आत्मा अमर है। जो जन्म व मृत्यु से ऊपर है। फिर शरीर ही जन्म लेता है और मृत्यु को प्राप्त होता है। परन्तु शरीर से ईश्वर प्राप्त होते हैं। दुनिया में सभी धर्म में प्रभु के कोई ना कोई नाम अवश्य प्राप्त होते हैं। बिना शरीर के नाम नहीं होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है :- जिस तरह से बिना आत्मा के यह शरीर पूर्ण नहीं है।मात्र माटी का पुतला है।ठीक उसी तरह से बिना शरीर के ईश्वर भी नहीं हैं अर्थात् ईश्वर की वंदना यह पवित्र शरीर करता है।यह शरीर ईश्वर का मंदिर है और अंतर्मन में ईश्वर का ही वास होता है। मानव के अपने पावन कर्म और लक्ष्य ही जो मानव या प्राणी के हित के लिए होते हैं,जिनका जीवन ही जन कल्याण को समर्पित होता है आगे चलकर अवतार के रूप में परिभाषित हो जाते हैं। - वर्तिक अग्रवाल 'वरदा' वाराणसी - उत्तर प्रदेश अगर हम आत्मा के बिषय पर बात करें तो आत्मा को ईश्वर का अमर अंश माना जाता है जो शरीर में प्रवेश कर उसे चेतन बनाती है और शरीर ...