मालिक

लघुकथा कसौटी - 03

             मालिक

बार-बार हांकने पर भी बकरी पुल पर चढ़ने को तैयार ना थी। 

अपने आप को बकरी का  मालिक समझने वाले ने उसकी कमर से एक डंडी बांध दी। 

डंडी के एक कोने पर एक गाजर बांध दी! गाजर बकरी के मुंह से एक फुट की दूरी पर टंगी हुई थी। 

 गाजर को खाने के लालच में बकरी चलती चली गई। और उससे पता भी ना चला, वह कब पुल पार कर गई। अब तुम ही बताओ यदि मैं वह बकरी नहीं बनना चाहती। मुझे गाजर का लालच नहीं है। 

मैं तुम्हारे कहने पर पुल पर भी नहीं  चढ़ना चाहती। मैं तुम्हें अपना मालिक भी नहीं समझती। तो बताओ इसमें मेरा कसूर क्या है?

- रेनू चौहान 

   नई दिल्ली

कथा में बकरी और मालिक के बीच का संघर्ष दिखाया गया है। मालिक ने समस्या का समाधान में दिमाग का प्रयोग किया है। वहीं बकरी को कुछ पता नहीं चलता है। फिर भी कथा सिर्फ काल्पनिक है। वास्तविकता कहीं नजर नहीं आती है। कथा के अंत में मालिक को फेल दिखाने का प्रयास अवश्य हुआ। 

पंचलाइन:

। मैं तुम्हें अपना मालिक भी नहीं समझती। तो बताओ इसमें मेरा कसूर क्या है?

संदेश:

मालिक सब कुछ नहीं होता है ।

चिंतन:

सभी के अपने - अपने अधिकार है।

नवीनता :

पशु - पक्षियों पर आधारित लघुकथा ।

               - बीजेन्द्र जैमिनी 


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