Posts

बुजुर्ग दंपति ने नहर में छलांग लगाई

Image
https://bijendergemini.blogspot.com/2026/05/2026_01038976152.html

बहरामजी मालाबारी की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

Image
          जीवन में त्याग बहुत महत्वपूर्ण होता है। बिना त्याग के कुछ भी सम्भव नहीं है। त्याग से जीवन में तरक्की सम्भव होती है। त्याग जीवन का आधार है। फिर भी सोच सब की अपनी अपनी है। बिना त्याग के इंसान नहीं बनता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-        इंसान बनने के लिए सर्वप्रथम हमें अपने ईगो (मैं )  की भावना का त्याग करना होगा। ईगो के आते ही हम स्वार्थ , ईर्ष्या , क्रोध , असंतोष , लालच  इत्यादि से घिर कर दूसरे के प्रति दया, करुणा, सेवा जैसे मानवीय भाव कर्मों से दूर हो जाते हैं और अति होने पर जानवर या फिर राक्षस बन जाते हैं । अतः सत्मार्ग  इंसान का है जिसके लिए काम, क्रोध ,लोभ बढ़ाने वाली कामनाओं की उपज स्थली मन को संयमित करते हुए त्यागपूर्ण जीवन व्यतीत करके एक सच्चे इंसान बनते हैं । फिर यही सब कर्मों के केंद्र में ईश्वर को साक्षी कर्ता मानें और स्वयं को केवल माध्यम । गीता में भगवान कृष्ण ने इसी प्रकार के कर्म कर्ता को श्रेष्ठ माना ...

टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी गुजरात देश का नेतृत्व करेगा

Image
https://bijendergemini.blogspot.com/2026/05/2026.html

सात सौ साल बाद भगवा हुआ भोजशाला

Image
https://bijendergemini.blogspot.com/2026/05/2026_01038976152.html

ऊर्जा संकट से दुनिया की उपलब्धि ख़तरे में

Image
https://bijendergemini.blogspot.com/2026/05/2026.html

मुल्तानी फिल्म : सज़ा

Image
        अमीर बुर्जुग पिता की कहानी है। जिसके दो बच्चे शादी शुदा है पत्नी मर चुकी है। बच्चों की पत्नी ने आपस में बंटवारा कर लेती है। पिता 15 -15 दिन दोनों बच्चों में बंट जाते हैं। फिर एक कप चाय ने ऐसा विवाद को जन्म दिया। पिता के दिल को बहुत बड़ी ठेस लगती है। अस्ली कहानी यहीं से शुरू होती है। जो कोठी व ओफिस तक बेच दिया जाता है। पिता श्मशान में रहना शुरू कर देता है। पूरा परिवार बिखर जाता है।          फिल्म परिवारिक अवश्य है। जो घर घर की कहानी का प्रतिनिधि करतीं हैं। लेखक की सोच कोई अलग नहीं है। संवाद के माध्यम से कहानी आगे बढ़ती है। संगीत काफी रोचक व सुंदर है। पानीपत के आसपास के क्षेत्रों का चित्रण को पेश किया गया है। बुजुर्ग पिता (कमल नयन वर्मा) की भूमिका के चारों ओर फिल्म घुमती है। बाकी भूमिका भी बहुत सुंदर है। नरेन्द्र गर्ग की एक्टिंग की भूमिका बहुत ही सराहनीय है। देव वर्मा का निर्देशन से फिल्म में चार चांद लग गए हैं।            काफी लम्बे समय के बाद मुझे किसी ...