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राजा राममोहन राय की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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      नसीब यानि भाग्य से वह परिवार मिलता है। जो सिर्फ - सिर्फ आपके लिए होता है। उस परिवार को चलाने के लिए मौन रहना आवश्यक होता है। तभी परिवार चल पाता है। परिवार की अपनी समस्या होती है। उन का समाधान करने के लिए अपनी -अपनी क्षमता होती है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-          नसीब से परिवार मिलता है ... जिनका परिवार नहीं होता , या जिनकी परवर मैं किसी भी निजी कारण से , परवर के सदस्य एकसाथ नहीं रहते , उनसे जाकर पूछो परिवार का महत्व ! किस्मत वाले हैं वो व्यक्ति , जो अच्छे परिवार मैं रहते हैं  , व पतवार मैं सामंजस्य भी बना होता है !! निजी स्वार्थों के कारण लोग परिवार त्याग तो देते हैं , पर एक ऐसा मुकाम आता है , जब वे परिवार के लिए तरसते हैं  ,   अपनों के लिए तरसते हैं !! खुशियों की खोज मैं परिवार छोड़ रो देते हैं , पर जब खुशियां मिलती हैं , टो खुशी बांटनेवाला कोई नहीं होता !! परिवार मैं साथ भी होता है , और मतभेद भी! विवाद से , बहस से, तू तू म...

जैमिनी अकादमी समाचार पत्र : मई - 2026

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विदेश से लौटते ही दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया

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कॉकरोच से डर क्यों है ?

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संपति कुर्क - एफ आई आर के आदेश

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पद्मश्री शरद जोशी की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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      संघर्ष जीवन की महत्वपूर्ण क्रिया प्रतिक्रिया है। जो अकेला रहता है। वहीं जीवन का सत्य है। बाकि सफलता के सभी साझेदार यानि मित्र कहलाते हैं। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-       यह पंक्ति जीवन का एक कड़वा लेकिन शाश्वत सत्य बयान करती है। यह मनुष्य के स्वभाव, रिश्तों की परख और सफलता के मायने को एक ही झटके में उजागर कर देती है। 1. संघर्ष का एकांत:  असली परीक्षा की घड़ी संघर्ष वो तपती भट्टी है जहाँ इंसान का चरित्र गढ़ा जाता है। यहाँ कुछ बातें स्पष्ट हो जाती हैं:- परख का समय :  जब जेब खाली हो, राह कठिन हो और भविष्य धुंधला हो, तब भीड़ छंट जाती है। जो रिश्ते स्वार्थ पर टिके होते हैं, वो पहले टूटते हैं। "हर तरफ हर एक मंजर तल्खियों की जद में है" वाली स्थिति में सिर्फ़ अपने ही साथ खड़े दिखते हैं। आत्म-निर्भरता का पाठ :  अकेलापन हमें अपनी ताक़त से मिलवाता है। गीता में श्रीकृष्ण भी कहते हैं "उद्धरेदात्मनात्मानं" - अपना उद्धार स्वयं करो। संघर्ष के एकांत मे...