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पद्मश्री शरद जोशी की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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      संघर्ष जीवन की महत्वपूर्ण क्रिया प्रतिक्रिया है। जो अकेला रहता है। वहीं जीवन का सत्य है। बाकि सफलता के सभी साझेदार यानि मित्र कहलाते हैं। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-       यह पंक्ति जीवन का एक कड़वा लेकिन शाश्वत सत्य बयान करती है। यह मनुष्य के स्वभाव, रिश्तों की परख और सफलता के मायने को एक ही झटके में उजागर कर देती है। 1. संघर्ष का एकांत:  असली परीक्षा की घड़ी संघर्ष वो तपती भट्टी है जहाँ इंसान का चरित्र गढ़ा जाता है। यहाँ कुछ बातें स्पष्ट हो जाती हैं:- परख का समय :  जब जेब खाली हो, राह कठिन हो और भविष्य धुंधला हो, तब भीड़ छंट जाती है। जो रिश्ते स्वार्थ पर टिके होते हैं, वो पहले टूटते हैं। "हर तरफ हर एक मंजर तल्खियों की जद में है" वाली स्थिति में सिर्फ़ अपने ही साथ खड़े दिखते हैं। आत्म-निर्भरता का पाठ :  अकेलापन हमें अपनी ताक़त से मिलवाता है। गीता में श्रीकृष्ण भी कहते हैं "उद्धरेदात्मनात्मानं" - अपना उद्धार स्वयं करो। संघर्ष के एकांत मे...

बंगाल में फलता विधानसभा पर पुनर्मतदान आज

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प्रदीप मिश्रा की कथा में बबाल

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पानीपत में नहीं के बराबर हड़ताल

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साहित्य पल्लव सम्मान से सम्मानित बीजेन्द्र जैमिनी

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सुमित्रानंदन पंत की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

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        अधूरा ज्ञान व‌ अधूरा कर्म कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में अधूरेपन से बचना चाहिए। तभी सार्थक जीवन की कामना कर सकते हैं। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-         सुमित्रानंदन पंत की स्मृति में यह कहना अनुचित नहीं होगा कि मनुष्य के जीवन में अधूरा ज्ञान सबसे अधिक घातक सिद्ध होता है, क्योंकि आधी-अधूरी जानकारी व्यक्ति को सत्य से दूर ले जाकर भ्रम, अहंकार और गलत निर्णयों की ओर धकेल सकती है। इतिहास और समाज इस बात के साक्षी हैं कि जब ज्ञान विवेक, अनुभव और पूर्ण अध्ययन से रहित हो जाता है, तब वह निर्माण के स्थान पर विनाश का कारण बनता है। इसी प्रकार अधूरा कार्य भी कभी वास्तविक सफलता तक नहीं पहुंचता, क्योंकि बिना पूर्ण समर्पण, धैर्य और निरंतरता के किया गया प्रयास बीच मार्ग में ही अपनी सार्थकता खो देता है। प्रकृति का प्रत्येक नियम पूर्णता, संतुलन और निरंतर कर्म का संदेश देता है, इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह ज्ञान प्राप्ति में गहराई, सत्य और समझ को महत्व ...