यशवंतराव चव्हाण स्मृति में चर्चा परिचर्चा

       जिन्दगी एक जीवन है । जो जन्म से लेकर मृत्यु तक को एक किताब कहते हैं। जिसमें जीवन के खटे - मीठी यादों का संग्रह होता है। जो पल दर पल कहानी  देता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
        जिंदगी एक किताब है जो कर्मों से लिखी जाती है. हम जैसे कर्म करते हैं, वैसे ही पन्ने किताब में जुड़ते जाते हैं. होना एक दिन सब का हिसाब है,ज़िंदगी कर्मों से लिखी किताब है. कर्मों का फल तो देर-सवेर मिलना ही है. अच्छे कर्मों का नतीजा भी अच्छा ही मिलता है. कहते हैं कि धृतराष्ट्र बुरा आदमी नहीं था, फिर भी अंधा पैदा हुआ. कारण था 108 जन्म पहले बचपन में शरारत से फूल पर बैठी एक तितली की आंखों में कांटा चुभाना, जिससे वह अंधी हो गई. उसका फल उसे 108 जन्म बाद अंधे पैदा होने के रूप में मिला. जीवन एक किताब की तरह है, क्योंकि इसमें अलग-अलग अध्याय होते हैं. किताब में कुछ अध्याय दुख भरे होते हैं, कुछ सुख भरे. जीवन में भी ऐसा ही होता है, हमारे जीवन में सुख और दुख के पल आते हैं. किताब पढ़ना रहस्यमय होता है, क्योंकि आपको कभी पता नहीं होता कि आगे क्या होने वाला है. जीवन हमें ऐसी प्रतिक्रियाएँ देता है जिनके बारे में हमने सोचा भी नहीं था, खासकर बुरी घटनाएँ. यह सब कर्मों का ही हिसाब है. इसलिए यह भी कहा जाता है कि हम अपनी जिंदगी की किताब खुद ही लिखते हैं. यह किताब कर्मों की स्याही से लिखी जाती है. इसलिए कर्म अच्छे करें तो किताब अच्छी बनेगी.

- लीला तिवानी

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

        अगर हम जिंदगी  के  फलसफे की बात करें तो जिंदगी की हर सुबह एक नया कोरा पन्ना लेकर आती है जिस पर हमारे कर्मों के हिसाब से ही हमारी कहानी लिखी जाती है, हरेक  दिन  नया पन्ना जुडता है, और हर अध्याय नई कहानी  सुनाता है, जिसमें, खुशी, गम, सीख और चुनौतियां भरी होती हैं, तो आईये  आज इसी बात पर चर्चा करते हैं कि जिंदगी एक किताब है, कर्मों का एक हिसाब है, मेरे ख्याल में जिंदगी कि किताब का लेखक  व्यक्ति खुद होता है और हरेक व्यक्ति को अपनी कहानी को संवारने और उसको एक खूबसूरत मोड़ देने का मौका हमेशा रहता है, मगर यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी कहानी को संवारना चाहते हैं या बिगाड़ना, क्योंकि अगर हम अच्छे कर्म करेंगे तो हमारी जिंदगी के पन्नों में रंगत की खुशबू आऐगी अगर बुरे कर्म करेंगे तो खुशबू की जगह बदबू आऐगी और हमारी जिंदगी नरक की भांति दिखेगी, हमारी जिंदगी की किताब का हर एक पन्ना हमें सीख देकर जायेगा बशर्ते हम आज का पन्ना पढ़ कर  आगे का पन्ना लिखें क्योंकि हरेक पन्ने पर हर रोज का हिसाब लिखा जायेगा जिसके कारण वोही पन्ने एक किताब में तब्दील हो जायेंगे जिसको हम जिंदगी की किताब का नाम दे सकते हैं,  देखा जाए आज के कर्म ही कल की कहानी बनते हैं तथा हर दिन नया पन्ना जुड़ता है जबकि पुराने पन्नों से हम सीखते हैं लेकिन उन्हें बदल नहीं सकते केवल अगले पन्नों को बेहतर लिख सकते हैं इसलिए हमें हरेक को प्रयास करना चाहिए कि हम अपनी जिंदगी की किताब को एक प्रेरणादायक कहानी बनाने का प्रयास करें, इसमें खुशी, गम, सीख भरे पन्ने होते हैं जो हमारे भविष्य को उज्जवल बनाने में सहायक होते हैं इसलिए अपनी जिंदगी  की किताब को खूबसूरत मोड़ देने का प्रयास  करें इसके लिए हमें अपने वर्तमान का सुधार करना होगा ताकि हमारे भविष्य के पन्ने बेहतर हो सकें, देखा जाए हमारी जिंदगी का प्रत्येक पन्ना हर दिन का  हिसाब करते, करते जिंदगी के सफर की किताब का रूख ले लेता है और जब हम उस किताब की तरफ पलट मार कर देखते हैं तो हमें शुरू से लेकर जिंदगी के आखिर लम्हे तक का लेखा जोखा पूरे का पूरा दिखाई देने लगता है कि हमने कहां गलती की थी और कहाँ उसको सुधारने का प्रयास किया था, आखिरकार यही कहुंगा कि कर्मों का हिसाब केवल एक सिद्धांत नहीं बल्कि एक हकीकत है, इसलिए अपनी जीवन रूपी किताब में कर्मों की स्याही हमेशा  अच्छाई और निस्वार्थ सेवा से भरें क्योंकि जीवन में आने वाले अच्छे बुरे हालात हमारे कर्मों का ही रिप्ले हैं इसलिए उन हालातों के प्रति हमारी प्रतिक्रिया ही हमारा अगला कर्म तय करती है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू  व कश्मीर

      जिन्दगी को अक्सर हम एक लंबी यात्रा के रूप में देखते हैं। लेकिन इसे अगर एक किताब के रूप में समझें, तो हर दिन, हर अनुभव, हर निर्णय एक पृष्ठ है। हमारे कर्म—अच्छे हों या बुरे—वही पन्नों पर अंकित होते हैं। जैसे किताब में हर पन्ने का महत्व होता है, वैसे ही हमारे जीवन के हर क्षण की भूमिका होती है। कभी-कभी कुछ पन्ने हँसी और खुशी से भरे होते हैं, तो कुछ दुख और संघर्ष के अनुभवों से। पर दोनों ही जरूरी हैं, क्योंकि ये हमें सिखाते हैं, हमें बदलते हैं और हमारी आत्मा को परिपक्व बनाते हैं। कर्मों का हिसाब केवल भविष्य की किसी दिव्य न्यायालय में नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और मन के भीतर होता है। हमारी भावनाएँ, हमारे निर्णय, और हमारे कार्य—सभी मिलकर यह तय करते हैं कि हमारे जीवन की किताब कैसी बनेगी। इस विचार से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने कर्मों में सजग और ईमानदार रहना चाहिए। हमारे शब्दों और क्रियाओं का प्रभाव केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि समाज और आसपास के लोगों के लिए भी गहरा होता है। जैसा कि पुराने गुरुओं और धर्मग्रंथों में कहा गया है—“जैसा कर्म, वैसा फल”—हमारे कर्म हमारी कहानी लिखते हैं। यदि हम दूसरों के लिए स्नेह, प्रेम और सेवा का बीज बोते हैं, तो हमारा जीवन भी उसी तरह सुंदर और फलदायी बनता है। इस दृष्टि से, जीवन की किताब केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि हमारी आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है। हर पन्ना एक अवसर है—सुधार का, सीखने का, और अपने कर्मों के सही हिसाब को समझने का।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

        जिंदगी की किताब में कर्मों का हिसाब ही होता है। ऐसा कह सकते हैं कि जिंदगी में  सबकुछ कर्मों के अनुसार ही निर्धारित रहता है। इसमें अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के कर्मों का योगदान होता है।कर्मभोग ही जिंदगी है, ऐसा भी कह सकते हैं। कहा गया है -अवश्यमेव भोक्तव्यं शुभाशुभकर्म फलम्। अर्थात शुभ,अशुभ कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। अनेकानेक उदाहरण इस संबंध में दिए जा सकते हैं। कर्मफल‌ सिद्धांत के अनुसार बुरे कर्मों का परिणाम दुखद और अच्छे कर्मों का परिणाम सुखद होता है। इसलिए प्रयास करना चाहिए कि कौन बुरा कर्म हमसे न हो।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

          ज़िन्दगी एक किताब है जिसके हर पन्नों में हिसाब लिखा होता है जिसे आँकना , सही मूल्यांकन कर दिशा निर्देश की ओर बढ़ना लक्ष्य प्राप्ति है समिति साधनों से पूर्णता की ओर बढ़ना वह व्यक्ति स्वयं जान सकता कहाँ सही कहाँ ग़लत है ! पर जैसे ही दूसरों को सुधारने का प्रयास विचार मन में लाता है स्वयं का विवेक लोकाचार के वशीभूत काम करना बंद कर देता है ! विरले ही होते है जो जबान में सच की कड़वाहट शहद की मिठास लिए अपने सत्कर्मों से दूसरों की जिंदगी के वर्षों का हिसाब किताब का निर्वहन करता है कहते है पोथी पढ़ पंडित भया एक प्रसिद्ध मुहावरा है, जिसका अर्थ है कि किसी ने बहुत पढ़ाई की है, लेकिन उसका व्यवहार या ज्ञान उससे मेल नहीं खाता। यह मुहावरा अक्सर उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो बहुत पढ़े-लिखे हैं, लेकिन उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है।किताबी ज्ञान के महत्व तभी है जब हम उसे अपने जीवन में आचार विचार व्यवहार आचरण के साथ लागू करते है किताबों की पढ़ाई में ज्ञान को महत्व देते है। साक्ष के लिए साक्षरता का अनुभव पोथी के रूप में होना जरूरी है ! जिसने वर्षों से लिखी वेदों का रहस्य पढ़ लिख जान लिया !जब उसको भूख सकती ही तो दूसरों को अपने जीवन को समझ दूसरों का जीवनयापन करना जरूरी है  

- अनीता शरद झा 

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

       कर्म से ही जिंदगी बनती है और कर्मों का तो हिसाब-किताब होता ही है. एक जीवन में मनुष्य जितना कर्म करता है उन सबका हिसाब-किताब ज्यों का त्यों लिखा जाता है. इसलिए मनुष्य का जीवन एक किताब की तरह हो जाता है. जिसके पन्ने पलटने पर सारे कर्मों का हिसाब-किताब पता चल जाता है. जिससे उसकी जिंदगी बनी हुई होती है. जैसे कोई किताब रोचक होता है तो कोई निरस. उसी तरह मनुष्य का जीवन भी होता है. किसी का बहुत मशहूर किसी का गुमनाम.  ये सब सारे उसके कर्मों के अनुसार ही हो सकता है या होता है. अगर कहा जाए तो मनुष्य का पूरा जीवन एक उपन्यास की तरह भी होता है. जो कर्मों के अनुसार सफल या असफल होता है. इसलिए हम कह सकते हैं कि जिंदगी एक किताब है और उसके कर्मों का हिसाब है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

         देखा जाए समझा जाए तो यह सच है हम सभी मनुष्यों की जिंदगी अपने उम्र की हर अवस्था के प्रतिदिन के क्रियाकलापों से लिखी हुई एक किताब ही है । कभी-कभी, कोई- कोई अपनी दैनंदिनी में बौद्धिक रूप से सजग होकर लेखकीय डायरी स्मृति रूप में अंकित कर ली जाती है। क्या पाया? क्या खोया के रोचक किस्सों को कभी-कभी दूसरों से भी शेयर करते हैं। वास्तव में देखा जाए तो आजीवन हमने परिवार, समाज ,राष्ट्र के हित में जो भी मानवीय, अमानवीय  कर्म किए होते हैं, उन सबका एक गणितीय हिसाब होता है जैसा भी कर्म,यथा-- दीन- दुखियों की सेवा, सभी से मैत्री व्यवहार, दान- पुण्य, परोपकार, गरीबों के हितार्थ तन मन धन से समर्पित  कर्मों का फल कभी-कभी इस जिंदगी में ही सुख कारक हो जाता है। यदि पिछले जन्म के कर्मों के गलत परिणाम लाभदायक ना भी हों, फिर भी अगले जन्मों के लिए तो इस जिंदगी में अच्छे कर्मों से हिसाब कर ही देते हैं और नहीं भी करते हैं तो करना चाहिए क्योंकि यह मानकर चलना होगा" जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान । यह है गीता का ज्ञान" ।

- डाॅ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

       जिंदगी की किताब जितनी सरल है उतनी ही जटिल भी है। - - - कठिन नहीं है - - जटिल है। इस किताब में कर्मो का हिसाब होता है - - ऐसा विश्वास हर इंसान के भीतर सहज ही रहता है। भारतीय मानस वैसे भी धर्म भीरु होता है। कर्म और धर्म के आसपास घूमता है हिन्दुस्तान का जन मानस। जिंदगी में हमसे कुछ बुरे कर्म ना हों - - इस गरिमामय विचार के साथ सच्चे ह्दय तिरते रहते हैं। चींटी भी पांव के नीचे न आने पाये - - बचपन से इन संस्कारों में पला मानस जिंदगी की किताब पर बधाईयाँ और अभिनंदन ही लिखता है - - और यदि गलती से कुछ गलत घटित हो जाये तो वह दुखी होता रहता है। तो स्वाभाविक है कि ऐसे व्यक्ति जिंदगी की किताब पर बहुत सोच समझकर अक्षर उकेरते हैं अर्थात सदैव अच्छे कर्म करने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। निःसंदेह ऐसे जनमानस किसी देश की सच्ची संपत्ति होते हैं। जरूरत इ. बात की है कि ऐसे लोगों को पहचानें और उनके साथ चलें आप पायेंगे कि आपका जीवन स्वस्थ सहज सरल होगा। आप समाज में सम्मानित व्यक्तित्व होंगें।

- हेमलता मिश्र मानवी

 नागपुर - महाराष्ट्र

    कहा गया है कि हर कोई अपनी आत्मकथा लिखे तो वह एक अच्छा उपन्यास होगा। जीवन में इतने उतार-चढ़ाव आते हैं, ऐसी-ऐसी अनचाही और अनजानी, होनी-अनहोनी आकस्मिक घटनाएं होती हैं।  कोई रुलाने वाली होती हैं तो कोई मनमोहक होती हैं। कुलमिलाकर एक अच्छी कहानी, एक बढ़िया किताब। फिर उसकी समीक्षा कीजिए। किस वजह से...क्याई हुआ? ,क्या मिला, क्या नहीं मिला? क्या मिलते-मिलते रह गया? क्या मिलता गया? सब कुछ जिंदगी की इस किताब में और कर्मो का हिसाब भी इसी किताब में। मनुष्य का जीवन सहज,सरल और सरस भी है और समझने के लिए क्लिष्ट के साथ-साथ विचित्र और व्यापक भी। जीवन दर्शन,आध्यात्म से निहित यह जीवन ईश्वर का अनुपम उपहार है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमें मनुष्य जीवन मिला है और जीने के साथ-साथ करने और कहने का अवसर भी। इसमें तानाशाही नहीं, सौहार्द्रता महत्वपूर्ण है।इंसानियत और नैतिकता आवश्यक है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

        जिंदगी सच में एक किताब की तरह होती है, जिसमें हर दिन एक नया पन्ना जुड़ता है। हम जो भी सोचते हैं, बोलते हैं और करते हैं, वही उस किताब में लिखता चला जाता है। अच्छे कर्म उस किताब के सुंदर अध्याय बनते हैं, जो जीवन को सम्मान, सुख और संतोष देते हैं। वहीं गलत कर्म ऐसे पन्ने बन जाते हैं जिन्हें पढ़कर मन को पछतावा होता है।इसलिए यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि जीवन में हर कर्म का महत्व है। आज हम जो बीज बोते हैं, कल उसी का फल हमें मिलता है। अगर हम ईमानदारी, प्रेम और अच्छाई से जीवन जिएँ, तो हमारी “जिंदगी की किताब” भी प्रेरणा देने वाली कहानी बन सकती है। संक्षेप में, यह वाक्य हमें जिम्मेदारी से जीना और अपने कर्मों को अच्छा रखने की सीख देता है। 

- सुनीता गुप्ता 

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

      ज़िन्दगी एक किताब है, कर्मों का एक हिसाब है”—यह पंक्ति मानव जीवन के गहन सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है, क्योंकि वास्तव में मनुष्य का जीवन एक ऐसी पुस्तक की भाँति है जिसका प्रत्येक पृष्ठ उसके विचारों, निर्णयों और कर्मों से लिखा जाता है। समय के साथ यह जीवन-पुस्तक स्वयं ही एक लेखा-जोखा बन जाती है जिसमें अच्छे और बुरे सभी कर्म दर्ज होते रहते हैं। पद, प्रतिष्ठा, शक्ति या संपत्ति क्षणिक हो सकते हैं, परन्तु मनुष्य के कर्म ही उसकी वास्तविक पहचान और विरासत बनते हैं। जब व्यक्ति यह समझ लेता है कि उसके प्रत्येक कर्म का प्रभाव समाज, राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचता है, तब वह सत्य, न्याय, नैतिकता और मानवता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित होता है। इसलिए यह पंक्ति केवल काव्यात्मक अभिव्यक्ति नहीं बल्कि आत्ममंथन, उत्तरदायित्व और सकारात्मक जीवन जीने का प्रेरणास्रोत है, जो हमें यह संदेश देती है कि अपनी जीवन-किताब को ऐसे श्रेष्ठ कर्मों से भरें जिन पर समाज, इतिहास और आने वाली पीढ़ियाँ गर्व कर सकें। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

    जिंदगी एक किताब है, कर्मों का एक हिसाब है।जिंदगी सचमुच एक ऐसी किताब है, जिसमें हर दिन एक नया पन्ना जुड़ता जाता है। इस किताब में हमारे विचार, हमारे कर्म और हमारे निर्णय शब्दों की तरह लिखे जाते हैं। जो अच्छा करते हैं, वह उजले अक्षरों में दर्ज हो जाता है और जो गलत करते हैं, वह भी कहीं न कहीं अपनी छाप छोड़ देता है।कर्म ही जीवन का वास्तविक आधार हैं। मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल उसे मिलता है। इसलिए कहा जाता है कि जिंदगी एक किताब है और कर्म उसका हिसाब। अगर हम अपने कर्म अच्छे रखें, तो जीवन की यह किताब भी सुंदर और प्रेरणादायक बन जाती है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

     जिंदगी एक किताब है, कर्मों का एक हिसाब है.... यही सत्य है, जिंदगी एक खुली किताब ही तो है , जिसके हर पन्ने पर हमारे सुख-दुख, हमारे द्वारा किए गए अच्छे, बुरे कर्मों का लेखा जोखा होता है। इसके हर अध्याय में हमारे कर्मों का ही तो हिसाब लिखा होता है जिसे हमें यहीं चुकाना होता है। कर्मों के अनुसार ही हमारा भाग्य बनता है और हमारी दिशा तय होती है इसलिए हमें सदा नेक कर्म करना चाहिए। और हमारे विचार सदा सकारात्मक होने चाहिए।

- चंद्रिका व्यास 

 मुंबई‌- महाराष्ट्र 

      जिंदगी सच में एक किताब की तरह होती है, जिसमें हर दिन एक नया पन्ना जुड़ता है | कभी  कोई नई तूल ले जो पकडता है| वाह , कितना गहरा विचार है!  जिंदगी की तुलना एक किताब से करना वाकई में बहुत अच्छा है, हर  घटना को जोड कहानी, नए अनुभव और नए सबक सा लेकर आता है। वचपन पसंदीदा पन्ना होता है |जी बिल्कुल! जिंदगी  किताब की तरह देखने की उपयोगिता यह है कि हर सोच हर दिन को नए अवसर के रूप में देखने के लिए प्रेरित करती है, जहां हम कुछ नया सीख सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। बहाँ  हमें जीवन की चुनौतियों को एक नए प्रयोग  की तरह देखने के लिए प्रेरित करता है, वहां हम अपने अनुभव और ज्ञान का उपयोग करके ख़ुशी होती  हैं।इस दौड मे जीवन के हर पल को महत्व देने और उसका आनंद लेने के लिए प्रेरित होते है, क्योंकि हर पाना  सफलता धोतक होता है |जो हमें हर दिन को एक नए अवसर के रूप में देखने के लिए प्रेरित करता है | वहां हम कुछ नया सीखते हैं और अपने जीवन को बेहतर सा अनुभवी इन्सान बना सकते हैं।

- रेखा मोहन 

पटियाला - पजाब 

      हमारी जिंदगी एक किताब की तरह ही है जिसका पन्ना हम रोज लिखते हैं जिस प्रकार  लिखने में कुछ गलती हो जाती है ,पढ़ कर देखते हैं उसको फिर काटते हैं मिटाते हैं या छुपाते हैं फिर पलटकर अगला पन्ना लिखते हैं इस प्रकार नोट्स बनते चले जाते हैं धीरे-धीरे एक दिन किताब पूरी हो जाती है । सही कहा जिंदगी एक किताब है,कर्मों का हिसाब पढ़कर स्वर्ग -नरक सा लगता है  जिंदगी कोई फाइनल एग्जाम नहीं है कि रिजल्ट लास्ट में मिलेगा । यह जिंदगी तो रफ काफी के समान है रोज लिखो- पढ़ो- कुछ कुछ गलत लिखा तो उसे काटो यानि अपने दैनिक जीवन में कुछ सुधार करो करते हैं अनुभव से जब कुछ सीखते हैं तो  हिसाब अपने आप बनता चला जाएगा। अपनी जिंदगी के हम ही लेखक हैं और हम ही संपादक हैं हमारी आदतें एक अध्याय हैं और हमारी नियत हमारी भूमिका (रोल) है हिसाब का मतलब जो हमने लिखा वही पढ़ाया जाएगा ना। यानि जैसा कर्म करेंगे, वो साथ ही फल पाएंगे

- रंजना हरित 

बिजनौर - उत्तर प्रदेश 

        जिंदगी एक किताब है कर्मों का एक हिसाब है निसंदेह, एक किताब की तरह ही तो होती है जिंदगी। दिवस अनुसार घटनाक्रम के अनगिनत पेज एक-एक करके खुलते हैं। हर दिन किए गए कार्य का हिसाब भी चलता रहता है। समय आने पर जिसका परिणाम निकलता है। हर एक जिंदगी की एक अलग किताब होती है। जिसे कोई एडवांस में पढ़ नहीं पाता। ताश के पत्तों की तरह हर दिन पेज खुलते हैं और नए घटनाक्रम होता है। 

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " कर्मो को हिसाब अवश्य होता है। जो अपने आप में किताब से कम नहीं है। वास्तव में क्रिया - प्रतिक्रिया का नियम कर्मो पर लागू होता है। यही वास्तविकता है। यही सच्चाई है। फिर भी कर्म के फल का परिणाम आता है। यह प्राकृतिक व्यवस्था है। जिससे भागा नहीं जा सकता है।

              - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)

Comments

  1. आदरणीय,
    मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का क्षण है कि मुझे जैमिनी अकादमी, पानीपत (हरियाणा) द्वारा “यशवंतराव चव्हाण स्मृति सम्मान” से अलंकृत किया गया।
    यशवंतराव चव्हाण, महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री, जिन्होंने समाज, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में अपार योगदान दिया, उनके स्मृति सम्मान से मुझे सम्मानित करना मेरे लिए न केवल गौरव की बात है, बल्कि उनकी दूरदर्शिता और समाज सेवा के आदर्शों के साथ जुड़ने का अवसर भी है।
    यह सम्मान मेरे हृदय को गहन आनंद और उत्साह से भर देता है। मैं इसे समर्पित करती हूँ उन सभी आदरणीय व्यक्तियों, मार्गदर्शकों और प्रियजनों को, जिनकी प्रेरणा, स्नेह और सहयोग ने मुझे इस मुकाम तक पहुँचाया। इस सम्मान के साथ मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है—मैं प्रण करती हूँ कि अपने कलम और कर्म के माध्यम से साहित्य, शिक्षा और समाज सेवा में यथासंभव योगदान करती रहूँगी। सादर और हृदय से आभार सहित,
    - डॉ. छाया शर्मा
    अजमेर - राजस्थान
    (WhatsApp से साभार)

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

हिन्दी के प्रमुख लघुकथाकार ( ई - लघुकथा संकलन ) - सम्पादक : बीजेन्द्र जैमिनी

दुनियां के सामने जन्मदिन

हिन्दी की प्रमुख महिला लघुकथाकार ( ई लघुकथा संकलन ) - सम्पादक : बीजेन्द्र जैमिनी