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केदारनाथ अग्रवाल स्मृति में चर्चा परिचर्चा
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कर्म ऐसा होना चाहिए। जिस से पहचान बन जाएं। यही कर्म का कमाल होना चाहिए। तभी वह कार्म सार्थक कहलाता है। जो भाग्य की सीढ़ी कहलाता है। इंसान की परिभाषा बन जाता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- मनुष्य का जीवन दो आधारों पर टिका होता है—कर्म और भाग्य। भाग्य हमें इस संसार में जन्म देता है, परिस्थितियाँ देता है, और एक दिशा प्रदान करता है। लेकिन केवल भाग्य ही सब कुछ नहीं होता। यदि मनुष्य कर्म न करे, तो उसका भाग्य भी निष्क्रिय रह जाता है।कर्म ही वह साधन है, जिससे मनुष्य अपनी पहचान बनाता है। एक साधारण व्यक्ति भी अपने परिश्रम, ईमानदारी और समर्पण से महान बन सकता है। इतिहास ऐसे अनेक उदाहरणों से भरा पड़ा है, जहाँ लोगों ने अपने कर्मों से अपनी अलग पहचान बनाई है।भाग्य हमें अवसर देता है, लेकिन उन अवसरों को सफलता में बदलना हमारे कर्म पर निर्भर करता है। यदि हम अपने कर्तव्यों को निष्ठा से निभाएँ, तो भाग्य भी हमारा साथ देने लगता है। यह सत्य है ...