ज़बाब देना भी एक कला माना जाता है । जो इंसान ज़बाब नहीं दे सकता है। वह क्या तो मुर्ख है या फिर अनपढ़ भी हो सकता है।बाकी तो चुप रहना भी कला माना जाता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- देखा जाए जीवन में मुहँ तोड़ जबाव देना और चुप रहना दोनों ही परिस्थियों की कलाएँ के रूप में जानी जाती हैं तो आईये आज इसी चर्चा पर बात करते हैं कि मुँह तोड़ जवाब देना भी एक कला है जबकि चुप रहना भी एक कला है, मेरा मानना है मुहँ तोड़ जवाब देने का मतलब चिल्लाने और बदतमीजी करने से नहीं है बल्कि सही समय पर सही शब्दों के साथ आत्मविश्वास से अपनी बात रखना है ताकि सामने वाले को उसकी सीमा का एहसास हो जाए क्योंकि यह आत्म सम्मान की रक्षा करता है, यहाँ तक चुप रहने की बात है चुप रहना कोई कमजोरी नहीं है बल्कि सबसे बड़ी ताकत है जब बहस निरर्थक हो और सामने वाला समझने की स्थिति में न हो या आपके चुप रहने से बिगड़ना बंद हो जाए तो तब चुप्पी ही सबसे बड़ा जवाब होती है,...