औलाद के बिना जीवन का कोई महत्व नहीं है। फिर भी अधूरे जीवन का खेल का कोई महत्व नहीं रह जाता हैं। मन की कोई परिभाषा काम नहीं करतीं है। जो जीवन की विभिन्न अंगों को प्रभावित करतीं हैं।यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- देखा जाए औलाद और मन का रिश्ता निस्वार्थ प्रेम, तयाग और गहरी भावनाओं से जुड़ा होता है क्योंकि माता पिता का मन हमेशा अपनी औलाद की भलाई, सुरक्षा और सफलता के लिए चिंतत रहता है , माता पिता बच्चों के भविष्य के लिए तथा उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपनी इच्छाओं तक का त्याग कर देते हैं तथा अपने मन के भावों में अपने औलाद के लिए अटूट प्रेम में बहते रहते हैं तो आईये आज इसी बात पर चर्चा करते हैं कि औलाद बिखरे सपनों की कहानी है जबकि मन अपने अधूरे घर की कहानी है, मेरा तर्क है कि औलाद बिखरे सपनों की कहानी इसलिए है कि माँ बाप अपने बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए अपने सपनों को अपने मन को तथा अपने भावों को अपनी औलाद के भविष्...