जीवन में त्याग बहुत महत्वपूर्ण होता है। बिना त्याग के कुछ भी सम्भव नहीं है। त्याग से जीवन में तरक्की सम्भव होती है। त्याग जीवन का आधार है। फिर भी सोच सब की अपनी अपनी है। बिना त्याग के इंसान नहीं बनता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- इंसान बनने के लिए सर्वप्रथम हमें अपने ईगो (मैं ) की भावना का त्याग करना होगा। ईगो के आते ही हम स्वार्थ , ईर्ष्या , क्रोध , असंतोष , लालच इत्यादि से घिर कर दूसरे के प्रति दया, करुणा, सेवा जैसे मानवीय भाव कर्मों से दूर हो जाते हैं और अति होने पर जानवर या फिर राक्षस बन जाते हैं । अतः सत्मार्ग इंसान का है जिसके लिए काम, क्रोध ,लोभ बढ़ाने वाली कामनाओं की उपज स्थली मन को संयमित करते हुए त्यागपूर्ण जीवन व्यतीत करके एक सच्चे इंसान बनते हैं । फिर यही सब कर्मों के केंद्र में ईश्वर को साक्षी कर्ता मानें और स्वयं को केवल माध्यम । गीता में भगवान कृष्ण ने इसी प्रकार के कर्म कर्ता को श्रेष्ठ माना ...