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योगेश स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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.        सत्य तो सत्य होता है। जो कभी छुपता है। सत्य खुद बोलता है। सत्य को कभी खोजना नहीं पड़ता है। यही सत्य पहचान है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- .      सत्य केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यह वह प्रकाश है जो अज्ञान, भ्रम और असत्य के अंधकार को दूर करता है। जब हम कहते हैं कि “सत्य से बड़ा कुछ नहीं”, तो यह केवल एक नैतिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा है।भारतीय संस्कृति में सत्य को परम मूल्य माना गया है। “सत्यमेव जयते” का उद्घोष हमें यह सिखाता है कि अंततः जीत सत्य की ही होती है, चाहे असत्य कुछ समय के लिए कितना ही प्रभावी क्यों न दिखे। सत्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है, परंतु यही मार्ग आत्मशांति, विश्वास और स्थायी सम्मान की ओर ले जाता है। सत्य का पालन करने वाला व्यक्ति भीतर से निर्भय होता है। उसे किसी दिखावे या झूठ का सहारा नहीं लेना पड़ता। वहीं असत्य क्षणिक लाभ तो दे सकता है, परंतु अंततः वह व्यक्ति को अशांत और अस्थिर बना देता है। समाज में भी ...

1100 से अधिक भक्तों के साथ पहुंची अयोध्या

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राजनीति में फुलस्टॉप नहीं होता

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सरकार ने बिना किसी शर्त किया रिहा

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गुरबख्श सिंह ढिल्लों स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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      अशन्ति कभी भी अच्छी नहीं होती है। यह मन को विचलित करती है। जो बोझ की तरह सहना पड़ता है। इस का उपचार सिर्फ विचारों को नियंत्रण करने से है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-         अशांति मन पर बोझ है, विचारों से ही उपचार है...  यह बिल्कुल सत्य है। अशांति मन पर भारी बोझ की तरह ही है जो हमारे विचारों से ही उत्पन्न होती है किंतु विचार ही इसका इलाज है । यदि हम हमेशा अपने  नकारात्मक विचारों को मन में स्थान देकर हताश हो अपनी बीती नाकामयाबी, अपने दुखों को याद करते रहें तो मन अशांत तो होगा ही, किंतु इसकी जगह यह सकारात्मक विचारों को मन में लाएं, जीवन में मिली छोटी छोटी खुशियों को याद कर उसका आनंद ले तो हमारा मन कभी अशांत नहीं रहेगा। आजकल इसका भी इलाज है...। हमें योग वगैरह करना चाहिए, ईश्वर का ध्यान करना चाहिए, अकेले ना रहकर सब के साथ रहना चाहिए। क्रोध मन में ना आए इसका भी ध्यान रखना चाहिए। जीवन में अशांति आने से सब बिखर जाता है, हमें स्वयं सकारत्मकता लिए...