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काशी के करोड़पति साहित्यकार का वृद्धाश्रम में निधन
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साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल वाराणसी के मशहूर साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का वृद्धाश्रम में निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार करने बेटा और बेटी भी नहीं आए। वे 400 से अधिक किताबें लिख चुके हैं और 80 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति के मालिक थे। बाहरी लोगों ने उनका अंतिम संस्कार किया है। विनम्र श्रद्धांजलि! विश्वास तो नहीं हो रहा वाराणसी के मशहूर साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का वृद्धाश्रम में निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार करने बेटा और बेटी भी नहीं आए। वे 400 से अधिक किताबें लिख चुके हैं और 80 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति के मालिक थे। बाहरी लोगों ने उनका अंतिम संस्कार किया है। विनम्र श्रद्धांजलि! नौ महीने पहले बेटा-बेटी ने घर से निकाला: अंतिम संस्कार में भी नहीं आया परिवार साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का निधन हो गया। एक बार पत्रकार के पूछने पर उन्होंने कहा था- पुराना कुछ नहीं पूछिएगा। वो सब...
अमृतसरी समोसे
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अमृतसरी समोसें अपने शहर पानीपत में लगभग चालीस साल पहले की बात है।पंजाब से आए एक हलवाई ने समोसे की दुकान खोली थी। बेशक समोसे की यह पहली दुकान नहीं थी पर इसका समोसा दूसरों से बेहतर और स्वादिष्ट था और उसके साथ एक अलग तरह की इमली और आलू से बनी खट्टी-मीठी चटनी होती थी। दोपहर से शाम तक हजारों समोसे बनते और बिकतें थे। जिन्हें लोग भी खूब चटकारे से खाते थे। इस पर इस हलवाई की एकाधिकार ही था। अब उसके सामने ही एक और हलवाई ने क़ीमत कम कर समोसे बेचने का काम शुरू किए और नारा दिया "छोरा जाट का, समोसा आठ का", जबकि अमृतसरी का समोसा 12 रुपये का था ।इस मुकाबले में ग्राहको को चीज़ तो सस्ती मिलने लगी । परन्तु समोसे का स्तर बिल्कुल नीचे गिर गया। वैसे यह पूरा शहर हलवाइयों के नाम पर है। यहां के मुख्य चौकों के नाम भी हलवाइयों के नाम पर हैं। रामलाल चौक, जटू राम हलवाई चौंक, बोसाराम चौक, चांदना स्वीट्स चौक आदि आदि है। एक तो पूरा का पूरा हलवाई हट्टा भी है। इस मुकाबले में अमृतसरी समोसे की विदाई...
हरियाणा के सभी प्राइवेट व सरकारी स्कूलों में शीतकालीन छुट्टियां घोषित
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