आज के समय में लघुकथा साहित्य बहुत व्यापक है। परन्तु लघुकथा संकलन का संपादन करना उतना ही कठिन है। फिर भी लघुकथा - 2018 , लघुकथा - 2019 , लघुकथा - 2020 , लघुकथा - 2021 , लघुकथा - 2022 , व लघुकथा - 2023 , लघुकथा - 2024 की अपार सफलता के बाद लघुकथा - 2025 का सम्पादन किया गया है । जो आपके सामने ई - लघुकथा संकलन के रूप में है । लघुकथाकारों का साथ मिलता चला गया और ये श्रृंखला कामयाबी के शिखर पर पहुंच गई । वास्तव में ये अग्निपरीक्षा का कार्य है। जिससे सफलता के चरण विभिन्न हो सकते हैं । परन्तु सफलता तो सफलता है । कुछ का साथ टूटा है कुछ का साथ नये - नये लघुकथाकारों के रूप में बढता चला गया । समय ने बहुत कुछ बदला है । फिर भी कुछ खट्टे - मीठे अनुभव ने बहुत कुछ सिखा दिया । परन्तु कर्म से कभी पीछे नहीं हटा..। स्थिति कुछ भी रही हो । यही कुछ जीवन में सिखा है । लघुकथा का स्वरूप भी बदल गया है। जो समय की मांग या जरूरत कह सकते हैं। परिवर्तन, प्रकृतिक का नियम है। जिसे नकारा नहीं जा सकता है। एक तरह से देखा जाए तो ये लघ...
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ReplyDeleteप्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ. श्याम सिंह ‘शशि’ अब हमारे बीच नहीं रहे!
पूर्व महानिदेशक, प्रकाशन विभाग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार एवं नागरी लिपि परिषद के संरक्षक और प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि आज अपराह्न में, स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर गए हैं। भाषा, साहित्य और लिपि के लिए समर्पित ऐसा विद्वान मिलना असम्भव है। हिंदी और अंग्रेजी साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
वे बड़े शिष्ट, सहज, कुशल एवं सहयोगी व्यक्तित्व के थे! मेरा उनका परिचय 1972 से था! सदैव सम्पर्क में रहे!
जब भी मेरा भारत जाना हुआ पिछले 27 वर्षों से उनसे मिलना होता रहा। साहित्य, सृजन, अध्यात्म, समाज, विश्व, आदि पर सदैव विचार विनिमय हुआ! उनका मार्गदर्शन मिलता रहा। पुस्तकें पत्रिकाएँ परस्पर साँझा करते रहे। व्हाट्सएप पर संदेशों का आदान प्रदान होता रहा!
आज उनके जाने से हम सब लोग मन ही मन दुखी हैं!
परमात्मा से मिल कर उनकी परम आत्म परमानंद पाए और महाविश्व को आनन्द देती रहे!
भावभीनी विनम्र श्रद्धांजलि
ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति!!!
विनीतः
गोपाल बघेल ‘मधु’
अखिल विश्व हिंदी समिति
आध्यात्मिक प्रबंध पीठ
मधु प्रकाशन
टोरोंटो, ओन्टारियो, कनाडा
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( WhatsApp से साभार))