बलराज साहनी की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

         दुनियां एक ब्राह्माड़ है। जिसमें अनेक ग्रह है। सब की अपनी - अपनी गति है है। जो दुनियां में अपनी पहचान रखते हैं। क्या इन सबसे बड़ा भी कोई है। शायद कोई नहीं है। परन्तु विचारों से बड़ा कोई नहीं है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
     देखा जाए ब्रह्मांड और विचारों का संबंध,  गहरा और ऊर्जा आधारित है जबकि विचार सुक्ष्म ऊर्जा है जो ब्रहम्डिय चेतना का हिस्सा माना जाता है कि मनुष्य जैसा सोचता है बैसा ही बन जाता है अध्यात्मिक रूप से कहा जाता है क् संपूर्ण ब्रह्मांड मानव मन में ही समाहित है, तो आईये आज की चर्चा इसी बात से आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं कि ब्रह्माण्ड से बड़ा नहीं कोई और विचारों से भी बड़ा नहीं कोई मेरा मानना है कि मनुष्य का मन और उसके विचार असीम हैं जबकि विचार की तरंगें ऊर्जा की तरह कार्य करती हैं और ब्रह्मंड के रहस्य को समझने की क्षमता रखती हैं यह भी सत्य है कि ब्रह्मंड विचार से  प्रकट होता है इसलिए हम न केवल अपनी तकदीर के ही बल्कि ब्रह्मंड के भी निर्माता हैं जबकि व्रह्मांड में समय स्थान , पदार्थ, ऊर्जा , ग्रह इत्यादि शामिल हैं,  यह भी सत्य है कि  मनुष्य का मन और विचार असीम हैं और यह भी सत्य है कि ब्रह्माण्ड विचार से प्रकट होते हैंं इसलिए ब्रह्माण्ड और विचार दोनों बडे़ ही हैं  क्योंकि इनकी कोई सीमा नहीं होती। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

        ब्रह्मांड की विशालता हमें अक्सर चकित करती है—अनंत आकाश, असंख्य तारे, और समय की असीम धारा। परंतु यदि हम ठहरकर अपने भीतर झाँकें, तो महसूस होता है कि विचारों की दुनिया इससे भी कहीं अधिक व्यापक है। ब्रह्मांड बाहरी है, पर विचार आंतरिक; और जो भीतर है, वही सृजन का वास्तविक स्रोत बनता है। मनुष्य का विचार किसी सीमा में बंधा नहीं होता। वह पलों में आकाश पार कर सकता है, बीते समय को फिर से जी सकता है और आने वाले कल की कल्पना कर सकता है। यही विचार हैं जो एक साधारण मनुष्य को असाधारण बना देते हैं—कभी कवि, कभी वैज्ञानिक, तो कभी एक स्वप्नद्रष्टा। जहाँ ब्रह्मांड स्थिर नियमों से चलता है, वहीं विचार स्वतंत्रता का प्रतीक हैं।विचारों की शक्ति ही है जो अंधकार में भी प्रकाश खोज लेती है। एक सकारात्मक सोच टूटे हुए मन को संबल दे सकती है, और एक नकारात्मक विचार सजीव आत्मा को भी निर्जीव बना सकता है। इसलिए कहा जा सकता है कि विचार केवल हमारे मन का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की दिशा तय करने वाली ऊर्जा हैं। अंततः, ब्रह्मांड हमें बाहर की अनंतता का अनुभव कराता है, पर विचार हमें भीतर की अनंतता से परिचित कराते हैं। और शायद यही कारण है कि विचारों की उड़ान ब्रह्मांड से भी ऊँची मानी जाती है—क्योंकि वे न केवल संसार को देखते हैं, बल्कि उसे बदलने की क्षमता भी रखते हैं।

- अलका पांडेय 

मुंबई - महाराष्ट्र 

      इस दुनिया में ब्रह्मांड बड़ा है, लेकिन विचार भी बड़ा है।कहने का तात्पर्य यह है कि सृष्टि ही ब्रह्मांड में हुई है। लाज़िमी है,वह बड़ा है।संसार के अंदर जिसके विचार जीवित हैं,वे वास्तव में बड़े हैं,आदरणीय हैं,सर्वोपरि हैं।फिल्मी दुनिया में बलराज साहनी भी एक ऐसे ही शख़्स थे,जिनके विचार अमूल्य थे।वे आज भी हमसब के लिए जीवंत हैं।वे हमारे मार्गदर्शक थे।

- दुर्गेश मोहन 

 पटना - बिहार

       यह कथन हमें दो स्तरों पर सोचने के लिए प्रेरित करता है—एक बाह्य संसार का और दूसरा आंतरिक चेतना का। ब्रह्माण्ड अपनी विशालता, अनंतता और रहस्यों के लिए जाना जाता है। इसमें अरबों आकाशगंगाएँ, अनगिनत तारे और ग्रह हैं। मानव बुद्धि आज भी इसके सम्पूर्ण विस्तार को पूरी तरह समझ नहीं पाई है। इस दृष्टि से कहा जाता है कि ब्रह्माण्ड से बड़ा कुछ नहीं है। लेकिन दूसरी पंक्ति—“विचारों से भी बड़ा है कोई”—हमें एक और गहन सत्य की ओर ले जाती है। विचार ही मानव सभ्यता की नींव हैं। हर खोज, हर आविष्कार, हर परिवर्तन पहले विचार के रूप में जन्म लेता है। विचार ही मनुष्य को सीमाओं से परे ले जाते हैं। कभी यही विचार क्रांति बनते हैं, तो कभी सृजन की नई दिशा तय करते हैं।वास्तव में, विचारों की शक्ति इतनी विशाल है कि वे पूरे समाज और इतिहास को बदल सकते हैं। एक छोटा-सा विचार भी बड़े परिवर्तन का कारण बन सकता है। इसलिए कहा जाता है कि मनुष्य का वास्तविक विस्तार उसके विचारों में छिपा होता है।यदि ब्रह्माण्ड बाहरी अनंतता का प्रतीक है, तो विचार आंतरिक अनंतता का। दोनों की तुलना करना कठिन है, क्योंकि ब्रह्माण्ड भौतिक विस्तार है, जबकि विचार मानसिक और चेतन शक्ति का रूप हैं। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ब्रह्माण्ड की विशालता हमें विस्मय से भर देती है, पर विचारों की शक्ति हमें निर्माण और परिवर्तन की क्षमता देती है। इसलिए मनुष्य को अपने विचारों को सकारात्मक, रचनात्मक और व्यापक बनाना चाहिए, क्योंकि वही उसके जीवन और समाज की दिशा तय करते हैं।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

      हमें सिर्फ जन्म और मृत्यु के साथ एक निर्धारित और सीमित जिंदगी मिली है। इस अवधि में हमें जीना भी है और कर्म भी करना है। इस जगत में हम अकेले भी नहीं है। हमारे ही समकक्ष अनेक स्त्री-पुरुष और प्राणी और वनस्पति हैं। यानी पूरा ब्रम्हांड है। जिससे बड़ा कोई हो, इसकी कोई संभावना नहीं। यही सर्वमान्य है। हम तो इस जगत के अदना जीवधारी हैं। हाँ, एक विशेषता जरूर है जो अन्य प्राणियों और वनस्पतियों से हटकर है वह है हमारे मस्तिष्क में चर रहे विचारों का अतिरेक। जिन्हें हम कार्यान्वित भी कर सकते हैं और प्रस्तुत भी। यह खूबी अन्य में नहीं। हमारे मस्तिष्क में विचारों की श्रंखला सतत चलती रहती है। हम में यह सामर्थ्य है कि हम अपने विचारों को प्रगट कर सकते हैं और अपने मनमाफिक सृजित भी कर सकते हैं। हम बड़ा से बड़ा सोच भी सकते हैं और उसके अनुरूप हासिल भी कर सकते हैं। अत: यह कहना कोई अनुचित भी नहीं और न ही अतिशयोक्ति कि     " ब्रम्हांड से बड़ा नहीं है कोई।"

" विचारों से भी बड़ा है कोई।"

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

    विशाल ब्रम्हांड में विचारों की श्रृंखला युगों युगों से श्रृंखलाबद्ध है। ब्रम्हांड से बडा़ क्षितिज भ्रम हम आम लोगों को भ्रमित करता है। चाँद तारे सूर्य मंडल ग्रह नक्षत्रों की आपसी मैत्री इइस संसार का संचालन करती है। सत्य है कि ब्रम्हांड से बड़ा कुछ नहीं कोई नहीं है। लेकिन विचारों की गति सौर मंडल से भी पार पहुंचती है। विचारों से बड़ा होता है मन जिसकी गति अतुल्य अगणित है - - उसकी गणना असंभव है। आज तक ऐसा कोई साधन नहीं बना है जो विचारों की गति को नाप सके। मानव ने  राईटबंधुओं ने हवाईजहाज की संरचना की। आज आसमान में गति को मात करते साधन मौजूद हैं लेकिन ईश्वरीय सत्ता को कोई चुनौती नहीं दे सकता। विचारों की गति को आज तक कोई नहीं बूझ नहीं सका है। तात्पर्य यही कि हम स्वयं को इस सृष्टि का अणुपरमाणु मात्र माने वह भी असंभव है। "हम है कि कुछ भी नहीं हैं "बस यह वेदवाक्य ध्यान रखें और अपनी-अपनी भूमिका में प्रसन्न रहें - - ।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर -  महाराष्ट्र 

      ब्रह्मांड से बड़ा कुछ भी नहीं है. सारी सृष्टि इसी ब्रह्मांड में समाई हुई है. या यों कहें इसमें और  बहुत सारी सृष्टि समा सकती है. लेकिन विचारों से बड़ा कोई नहीं हो सकता. विचारों का फैलाव बहुत होता है. इसमें कई-कई ब्रह्मांड समा सकते हैं. हम अनगिन ब्रह्मांड की कल्पना कर सकते हैं. विचारों की कोई सीमा नहीं होती है. इसलिए हम कह सकते हैं कि विचारों से बड़ा ब्रह्मांड ही है. हम विचारों से लाखों ब्रह्मांड बना सकते हैं. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता‌ - पश्चिम बंगाल 

      इस सम्पूर्ण विश्व में, भिन्न भिन्न प्रकार के जीव रहते हैं , छोटे से लेकर बड़े , साधारण से लेकर असाधारण , सरल से लेकर जटिल , अद्भुत से लेकर अविश्वसनीय !! जीवों मैं आते है समस्त प्राणी , पेड़ , पौधे  !!  प्राणियों मैं एक कोशिकीय प्राणी से लेकर अनेक  कोशिकीय , सरल से लेकर जटिल , सब आते हैं ! ये सब धरती पर रहते हैं , नदी , नालों , पहाड़ों , ऋतुओं , बादलों , सहित !! ऊपर आसमान , सूर्य , चंद्रमा , समस्त प्रकृति , पर्यावरण सहित !! समस्त उल्लेखित वस्तुओं को मिलाकर बनता है ब्रह्मांड , अतः ब्रह्मांड से बड़ा कुछ नहीं !!व्यक्ति के मन मैं जो विचार आते हैं , अच्छे या बुरे , व्यक्ति उनके अनुरूप कार्य करता है !! हर व्यक्ति अपने जीवन मैं , जीने के लिए कार्य करता है , कर्म करता है , जो उसके मन मैं उत्पन्न विचारों से ही प्रेरित होते हैं !! यहां महत्वपूर्ण बात यह भी है कि मनुष्य के विचार , जीवन ,सब का संचालन , एक अदृश्य शक्ति करती है , जिसे सब अलग नामों से जानते हैं , चाहे राम कहो या रहीम ! अतः , समस्त ब्रह्मांड में, समस्त क्रियाकलापों का संचालन ,ईश्वरीय शक्ति से ही होता है !विचारों से बड़ा है विचारों को प्रेरित व संचालित करनेवाला ,जिसे अलग अलग नामों से जाना जाता है !!

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

      सृष्टिकाल की रचना ब्रह्मांड ने की है, जहाँ हम वृहद रुप में जीवन यापन एकाग्रचित होकर कर रहे है। जहाँ ब्रह्मांड से बड़ा नहीं है कोई, विचारों से भी बड़ा है कोई। वास्तविक पहचान है। हम अपने आपको ज्ञानवर्धक समझने लग जाते है, विचार धाराऐं विचलित हो जाते है, जिसके परिप्रेक्ष्य में हमारी सफलता रुक जाती है, जहाँ हम थोकरे खाते फिरते रहते है। इसलिए अपनी वाणी पर संयम रखते हुए, अपने व्याकांश को प्रगट करना चाहिए.....।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

     बालाघाट - मध्यप्रदेश

      ब्रह्मांड से बड़ा नहीं है कोई यह सत्य हमें विनम्र बनाता है। अनंत आकाश, असंख्य ग्रह-नक्षत्र, और समय की असीम धारा… सब मिलकर बताते हैं कि अस्तित्व कितना विराट है। मनुष्य उसमें एक छोटा-सा अंश भर है, पर यही छोटा-सा अंश अपनी चेतना और विचारों के कारण अद्भुत बन जाता है। विचारों से भी बड़ा है कोई, वह है हमारी आत्मा, हमारी अनुभूति, जो विचारों को जन्म देती है। विचार सीमित हो सकते हैं, बदल सकते हैं, भटक सकते हैं; लेकिन भीतर की चेतना स्थिर और गहरी होती है। वही हमें दिशा देती है, सही-गलत का बोध कराती है और हमें ब्रह्मांड से जोड़ती है। इसलिए, जहाँ एक ओर हमें ब्रह्मांड की विशालता का सम्मान करना चाहिए, वहीं अपनी चेतना की गहराई को भी समझना चाहिए। क्योंकि इंसान की असली शक्ति न उसके आकार में है, न उसके ज्ञान में, बल्कि उसके भीतर बसे उस सत्य में है, जो विचारों से भी परे है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

      बलराज साहनी जी की स्मृति में उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मैं यह हृदय से अनुभव करता हूँ कि—"ब्रह्मांड से बड़ा नहीं है कोई, विचारों से भी बड़ा है कोई।" यह मात्र दो पंक्तियों के प्रश्न नहीं, बल्कि मानव चेतना के विराट स्वरूप का उद्घोष हैं अर्थात चुनौतियों का पुलिंदा हैं। ब्रह्मांड अपनी अनंतता, रहस्यमयता और विस्तार के कारण हमें विस्मित करता है, परंतु उससे भी अधिक आश्चर्यजनक है मनुष्य का विचार। ब्रह्मांड स्वयं स्थिर नियमों में बंधा है, किन्तु विचार उन नियमों को समझने, चुनौती देने और नई दिशाएँ निर्मित करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। बलराज साहनी केवल अभिनेता नहीं थे; वे विचारों के महायात्री थे। उन्होंने सिद्ध किया कि मनुष्य की वास्तविक ऊँचाई उसकी देह, पद, संपत्ति या प्रसिद्धि में नहीं, बल्कि उसकी सोच की व्यापकता, संवेदनशीलता और साहस में निहित होती है। जिस व्यक्ति के विचार सीमाओं को लांघ जाते हैं, उसके लिए भूगोल छोटा पड़ जाता है और समय स्वयं उसके चरणों में ठहर जाता है। सच तो यह है कि ब्रह्मांड तारों से जगमगाता है, किन्तु विचार सभ्यताओं को प्रकाशित करते हैं; ग्रह और नक्षत्र केवल अस्तित्व देते हैं, पर विचार अस्तित्व को अर्थ प्रदान करते हैं। यही कारण है कि एक महान विचारक अपनी मृत्यु के बाद भी जीवित रहता है, जबकि असंख्य तारे जन्म लेकर विलीन हो जाते हैं। बलराज साहनी का जीवन हमें यह सिखाता है कि मनुष्य तब महान नहीं बनता जब वह संसार को जीत लेता है; वह तब महान बनता है जब वह अपने विचारों से संसार का हृदय जीत लेता है। उनके विचारों की ऊष्मा आज भी समाज को दिशा देती है, अन्याय को चुनौती देती है और मानवता को उसका वास्तविक स्वरूप दिखाती है। वास्तव में, ब्रह्मांड की विशालता आँखों को चमत्कृत करती है, पर महान विचार आत्मा को जागृत कर देते हैं, और जब आत्मा जागृत हो जाए, तब मनुष्य स्वयं चलता-फिरता ब्रह्मांड बन जाता है। बलराज साहनी ऐसे ही जाग्रत आत्मा थे—एक अभिनेता, एक चिंतक, एक युगद्रष्टा। उन्हें स्मरण करना केवल एक कलाकार को याद करना नहीं, बल्कि विचारों की उस ज्योति को प्रणाम करना है जो युगों तक बुझती नहीं। जहाँ ब्रह्मांड समाप्त होता है, वहाँ से महान विचारों की यात्रा प्रारम्भ होती है, और बलराज साहनी उस यात्रा के अमर पथिक थे। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

      यह बात सर्वमान्य है कि ब्रह्मांड से बड़ा कोई नहीं है। इस ब्रह्मांड में सारा जगत ,हम, आप ,जीव -जंतु,नदिया ,सागर ,वृक्ष ,सरोवर सभी समाये हुए हैं ।देवीय अस्तित्व भी इसी में और असुर का अस्तित्व भी इसी में।सारी विद्या ,सारे कार्यकलाप शुभ लाभ  यहीं। अतः ब्रह्मांड से बड़ा कोई नहीं। लेकिन वहीं अगर हम विचार के संबंध में सोचते हैं तो विचार से बड़ा भी कोई नहीं। मानव मस्तिष्क जब चलता है, निरंतर विचार चलते रहते हैं। अनेक प्रकार के भाव मन में आते, उठते ,खत्म होते और फिर नए सिरे से सृजन करते जाते हैं। तब हम कह सकते हैं कि विचार से भी बड़ा कोई नहीं। यदि इंसान अपने बुद्धि विवेक से निरंतर विचार करता रहे, प्रयत्नशील रहे तो विचार कभी थमते नहीं और जब कभी थमना बंद नहीं होगा तो निरंतर प्रगति होती ही रहेगी और विचार का ब्रह्मांड भी बढ़ता रहेगा ।

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर -  मध्य प्रदेश 

      पूरी सृष्टि, आकाशगंगा, तारों से बड़ी कोई चीज़ नहीं। ब्रह्मांड सबसे विशाल सबसे अंतिम सीमा है ! पृथ्वी विचारों से भी बड़ा है कोई लेकिन इंसान के विचार, उसकी सोच, उसकी कल्पना ब्रह्मांड से भी बड़ी है। क्योंकि विचार में ही ब्रह्मांड समा जाता है हमारा मन, हमारी चेतना इतनी बड़ी है कि उसमें करोड़ों ब्रह्मांड बनते-बिगड़ते हैं। आप आँख बंद करके एक पल में चाँद पर पहुंच जाते हो, यही विचार की ताकत है।बुजुर्गों का अनुभव ब्रह्मांड जैसा विशाल पर उनके विचार, उनकी सीख उस ब्रह्मांड से भी बड़े। क्योंकि एक विचार पूरी पीढ़ी बदल देता है।ब्रह्मांड नाप लिया विज्ञान ने, पर मन नाप सका,विचारों की उड़ान के आगे आकाश भी छोटा लगता है ।इस पूरी सृष्टि, आकाशगंगा, तारों से बड़ी कोई चीज़ नहीं। ब्रह्मांड सबसे विशाल, सबसे अंतिम सीमा।

शब्दों की सीमा में बंधता नहीं वो,  

मौन की गहराई में खड़ा है कोई।

सितारों को गिन ले ये आँखें मगर,  

सपनों का आकाश गढ़ता है कोई।

बुजुर्गों की स्मृति में युग बसते हैं,  

अनुभव का इतिहास पढ़ता है कोई।

झुकी कमर में हिमालय-सा धीरज,  

झुर्रियों में वेद रचता है कोई।

तजुर्बे की स्याही से लिखे पन्नों पर,  

नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ता है कोई।

है? 

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

" मेरी दृष्टि में" विचारों की अलग दुनियां है। जिस का कोई अंत नहीं होता है और ना ही कभी होगा। फिर विचार तो विचार हैं। कहते हैं कि विचारों से दुनिया है। विचार नहीं तो दुनियां की कल्पना करना , अपने आप एक बेईमानी है। यह अटल सत्य है।

               - बीजेन्द्र जैमिनी 

           (संचालन व संपादन)


Comments

  1. बृहद है ब्रह्मांड मगर उससे भी बड़ा है विचार ब्रह्मांड । लगाते रहें उसमें गोते और ढूंढ़ें विचारों के नव मोती।

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  2. आदरणीय,
    जैमिनी अकादमी, पानीपत (हरियाणा) द्वारा महान फिल्म अभिनेता बलराज साहनी जी की स्मृति में प्रदान किए गए इस सम्मान से सम्मानित होकर मेरा हृदय भावनाओं से भीग उठा है।
    यह केवल एक सम्मान नहीं, प्रत्युत मेरे सृजन-पथ पर मिला वह स्नेहिल स्पर्श है, जो आगे बढ़ने की शक्ति और विश्वास देता है। इस सम्मान के साथ जुड़ी गरिमा और स्मृतियाँ मेरे लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेंगी।
    मैं हृदय की गहराइयों से अकादमी के सभी आदरणीय सदस्यों, निर्णायक मंडल एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करती हूँ, जिन्होंने मेरी साधारण-सी लेखनी को इतना सम्मान दिया।
    आप सभी का यह स्नेह और विश्वास मेरे लिए अनमोल है—मैं इसे अपने जीवन की एक अमिट स्मृति के रूप में सँजोकर रखूँगी।
    सादर आभार, विनम्र प्रणाम एवं अनंत कृतज्ञता!
    💐💐🙏🙏
    - डॉ. छाया शर्मा
    अजमेर - राजस्थान
    (WhatsApp से साभार)

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