मंजिल को पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। फिर भी कोई गारंटी नहीं है कि मंज़िल मिल जाएगी। कई बार तो बीच में ही हिम्मत जबाब दे जाती है। मुसाफिर सब कुछ सहन करता है कि मंज़िल मिल जाए। किस्मत वाला ही मंजिल को हासिल करता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है।अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:- मंज़िल का मिल जाना कभी आसान नहीं होता जनाब, क्योंकि हर रास्ता अपने साथ एक कीमत लेकर आता है। यह कीमत सिर्फ़ समय या मेहनत की नहीं होती, बल्कि कई बार भावनाओं, रिश्तों और सपनों की भी होती है। बाहर से देखने वाले अक्सर सिर्फ़ सफलता को देखते हैं, लेकिन उस सफलता तक पहुँचने की यात्रा में क्या-क्या खोया गया, यह केवल मुसाफ़िर ही जानता है। जीवन के सफ़र में कई मोड़ आते हैं, जहाँ इंसान को अपने ही मन से समझौता करना पड़ता है। कभी थकान उसे रोकने की कोशिश करती है, तो कभी हालात उसकी राहें कठिन बना देते हैं। ऐसे में हर कदम आगे बढ़ाना एक संघर्ष बन जाता है। कई बार अपने ही पीछे छूट जाते हैं - कुछ रिश्ते, कुछ इच्छाएँ...