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क्या सदाचार से ही सम्मान मिलता है ?

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सदाचार जीवन का आधार है । जो प्रभु भक्ति से लेकर जीवन के विभिन्न पहलुओं का चित्रण करता है । जिससे जीवन में सदाचार कायम हो जाऐं । यहीं कुछ जैमिनी अकादमी द्वारा " आज की चर्चा " का प्रमुख विषय है । अब आये विचारों को देखते हैं : - सत्य और दया भाव आचरण करने वाले व्यक्ति को ही स्म्मान मिलता है।जो मनुष्य मूल्य चरित्र और नैतिकता के साथ जीता है।वह ब्यक्ति अपने आप मे सम्मानित रहता है।ऐसे मानव को सामान से नही सम्मान की जरूरत होती है। सामान की नही। अतः सदा चारी ब्यक्ति को ही स्म्मान मिलता है। -उर्मिला सिदार  रायगढ -छत्तीसगढ़ सदाचारी का सम्मान होता ही है,बल्कि हार्दिक सम्मान होता है। इसका कारण कि उसमें आत्मसम्मान भी होता है।सम्मान मिलने में सदाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।सम्मान कोई ऐसी वस्तु नहीं,जिसे ऐसे ही हासिल कर लिया जाएं,खरीद लिया जाए। कितना ही त्याग और बलिदान इसके पीछे होता है।ऐसा भी होता है कि कभी कभी इस सबके बावजूद भी सम्मान न मिले लेकिन इतना जरूर है कि अपमान भी नहीं होगा। वैसे सदाचारी होने से मन में जो आत्मसम्मान का भाव जागता है,यह बहुत बड़ी उपल...

क्या जीवन में संयम और संकल्प आवश्यक होने चाहिए ?

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जीवन में संयम और संकल्प बहुत आवश्यक है । जो जीवन को आगे बढने का आधार है । बिना संकल्प के जीवन में कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है । उसके लिए संयम आवश्यक है । यहीं कुछ जैमिनी अकादमी द्वारा " आज की चर्चा " का प्रमुख विषय है । अब आये विचारों को देखते हैं : -    संयम जहाँ मनुष्य को अपनी मानसिक और शारिरीक प्रवृत्तियों पर समय ,काम और परिस्थितियों के अनुसार खुद पर नियत्रंण रखना पडता है।. संयम रखना सबसे कठिन काम है। त्रृषि मुनि भी किसी ना किसी बिंदू पर संयम खोकर अपनी कड़ी तपस्या को भस्मीभूत कर देते हैं ।अब.बात करे संकल्प की तो पुराणों में कथाएं हैं कि जब व्यक्ति संकल्प लेता है तो उस काम को पूरा करने का दायित्व उस पर आ जाता है ।पर सामान्य जन की बात करे तो संकल्प का अर्थ किसी भी काम को पूरा करने का दृढ़ निश्चय । जिस में पुराने जमाने की तरह श्राप और दंड़ का प्रावधान नहीं है । जीवन में  संयम और संकल्प दोनों जरूरी हैं पर किसी भी चीज की अति नहीं होनी चाहिए। मौलिक और स्वरचित है   -  ड़ा.नीना छिब्बर    जोधपुर - राजस्थान     ...