" मंगल ! मुझे मालूम था तुम हर बार की तरह इस बार भी दुकान जरूर लगाओगे , लाओ इक्कीस दीये दे दो।" " जी साहब।" " अरे जग्गू बेटा ! साहब जी को इक्कीस दीये देना।" दस वर्षीय जग्गू के चेहरे पर असीम मुस्कुराहट हाथ मे दियो का पैकेट- " लिजिए अंकल ! पूरे इक्कीस दीये रख दिए हैं।" " शाबाश बेटा ! यह लो रुपए, पढ़ते हो ?" "जी अंकल ! पांचवी कक्षा मे हूं।" " बहुत बढ़िया , मन लगाकर पढ़ाई करना नही तो अपने पिता की तरह ही जिंदगी भर कुम्हार का काम करते रह जाओगे।" " जी अंकल!" दीये का पैकेट ले प्रमोद ने जैसे ही स्कूटर स्टार्ट की उसी वक्त मंगल उनके करीब आ हाथ जोड़ कहने लगा- " माफ करिएगा साहब जी ! आपसे एक बात कहना चाहता हूं।" " हां-हां कहो " "साहब जी !आज जो बात आपने जग्गू से कहीं फिर कभी मत कहिएगा ।" " क्यों , मैंने ऐसा क्या कह दिया जिससे तुम्हें बुरा लगा ?" " आपने एक बात तो बहुत अच्छी कही कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करना किंतु साथ ही आपने यह भी कहा कि- 'नहीं तो मेरी तरह कुम्ह...