भगवान से बड़ा कोई नहीं है। इंसान तो बहुत दूर की बात है। रहीं दौलत? कहते हैं कि भगवान से कम भी नहीं है। वास्तव में दौलत इंसान के लिए बहुत की आवश्यक यानी बहुत ही महत्वपूर्ण है यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:- इन संक्षिप्त पंक्तियों में जीवन का शाश्वत दर्शन समाहित है, जो मनुष्य को उसके वास्तविक मौलिक कर्तव्यों और मर्यादाओं का बोध कराता है। ईश्वर सृष्टि का मूल है, चेतना का आधार है और सत्य का सर्वोच्च स्वरूप है। मनुष्य उसकी अनुपम कृति अवश्य है, परन्तु सृष्टा से ऊपर नहीं हो सकता। जब इंसान इस सत्य को स्वीकार करता है, तभी उसके भीतर विनम्रता, कृतज्ञता और संतुलन का उदय होता है। यही गुण उसे श्रेष्ठ बनाते हैं, न कि उसका पद, प्रतिष्ठा या बाहरी वैभव। दूसरी ओर, धन-सम्पत्ति जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन है, किन्तु उसका स्थान मानवता से ऊपर नहीं हो सकता। यदि धन को सर्वोपरि मान लिया जाए, तो संवेदनाएँ, रिश्ते, नैतिक मूल्य और आत्मिक शांति सब कुछ पीछे छूट जाता है। धन ...