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विनय दामोदर सावरकर की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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      पहचान ही सबसे बड़ी होती है। इससे बड़ा नाम भी नहीं है। फिर भी पहचान सर्वोत्तम है। जो काम से मिलती है। यही काम ही पहचान के लिए होती है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-         आप सिर्फ पहचान पर टिके रहते हैं ! और काम छोड़ दें, तो पहचान भी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।आपका अस्तित्व हो खोने लगता है ! आश्रित हो अपने व्यक्तित्व को निखार नही सकते! आप में आत्मविश्वास के बजाए आलस्य कामचोरी अफ़सर राजशाही बदनीयती के गुण पनपने लगते है  ! आपकी गरिमायुक्त छवि क्षीण होने लगती हैं ! मय की भावना से ग्रसित दूसरों के प्रति अपना आत्मविश्वास खो देते है ! पहचान से मिलता है काम: जब आपका नाम, रुतबा, या साख बन जाती है, तो लोग खुद काम लेकर आते हैं। अमुक व्यक्ति है तो काम बढ़िया होगा वाला भरोसा। काम से मिलती है पहचान: जब आप मेहनत से अच्छा काम करते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी पहचान बनती है। काम बोलता है वाली बात सही दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। शुरुआत में आपको काम साबित करने के...

रिकार्ड स्तर पर पहुंचा देश का खाधान्न उत्पादन

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हरियाणा में 2780 पेट्रोल पंपों पर पाबंदी लागू होगी

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रिश्वत लेते एस एच ओ गिरफ्तार

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पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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            जो बीत गया। उसे भूलना ही अच्छा समझना चाहिए। तभी ‌आप आगे बढ़ सकतें हैं। यह व्यवस्था सभी को स्वीकार करनी चाहिए। आने वाले कल का स्वागत हमेशा होना चाहिए। तभी भविष्य उज्जवल होता है। यह नियम ही सकारात्मकता की ओर ले जाता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-      बीता हुआ कल इतिहास बन जाता है जिसे बदला नहीं जा सकता,याद करने पर केवल दुःख और पीड़ा ही मिलती है जिससे हमारा आज भी ख़राब हो जाता है मानसिक शान्ति में खलल पड़ता है व्यक्ति केवल पिछली बीती बातों में उलझा, धिरा रहता है। यदि हमारा बीता समय गलतियों से भरा हुआ हो तो पछतावे के स्थान पर उनमें सुधार की प्रवृत्ति को अपनाना श्रेयकर रहता है, बीता कल किताब के पन्ने में अंकित अध्याय का रूप ही है जिसे बंद कर के सदैव भविष्य दृष्टा बनना जरूरी है और नवल अध्याय की शुरुआत के लिए नवल पन्ने का चयन आवश्यक है और आने वाला कल हमारा भविष्य है जिसका स्वागत उत्साहपूर्वक करना चाहिए क्योंकि हमारा आने वाला कल अपने साथ ...