राम गणेश गडकरी स्मृति में चर्चा परिचर्चा
दोस्तों ! आप ने कभी सोचा है कि मैं कौन हूं ? शायद आज से पहले कभी नहीं सोचा है। सिर्फ कर्म का खेल है। जो जन्म दर जन्म चलता रहता है यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- यह अटूट सत्य है कि हमारे कर्म ही हमारे विचारों और इरादों का दर्पण होते हैं जिनसे पता चलता है कि हम इस दूनिया में क्या भूमिका निभा रहे हैं जबकि हमारी आत्मा वह शुद्ध चेतना है जो हमारे कर्मों का अनुभव करती है तो आईये आज की चर्चा इसी बात पर करते हैं कि मैं कौन हूँ पूछो अपने कर्म से, मैं आत्मा हूँ पूछो अपने आप से, मेरा मानना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य और कर्तव्य व अच्छे कर्म से ही उस व्यक्ति का स्वभाव व चरित्र बनता है इसलिए स्वयं को पहचानने के लिए हमें अपने भीतर झाँकने की जरूरत है जबकि जीवन का सच्चा मार्ग हमारे कर्मों से तय होता है कहने का भाव निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्य का पालन करना ही हमारा सच्चा धर्म है,वास्तविक में हमारे द्वारा किए गए कर्म ही हमारा असली रूप दिखाते हैं यदि हमार...