सेवा का कोई मूल्य नहीं होता है। यह कार्य भगवान के चरणों में समर्पित होता है सेवा तो सेवा है। सेवा का मौका सभी को नहीं मिलता है । परन्तु कर्म से भाग्य बनता है। जो जीवन दर जीवन चलता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- वैलोपिल्लि श्रीधर मेनन जी की स्मृति में यह भाव अत्यंत प्रेरणादायी प्रतीत होता है कि निस्वार्थ सेवा और सच्चे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते। मनुष्य चाहे तत्काल सम्मान पाए या नहीं, परन्तु समय, प्रकृति और ईश्वर उसके प्रत्येक सत्कर्म का लेखा अवश्य रखते हैं। जो व्यक्ति मानवता, न्याय, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलते हैं, उनके प्रयास देर-सवेर जीवन में प्रकाश बनकर लौटते हैं। सेवा केवल प्रशंसा प्राप्त करने का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह आत्मा की पवित्रता और मानव धर्म की पहचान बन जाती है। उसी प्रकार कर्म केवल आज का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाले कल की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति है। भाग्य भी उन्हीं के द्वार पर दस्तक देता है जो संघर्...