उद्देश्य और ज्ञान से कुछ भी किया जा सकता है। जो होगा। वह सकारात्मक अवश्य होगा । यही उद्देश्य और ज्ञान ही भाग्य में योगदान देते हैं। जीवन शैली का एकमात्र उपाय कर्म है । जो उद्देश्य और ज्ञान को परिभाषित करता है। भाग्य सिर्फ कर्म से बदला जा सकता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- जीवन के परिप्रेक्ष्य में उद्देश्य होना चाहिए, उसी के आधार पर कार्यों में प्रगतिशील बनता है और कर्म प्रधान होता चला जाता है। उद्देश्य के बिना कर्म संभव नहीं है, ज्ञान के बिना कर्म सफल नहीं है। वास्तविकता की झलक दिखाई पड़ती है। जब तक ज्ञान न हो कर्म हो ही नहीं सकता है। अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए हमें ज्ञान वीर बनना अति आवश्यक हो जाता है, जिसके बिना समस्त कार्य अधूरेपन में होने लग जाते है, जिसे पूर्णता की ओर अग्रसरित करना हमारा कर्तव्य हो जाता है..... - आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर" बालाघाट - मध्यप्रदेश ...