हिन्दी' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 'सिंधु' शब्द से हुई है, जो आगे चलकर फारसी (ईरानी) संपर्क के माध्यम से इस भाषा का नाम बन गया। वर्ष 1918 में गांधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राजभाषा बनाने को कहा था। गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था। वर्ष 1949 में स्वतंत्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में इस प्रकार वर्णित है. राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतरराष्ट्रीय रूप होगा। इस निर्णय के बाद मूल हिंदोस्तानी बोली उर्दू के शकल से प्रतिस्थापित हो जाते हैँ। यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया, इसी दिन हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार व्यौहार राजेन्द्र सिंह का 50वाँ जन्मदिन था, इस कारण हिंदी दिवस के लिए इस दिन को श्रेष्ठ माना गया था। हालाँकि जब राष्ट्रभाषा के रूप में इसे चुना गया और लागू किया गया तो अहिंदी (जहाँ हिंदी कम या बिलकुल भी बोली नहीं जाती) भाषी राज...