विनय दामोदर सावरकर की स्मृति में चर्चा परिचर्चा
पहचान ही सबसे बड़ी होती है। इससे बड़ा नाम भी नहीं है। फिर भी पहचान सर्वोत्तम है। जो काम से मिलती है। यही काम ही पहचान के लिए होती है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- आप सिर्फ पहचान पर टिके रहते हैं ! और काम छोड़ दें, तो पहचान भी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।आपका अस्तित्व हो खोने लगता है ! आश्रित हो अपने व्यक्तित्व को निखार नही सकते! आप में आत्मविश्वास के बजाए आलस्य कामचोरी अफ़सर राजशाही बदनीयती के गुण पनपने लगते है ! आपकी गरिमायुक्त छवि क्षीण होने लगती हैं ! मय की भावना से ग्रसित दूसरों के प्रति अपना आत्मविश्वास खो देते है ! पहचान से मिलता है काम: जब आपका नाम, रुतबा, या साख बन जाती है, तो लोग खुद काम लेकर आते हैं। अमुक व्यक्ति है तो काम बढ़िया होगा वाला भरोसा। काम से मिलती है पहचान: जब आप मेहनत से अच्छा काम करते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी पहचान बनती है। काम बोलता है वाली बात सही दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। शुरुआत में आपको काम साबित करने के...