चरित्र क्या है ? सबसे पहले इसे समझना चाहिए। चरित्र वह गुण है। जिस से पहचान बनती है। अच्छा चरित्र प्रभु समान होता है। रही बात संस्कार की । यह तो सब कुछ होता है। बाकी कर्म का परिणाम है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है।अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:- जहां चरित्र है वहां प्रभु है, जहां संस्कार है वहां सब कुछ है..... यह जीवन में व्यक्ति के सत्य को दर्शाता है। चूंकि चरित्र मनुष्य को उपर उठाता है वहीं संस्कार उसके जीवन को सुंदर बनाता है। चरित्र व्यक्ति के आचरण, व्यवहार और विचार से जाना जाता है, उसके लिए यह महत्व नहीं रखता कि वह कितना विद्वान,धनी और शक्तिशाली है। उज्जवल व्यक्ति का चरित्र उसकी ईमानदारी, करूणा, धैर्य, नैतिकता एवं सत्यता और विश्वास से भरा होता है ...और यही सत्य है जहां उपर्युक्त गुण होते हैं वहीं प्रभु का वास होता है। वहीं संस्कार वह विशेष गुण है जो हमें हमारे परिवार समाज और संस्कृति से मिलते हैं। बड़ों का सम्मान करना, छोटों से प्यार करना, सेवा, सत्य ...