योगेश स्मृति में चर्चा परिचर्चा
. सत्य तो सत्य होता है। जो कभी छुपता है। सत्य खुद बोलता है। सत्य को कभी खोजना नहीं पड़ता है। यही सत्य पहचान है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- . सत्य केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यह वह प्रकाश है जो अज्ञान, भ्रम और असत्य के अंधकार को दूर करता है। जब हम कहते हैं कि “सत्य से बड़ा कुछ नहीं”, तो यह केवल एक नैतिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा है।भारतीय संस्कृति में सत्य को परम मूल्य माना गया है। “सत्यमेव जयते” का उद्घोष हमें यह सिखाता है कि अंततः जीत सत्य की ही होती है, चाहे असत्य कुछ समय के लिए कितना ही प्रभावी क्यों न दिखे। सत्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है, परंतु यही मार्ग आत्मशांति, विश्वास और स्थायी सम्मान की ओर ले जाता है। सत्य का पालन करने वाला व्यक्ति भीतर से निर्भय होता है। उसे किसी दिखावे या झूठ का सहारा नहीं लेना पड़ता। वहीं असत्य क्षणिक लाभ तो दे सकता है, परंतु अंततः वह व्यक्ति को अशांत और अस्थिर बना देता है। समाज में भी ...