सबसे पहले मधुरता का अर्थ समझना चाहिए। मेरी दृष्टि में विचारों का सुंदर होना चाहिए। यही विचारों को मधुरता कहां जा सकता है। बाकि रिश्तों की बात की जाएं तो मधुरता आवश्यक है। जिससे कटूता भी दूर की जा सकती है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोये, औरन को शीतल करे खुद भी शीतल होये, देखा जाए मनुष्य की वाणी ही रिश्तों में मधुरता लाती है बशर्ते वाणी मधुर हो नहीं तो कटू वचन से तो गहरे गहरे रिश्ते टूट कर चकनाचूर हो जाते हैं तभी तो कहा है, मधुर वचन हैं ओषधि कटुक वचन हैं तीर श्रवण द्वारा सांचरे सारे शक्ल शरीर कहने का भाव जब हम मीठी आबाज से किसी को पुकारते हैं तो सुनने वाला धनी हो जाता है और जो कार्य नहीं भी करना हो उसे भी हंसते हंसते कर देता है वोही कार्य अगर हम डांट कर लेना चाहें तो उल्टा कार्य बिगड़ता हुआ नजर आऐगा तो आईये आज की चर्चा को आगे ले चलते हैं कि मधुरता से रिश्ते मजबूत होते हैं और म...