क्षमा मांगने से क्षमा मिल जाए । यह कोई जरुरी नहीं है। यह पीड़ित पर निर्भर होता है कि क्षमा किया जाएं या नहीं! परन्तु क्षमा करने से अपराध नहीं मिटता है। यह सत्य है। फिर भी क्षमा मांगने की परंपरा चली आ रही है। जिसमें क्षमा करना अनिवार्य नहीं होता है। पीड़िता की भूमिका अहम रहतीं है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। जिसमें आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- हमारी पृथ्वी की सम्पूर्ण संरचना पाँच तत्व यथा जल, थल, अग्नि, वायु, आकाश से मिलकर बनी है । इन्हीं तत्वों से मिलकर हमारी देह, मस्तिष्क यहां तक की हमारी सोच भी इन्हीं से बनी है। इस पृथ्वी से कभी कुछ नष्ट नहीं होता,बस रूप परिवर्तित होता है। इसलिए हमारी आवाज, हमारे कर्म और हमारी सोच भी भिन्न-भिन्न रूपों में ब्रह्मांड में स्थायी रूप से मौजूद रहते हैं। गलती की माफी तो मिल सकती है लेकिन जो गलत कर्म हुआ या अपराध हुआ ,उसको जड़ से पूर्णतः साफ तो स्वयं भगवान भी नहीं कर सकते। उस पाप का प्रतिफल भी किसी न किसी रूप में पृथ्वी पर मौजूद है। क...