महाश्वेता देवी जन्मशताब्दी स्मृति में चर्चा परिचर्चा

           जैमिनी अकादमी द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चर्चा परिचर्चा का आयोजन किया गया है। जो फेसबुक के साथ - साथ WhatsApp ग्रुप पर रखा गया है। जिसे ब्लॉग के माध्यम से पेश किया गया  है। जैमिनी अकादमी यह वर्ष महाश्वेता देवी की जन्मशताब्दी के रूप में माना रहीं है। इसलिए डिजिटल के रूप में " महाश्वेता देवी जन्मशताब्दी सम्मान - 2026 " के रूप में प्रदान करने का निर्णय लिया है।

       आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं। डिजिटल सम्मान के साथ - साथ विचार पेश किये जाते हैं :-

      आधुनिक भारत में महिला की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय है। आधुनिक भारत में महिलाएं शिक्षा, राजनीति, सेना, विज्ञान और व्यवसाय जैसे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नेतृत्व कर रही हैं। वे न केवल परिवार की धुरी बनी हुई हैं, बल्कि आर्थिक विकास और राष्ट्र निर्माण में भी प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। रूढ़ियों को तोड़कर महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं।  शिक्षा के क्षेत्र में देखा गया है कि लड़कियां लड़कों से आगे निकल रही हैं। खेलों के क्षेत्र में भी लड़कियों का वर्चस्व स्पष्ट दिखाई दे रहा है। देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न राज्यों की मुख्यमंत्री और राज्यपाल बनकर महिलाएं राष्ट्र का नेतृत्व कर रही हैं। बैंकिंग, फाइनांस, आईटी, और कॉरपोरेट जगत में महिलाएं उच्च पदों पर हैं और देश की आर्थिक शक्ति बन रही हैं। शिक्षा, मेडिकल, और इंजीनियरिंग में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। सेना की तीनों शाखाओं और पुलिस (IPS) में महिलाएं फ्रंटलाइन पर सेवाएं दे रही हैं। PIB के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों में महिलाओं की भूमिका से लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय मजबूत हो रहा है। संस्कृति की संरक्षिका: वे अपने व्यवहार और कार्यों से पारंपरिक मूल्यों और संस्कृति को भी जीवित रखे हुए हैं। हालाँकि, अभी भी कार्यस्थल पर असमानता, सुरक्षा और लैंगिक रूढ़िवादिता जैसी चुनौतियों का सामना उन्हें करना पड़ता है, लेकिन सरकारी योजनाओं, जैसे PIB के अनुसार, 'मिशन शक्ति', 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' ने उनकी स्थिति को काफी सुधारा है। अंत में कहा जा सकता है कि आदिकाल से ही भारत में अनेक विदुषी महिलाएं थीं, आज भी वे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर और वैज्ञानिक बनकर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं और भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं।

- लीला तिवानी

सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

           आधुनिक भारत में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है. खासकर बिखरते परिवार और पाश्चात्य सभ्यता का अंधाधुंध अनुकरण. इन दोनों से समाज को बचाने में एक महिला की महिला की भूमिका अत्यंत ही महत्वपूर्ण है. महिलाएँ अगर चाहें तो इन दोनों समस्याओं को ठीक कर सकती हैं. पारिवारिक विघटन को रोक सकती हैं. क्योंकि इनका त्याग और बलिदान बहुत महत्वपूर्ण होता है. जैसे कि प्रेमचंद की बड़े घर की बेटी ने किया था. महिला अगर पश्चिम का अनुकरण न करे.संयुक्त परिवार में रहने को तैयार रहे तो परिवार को विघटन से बचा सकती है. क्षणिक सुख और सुंदर दिखने के लालच में, अर्द्ध नग्न वस्त्र में दिखने की होड़ में, आज अपना जीवन और दूसरे के जीवन को बर्बाद कर रहीं हैं. बगैर शादी के किसी के साथ रिलेशनशिप में रहना  भारतीय संस्कृति के खिलाफ है. मर्द तो इस मामले में दुष्ट तो होते ही हैं. लेकिन नारी जब कुछ अच्छा या बुरा करने पर उतर जाए तो उसे कोई रोक नहीं सकता है.आज आधुनिक भारत में महिलाएँ जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. ताजा उदाहरण पिछले साल का " ऑपरेशन सिंदूर " है जो आतंकी पाकिस्तान को उसकी औकात दिखलाई थी. वो भारतीय महिलाएँ ही थी. देश के विकास में भी महिला अच्छा योगदान कर सकतीं हैं. पर पैसे और पद के लालच में कुछ नहीं कर रहीं हैं या करना नहीं चाहती हैं. कुछ-कुछ राजनीतिक कारण भी होता रहता है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

       आधुनिक भारत में महिला की भूमिका सिर्फ़ "घर संभालना" नहीं रह गई, बल्कि वो हर मोर्चे पर देश को आगे ले जा रही है। मेरी राय में आधुनिक भारत मे महिलाओ पर जिम्मेदारी का बोझ भी कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है एकल परिवार होने के महिला कई भूमिकाओं की एक धूरी बनकर रह गई है। सुबह उठने के साथ ही घर के काम वर्क-फ़्रॉम-होम, मीटिंग, दोपहर बच्चों की पढ़ाई, देखभाल शाम को समाज-सेवा — ये "सुपरवुमन" वाली बात अब रोज़ की हक़ीकत है।  गाँव मे स्वयं सहायता समूह चलाने वाली दीदी से लेकर इसरो की वैज्ञानिक  आधुनिक महिला एक महत्वपूर्ण  भूमिका अदा कर  रही है । क्योंकि शिक्षा के कारण ही आज़ादी की चाबी उनके हाथ में है, जिससे लड़कियाँ  को*सोचने की आज़ादी, सवाल पूछने की हिम्मत* आई है पर सच ये भी है ड्रम वाली घटना के बाद भी आधुनिक भारत में महिला की छवि संदेहस्पृद सी हो गई है। पहले लड़कियों को शादी करने से डर लगता था कि दहेज के कारण कुछ अनहोनी ना हो जाए ,परंतु आज लड़कों को डर लगता है कि कोई लड़की कहीँ दहेज का मुकदमे में ना फंसा दे। खैर ....जब एक  जागरूक महिला  परिवार और समाज को फोकस करती है, तो घर की किस्मत बदलती हैं ।आधुनिक महिला समाज का आईना भी है और उसे तोड़ने वाली हथौड़ी भी बन गई है। महिला "सहयोगी" नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की निर्माता भी है। जब उसे  सुरक्षा,अधिकार, और निर्णय-शक्ति मिलती है, तो पूरा परिवार-समाज  देश भी आगे बढ़ता है। जिस घर में बेटी से पूछा जाता है कि “मेरी बिटिया रानी क्या बनना चाहती है?”वहाँ से ही भारत के भविष्य की तस्वीर बदल रही होती है।

- रंजना हरित 

बिजनौर - उत्तर प्रदेश 

        अगर आजकल के दौर में महिला की भूमिका को देखा जाए तो महिलाएं अब केवल गृहणी ही बन कर नहीं रह गई हैं बल्कि हर क्षेत्र में कधें  से कधां मिलाकर आगे बढ़ रही हैं चाहे शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन की बात हो इंजीनियर, एयरफोर्स या सिविल अधिकारी का क्षेत्र हो हर जगह नारी का बोलबाला है,  अगर आधूनिक भारत में महिला की भूमिका की बात करें ते महिलाएं आत्मनिर्भर हो कर घर और दफ्तर दोनों का कुशलता से प्रबंधन कर रही हैं जिससे न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है अपितु रूढ़िवादी सोच को तोड़कर महिलाएं परूष की तरह हरेक कार्य को संभालने में कामयाब दिख रही हैं लेकिन फिर भी ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की कमी होने के कारण इनको पिछड़ेपन का शिकार होना पड़ा रहा है मगर इन बाधाओं के बाबजूद ये अपनी पहचान बना रही हैं, यह अब फाईटर, पायलट, आईपीएस, आईएएस अधिकारी यहाँ तक की अग्नि वीर के रूप में देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं यही नहीं समाजिक और राजनीतिक में भी इनकी भागीदारी चल रही है, लेकिन महिलाओं को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि घरेलु जिम्मदारियों में पुरूषों की भागीदारी अभी भी कम दिख रही है, लेकिन  आजकल की नारी, शिक्षित, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से परिपूर्ण है जो घर के साथ साथ करियर, राजनीति और तकनीकी  क्षेत्रों में समान रूप से अपना योगदान दे रही है तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है तथा निर्णय लेने में स्वतंत्र है कहने का भाव  नारी का स्थान भारत में पहले से ही आदरणीय व पुजनीय रहा है लेकिन आधूनिक भारत में महिला ने अपने स्थान को उच्च क्षेत्र में खड़ा कर दिया है और नारी का हर कार्य सराहनीय  रहा है जिससे साबित होता है कि आधूनिक भारत में महिला की भूमिका चार चांद लगा रही है जिससे हमारा भारत तरक्की की तरफ बढता नजर आ रहा है अन्त में  यही कहुंगा कि नारी, शक्ति, साहस, समर्पण और त्याग की प्रतिमूर्ति है जो समाज, परिवार और राष्ट्र की  प्रगति की असली अधार शिला है इसलिए नारी शक्ति को शत, शत नमन। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

       आज की नारी अवसर मिलने पर उत्कृष्ट नेतृत्व की क्षमता रखती है ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों में महिलाएँ जुड़ कर सामाजिक आर्थिक राजनैतिक स्वास्थ उत्थान सभी क्षेत्रों में इंटरनेट टीवी के माध्यम से विश्व की गतिविधियों पर विचार विमर्श कर आगे बढ़ अपने बाजुओं के दम दंभ पर आत्मविश्वास से नियंत्रण कर मिशाल क़ायम कर आत्मनिर्भर तो बनाती है साथ ही किसी अडिग साहस का परिचय प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा पहचान बना सहअस्तित्व से विकसित भारत की भूमिका में अपना परचम लहरा कामयाबी हासिल कर आने वाली पीढ़ीयों में कोई फर्क ना महसूस होने देती कहती जब आप ख़ुद को सक्षम ख़ुश रखोगे तभी आप दूसरों को ख़ुश रख सकते हो ! घरेलू हिंसा के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते शांति का माहौल विश्वास से दिल की बाते गहराइयों से समझा आगे बढ़ना बढ़ाना जानती है ! हर इंसान अपने ओहदे सामर्थ ज्ञान से आगे बढ़ अपने लक्ष्य तक पहुँचने में कामयाब हो ऐसी कामना अपने अपने कर्म क्षेत्रों में आगे बढ़ने की क्षमता रखें छल कपट धन अर्जित करने की आदत ना बनाए सच्चाई से जीवन व्यापन कर मानवता सेवा श्रम स्वस्थ नागरिक समाज बने ! यही कामना प्रार्थना चाहत रखते हुए 

कहती है -

आधुनिक भारत में नारी की भूमिका 

वसुधेव कुटुंब भावना से परिपूर्ण हो ! 

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

     यह सच है कि समय ने करवट ली है और इस दौर में महिलाओं को इस नव भारत में प्रतिभा दिखाने के भरपूर अवसर मिल रहे हैं।  एक समय था जब महिलाओं को सामान्यत:  घर-गृहस्थी  संभालने में ही गृहणी बतौर  स्थान मिला करता था। अब स्थितियाँ अलग हैं। नौकरी का क्षेत्र हो, व्यवसाय का क्षेत्र हो या अन्य कोई क्षेत्र  हो,  सभी जगह महिलाओं को पुरुष के बराबर अवसर मिल रहा है। आज हम जब हर जगह, हर क्षेत्र में महिलाओं को पदस्थ देखते हैं तो हमें आश्चर्य ही नहीं होता, हमारा सीना गर्व से चौड़ा भी हो जाता है। यही आधुनिक भारत है।  ऐसा होना भी चाहिए। लिंग भेद ही नहीं, वर्ग भेद, जाति भेद,धर्म भेद ऐसे किसी भी भेद की सीमा से परे सबको , समानता के अधिकार के साथ, समान अवसर मिलना चाहिए।हाँ, आयु, शारीरिक और शैक्षणिक योग्यता जहाँ जैसी आवश्यक हों, उसका निर्धारण भी अवश्य अपवादस्वरूप उचित है और अधिकांशत: ऐसा होता भी  है। सार यही कि अब यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि आधुनिक भारत में महिलाओं की भूमिका समानता, सशक्त और सर्वत्र  हुई है। यह महिलाओं के लिए ही नहीं, परिवार और समाज के लिए ही नहीं, हम सब के लिए गौरवपूर्ण है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

       आधुनिक भारत में महिला की भूमिका अहम है !! महिला जब सृष्टि रचयिता है , तो उसकी भूमिका स्वतः ही महत्वपूर्ण होगी ! महिला घर चलाती है , संसार चलाती है व मकान को घर बनती हैं! आधुनिकता की दौड़ मै, महिला पढ़ रही है , लिख रही है , नौकरी कर रही है , घर सम्भाल रही है , पैसे कमा रही है  !!  इन सब क्रियाकलापों में, कार्य तो कुशलतापूर्वक हो रहे है पर महिला अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं दे पा राहिब!! अंकों की दौड़ मैं , बच्चों पर अनावश्यक बोझ डाल रही है , व अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है , व अपने बच्चों को भी दूर कर रही है !! अपवाद हर जगह होते हैं , पर इतनी प्रगति होने के बावजूद , महिला पाश्चात्य संस्कृतिंदय प्रभावित होकर , अपने मूल संस्कार भूलतिब्ज रही है , व यह एक विचारणीय विषय है !! हर क्षेत्र में, पहुंच गई है महिला , व यह उसकी तरक्की का द्योतक है पर बहुत कुछ पीछे छूटता जा रहा है !! समय रहते यदि इस विषय पर कोई विचार न किया गया , टो भविष्य मैं परिणाम भयंकर हो सकते हैं !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

          पुरुष और नारी एक दूसरे के पूरक हैं। पुरुष यदि गाड़ी है तो महिला उसके पहिये है। गाड़ी बिना पहिये के नहीं चल सकती। ईश्वरीय विधान में भी नारी पुरुष की सहचरी है। पुरुष यदि शरीर है तो नारी उसकी शक्ति है। बिना शक्ति के पुरुष कुछ नहीं कर पायेगा।  वैदिक युग में पुरुष और नारी दोनों समान रूप से देश के विकास में बिना भेदभाव के  अपना अपना योगदान कर रहे थे इसलिए वह विश्व गुरु बन पाया था। आजादी के बाद हमारे देश में जब से स्त्री को संविधान में बराबर का  दर्जा मिला और उन्हें हर क्षेत्र में काम के अवसर मिलने लगे तब से हमारा देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। पुरुष की अपेक्षा नारी अधिक मेहनत करती है। वह घर के काम भी करती है, बच्चों का लालन पालन भी करती है, नौकरी  या मजदूरी भी करती है और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन भी करती है। पुरुष एक साथ इतने सारे दायित्व नहीं निभा पाता। वह थोड़े से काम में ही झुंझला जाता है। स्त्री बहुत सहनशील होती है। ईसलिए उसे पृथ्वी की संज्ञा दी गयी है। आज स्त्री जल, थल और नभ सभी में अपनी सेवायें दे रही है। वह खैतों में, आफिस में, खानों में, , सेना में पुलिस में सभी क्षेत्रों में शानदार काम कर रही है। वह जहाज उड़ा रही है  , रेल व ट्रक चला रही है, रिकशा खींच रही है। ऐसा कोई काम नहीं जो आज महिला न कर रही हो। यही कारण है कि आज देश विश्व की चौथी अर्थ व्यवस्था बन गया है। बिना महिला सशक्तिकरण के यह मुकाम संभव नहीं था। महिला सशक्त होगी तो देश ही नहीं अपितु विश्व भी सशक्त होगा। अनेक देशों में महिला देश का नेतृत्व भी कर रहीं हैं और वे इस कार्य को बखूबी कर रहीं हैं। मनु स्मृति में यह सच ही कहा गया है कि - यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते  तत्र देवता। जब जब नारी को सम्मान मिला तब तब देश और समाज की उन्नति हुई। आज यह बात चरितार्थ हो रही है। 

- डॉ अवधेश कुमार चंसौलिया

ग्वालियर - मध्यप्रदेश 

        समय प्राचीन रहा हो या आधुनिक नारी की भूमिका हर युग में महत्वपूर्ण रही है। जब वह घर में रहती थी और पुरुष बाहर काम करता था तो वह इतनी कुशलता से घर-परिवार संभालती थी कि उसी के भरोसे पुरुष निश्चिंत होकर बाहर काम करता था।  खेती, युद्ध, शिक्षा,आर्थिक मोर्चों पर भी नारी ने कुशलता से अपनी भूमिका निभाई। धीरे-धीरे समय बदलता गया नारी और अधिक सजग-समझदार होतीगई। आधुनिक भारत की दृष्टि से देखें तो आज नारी हर क्षेत्र में अपने को सफल सिद्ध कर रही है। सेना ( जल, थल और वायु) शिक्षा, वकालत, व्यापार, कृषि, संगीत, क्रिकेट, हॉकी, लेखन, चिकित्सा, कॉरपोरेट,इंजीनियरिंग,प्रकाशन, ड्राइविंग,  पायलट, राजनीति आदि अन्य कोई भी क्षेत्र आज नारी के लिए अछूता नहीं है। वह हर क्षेत्र में काम करते हुए निरंतर विकसित होते भारत की सफलता के विकास में नये अध्याय लिख रही है। यह अलग बात है कि समानता की बात कहते हुए भी उसकी शक्ति और कार्य को कम आँक लिया जाता है। पर आज की नारी इतनी कमजोर नहीं, वह अबला नहीं अब सबला बन चुकी है। उसके पास पंख हैं, उड़ने का जज़्बा है तो अब उसे अपने रुचि के क्षेत्र में काम करने, उड़ान भरने से कोई नहीं रोक सकेगा। आधुनिक भारत के निर्माण-विकास में नारी की भूमिका नया इतिहास रचती जायेगी इसमें थोड़ा सा भी संदेह नहीं है। बस आज की नारी को अपने लिए अपनी लक्ष्मण रेखा स्वयं तय करनी होगी।

- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई 

देहरादून - उत्तराखंड

           भारतवर्ष एक देश मात्र नहीं बल्कि एक पूरी संस्कृति का नाम है। भारतीय संस्कृति ब्रम्हांड की अर्वाचीन संस्कृति है जिसका उल्लेख और प्रमाण है हमारे चारों वेद शास्त्र - - - ऋग्वेद सामवेद यजुर्वेद और अथर्ववेद। आज आधुनिकता के नाम पर हमारी पीढ़ियां अपनी प्राचीनतम धरोहरों को भूल रही है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में आँख मूँदकर मिट रहे हैं। भूल गये हैं कि "बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछताय" आज की पीढ़ियों ने पुरानी पीढ़ी को पंगु और लाचार कर दिया है। ऐसी स्थिति में महिलाओं की भूमिका बहुत बढ जाती है। माँ बहन बेटी बहू पत्नी हर रूप में नारी को अपना उत्तरदायित्व पहचानना होगा। लक्ष्मी दुर्गे सरस्वती हर रूप में नारी ही महनीय नारायणी है लेकिन खेद है कि वह महाभारत के कर्ण की तरह स्वयं को भूल चुकी है। अपने दायित्वों को भूल#क#र सिर्फ़ स्वार्थ की  - - आधुनिकता की अंधी दौड़ में सर्वनाश के रास्तों पर चल पड़ी है। पुरुष की बराबरी करने के थोथे घमंड में भूल चुकी है कि वह पुरुष के बराबर नहीं बल्कि कई गुना उंची है। जन्म देने की शक्ति - - सृष्टि के निर्माण की शक्ति सिर्फ स्त्री के पास है।अब वक्त है कि नारी अपनी शक्तियों को पहचाने और वक्त का अभिनंदन करे - - स्वयं के अभिनंदन के साथ - - और आगे बढे़ कल्याण पथ पर!

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र

        आधुनिक भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी और निर्णायक है। यदि यह कहा जाए कि भारत की प्रगति की धुरी आज महिला शक्ति के हाथों में है, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। प्राचीन काल में भी नारी को शक्ति, ज्ञान और सृजन की प्रतीक माना गया था, परन्तु आधुनिक भारत में वह केवल प्रतीक नहीं रही बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार बन चुकी है। वर्तमान भारतीय महिला घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। वह शिक्षा, राजनीति, विज्ञान, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, व्यापार, साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक सेवा जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। आधुनिक भारत की महिला आत्मविश्वास, शिक्षा और अधिकारों की चेतना से परिपूर्ण है। वह अपने कर्तव्यों के साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति भी सजग हो चुकी है। विशेष रूप से शिक्षा ने महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। शिक्षित महिला न केवल स्वयं सशक्त होती है बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी प्रगति की दिशा में ले जाती है। यही कारण है कि आज महिला वैज्ञानिक अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन कर रही हैं, महिला अधिकारी प्रशासनिक तंत्र को सुदृढ़ बना रही हैं और महिला सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा में योगदान दे रही हैं। स्वच्छता अभियान में जनहित याचिकाओं को दायर करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। राजनीतिक क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी निरन्तर बढ़ रही है। पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं की उपस्थिति लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और संतुलित बना रही है। सामाजिक सुधार, शिक्षा का प्रसार, पर्यावरण संरक्षण और न्याय की स्थापना जैसे अनेक क्षेत्रों में महिलाएँ अग्रणी भूमिका प्रमाणित कर चुकी हैं। आधुनिक भारत की महिला केवल अपने परिवार की आधारशिला ही नहीं है, बल्कि राष्ट्र की नैतिक शक्ति भी है। वह संस्कारों की संरक्षिका होने के साथ-साथ आधुनिक विचारों की वाहक भी है। वह परम्परा और प्रगति के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य कर रही है।

मेरी दृष्टि में यदि भारत को वास्तव में एक शक्तिशाली, समरस और विकसित राष्ट्र बनाना है तो महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना अनिवार्य है। जब नारी सशक्त होगी, तभी परिवार सशक्त होगा; जब परिवार सशक्त होगा, तभी राष्ट्र सशक्त होगा। अतः यह कहा जा सकता है कि आधुनिक भारत में महिला केवल समाज का एक अंग नहीं बल्कि राष्ट्र की प्रगति की प्रेरक शक्ति है। नारी की प्रतिभा, संवेदना, परिश्रम और दूरदृष्टि ही उस नए भारत का निर्माण कर रही है, जिसकी कल्पना हमारे महान राष्ट्रनिर्माताओं ने की थी। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

       आज हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं जहां महिलाएं जीवन जगत के हर क्षेत्र सामाजिक ,धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक, व्यावसायिक, खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष उड़ान ,राष्ट्रीय सुरक्षा इत्यादि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वह अपनी शैक्षिक योग्यता के अनुसार बैंकिंग, शैक्षिक, न्यायायिक, स्वास्थ्य , आईटी सभी में क्लास वन से लेकर चतुर्थ श्रेणी ग्रेड तक  में कार्यरत हैं ।इससे उनका स्वयं का परिवार का शैक्षिक जीवन स्तर उच्च हुआ है।साथ ही आत्मनिर्भर होकर भौतिक सुख सुविधाओं का लाभ उठा रही हैं। प्राचीन परंपराओं और रूढ़िवादी मिथक को तोड़कर हर क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं । शारीरिक अपेक्षाओं की पूर्ति के साथ-साथ वर्तमान में अपना मानसिक स्तर भी उन्होंने ऊंचा किया है । माना अपनी पहचान बनाने में उन्हें बहुत कुछ झेलना पड़ता है पर अपने वजूद को मूल्यवान स्थापित करने में यह सब सहना होता ही है जो कि महिला सशक्तिकरण की यह पहचान है।अत: महिला की क्षमताओं को अनदेखा करके एक परिवार और समाज की कल्पना बौद्धिक शून्यता ही होगी।

 - डाॅ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

     आधुनिक भारत में महिला की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक हो गई है। आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, व्यापार, कला और समाज सेवा जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही है। वह एक ओर परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाती है तो दूसरी ओर अपने सपनों को भी साकार करने का साहस रखती है। आज की महिला आत्मनिर्भर, जागरूक और आत्मसम्मान से भरी हुई है। वह समाज में समान अधिकार और सम्मान की हकदार है और अपनी मेहनत तथा लगन से यह साबित भी कर रही है कि महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। फिर भी हमें यह समझना होगा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए समाज का सहयोग, सम्मान और सुरक्षित वातावरण बहुत आवश्यक है। जब परिवार और समाज मिलकर महिलाओं को अवसर और विश्वास देंगे, तभी एक सशक्त और संतुलित समाज का निर्माण संभव होगा। इसलिए आधुनिक भारत में महिला केवल एक भूमिका नहीं निभा रही, बल्कि वह परिवर्तन, प्रगति और संवेदनशीलता की एक मजबूत आधारशिला बन चुकी है। 

- सुनीता गुप्ता 

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

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