्म की लौकिक अलौकिक और पारलौकिक अनिवार्यतायें समस्या के समाधान की दिशा में निरंतर कार्यरत होती हैं भले ही हम दुनियावी आँखों से उन्हें न पहचान पायें लेकिन कर्म का लेखा-जोखा उसके लिए रास्ते बनाता रहता है और हमारा जीवन चलता रहता है। ये सब बडी़ ही अभेद्य और अबूझ पहेली की तरह होती हैं - - आसान नहीं है इनके भीतर कुछ खोज लेना। जंगलों में जाकर तपस्या करनेवाले महान ऋषि नहीं खोज पाये तो हम सामान्य इंसानो की क्या बिसात - - -?

- हेमलता मिश्र मानवी

 नागपुर - महाराष्ट्र 

        किसी भी काम परिणाम कर्म करने के बाद ही होता है. यानी कर्म किया गया है तो उसका परिणाम तो होना ही है. भले वो परिणाम कैसा भी हो. लेकिन परिणाम कर्म के अनुसार ही होता है. भले का भला बुरे का बुरा. बबूल बोने से बबूल का फल और आम बोने से आम का ही फल प्राप्त होता है. अदल-बदल नहीं होता है. इसलिए कर्म होगा तो परिणाम आना ही है. समस्या है तो उसका समाधान भी है. दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका कोई समाधान न हो. हर समस्या का समाधान है. बस जरूरत है सही समय पर सही निर्णय की. आज तक ऐसी कोई समस्या पैदा नहीं हुई है जिसका कोई समाधान न हो. इसलिए समस्या से घबराएँ नहीं, ठंढे दिमाग से समाधान निकालें.

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दिनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

          परिणाम या फल तभी प्राप्त होता है जब कोई कर्म या प्रयास , अथवा यथासंभव प्रयत्न किया जाए !! बिना कर्म के , बिना मेहनत के, जो बैठे बैठे फल की इच्छा रखते है , उन्हें परिणाम अथवा फल नहीं मिलता !! जब कोई समस्या होती है , तो उसका समाधान भी होता है !! ये अलग बात है कि समाधान खोजना पड़ता है, कोई समस्या स्वयं हल नहीं होती !! हर कठिनाई को स्वयं सुलझाना पड़ता है,व सार्थक प्रयास करने पड़ते हैं !! असंभव तो दुनियां में कुछ भी नहीं है !!

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

        प्रत्येक कर्म का परिणाम होता है,यानि हर क्रिया का फल अवश्य होता है। सुकर्म का सुफल (सकारात्मक )और कुकर्म का कुफल (नकारात्मक )अवश्य मिलता ही है, इसमें अलग अलग परिस्थिति अनुसार समय लग सकता है,कभी कभी तो यह अगले जन्म तक भी पहुंच जाता है। जब भी कोई समस्या उत्पन्न होती है तो कहीं न कहीं उसका समाधान भी जन्म ले लेता है। समस्या छोटी हो या बड़ी, समाधान सबका होता है।बस धैर्य रखने के साथ साथ समाधान को खोजने की आवश्यकता होती है। ऐसे कितने ही प्रसंग तेनालीराम की कहानियों में मिलते हैं।जीवन में आने वाली समस्त समस्याओं का समाधान हमारे कर्मों,कार्यो पर निर्भर करता है। जैसे कर्म और परिणाम एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, वैसे ही समस्या और समाधान एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

       “कर्म है तो परिणाम भी संभव है, समस्या है तो समाधान भी संभव है”—ये पंक्तियाँ जीवन के गहरे सत्य और सकारात्मक दृष्टिकोण को अत्यंत सरलता से व्यक्त करती हैं। पहली पंक्ति हमें यह सिखाती है कि हर प्रयास व्यर्थ नहीं जाता; यदि हम निरंतर कर्म करते हैं, तो उसके फल का प्रकट होना निश्चित है। परिणाम तुरंत मिले या देर से, लेकिन कर्म का प्रभाव अवश्य दिखाई देता है। यह हमें धैर्य, परिश्रम और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।दूसरी पंक्ति जीवन की चुनौतियों के प्रति हमारा दृष्टिकोण बदलती है। हर समस्या अपने साथ समाधान की संभावना भी लेकर आती है, आवश्यकता केवल उसे खोजने की होती है। निराश होने के बजाय यदि हम सकारात्मक सोच और दृढ़ निश्चय के साथ प्रयास करें, तो कोई भी कठिनाई असंभव नहीं रहती।समग्र रूप में ये पंक्तियाँ हमें कर्मठता, आशावाद और आत्मविश्वास का संदेश देती हैं—कि जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमें हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि जहाँ प्रयास है, वहाँ परिणाम है, और जहाँ समस्या है, वहाँ समाधान भी अवश्य है।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर -  राजस्थान

       बिल्कुल सत्य है कि जो मनुष्य कर्म करेगा,उसका फल अवश्य मिलेगा।अच्छे कर्म का अच्छा परिणाम और बुरे कर्म का बुरा परिणाम मिलता है। इसलिए हमें  हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए।हर समस्या का समाधान संभव है।हमें समस्या से घबराना नहीं चाहिए।आज समस्या आया है और कल समाधान निकल जाएगा।तात्पर्य यह कि अच्छे दिन आ जाएंगे।हमें ईश्वर में विश्वास करना चाहिए।वे समस्या का समाधान अवश्य कर देते हैं।

- दुर्गेश मोहन 

 पटना - बिहार

      कर्म कैसा भी हो उसमें फल निश्चित होता है। यह फल प्रत्यक्ष या परोक्ष भी हो सकता है, जैसे कि कर्म होता है। किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए परिश्रम करने का कर्म प्रत्यक्ष होगा किन्तु किसी को कष्ट या हानि के लिए, अथवा हित या सद्भावना पूर्ण सहयोग का  प्रयास या सोच अप्रत्यक्ष होगा। हम वैसा ही पायेंगे। कर्म निष्फल नहीं होगा। इसी तरह ऐसी कोई समस्या नहीं होती जिसका समाधान न हो। यहां भी समाधान सकारात्मक या नकारात्मक दोनों में से कोई भी हो सकता है।

- रेखा श्रीवास्तव 

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " कर्म का परिणाम ही समस्या का समाधान है। यही कर्म की पहचान है। जो अपना मूल्यांकन स्वयं करता है। वह समाधान में सक्षम होता है। ऐसा कर्म ही सर्वप्रिय होता है।

                - बीजेन्द्र जैमिनी 

         (संचालन व संपादन)

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