राजशेखर बसु ' परशुराम ' स्मृति में चर्चा परिचर्चा

          ज्ञान जीवन का आधार है। ज्ञान से जीवन में बड़ी - बड़ी सफलता का द्वार खुलता है। ज्ञान पाने के लिए कर्म करना पड़ता है। तभी ज्ञान प्राप्त होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
       किसी भी काम में सफल होने के लिए ज्ञान की जरूरत होती है. अगर ज्ञान नहीं रहे तो हम किसी भी काम में सफल नहीं हो सकते हैं.  कौन काम कब कैसे करना है इसका ज्ञान नहीं रहने पर हम वह काम कर ही नहीं सकते हैं. तो हमें उस काम में सफलता कैसे मिलेगी. पढ़ाई हो या बिजनेस ज्ञान से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है. अगर किसान को खेती करने का ग्यान न हो तो वह उसे खेती में सफ़लता कैसे मिल सकती है. और ज्ञान कर्म करने से ही प्राप्त होता है. ग्यान प्राप्त करने के लिए कर्म यानी पढ़ाई करनी पड़ती है. कोई काम करने पर ही सही या गलत होता है तो हमें पता चलता है कि कर्म कैसे करना है. इसलिए कहा जाता है कि सफ़लता ज्ञान से मिलती है और ज्ञान कर्म से मिलता है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

        सफलता केवल प्रयास करने से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए सही ज्ञान का होना आवश्यक है। ज्ञान ही वह आधार है जिस पर सफलता टिकी रहती है। लेकिन ज्ञान भी अपने आप नहीं आता; यह केवल कर्म यानी प्रयास, अभ्यास और अनुभव से ही प्राप्त होता है। उदाहरण के तौर पर, कोई विद्यार्थी कितनी भी किताबें पढ़े, यदि उसने अभ्यास नहीं किया या विषय को समझने का प्रयास नहीं किया, तो उसके ज्ञान में गहराई नहीं आएगी और सफलता की प्राप्ति कठिन होगी। इसी प्रकार, एक वैज्ञानिक केवल पुस्तकों से ज्ञान अर्जित नहीं कर सकता; प्रयोग और अनुसंधान करके ही वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। जीवन में यही सिद्धांत लागू होता है कि निरंतर कर्म करने से ही ज्ञान का विकास होता है और ज्ञान ही सफलता की कुंजी बनता है। इस प्रकार, यह कथन हमें यह संदेश देता है कि सफलता पाने के लिए हमें पहले अपने कर्मों में निष्ठा और अभ्यास बनाए रखना चाहिए, जिससे ज्ञान और अंततः सफलता अपने आप मिलती है।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

          देखा जाए सही ज्ञान जीवन में सकारात्मक बदलाव और सफलता की नींव रखता है लेकिन गीता के अनुसार ज्ञान  कर्म से ही मिलता है,  सही मायने में निष्काम कर्म ही ज्ञान का मार्ग खोलता है तथा ज्ञान कर्म को सही दिशा देता है तो  आईये आज इसी चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं कि सफलता तो ज्ञान से मिलती है और ज्ञान कर्म से मिलता है मेरा मानना है कि सफलता के लिए ज्ञान अतयंत जरूरी है क्योंकि यह सही दिशा, बेहतर निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास प्रदान करता है इसलिए केवल किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और उसके साथ अनुभव भी सफलता की कुन्जी है, अगर ज्ञान पर विचार करें तो ज्ञान  भी कर्म के साथ जुड़ा होता है वास्तव में निष्काम कर्म ही ज्ञान का मुख्य स्रोत है तथा ज्ञान के बिना कर्म अधूरा  ही नहीं बल्कि दिशाहीन होता है इसके साथ अगर केवल ज्ञान होगा तो उसे जीवन में न उतारना व्यर्थ है कहने का मतलब ज्ञान को कर्म में डालने से ही लक्ष्य प्राप्त होता है यह सत्य है कि ज्ञान आंख बन कर मार्ग दिखाता है और कर्म साधन बन कर लक्ष्य तक पहुँचता है तथा व्यक्ति की सफलता का आधार उसके कर्म होते हैं इसलिए एक सच्चे और साफ दिल से किया गया कर्म कभी निष्फल नहीं होता, धर्म और कर्म दो पहियों की तरह हैं जो हमें जीवन के सही पथ पर चलाने में मदद करते हैं इन दोनों के बिना  हम अपने उदेश्य को हासिल नहीं कर सकते, इसके साथ अगर हमारे विचार अच्छे हों  कर्म आदर्श तो फिर फल भी अच्छा ही होगा कहने का भाव विचारों और कर्मों की लगाम यदि मजबूत हो तो  लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य होती है इन दोनों को चलाने के लिए ज्ञान की अवश्यकता होना जरूरी है जिसके यही मायने है कि सफलता तो ज्ञान से मिलती है और ज्ञान कर्म से, अन्त में यही कहुंगा कि  सफलता के लिए कर्म और ज्ञान  एक पक्षी के  दो पंखों की तरह हैं  जिनके बिना सफलता के शिखर को पाना संभव नहीं, क्योंकि ज्ञान के साथ किया गया कर्म जिसको कर्म में कुशलता कहा जाता है दुसरों का भला करते हुए सफलता अवश्य दिलाता है देखा जाए कर्म व्यक्ति के हाथ में है लेकिन फल नहीं इसलिए अगर हमारा ज्ञान अच्छा होगा तथा निष्काम कर्म होगा तो सफलता हमारे कदम चुमेगी इसलिए व्यक्ति को चाहिए अपने ज्ञान और  कर्म को सही दिशा में रखे। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

 जम्मू - जम्मू व कश्मीर

       सफलता तो ज्ञान से मिलती है, ज्ञान भी कर्म से मिलता है.... यह कथन तदन पूर्णतया सत्य है... कर्म ही वह आधार है जो विचारों को वास्तविकता में बदलता है एवं उसके निरंतर प्रयास से जो अनुभव होता है वहीं ज्ञान है। अनुभव से प्राप्त ज्ञान ही सफलता दिलाती है। किताबी ज्ञान का होना निर्थक है जब तक हम कर्म नहीं करते। गीता में भी कहा है... निष्काम कर्म ही सफलता का मार्ग है चूंकि बिना कर्म किए ना कोई ज्ञान प्राप्त होता है और ना ही सफलता...।

- चंद्रिका व्यास 

 मुंबई  - महाराष्ट्र

      सफलता निश्चित रूप से ज्ञान से ही मिलती है।ज्ञान के अभाव में सफलता संदिग्ध हो जाती है।अब यह ज्ञान बिना कर्म मिलता नहीं,तो‌ सफलता के लिए ज्ञान और ज्ञान के लिए कर्म करना अत्यावश्यक हुआ।कुल मिलाकर यह कि बिना कर्म के कुछ नहीं।कर्म ही जीवन को गति देता है और इससे ही सफलता के द्वार खुलते हैं। इसमें कर्म की दिशा और दशा का सही होना भी महत्वपूर्ण कारक होता है। कर्म ,ज्ञान और सफलता की त्रिवेणी से लाभान्वित जीवन ही सार्थक जीवन होता है।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश 

        किसी भी कार्य को करने के लिए उसका सम्यक ज्ञान जरूरी है। तभी भली भांति कार्य संपन्न किया जा सकेगा। जब किसी एक दिशा में निरंतर कार्य किया जाएगा तो उसके संबंध में पूर्ण जानकारी प्राप्त होगी अर्थात उसका समुचित ज्ञान प्राप्त होगा। सफलता ज्ञान और कर्म तीनों का घनिष्ठ संबंध है। किसी भी कार्य की सफलता इन तीनों बातों पर निर्भर करती है। 

- गायत्री ठाकुर '‌ सक्षम ' 

नरसिंहपुर -  मध्य प्रदेश 

       सफलता केवल भाग्य या संयोग से नहीं मिलती, उसका वास्तविक आधार ज्ञान होता है। ज्ञान मनुष्य को सही दिशा, सही निर्णय और सही कर्म करने की क्षमता देता है। जब व्यक्ति कर्म करता है, अनुभव प्राप्त करता है और सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखता है, तब धीरे-धीरे उसका ज्ञान बढ़ता है। यही ज्ञान उसके व्यक्तित्व को परिपक्व बनाता है और उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाता है। इसलिए कहा जा सकता है कि सफलता की सच्ची कुंजी ज्ञान है, और ज्ञान निरंतर कर्म, अनुभव और जिज्ञासा से ही प्राप्त होता है।

- डॉ अलका पाण्डेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

        सफलता के लिए ज्ञान बहुत जरूरी है। ज्ञान से हमें सही दिशा मिलती है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, और हम अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तैयार हो जाते हैं। ज्ञान सिर्फ किताबी नहीं, बल्कि अनुभव और सीखने की प्रक्रिया से भी मिलता है।

- सही निर्णय : ज्ञान से हम सही और 

गलत का फैसला कर पाते हैं।

-  नए अवसर : ज्ञान हमें नए अवसरों की पहचान करने में मदद करता है।

- आत्मविश्वास : ज्ञान से आत्मविश्वास बढ़ता है, जो सफलता की राह में एक बड़ा कदम है।

- समस्याओं का समाधान : ज्ञान हमें समस्याओं का समाधान ढूंढने में मदद करता है। संक्षेप में, ज्ञान सफलता की कुंजी है। 

ज्ञान सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि *कर्म* यानी अनुभव और प्रैक्टिकल प्रयासों से भी मिलता है। यह एक सुंदर विचार है जो हमें बताता है कि:-

- कर्म से सीखना : जब हम किसी काम में हाथ डालते हैं, तो अनुभव के माध्यम से नई चीजें सीखते हैं। यह "लर्निंग बाय डूइंग" का सिद्धांत है।

- अनुभव ज्ञान का स्रोत : किताबी ज्ञान जरूरी है, लेकिन उसे कर्म से जोड़कर हम उसे और गहराई से समझते हैं।

- अनुकूलन और सुधार: कर्म से हमें अपनी गलतियों से सीखने और सुधार करने का मौका मिलता है।

- आत्मविश्वास बढ़ता है : जब हम कुछ करके सीखते हैं, तो आत्मविश्वास भी बढ़ता है। संक्षेप में, ज्ञान + कर्म = सफलता। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। 

- डा. प्रमोद शर्मा प्रेम 

नजीबाबाद - उत्तर प्रदेश 

         इतिहास गवाह है कि दुनियां में सफलता उन्हीं को मिलती रही है  जिन्होने ज्ञान की रोशनी फैलाई है  - - - और स्वयं भी ज्ञानार्जन में सतत लगे रहे हैं मूढ़मति कालीदास का उदाहरण हमें बचपन से घुट्टी में घोलकर पिलाया गया है। जीवन में सफलता पाने के अर्वाचीन काल में सदूर जंगलों में गुरु आश्रमों में शिक्षा देते थे और आज के दौर में सर्व सुविधायुक्त स्कूल कालेज में - - सफल जीवन के लिये ज्ञान का दुसरा पर्याय नहीं है - - और सच्ची सच्चाई यही है कि ज्ञान प्राप्त करना है  - - जीवन की सही दिशायें निर्धारित करना है तो कर्म का मार्ग प्रशस्त करना ही होगा। कर्म का स्वरूप अलग हो सकता है। कहीं कर्म मानसिक तो कहीं आध्यात्मिक और कहीं शारीरिक हो सकता है  - - लेकिन कर्म का दूसरा पर्याय नहीं   है। कर्म करें और फल की चिंता किये बिना आगे बढें - - आपके कर्म और करम(भाग्य) सफलता की कहानी कहेंगे।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर -  महाराष्ट्र 

       जीवन में उत्थान और पतन अपने ज्ञान के प्रकाश पर निर्भर करता है। आत्मविश्वास पर केन्द्रित रहकर काम करना चाहिए। सफलता तो ज्ञान से मिलती है, ज्ञान भी कर्म से मिलता है। वास्तविक रूप यही हकीकत है। ज्ञान से ही सफलता की पूंजी है। ज्ञान अच्छा हो तो कर्म ही भविष्य बताता है। हमारा ज्ञान और अज्ञान एक दूसरे के पूरक हो जाते है। दूसरी ओर परिदृश्य देखे तो ज्ञान और कर्म एक दूसरे पर निर्भर रहते है.....।

 - आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

       बालाघाट - मध्यप्रदेश

      सफलता का अनुभव ज्ञान से मिलता । इंसानियत से कर्म क़र प्यार विचार से सामंजस्य बिठाओगे तभी गांधी के सिद्धान्तों से प्यार करोगे ! तभी आज से बेहतर सत्कर्म सिद्धान्तों विचार से । वृक्ष कलियों फूल सुगंध फल से प्रकृति जीवन मधुर मुस्कान ज्ञान कर्म से मिलता है !कमियों को नज़र अन्दाज़ कर पारदर्शी जीवन दर्पण दिखाना ।सज्ञान लेकर देकर जीवन सवारों जीवन सफल बनाओगे !परिवार समाज शिक्षा प्रकृति व्यवस्था । सरकारी कीमत श्रम उपयोगिता शास्वत है । श्रम की क़ीमत समाधान विचार निश्चित होना सुख का ज्ञान है  खुश रहना स्वकृपा समझने से समझना श्रमशीलता समृद्धि आना है ! वस्तु की कमी एहसास ग़रीबी का ज्ञान है! अमीर ग़रीबी नाकामी एहसास विचार से है !समृद्धि -कैसी आती मानव भौतिक आवश्यकतानुसार निश्चित साधन पर्याप्त भावनात्मक आवश्यकता असीम संसाधन सुख क्षमता अस्तित्व नियमपूर्वक आवश्यकता से अधिक होने का भाव है ! समृद्धि सुविधा है ! इस तरह सफलता से ज्ञान मिलता है !

- अनिता शरद झा

रायपुर -छत्तीसगढ़ 

     सफलता केवल भाग्य या संयोग से नहीं मिलती, बल्कि सच्चे ज्ञान से मिलती है, और ज्ञान भी तभी सार्थक होता है जब वह कर्म की अग्नि में तपकर अनुभव में परिवर्तित हो जाए। जो व्यक्ति सीखने की विनम्रता रखता है और सीखे हुए को कर्म में उतारने का साहस रखता है, वही जीवन के वास्तविक शिखर को प्राप्त करता है। ज्ञान मन को दिशा देता है, कर्म उस दिशा को गति देता है, और दोनों का समन्वय ही मनुष्य को संघर्षों के बीच भी उज्ज्वल सफलता की ओर अग्रसर करता है। इसलिए जीवन का सत्य यही है कि सतत सीखना, सतत कर्म करना और समाज व राष्ट्र के हित में अपनी ऊर्जा लगाना ही श्रेष्ठता का मार्ग है। उक्त तर्कों माननीय महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के माननीय विद्वान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत जी भी भलीभांति जानते हैं कि इसी में व्यक्ति का गौरव, समाज की प्रगति और राष्ट्र की शक्ति निहित है। यही सकारात्मक जीवन-दर्शन हमें प्रेरित करता है कि हम ज्ञान को अर्जित करें, उसे कर्म में उतारें और मानवता व राष्ट्रसेवा के पथ पर निरन्तर आगे बढ़ते रहें। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौडियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

          सफलता का मूल आधार ज्ञान है। बिना ज्ञान के मनुष्य सही मार्ग का चुनाव नहीं कर सकता। ज्ञान हमें सही और गलत का भेद सिखाता है तथा जीवन में आगे बढ़ने की दिशा देता है। इसलिए कहा जाता है कि सफलता का द्वार ज्ञान से ही खुलता है। लेकिन ज्ञान केवल पुस्तकों से ही नहीं मिलता, बल्कि कर्म से भी प्राप्त होता है। जब मनुष्य कार्य करता है, अनुभव प्राप्त करता है और अपने प्रयासों से सीखता है, तब उसका ज्ञान और भी गहरा हो जाता है। कर्म से मिला ज्ञान स्थायी और उपयोगी होता है अतः जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए ज्ञान और कर्म दोनों आवश्यक हैं। ज्ञान हमें मार्ग दिखाता है और कर्म उस मार्ग पर चलने की शक्ति देता है। जब ज्ञान और कर्म का संगम होता है, तभी सच्ची सफलता प्राप्त होती 

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

" मेरी दृष्टि में " ज्ञान बिना कर्म के सम्भव नहीं है। कर्म तो करना ही पड़ेगा। कर्म जीवन की परिभाषा है। कर्म ही इंसान को भगवान बनता है और‌ कर्म ही इंसान को अपराधी बनता है। इन दोनों का आधार ज्ञान है। बाकि सब कुछ फालतू की बातें हैं। कर्म को ऐसा बनाओं। जो दुनिया आपकों भगवान के बराबर समझें। यही ज्ञान और कर्म का संबंध है।

      - बीजेन्द्र जैमिनी 

     (संचालन व संपादन)

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