भाग्य और कर्म एक दूसरे के पूरक होते हैं। कर्म से भाग्य बनता है और भाग्य से ही कर्म प्राप्त होता है। यह गोल - गोल घुमाता है। यही जीवन की परिभाषा है। इसी प्रकार शिक्षा और रोजगार कार्य करता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:- बहुत सुंदर विषय है यह। बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा॥" मनुष्य का जन्म बहुत भाग्यशाली को मिलता है यानी भाग्यवान तो आप जन्मजात हुए। और देखिए, "कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। जो जस करहि सो तस फलु चाखा।।" तो मानिए कर्म प्रधान जग में भाग्यवान जन्म मिलना जीवन की बड़ी उपलब्धि है।अब इस जीवन को चलाने के लिए शिक्षा और रोजगार बहुत जरूरी है दोनों। शिक्षा के बिना सफल जीवन की कल्पना व्यर्थ ही लगती है। यानी भाग्य,कर्म, शिक्षा और रोजगार चारों ही जीवन का निर्माण करते हैं। इनमें से कोई एक पक्ष भी कमजोर होने पर जीवन असफल होना निश्चित होता है, इसलिए कर्म करते हुए,शिक्षा अर्जित कर उच्च रोजगार ...