- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - पं. बंगाल
सफलता का रहस्य उद्देश्य में है और उद्देश्य की सफलता कर्म में निहित है। यह जीवन का शाश्वत सूत्र है कि बिना लक्ष्य के व्यक्ति केवल घटनाओं का भाग बनकर रह जाता है, परन्तु स्पष्ट उद्देश्य मनुष्य को घटनाओं का निर्माता बनाता है। उद्देश्य हमारे जीवन को दिशा और कर्म उस दिशा में चलने की शक्ति देता है। यदि केवल स्वप्न देखना सफलता होता, तो प्रत्येक व्यक्ति विजेता कहलाता, लेकिन सच्चाई यह है कि मात्र सपने नहीं, उन्हें पूरा करने का साहस, त्याग और कठिन परिश्रम ही हमें ऊंचाइयों तक ले जाते हैं। बर्बादियॉं सिर चढ़कर बोलती हैं। जीवन शून्य हो जाता है और शून्य जब किसी के साथ मिलता है तो चुनौतियाँ बढ़ती हैं, परिस्थितियाँ असहाय करती हैं, संघर्ष थकाने लगता है, यही समय सच्चे योद्धा की पहचाना होती है। उल्लेखनीय है कि जो लोग अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहते हैं, वे असफलताओं के पत्थरों को सीढ़ियों में बदल देते हैं। इतिहास उठाकर देखिए, सफलता किसी के घर दस्तक देकर नहीं आई; लोग उठे, टूटे, फिर संभले, घास की रोटियॉं खाईं, कॉंटों की सेज पर सोये और हजारों असफलताओं के बाद विजयी हुए। उद्देश्य महान और कर्म निष्कपट हो तो ईश्वर भी सफलता के द्वार खोल देता है। वर्णननीय है कि हमारे समाज और राष्ट्र को भी ऐसे ही कर्मयोद्धाओं की आवश्यकता है जो केवल बातें न करें, काम करें; जो शिकायतें न गिनाएं, समाधान निर्माण करें; जो निराशा नहीं फैलाएं, बल्कि आशा की किरण जगाएं। मनुष्य का जन्म केवल सांस लेने के लिए नहीं, बल्कि अपनी क्षमता के सर्वोच्च शिखर को छूने के लिए हुआ है। कर्म की अग्नि में तपे बिना सोना चमकता नहीं, उसी प्रकार प्रयास के बिना सफलता प्राप्त नहीं होती। यही वह मन्त्र है जिसे हर व्यक्ति, हर युवा, हर नागरिक की आत्मा में उतारने की आवश्यकता है जो लक्ष्य तय करें, तैयारी करें, और निरन्तर आगे बढ़ें। उन्हें चाहिए कि वे हार से डरें नहीं, असफलता से शर्माएं नहीं, क्योंकि असफलता ही सफलता की जननी है। जिस दिन मनुष्य अपने उद्देश्य को धर्म और अपने कर्म को पूजा मान लेता है, उसी दिन वह साधारण से असाधारण बन जाता है। अतः, जीवन में ऊंचाई चाहिए तो उद्देश्य को सशक्त करो और कर्म को सर्वोच्च स्थान दो। क्योंकि कर्महीन व्यक्ति का जीवन व्यर्थ है और उद्देश्यहीन कर्म अंधकार है। सफल वही है जो उद्देश्य को कर्म के माध्यम से वास्तविकता में बदल दे। यही जीवन का सत्य है और यही विजय का मार्ग है और सर्वविदित है इस असाधारण मार्ग पर असाधारण लोग ही चलते। समाज भले उन्हें पागल की संज्ञा दे अथवा विद्वान कहे, उन्हें कोई सरोकार नहीं होता है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू)-जम्मू और कश्मीर
“सफलता का रहस्य उद्देश्य में है, उद्देश्य की सफलता कर्म में है” यह कथन मानव जीवन के दिशा–निर्धारण और साधना–मार्ग दोनों को स्पष्ट करता है। केवल सफल होना ही लक्ष्य नहीं, बल्कि किस उद्देश्य के लिए सफल होना है,यही जीवन का मूल प्रश्न है।
1. उद्देश्य : सफलता की आत्मा है।
उद्देश्य वह ध्रुवतारा है जो जीवन को दिशा देता है। बिना उद्देश्य के सफलता क्षणिक उपलब्धि बनकर रह जाती है—धन, पद या प्रशंसा तक सीमित।
उद्देश्य जब स्पष्ट होता है, तभी मन, बुद्धि और ऊर्जा एक बिंदु पर केंद्रित होती है। महात्मा गांधी का उद्देश्य केवल स्वतंत्रता नहीं था, बल्कि नैतिक स्वतंत्रता; यही कारण है कि उनकी सफलता इतिहास बन गई।
2. कर्म : उद्देश्य की कसौटी।
उद्देश्य केवल विचार बनकर रह जाए तो वह भ्रम है। उसकी वास्तविक परीक्षा कर्म में होती है।
कर्म वह पुल है जो सोच और सिद्धि को जोड़ता है। गीता का सिद्धांत— “कर्मण्येवाधिकारस्ते”—यही सिखाता है कि उद्देश्य की शुद्धता कर्म की निरंतरता से सिद्ध होती है, परिणाम की आसक्ति से नहीं।
3. उद्देश्य बिना कर्म — दिवास्वप्न है।
केवल बड़े लक्ष्य तय कर लेना सफलता नहीं है।
जो उद्देश्य कर्म से नहीं जुड़ता, वह भाषण बन जाता है;
जो कर्म उद्देश्य से नहीं जुड़ता, वह श्रम बनकर रह जाता है।
4. कर्म बिना उद्देश्य — दिशाहीन परिश्रम है।
आज की दौड़ती दुनिया में अनेक लोग अत्यधिक परिश्रम कर रहे हैं, पर संतोष से वंचित हैं—क्योंकि कर्म तो है, पर उद्देश्य स्पष्ट नहीं। ऐसा कर्म थकान देता है, तृप्ति नहीं।
5. समन्वय : जीवन की सच्ची सफलता है।
जब उद्देश्य स्पष्ट, नैतिक और समाजोपयोगी होता है और कर्म सतत, अनुशासित व ईमानदार तब सफलता केवल व्यक्ति की नहीं, समाज की उपलब्धि बन जाती है।
इस प्रकार हम कह सकते हैं,
सफलता का रहस्य केवल ऊँचाइयों को छूने में नहीं,
बल्कि यह जानने में है कि क्यों छूना है और उस उद्देश्य को पाने की सफलता इस बात में है कि हम कितनी निष्ठा से कर्म करते हैं।
उद्देश्य दिशा देता है,
कर्म गति देता है—
दोनों का संगम ही
सार्थक सफलता है।
- डाॅ.छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
ईश्वर ने हमें विविध कलाओं की सौगात भी दी हैं और सामर्थ्य भी। जिनका वे समय-समय पर हमें पल भर के लिए संकेत भी कराते हैं और आभास भी। इस संकेत और आभास को हम यदि तत्काल समझ लेते हैं तो वही हमारे लिए अवसर और फिर वही हमारा उद्देश्य बन जाता है। तत्पश्चात, उस उद्देश्य के लिए हमारे फिर किए गए प्रयास यानी कर्म के अनुसार ही सफलता मिलती है। यदि हम ईश्वर के इस संकेत को समझने में भूल-चूक कर देते हैं और अन्य किसी वजह से कोई ऐसा उद्देश्य चयन कर लेते हैं तब वह हमारे लिए भटकाव का कारण बन जाता है और हम असफल हो जाते हैं। मेरा ऐसा मानना है कि असफल होना और सफल न होना दोनों के अलग-अलग कारक और कारण होते हैं। असफल होना यानी उद्देश्य का गलत चयन अर्थात आपकी रुचि और काबिलियत के विपरीत का चयन होगा, जबकि सफल न होना यानी संबंधित उद्देश्य पूर्त्ति के लिए पूरी लगन और निष्ठा के साथ प्रयास न करना। सा यह कि ईश्वरीय इस सूक्ष्म- सौगात को सीधे और सरल भाषा में कहना यही होगा कि ' सफलता का रहस्य उद्देश्य में है और उद्देश्य की सफलता कर्म में है। अत: किसी उदेश्य का संकल्प लेने के पूर्व हमें अपनी योग्यता और सामर्थ्य का भी आकलन कर लेना चाहिए।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
सफलता का रहस्य उद्देश्य मैं है क्योंकि बिना उद्देश्य के कोई प्रयास नहीं होता !! मनुष्य एक निश्चित उद्देश्य की पूर्ति , अथवा लक्ष्य की प्राप्ति हेतु , यथासंभव परिश्रम करता है , कर्म करता है , व उद्देश्य पूर्ति की दिशा मैं आगे बढ़ता है ! यदि एक प्रयास से यह पूर्ण नहीं होता , तो अपनी कमियों का विश्लेषण कर , पुनः नवीन उत्साह से प्रयत्न करता है , व अपने उद्देश्य की पूर्ति करता है ! जिस मनुष्य के जीवन में कोई उद्देश ही नहीं , वो जिसकी जिंदगी में खाना , पीना , सोना , ही लिखा है , उसे सफलता नहीं मिल सकती क्योंकि सफलता के लिए उद्देश आवश्यक है , व इसकी प्राप्ति के लिए , उचित दिशा में कर्म !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
इस संसार में कोई भी ऐसा इंसान नहीं है जो अपने कार्यों में सफल नहीं होना चाहता लेकिन बहुत से लोग सफलता को पाने में कामयाबी हासिल नहीं कर पाते क्योंकि वो उदेश्य और कर्म को आगे रख कर नहीं चलते और बिना नियम के कार्यों को हाथ में लेकर चलते हैं जिससे उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाती क्योंकि वो सफलता का रहस्य नहीं जानते तो आईये आज इसी विषय पर चर्चा करते हैं की सफलता का रहस्य उदेश्य में है और उदेश्य की सफलता कर्म में है,मेरा मानना है कि इंसान का उदेश्य ही सफलता का रहस्य है क्योंकि उदेश्य ही मुश्किल हालात में प्रेरित रखता है और उदेश्य की भावना के बिना दिशा खोना अपनी राह से पलट जाना आसान है अगर एक स्पष्ट और सार्थक लक्ष्य को पाना हो तो हमें दृढ़ संकल्प और अच्छे विचारों की जरूरत होती है इसलिए हमें अपने गुणों,निर्णयों और लक्ष्यों को ध्यान में रखना होगा तथा खुद पर विश्वास रखना होगा , देखा गया है जो लोग लक्ष्य को लेकर चलते हैं वो अक्सर कामयाबी हासिल कर लेते हैं क्योंकि लक्ष्य ही हमें सही राह की प्रेरणा देता है और सही दिशा प्रदान करता है यही नहीं सफलता के लिए उदेश्य, योजनाएं, एकाग्रता और प्रेरणा इत्यादि बहुत महत्वपूर्ण हैं इसके साथ साथ जीवन में उदेश्य खोजना हमारे कर्मों पर निर्भर करता है क्योंकि हमारे कर्म ही हमारे उदेश्यों की दिशा दिखाते हैं सच भी है हमारा कर्म हमेशा उदेश्य से भरपूर हो तो हमारी कामयाबी निश्चित होती है यही नहीं इसके साथ हमारे विचार,व्यवहार और कार्य हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं कहने का भाव अच्छे कर्म ही उन्नति का मार्ग खोलते हैं और कर्मों रहित भाग्य अर्थहीन होता है ,कर्म ही हमारे वर्तमान और भविष्य को आकार देते हैं तथा हमारे विचार, व्यवहार और कार्यों सभी का प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है अन्त में यही कहुंगा की अच्छे कर्म ही मानसिक सुख और उन्नति की तरफ ले जाते हैं इसलिए सफलता पाने का रहस्य उदेश्य में है और उदेश्य की सफलता हमारे कर्मों में है जब हम उदेश्य रख कर अच्छे कर्म करते हैं तो हम अवश्य कामयाबी हासिल करते हैं तभी तो कहा है कर्म किए जा फल की इच्छा मत करना इंसान जैसे कर्म करेगा वैसा फल देंगे भगवान ।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
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