रमनभाई नीलकंठ स्मृति में चर्चा परिचर्चा

        समय की कीमत कौन जानता है जो कर्म पर विश्वास करता है। समय का आदर करता है। वहीं समय पर सब कुछ अच्छा करता है। वहीं अच्छा लगता है। जो बिन समय करता है। वह कभी अच्छा नहीं होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है।अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
       समय पर सब कुछ अच्छा लगता है बिना समय कुछ अच्छा नहीं लगता है। उपर्युक्त कथन काफी हदतक सही है जीवन की पगडंडी पर आने वाले उतार चढ़ाव इसके परिणाम सामने आते रहते हैं।समय पर होने वाली बरसात अच्छी लगती है।उस समय की फसल मुस्कान भरने लगती है। बिन समय की बरसात अच्छी नहीं लगती है फसल और मानव जीवन दोनों प्रभावित होते हैं। बिन समय मौसम का बदलाव हानिप्रद होता है।इसी तरह जीवन में समय का प्रभाव पड़ता है। महाभारत में बार-बार यही सुना गया पढ़ा गया कि समय ठीक नहीं चल रहा है कल क्या होगा? कोई नहीं जानता पर समय का चक्र चलता रहेगा जिसमें अच्छाईयां और बुराईयों का साथ होगा। आपका विवेक समय के अनुसार ठीक रहा तो  विनाश को रोका जा सकता है।अगर आप का विवेक समयानुसार नहीं रहा तो विनाश होकर रहेगा। यही दृश्य महाभारत में परिलक्षित होता है।अतः यह सत्य है कि समय पर सब कुछ अच्छा लगता और होता है बिन समय कुछ भी अच्छा नहीं लगता होता है।

- विनोद कुमार सीताराम दुबे 

जौनपुर - उत्तर प्रदेश

     समय जीवन का सबसे मूल्यवान धन है। जब कोई कार्य उचित समय पर किया जाता है, तो उसका परिणाम अच्छा और सुखद होता है। समय पर बोया गया बीज ही अच्छी फसल देता है और समय पर की गई मेहनत ही सफलता का मार्ग खोलती है। इसलिए कहा गया है— “समय पर सब कुछ अच्छा लगता है, बिन समय कुछ भी अच्छा नहीं होता है।” यदि कोई कार्य देर से किया जाए, तो उसका महत्व कम हो जाता है। जैसे समय पर न पढ़ने वाला विद्यार्थी परीक्षा में अच्छा परिणाम नहीं पा सकता। इसी प्रकार समय का सही उपयोग न करने वाला व्यक्ति जीवन में पीछे रह जाता है।समय हमें अनुशासन, परिश्रम और जिम्मेदारी का पाठ सिखाता है। जो व्यक्ति समय की कद्र करता है, समय भी उसी का साथ देता है। इसलिए हमें हर कार्य समय पर करने की आदत डालनी चाहिए। यही आदत हमें सफलता और संतोष दोनों प्रदान करती है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

     कितना सही कथन है .... कोई भी बात , चाहे खुशी की हो या गम की , हार की हो या जीत की , समय के अनुसार ही ठीक लगती है ! दुख के माहौल में, यदि कोई फूड मज़ाक कर दे, या खुशी के मौके पर यदि कोई दुखभारी बातें याद दिलाने लगे , औरजीत के जश्न में कोई पिछली हार के गीत गाने लगे , व किसी की हार का कोई मजाक उड़ाने लगे , तो ऐसा व्यक्ति बेवकूफ ही कहलाएगा !! शब्दों के तीर जब कमान से निकल जाएं , तो वापिस नहीं लौट सकते  !! अतः हर शब्द को तोलकर , समझकर , उचित समय व उचित अवसर पर ही बोलना चाहिए !! असमय बोले गये सत्यवचन भी बुरे लगते हैं !! हर बात समय पर ही सही लगती है , व उसका मूल्य होता है !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

       यह वाक्य परम सत्य है कि समय पर ही सब कुछ अच्छा लगता है. असमय कुछ अच्छा नहीं लगता है. यदि किसी के मृत्यु पर कोई हंसे तो ये कितना गलत बात है. उसी तरह किसी के घर बच्चा पैदा हो और कोई रोये तो ये कितना गलत बात है. किसी के शादी पर कोई रोये. किसी के चोट लगने पर कोई कहे अच्छा हुआ तो कितना गलत है. समय पर बारिस हो, धूप खिले,तो कितना अच्छा लगता है बे समय ये सब हो तो कितना नुकसान दायक होता है. शादी का भी एक समय होता है किसी की बचपन होती है किसी उम्र बीतने पर होती है तो वह जीवन का क्या आनंद लेगा. तो इस तरह से हम देखते हैं कि कोई भी कार्य समय पर होता है तो अच्छा लगता है. समय से पहले या बाद में होने को तो कुछ भी हो सकता है या होता है लेकिन वह किसी को जंचता नहीं है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

      “समय पर सब कुछ अच्छा लगता है, बिन समय कुछ अच्छा नहीं होता।” जीवन में हर चीज़ का एक सही समय होता है। जब कोई काम सही समय पर होता है तो वह सुख, सफलता और संतोष देता है, लेकिन वही काम अगर गलत समय पर हो जाए तो उसका महत्व कम हो जाता है। जैसे बचपन में खेलना अच्छा लगता है, पढ़ाई का समय हो तो पढ़ाई करना अच्छा लगता है, और मेहनत का समय हो तो मेहनत करना ही सही होता है। अगर हम इन चीज़ों को समय के अनुसार न करें तो जीवन में संतुलन बिगड़ जाता है। प्रकृति भी हमें यही सिखाती है। बारिश का अपना समय है, फूलों के खिलने का अपना समय है, और सूरज के उगने-डूबने का भी अपना समय है। अगर ये सब समय से न हों तो जीवन की व्यवस्था ही बिगड़ जाएगी। इसलिए कहा जाता है कि समय सबसे बड़ा शिक्षक है। जो व्यक्ति समय की कद्र करता है, उसके जीवन में चीज़ें अपने आप अच्छी होने लगती हैं।संक्षेप में, सही समय पर किया गया काम ही सुंदर और सफल लगता है, क्योंकि समय ही हर चीज़ को सही अर्थ और मूल्य देता है।

 - सुनीता गुप्ता

 कानपुर - उत्तर प्रदेश 

        अगर समय की बात करें तो समय जीवन की अनमोल धरोहर है जो  हर पल गतिमान रहता है और किसी के लिए नहीं रूकता इसका सही समय पर उपयोग ही हमे सफलता दिखाता है और समय का दुरूपयोग निराशा और असफलता लाता है तो आईये आज की चर्चा को आगे बढाने का प्रयास करते हैं कि समय पर सब कुछ अच्छा लगता है और बिन समय कुछ अच्छा नहीं लगता, मेरा मानना है कि  जैसे समय से पहले तोड़ा गया फल, या समय से पहले  बोले गए  शब्द अक्सर व्यर्थ जाते हैं  उसी प्रकार समय बीत जाने के बाद कुछ अच्छा नहीं लगता   कहने का भाव बिन समय कुछ अच्छा नहीं होता समय बहुत कीमती और परिवर्तनशील है, समय ही हमें अनुभव और अक्सर प्रदान करता है यह अटूट सत्य है कि सही समय पर सही कार्य, फल और परिणाम ही सबसे सुखद और फलदायी होते हैं, इसलिए समय पर किया गया कार्य जीवन को सफलता की और ले जाता है  ताकि वर्तमान को बेहतर बनाया जा सके  अगर  काम समय से पहले या बाद में होता है तो उससे अधूरापन और तनाव पैदा होने लगता है लेकिन सही समय पर किया गया कार्य ही सफलता की गारंटी  देता है जीवन में अक्सर चुनौतियां और अवसर एक निश्चित समय के साथ आते हैं इसलिए समय के अनुरूप  ढलने पर ही सब कुछ ठीक लगता है और समय के साथ ही सब कुछ बदलता भी है चाहे लोग हों, परिस्थितियां या रिश्ते इसलिए सही समय पर किया गया  प्रयास बड़ी मेहनत से बेहतर है,  अन्त में यही कहुंगा कि समय हमें धैर्य और मूल्य सिखाता है और जीवन के हर पड़ाव को आकार देता है इसलिए समय पर किया गया कार्य ही  जीवन में अच्छा लगता है और समय रहित किया गया कार्य  फलदायी नहीं होता कहने का मतलब समय की डगर एक निरंतर बहता हुआ मार्ग है यहाँ हर लम्हा परिवर्तन निश्चित है यह एक अनमोल न रुकने वाला प्रवाह है जो जीवन को अनुशासन और लक्ष्यों की ओर ले जाता है इसलिए जो इस बदलते समय के साथ चलना सीख जाता है वही जीवन की चुनौतियों को पार कर सकता है, समय का पहिया कभी नहीं रूकता और यह अपनी रफ्तार से चलता रहता है फिर क्यों न इसकी डगर के साथ चला जाए ताकि समय के साथ हर कार्य सही दिखने लगे और हमें निराशा न हाथ लगे।   

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

      बात समय की है. समय पर सब कुछ अच्छा लगता है. समय से मधुर वाणी से सही बात बोली जाए, तो लाभ होता है. सुनने वाले को भी अच्छा लगता है और बोलने वाले को भी! गलत समय पर चाहे मधुर वाणी से सही बात बोली जाए, तो कुछ अच्छा नहीं लगता है. जैसे का वर्षा जब कृषि सुखाने! इसी तरह खाना-पीना, पहनना-ओढ़ना भी समयानुसार होना चाहिए. खाना-पीना, पहनना-ओढ़ना मौसम के अनुसार और मौके के अनुसार उचित होता है. अफसोस जाहिर करने जाने के लिए सोलह सिंगार करके जाना क्या उचित लगता है! इसी तरह कभी मधुर वाणी और प्यार से सब कुछ अच्छा लगता है, कभी डांट-फटकार ही सही रास्ते पर ला सकती है. वैसे तो सदा सत्य का ही साथ देना चाइए, पर कभी-कभी किसी की जान बचाने के लिए झूठ बोलना भी हितकर होता है. इसलिए ही कहा गया है कि 

समय पर सब कुछ अच्छा लगता है

बिन समय कुछ अच्छा नहीं लगता है

- लीला तिवानी 

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

     समय पर सब कुछ अच्छा लगता है,बिन समय कुछ अच्छा नहीं होता है। ऐसा मानना और कहना शत-प्रतिशत उचित है। कीमत अवसर की होती है,समय की होती है। होली के अवसर पर हम या आप रंग से भिड़े कपड़े  पहने हुए हों तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। वैसे ही कपड़े अब पहन कर निकलेंगे तो लोग पागल समझेंगे। जन्मदिन के गाने जन्मदिन पर   खूब धूमधाम से गाए जाएंगे, सब आनंदित होंगे लेकिन वही गाने, शादी पर गाये जाएं तो सुनने वाले हंसेंगे, मजाक उड़ायेंगे। ठंड के मौसम में जो स्वेटर पहिनकर हम घूमा करते थे, अब जब गर्मी का मौसम आ गया है, वही स्वेटर पहने घूमें तो देखने वाले या तो पागल समझेंगे या बीमार।  आशय यही कि समय पर सब कुछ अच्छा लगता है, बिन समय कुछ अच्छा नहीं होता।  ऐसा केवल गाने-बजाने, पहिनने - ओढ़ने में ही नहीं हरेक विषय पर, हरेक अवसर पर  लागू होता है। अत: कोई भी कार्य करने के पहले समय की अनुकूलता पर ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। कीमत तत्समय की ही होती है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

      संसार में प्रत्येक कार्य का अपना एक उपयुक्त समय होता है। जब कार्य समय पर किया जाता है तो वह सफलता, संतोष और सुख देता है, लेकिन वही कार्य यदि समय से पहले या बाद में किया जाए तो उसका महत्व और प्रभाव कम हो जाता है। प्रकृति भी हमें समय की महत्ता का संदेश देती है। सूर्योदय और सूर्यास्त, ऋतुओं का परिवर्तन, पेड़ों का फलना-फूलना—सब कुछ अपने निश्चित समय पर होता है। यदि वर्षा ऋतु समय पर न आए तो खेती प्रभावित होती है और जीवन की गति भी बाधित हो जाती है। इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी शिक्षा, कर्म, विश्राम और संबंधों का संतुलन समय के अनुसार ही सुन्दर प्रतीत होता है। समय का सही उपयोग व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है। समय पर किया गया प्रयास सफलता का द्वार खोलता है, जबकि समय की अवहेलना कई अवसरों को खो देती है। यही कारण है कि बुजुर्ग और विद्वान हमेशा कहते आए हैं कि समय सबसे बड़ा शिक्षक और सबसे बड़ी संपत्ति है।अतः हमें यह समझना चाहिए कि जीवन में हर कार्य का एक उचित समय होता है। यदि हम समय का सम्मान करेंगे तो समय भी हमें सम्मान और सफलता प्रदान करेगा। सच ही कहा गया है। समय का सदुपयोग ही जीवन को सुंदर और सार्थक बनाता है।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

         समय पर सब कुछ अच्छा लगता है, और बिन समय कुछ अच्छा नहीं होता है — यह केवल एक साधारण पंक्ति नहीं बल्कि जीवन का अत्यंत गहरा और व्यावहारिक दर्शन है। मेरी उत्कृष्ट राय यह है कि समय संसार का सबसे निष्पक्ष और कठोर नियामक है, जो किसी के लिए रुकता नहीं और किसी के साथ पक्षपात भी नहीं करता। जो व्यक्ति समय की महत्ता को समझता है और अपने विचारों, योजनाओं तथा कर्मों को उचित समय पर क्रियान्वित करता है, वही व्यक्ति जीवन में स्थायी सफलता, सम्मान और संतुलन प्राप्त कर पाता है। समय का अनुशासन मनुष्य को न केवल कार्यकुशल बनाता है बल्कि उसके व्यक्तित्व में गंभीरता, विश्वसनीयता और आत्मविश्वास भी उत्पन्न करता है। इतिहास और वर्तमान दोनों इस सत्य के साक्षी हैं कि सही समय पर उठाया गया एक छोटा कदम भी महान परिवर्तन का कारण बन सकता है, जबकि समय से चूका हुआ बड़ा अवसर भी अपनी उपयोगिता खो देता है। इसलिए विवेकपूर्ण सोच, धैर्य, निरन्तर प्रयास और समय के प्रति सम्मान ही जीवन को सार्थक, प्रभावी और प्रेरणादायी बनाते हैं। जो मनुष्य समय के साथ चलना सीख लेता है, वही परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता प्राप्त कर लेता है और वही अंततः समाज तथा राष्ट्र के लिए भी उपयोगी सिद्ध होता है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

      समय पर सब कुछ अच्छा लगता है, बिन समय कुछ अच्छा नहीं होता है.... इसमें कोई दो राय नहीं है, जो कार्य जिस समय पर होना है उसे तब ही करें तो ठीक रहता है। खेतों में बीज बोने का समय आता है उसी समय हमें बीज बो देना चाहिए ताकि समय पर वह अंकुरित हो सके। बारिश के बाद समय चले जाने पर बीज बोने से कुछ नहीं मिलता केवल पछतावे के। सही समय पर सही प्रयास ही सफलता लाते हैं। कहते हैं ना.. समय बड़ा बलवान और अमूल्य होता है। समय का महत्व वही जानता है जिसने उसके महत्व को अपनी ना समझी में बहुत कुछ खोया है अथवा जिसने समझदारी दिखाई समय को मान देते हुए बड़ी सफलता प्राप्त की है। समयश बड़ा ही अमूल्य होता है ,यह हमारी सकारात्मक सोच है, जिसके जाने से वह लौट कर नहीं आता। हमें समय के रहते अच्छे कर्म कर लेने चाहिए । समय का सदुपयोग जो करता है वह कभी दुखी नहीं होता।अध्यात्म की दृष्टि से सही उम्र और समय पर ईश्वर का नाम लेना अच्छा लगता है किंतु जवानी में हम अपने पारिवारिक बंधन में रहते हैं और यह समय हम अपने कर्तव्य के लिए अपने कर्म को महत्व देते हैं। समय पर सब शोभा देता है।

- चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

      सही बात है,समय पर ही सबकुछ अच्छा लगता है बिन समय कुछ अच्छा नहीं होता है। का वर्षा जब कृषि सुखानि। भूख के समय पर ही भोजन रुचता है, वरना भरे पेट तो पकवान भी नहीं भाते। जैसे जाड़े में प्रयोग आने वाले गर्म वस्त्र गर्मी में नहीं अच्छे लगते।मन प्रसन्न न हो तो रागरंग नहीं अच्छा लगता। यानि किसी भी वस्तु, व्यक्ति या स्थान का अच्छा लगना या बुरा लगना समय और परिस्थिति पर निर्भर होता है।समय अनुकूल न होने पर, कुछ अच्छा न लगने पर भी हमें व्यवहार पर नियंत्रण अवश्य रखना चाहिए, क्योंकि समय अनुकूल होने पर जब वह अच्छा लगे तो कुछ कड़वाहट बीच में न रहे।

डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश 

        समय पर सब कुछ अच्छा लगता है बिना समय कुछ अच्छा नही लगता है समय ही गीता का सार है दैनिक दिनचर्या में समय साथ निभाना है उठाना जागना सोना खाना पीना भोग लगाना समय के अनुकूल सारे काम धाम स्वस्थता संपन्नता  की निशानी है!स्कूल हो अपना कर्मक्षेत्र अपने कर्तव्यों की ओर सजगता जरुरी हैं समय के अनुसार  गतिमान होना जरूरी हैं ! जिसने समय की क्रद्र नहीं की समय उस की किद्र करता  है शतरंज के खेल में बाज़ी जीत हार होगी सबको मात ही दे आगे बढ़ जाना ।चालबाज़ियाँ , हेराफेरियाँ नही चलेगी।झूठ फ़रेब की ज़िंदगी में शतरंज हर बाज़ी जीत की होती । सबके वॉट लगा कर रखती ।शतरंज का मोहरा ना प्यादा होती । काश घर बाहर की वजीर होती काश कुंभ करण ना होती काश घर बाहर की वजीर होती काश कुंभ करण ना होती ! पुषोतम भगवान श्री राम होते मैया सीता बन सबका मन हर लेती । निरोगी काया मन शांति का पंख लगा उड़ते समय पर सब कुछ अच्छा लगता है विकसित भारत की अपनी पहचान विश्व कल्याण की भावना उजागर होती ! विकसित भारत में विश्व प्रगति विश्व शांति का परचम लहलराता पर बिना समय कुछ अच्छा नही लगता है ! विश्व शांति के अनोखे बंधन बंधा पहरेदार होता ! हुकूमत सच्चाई नाम का होता ! जिसे मिटाने की पाबंदी मृत्युदंड होती जो समय के पहिए साथ चलता जाता समय के चक्षु खुले होते !

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

    हर कार्य का एक वक्त होता है। पढने लिखने सीखने सिखाने की एक उम्र होती है। वह समय बीत जाने के बाद न कुछ अच्छा लगता है  - - ना ही कुछ अच्छा होने की आशा या संभावना होती है। " अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत" ऐसी भावनाएँ सिर उठाने लगती हैं। अपनी गलती हो या न हो मन में व्यर्थ ही निराशा पनपने लगती है। बचपन जवानी प्रौढ़ावस्था बुढापा  - - सभी अवस्था के कार्य एवं निभाव अलग होते हैं। पढ़ने की उम्र में ढंग की पढ़ाई नही की तो कामकाज के लाले पड़ जाते हैं - - नौकरी दूर का ढोल हो जाती है। नौकरी नहीं तो शादी-विवाह के रास्ते कठिन। हां आपका समय अच्छा है और भाग्य साथ है तो प्रारब्ध आपको सब कुछ अच्छा देता है। प्रतीक्षा और परीक्षा ही आपका समय निर्धारित और निर्णायित करती है। 

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र

" मेरी दृष्टि में " समय की क़दर करने वाले ही जीवन में सफल होते है।‌ यही सत्य है। यही सफल का राज होता है। जो समय निकल जाता है वह समय कभी दुबारा नहीं आता है।‌ समय से कार्य अवश्य करनें चाहिए। यही जीवन का मूल मंत्र है।

        - बीजेन्द्र जैमिनी 

      (संचालन व संपादन)

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