सखाराम गणेश देउस्कर स्मृति सम्मान - 2025
मनुष्य जीवन जब कभी अंधेरों में घिरा है तो ज्ञान रूपी दीपक ने हीं उसे आगे बढ़ने की रोशनी दिखाई है। इसलिए उसकी सफलता का आधार ज्ञान ही बना है। इसी आधार पर कह सकते हैं कि कर्म का आधार भी ज्ञान है। जैमिनी अकादमी द्वारा चर्चा-परिचर्चा हेतु यही विषय विद्वजनों के सामने रखा है। यह सत्य है कि कर्म फल हेतु मनुष्य ने अपनी राहों को सुगम बनाने के लिए ज्ञान रूपी मशाल को विभिन्न ऊर्जा साधनों व ज्ञान स्त्रोतों से त्वरित करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर्म पथ की बाधाओं को हटाते हुए, अपने लक्ष्य को प्राप्त किया है। इसलिए प्रश्न उठता है कि क्या बिना ज्ञान के कर्म को कर्मशील बनाया जा सकता है। इस इस प्रश्न का उत्तर भी यही है कि ज्ञान ही वह स्त्रोत है, जिससे युगों-युगों से मानव सभ्यता परिष्कृत होती हुई वर्तमान तक पहुंची है और इसी ज्ञान की धरोहर को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हम और आप हस्तांतरित करते आए हैं। हमारा सौभाग्य रहा है कि हम उसे भारत के भारतवंशी हैं , जो विश्व गुरु रहा है। जिसने सारे विश्व को अपने ज्ञान रूपी कोश से समृद्ध किया है। भले ही आक्रांताओं ने इसे तहस-नहस करने के लिए सदियों से कोशिश की है। बहुतों ने उसे चुराया है और उसके आधार पर पृथ्वी को चपटी कहने वाले आज अपने आप को ज्ञानी, विकसित और सभ्य कहलाते हैं। भले इसके पीछे हमारे ब्रेन-ड्रेन वाली युवा शक्ति ही है। हमें गर्व है अपनी सनातन संस्कृति पर चाहे वह विश्व का पहला ग्रंथ ऋग्वेद हो हमारे वेद शास्त्र इस बात का प्रमाण है कि शाश्वत ज्ञान रूपी गंगा इस भारत माता पर अनवरत बहती आई है और बहती जा रही है। हम आज भी विश्व को राह दिखा रहे हैं। और भविष्य में भी दिखाते रहेंगे। अपेक्षा सिर्फ इस बात की है कि हम उन शक्तियों से अपनी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा कर सकें, जो इसे फलते-फूलते नहीं देखना चाहते और इसके पीछे पड़े हुए हैं। यदि हम इस ऐसा करने में सफल हो जाते हैं तो, प्रत्येक भारतीय सत्कर्म से आगे बढ़ता हुआ अपने ज्ञान कोष को समृद्ध करते हुए कर्म क्षेत्र के प्रकाश से अपने साथ, अपने देश और विश्व को आलोकित करता रहेगा। निष्कर्ष स्वरूप या कहा जा सकता है कि सफलता का आधार ज्ञान है और कर्म का आधार ज्ञान है।
- डॉ. रवीन्द्र कुमार ठाकुर
बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश
जीवन के किसी क्षेत्र में सफलता का वास्तविक आधार क्या ज्ञान है ? समझना होगा । सर्वप्रथम हम अपने व्यवहार जगत के विकास हेतु क्रियान्वित तथ्यों पर ध्यान आकर्षित करें जैसे किसी कार्य की उपयोगिता को समझ कर पक्का निर्णय लेना और फिर उसकी सम्पन्नता ,समाधान के दौरान आने वाली चुनौतियों से भली प्रकार डटकर सामना करने के लिए तैयार करना। फिर अच्छे सफल परिणाम के लिए दूसरों से सहयोग लेना और देना भी जरूरी है क्योंकि प्राप्त ज्ञान के तदनुरूप कार्य करना सहज होगा। उतार-चढ़ाव की स्थितियां भी आएंगी , इसके लिए मानसिक संतुलन बनाकर रखेंगे तो तद्जनित ज्ञान में कर्म फलदायक तथा सफलता का कारक सिद्ध हो जाता है अन्यथा अधकचरा ज्ञान सफलता नहीं दे सकता । यथा एक विद्यार्थी ,नौकरी पेशा, व्यवसायी, उच्चपदस्थ राजनीतिज्ञ,धार्मिक प्रवचनकारी संत सभी के लिए अपने-अपने क्षेत्र में सफल होने के लिए प्रारंभ में तदविषयक पूर्ण जानकारी रखना आवश्यक है, अन्यथा असफलता, भटकाव,उपहास का पात्र बनना पड़ता है।
- डाॅ.रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
ज्ञान के अनुरूप ही कर्म होते हैं और उनके अनुसार ही सफलता मिलती है।ज्ञान का सही दिशा में उपयोग हो,विवेक पूर्वक जनहित और राष्ट्रीय हित में सकारात्मक प्रयोग हो तो सफलता की अद्वितीय कहानी बनती है जो अनेकानेक लोगों को प्रेरित करती है। यदि इस ज्ञान का नकारात्मक प्रयोग समाज की हानि के लिए किया जाए तो फिर भयावह दर्दनाक मंजर होता है। आंतकी घटनाएं ज्ञान का नकारात्मक प्रयोग ही होती है। जबकि न्यू स्टार्टअप जैसे कार्य ज्ञान का सकारात्मक प्रयोग है,जो केवल अपनी सफलता का आधार ही नहीं बनते बल्कि अनेकानेक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। ज्ञान का हमेशा सकारात्मक उपयोग ही करना चाहिए।
- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'
धामपुर - उत्तर प्रदेश
सफलता उन्हीं को मिलती है जिन्हें ज्ञान होता है, क्योंकि ज्ञान ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा हम सही और गलत में अंतर करना सीखते हैं। बिना ज्ञान के किया गया कार्य दिशाहीन होता है और अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता। ज्ञान ही हमें लक्ष्य तय करने, साधन चुनने और परिस्थितियों को समझने की क्षमता प्रदान करता है।इसी प्रकार अच्छा कर्म भी वह व्यक्ति ही करेगा जिसके पास ज्ञान होता है, और जब कर्म ज्ञान से जुड़ता है, तब वह सार्थक, नैतिक और फलदायी बन जाता है। अज्ञानता से किया गया कर्म कभी-कभी परिश्रम तो बहुत दिखाता है, परंतु उसमें स्थायित्व और सफलता का अभाव हमेशा बना रहता है। ज्ञान कर्म को विवेक देता है और विवेक कर्म को ऊँचाई तक पहुँचाता है।अतः कहा जा सकता है कि ज्ञान उस जलते हुए दीपक के समान है, जो कर्म के मार्ग को तो प्रकाशित करता ही है और साथ में सफलता तक पहुँचने का सही रास्ता भी दिखाता है। ज्ञान, कर्म और सफलता ये त्रिसूत्र यदि किसी व्यक्ति के जीवन में समा जाएं तो उसका जीवन सार्थक बन जाता है।
- नूतन गर्ग
दिल्ली
सफलता का आधार ज्ञान है, क्योंकि ज्ञान वह पहली सीढ़ी है जो जीवन के हर लक्ष्य को वास्तविकता से जोड़ती है। ज्ञान व्यक्ति को यह समझ देता है कि उसे क्या करना है, क्यों करना है और कैसे करना है। बिना ज्ञान के तो सफलता संयोगभर हो सकती है, पर ज्ञान से प्राप्त सफलता स्थायी होती है, सम्मानित होती है और दूसरों के लिए प्रेरणा बनती है। ज्ञान ही मनुष्य के भीतर जागरूकता, विवेक, दूरदर्शिता और निर्णय लेने की क्षमता का निर्माण करता है। यही कारण है कि संसार के इतिहास में जितने भी परिवर्तन हुए, वे ज्ञान की शक्ति से ही सम्भव हुए। इसी प्रकार कर्म का आधार भी ज्ञान है, क्योंकि ज्ञानहीन कर्म केवल श्रम है परन्तु ज्ञानयुक्त कर्म साधना है। ज्ञान से युक्त कर्म मनुष्य को न केवल उपलब्धि प्रदान करता है, बल्कि उसकी प्रतिष्ठा, उसकी पहचान और उसके अस्तित्व को अर्थ देता है। यदि कर्म में ज्ञान का समावेश हो जाए तो कर्म पूजा बन जाता है, कर्म राष्ट्रनिर्माण बन जाता है। इसी का परिणाम है कि बुद्धिमान श्रम सदैव सफलता को जन्म देता है, जबकि अज्ञान से किया गया श्रम अक्सर व्यर्थ सिद्ध होता है। उल्लेखनीय है कि ज्ञान और कर्म का मिलन मनुष्य को आत्मविश्वास देता है, संघर्षों को अवसर में बदलता है और जीवन में तेज, उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है। राष्ट्र, समाज और परिवार—सबकी प्रगति की जड़ में ज्ञान आधारित कर्म ही छिपा है। जब ज्ञान विचार बनता है और विचार कर्म बनता है, तब ही इतिहास लिखा जाता है, और आने वाली पीढ़ियां दिशा पाती हैं। अतः उक्त सत्य अमर है कि ज्ञान ही कर्म को महिमा देता है और कर्म ही ज्ञान को सार्थक बनाता है। मनुष्य की उन्नति, समाज का उत्थान और राष्ट्र की विजय, इसी दिव्य संगम का परिणाम है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
सफलता का आधार ज्ञान है और कर्म का आधार भी ज्ञान है, क्योंकि सही ज्ञान ही हमें सही दिशा में कार्य करने और लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा देता है, जैसा भगवद् गीता में भी कहा गया है कि ज्ञान-कर्म-संन्यास योग के माध्यम से व्यक्ति कर्म करता है और सफल होता है, जिसमें ज्ञान और कर्म का समन्वय महत्वपूर्ण है. ज्ञान दिशा-निर्धारण करता है, सही कर्म का आधार है और साधन भी! कर्म वह क्रिया है जिससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं; ज्ञान हमें उस कर्म को करने की शक्ति और दिशा देता है. कर्म हमें आत्मनिर्भर बनाता है, और ज्ञान हमें बताता है कि कौन सा कर्म हमें आत्मनिर्भर बनाएगा. ज्ञान हमें बताता है कि हमें क्या करना चाहिए, और कर्म उस ज्ञान को हकीकत में बदलता है. बिना ज्ञान के कर्म अंधा हो सकता है, और बिना कर्म के ज्ञान अधूरा. इसलिए, ज्ञान और कर्म दोनों ही सफलता के अभिन्न अंग हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं.
- लीला तिवानी
सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया
सफलता और कर्म दोनों का आधर ज्ञान ही है.क्योंकि कर्म और ज्ञान का संबंध चोली और दामन के जैसा है. बिना कर्म किए सफलता नहीं मिलती है. जितना कर्म करेंगे जैसे कर्म करेगें सफलता भी उसी आधार पर मिलती है.ज्ञानहीन कर्म सफलता का आधार नहीं हो सकता है. केवल ज्ञान से ही सफ़लता हासिल नहीं हो सकती है. उसके साथ कर्म भी आवश्यक है. मान लीजिए हमें ज्ञान है कि इस तरह करने से सफ़लता हासिल होगी. लेकिन जब हम वैसा नहीं करेंगे यानी उस ज्ञान के अनुसार नहीं करेंगे तो सफलता कैसे प्राप्त होगी. कर्महीन ज्ञान भी सफलता नहीं दिला सकता. इस प्रकार हम देखते हैं कि सफ़लता ज्ञान और कर्म तीनों का आपस में गहरा संबंध है.
- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - पं. बंगाल
सफलता और कर्म दोनों का मूल आधार ज्ञान है। ज्ञान मनुष्य को सही और गलत में अंतर करना सिखाता है तथा लक्ष्य की स्पष्ट दिशा प्रदान करता है। बिना ज्ञान के किया गया कर्म दिशाहीन होता है और उससे प्राप्त सफलता क्षणिक या हानिकारक भी हो सकती है। ज्ञान कर्म को विवेक, उद्देश्य और नैतिकता से जोड़ता है, जिससे किया गया प्रयास सार्थक बनता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में—चाहे शिक्षा हो, कृषि, व्यवसाय या समाज सेवा—ज्ञान के आधार पर किया गया कर्म ही स्थायी सफलता दिलाता है। इसलिए कहा जा सकता है कि ज्ञान ही वह शक्ति है जो कर्म को प्रभावी बनाती है और सफलता को टिकाऊ रूप देती है।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
जीवन में किसी भी कार्य के लिए उद्देश्य के साथ-साथ समुचित प्रयास किया जाना आवश्यक होता है। इसके लिए ज्ञानवान होना नितांत आवश्यक ही नहीं महत्वपूर्ण भी है। वर्ना बिना ज्ञान के हम भटक भी सकते हैं या बिना ज्ञान के हम अपने उद्देश्य की सफलता के लिए वांछित तैयारी करने में भूल कर बैठेंगे। इसीलिए कहा गया है कि सफलता के लिए श्रेष्ठ गुरु का मार्गदर्शन भी आवश्यक होता है। श्रेष्ठ इसीलिए भी, ताकि प्रयास में कमियां और खामियां बताकर सही दिशा में ले जाने का सामर्थ्य उत्पन्न कर सके। ज्ञान से लबरेज होंगे तो कर्म सही होगा और फिर सफलता भी तभी मिलेगी। इसीलिए कहना उचित होगा कि सफलता का आधार ज्ञान है और कर्म का आधार भी ज्ञान है।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
यह एक महत्वपूर्ण विचार है !जो हमें ज्ञान के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है। ज़िन्दगी का प्रथम आधार स्तंभ ही ज्ञान है ! जिसके चारों ओर चक्कर लगते है ! प्रकृति की हर चीज में ज्ञान का आधार जिसकी सोच प्रेरणा की केंद्र आधार मान ज्ञान सोच समझ का आधार भी ज्ञान है !जिसका महत्व सर्वत्र फैला हुआ है ! सफलता की कुंजी भी ज्ञान का आधार है जो हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।ज्ञान कर्म से जो हमें सही निर्णय लेने और अपने कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद करते है सबका आधार ज्ञान है । जो आत्म-विकास में मदकरता है, जो हमें अपने जीवन में सुधार लाने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।ज्ञान प्राप्त करने के तरीके शिक्षा आधार है जो ज्ञान प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जो हमें विभिन्न विषयों में ज्ञान प्रदान करती है। पुस्तकें ज्ञान प्राप्त करने का एक अच्छा स्रोत हैं, जो हमें विभिन्न विषयों में ज्ञान प्रदान करती हैं।और अनुभव ज्ञान प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जो हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं में ज्ञान प्रदान करता है। जीवन को सुख-दुख में सहभागी बनकर सफल जीवन व्यतीत करते है ! मेरी सोच समझदारी में इतना प्यार मिले की जीवन खुशहाहाली दे
- अनिता शरद झा
रायपुर - छत्तीसगढ़
आईये आज सफलता और कर्म पर बात करते हैं की इन दोनों का आधार क्या है क्या कर्म सफलता को लिए प्रदान है या सफलता और कर्म दोनों का आधार ज्ञान ही माना जाता है यहां तक मेरा तर्क है सफलता और कर्म दोनों का आधार ज्ञान ही होता है यही आज की चर्चा का विषय है की सफलता का आधार ज्ञान है और कर्म का भी ज्ञान ही हा , क्योंकि ज्ञान ही सही दिशा में कर्म करने की प्रेरणा देता है और लक्ष्य निधारित करने में मदद करता है तथा अवसरों को पहचानने और उनका लाभ उठाने की क्षमता देता है यह भी सच है कि ज्ञान के बिना कर्म अंधा होता है जबकि सही कर्म ज्ञान के साथ ही उभरता है क्योंकि इससे हम उचित रणनीति बनाने और सही राह पा सकते हैं जिससे भाग्य भी साथ देता है यही नहीं ज्ञान हमें सही दिशा में कर्म करने के लिए प्रेरित करता है तथा समझदारी से काम करने के लिए तैयार करता है ताकि सही रणनीति तैयार की जाए और अवसरों की पहचान की जाए, अन्त में यही कहुंगा की कर्म का आधार विचार है और विचारों से ही कर्म का जन्म होता है विचार ही कर्मों की नींव हैं हमारे विचार जितने अच्छे होंगे उतने ही श्रेष्ठ हमारे कर्म होंगे और अच्छे विचार हमेशा अच्छे ज्ञान से प्राप्त किए जा सकते हैं इसलिए कर्म और सफलता का आधार ज्ञान ही होता है, तभी तो कहा है, देह धरे का दण्ड है सब काहू को होये ज्ञानी भुगते ज्ञान करि मूरख भुगते रोये।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
ज्ञान हमारे जीवन का मुल मंत्र सरीखा है। ज्ञान हमारे जीवन का आधार स्वरूप होता है। व्यक्ति का सब कुछ उसके खूद के ज्ञान पर हीं तो निर्भर करता है। हमें जीवन में सफलता और असफलता सब कुछ तो हमें हमारे ज्ञान से ही प्राप्त होती है। अतः ज्ञान को हम सरांश में सर्वे सर्वा भी कह सकते हैं।
- डॉ. पूनम देवा
पटना - बिहार
यदि जीवन में सफल होना है तो ज्ञान अर्जित करना महत्वपूर्ण व पहला क़दम है। ज्ञान न केवल जानकारी, बुद्धिमत्ता अपितु सशक्तिकरण व आत्मविश्वास भी प्रदान करता है। ज्ञान हमारे कर्म करने की दिशा व दशा दोनों निर्धारित करता है। कर्म को सुनियोजित ढंग से करने की बुद्धि भी देता है। सांसारिक ज्ञान जो व्यावहारिक ज्ञान भी कहलाता हैं रिश्ते निभाने, धन उपार्जन आदि में मदद करता है। परंतु आध्यात्मिक ज्ञान भी महत्वपूर्ण है। शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक ज्ञान को सही रास्ते चलाने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। अपने कर्तव्य करते हुए अर्थार्त सांसारिक धर्म का पालन करते हुए यदि हम काम , क्रोध, लोभ, मोह, क्लेश आदि से बिना प्रभावित हुए तटस्थ भाव से सत्य और धर्म का साथ देते हुए सही रास्ते चले तो वही सही मायने में जीवन की वास्तविक सफलता है। वह ज्ञान का सही सदुपयोग है। ज्ञान ही सफलता व कर्म का आधार है।
- रेनू चौहान
दिल्ली
" मेरी दृष्टि में " ज्ञान को हासिल करने के लिए कर्म करना पड़ता है। बिना कर्म के कभी ज्ञान प्राप्त नहीं होता है। ज्ञान तो सफलता का द्वार का है। ज्ञान के बिना जीवन की कल्पना अधूरी मानी जाती है। ऐसा अक्सर देखा जाता है। फिर भी कर्म साधना से ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
सचमुच ज्ञान के बिना कुछ भी नहीं आदरणीय नूतन जी को बहुत-बहुत बधाई धन्यवाद आपका बीजेन्द्र जैमिनी जी 🙏🙏💐💐😊
ReplyDelete