स्वतंत्रता दिवस पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन
प्रतिवर्ष इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं। 15 अगस्त 1947 के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने, दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान का उदय हुआ। मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। भारत की जनगणना 1951 के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए। इस दिन को झंडा फहराने के समारोह, परेड और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। भारतीय इस दिन अपनी पोशाक, सामान, घरों और वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर इस उत्सव को मनाते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ देशभक्ति फिल्में देखते हैं, देशभक्ति के गीत सुनते हैं। इसी क्रम में जैमिनी अकादमी ने ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन रखा है। जिससे विभिन्न कवियों ने भाग लिया है। अतः कवियों की रचनाएं व डिजिटल सम्मान पेश है :-
भारत देश महान
तीन रंग का प्यारा झंडा, लेकर चले जवान।
विजय पताका नभ में फहरी, भारत देश महान।।
सीना ताने आगे बढ़ते, रखते माँ का मान।
सीमा पर हैं कदम ठोंकते
वीरों की पहचान।।
हिमगिरि से सागर तक गूँजे,
उनका ही बलिदान।
आँधी, वर्षा, शीत लहर हो,
रुके नहीं अभियान।।
रहे तिरंगा ऊँचा सबसे,
यही रहे अरमान।
मातृभूमि की रक्षा करते ,
अर्पित तन-मन प्राण।।
केसरिया रंग त्याग सिखाता ,
श्वेत शांति की शान।
हरा रंग धरती की खुशियाँ,
भारत की पहचान।।
शौर्य ध्वज जब नभ में फहरे,
गूँजे जय-जयगान।
तीन रंग के पावन ध्वज पर,
न्यौछावर हर प्राण।।
सीमा की पावन धरती पर,
लिखते नया विधान।
मृत्यु सामने खड़ी रहे पर,
ऊँचा रहे निशान।।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
सही लक्ष्य हमारा है
मिटाना है जफाओ को कियाइनसे किनारा है,
वतन मेरा मेरी मानो मुझे जां से भी प्यारा है।१
ज़मीं पावन ये भारत की जहां पर देवता जन्मे
तिरंगा है अमर अपना , अमर गंगा की धारा है।२
हिमालय से निकलती है चली
हरिद्वार आती है
सदा नीरा है मां गंगा सगर पुत्रो
को तारा है।३
नहीं भूले कभी कोई यहां वीरो की कुर्बानी
जिन्होंने देश सेवा में खुशी से सर भी वारा है।४
लगा कलमें गुलाबो की मिटा दो ईर्ष्या सारी
जलें जो प्रेम जलने दो सही लक्ष्य हमारा है।५
- डा० प्रमोद शर्मा प्रेम
नजीबाबाद - उत्तर प्रदेश
दुनिया में है खास
तम का दुखियारा हरे, मन मत लगे निराश।
साथ रहे तिरंगा तो, जीवन में उल्लास।
केसरिया दे यश हमें, श्वेत सिखाए आस।
हरा भी खुशहाल करे, धरती का आभास।
भारत माँ की गोद में, हर जन का विश्वास।
तीन रंग जब लहरते, बढ़ता मन उर्ल्लास।
सीमा पर जो वीर हैं, उनका है बलिदान।
उनके कारण देश का, ऊँचा है आकाश।
मिलकर हम सब देश की, रखें सदा उजास।
तिरंगा भारत का मन , दुनिया में है खास।।
- रेखा मोहन
पटियाला - पंजाब
आजादी की हुई लड़ाई
आजादी की हुई लड़ाई
इंक्लाब के नारे में ।
पीड़ा का सागर लहराया
हंसते हंसते सबको भाया।
बैल बना कोल्हू चलवाया
किसी किसी को फंदा भाया।
किसी किसी ने हंटर झेले
खुशी खुशी सब डंड भी पेले।
देख यातना यम भी सहमे
बड़े भयानक थे वे लहमे।
लेकिन हंस हंस झेल गये वे
भारत की जय बोल गये वे।
खुदी राम चंद्र शेखर जैसे
बोस भगत सिंह भी थे वैसे।
लाखों लोग हुए बलिदान
बचा रहा तब देश महान।
उनकी रहे धरोहर सुंदर
कह गयी रानी की वह मुंदर।
भ्रष्टाचार मिटाना सबको
आगे देश बढ़ाना हमको।
उनका सपना सच करना है
पड़े जरूरत तो मरना है।
सच्चे मन से काम करें हम
नित विकास की राह चुनें हम।
नशा छोड़ आगे बढ़ जायें
समृद्धि का मार्ग बनायें।
भ्रातृभाव का दीप जलायें
बिना भेद के गले लगायें।
अपना प्यारा देश हमारा
नैतिकता में न्यारा।
सोने की चिड़िया कहलाता
हमें बहुत ही भाता।
- डॉ अवधेश कुमार चंसौलिया
ग्वालियर - मध्यप्रदेश
शुभ वेला
आ गई शुभ वेला
स्वतंत्रता दिवस की
प्रभात फेरी निकालें सब
देशभक्ति के नारे लगाएँ
बाल/तरुण/युवा/वृद्धों को
सच्ची देशभक्ति का अर्थ बताएँ
महाराणा प्रताप/शिवाजी/अहिल्या
दुर्गावती/लक्ष्मीबाई/ गुरु गोविंद सिंह
भगत सिंह/बिस्मिल /अश्फ़ाक की
वीरता की गाथाएँ सुनाएँ,
त्याग/बलिदान/निष्ठा/समर्पण
शब्द नहीं ये इतिहास हैं
जितना गहरे इनमें उतरोगे
उतने ही माणिक पाओगे,
सैनिक वही नहीं जो है सरहद पर
हम सब सैनिक हैं देश के
इसकी रक्षा करना कर्तव्य हमारा
प्रकृति/पर्यावरण/स्वच्छता/शिक्षा
वृक्ष/नदी/पर्वत/वन….इनकी
रक्षा का दायित्व हमारा
इन्हें करने का संकल्प आज लें
किसी एक का शुभारंभ हो
देशहित में अपना भी कर्म-अंश हो
सच्ची देशभक्ति का
यही भाव हृदय में लेकर
हर घर तिरंगा फहरा कर
आओ स्वतंत्रता दिवस मनाएँ।
- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई
देहरादून - उत्तराखंड
देशभक्ति
इतिहास उठाकर देखो
इस मिट्टी के कण-कण में
कितनी ही लिखी कहानी है,
कहीं भगत,कहीं सुभाष
कहीं झांसी की रानी है,
संकट का बादल जब भी मंडराया है,
मिलकर सबने कदम बढाया है,
द्वेष भाव छोड़ हम भी हाथ मिलाएं,
देश की आन-बान-शान बढाएं ।
दुश्मन ने जब भी आंख उठाई है,
देश के वीरों ने धूल चटाई है,
ये देश है वीर सपूतों का
अपने लहू से धरा को संवारा है,
सीना तान के दुश्मन को ललकारा है,
आओ हम सब अपना फर्ज निभाएँ,
देश की आन-बान-शान बढाएं ।
जिस देश में आज हम हंसते-गाते हैं,
अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं,
फिर क्यों हम सब लड़ते-लड़ाते हैं,
भारत माँ की आंखों में आंसू लाते हैं,
क्यों न हम भी कुछ ऐसा कर जाएं,
जन-जन में एकता का पाठ पढाएं,
देश की आन-बान-शान बढाएं ।
भारत माता की जय !
वंदेमातरम् !
- पूनम झा 'प्रथमा'
जयपुर - राजस्थान
आजादी
आजादी से प्यार करो
आजादी वो ले आए तुम आजादी से प्यार करो।
आँच ना आए इस पर कोई
इतना सा विचार करो।।
वीरों की कुर्बानी से हमने
इस दौलत को पाया।
देख पराक्रम शहीदों का
गोरा थर-थर थर्राया।
तीन रंगों की चुनरी से
भारत माँ का श्रृंगार करो।।
आजादी वो ले आए तुम--
लोकतंत्र की जलती होली,
नैतिकता भी है मौन।
बोलबाला है भ्रष्टाचार का ,
सच को पूछता है कौन?
जातिवाद का विष घोले जो,
उनका तुम संहार करो।।
आजादी वो ले आए तुम--
हिंदू का पुराण आजादी,
और मुल्ला का कुरान है
सिक्खों की गुरु वाणी है ये,
बाईबल की आन है।
वीरों का था जो सपना तुम,
उसको साकार करो।।
आजादी वो ले आए तुम ,
आजादी से प्यार करो।।
- कृष्णा जैमिनी
गुरुग्राम - हरियाणा
आओ स्वतंत्रता दिवस मनाएं
आओ स्वतंत्रता दिवस मनाए,
खुशियों का गीत हम गएं।
मिलजुल कर उत्सव मनाए,
आओ तिरंगा हम फहराएं।
समृद्ध धारा में हरियाली सजाएं,
हर मानव प्रेम का गीत गाए ।
शुद्ध स्वच्छ वातावरण हम बनाएं,
आओ स्वतंत्रता दिवस मनायें।
सत्य को पहचान कर हम,
सत्य पथ पर हम डट जाए।
आओ सत्य परंपरा हम बनाएं,
आओ स्वतंत्रता दिवस मनाएं।
हर मानव में सख्य भाव हो,
हृदय में प्रेम का संचार हो।
ऐसा आचरण हम बनाएं,
आओ स्वतंत्रता दिवस मनाएं।
अमानवीयता से मानवीता की,
सबको पाठ हम पढ़ाये ।
मानत्व हमारा प्रमाणित हो,
ऐसा सद्भावना हम जगाए ,
आओ स्वतंत्रता दिवस मनाएं।
- उर्मिला सिदार "उर्मी"
रायगढ़ - छत्तीसगढ़
चंद्रशेखर आजाद
भारत माँ का वीर सपूत,
चंद्रशेखर आज़ाद,
माँ माटी की खातिर,
कर दिया जीवन आबाद।
आजादी का दीप जलाया,
मन में लेकर ज्वाल,
भारत माँ के लाल ने,
दिखला दी अपनी ढाल।
बाल उमर में प्रण कर डाला—
बँधूँ न मैं बेड़ी में!
आँधी बनकर दौड़ पड़े वे,
भारत की आज़ादी में।
निडर हृदय, निर्भीक कदम,
आँखों में अंगार,
मातृभूमि पर न्योछावर था,
उनका जीवन-सार।
इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में,
वीर खड़े थे शान,
अंतिम क्षण तक लड़ते रहे वे,
रखा तिरंगे का मान।
आज़ाद जिए, आज़ाद रहे,
आज़ाद रहे बलवान,
भारत माँ के अमर सपूत को,
शत-शत नमन महान!
- यशपाल निर्मल
जम्मू - जम्मू कश्मीर
भारत का सिँहनाद
करूँ कामना ये, देश रहे आजाद।
सारे जग में हो, भारत का सिँहनाद।।
भ्रष्टाचार मिटे, हो उजली सी भोर।
कलरब करते खग, उड़ते हैं चहुँ ओर।।
हो सुंदर विहान, तब जन-मन आबाद।
सारे जग में हो,भारत का सिँहनाद।।
जब गाथा लिखते, किये वीर बलिदान।
प्राणों सी धरती, गाती महिमा ज्ञान।।
करते धर्म-कर्म, बने सभी उस्ताद।
सारे जग में हो, भारत का सिंँहनाद।।
-आओ करें गान, फहरा कर ध्वज आज।
स्वतंत्रता का दिन, हम सबको है नाज।।
हुये आजाद हम, कैसे हमको याद।
सारे जग में हो ,भारत का सिँहनाद।।
- मनोरमा जैन पाखी
भिण्ड - मध्यप्रदेश
शुभ दिन आया है
बहुत दिनों बाद -
यह शुभ दिन आया है ।
हमने घर - घर -
तिरंगा फहराया है ।
पूरब में लाली छाई -
भिनसार से ।
दुल्हन - सी लग रही -
धरा श्रृंगार से ।
बहुत दिनों बाद -
कोयल ने गाया है ।
ख़ुशबू में नहा -
मलय पवन आई है ।
स्वागत में -
गूंज उठी शहनाई है ।
बहुत दिनों बाद -
सप्त रंग छाया है ।
कल-कल, कल-कल -
बहने लगीं नदियां ।
खिल - खिल उठीं अब -
बागों में कलियां भी ।
बहुत दिनों बाद -
गुलशन महकाया है ।
पक्षियों ने भी मिल -
सरगम छेड़ी है ।
हर दिल राग -
रागनियों की पेढ़ी है ।
बहुत दिनों बाद -
यह मन भरमाया है ।
हमने घर - घर -
तिरंगा फहराया है ।
- अशोक आनन
मक्सी - मध्यप्रदेश
मैं भारत हूँ यहाँ
माँ की लोरियों में घर घर में वेदों की ऋचायें हैं
किसान के पावन पसीने में अनागत आशायें हैं
कल कल कर रही सरिता में माँ की मूरत समायी है
पाहन से शिल्पकार ने मनोहर प्रतिमा वनायी है
मन्दिरों में घंटियों के स्वर तो मस्जिद में अजान है
गुरूद्वारे में संगत गिरजे में बाईबिल गान है
सर्वधर्म की बहती रसधार मेरा देश महान है
पर्यावरण के रक्षक वृक्ष को पूज करते सम्मान हैं
राणा की संताने तलवार की धार पर चलते हैं
दुश्मनों का करने संहार हाथ सदैव मचलते हैं
सैनिकों की पदचापों से अरि की छाती दहलती हैं
भारत के लिए देने बलिदान ललनायें मचलती हैं
-निहाल चन्द्र शिवहरे झाँसी - उत्तर प्रदेश
हमारा वतन है
सदा से हमारा तुम्हारा वतन है।
नयन नभ बसे बन सितारा वतन है।
गुलामी न जब सह सका मौन भारत
जनम क्रांति ली थी दुलारा वतन है।
बुराई-लड़ाई बढ़ी जब यहाँ पे..
खुदा का फरिश्ता सुधारा वतन है।
न कोई किसी का छिड़ा रण जगत् में..
जुदा ये सभी से हमारा वतन है।
न 'वरदा' भुलेगी शहादत कभी भी..
विदा जो हुआ पर निहारा वतन है।
- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'
वाराणसी - उत्तर प्रदेश
शहीद की अभिलाषा
भले नहीं हो मुख में तुलसी, न होठों पर जल गंगा हो
अंतिम क्षण जब मेरा आए, हाथ में मेरे तिरंगा हो।
देश की खातिर दूं कुर्बानी, मन बस इतना चंगा हो
अंतिम क्षण जब मेरा आए, हाथ में मेरे तिरंगा हो।
कभी न झंडा झुकना पाए
देश तो आगे बढ़ता जाए
भले हो सर्दी, गर्मी, बरखा
कभी न मेरा दिल घबराए
सीना तान मैं बढ़ा चलूं जब दुश्मन से पंगा हो
अंतिम क्षण जब मेरा आए,हाथ में मेरे तिरंगा हो।
रहे याद बस ये कुरबानी
बात जो तुमने इतनी मानी
सच कहता हूं बात ये मानो
देश न कोई भारत का सानी
रहें सभी बस मिल - जुलकर, घर घर यमुना गंगा हो
अंतिम क्षण जब मेरा आए,हाथ में मेरे तिरंगा हो।
भले नहीं हो मुख में तुलसी, न होठों पर जल गंगा हो
अंतिम क्षण जब मेरा आए, हाथ में मेरे तिरंगा हो।
- प्रो डॉ दिवाकर दिनेश गौड़
गोधरा - गुजरात
क्या है आजादी का मतलब
दादाजी से बच्चें पूछें, हमको ये बतलाओ अब।
आजादी क्या होती है, आजादी का क्या मतलब ?
बोले, दादाजी मुस्काते, "बैठो तुम्हें बताता हूं।
आजादी का मतलब बच्चों मैं तुमको समझाता हूं।
अपने देश में अपना शासन, हो न विदेशी कोई दखल।
देश तरक्की करता जाएं सभी करें प्रयास प्रबल ।।
संविधान के तहत सभी जन रहे, करें स्वरोजगार।
शिक्षा, रक्षा और चिकित्सा का दायित्व लिये सरकार ।।
अन्न और जल, से संसाधन की न करें कोई बरबादी।
सबको है समान अधिकार, यही है बच्चों आजादी ।।
आजादी का मतलब बच्चों, कभी न होता मनमानी।
नियम और कानून अनुकूल जीओ अपनी जिंदगानी।।"
दादाजी, हम समझ गए जी, क्या है आजादी का मतलब।
नियम और कानून का पालन करने का प्रण करते हम सब ।।
- डॉ. अनिल शर्मा 'अनिल'
धामपुर - उत्तर प्रदेश
स्वतंत्रता
चलो फिर हुंकार भरें,
हुई है जो गत माता की,
उसका पुनः श्रृंगार करें,
कंकण जो आए हैं कुछ,
उनसे राहें साफ करें,
हम तुम मिलकर,
भारत माता का,
पुनः उद्धार करें,
अब की बार कुछ भी,
शेष ना रह जाए,
जो भी गलत मंसा का है,
वह न बाकी रह जाए,
स्वतंत्रता का भी अब हम,
पूर्णता से विस्तार करें,
अर्थ समझकर उसका,
मनन फिर से करें,
हम सब मिलकर,
देश के होता में ही,
अपने कर्मों से,
राष्ट्र निर्माण करें।
- नरेश सिंह नयाल
देहरादून - उत्तराखंड
देश हित समझ
देश भक्ति मिलती न ऐसे
विश्वास से उपजाई जाती है,
भावनाओ में न बहकर
धैर्य से अपनाई जाती है।
देश,देश हित समर्पण
तन-मन धन का अर्पण,
इतिहास से इतिहास की
समझ बढाई जाती है।
हर कण जल जीवन हवा
समवेत हैं भारत माता,
अतीत स्मरण भविष्य सचेत
संभावना जताई जाती है।
शत्रु कभी कम न होते
रंग रूप ढंग बदल सेते,
हमारी असावधानी से लाभ
आग ऐसी लगायी जाती है।
हम कितना ही आगे बढ़े
धरा से गगन चन्द्रमा चढ़े,
यह भी न शत्रु मिट गए
देश हित समझ दिखाई जाती है।
- शशांक मिश्र भारती
शाहजहांपुर - उत्तर प्रदेश
भाव स्वदेशी
हम तुम सब अब मिल जुल कर
इतिहास बनायेंगे ।
एक -एक पग चल - चल कर
मंजिल पा जायेंगे ।।
भेद न होगा धर्म जाति का
मैं को दूर करेंगे ।
राष्ट्र प्रेम की ज्योति जलाते
मिलकर सभी रहेंगे ।।
भाव स्वदेशी होगा अपना
सुख समृद्धि का नारा ।
ढूंढे से भी नहीं मिलेगा
हारा या बेचारा ।।
राग- द्वेष अरु लोभ -मोह की
कोई जगह न होगी ।
योग साधना ध्यान सफलता
योगी बनो निरोगी ।।
- छाया सक्सेना प्रभु
जबलपुर - मध्यप्रदेश
आजादी त्यौहार निराला
आजादी त्योहार निराला, मिलकै सभी मनाओ।
जान से प्यारा ध्वज तिरंगा, घर-घर म्है लहराओ।।
अंग्रेजों के साथ लड़े थे, आजादी के दीवाने,
भारत को आजाद कराने, फाँसी चढ़ गए परवाने,
वीर थे जो जाने माने-2, तुम उनकी गाथा गाओ।
राजगुरु सुखदेव भगतसिंह, गजब कमाल करगे,
उधमसिंह से शेर देश का, ऊंचा भाल करगे,
जो बुरा हाल गोरों का करगे-2, ये सबको बतलाओ।
इंकलाब जिंदाबाद की, लहर देश में ला दी,
तुम मुझको खून दो लोगों, मैं तुमको दूँ आजादी,
गोरों की फेर धुवां ठादी-2, नारा जयहिंद लगाओ।
विश्व विजयी तिरंगा प्यारा, है अभिमान हमारा,
आन, बान यह भारत की, इस पर तन-मन वारा,
कहे ’भारती’ तिरंगा प्यारा-2, घर-घर पै फहराओ।
- भूपसिंह भारती
नारनौल - हरियाणा
देशभक्ति
सीखा गया देशभक्ति, अमर हुआ इंसान,
ऐसे महापुरुषों के बल, विश्व में पहचान,
सोने की चिडिय़ा बने,मिले ऐसे दानवीर,
करोड़ों लोगों की पल में,हर लेते हैं पीर।
नहीं गर्र्व धन दौलत, सच्चा जन ले मान,
अभिमान कोसो दूर, शान ईश्वर की जान,
अपने सुख त्यागकेे, दे दी भारत पहचान,
सदियों तक दिल में बसे, टाटा है महान।।
भगत सिंह,राजगुरु,सुखदेव चढ़े थे फांसी,
हजारों अनजान दे गए देश को बलिदान।
स्वतंत्र हुआ यह भारत देश तब जाकर ही,
अंग्रेजी हुकूमत की मिट गई थी मनमानी।।
- डा. होशियार सिंह यादव
कनीना - हरियाणा
तिरंगा रंग गुब्बारे
अम्मा मेरी चलो बाजार
तिरंगा रंग गुब्बारे ले दो चार
संग में जाकेट बनवादे चाहे उधार
आजादी का जश्न मनाएं
भारत माता है लाचार
करना होगा हमें विचार
देश की व्यवस्था चरमरायेगी
जो अच्छी सरकार ना आएगी
मंदिर मस्जिद का ना पकड़ो हाथ
आओ मिलकर सब चले साथ
ऐसी अर्थ व्यवस्था हो
ना कोई भूखा नंगा हो
सब का चले अच्छा व्यापार
किसानों पर ना पड़े मौसम की मार
- अर्विना गहलोत
प्रयागराज - उत्तर प्रदेश
स्वाधीनता
देशभक्ति अटल की तरह होनी चाहिये ।
मेरा भारत आपदाओं मुक्त होना चाहिए
आभाओं से चमकृत होना चाहिए ।
मै रहूँ ना रहूँ मेराभारत महान होना चाहिये
देशभक्ति की भावना प्रचुर होनी चाहिये
जूझते युवाओं नव संकल्प ज्ञान रहे ,
निराशा छोड़ सकारात्मकता सोच होनी चाहिये।
सृष्टि रचना देशभक्ति भावना प्रचुर रहे ।
जूझते युवाओं नव संकल्प ज्ञान रहे ।
निराशा छोड़ सकारात्मकता की सोच
तिरंगा अभिमान बढ़ाता रहे
भारतमाता तेरे विछोह बदलते स्वरुपदेख
बादल तारों वीराने जंगल में भटकर गया
ना थका हुँ ना डरा हूँ ये सिख तुझसे हीं पाईं हैं
माँ भारती मेरे सपनो में साहस जगा जाती हो
सृष्टि की रचना गीत नया गाता जाऊँगा
हार नही मानूँगा रार नही मानूँगा ।
काल के कपाल पर लिखता मिटाता जाऊँगा।
सृष्टि की रचना गीत नया गाता जाऊँगा
कृषक राष्ट्रहित पहचान बताता जाऊँगा
सृष्टि पालनहारा का कर्तव्य निभाऊँगा
सृष्टि की रचना मानवता रीत निभाऊँगा
मीत मितव्यता का फ़र्ज़ निभाता जाऊँगा
काल के कपाल पर लिखता मिटाता जाऊँगा।
राह के काँटों समेट गीत नया गाता जाऊँगा ।
भूखे की भूख निवाला बन राह दिखा जाऊँगा
बन ,मन उपवन पशु पक्षी कलरव करते देख
प्यार की बारिश ,हरियाली सजाजाऊँगा
लुका छिपी का खेल दिखा उजियारा मन
ज्ञान रोशनी प्यार का जेडीएस जगा सब में बस जाऊँगा
माता यशोदा किशन बन नैया पार लगाऊँगा ।
माँ देवकी वासुदेव का प्यार जगा जाऊँगा !!
इस मधुबन उपवन में मुरली की तान
सुना सुदामा की कुटिया सजाऊँगा ।
इस धरती से उस अंबर तक
तेरी सीख साथ निभाऊँगा
बादलों में छिप तेरी छवि निहार
हौसले बुलन्द कर आऊँगा !
नही चाहिये धन दौलत
बंद मुट्ठियों से निहार
सब के दिलो में बस जाऊँगा ।
- अनिता शरद झा
रायपुर - छत्तीसगढ़
आजादी का पर्व
इस स्वतंत्रता दिवस पर
हम हर घर तिरंगा फहराएं ,
और हर घर में, एक पौधा
लगायें ! चाहे हो जमीन ,
या हो कोई गमला ,
और न हो कोई गमला ,
तो किसी डब्बे मे ही
एक एक पौधा लगाएं,
शान से तिरंगा फहराएं ,
धरती पर हरियाली लाएं !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
हर घर तिरंगा
हर घर तिरंगा प्यारा,लहरा रहा हमारा।।
जन जन में राष्ट्र भक्ति बिखरा रहा प्यारा।।
आजादी का महोत्सव आया है खुशियां लेकर।।
जय वन्देमातरम का स्वर गान है हमारा।।
आजाद भगत बिस्मिल गांधी के हम ऋणी हैं।।
स्वतंत्रता दिलाई अहसान है तुम्हारा।।
हिन्दू या मुसलमां हो,सब साथ मिलके रहते।।
हैं भारतीय हम ये परिवार है हमारा।।
झरने संदेश देते ,नदियां मचलती बहतीं ।।
सागर में लहरे खुश हो हर्षित है गगन सारा।।
न गम किसी के मन हो चिंता न फिक्र कोई।।
भूलो सभी बुराई त्योहार आया प्यारा।।
आजादी का महोत्सव दिल मे बसा हमारे।।
शक्ति थिरक के गाये, अभिमान है हमारा।।
- डॉ बबिता चौबे शक्ति
दमोह - मध्यप्रदेश
हम भारत के वीर हैं
टेक
नहीं झुकेंगे कभी कहीं भी, हम भारत के वीर हैं।
मातृभूमि की रक्षा करते, हम पग-पग गंभीर हैं।।
अंतरा — १
नित्य तिरंगा नभ लहराए, मन में उमड़े प्यार है।
भारत माँ की गोद सुहानी, सुंदर इसका द्वार है।
हँसकर रक्षा करते पल-पल, सुंदर भू-कश्मीर है।
नहीं झुकेंगे कभी कहीं भी, हम भारत के वीर हैं।
अंतरा — २
सीमा पर जो वीर खड़े हैं, शीश नवाएँ मान से।
वीरों के त्याग-बलिदानों, गाथा गाएँ शान से।
वीरों के पदचिह्नों पर चल, हरें सभी की पीर हैं।
नहीं झुकेंगे कभी कहीं भी, हम भारत के वीर हैं।।
अंतरा — ३
मिल-जुलकर हम रहें सभी अब, प्रेम-स्नेह की भावना।
जाति-धर्म के भेद भुलाकर, भारत माँ की वंदना।।
सत्य राह पर चलते हरपल, भारत के रणधीर हैं।
नहीं झुकेंगे कभी कहीं भी, हम भारत के वीर हैं।।
- उमा मिश्रा "प्रीति"
जबलपुर - मध्यप्रदेश
🙏🇮🇳 वन्दे मातरम् 🇮🇳🙏
आजादी का पर्व, धरा भारत हरषाई।
भारत का सौभाग्य, घड़ी यह पावन आई।।
हमने पाया मान, हुई धरती यह पावन।
कण-कण है आजाद, सभी ऋतु हैं मनभावन।।
आजाद भारत की अब, बड़ी अनुपम है आभा।
भारत गर्वित हुआ अब, तिरंगा छूता नाभा।।
गंगा - यमुना सी नदियों की, बहे जहाँ शुचि धारा।
वन,उपवन,हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान हमारा।।
माँ भारती तुझे प्रणाम है, पूजित हो जन-जन में।
अभिनव है तेरी पावनता, निर्मलता कण-कण में।
उन्नत मस्तक भारत माँ का, गर्वित भारतवासी,
दिव्य स्वरूप वाला भारत, बसता सबके मन में।
अनुपम छटा हिन्दुस्तान की, जग में सबसे न्यारा।
वन,उपवन,हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान हमारा।।
सीमा पर हिमालय खड़ा है, पावन नद गौरव है।
कश्मीर से कन्याकुमारी, धरा अमित सौरव है।
कोना - कोना नव्यता लिए, भव्यता है निराली,
संस्कृति अरु परंपरायें ही, कण-कण का सौरभ है।
भू से नभ तक भारत की जय, पूजे जग ये सारा।
वन,उपवन,हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान हमारा।।
इसका गौरव वेद ऋचाएं, ग्रंथ सभी पावन हैं।
साधु संत की है यह माटी, मंदिर मनभावन हैं।
सुरगण करते हैं आराधन, इसके चरण पखारे,
स्वर्णिम आभा भारत माँ की, हर मौसम सावन हैं।
चमक रहा है भारत जैसे, व्योम में ध्रुव तारा।
वन,उपवन,हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान हमारा।।
अनेकता में एकता भाव, इसके हृदय समाये।
वसुधैव कुटुंबकम का भाव, जग में मान बढ़ाये।
भाईचारे की खुशबू से, उपवन सारा महके,
वसुधा कोमल भाव समेटे, सबको गले लगाये।
सर्वधर्म हैं पूँजी इसकी, लगता सबको प्यारा।
वन,उपवन,हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान हमारा।।
भारत माता के लाल सभी, इसके हित मरते हैं।
हर जन्म बनें भारतवासी, यह इच्छा धरते हैं।
नाम प्रथम हिन्दुस्तान रहे, झुके कभी न तिरंगा,
निज से पहले देश हमारा, वचन सभी करते हैं।
अनेक वीरों ने भारत पर, जीवन अपना वारा।
वन,उपवन,हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान हमारा।।
गंगा - यमुना सी नदियों की, बहे जहाँ शुचि धारा।
वन,उपवन,हिमगिरि से शोभित, हिन्दुस्तान हमारा।।
- सतेन्द्र शर्मा 'तरंग'
देहरादून - उत्तराखंड
वंदे मातरम्
गाया ये जन जन के कण्ठ ने यं सुमधुर गानम् ।
वंदे मातरम् , वंदे मातरम्।।
स्वतंत्रता के स्वर में मिश्रण यह दीवानों का प्रान ।
तन मन धन सौंपा स्वदेश को गाया यह ही गान ।।
सर्व सिख सनातन भ्रातरम्।।
वंदे मातरम् , वंदे मातरम् ।।
भारत माता यशोगान यह , ये स्वाभिमान का भान ।
राष्ट्रीयगीत बंकिम जी विरचित ये सैनानी का मान ।।
स्वाधीनता समर्पित गातरम्।।
वंदे मातरम् , वंदे मातरम् ।।
शत पंचादश वर्ष बीत गये , सस्वर गाते यह गीतम।
विश्व कुटुंबं भावना मेरी , सुहृद सरल सहज प्रीतम।।
विश्व गुरु गरिमा अयं राष्ट्रम्।।
वंदे मातरम् , वंदे मातरम् ।।
आजादी का अमर मंत्र यह , गाये स्वतंत्रता सेनानी।
लड़ते रहे सदा सहर्ष सब , कभी स्व हार नहीं मानी ।।
ये हिमगिरि किरीट मातरम् ।।
वंदे मातरम् , वंदे मातरम् ।।
- डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी - उत्तर प्रदेश
भारत की स्वतन्त्रता
आज देश की स्वतन्त्रता
प्राणों से हमको प्यारी है ।
अनगिनत आहुति से पाई
इसीलिए यह हमको प्यारी है।।
आज स्वतंत्रता का आराधन
तन - मन - धन से वंदन हो।
ऐसी मंगल करें कामना
कभी कहीं ना क्रंदन हो ।।
आजादी का अर्थ नहीं यह
कहीं किसी पर बंधन हो ।
मुक्त कंठ के कलरव वाला
विहगों का अभिनंदन हो।।
आत्मबोध का तिलक लगा
स्वार्थ रहित स्पंदन हो ।
जगती के लाखों विषधर हित
हाँ भारत- माटी चंदन हो।।
आओ वसुधा के विषाद हित
प्रेम भाव का अर्पण हो ।
रेखांकित कवि मन दर्पण में
भारत मां का आनन हो ।।
- डॉ.रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
आजादी जिनके कारण है मिली, मनाते हम आजादी।
संघर्षों की राह में, फटी कितनी थी खादी।।
हैं अनगिनत नाम, गिनाएं हम किन-किनके।
करिए सबको याद, नाम शहीद हैं जिनके।।
आजादी के गीत को, देश रखेगा याद।
ऐसा होता ही रहे, बिना किसी उन्माद।।
बिना किसी उन्माद, बनेंगे हम सब वादी।
नित नूतन उल्लास, हमें देगी आजादी।।
करते उनको याद हम, बलिदानी जो वीर।
भारत माँ की गोद में, मौन हुए रणवीर।।
मौन हुए रणवीर, आज मेले हैं सजते।
आजादी के नाम, नमन उन सबको करते।।
करिए उनको याद सब, दिये देश को मान।
आजादी के रंग से, रचा भारती गान।।
रचा भारती गान, हृदय में उनको रखिए।
कभी न भूलें आप, हमेशा इतना करिए।।
- सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा - उत्तर प्रदेश
वागीश की कुण्डलियाँ
भारत माता की करें, आओ सब जयकार।
इसकी खातिर जान भी, हाजिर बारम्बार।।
हाजिर बारम्बार, हमेशा रक्षा करना।
दुश्मन को ललकार, उसी की छाती चढ़ना।।
कहता कवि 'वागीश', गीत इसके ही गाता।
हरदम रहे अजेय, जगत में भारत माता।।
आजादी का ये दिवस, छाया है उल्लास।
पूरा भारत है सजा, आया है दिन खास।।
आया है दिन खास, खड़े हैं ताने सीना।
अपना हिन्दुस्तान, यहॉं गर्वित हो जीना।।
करें हिन्द का नाम, नहीं बनना उन्मादी।
किया बड़ा संघर्ष, मिली तब ये आजादी।।
आजादी का पर्व ये, हर्षित सारा देश।
छाई खुशियाँ हर तरफ, खिला-खिला परिवेश।।
खिला - खिला परिवेश, गीत हर्षित हो गाए।
भारत की जयकार, तिरंगा नभ लहराए।।
थे सब वीर महान, जिन्होंने जान लगा दी।
आया दिन ये खास, मिली हमको आजादी।।
- बलबीर सिंह वर्मा 'वागीश'
सिरसा - हरियाणा
क्या हम आजाद हैं
चलो हर गली मोहल्ला में आजादी का पर्व मनायें,
हाथ में लेकर प्यारा तिरंगा देश भक्ति का भाव दिखाये,
क्या सच में हम आजाद हो गये हैं उन अंध गर्त/कूपों से,
फरेबी जग में उलझी कोर का सत्य से परिचय करायें।
दासता की बेड़ियों में बचपन अभि भी जकड़ा है,
दीनता की विवशता ने रुग्ण मन अभि भी पकड़ा है,
गरीबी पर व्यंग्य/अट्टहास करती ये अमीरी मीनारें,
धरातल को रौंद ऊँचाई के दंभ पर अभि भी अकड़ा है?
ढोंग का आवरण ओढ़े है श्रद्धा भी आज ये ऐसा है,
पूजन करते हो नारी का फिर मन में ये मैल कैसा है,
दृष्टि को पतित करते ये दूषित तीखे कंकड़ रुपि भाव,
मान मर्यादा को तराजू में तोलता आज क्यों पैसा है।
किसी पीड़ित अबला से पूछो क्या उसने आजादी पाई है,
विकृत कुंठा से अपनी पावनता को बचा पाई है?
घर के भीतर या बाहर नित्य जलते है अरमान उसके,
अपनी मर्जी से जीने की राह क्या वह मोड़ पाई है।
काॅपी पेन्सिल नहीं आज नन्हे हाथ कूड़ा बीनते है,
सड़क चौराहों पर भिक्षा में मिली रेजगारी को गिनते हैं,
बच्चा बच्चा पढ़े आगे बढ़े अच्छा हो लालन पालन ,
कागजों में दबे पड़े वह शब्द उस कानून को छीलते हैं।
पावन पुण्य पथ त्याग अहंम छोर मद खो गये हैं,
मानवता के मायने कटु विष नीर में यूँ धो दिये है,
डसती है आज भेद-भाव की जर्जर खोखली भीत,
स्नेह मान रुपि नींव पत्थर भी खिसक आज रो दिये हैं।
- शीला सिंह
बिलासपुर- हिमाचल प्रदेश
तिरंगा लहराया
पावन दिवस स्वतंत्रता आया,
हर घर में ही तिरंगा लहराया।
खुशियों का खुमार उठा अब
आनंद को सब ने दिखलाया।
जोश ,उत्साह खत्म होता नहीं,
भारत माता को मस्तक नवाया।
वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर,
शौर्य की गाथा को मन से गाया।
याद रखें आजादी की कीमत सब,
कोटि बलिदानों से उसको पाया।
परस्पर प्रेम और भाईचारा जरूरी,
भाव यही सब के होवें जताया।
देश तरक्की करे और समृद्ध सदा,
तिरंगा फहराये जगत 'सक्षम' 'मनाया।
- गायत्री ठाकुर 'सक्षम'
नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश
प्रणाम करते हैं
स्वतंत्रता दिवस की इस बेला पर,
वीर सैनिकों को प्रणाम करते हैं।
जो लौट के घर न कभी भी आ पाए,
उन्हें शीश झुका कर सलाम करते हैं।।
पत्नि यां उनकी भीतर ही वो रोती रही,
पर देश के काम आने पर गर्व करती रही।
पिता का सीना दुःख से सुलगता रहा,
मां के नयनों से बिना अश्रु धार बहता रहा।।
- सुरेन्द्र मिन्हास
बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश
तरंगा लहरायें
आओ सब मिलकर स्वतंत्रता दिवस मनाएँ,
हर घर घर, गली, कूचे में तरंगा लहरायें,
हँसें नाचें गायें , भारत देश में खूब जश्न मनाएं,
बहुत मुश्किल से हमने आजादी को है पाया,
कई शूरवीरों ने अपना जज्बा दिखलाया,
चूम लिया फाँसी का फंदा हँसते हँसते
तब जा कर ऐसा दिन दिखलाया,
आओ मिलकर उन बीरों की गाथाएँ सुनाएँ,
हम सब मिलकर आजादी का दिन मनाएं,
तिरंगा सदा उँचा रहे हमारा ऐसी रौनक बढ़ाएं,
आओ सब मिलकर आजादी का दिन मनाएं,
80वाँ बर्ष नई उमँगे लेकर आया,
हर तरफ पाई भारत ने उन्नति
सभी देशों में इसका झँडा लहराया,
बढ़ते रहेंगे कदम हमारे घर घर अलख जगाँए
आओ हम सब मिलकर आजादी का जश्न मनाएं।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
हमारा देश महान
हमारा देश महान।
रखेंगे इसका शान ।।
आँच न आने देंगे ।
संकट - घड़ी में आन ।।
कर देंगे हँस-हँस ।
हम न्योछावर प्राण ।।
पर , झुकने नहीं देंगे ।
कभी , तिरंगा का मान ।।
चाहे जो मजबूरी ।
रखेंगे , हम तो ध्यान ।।
लहराते तिरंगा पर ।
छिड़कती मेरी जान ।।
दिन-रात दे रहे हैं ।
पहरा , हमारे जवान ।।
मुस्तैदी से लड़ रहे ।
हैं , सीमा पर जवान।।
दुश्मन भी हो रहे ।
पराक्रम से हैरान ।।
जो हुये हैं , शहीद ।
उनको मेरा सलाम ।।
स्वतंत्रता दिवस की सभी को शुभकामनाएं। इसी उपलक्ष्य में ऑनलाइन कवि सम्मेलन करवाने हेतु आदरणीय बीजेंद्र जैमिनी जी का हार्दिक आभार। सभी की उत्तम प्रस्तुति। बहुत साधुवाद।
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