कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी स्मृति सम्मान - 2025

       आईना बहुत कुछ बोलता है। व्यक्तित्व के साथ - साथ विभिन्न राज खोलता है। जिससे आईना कहते हैं। आईना की परिभाषा बहुत कठिन भी है बहुत आसान भी है। फिर भी आईना तो आईना होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश हैं :-
      किसी‌ भी व्यक्ति के  आंतरिक गुण जिनमें मन ,बुद्धि और भावनाएं और बाहरी  व्यवहार इत्यादि शामिल होते हैं  उसी से उस व्यक्ति का व्यक्तित्व पहचाना जाता है,जो व्यक्ति  के‌सोचने,समझने,बर्ताव करने के ढंग ,तरीकों  की पहचान दर्शाता है, क्योंकि व्यक्तित्व में ही व्यक्ति के,शारीरिक, मानसिक, समाजिक और विकसित होने के गुण शामिल  होते  हैं,तो आईये  आज‌ की चर्चा इसी बात पर करते हैं की  व्यक्तित्व एक आईना होता है जिससे कुछ नहीं छुपता,मेरा  मानना है   व्यक्तित्व में  ही हमारे विचार, व्यवहार ,हाव भाव और शब्द दुसरों के सामने हमारी आंतरिक स्तिथि को दर्शाते हैं ठीक उसी तरह जैसे की आईना हमारी बाहरी छवि को दिखाता है तथा‌ दुसरे लोग हमारे व्यक्तित्व का प्रतिबिंब होते हैं जो हमारी सकारात्मकता और नकारात्मकता को निखारते हैं,हमारे शब्द हमारे मन का हाल बताते हैं जबकि मधुर वाणी रिश्तों को जोड़ती है और कठोर वाणी‌ रिश्तों  को तोड़ती है  कहने का भाव आपके  देखने का ढंग तय करता है की‌आपको दुसरों में अच्छाई दिखेगी‌ या बुराई जो हमारे व्यक्तित्व का आईना है, हमारी आंखों का हाव भाव,हमारी भाषा भी हमारी भावनाओं को दर्शाती है‌ जिससे व्यक्तित्व साफ झलकता‌ है देखा जाए आईना हमें हमारी बाहरी पहचान दिखाता है लेकिन हमारी आंतरिक दुनिया को पूरी तरह से नहीं दिखा सकता लेकिन हमें खुद में समझने को मदद करता है कि आप असल में कैसे दिखते हैं और अंदर से कैसे हैं,अन्त में यही कहुंगा की  हमें आईने के सामने खड़े हो कर खूबियों और कमियों को ढूंढने का प्रयास करना चाहिए जिससे हम   बेहतर इंसान बन सकें   नहीं तो  हमारा व्यक्तित्व एक ऐसा आईना है जो ‌ सिर्फ हमाराी बाहरी शक्ल सूरत ही नहीं बताता किन्तु हमारे अन्दर और बाहर के भाव  एकदम प्रकट करता है वो आईना तो पब्लिक के पास होता है इसलिए हमें अपने व्यक्तित्व पर पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि हमारे कर्मों के  पल पल का हिसाब  देखा जाता है जिससे हमारे व्यक्तित्व को निखारा जा सकता है,तभी को कहा है भलाई कर भला होगा,बुराई कर बुरा होगा कोई देखे जा न देखे खुदा तो देखता ही होगा‌

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर 

      व्यक्तित्व एक बाहरी आवरण या दिखावा नहीं बल्कि-व्यक्तित्व ,हमारे अंदर के असल रूप को दर्शाता है। जोकि हमारे विचारों, भावनाओं, और व्यवहार को प्रतिबिंबित करता है। जिसे हम चाहकर भी नहीं छुपा सकते।व्यक्तित्व का प्रभाव हमारे आसपास के लोगों पर पड़ता है। अगर हमारा व्यक्तित्व सकारात्मक है, तो लोग हमें पसंद करेंगे और हमारे साथ रहना पसंद करेंगे। वरना हम से दूरी बना लेंगे। अगर हम अपने व्यक्तित्व को आईना मानें, तो हमें अपनी सच्चाई का पता लग सकता है।आईना से कुछ नहीं छुपता,यानि यह बात हमें बुरे या अच्छे स्वयं को जानने में मदद करती है। अगर हम अपने व्यक्तित्व को समझें, तो हमें अपनी कमजोरियों और ताकतों का पता लगा सकते हैं अगर हमारा व्यक्तित्व सकारात्मक है, तो हम अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर  अपने व्यक्तित्व को बेहतर बना सकते हैं। व्यक्तित्व का प्रभाव व्यक्ति के कार्यक्षेत्र पर भी पड़ता है ।सकारात्मक व्यक्ति के व्यक्तित्व का प्रभाव उसके परिवार ,समाज में भी परिलक्षित होता है । 

 - रंजना हरित 

बिजनौर - उत्तर प्रदेश 

           ईश्वर की हर रचना में विविधताएं भी हैं और विशेषताएं भी। इसी संदर्भ में हम में भी जो विशेषताएं ईश्वर ने दी हैं, उनमें एक यह भी है कि हम जैसे होते हैं, वैसा हमारा व्यक्तित्व बन जाता है और यही फिर आइना में प्रतिबिंब की तरह झलकता भी है। कोई भी जाना-अनजाना हमें देखकर यह अनुमान लगा सकते हैं कि हम कैसे स्वभाव संस्कार, हैसियत आदि से ताल्लुक रखते हैं। फिर सामान्यत: हमें बदले में वैसा ही व्यवहार और मान-सम्मान मिलता है। यानी हमारा व्यक्तित्व ही हमारी पहचान होती है। अत: हमें अपने व्यक्तित्व निर्माण पर गंभीरतापूर्वक ध्यान देना चाहिए और अपने चरित्र एवं व्यवहार में अधिक से अधिक सद्गुणों को समाहित करने का  सदैव प्रयास करना चाहिए। जीवन में समृद्ध और सफल होने के लिए ऐसा आवश्यक तो है ही, महत्वपूर्ण भी है। हम सफल तभी होंगे जब औरों से हमें सकारात्मक सहयोग मिलेगा और यह तभी संभव है जब हम में आकर्षक व्यक्तित्व होगा, इसके लिए सद्गुणों का होना आवश्यक है।

 - नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

         "व्यक्तित्व एक आईना होता है आईना से कुछ नहीं छुपता है" यह माना जाता है कि मनुष्य का व्यक्तित्व एक आईना (दर्पण, शीशा )होता है और इस आईने से कुछ छिपता भी नहीं है।कहा जाता है जैसे हैं वैसा ही दर्शन होता है। कोई भी व्यक्ति उसकी आदतें स्वभाव व्यवहार (मृदु या कठोर ,विनम्र या आक्रामक, हंसमुख या क्रोधी ,साथ ही उसका आंतरिक और बहिर्मुखी रूप- रंग, इन सबको हम उसके व्यक्तित्व में रख सकते हैं। समाज में उसकी बोलचाल और भावनाओं से उसके व्यक्तित्व का मूल्यांकन भली भांति किया जाता है। पर कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति रूप रंग और पहनावे से बड़ी शख्सियत सा दिखता है पर उसका अन्तर्मन,बोलचाल सब कुछ दर्शा देता है कि वह किस चरित्र एवं प्रकृति का है। आज तेजी से बदलते भौतिक परिवेश में धन को महत्व देता व्यक्ति अपने बाह्य और आंतरिक गुणों में समरूपता नहीं रख पा रहा है जिससे समाज का भोलाभाला वर्ग छला भी जा रहा है। पहनावे  और बातचीत से संभ्रांत दिखेंगे पर कुख्यात अपराधी सा कर्म कर जाते हैं। अतः ऐसे व्यक्ति  के व्यक्तित्व का आईना दोषयुक्त धुंध से ढका होता है। रंग बदलती दुनिया में पुरानी कहावतें मुहावरे भी कम असरदार होने लगे हैं ।

 - डाॅ.रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

            मानव का जितना अच्छा व्यक्तित्व होगा, उतना अच्छा निखार आता है। व्यक्तित्व एक आईना होता है, आईना से कुछ नहीं छुपता है। हम अपने व्यक्तित्व को अपने आईने में देखना पसंद जरुर करते है, जो जैसा होगा वही तो दिखाई देता है, हम अपने आपको छिपा नहीं सकते है। उसी तरह हमारे जीवन में जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से घटित हो रहा है, वह किसी से छुपता नहीं है, न ही छुपाया जा सकता है मानव दो राहों का प्राणी होता है, सच.और झूठ के साये में जीवन यापन करते हुए जीता जरुर है, परंतु तील-तील....।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

        बालाघाट-मध्यप्रदेश

       जिस तरह आईना व्यक्ति की पूरी वास्तविकता दर्शाता है ठीक उसी तरह व्यक्ति का अपना व्यक्तित्व भी एक आईने की तरह होता है। व्यक्ति के हाव-भाव, कर्म, बोली हुई बातें सब उसकी वास्तविकता को सबके सम्मुख उजागर कर देती है वह चाहे या ना चाहे। व्यक्ति के सकारात्मक-नकारात्मक भाव सब दृष्टिगत हो जाते हैं। कोई भी व्यक्ति अपने खोखले शब्दों से अपने ऊपर आवरण भले ही डाल ले, पर उसके बोले गए शब्द उसके संस्कार, विचार और सोच का परिचय करवा ही जाते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपना व्यक्तित्व इस तरह गढ़ना चाहिए कि उसे कुछ भी छिपाने की आवश्यकता ना हो। कथनी और करनी में अंतर ना हो और उसे दोहरा चरित्र जीने की आवश्यकता ही ना पड़े।

- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई 

देहरादून - उत्तराखंड

           व्यक्तित्व को हम किसी व्यक्ति की आंतरिक और बाह्य विशेषताओं का समुच्चय कह सकते हैं। यह न केवल हमारे विचारों, कर्मों और व्यवहार का प्रतिबिंब होता है, बल्कि दूसरों के सामने हमारी छवि भी प्रदर्शित करता है। इसी संदर्भ में कहा गया है कि “व्यक्तित्व एक आईना होता है।”आईना हमेशा सच दिखाता है, उसमें छुपाया या परिवर्तित नहीं किया जा सकता। ठीक इसी प्रकार, हमारा व्यक्तित्व भी वास्तविकता को दर्शाता है। चाहे हम कितनी भी शाब्दिक या बाह्य छवि बनाएँ, हमारा सच्चा व्यक्तित्व अंततः हमारे कर्म, आचार और सोच से उजागर हो जाता है।दृष्टांत- यदि कोई व्यक्ति दयालु है, तो उसकी मुस्कान, भाषा और व्यवहार में वह दया स्पष्ट दिखती है। यदि कोई व्यक्ति क्रोधी या असत्यवादी है, तो उसका व्यवहार और दृष्टिकोण भी उसके व्यक्तित्व का आईना बनकर सामने आता है।इसलिए, व्यक्ति का व्यक्तित्व किसी छद्म या दिखावे से नहीं छुपाया जा सकता। यह आईने की तरह सच्चाई को परावर्तित करता है।इस प्रकार हम कह सकते हैं, व्यक्तित्व का विकास हमारे विचारों, कर्मों और संस्कारों पर निर्भर करता है। जैसा हम सोचते और व्यवहार करते हैं, वैसा ही हमारा व्यक्तित्व दूसरों के सामने प्रकट होता है। इसलिए, हमें अपने व्यक्तित्व को सजाने और सुधारने में सतत प्रयास करना चाहिए।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

          व्यक्ति और व्यक्तित्व दो एक समान दिखने वाले शब्द हैं लेकिन इन शब्दों में विशिष्ट भेद निहित है व्यक्ति एक नाम है जो इंसान को सर्वनाम होने से बचाता है जबकि व्यक्तित्व एक गुण है जो आपको विशेष बनाता है। व्यवहार ऐसा आईना है जिसमें आपका व्यक्तित्व झलकता है। "लाख छुपाओ छुप न सकेगा असली नकली चेहरा दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा" सचमुच व्यवहार ऐसी चीज है जो आपके भीतर की यात्रा करवा देती है और आपके सकारात्मक या नकारात्मक पहलू उजागर हो जाते हैं। लाख मुल्लमा चढा लें  - - - बनावटी व्यवहार नजर आ जाता है। आप मेहमान के आने पर स्वागत के बड़े बड़े शबद कह रहे हैं लेकिन आपका चेहरा आपके व्यक्तित्व की गवाही देता रहता है। खिसियानी सी हँसी होठों पर होती है मगर आँखें कुछ और बयां करती हैं - - - आपके असली व्यक्तित्व का आईना बन कर। इसलिये बनावटीपन कभी न ओढें। जीवन में सहज सरल व्यवहार रखें। खुशी भरा चेहरा आपके निर्मल ह्दय की गवाही बनेगा लेकिन मन में झंझावात है तो आप खुश होने का कितना ही नाटक कर लें आँखें कुछ और गवाही दे देंगी। दुनिया में आँखों से बड़ा कोई आईना नहीं है। आप सामने वाले की आँख में सब कुछ पढ़ पाते हैं - - स्नेह प्रेम नफरत गुस्सा - - सब भावों का आईना बन जाती हैं आँखे। तात्पर्य यही कि जीवन में  - - क्लिष्टता नहीं सहजता लायें। आपका व्यक्तित्व आईना बन कर  आपकी उच्चतम गवाही बनेगा और आप सभी के प्रिय और अपने बनेंगे।

- हेमलता मिश्र मानवी 

   नागपुर - महाराष्ट्र

    जिस तरह आईना सब कुछ सच-सच बताता है ठीक उसी तरह मनुष्य का व्यक्तित्व उसके बारे में सबकुछ सच-सच बता देता है. मनुष्य के व्यक्तित्व से से ही उसके बारे मे लोग अंदाजा लगा लेते हैं कि वह व्यक्ति कैसा होगा. उसके विचार, उसके चाल-चलन सब उसके व्यक्तित्व में झलकता है. मनुष्य के व्यक्तित्व से ही पता चल जाता है कि  उसका व्यावहार कैसा है. वह अच्छे किस्म का आदमी है कि बुरे किस्म का आदमी है. वह पढ़ालिखा है कि अनपढ़ है. जैसे आईना देखने वाले के चेहरे का हर चीज़ स्पष्ट दिखा देता है उसी तरह व्यक्तित्व भी आईने की भांति उसके हर गुण को दर्शा देता है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

      व्यक्तित्व एक आईना है आईने से कुछ नहीं छुपता।अच्छे इंसान परिस्थिति के अनुसार नहीं बदलते हैं परंतु कुछ लोग अपने आप को अच्छे होने का ढोंग करते हैं और वे लोग कथनी कुछ और करनी कुछ होती है वक्त के अनुसार बदल जाते हैं स्वार्थी होते हैं दुनिया में ऐसे बहुत लोग मिल जाएंगे आज के परिवेश में यह समझना कि कौन अच्छा है और कौन बुरा बहुत मुश्किल है।परंतु समाज में उसे व्यक्ति का व्यक्तित्व सभी लोगों के बीच में एक आईने के समान रहता है।मानवीय सभ्यता का इतिहास हजारों वर्षों पुराना रहा है इसमें कई प्रगति यात्रा और वैज्ञानिक उपलब्धियां भी साक्षी रहे हैं जैसे जैसे उपलब्धियां बढ़ती गई वैसे भी रोजगार की समस्या भी बढ़ती गई रोजगार के स्थान पर नौकरियां नहीं है और इसी आभाव के कारण संबंधों में भी मशीनीकरण हो गया है मशीनीकरण के साथ-साथ व्यक्तित्व का निर्माण भी नहीं हो पा रहा है आज मानव इतना मतलबी हो गया है कि वह अच्छे बुरे का खुद को भेज नहीं कर पा रहा है नकारात्मक दृष्टिकोण हो गया है स्वयं के लिए कुछ ज्ञान और प्रवचन और उद्देश्य केवल दूसरों के लिए ही रह गया है जो जितनी अच्छी बातें करता है गुड की तरह वह उतना ही मतलबी इंसान होता है अच्छे बुरे का भेद कर पाना बहुत मुश्किल है। आजकल घर परिवार भी टूट रहे हैं और इस स्वार्थ पन के कारण बाप बेटे का नहीं है भाई भाई का नहीं है मां बेटे का नहीं  आदि घटनाएं और समाज में अराजकता फैली हुई है आज के समाज में पहले जैसा परिवेश भी नहीं रहा।

- उमा मिश्रा मिश्रा 

जबलपुर - मध्य प्रदेश

     व्यक्तित्व वह अचूक आईना है जिसमें किसी प्रकार का छल या भ्रम सम्भव नहीं। यह न तो हमारी वास्तविकता को छुपा सकता है और न ही किसी बहाने या दिखावे को स्वीकार करता है। जैसे आईना प्रकाश को बिना विकृति के प्रतिबिंबित करता है, वैसे ही व्यक्तित्व हमारे विचारों, भावनाओं, कर्मों और नैतिक मूल्यों का वास्तविक प्रतिबिंब है। सत्य, सत्यनिष्ठा और साहस ये तीन स्तम्भ हैं जो व्यक्तित्व को अडिग और प्रभावशाली बनाते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी यदि हम अपने व्यक्तित्व की शुद्धता बनाए रखें, तो यही हमारे अस्तित्व की सबसे बड़ी ताकत बनती है। व्यक्ति का व्यक्तित्व न मात्र उसकी पहचान है, बल्कि समाज में उसके प्रति सम्मान, विश्वास और प्रेरणा की नींव भी है। हमारे विचारों और कर्मों का प्रतिबिंब हमारे व्यक्तित्व में स्पष्ट दिखाई देता है। यदि हम अपने व्यक्तित्व को जागरूकता, सकारात्मक दृष्टिकोण और नैतिक दृढ़ता से संवारते हैं, तो हम न केवल स्वयं को महान बनाते हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन जाते हैं। सच्चा व्यक्तित्व कभी भी भय या भ्रम से प्रभावित नहीं होता। यह स्पष्ट, दृढ़ और उज्ज्वल होता है, जैसा प्रकाश जो अंधकार को चीरता है। यही व्यक्तित्व की वास्तविक शक्ति है जो सच्चाई का अनुगमन और समाज में विश्वास का निर्माण करती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है कि वह अपने व्यक्तित्व को सजगता, साहस और ईमानदारी के साथ निखारे। क्योंकि व्यक्तित्व केवल पहचान नहीं है, यह शक्ति है, सम्मान है और अंततः समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा है।

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) – जम्मू और कश्मीर

       व्यक्तित्व गुण का आईना होता हैं जिसे सुधारना इंसान की फितरत होती है ! क्योंकि इंसान का व्यक्तित्व ही कर्म , बुद्धि ,प्रेरणा जिससे ख़ुद भी प्रभावित होता हैं दूसरों को प्रभावित कर अपने अच्छे बुरे गुणों दुर्गुणों से नाम की पहचान बताने में सफल हो जाता है !आईना दिखता है मनन करता है छवि निहारते उसकी सोच किस हावी ! ये सिर्फ सामने टंगा आईना दिखाने  वालों को दिखा सकता हैं!  देखने वाला अपनी समझ समाजस्य से मेल बिठा आकर्षित करता सोच समझ  उसके स्वयं के बुद्धि संस्कार पर निर्भर हो ज्ञान विचार से प्रगट करता है ! सही आंकलन तो करता ही है साथ उसके अपने होते है !मज़िल के पते जानकारी के साथा सुझाव दे आईने , पानी की तरह साफ़ होने का दावा भी प्रस्तुत करता है!  व्यक्तित्व लक्ष्य ज्ञान मान बढ़ाता व्यक्तित्व कर्तव्यों की पहचान हैं रास्ता दिखाते , चाहत मंज़िल की राहें हैं ग़मों को पीछे छोड़ आगे बढ़ जाती हैं भाग्य लकीरों को खींच उम्मीदों के साथ रास्ता बढ़ा जाती हैं जिसे आईना सच कर दिखता हैं 

- अनिता शरद झा

रायपुर -छत्तीसगढ़ 

    व्यक्तित्व को यदि हम परिभाषित करें तो यह न केवल हमारी बाहर के सौंदर्य को अपितु हमारे अंदर की सोच को भी दर्शाता है। व्यक्तित्व, व्यक्ति का समाज में एक दूसरे के प्रति कुल व्यवहार, रवैया, सोच का ही नाम है। व्यवहार भी निर्भर करता है कि हमारी सोच क्या है?व्यक्तित्व आईना है हमारी अंदर की सोच का जिसके आधार पर हमारा व्यवहार है। गाहे- बगाहे अंदर का सच उभर कर आ ही जाता है। कभी कभी दोगले व्यक्तित्व वाले लोग भी होते हैं। ऐसे लोग दुनिया को मूर्ख बना सकते हैं परंतु स्वयं अपने बारे में सब कुछ जानते हैं क्योंकि आईना कभी झूठ नहीं बोलता। एक न एक दिन दोगला पन सामने आ ही जाता है । आईने से कुछ भी छुपाना कठिन है विशेष रूप से मन के आईने से।  कहते हैं ना दर्पण झूठ ना बोले, भले-बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाए 

- रेनू चौहान 

नई दिल्ली

" मेरी दृष्टि में " आईना बहुत कुछ देता है। सबसे पहले आईना आपको, आपकी तस्वीर देता है और बताता है कि आप क्या है ? यही आईना की सबसे बड़ी देन है। बाकि तो दुनियां में सब कुछ है। परन्तु आईना का कोई विकल्प नहीं है।

               - बीजेन्द्र जैमिनी 

         (संचालन व संपादन)

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