कवि सम्मेलन : होली - 2026

       जैमिनी अकादमी द्वारा होली के अवसर पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। जो फेसबुक के साथ - साथ WhatsApp ग्रुप पर रखा गया है। जिसे ब्लॉग के माध्यम से पेश किया गया  है। अनेक कवियों ने अपनी - अपनी रचनाएं ऑनलाइन पेश की है। सभी की‌ रचनाएं एक से बढ़कर एक रहीं हैं। परन्तु मुख रूप से विषय के अनुकूल रचनाएं होना आवश्यक है। जो रचनाएं विषय के अनुकूल रहीं हैं। उन रचनाऒं को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। डिजिटल सम्मान के साथ - साथ रचनाएं पेश हैं :-

     बाजे है ढोल नगाड़े रे 


होली आई है होली आई रे

 बाजे हैं ढोल नगाड़े रे ,

रंगों में डूबी बृज की होली रे 

नाचे है राधा रानी कृष्णा रे 


फगुआं के गीत मतंग बहारे रे  

बसंती हवाओं में डूबी होली रे 

उड़ते हुए रंग गुलाल रे

महकें है अमुआँ टेसुआ के फूल रे 


आम्रकुंज में कोयल की कूक रे 

फगुआँ के गीत संग नाचे मन मोर रे 

मधुबन में छाई पुरवैया सुहानी रे 

आई है होली आई रे 

बाजे है ढोल नगाड़े रे 

 

मोहनी रँग सजी नार नवेली रे 

केसरियाँ रंग धरि जीवन मधुशाला रे 

खिलते फ़ुल गुलशन बहार रे  ।

बिजली से चमके रति कामदेव रे ।


होली उन्मादो संग पुरवैया सुहानी रे 

जीवन मधुर रंग शाला रे 

मोहनी रँग सजी नार नवेली रे 

जीवन बनी मधुशाला  रे ।


फगुआँ के गीत नाचे मन मोर रे 

आई है होली आई रे

बाजे है ढोल नगाड़े रे 

वृक्षों के आलिंगन बसंत बहार रे 


खिलते फ़ुल गुलशन बहार रे  ।

बिजली से चमके रति कामदेव रे ।

मोहनी रंग बनी मधुशाला रे 

आई है होली आई रे 

 बाजे है ढोल नगाड़े रे ।

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

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               होली 


 आज कह रहे हैं आई आई कल कहेंगे हो ली

  रऺगो का त्योहार निराला  

 होली  प्यारा प्यारा।

  द्वापर युग से होली खेले 

 यादव  कुल की टोली 

 चेहरों  पर लाल गुलाल लगाकर 

 चलती मस्तों की टोली 

 प्रेम का सन्देश  फैलाती 

 त्यौहार  देश  का होली ।

 खेल रहा है भारत देश

- मदन हिमाचली 

 सोलन - हिमाचल प्रदेश 

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            होली के रंग 


मौसम ने ली

मीठी सी अंगड़ाई

 फागुन की रूत आई

 जागा मन में उमंग ।


अंग अंग में 

 समा गई सिहरन 

 जैसे समाता है 

 जल में तरंग।


मन को गुदगुदा गया

एक मीठा संदेशा

 परदेशी पिया का

आया ईक चिट्ठी बैरंग।


तन -मन की 

सारी ख़ुशियों को 

रंगों में रंग देगा

 होली के रंग - बिरंगे रंग


 - सेवा सदन प्रसाद

  नवी मुबंई - महाराष्ट्र 

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‌          होली का संदेश


होली का त्यौहार है, 

सब अवश्य मनाएं ! 

प्राकृतिक रंगों से , 

होली को हम सजाएं !! 


त्यागकर घृणा द्वेष, 

सब एक हो जाएं , 

होली के त्यौहार पर , 

केवल खुशियां मनाएं !! 


इस दिन का एक हो नारा , 

बढ़ाएंगे हम भाईचारा , 

मिटाकर गिले शिकवे , 

न लड़ेंगे हम दोबारा !! 


भूलकर सब चिंताएं 

स्वयं को हम हर्षाए!! 

आओ सब मिलकर 

नवीन होली मनाएं !! 


- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

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 राधा कृष्ण संग खेलें होली


इस होली में जल जायें, 

सब की सब बुराईयां हमारी। 

परमपिता परमात्मा से यही,

करबद्ध प्रार्थना है हमारी।

 चहुंओर खुशहाली ही बरसे,

परेशानियां होलिका में भभकें।

दही भल्ले और गुंजिया मठरी,

इनके बिना होली है अधूरी।

राधा कृष्ण संग खेलें होली,

आओ बरसाने चलें हमजोली।

- संजीव " दीपक " 

  धामपुर (बिजनौर) - उत्तर प्रदेश 

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     केसरिया फाग की धार


रंगों में डूबा नादां मन 

अँखियों - अँखियों से चले

चहूँ ओर सतरंगी फुहार

मचाए होली का हुड़दंग। 


बचपन में खेली थी होली 

मिली मुझको ऐसी ख़ुशी 

कर गई सब तन - मन गीला 

था वह सुनहरा पीला रंग। 


फिर मस्त यौवन था मुस्काया 

लाल रंग ने रंग दिखाया 

मैं से हम कर ऋद्धि - सिद्धि ने 

दिया ' पी ' का सिंदूरी संग। 


बस गया नव संसार मेरा 

खिल गया जीवन का वसंत 

रंग हरा - हरा बरसा वह 

खुशियों ने बदले रंग - ढंग। 


रंग नीला जब मुझ पे बहा 

ईश कृपा समझ में आई 

रूह मेरी बंशी बजा के 

ईश गहराई से दिल दंग। 


प्रभु का रंग कभी न उतरे 

मीरा दीवानी बन जाऊं 

केसरिया फाग की धार में 

पिया ! चढ़ी है तेरी तरंग। 


करूँ प्रेम रंग की बौछार 

होएँ ईश से एकाकार 

मंजिल ' मंजू ' होली बन के 

बजाए अंतस में मृदंग।

- डॉ मंजु गुप्ता

मुंबई - महाराष्ट्र 

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     मिले सांवरिया होली में 


हो गई नीली,पीली,कत्थई, 

लाल चुनरिया होली में।

रंग में भींजे हुए बावरे, 

मिले सांवरिया होली में।।


संग हवा के उड़ा गुलाल,

नीला अंबर हुआ लाल।

आज रंग में,ऐसे रंग जाएं,

 मैं रंग डालूं,तू रंग डाल।

आज नहीं डर जग वालों का,

 डूबी नगरिया होली में।


महक रहा खुशबू से मौसम,

मस्ती में झूमें हम और तुम।

गूँजे गीत मिलन के चँहू दिश,

बाहों में लूमे हम और तुम।

पीकर नेह भंग-तरंग की,

 भूले खबरिया होली में।


स्वप्न संजोये महीने बीते,

अरमानों की ललक लिए।

होली है इंद्रधनुषी रंग में,

अपनापन की झलक लिए।

पावन प्रीत,रंगो की होली, 

झलके गगरिया होली में।

       


हो गई नीली,पीली,कत्थई, 

लाल चुनरिया होली में।

रंग में भींजे हुए बावरे, 

मिले सांवरिया होली में।।            


- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

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        उड़े मस्ती के रंग


जले मन का कलुष

होली की लपटों के संग,

गले मिले सब मानुष

भूले कल की वो जंग.


होली आई रे रंगीली

उड़े मस्ती के रंग....


चलो खेले रे होली

भीगे रंग में अंग-अंग,

गूंजे गीत फागुन के

बाजे ढोल औ' मृदंग.


होली आई रे रंगीली

उड़े मस्ती के रंग..


कहीं खेले लट्ठमार

कहीं रंगों की फुहार

निकले मन के गुबार

दिखी भंग की तरंग.


होली आई रे रंगीली 

उड़े मस्ती के रंग....!


- रेखा श्रीवास्तव 

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

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     रंगों में घुलेगी रिश्तों की मिठास



रंगों में घुलेगी रिश्तों की मिठास,

आज धुल जाएँगे मन के सब संताप।

मारो भरकर पिचकारी आज,

प्रेम बन जाए हर दिल का साज।


लाल गुलाल में छिपी है उमंग,

पीला रंग लाए खुशियों का संग।

हरा रंग दे नव आशा का संदेश,

नीला रंग रचे विश्वास विशेष।


भीगे आँगन, भीगे अरमान,

हँसी से महके हर इंसान।

रूठे मन भी आज मना लो,

अपनों को गले से लगा लो।


ढोलक की थाप पे झूमे गाँव,

उड़ें अबीर, सजे हर ठाँव।

रंग बरसें जैसे हो बरसात,

हर दिल गाए प्यार की बात।


आओ मिलकर ये त्योहार मनाएँ,

नफरत की दीवारें दूर हटाएँ।

रंगों में घुलेगी रिश्तों की मिठास,

मारो भरकर पिचकारी आज। 


 - रंजना वर्मा उन्मुक्त

रांची - झारखंड 

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        होली पर फायकू


होली खुशियों का त्यौहार

 प्यार का आधार 

तुम्हारे लिए । 


रंगो का है उत्सव

 गुलाल और अबीर 

तुम्हारे लिए । 


रंगों की बारिश में

खुशियों के  फब्बारे

तुम्हारे लिए । 


सबके दिल में विशेष 

भाईचारे का संदेश 

तुम्हारे लिए । 


दिल में बसाकर प्यार 

सबको गले लगाएं 

तुम्हारे लिए। 


रंग बिरंगी होली आई

  लख लख बधाई

तुम्हारे लिए। 


होली पर लिखती फायकू

तुम्हारे लिए।

 - रंजना हरित

 बिजनौर - उत्तर प्रदेश 

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  भक्त प्रहलाद की परीक्षा है


होली प्रेम की परिभाषा है

जीवन की आशा है

त्याग का उल्लास है।

भक्त प्रहलाद की परीक्षा है

जन जन को शिक्षा है

मिली हुई दीक्षा है।

कलयुग का दर्शन है

वर्तमान का दर्पण है।


संघार का तप है 

बृज का भाव है।

राधा कृष्ण की प्रीत है

अलौकिक प्रेम की जीत है।

रंगो का उत्सव है

जीवन का महत्व है।

 

रंगो का  मर्म है

जीवन का सत्कर्म है।

सिखाता समभाव है।

सूक्ष्म दृष्टि है

अंतर्ज्ञान अंतर्दृष्टि है|

प्रकृति का रूप है

धर्म का प्रतिरूप है|

पावन प्रेम की कथा है

होली पर्व गर्व की गाथा है|

  - मंजुला ठाकुर 

भोपाल - मध्यप्रदेश 

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         होली मनायेंगे 


वे 

कुछ इसतरह 

होली मनाते हैं ।

कहीं न कहीं 

मुॅंह काला कर आते हैं ।


सूखे के दौरान 

वे 

कुछ इसतरह 

होली मनायेंगे ।

रंगों में 

ज़रा भी पानी 

नहीं मिलायेंगे ।


उन्हें देखते ही 

वे उन पर

लाल  - पीली हो जाती हैं ।

यानी -

उनकी होली मन जाती है ।

  -  अशोक आनन 

    मक्सी - मध्यप्रदेश 

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             होली के रंग


होली की हुड़दंग में, मलते रंग गुलाल।।

लाल  हरे  पीले  हुए, देखो  गोरे  गाल।।

जोगीरा सारा रा रा रा....


राधा - कान्हा  संग  में, रचा  रहे  हैं  रास।

देखो ब्रज में छा रहा, होली का उल्लास।।

जोगीरा सारा रा रा रा.....


चले खेलने फाग अब, साजन सजनी  संग।

भर पिचकारी  डालते, लाल  गुलाबी  रंग।।

जोगीरा सारा रा रा रा....


भंग  पड़े  मत  रंग  में, खेलो  ऐसा  खेल।

रंग चढ़ाना  प्रेम का, रहे  दिलों  में  मेल।।

जोगीरा सारा रा रा रा....


राधा कान्हा  से कहे, करो नहीं अब तंग।

ले  गुलाल  आना  अभी, खेलें होली संग।।

जोगीरा सारा रा रा रा......

- बलबीर सिंह वर्मा "वागीश"

     सिरसा - हरियाणा

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    अब अबीर इठला रहा


दिल में फगुनाहट हुई,मनवा चंचल आज।

अभिलाषा यह पल रही,करूँ प्रेम का काज।।


रंग घुल गए प्रीति में,मौसम है रंगीन।

दिल सजनी को खोजता,है प्रकरण संगीन।।


यौवन है जज़्बात पर,बहकी-बहकी चाल।

मधुमासी आवेश है,हर प्रेमी बेहाल।।


साजन को तिरछी नज़र,देख रही भरपूर।

सजनी के मुख पर खिला,आफ़ताब का नूर।।


शीतल चलती है हवा, फागुन का अंदाज़।

सकल उदासी दूर अब,प्रेम बना अधिराज।।


अब अबीर इठला रहा,लिए सरस पैग़ाम।

मीत याद आने लगा,सबको सुबहोशाम।।


फागुन में है चेतना,गाता स्नेहिल गीत।

मिलन-विरह का दौर है,प्रेम गया है जीत।।


होली आशा को वरे,विश्वासों का काल।

रंग घुल गए सोच में,प्यार हुआ बेहाल।।


  - प्रोफेसर शरद नारायण खरे

         मंडला - मध्यप्रदेश 

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      होली की होली जली


मौसम ने मस्ती भरी, फागुन लाया रंग।

रंगों के त्योहार मे, बाजें ढ़ोल मृदंग।


बाजें ढ़ोल मृदंग, लगा रंगों का मेला।

गली-गली में शोर, जोश भरता अलबेला।


कहे 'भूमिजा' लाल, गुलाबी सारी बस्ती।

हुई हवा रंगीन , देख मौसम की मस्ती।


होली की होली जली, हुआ पाप का अंत।

भक्त प्रहलाद बच गया, होला गावैं संत।


होला गावैं संत, बतावै पापी करनी।

हद करे व्यभिचार, पडे उसको ही भरनी। 


कहे ‘सुखमिला’ सोच, भरी कब उसकी झोली।

यहीं मिले सब दंड, कहे सबको यह होली॥ 

- सुखमिला अग्रवाल'भूमिजा' 

मुंबई - महाराष्ट्र 

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       होली खेलो मना


होली खेलो मना

होली खेलों मना

श्री राम अवध में आयो है......2

राम जानकी संग सब भाई

साथ में है कौशल्या माई

ढ़ोल बजाकर गाओ मना

श्री राम अवध में आयो है

होली खेलो मना

होली खेलो मना

श्री राम अवध में आयो है.......2

आये रघुराई खुशी आई

हर्षित हो सब देत बधाई

घर घर मिठाई बाटो मना

श्री राम अवध में आयो है

होली खेलो मना

होली खेलो मना

श्री राम अवध में आयो है.......2

दीप जलावें मंगल गावे

नगर के वासी पाव पखारे

मिल जुलकर सब हाल को जाने

फाग दिवस मिल गाओ मना

छप्पन भोग लगाओ मना

श्री राम अवध में आयो है

होली खेलो मना

होली खेलो मना 

श्री राम अवध में आयो है......2

लाल गुलाल लाल मुख मण्डल

राम जानकी हाथ कमण्डल

रंग डाला मना रंग डाला मना

श्री राम अवध में आयो है

होली खेलों मना

होली खेलो मना

श्री राम अवध में आयो है......2

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

   मुम्बई - महाराष्ट्र

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   आज सब खेलो होली 


होली की मस्ती बड़ी, इन्द्रधनुष से रंग।

सम्मोहन चहुँओर है, प्रियतम का है संग।।

प्रियतम का है संग, मौज मस्ती है छायी।

रंगो की बौछार, पर्व यह है सुखदायी।।

कहे वर्णिका आज, द्वार सजती रंगोली।

भर पिचकारी रंग, आज सब खेलो होली।।


होली पावन पर्व पर, बिखरा देखो प्यार।

राधा कान्हा झूमते, खुशियाँ हैं हर द्वार।।

खुशियाँ हैं हर द्वार , कुंज में छायी मस्ती।

मथुरा घुलती भांग, मिठाई गुझिया सस्ती।। 

कहे वर्णिका आज, नशीली सबकी बोली।

चढ़े नशा भरपूर, पर्व है पावन होली।।

- सीमा वर्णिका

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

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       रंग एक ढंग अनेक


एक रंग में रंग गए सारे,रंक संग धनवान,

कीचड़ में सब लोट रहे हैं,देखो हे भगवान।


जोगी रा सा रा  रा रा


महँगाई सुरसा सी लगती,साँसत में है जान।

पुआ,पूड़ी दुर्लभ हो गए,भाए न मेहमान।


जोगी रा सा रा रा


बधाई संदेश से बेचारा,मोबाइल हुआ बंद

स्टेटस कैसे भेजूँ  सखी को ,हुआ रंग में भंग।


जो गी रा सा रा


उछल उछल कर रंग लगाते,बुढ़ऊ निकले आज।

छोड़ कर अपनी दवा दारू ,ख़ूब दिखे अंदाज।


जोगी रा सा रा


मत बहाओ जल को व्यर्थ ही,खेलों फूलों संग।

पुए का सब घोल ले भागे,खूब मचा हुड़दंग।


जोगी रा सा रा रा


हर्बल रंग सदा अपनाओ ,त्वचा रहेगा साफ।

कीचड़ की है बात निराली,कर दो सबको माफ।


जोगी रा सा रा


- सविता गुप्ता

राँची - झारखंड

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          होली के रंग


.होली 

होली के रंग

प्रेम के संग

तभी होली,

नीले पीले हरे

मिलकर हो एक

तभी होली,

राग द्वेष घृणा

भूले अपना रंग ढंग

सही हो होली,

शान्ति का दूत

भूल जाए युद्ध रीति

मध्य में होली,

अपने अपने से हो

भूलकर बहुत कुछ 

सच्ची होली,

मिले मिलाए सबको

तन ही न मन मिलाए

यह होली,

प्रहृलाद की पीड़ा 

कृष्ण की ब्रजलीला

समझ होली,

फाल्गुनी फाग रचे

आम्र मंजरी,होला

रंगोत्सव होली,

धर्म इतिहास रची

फिल्मी समाज बसी

यह होली।

- शशांक मिश्र भारत

शाहजहांपुर -उत्तर प्रदेश

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     होलिका का यह पर्व


रंग_गुलाल से भरपूर,

होली में लोग होते सराबोर।

सभी करते मस्ती

और मचाते शोर।

प्रहलाद _होलिका का यह पर्व,

दिलाती है स्मरण।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का,

हमलोग करते स्पर्श चरण।

बच्चे,बूढ़े सभी मनाते,

फाल्गुन का यह रंगीन त्योहार।

पूआ_पूड़ी सभी हैं खाते,

ये हैं उत्तम आहार।

- दुर्गेश मोहन 

 पटना - बिहार

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भर पिचकारी कान्हा पहुँचे 


जोगीरा सारा रा रा रा


रूठ गई है 

राधा रानी 

जाने कहाँ छिपी है 

व्याकुल कान्हा 

ढूँढ रहे हैं 

गोपियों से भी पूछ रहे हैं 

कोई न उन्हें बताए 

जोगीरा सारा रा रा …जोगीरा सा रा रा…!!

कदम्ब के पीछे 

छिपी है राधा 

सखियों से भी कह न पाए 

मन उसका भी कान्हा को बुलाए 

कोई कहो जाकर मोहन से 

रंगी हूँ मैं तो तेरे रंग में 

तेरे प्रेम से ही मैंने अपने को है सँवारा

जोगीरा सारा रा रा…जोगीरा सारा रा  रा…!!

तुम बिन राधा कैसी होली 

मैं तेरा तू मेरी हो ली 

बहुत हुआ अब मान भी जाओ 

सबके संग आ करें ठिठोली

भर पिचकारी कान्हा पहुँचे 

गोप-गोपियों संग कदम्ब के पीछे 

अपने रंग में रंग राधा को प्रेम से निहारा 

जोगीरा सारा रा र…जोगीरा सारा रा रा…!!

- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई 

देहरादून - उत्तराखंड

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    छोरे  ने  गुलाल उड़ायो 


रंग मोहब्बत के बरसे फागुन 

फाग खेलन बरसाने आयो री 

ये तो नगरी नटखट कान्हा की

चहूं ओर रंग बरस रयो 

ब्रज की छोरी पूछ रही

कोन गांव से आयो री

छोरी ने भर पिचकारी 

ऐसी मारी सरररर 

छोरे  ने  गुलाल उड़ायो 

छोरी का मुख हुआ लाल 

- अर्विना गहलोत

नागपुर - महाराष्ट्र 

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      मिल जाएं एक रंग में


पावन अवसर आया होली,

आओ खेलें मिल हमजोली।

मिल जाएं एक रंग में सभी,

यादगार बन जाएगी होली। 


लाल, हरे और नीले, पीले,

रंग कितने सारे  हैं अबीर। 

लगाएं  एक दूसरे को हम,

मुख आए मुस्कान लकीर।


रंग प्रीत का गहरा चढ़ाएं,

आपस में हम मिल जाएं।

इंद्रधनुष सा बनें सभी जन,

सात रंग सा मिलाप दिखाएं।


प्रेम भाव का संदेश दें सब, 

परस्पर स्नेह बढ़ाएं सभी। 

भुला देवें बैर भाव  'सक्षम',

संस्कृति कायम रखें सभी। 

- गायत्री ठाकुर सक्षम 

नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 

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     फॅंस गये पीठाधीश 


पिचकारी  से  हास्य  की, व्यंगों  की  बौछार।

 बस्ती  में  मस्ती  रहे ,जय   होली   त्योहार।।

 दढ़ियल  साहब ने  सखे, दिया  नया कानून।

 खुद को  घायल कर  रहे, अपने ही  नाखून।।

 बाबाजी  को  छेड़कर, फॅंस  गये  पीठाधीश।

 आरोपित  वो  ही  करें,पाते  जो   आशीष।।

 सच्ची  सच्ची बोलकर,आफत  लेई   बुलाए।

 चिड़िया चुग गई खेत तो,क्या होगा पछताए।।

 भाषण  की  पिचकारियां,जाति  धर्म  के रंग।

 नफरत  की  बौछार में,खुद की खुद से जंग।।

 आम आदमी कहीं नहीं, कहीं न उसकी बात।

 बस  वोटर  जय हो तेरी, इतनी सी औकात।।

 सेवक जी की  बात को,समझें क्या मतिमंद?

 छोड़ जगत जंजाल को, लें होली आनंद।।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल' 

धामपुर - उत्तर प्रदेश

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      किसे लगाये अबीर 


सलहज हो गयी असहज किसे लगाये अबीर 

मातृभूमि के लिए हुए  शहीद नन्दोई महाबीर 

भाभी दालान में याद कर देवर को हुई अधीर 

बलिदान हो गया देश की ख़ातिर घर का वीर

होली सूनी है आज नहीं साथ है दोस्तों शूरवीर 

मॉं ले अब किसकी वलैंया मन में है गहरी पीर 

पिता भी द्रवित हैं अब रहा नहीं उनका बेटा धीर 

भाई भी अनुज की याद में है भाव विहल गंभीर 

अर्द्धांगिनी के भी नयनों से झर -झर बहे  नीर 

बहना सजाये बैठी है थाल कहॉं गया मेरा वीर

होली पर बिखेरो रंग ऐसा ग़द्दारों का जागे ज़मीर 

हमलावर शिखंडियों का हो अन्त गिद्व नोचे शरीर       

 - निहाल चन्द्र शिवहरे

झांसी - उत्तर प्रदेश 

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          होली का रंग


आओ मिलकर रंग सजाएँ, आई फिर से होली है,

मन की सारी धूल झटक दो, खुशियों की ये टोली है।

ढोलक की थापें गूंज रही हैं, गली-गली में शोर है,

रंगों से भी भीगा मौसम, हर चेहरा चितचोर है।


लाल गुलाल उड़ाता पवन, हँसी फिज़ाओं में घुली,

पीली चुनर धरती ओढ़े, हर डाली जैसे हो खिली।

नीला आकाश भी झुककर, रंग बरसाने आया है,

हर दिल ने आज पुराने ग़मों को दूर भगाया है।


राधा-सी मुस्कान सजी है, कान्हा-सा उल्लास है,

प्यार भरे इस पावन दिन में, हर रिश्ते में विश्वास है।

गले मिलो और भूलो शिकवे, दिल से दिल को जोड़ो,

रंगों की इस मीठी वर्षा में, नफरत के बीज न छोड़ो।


मीठी गुजिया की खुशबू से, महके हर आँगन-द्वार,

मां के हाथों की ठंडाई में, बसता सारा प्यार।

हँसी-ठिठोली, गीत-मस्ती, बचपन फिर लौट आया,

होली ने हर सूने मन में, इंद्रधनुष सा रंग छाया।


आओ मिलकर वचन ये लें हम, प्रेम का दीप जलाएँ,

हर दिन होली-सा हो जग में, ऐसा रंग बसाएँ।

साथ निभाएँ, साथ मुस्काएँ, जीवन बने रंगोली,

खुशियों की सौगात लिए फिर आई प्यारी होली। 

- सुनीता गुप्ता 

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

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            रंग-त्योहार


फागुन ने फिर बाँध लिया है पवन में मधुर तरंग,

धरती के आँगन में उतरा है रंगों का अनंग।

मन के सूखे कोनों तक जब प्रेम-अबीर उतरता है—

होली केवल पर्व नहीं, आत्मा का होता प्रसंग।


गालों पर गुलाल सजा, हँसी बने कंगन-चूड़ी,

भीगे आँचल में झलके बचपन की मीठी धूरी।

द्वेष-दहन कर दे जो, वह सच्ची होली माने—

रंग वही जो जोड़ सके हर टूटी हुई डोरी।


नीला विश्वास बने, हरियाली-सा हो विस्तार,

लाल स्नेह की ज्योति जले, पीला उजला व्यवहार।

इंद्रधनुष-सा मन हो जब सबको गले लगाता—

तब जीवन का हर क्षण लगता है रंग-त्योहार।


माटी की सौंधी गंध में रिश्तों का मान घुला,

हाथों की थाली में जैसे सारा जहान खुला।

मन की भीत मिटे तो समझो फागुन सफल हुआ—

होली का सच्चा रंग वही, जो प्रेम में धुला।


तन पर चढ़े तो क्षणिक, मन पर चढ़े तो शाश्वत रंग,

हँसी में ढल जाए जब हर पीड़ा का ढंग।

रंगों से बढ़कर जो मानवता को रंग दे—

वही होली, वही फागुन, वही जीवन का संग।

- डा अलका पान्डेय 

मुंबई - महाराष्ट्र 

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    प्रीति रंग में सबको रंगे


संग राधिका होली खेलें, वृंदावन  के श्याम।

प्रीति-रंग में सबको रंगे, दशरथ-नंदन राम।।


ध्यानी-योगी अरु बैरागी,सदा उड़ातें भस्म।

औघड़-भूत-पिशाच सभी ही,जानें हर से रस्म।।

बैठ मसाने भोले-शंकर,करतें अपने काम।

प्रीति रंग में सबको रंगे, दशरथ-नंदन राम।।


तारक शिव ही जीव तारतें,चढ़ा सत्य का रंग।

भटक रहे जो प्रेत-निशाचर,होली खेलें संग।।

काशी की होली अद्भुत है, मुक्ति घाट हर-धाम।

प्रीति रंग में सबको रंगे, दशरथ-नंदन राम।।


थर-थर कॉंपे जीव जहॉं पर, वहीं देव का वास।

सर्प लपेटे सदा पुरंदर,रहें भक्त के पास।।

रट ले मनवा हर-हर बम-बम ,अब तू आठों याम।

प्रीति रंग में सबको रंगे, दशरथ-नंदन राम।।

- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'

वाराणसी - उत्तर प्रदेश 

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 ब्रज में होरी खेलें गिरिधारी


होली खेलें गिरिधारी , 

ब्रज में होरी खेलें गिरिधारी ।

कीर्ति कुमारी लये पिचकारी।।


ललितादिक सखिया संग में।

ठाड़ी सकरी खोरी मग में।।!

निकर न पाये बनवारी ।

ब्रज में होरी खेलें गिरिधारी।।

....................................


श्याम सखा कर रयै तैयारी ।

रंग गुलाल लयै संग भारी ।।

वाकी रंगवे सतरंग सारी ।।

ब्रज में..........................


आई रंग बरसाने बाली ।

भानु लली बरसाने बाली ।।

डर गये हो क्या बनवारी।

ब्रज में............................


पकर हरि को नारी बनाई ।

चली नहीं कोई चतुराई।।

दई सिर पर चुनरी डारी ।

ब्रज में.........................


मक्खन प्रिय मोरे मन भावे ।

श्याम दर्श खौ जि ललचावे।।

प्रभु सुन लो विनय हमारी।

ब्रज में............................

- डा राजेश तिवारी मक्खन 

 झांसी - उत्तर प्रदेश 

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लगा शक्ल से नजरबट्टु सा 


होली का हुल्लड़ जैसे औंधा पड़ा हुआ कुलहड़ ।

 बनता हैं तीस मार  , चलता है शराबी सा । 

मुँह पर इतना रंग लगा शक्ल से नजरबट्टु सा । 

मस्ती जादों की निकली टोली । ढोल मजीरे संग थाली । 

होली के गानों में मिल कर छद्म रूपों में गाली । 

माता जी को प्रणाम , भाभी को बोले साली । 

युवक और युवतियाँ , भीगे बदन झलकती हैं तितलियाँ । 

रंगों की फुआर में , गुलाल की कतार में । 

फागुन है आया , मेघ मल्हार में । 

कोई फूलों से खेल रहा कोई फूलों को छेड रहा , 

उपवन का माली बैठ उदास , पानी की किल्लत से झूझ रहा । 

होली का हुल्लड़ जैसे औंधा पड़ा हुआ कुलहड़ ।

 बनता हैं तीस मार  , चलता है शराबी सा । 

मुँह पर इतना रंग लगा शक्ल से नजरबट्टु सा । 

मस्ती जादों की निकली टोली । ढोल मजीरे संग थाली । 

होली के गानों में मिल कर छद्म रूपों में गाली । 

गुजिया लड्डू और जलेबी , किसी किसी ने पेश करीं - काजू की बर्फ़ी । 

भांग घोटी दूध के संग , संग - संग सौंठ भी है  छौंकी 

होली का हुल्लड़ जैसे औंधा पड़ा हुआ कुलहड़ ।

 बनता हैं तीस मार  , चलता है शराबी सा । 

मुँह पर इतना रंग लगा शक्ल से नजरबट्टु सा ।

- डॉ अरुण कुमार शास्त्री 

पलवल - हरियाणा 

===============


           होली आया


होली आया होली आया 

आया फगुआ का त्योहार 

बसंत बयार चली पुरवाई 

पीली- पीली सरसों फूली..

खेतों में खड़ी गेहूं की बाली

मटर , गोभी,टमाटर, धनिया 

बात बनाते लहराते झूमते 

पगडंडी पर खड़ी गुजरिया 

होली आया, होली आया 

आया फगुआ का त्योहार..

टेसू रक्ताभ गगन चूमती..

लाल कालीन धरती बिछी..

गुझिया,मठरी, पुआ, मिठाई 

दही बड़ा, पुड़ी ,कचौरी  , बूंदी 

देवर रंग ले दौड़े भाभी छुप जाय

हंसी ठिठोली करती सखियां 

अबीर , गुलाल रंगों में रंगे हुए 

भांग की मस्ती चढ़ी खुमारी..

ढोल नगाड़े बजने लगे चौराहे 

होली आया, होली आया..

आया फगुआ का त्योहार..।।

- आरती तिवारी 

      दिल्ली 

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       रंगों का त्यौहार 


रंगो का त्यौहार है, पालन अनुपम रीत।

पोषित हो संस्कृति सदा, बनी रहे जग प्रीत।। 


मिलजुल कर सब खेलिए,पावन होली रंग। 

हर्ष जोश भरपूर हो, जीने का ये ढंग।। 

जीवन सरगम सा बने, गाओ उत्सव गीत। 

पोषित हो संस्कृति सदा, बनी रहे जग प्रीत।। 


फूलों जैसा ही खिलो, अपना कर हर रंग। 

रंग रंग में देख लो, छाई नवल उमंग।।

ईर्ष्या को भी जीत लो, बन कर मन के मीत। 

पोषित हो संस्कृति सदा, बनी रहे जग प्रीत।। 


प्रेम भाव की राह में, उड़ता रंग गुलाल। 

हिय से हिय को जोड़ता ,रखें जतन से पाल ।। 

होली पर तुम प्रेम से, सब का मन लो जीत। 

पोषित हो संस्कृति सदा, बनी रहे जग प्रीत।। 


रंगों का त्यौहार है, पालन अनुपम रीत। 

पोषित हो संस्कृति सदा, बनी रहे जग प्रीत।। 

- शीला सिंह

बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश 

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      शुचिता का त्यौहार


रक्तिम कहीं पलाश है, सरसों भी है पीत।

सुनकर झूमे यह धरा, पुरवैया संगीत।।


ऋतु वसंत दिखला रहा, रंगों का जब मेल।

मन उमंग ले खेलते, तभी फाग का खेल।। 


आया फाल्गुन मास यह, संग लिए संदेश।

प्रेम रंग में डूबकर , भूलें मन के द्वेष।।


मन आँगन के पात्र में , भरें नेह की धार।

प्रीत रंग को घोलकर , मने फाग त्यौहार।।


वासंती मोहक धरा , चहुँदिश रंग-बहार।

इंद्रधनुष-मन, फाग में , प्रेम रंग बौछार।।


बचे न जग में होलिका , मिटे हृदय के क्लेश।

शुचि तन-मन प्रह्लाद पर , आँच न आए लेश।।


- रूणा रश्मि 'दीप्त'

राँची -  झारखंड

============


  रंग डारे भाई चारा निभाये


होलिका मृत्यु बन प्रहलाद गोद में 

श्री हरि के नाम से जीवन प्रमोद में 

होलिका     हो गयी भस्म अग्नि में 

प्रहलाद मृत्यु पर विजय ले मोक्ष में॥


शिव गौरा की  होली हो गयी अमर

भांग पीस पीस कर गौरा रंगी सजर 

सुबह से शाम हो गयी भंग के ख़ातिर

शिव  नशा भांग   का चढ़ा बैठे नगर ।


ढोल मंजीरा  बाज उठा होली हुड़दंग 

हर उम्र में चढ़ गया पागलपन के संग 

राधाकृष्ण   की चुनरी पगड़ी भीगी है 

एक दूजे को सराबोर किया दे दे रंग ।


भेदभाव को भूल गये प्रेम को अपनाये 

संगी साथी   रंग डारे भाई चारा निभाये

भंग के संग पुआ गुझिया पकवान लिये

सुर राग में होरी गाये तारी  संग मिलाये ।

- सुधा पाण्डेय 

     लंदन

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    रंग बिरंगे चेहरे भूत से


होली के रंग उड़ रहे हैं,

मस्ती भरे तराने गाते हैं।

जिधर भी देखा मुड़कर,

रंग गुलाल नजर आते हैं।।


रंग बिरंगे चेहरे भूत से,

लुभा रहे हैं बच्चे बाला।

मस्ती में झूम रहे इंसान

कोई गुलाबी कोई काला।।


होली से डरकर बैठ नहीं,

ढूंढ लाएंगे तुमको घर से।

रंगों में आकर रंग ले प्यारे,

दूर न जा आ मेरे दर पे।।


एक साल बाद आता पर्व,

घर से निकल आना जरा।

रंग है उतर जाएगा जरूर,

क्यों रहता है तू डरा डरा।।


- डा.होशियार सिंह यादव

कनीना -  हरियाणा

================

        चलेगी पिचकारी


होली में अब की बार, चलेगी पिचकारी।

होली की छाई बहार, सुनो  सब नरनारी।।


रंग गुलाल की खेलो होरी,

करे नहीं कोई जोराजोरी,

मानो म्हारी मनुहार, कहे थारी प्यारी।


नाचो गाओ आई होरी,

हाथ जोड़कै कह रही गोरी,

करे विनती बारम्बार, बात मानो म्हारी।


आपस में सब रंग लगाओ,

नाचो कूदो होली गाओ,

जैमिनी अकादमी में, छाई है खुमारी।


पानी बचाओ है मजबूरी,

जीवन के लिए, नीर जरूरी,

जल की चिंता करो, सुनो दुनियादारी।


कहे भारती होली आई

फागण की या मस्ती लाई

सभनै देना बधाई, रहे खुश नरनारी।

- भूपसिंह 'भारती' 

 नारनौल - हरियाणा

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           तर  दे  तरंग 


चुप रहने न देवें, मेरे गीतों में  भर  होली रंग। 

टिक बैठन न देवे,,मेरे गीतों  का   हर   उमंग ।।

कभी कुछ सोचता,कभी  ले   भर  नोच  गुलाल  ।

कभी  छूपा  बात  नाचे , बन    कर खिला  मलंग ।l

विरह भट्टी में तपके भी , ये लगे  पी  ली   भंग 

टिक बैठन न देवे,,  लिये  नियत भी  सी  नवरंग ll

तपते मरु  पर बडी  बाते शशी  सा  करता। 

जा खडा  समूह   द्वारे  करे  कलोल   सबदंग ।l

ये मोजियो  का साथी  ,पर  टोक   वालों से ईर्ष्या,

मौजो से अबीर उडाये  , पास होकर गाल दे  रंग ll

ये ढ़ोल  की थाप  से जाकर नाचता  आवाज़े दे  

चुन चुन  बोली  से ताने कस  कर , तर  दे  तरंग ।l


- रेखा मोहन 

पटियाला -पंजाब 

==============


          फाल्गुनोत्सव 


अब पहले सा फागुन

और वो फगुनाहट कहां 

जब रंगों की रंगीनी 

होली की टोली लाती थी।


 सरोबर तन मन को कर जातीं 

अब तो  नेटवर्किंग के जाले ने 

हर उम्र को कैद हीं कर डाला

 अब ना तो वो पहले सा हल्ला हुड़दंग 

ना मंजीरे की थाप ना,शोर शराबा।


ना हीं दिखता वो पहले सा भाईचारा 

जिसका था कुछ अलग सा अद्भुत नजारा 

मिल बैठ सभी पूए पकवान खाते थे

भांग भी खूब पीसे  पीएं जाते  थे ।


ऊंच नीच का भेद भाव मिटाकर 

अमीरी-गरीबी को दूर भगाकर

आओ फिर मिलकर होली मनाते हैं 

दही-बड़े पकवान खा कर रंगों में डूब जाते हैं।


आओ फिर पहले सी होली मनाते हैं

फाल्गुनोत्सव की आहट को महसूस कर

दिलों में उमंग और जोश भरपूर कर

होली को फिर से मशहूर कर जाते हैं।

- डॉ पूनम देवा 

पटना -  बिहार

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         रंगों का है खेल


होली का है दिन मस्ताना, खुशियों का खजाना

सुनते जाना... हो जाता है दिल दीवाना... अपना हो बेगाना...

दिन मस्ताना ,,,,

रंगों का है खेल सुहाना प्यार का ताना-बाना मिलकर गाना...

बैर भाव अग्नि में सारे, धू-धू कर जल जाते हैं

दिव्य भाव जागें बालक में, प्रहलाद बतलाते हैं

दहन होलिका का करके नाचें और गाएं गाना, सुनते जाना... एक दूजे को रंगते हैं सब अपना हो बेगाना दिल दीवाना...

संगी साथी मिलकर सारे रंगों में रंग जाते हैं

धनक उतर आता जमीन पर सब चेहरे मुस्काते हैं

कचरी,पापड़, दही बड़े और गुझिया जी भर खाना,भूल न जाना...

होली का है दिन मस्ताना, खुशियों का खजाना/दिल दीवाना...

पिचकारी, गुलाल, रंगोली, सुरभित फूलों वाली होतीं

नीली,पीली,लाल,गुलाबी शक्लें जोकर वाली होतीं

सखियों के संग मस्ती करके जी भर रंग लगाना/भूल न जाना...

भांग- पकोड़े खाकर दीवाने हरदम हर्षाते हैं

छली-बली बनकर गलियों में नाहक रार कराते हैं

मुश्किल हो जाता है भैया उनको तो समझाना, रे समझाना

पल भर में हो मान-मनौवल चाहें गले लगाना... दिन मस्ताना

होली का है दिन मस्ताना खुशियों का खजाना सुनते जाना दिल दीवाना..

पानी भर भर कर गुब्बारे चंचल बालक फेंक रहे हैं 

चलते-फिरते लोग बेचारे मुख ऊपर कर देख रहे हैं

बालकनी से फिर गुपचुप उनका गायब हो जाना, दिल दीवाना

होली का है दिन मस्ताना, खुशियों का खजाना,,,,

            

 - डा. अंजु लता सिंह गहलौत

        नई दिल्ली

==============


         फाल्गुनी संदेश 


रंग अबीर ग़ुलाल उड़ाता

होली का त्यौहार है आता l

कोई बन कान्हा, कोई बन राधा

जीवन की मुस्कान है लाता ll


प्रीत की पिचकारी के रंग से

तन मन को है भिगोकर जाता l

है विश्वास की डोर को थामे

लाल अबीर ग़ुलाल लगाता ll


भाईचारे की चंग बजाकर

प्रेम का फाल्गुनी गीत ये गाता l

अकर्मण्य कर्मों को जलाता

कर्म का ये संदेश है लाता ll


"भक्त प्रह्लाद "की याद दिलाता

भक्ति भाव मन में है जगाता l

इंद्रधनुषी रंगों में रंगकर

सराबोर जग को कर जाता ll

         ---

- डॉ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

=======


          होली बधाई


होली के रंगों में आज , 

  रंगों का सर पर ताज है।

     जीवन की हर खुशी में ,

       रंगों का ही सर्वत्र राज है।।


भानु किरणों के नाज़ से, 

   भंवरे ने छेड़ा नया राग है। 

       रग-रग में भरे जो जोश,

        किया ऐसे हमें मदहोश है।।


ठंडे झोंको की ये बयार है,

  खुशबुओं से भरी बहार है।

      कलियाँ भी इठलाने लगी,

         भंवरे से सुर मिलाने लगी।।


रंग में न कभी भंग पड़े,

  रवि हर रश्मि दे खुशियाँ। 

      होली सपरिवार बधाई हो,

       छाई रहे यहाँ मदहोशियाँ।।

- डॉ. रवीन्द्र कुमार ठाकुर

बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश 

================

     बुरा न मानो होली है


आज अपने को जगा लो तो हो गई होली,

मन का अंधियारा भगा लो तो हो गई होली,

डरे-डरे से चेहरे या सहमी सी आंखें,

इनको दहशत से बचा लो तो हो गई होली,

आग चूल्हे में ही रहे और घरों में हों खुशियां,

जश्न यह मिलकर मना लो तो हो गई होली,

वतन परस्त यह सुन ले वतन न जल पाए,

तो प्रहलाद बना लो तो हो गई होली,

अंधेरे मिलकर के अमावस न उगा पाएंगे,

दीपक को इतना बता दो तो हो गई होली,

अपने मुख पर लाओ मुस्कान तो हो गई होली,

दूसरों के मुख पर भी ला सको तो हो गई होली,

अपनों संग खुश बैठो तो हो गई होली।

- नूतन गर्ग 

  दिल्ली

===================          

   

Comments

  1. जैमिनी अकादमी, पानीपत (हरियाणा) द्वारा आयोजित ऑनलाइन काव्य सम्मेलन में “होली हुड़दंग सम्मान” से सम्मानित किया जाना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और आत्मिक संतोष का क्षण है।
    इस स्नेहिल सम्मान के लिए मैं अकादमी के सभी आदरणीय पदाधिकारियों, आयोजकों तथा साहित्यप्रेमी साथियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी पाठकों, श्रोताओं और मित्रों का है जिनके प्रेम, प्रोत्साहन और विश्वास ने मेरी लेखनी को निरंतर ऊर्जा दी है।
    ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आपकी यह स्नेहधारा और आशीर्वाद सदैव बना रहे तथा मेरी लेखनी समाज में प्रेम, संवेदना और सकारात्मकता के रंग भरती रहे।
    सादर
    डॉ. छाया शर्मा
    अजमेर (राजस्थान) 🌸
    (WhatsApp से साभार)

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