जैमिनी अकादमी द्वारा होली के अवसर पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। जो फेसबुक के साथ - साथ WhatsApp ग्रुप पर रखा गया है। जिसे ब्लॉग के माध्यम से पेश किया गया है। अनेक कवियों ने अपनी - अपनी रचनाएं ऑनलाइन पेश की है। सभी की रचनाएं एक से बढ़कर एक रहीं हैं। परन्तु मुख रूप से विषय के अनुकूल रचनाएं होना आवश्यक है। जो रचनाएं विषय के अनुकूल रहीं हैं। उन रचनाऒं को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। डिजिटल सम्मान के साथ - साथ रचनाएं पेश हैं :- बाजे है ढोल नगाड़े रे होली आई है होली आई रे बाजे हैं ढोल नगाड़े रे , रंगों में डूबी बृज की होली रे नाचे है राधा रानी कृष्णा रे फगुआं के गीत मतंग बहारे रे बसंती हवाओं में डूबी होली रे उड़ते हुए रंग गुलाल रे महकें है अमुआँ टेसुआ के फूल रे आम्रकुंज में कोयल की कूक रे फगुआँ के गीत संग नाचे मन मोर रे मधुबन में छाई पुरवैया सुहानी रे आई है होली आई रे बाजे है ढोल नगाड़े रे मोहनी रँग सजी नार नव...