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हरियाणा से सृजित लघुकथाएं

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क्रमांक‌‌ नं 48 पर लघुकथाएं :- लघुकथा - 1                 स्नेंह                                         पिता अपने चार-पाँच साल के बच्चे को पढ़ा रहे है - ओ से ओखली , परन्तु बच्चा ओ से नोकली कहता है । पिता बार-बार समझाता है परन्तु बच्चा ओ से नोकली ही कहता है। पिता को गुस्सा आ जाता है। जिस से बच्चे के मुंह पर चार- पाँच थप्पड़ जमा देता है । माँ अन्दर से चिल्लाती है         - ये क्या कर रहे हो ?         - मेरे समझने के बाद भी ओ से नोकली कह रहा है।         - बच्चे को कोई पीटा जाता है बच्चे को स्नेंह से सिखाया जाता है          और अब माँ बच्चे को पढाना शुरु करती है। स्नेंह से ही बच्चा एक दिन ...

ऑस्ट्रेलिया को 23 रन से हराया

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बांग्लादेश का नया सुल्तान

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हरियाणा में पेंशनरों को बड़ा तोहफा

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सरोजिनी नायडू स्मृति सम्मान - 2026

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          आलस्य किसी बड़ी बीमारी से कम नहीं है। जो दरिद्रता को जन्म देता है। जिसे गरीबी कहते हैं। हमेशा आलस्य से बचना चाहिए। तभी जीवन में तरक्की आतीं है। तरक्की के लिए परिश्रम यानी कर्म आवश्यक होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-      आलस्य दरिद्रता की कुंजी है यह बात बिल्कुल सत्य है। जहाँ आलस्य है वहाँ कर्म के प्रति निष्क्रियता है। श्रम ही नहीं है तो सफलता कहाँ मिलेगी। दुर्भाग्य का विस्तार होगा।धन के बिना गरीबी का साया पड़ेगा। अतः आलस्य मानव का सबसे बड़ा दुश्मन है। आलसी व्यक्ति के लिए समय का कोई महत्व नहीं। महात्मा बुद्ध ने भी यही कहा है कि आलसी व्यक्ति कभी आत्मविकास के बारे में नहीं सोच सकता। ऐसा व्यक्ति समाज, समुदाय और राष्ट्र के लिए कभी भी हितकारी नहीं माना जा सकता है। जीवन में उन्नति की राह पर अग्रसर होने के लिए आलस्य का त्याग अति अनिवार्य है। इसके अलावा हमारे कर्मों में ही भाग्य का निवास होता है। वर्तमान में अच्छे कर्म,पुरूषार्थ से  हम अप...

पैसों वालों का अपराध

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वैभव सूर्यवंशी

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