महेश राजा की लघुकथाएं : - 1. सांँपो के होते हुए बारिश हो रही थी।तालाब मे पानी भरने लगा था।शाम होते ही मेंढ़कों ने टर्राना शुरु कर दिया था। मेंढ़की ने अपने मेंढ़क से कहा,क्यों जी।यदि अपने तालाब में चुनाव होने लगे तो क्या तुम चुनाव लडोगे? मेंढ़क संयत स्वर मे बोला-डियर?साँपों के रहते हुए मुझे कौन टिकट देगा?.*** 2.याददाश्त भाई साहब कह रहे थे,-"क्या बात है,आजकल कुछ याद नहीं रहता..बात करते-करते भूल जाता हूंँ....किसी को बहुत दिनों बाद देखता हूं या मिलता हूं तो पहचानने में मुश्किल होती है।" मैने उन्हें समझाया कि ऐसा थकान या बेवजह तनाव के कारण होता है।साथ ही वह बात जो दिल पर घाव या चुभन नहीं छोड जाती,हमारी याददाश्त से बाहर हो जाती है। भाई साहब उम्र मे मुझसे काफी बड़े है।76 वर्ष पार कर चुके है लेकिन मुझसे मित्र वत व्यवहार करते है। मैंने कहा-"सुबह शाम दूध के साथ बादाम लिजिए.... याददाश्त के लिये फायदेमंद होगा।" भाई साहब दार्शनिक अंदाज मे हंसे,फिर बोले,-"...