सहनशीलता से बड़ा कोई आभूषण नहीं है। जो जीवन में कदम - क़दम पर साथ निभाता है। तथा बड़ी से बड़ी समस्या को हल कर देता है। फिर भी सहनशीलता के रास्ते पर नहीं चलता है। क्रोध किसी समस्या का समाधान नहीं है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है।अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- मैं यह हृदय तल से मानता हूँ कि “सहनशीलता मानवीय आभूषण होती है, परन्तु क्रोध मानवता का शत्रु है”—यह परिस्थितियाँ ही तय करती हैं। यह केवल एक नैतिक वाक्य नहीं, बल्कि उसी जीवन-दर्शन की प्रतिध्वनि है जिसे हेम बरुआ ने अपने कर्म, विचार और सार्वजनिक जीवन से सार्थक किया। वे असम के एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी, तेजस्वी वक्ता, लोकसभा के प्रभावशाली सांसद, "प्रजा सोशलिस्ट पार्टी" के प्रमुख नेता तथा संवेदनशील साहित्यकार थे, जिन्होंने लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और जनाधिकारों की रक्षा को अपने जीवन का ध्येय बनाया था, और इसी कारण उनकी वाणी में संयम था। परन्तु अन्याय के विरुद्ध स्पष्ट और निर्भीक प्रतिरोध भी था। अतः यह सत्य है कि सहनशीलता समा...