ध्यान वह स्थिति है जिससे बड़े से बड़े ऋषि मुनियों ने तपस्या की है बड़ी से बड़ी ऋषि सिद्ध प्राप्त की हैं। जो ध्यान केंद्रित प्रणाली का प्रमुख स्रोत माना जाता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- ध्यान,वास्तव में मौन की स्थिति ही है। यह मौन केवल वाणी का ही नहीं,मन का भी होना चाहिए, मस्तिष्क का भी होना चाहिए तभी ध्यान संभव है। यदि यह अहसास रहे कि ध्यान लगा है तो सच मानिए आप मौन नहीं है और यह ध्यान नहीं,मात्र भ्रम है ध्यान का। इसीलिए कहा गया है कि मौन शांत दिमाग की स्थिति है।यह शांति भी इतनी गहन कि शांति होने का अहसास ही न हो। जिसके लिए 'शांतिरेव शांति' कहा गया है। ध्यान की स्थिति वह स्थिति है जिसमें जाने के बाद मानसिक और शारीरिक ताजगी मिलती है,तनाव समाप्त होता है,भय और चिंता गायब हो जाते हैं। इस मौन में, ध्यान में ही होता है ईश्वरीय साक्षात्कार और आत्म ज्ञान।मानव जीवन के विकास में ध्यान का बहुत महत्व है।यह मौन,ध्यान सहजता से उपलब्ध नहीं होता।यद...