उमेश चंद्र दत्त स्मृति सम्मान -2025

      सरल होना से बहुत कुछ साबित होता है। परन्तु प्रसन्नता सभी को नहीं मिलती है। यह सब भाग्य यानी कर्म पर निर्भर करता है।‌ बाकि तो संसार की माया है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
       कहते हैं कि जीवन सरल होना चाहिए, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है, सरल होना कठिन भले ही हो, पर असंभव नहीं है. सच तो ये है कि सरल होने से प्रसन्नता मिलती है सरल का अर्थ है के आवश्यकताएं कम हों, मन में किसी के प्रति वैर भाव नहीं हो, सबकी भलाई की भावना मन में हो, यही है सरलता. सरलता से प्रसन्नता मिलती है और प्रसन्नता से ही सुख-शांति मिलती है. प्रसन्नता का ही दूसरा नाम है सुख-शांति. इसलिए अगर सुख-शांति चाहते हैं तो प्रसन्न रहना बहुत जरूरी है और प्रसन्न रहने के लिए सरल होना बहुत जरूरी है. सरल रहिए सुख-शांति पाइए.

- लीला तिवानी

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

      आईये आज प्रसन्नता,सुख  और शान्ति की तरफ रूख करते हैं  कि इन सभी को पाने के लिए हमें क्या क्या‌‌ नियम अपनाने चाहिए  तथा किन कारणों से हम प्रसन्नता और सुख शांति पा सकते हैं जैसा की आज की चर्चा  में कहा गया है कि सरल होने से प्रसन्नता और प्रसन्नता से सुख शान्ति मिलती है, मेरा मानना है कि  प्रसन्नता एक आंतरिक अवस्था है जो सकारात्मक सोच,संतोष और जीवन के प्रति अच्छे दृष्टिकोण से आती है क्योंकि इनसे मानसिक स्थिरता,बेहतर रिश्ते और ऊर्जा जैसे स्रौत मिलते हैं जिससे जीवन का असली आनंद और संतोष प्राप्त होता‌ है,कहने का भाव सरल ‌होने‌ से प्रसन्नता बढ़ती है क्योंकि सरल‌ जीवन अपनाने से‌ हम अनावश्यक दिखावे से बचते हैं जिससे मानसिक ‌शांति मिलती‌ है और हम वर्तमान का आनंद बेहतर ढंग से  ले सकते हैं सच भी है जब हम चीजों को सरल  रखते हैं तो अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ कम होती हैं तथा‌‌ चिंताएं भी‌ कम होने लगती हैं और मन पर बोझ नहीं पड़ता और हम प्रसन्न रहते हैं देखा जाए सरल जीवन  शैली हमें वर्तमान में  जीने और उसका आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करती है जिससे भविष्य और भूतकाल ‌की चिन्ता नहीं होती और‌ हम वर्तमान में आनंद ‌से‌ जीते हैं और सरलता से नकारात्मक सोच टिक नहीं पाती और जीवन में सकारात्मक सोच आती है जिससे प्रसन्नता बढती है,दुसरी‌ तरफ प्रसन्नता आने से सुख शान्ति बढती है,देखा‌‌ जाए‌ सच्ची खुशी बाहरी चीजों से नहीं बल्कि अपने भीतर से‌ मिलती है, वास्तव में प्रेम ,सुख , शान्ति और प्रसन्नता आपस में जुड़े हैं  क्योंकि जब हम खुश होते हैं तो प्रसन्नता का‌ जन्म होता‌ है जिससे‌ सुख व आनंद महसूस होता है, अन्त में यही कहुंगा की  सरल जीवन जीने से प्रसन्नता और प्रसन्नता से सुख मिलता‌ है, अगर हम  सुखी  जीवन व प्रसन्नता चाहते हैं तो हमें सरल भाव से जीना आना चाहिए, कहने का‌ मतलब कम चाीजों,कम इच्छाओं और दिखावे से दूर रहकर वर्तमान में संतुष्टि को पाना है तथा अनावश्यक इच्छाओं को त्यागना ,रिश्तोंऔर सधारण सुखों को महत्व देना है जिससे जीवन में सुकून और शांति बनी रहे।

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू ‌व कश्मीर 

         सरलता प्रसन्नता मनोभाव की उपज,अनुभूति है ! जिसमें गुण दोष दोनों समाहित होते है । जो इंसान के हाव भाव व्यवहार से प्रगट होते हैं ! जिसे देख अंदाजा लगा व्यवहार करता है ! पर कई बार अंदाज़ लगाना मुश्किल होता है जब तक प्रत्यक्ष रूप से सामना ना हो उस समय उपयोग व्यवहार में लाना कठिन है ! नीम और शहद दोनों ही गुणकारी औषधि है! स्वस्थ रहने के लिए दोनों जरूरी है! दोनों की मात्रा सेवन पर निर्भर करती है! मन वाचाल हो वाणी पर विराम जरूरी है! पर इसका ये मतलब नही की आप संवाद हीन बन जाए और मनुहूसियत को जन्म दे ! इसलिए इंसान समय काल को देखते निर्णय ले सरल होने का प्रयास ही करता है! क्रोध ,भय , छल कपट मय को त्याग कर सरल इंसान बन सफल नागरिक बन सकता है इंसान अपने व्यवहारिक गुणों का सरलता से उपयोग कर प्रसन्नता को प्राप्त करता हैं ! जीवन में सुख शान्ति अनुभव करता है ! जीवन को सरल और प्रसन्न बनाने के लिए प्रेरित करता है।हमारा मन संतुष्ट रहता है। जीवन के छोटे-छोटे पलों से आनंद लेता है।आत्म-विश्वास को बढ़ता है और हम जीवन के चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

       जीवन अकेले रहकर गुजारना किसी के वश की बात नहीं। ऋषि-मुनियों को छोड़कर शेष हम सभी के लिए यह असंभव ही है।  जब इतनी मूल सच्चाई के हम जानकार हैं और इस बात का ध्यान हमें प्रमुखता से रखना भी चाहिए। ऐसे में तब हमें इस बात को भी समझना और मानना चाहिए कि हमें  जीवन में अन्य लोगों के सहयोग की जरूरत पड़ेगी ही, पड़ती ही है। ऐसे में हम से जुड़े या संभावित जुड़े वालों के प्रति हमारे रिश्ते और संबंध जितने मधुर रहेंगे हमें बदले में उनसे सहयोग उतना ही सहजता से मिलेगा। इससे हमारे बीच टकराव की स्थिति नहीं बन पायेगी। टकराव नहीं होगा तो तनाव पैदा नहीं होंगे और फिर इससे हमारा संघर्ष भी कम होगा। इससे काम समय पर दृढ़ता से और गुणवत्ता के साथ पूरे होंगे। हम खुश होंगे। सुख-सुकून से परिपूर्ण होंगे। तब हमें एहसास होगा कि हमारे मधुर व्यवहार के बदले यानी हमारी सरलता सै हमें कितना कुछ  सहजता से न केवल उपलब्ध ही हुआ बल्कि हमे॔  प्रसन्नता के साथ-साथ सुख-सुकून भी मिली। जीवन का कर्म और मर्म भी यही है। हमारे धर्म शास्त्र, हमारे महापुरुष, हमारे गुरुजन, हमारे बुजुर्ग, हमारे माता-पिता इसलिए हमें सभी से मधुर संबंध रखने हेतु प्रेरित करते हैं। भाषा में संयम और सरलता रखने की सीख देते हैं।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

       यह बात ठीक तो है कि सरल होने से मनुष्य को बहुत खुशी मिलती है क्योंकि वह बिना छल, कपट और अप्रिय दिखावे, बनावटीपन से कोसों दूर रहता है। उसे एक प्रसन्नतादायक, आत्मिक सुख -शांति , संतोष  होता है कि उसने अपने जीवन में किसी के साथ गलत नहीं किया है। उसने सबके साथ अच्छा किया है ।सादगी से जीवन बिताया है। उसके मन में कभी दूसरे से तुलना दूसरे के समकक्ष जीवन बिताने की बात ही नहीं आती ।वह इतना आत्मज्ञानी होता है की उसके आचार- विचार ,स्वभाव, व्यवहार में सरलता ही झलकती है ।बेईमानी, भ्रष्टाचारी जीवन से वह बहुत दूर होता है  सरल व्यक्ति का अंतःकरण इतना सहज, पावन ,शुद्ध और आत्मसंतोषी होता है जहां उसे स्वर्गिक  सुख - शांति की अनुभूति होती है। माना कि सरल होना बहुत कठिन है पर श्रेष्ठ है और संपूर्ण आनंद की प्राप्ति है।

- डॉ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

        सरल होने से प्रसन्नता मिलती है ये बात शत प्रतिशत सत्य है. और प्रसन्नता से ही सुख शांति मिलती है यह बात भी शत प्रतिhशत ठीक है. लेकिन आजकल के युग में ज्यादा सरल होना नुकसान दायक है या यों कहें कि लोग आप को सरल रहने देंगे तब न आप सरल रह पाईयेगा. लोग आप को बुद्धि हीन समझेंगे. आपका सबकुछ हड़प लेंगे. लोग आपकी सुख शांति देख कर आपसे जलने लगेंगे. सच गावों में आजकल ऐसे ही हो रहा है. शहर में आपकी सुख शांति के बारे में पता नहीं चलता है सब अपने में मस्त रहते हैं. दफ्तर में भी ज्यादा सरल होने पर औरों का काम भी करना पड़ता है. लेकिन अपने अंदर एक आन्तरिक प्रसन्न्ता मिलती है जो ऐसे लोगों की फिक्र नहीं आने देती है और हम सुख शांति से जीवन गुजारते हैं. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

        यह कहना कि बिना सरल हुए हमारे जीवन में प्रसन्नता का आगमन लगभग असंभव है गलत नहीं होगा। अधिकांश लोग प्रसन्नता पाने के बाह्य रास्ते ढूँढते हैं, उनपर चलने का हरसंभव प्रयास भी याद रखकर करते हैं लेकिन आंतरिक रास्ता, स्वयं को सरल रखना, भूल जाते हैं। प्रसन्नता सुख और शांति का आधार है और प्रसन्नता सरलता से ही आती है इसलिये हमें अपने को जटिल नहीं वरन् सरल बनाना चाहिए।

- दर्शना जैन 

खंडवा - मध्यप्रदेश 

      सरलता, प्रसन्नता देती है क्योंकि जब कुटिलता नहीं होगी यानी सरलता ही होगी तो फिर चिंता की कोई बात ही नहीं होगी और जब चिंता ही नहीं तो प्रसन्नता होना स्वाभाविक है।फिर इस कड़ी में सुख शांति सहज ही जुड़ जाते हैं। प्रसन्नता अर्थात चिंतामुक्त सुखी और शांतिपूर्ण जीवन। लेकिन यह सब आसानी से हासिल नहीं होता क्योंकि सरल होना, सरल नहीं होता।यह बहुत कठिन होता है। उदाहरण भगवान शिव हैं, इतने सरल कि भस्मासुर को भी वरदान दे देते हैं। देव हितार्थ स्वयं विषपान कर लेते हैं। सरलता के कारण ही भोले भंडारी कहलाते हैं। विपरीत परिस्थितियों के बीच कैलाश पर सुख-शांति से निवास करते हैं। प्रसन्नता,सुख और शांति के मूल में  सरलता ही होती है।

- डॉ.अनिल‌ शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश 

      “सरलता से प्रसन्नता, प्रसन्नता से सुख–शान्ति” सरल होना जीवन की वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति दिखावे, छल और अनावश्यक अपेक्षाओं से मुक्त होता है। जब मन सरल होता है, तब उसमें द्वेष, ईर्ष्या और अहंकार के लिए स्थान नहीं बचता। सरल व्यक्ति जैसा है, वैसा ही स्वीकार करता है—खुद को भी और दूसरों को भी। यही स्वीकार भाव उसे प्रसन्नता देता है।प्रसन्नता कोई बाहरी उपलब्धि नहीं, बल्कि भीतर की संतुष्टि है। जब व्यक्ति कम में संतुष्ट होना सीख लेता है, तब छोटी-छोटी बातों में भी आनंद खोज लेता है। यह प्रसन्नता मन को हल्का बनाती है, तनाव कम करती है और रिश्तों में मधुरता घोल देती है।प्रसन्नता से उपजा सुख क्षणिक नहीं होता। यह वह सुख है जो मन की गहराइयों में टिकता है। जब मन प्रसन्न रहता है, तो परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, व्यक्ति संतुलन नहीं खोता। इसी संतुलन से शान्ति जन्म लेती है—वह शान्ति जो बाहर नहीं, भीतर बसती है।आज के प्रतिस्पर्धात्मक और भौतिक जीवन में सरलता को कमजोरी समझ लिया गया है, जबकि वास्तव में यही सबसे बड़ी शक्ति है। सरल जीवन, सीमित आवश्यकताएँ और स्पष्ट मन—इनसे ही स्थायी प्रसन्नता, सच्चा सुख और आत्मिक शान्ति संभव है।निष्कर्षतः,

सरलता → प्रसन्नता → सुख → शान्ति

यह कोई दर्शन मात्र नहीं, बल्कि एक जीने की कला है, जिसे अपनाकर जीवन को सहज, सुंदर और सार्थक बनाया जा सकता है।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

     सरल होना अशक्त नहीं, बल्कि यह मानव जीवन को ऊँचाई देने वाला सबसे सशक्त गुण है। जब मनुष्य अपने विचारों, व्यवहार और अपेक्षाओं में सरलता अपनाता है, तब उसके भीतर एक स्वाभाविक प्रसन्नता जन्म लेती है। यह प्रसन्नता बाहरी साधनों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि आत्मसंतोष से उत्पन्न होती है। सरल व्यक्ति न दिखावे में उलझता है, न ही अनावश्यक प्रतिस्पर्धा में अपनी ऊर्जा नष्ट करता है। इसी कारण उसका मन हल्का, स्वच्छ और स्थिर रहता है। प्रसन्नता से ही वास्तविक सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। सुख वह नहीं जो भौतिक वस्तुओं से क्षणिक रूप में प्राप्त हो, बल्कि वह है जो मन की गहराई से उपजता है। जब व्यक्ति सरल होकर जीवन को स्वीकार करता है, तो वह परिस्थितियों से लड़ने के स्थान पर उनसे सीखना आरम्भ कर देता है। इससे तनाव कम होता है, ईर्ष्या समाप्त होती है और मन में संतुलन बना रहता है। यही संतुलन जीवन को सहज और सार्थक बनाता है। सरलता और प्रसन्नता का स्वाभाविक परिणाम शान्ति है। शान्ति केवल बाहरी शोर के अभाव का नाम नहीं, बल्कि भीतर उठते चक्रवातों के शांत हो जाने की अवस्था है। सरल मनुष्य कम अपेक्षाएँ रखता है, इसलिए निराशा भी कम होती है। वह सत्य, नैतिकता और कर्तव्य के मार्ग पर चलता है, जिससे आत्मग्लानि नहीं होती और अंतःकरण शांत रहता है। ऐसी शान्ति व्यक्ति को निडर बनाती है और सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करती है।वर्तमान के भौतिक और भागदौड़ भरे युग में, जहाँ जटिलता को ही सफलता का पैमाना मान लिया गया है, वहाँ सरलता एक क्रांतिकारी विचार बन जाती है। सरल जीवन अपनाकर व्यक्ति न केवल स्वयं सुखी रहता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उसका व्यवहार प्रेरणा बनता है और उसके विचार विश्वास जगाते हैं। अन्ततः उसका निष्कर्ष यह निकलता है कि सरलता से प्रसन्नता मिलती है, प्रसन्नता से सुख और सुख से शान्ति। यही जीवन की सच्ची पूँजी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में थोड़ी सी सरलता अपना ले, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन सुधरेगा, बल्कि समाज और राष्ट्र भी शान्ति, सौहार्द और समृद्धि की ओर अग्रसर होंगे। 

- डॉ इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) - जम्मू और कश्मीर

    सरल होना हमारे जीवन का सबसे सुंदर आभूषण है। जब मन में किसी के प्रति छल, दिखावा और अनावश्यक अपेक्षाएँ नहीं होतीं, तब आपने देखा होगा कि हमारा मन कितना हल्का महसूस करता है। इसी सरलता से हमारे भीतर सहज प्रसन्नता जन्म ले लेती है, जो किसी बाहरी साधन की मोहताज नहीं होती। प्रसन्न मन का व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुलित रहता है। छोटी-छोटी बातों में आनंद ढूँढ लेने की क्षमता उसके अंदर विकसित होकर जीवन को मधुर बनाने में सफल हो जाती है। यही प्रसन्नता धीरे-धीरे सुख और शांति का रूप ले लेती है, जहाँ न ईर्ष्या का कोई काम और न ही अशांति का!वास्तव में, सरल जीवन और ऊँचे विचार वाला व्यक्ति ही स्थायी सुख-शांति को अनुभव कर पाता है। इसीलिए जो व्यक्ति सरल है, वही सच्चे अर्थों में समृद्ध है यानी प्रसन्न और सुखी है।

 - नूतन गर्ग 

    दिल्ली

      सरल होने से प्रसन्नता मिलती है, प्रसन्नता से जीवन में सुख शांति मिलती है। आज की चर्चा-परिचर्चा का विषय बहुत ही सरल है। लेकिन न समझने वालों के लिए उतना ही जटिल है, जितना किसी विद्यार्थी के लिए कोई समझ न आने वाला विषय होता है। यह बात सही है कि टेढ़ी-मेढ़ी जीवन रेखा को कोई फार्मूला (नियम) यदि साधारण बना सकता है तो, वह नियम है... ’सरलता’। वास्तव में किसी व्यक्ति का जन्म सुख-सुविधाओं से संपन्न परिवार में होता है। किसी का दो वक्त का भोजन ठीक ढंग से प्राप्त न होने वाले परिवार में होता है। देखने को तो सुख-सुविधा, संपन्नता वाले परिवार वाले व्यक्ति का जीवन सरल और सहज होना चाहिए। लेकिन यह उसके जीवन जीने के ऊपर निर्भर करता है। यदि उन्हीं को लेकर वह मानवीय मूल्यों को भूल कर घमंडी, अकड़ वाला  बन जाता है तो उसका जीवन कभी सरल दूसरे शब्दों में कहें तो सुख शांति वाला नहीं हो सकता। इसके विपरीत जीवन की मूलभूत जरूरतों से वंचित व्यक्ति के लिए जीवन  सरल भी हो सकता है। अर्थशास्त्र का एक सिद्धांत है कि मनुष्य की आवश्यकताएं असीमित हैं। जैसे-जैसे उसकी आवश्यकताएं पूरी होती जाती हैं। उसकी भूख उतनी ही उनके लिए बलबत्ती होती जाती हैं। जिस व्यक्ति के लिए जीवन की आवश्यकता रोटी  कपड़ा और मकान है। यदि उसे वो मिल जाता है तो, उसके जीवन में सुख शांति उसी में है। इसके विपरीत जिस व्यक्ति के पास सभी प्रकार की सुख सुविधाएं हैं यदि उसके पास संतोष या संतुष्टि नहीं है तो उसके जीवन में पुष्टि जिसे दूसरे शब्दों में सुख शांति कह सकते हैं, कभी नहीं हो सकती। इसलिए निष्कर्ष रूप में यही कहा जा सकता है कि सरलता जिसे राम रत्न धन कह सकते हैं। उसी में सुख- शांति और समृद्धि निहित है। सरलता जीवन के सुखी सिद्धांतो में से एक सबसे बड़ा अनिवार्य सिद्धांत है। जिस  व्यक्ति ने इसे अपने जीवन में आत्मसात कर लिया, वह कभी सुख शांति विहीन नहीं हो सकता।

- डॉ. रवीन्द्र कुमार ठाकुर

बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश

      सरल होने का अर्थ है कि आप सरल व सहज जीवन जी रहे हैं। आपकी प्रकृति में दुराव-छिपाव,  राजनीति, कूटनीति आदि शामिल नहीं है। ऐसे लोग पीठ पीछे बातें नहीं बनाते। तानें कसना, दूसरों पर टिपण्णियाँ करना आदि बातों पर न अपना समय नष्ट करते हैं न अपना सम्मान व गरिमा खोते हैं। हमेशा प्रसन्न रहते हैं । ऐसा सरल, सहज जीवन, जीवन में प्रसन्नता लाता है, जीवन मूल्यों को बढ़ाता है। इस प्रकार का जीवन सुख, सकून व शांति से भरपूर होता है।संतुष्टि, पद, प्रतिष्ठा, गरिमा प्रदान करता है। जीवन में महत्वपूर्ण है कि हम सरलता व सहजता से जिये तथा प्रसन्नता, शांति और सकून  से जीवनयापन करें। 

- रेनू चौहान 

नई दिल्ली

" मेरी दृष्टि में " प्रसन्नता से ही जीवन सरल होता है। जो जीवन के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या करता है। संसार को समझने में सरल होना बहुत ही आवश्यक होता है।  बिना प्रसन्नता के कुछ ही हासिल नहीं होता है। परिवार से समाज और देश के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। इस के लिए सबसे पहले सरल होना पड़ता है। यही जीवन की सच्चाई है। 

           - बीजेन्द्र जैमिनी 

        (संचालन व संपादन)

Comments

  1. 🙏🙏🇮🇳🌷🌻 आदरणीय विजेंद्र जैमिनी जी, सादर नमस्कार। आपकी अकादमी के द्वारा संचालित चर्चा- परिचर्चा वास्तव में जीवन के अभिन्न पहलुओं को लेकर के चलती है। यह विषय जीवन की धूरी को निर्धारित करते हैं। हिंदी साहित्य सृजन और उसके कोश को समृद्ध करने के इतिहास में, यह आपका एक अतुलनीय योगदान है। मुझे सम्मानित करने के लिए आपका हार्दिक आभार, जय हिंद, जय हिंदी, जय भारत।
    - डॉ. रविन्द्र कुमार ठाकुर
    बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश
    (WhatsApp से साभार)

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

हिन्दी के प्रमुख लघुकथाकार ( ई - लघुकथा संकलन ) - सम्पादक : बीजेन्द्र जैमिनी

लघुकथा - 2025

दुनियां के सामने जन्मदिन