जिन्दगी एक जीवन है । जो जन्म से लेकर मृत्यु तक को एक किताब कहते हैं। जिसमें जीवन के खटे - मीठी यादों का संग्रह होता है। जो पल दर पल कहानी देता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- जिंदगी एक किताब है जो कर्मों से लिखी जाती है. हम जैसे कर्म करते हैं, वैसे ही पन्ने किताब में जुड़ते जाते हैं. होना एक दिन सब का हिसाब है,ज़िंदगी कर्मों से लिखी किताब है. कर्मों का फल तो देर-सवेर मिलना ही है. अच्छे कर्मों का नतीजा भी अच्छा ही मिलता है. कहते हैं कि धृतराष्ट्र बुरा आदमी नहीं था, फिर भी अंधा पैदा हुआ. कारण था 108 जन्म पहले बचपन में शरारत से फूल पर बैठी एक तितली की आंखों में कांटा चुभाना, जिससे वह अंधी हो गई. उसका फल उसे 108 जन्म बाद अंधे पैदा होने के रूप में मिला. जीवन एक किताब की तरह है, क्योंकि इसमें अलग-अलग अध्याय होते हैं. किताब में कुछ अध्याय दुख भरे होते हैं, कुछ सुख भरे. जीवन में भी ऐसा ही होता है, हमारे जीवन में सुख और दुख के पल आते हैं...