वर्तमान में सबसे अधिक लघुकथा पढ़ीं जा रही है । यहीं सबसे बड़ी उपलब्धि है । लघुकथा पर विभिन्न कार्य हो रहें हैं । सभी की अपनी सफलता है । अभी हाल में भारतीय लघुकथा विकास मंच के माध्यम से श्रृंखला शुरू की है । जिसमें मध्यप्रदेश के प्रमुख लघुकथाकार ( ई लघुकथा संकलन ) , हरियाणा के प्रमुख लघुकथाकार ( ई लघुकथा संकलन ) , मुम्बई की प्रमुख हिन्दी महिला लघुकथाकार ( ई लघुकथा संकलन ) की सफलता के बाद " हिन्दी की प्रमुख महिला लघुकथाकार " (ई लघुकथा संकलन ) तैयार किया है । जिसमें इक्कीस लघुकथाकारों की , प्रत्येक की ग्यारह लघुकथाएं दी गई है । इस प्रकार से इक्कीस परिचय के साथ 231 लघुकथाएं हैं । जो बारह राज्यों की हिन्दी की इक्कीस महिला लघुकथाकार हैं । जो अब तक के मेरे सम्पादन में सबसे बड़ा लघुकथा संकलन है । लघुकथा अपने आपमें सम्पूर्ण साहित्य है । जो पाठक से लेकर शोंध कार्य में सफलता अर्जित कर रहा है । फिर भी कुछ लोगों ने लघुकथा में कुछ मापदंड बना रखें है । वहीं लोग इन मापदंड का पालने नहीं करते हैं । फिर वे मापदंड किसके लिए बनतें हैं ? फिर भी इस ई- लघुकथा संकलन में सभी ...
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ReplyDeleteप्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ. श्याम सिंह ‘शशि’ अब हमारे बीच नहीं रहे!
पूर्व महानिदेशक, प्रकाशन विभाग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार एवं नागरी लिपि परिषद के संरक्षक और प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि आज अपराह्न में, स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर गए हैं। भाषा, साहित्य और लिपि के लिए समर्पित ऐसा विद्वान मिलना असम्भव है। हिंदी और अंग्रेजी साहित्य जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
वे बड़े शिष्ट, सहज, कुशल एवं सहयोगी व्यक्तित्व के थे! मेरा उनका परिचय 1972 से था! सदैव सम्पर्क में रहे!
जब भी मेरा भारत जाना हुआ पिछले 27 वर्षों से उनसे मिलना होता रहा। साहित्य, सृजन, अध्यात्म, समाज, विश्व, आदि पर सदैव विचार विनिमय हुआ! उनका मार्गदर्शन मिलता रहा। पुस्तकें पत्रिकाएँ परस्पर साँझा करते रहे। व्हाट्सएप पर संदेशों का आदान प्रदान होता रहा!
आज उनके जाने से हम सब लोग मन ही मन दुखी हैं!
परमात्मा से मिल कर उनकी परम आत्म परमानंद पाए और महाविश्व को आनन्द देती रहे!
भावभीनी विनम्र श्रद्धांजलि
ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति!!!
विनीतः
गोपाल बघेल ‘मधु’
अखिल विश्व हिंदी समिति
आध्यात्मिक प्रबंध पीठ
मधु प्रकाशन
टोरोंटो, ओन्टारियो, कनाडा
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( WhatsApp से साभार))