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क्या जीवन का मतलब सिर्फ दुनियां में आना जाना है ?

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दुनियां में आना जाना का सम्बंध एक जीवन से है । इंसान जन्म लेता है और अपने जीवन में अनेक तरह के कर्म करने  के बाद मौत को प्राप्त होता है । अनेक तरह के कर्म का सम्बंध जैमिनी अकादमी द्वारा " आज की चर्चा " का प्रमुख विषय से है । अब आये विचारों को देखते हैं : -  यूं तो दुनियां में हर एक जीव जन्म लेता है प्रभू द्वारा दिया जीवन जीता है और पूर्व निश्चित समय पर अपने शरीर को त्याग देते हैं । विश्व में विद्यमान प्रत्येक जीव में मानव को श्रेष्ठ जीवधारी प्राणी कहा जाता है । अन्य जीवों के लिये तो ये माना जा सकता है कि जीवन का मतलब दुनिया मेंआना जाना ही है किन्तु मानव के लिये हम ये नही कह सकते । मानस जन्म अनमोल रे  इसे मिट्टी में ना रोल रे  अभी तो मिला है  फिर ना मिलेगा  कभी नहीं  कभी नहीं  कभी नहीं रे ।।। इस लिये जब हमें पूर्व के अच्छे कर्मों के कारण मानस जन्म मिला है तो इस जन्म में भी हमें ऐसे कर्म करने चाहिये कि भविष्य के जन्म मरण के चक्कर से छुटकारा मिल जाये और सदा सर्वदा के लिये गोलोक धाम में सेवा मिल जाये यानि मोक्ष प्राप्त हो । अता इस ...

अपराध को रोकने के लिए कानून का भय कितना आवश्यक है ?

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कानून का भय अपराधियों में खत्म होता जा रहा है। जिस से अपराध दिनों दिन बढ रहा है । सरकार के साथ - साथ प्रशासन व जनता प्रभावित हो रही है परन्तु समाधान निकालने के कोई प्रयास नहीं हो रहे है । यही जैमिनी अकादमी की " आज की चर्चा " का प्रमुख विषय है । अब आये विचारों को देखते हैं : - अपराध को रोकने के लिए क़ानून का भय उतना ही आवश्यक है जितना घाव के लिए चीर फाड़ आवश्यक है। वर्तमान स्थिति में कानून का भय किसी को नहीं है। अगर कानून का भय होता तो रोज-रोज इतनी हत्याएं और बलात्कार की घटना नहीं होती। कानून का भय जरूरी है लेकिन उससे भी जरूरी है नेताओं दादाओं की सरपरस्ती खत्म करना। निर्भया के आरोपियों को फाँसी देने में आठ साल से ज्यादा का  समय लग गया। फिर भी बलात्कार हो ही रहा है। चाहे कानून कितना भी कड़ा क्यों न बन जाय जबतक अपराधी को कोई न कोई संरक्षण प्राप्त होता रहेगा तबतक अपराध रुकने वाला नहीं। अपराधी सोचता है यदि कोई फैसला उसके विरुद्ध आएग तो उसमें भी आठ दस साल का समय मिल ही जायेगा। तो क्यों न अपने मन की मुराद पूरी कर ली जाय। कोई अपराध हो उसे रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई ...