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फर्जी IAS पर जासूसी का आरोप

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जेवर एयरपोर्ट का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री

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हरिवंश राय बच्चन स्मृति सम्मान -2025

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      जीत का कोई पैमाना नहीं होता है। जीत तो जीत होती है। मन से जीत का आनंद ही बहुत बड़ा होता है। फिर भी जीत के लिए कर्म बहुत महत्व रखता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है अब आयें विचारों में से कुछ को पेश करते हैं :-      यह बात ठीक है अगर व्यक्ति बहुत अधिक मानसिक और शारीरिक रूप से परिश्रम करते हुए सदा अपने लक्ष्य के प्रति आशावादी रहता है तो जीवन के हर क्षेत्र में उसकी जीत निश्चित ही होती है। यहां यह भी कहा जा रहा है कि व्यक्ति यदि हारता है तो उसके पूर्व जन्म के दुष्कर्मों का अभिशापित परिणाम होता हैं। जिस प्रकार से हमारे अतीत के कर्मों से वर्तमान और वर्तमान के कर्मों से भविष्य प्रभावित होता है। इसी प्रकार यह माना जा सकता है की 84 लाख योनियों को हम अपने शुभ अशुभ कर्मों के कारण ही भोगते हैंऔर इसी प्रारब्ध के आधार पर हमारे जीवन की हार और जीत निश्चित होती है। अतः मनुष्य का जीवन सर्वश्रेष्ठ है। सदैव जीवन पर्यन्त समस्त प्राणियों और प्रकृति के प्रति शुभ ही सोचें और शुभ कर्म ही करें । - डाॅ.रेखा सक्सेना मुरादाबाद - उत...

कमला पसंद पान मसाला के मालिक की बहु ने किया सुसाइड

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सेना अधिकारी की बर्खास्तगी को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया

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नाथूराम प्रेमी स्मृति सम्मान - 2025

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दुनिया बहुत बड़ी है परन्तु जिंदगी बहुत छोटी है। फिर भी लोग एक-दूसरे से छुपते फिरते रहते हैं। कुछ लोग मिलने का कोई ना बहाने तैयार कर लेते हैं। यही जिंदादिली जिंदगी है। इसे ज़ीना आना चाहिए। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है।‌अब आयें विचारों में से कुछ को पेश करते हैं:-     कौन-कौन मिलता है अपनों से किसी न किसी बहाने से—यह प्रश्न अपने भीतर पूरे जीवन का दर्शन छिपाए है। नवम्बर की सर्दियों में जब हवा हल्की-हल्की चुभन लिए बहती है, तो मन भी गर्माहट की तलाश में अपनों की ओर खिंच जाता है। कभी त्योहार का बहाना, कभी किसी का जन्मदिन, तो कभी बस यूँ ही चाय की प्याली पर यादों का हवाला—इन्हीं बहानों के सहारे रिश्ते फिर से जीवंत हो उठते हैं। कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जो बरसों बाद सामने आकर भी अपनेपन की वही पहली-सी चमक लौटा लाते हैं। अपनों से मिलना दरअसल जीवन की उस ऊष्मा का संग है, जो ठंडी हवाओं में भी दिल को सुकून देती है, मानो रिश्ते ही मन का असली कंबल हों। ऐसे मिलन मनुष्य को यह एहसास कराते हैं कि दुनिया चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों न हो जाए, अपनापन ...