परिवर्तन तो प्राकृतिक का नियम है। परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन होता है। जो कर्म से लेकर जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में कर्म की अहमियत बढ़ जाती है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- परिवर्तन ही जीवन का मूल स्वभाव है। जहाँ परिवर्तन होता है, वहीं से कर्म की शुरुआत होती है। स्थिरता जड़ता को जन्म देती है, जबकि परिवर्तन मनुष्य को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। कर्म ही जीवन का आधार है। बिना कर्म के जीवन निरर्थक हो जाता है। हमारे हर छोटे-बड़े कार्य ही हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम परिवर्तन को स्वीकार करें और उसे सकारात्मक कर्मों में बदलें, क्योंकि कर्म ही जीवन को सार्थक बनाता है। - डॉ. अर्चना दुबे 'रीत' मुंबई - महाराष्ट्र परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। जहाँ परिवर्तन नहीं, वहाँ जड़ता है; और जहाँ जड़ता है, वहाँ जीवन का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं। परिवर्...