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पारंपरिक सैन्य क्षमताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थी

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हम से तीन - तीन मशीनें चलवाते हैं

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फ्रांस में प्रमुख उधोगपतियों से मिले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

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हरियाणा के पंचकूला नगर निगम फंड घोटाले में बड़ा एक्शन

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पाठकों के बीच में नेतराम भारती की लघुकथाएं

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       1. वेबसीरीज  'सिड! देख उधर कुछ चल रहा है वहाँ? चल देखें?'  'सिया! यार रोज़ देखता हूँ मैं इनके तमाशे l रोज़ साले कुछ न कुछ बहस करते रहते हैं l'  'एनीवे, लेट्स सी यार!' सिया ने कहा l 'उफ्फ! यार तुम भी न..... . I'  सिड बेमन- से उनकी बातें सुनने लगा l प्रतिदिन की भांति मॉर्निंग वॉक और प्राणायाम का सत्र निपटाकर पार्क की मखमली हरी घास पर अपने-अपने आसनों पर बैठे दो अधेड़ व्यक्ति बहस में निमग्न थे l 'तुम्हें क्या लगता है शर्मा! ये जो आजकल ओटीटी नाम का सांस्कृतिक हमला युवापीढ़ी पर हो रहा है, उस पर सेंसरशिप लगनी चाहिए या नहीं?'  'देख दिवाकर! परिवर्तन प्रकृति का नियम है l और समय की मांँग भी l आज इक्कीसवीं सदी में हम अठारहवीं शताब्दी के रहन-सहन, भाषा- बोली खानपान और मनोरंजन के साथ नहीं चल सकते l' 'लेकिन हम मलिन भाषा और मलिन दर्शन के साथ भी तो आगे नहीं बढ़ सकते न?'  दिवाकर ने कहा l 'भाई! मेरा तो सीधा- सा मत है कि जिस प्रकार और जिस तेजी से युवा पीढ़ी पतन के गर्त में धंँसती जा रही है उसके लिए यही ओट...

सहारे की राजनीति

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लघुकथा कसौटी - 01       सहारे की राजनीति पढ़ाई पूरी करने के बाद सोमेश नौकरी की तलाश में दर-दर भटकता रहा। हर जगह निराशा ही हाथ लगी। तभी राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और बेरोज़गारी भत्ता मिलने लगा। उसने राहत की साँस ली— “डूबते को तिनके का सहारा ही सही।” इसी बीच उसकी शादी ऐसी लड़की से हो गई, जो स्वयं भी बेरोज़गारी भत्ता पा रही थी। दोनों ने सोचा—अब कुछ बड़ा करना चाहिए। बैंक से दस लाख का ऋण लेकर उन्होंने कोचिंग सेंटर खोलने की योजना बनाई। कुछ पैसे कुर्सी-टेबल और सजावट में लगे, और बाकी से कार खरीद ली। कार में बैठकर वे रोज़ नए सपने बुनते, योजनाएँ बनाते और शहर में घूमते। पर सपने कागज़ से आगे बढ़ न सके। न अनुशासन था, न दिशा। धीरे-धीरे कोचिंग सेंटर सूना पड़ गया और अंततः बंद हो गया। अब सवाल था—बैंक की किश्त कैसे भरी जाए? तभी चुनाव की आहट सुनाई दी। दोनों जोश से प्रचार में जुट गए। सोमेश ने मुस्कुराकर पत्नी से कहा— “बस इस बार सरकार बदल जाए… सब ठीक हो जाएगा।” पत्नी ने भी आशा से सिर हिला दिया। उन्हें अब भी भरोसा था— अपनी गलती सुधारने से नहीं, सरकार बदलने से उनकी ...