झूठ तो सभी समस्याओं की जड़ है। फिर भी लोग झूठ पर झूठ बोलते रहते हैं। और समस्या को बड़ी करते रहते हैं। इसलिए समस्या से छुटकारा पाने के लिए कोई कदम उठने में असफल रहते हैं। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। बाकी तो आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- अक्सर देखा जाता है व्यक्ति अपने हितों की पूर्ति के लिए , बहुत बड़ा गलत कदम उठाने के बाद, सजा पाने के डर से , रोजगार पाने के लिए गलत बातें बनाना इन सब बातों की सच्चाई जानते हुए भी झूठ बोलना , अपने आपको तो धोखा देता ही है। कभी-कभी ऐसी परिस्थिति होती है कि व्यक्ति आंतरिक रूप से अपने को कभी माफ नहीं कर पाता। स्वयं के आत्म सम्मान को भी वह खो देता है। झूठ बोलकर कमाया धन या किसी की हत्या में सुपारी लेकर किया गया कृत्य ( झूठी गवाही देना) सब महापाप तो है ही। इसके साथ इनके दुष्प्रभाव से व्यक्ति आंतरिक और मानसिक तनाव को बढ़ा लेता है। किसी सही बात के लिए अपनी गलत बात को बढ़ा - चढ़ा कर रखना, परिवार के लोगों को गुमराह करना असलियत खुलने पर वह झूठा व्...