कर्म से बड़ा कुछ नहीं होता है। कर्म ही जीवन है। जो जीवन की परिभाषा बनता है। अथवा भाग्य बनता है। जिसे जीवन कहते हैं। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- अगर मानव जीवन की बात करें तो मानव जीवन सीधा - सीधा कर्म पर निधार्रित करता है कहने का भाव कर्म और जीवन का गहरा संबंध है क्योंकि मानवीय क्रिया ही हमारे वर्तमान और भविष्य को निधार्रित करती है, देखा जाए इंसान शारिरिक, मानसिक या भावात्मक रूप से निरंतर कर्म करता रहता है और उन्हीं कर्मों के कारण फल भोगता है तो आईये आज इसी चर्चा को आगे बढाने का प्रयास करते हैं कि कर्म का सत्य जीवन है और यही भाग्य है यही जीवन है, मेरे ख्याल में कर्म ही जीवन का आधार, उदेश्य और वास्तविकता है, हमारे द्वारा किए गए कार्य , विचार और शब्द ही हमारे चरित्र का निर्माण करते हैं, वर्तमान को आकार देकर भविष्य का निर्माण करते हैं इसलिए सच्चा जीवन कर्म करने में ही है न कि कर्महीन रहने में मगर याद रखें नेक कर्म...