वीर बुधु भगत स्मृति सम्मान -2026
कई बार जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब हमें लगता है कि सब कुछ गलत हो रहा है। लोग बदल गए हैं, किस्मत खराब है, या दुनिया ही बुरी है। लेकिन सच यह है कि हर चीज़ स्थायी रूप से बुरी नहीं होती। अक्सर सिर्फ समय खराब होता है। जब समय अनुकूल होता है तो वही लोग अच्छे लगते हैं, वही काम सफल हो जाते हैं और वही परिस्थितियाँ सुखद लगती हैं। लेकिन जब समय प्रतिकूल होता है तो छोटी-सी समस्या भी बड़ी दिखाई देती है।खराब समय हमें धैर्य रखना सिखाता है। वह हमें मजबूत बनाता है, सोचने का नया तरीका देता है और जीवन का अनुभव बढ़ाता है। जैसे रात के बाद सुबह आती है, वैसे ही बुरे समय के बाद अच्छा समय भी आता है। इसलिए किसी व्यक्ति या परिस्थिति को तुरंत बुरा नहीं कहना चाहिए। हो सकता है समय ही ऐसा हो। यदि हम हिम्मत और विश्वास बनाए रखें, तो समय बदलते देर नहीं लगती। निष्कर्ष:- बुरा इंसान या दुनिया नहीं होती,सिर्फ समय कठिन होता है — और वह भी हमेशा के लिए नहीं।
- डाॅ.छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
बुरा कुछ नहीं होता, केवल समय की परिस्थितियाँ मनुष्य की परीक्षा लेती हैं। क्योंकि जीवन में आने वाली प्रतिकूलताएँ वास्तव में हमारे धैर्य, साहस, आत्मबल और सत्यनिष्ठा की कसौटी होती हैं, जब परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं तो मनुष्य सहज ही प्रसन्न रहता है। परन्तु जब समय प्रतिकूल होता है तो वही क्षण उसके वास्तविक चरित्र, उसकी आस्था और उसके आत्मसम्मान की शक्ति को उजागर करते हैं। संघर्ष और कठिनाइयाँ मनुष्य को दुर्बल बनाने के लिए नहीं, बल्कि उसे अधिक जागरूक, परिपक्व और दृढ़ बनाने के लिए आती हैं, क्योंकि विपरीत समय ही वह दर्पण होता है जिसमें व्यक्ति अपनी वास्तविक क्षमता, अपनी सहनशीलता और अपने अटूट विश्वास को पहचानता है। जो व्यक्ति निराशा के अंधकार में भी आशा की ज्योति जलाए रखता है, अन्याय के सामने भी सत्य का साथ नहीं छोड़ता और बाधाओं के बीच भी अपने आत्मसम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखता है, वही समय की कठोर परीक्षा को सफलतापूर्वक पार करता है और अंततः सम्मान, संतुलन और गौरव का अधिकारी बनता है। इसलिए परिस्थितियों से विचलित होना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर और अधिक सशक्त बनना ही सच्ची विजय का मार्ग है, क्योंकि समय अस्थायी है परन्तु सत्य और चरित्र की शक्ति स्थायी है। अतः यह स्वीकार करना ही श्रेष्ठ है कि समय बदलता रहता है, परन्तु सिद्धान्त, सत्य और आत्मगौरव शाश्वत रहते हैं। इसलिए जो व्यक्ति कठिन घड़ियों में भी अपने मूल्यों से विचलित नहीं होता, वही अन्ततः नैतिक, मानसिक और सामाजिक विजय प्राप्त करता है और वैश्विक उदहारण प्रस्तुत करता है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
यथार्थपूर्ण पंक्ति ... वास्तव में बुरा कुछ नहीं होता , ये तो नजरिए पर निर्भर करता है कि हम किसी चीज को किस प्रकार देखते हैं ! हो सकता है कि जिस से मिलना नहीं चाहें , वही मिल जाए और कोई अचानक से ऐसी खबर मिले जिसकी उम्मीद नहीं थी !! समय बुरा हो तो हर मौका खो जाता है , व समय अच्छा हो यो तो जिस कार्य मे हम हाथ डालते हैं ,सफलता मिलती है !!
समय बलवान होता है ,
समय ठीक तो सब ठीक ,
समय बुरा तो सब बुरा !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
समाज में रहकर जीवन यापन करना है, तो बुरा-भला-समय देखकर चलना पड़ता है, कब किस समय बुरा हो जाए, समय बताकर नहीं आता है। जिसे हम गृह नक्षत्र की संज्ञा देते है। जिसके आधार पर भला भी हो जाता है, बुरा कुछ नहीं होता है, सिर्फ समय बुरा होता है। कैसा संवाद स्थापित करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। वास्तविक रूप से परिस्थितियाँ भी समय बता देती है......!
- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
बालाघाट - मध्यप्रदेश
“बुरा कुछ नहीं होता, सिर्फ समय ही बुरा होता है” यह पंक्ति जीवन के अनुभवों का गहरा निचोड़ है। वास्तव में घटनाएँ अपने आप में न अच्छी होती हैं, न बुरी; उन्हें अच्छा या बुरा बनाने वाला हमारा दृष्टिकोण और उस समय की परिस्थितियाँ होती हैं। जब समय अनुकूल होता है, तो छोटी-छोटी बातें भी सुख दे जाती हैं, और जब समय प्रतिकूल होता है, तो वही साधारण घटनाएँ पीड़ा का कारण बन जाती हैं। बुरा समय हमें तोड़ने नहीं, बल्कि गढ़ने आता है। वह हमें धैर्य, सहनशीलता और आत्मबल सिखाता है। कठिन दौर में ही मनुष्य अपने भीतर छिपी शक्तियों को पहचानता है, अपने रिश्तों की असलियत समझता है और जीवन की सच्ची प्राथमिकताओं को जानता है। यदि हर समय अच्छा ही रहे, तो संघर्ष का मूल्य, मेहनत की गरिमा और सफलता का आनंद शायद महसूस ही न हो।इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि बुरा कुछ नहीं होता, बस समय हमें परीक्षा में डालता है। यह परीक्षा हमें मजबूत बनाने, समझदार बनाने और आगे के जीवन के लिए तैयार करने का माध्यम है। समय बदलता है, परिस्थितियाँ भी बदलती हैं, और उसी के साथ हमारी तकलीफें भी। इसीलिए बुरे समय में धैर्य रखना और अच्छे समय में विनम्र बने रहना ही जीवन की सच्ची समझ है।
- सुनीता गुप्ता
कानपुर - उत्तर प्रदेश
“बुरा कुछ नहीं होता है, सिर्फ समय बुरा होता है” — इसका अर्थ है कि परिस्थितियाँ स्थायी रूप से बुरी नहीं होतीं, बल्कि समय के उतार-चढ़ाव के कारण हमें कठिनाइयाँ महसूस होती हैं। समय बदलते ही वही परिस्थितियाँ सुधर भी सकती हैं।परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, इसलिए दुख या कठिनाई स्थायी नहीं होती।समय का प्रभाव हमारे अनुभव को अच्छा या बुरा बनाता है।धैर्य और आशा से बुरा समय भी गुजर जाता है। कठिन समय में निराश नहीं होना चाहिए। हर बुरा समय कुछ सिखाकर जाता है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है । अच्छा समय फिर आता है।
- डॉ. अर्चना दुबे " रीत"
मुंबई - महाराष्ट्र
सुबह नींद खुलने के बाद से रात में नींद लगने की दिनचर्या में हमें बहुत कुछ जद्दोजहद करना होती है। अनेक परिचितों और अपरिचितों से सामना होता है। बातें होती हैं,विमर्श होता है, लेन-देन होता है, मदद भी लेते हैं,मदद करते भी हैं। लाभ होता है, हानि होती है। खुश भी होते हैं,दुखी भी होते हैं। इस तरह विचित्रताओं और विविधताओं से युक्त हमारा जीवन सतत चलता रहता है। संक्षेप में माना जावे तो यही हमारा जीवन- संघर्ष है, यही जीवनयापन है। इस अंतराल में जब हमारे साथ सकारत्मक पक्ष ज्यादा प्रबल होता है तो हम इसे अच्छा समय और जब हमारे साथ नकारात्मक पक्ष ज्यादा प्रबल होता है तो हम इसे बुरा समय मानते हैं। यानी असल में, अच्छा-बुरा समय हमारे जीवन का हिस्सा ही होते हैं, जो सामान्यत: हमारे व्यक्तिगत ही होते हैं और हमारे स्वत: के व्यवहार, स्वभाव, अपेक्षाओं,उपेक्षाओं आवश्यकताओं, सामर्थ्य, लापरवाही, उदासीनता, धीरता, अधीरता आदि के कारण कई वजह से होते हैं। यानी ये हमारे कर्म और उससे निर्मित भाग्य का प्रतिफल होते हैं। अत: वास्तव में " बुरा कुछ नहीं होता है, सिर्फ समय बुरा होता है। " इसके कारण के पीछे हम स्वयं ही होते हैं। हाँ, लेकिन इसके अलावा जो समय, सार्वजनिक रूप में एक ही समय परिस्थितिजन्य, अनेक परेशानियों और बाधाओं से भरा होता है, उसे जरूर हम " बुरा समय " कह सकते हैं। इससे पीड़ित सामान्यत: अनेक जन होते हैं।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
यह सच है कि बुरा कुछ नहीं होता है सिर्फ समय बुरा होता है. समय बड़ा बलवान है, समय ही बादशाह है, पल में राजा को रंक बना सकता है, रंक को ताज पहना सकता है. समय ही अच्छी-बुरी समझ और संगत देता है. समझ बुरी तो सब काम बुरे ही होंगे, इसी तराह संगत बुरी तो सब काम बुरे ही होंगे. बुरे समय में धैर्य धारण करना वांछनीय है. समय चक्र के अनुसार अंधेरे के बाद उजाला आता है, बुरे के बाद अच्छा भी हो सकता है. धैर्य से अपने बुरे परिणाम पर मंथन करके अपनी त्रुटियों / कमियों का संशोधन करना श्रेयस्कर है. मंथन से त्रुटियों / कमियों का सुधार कर सुनियोजित कार्य से समय में सुधार किया जा सकता है. बुरा समय भी अच्छा हो सकता है.
- लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
जीवन में बुरा कुछ भी नहीं होता और न ही कुछ अकारण ही होता है।हमारी सोच ही उसे अच्छे या बुरे का नाम दे देती है क्यों कि कई बार काम वैसे नहीं होते जैसे हम अपेक्षा करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि वे अच्छे नहीं होते। कई बार बहुत अच्छे व्यक्ति भी हमारे साथ कुछ ऐसा बर्ताव कर जाते हैं जो हमने कभी सोचा भी नहीं था और हम उन्हें बुरा-भला कह देते हैं।व्यक्ति बुरे नहीं होते अपितु कोई कारण होता है जो वो हमारे साथ ऐसा व्यवहार करते हैं; जैसे उन्हें हमें कोई सबक़ सिखाना होता है, कोई अनुभव देना होता है अथवा आने वाली किसी बड़ी मुश्किल से बचाने के लिए कोई चेतावनी देनी होती है। जब सब काम हमारी इच्छानुसार नहीं चलते तो हम कहते हैं समय ख़राब है। ईश्वर की रज़ा में रज़ा रहेगी तो कुछ भी ख़राब नहीं लगेगा।
- रेनू चौहान
नई दिल्ली
मैं हमेशा ही कहता रहा हूं कि बुरा कुछ नहीं होता.हमारी सोच बतलाती है, हमारे विचार बतलाते हैं कि बुरा भी कुछ होता है. न कोई मनुष्य बुरा होता है, न कोई समान बुरा होता है,न कोई पुस्तक बुरी होती है. बुरा होता है तो केवल समय. बुरा समय आया तो राजा हरिश्चंद्र को श्मशान घाट पर काम करना पड़ा. बुरा समय आया तो भगवान राम को भटकना पड़ा. समुद्र का बुरा समय आया तो उस पर पुल बना. ऐसे बहुत से उदाहरण भरे पड़े हैं जो बुरे तो नहीं थे पर समय के बुरा होने के कारण कष्ट झेलने पड़े या बदनाम होना पड़ा.
- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - प. बंगाल
यह वाक्य जीवन के प्रति एक गहरा और धैर्यपूर्ण नजरिया देता है— “कुछ बुरा नहीं होता, सिर्फ समय बुरा होता है।” अक्सर हम किसी घटना को तुरंत “बुरा” कह देते हैं, क्योंकि उस समय वह हमें दुख, हानि या असफलता देती है। लेकिन जब वही घटना समय के अंतराल के बाद पीछे मुड़कर देखी जाती है, तो समझ आता है कि उसने हमें कुछ सिखाया, हमें मजबूत बनाया या हमें किसी बेहतर दिशा की ओर मोड़ दिया। यानी घटना स्थायी रूप से बुरी नहीं थी; बस उसका दौर कठिन था। समय एक बहता हुआ चक्र है— कभी अनुकूल, कभी प्रतिकूल। जब समय प्रतिकूल होता है, तो छोटी-सी परेशानी भी बड़ी लगती है, और जब समय अनुकूल हो, तो बड़ी चुनौतियाँ भी हल्की लगने लगती हैं। इसलिए यह कथन हमें याद दिलाता है कि परिस्थितियाँ स्थायी नहीं होतीं। यह सोच हमें तीन तरह की शक्ति देती है: - धैर्य की शक्ति – बुरा दौर भी बीत जाएगा, यह विश्वास बना रहता है। संतुलन की शक्ति – हम घटनाओं को स्थायी सत्य नहीं मानते, बल्कि एक चरण मानते हैं। आशा की शक्ति – हर अँधेरे समय के बाद उजाला आने की संभावना दिखती है। हालाँकि, इसका अर्थ यह नहीं कि दुख या पीड़ा को नकार दिया जाए। कठिन समय सचमुच कठिन होता है, लेकिन यह वाक्य हमें टूटने से बचाता है और याद दिलाता है कि समय बदलने की क्षमता रखता है।अंततः, यह विचार जीवन का एक सुकून भरा सत्य है—
घटनाएँ हमें परखती हैं,
समय हमें सँवारता है,
और हर बुरा दौर,
एक नए अच्छे समय की तैयारी होता है।
- रंजना वर्मा उन्मुक्त
रांची - झारखंड
कुछ शब्दों में दुनिया की सबसे बड़ी सच्चाई घिपी है। मनुज बली नहिं होत है । समय होत बलवान ।वेद पुराणों। ने कहा - - - इंसानों ने कहा - - - प्रमाणों ने कहा। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सबने पढी सुनी है। समय की परीक्षा में जो सफल होते हैं वे ही पार होते हैं । जिसने समय को जीत लिया समझ लीजिए जग जीत लिया। समयानुसार संचालित जीवन दुनिया को बदलने की क्षमता रखता है। विश्व का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है। आइये संकल्प लें कि वक्त की कीमत को पहचान लें और आगे बढें। निःसंदेह वक्त आपका होगा जरूर। ना इंसान बुरा होता है ना उसका काम बुरा होता है प्रारब्ध के साथ चलती समय की सुई की टिक टिक आपको अपना रास्ता सुझाती रहती है। जरूरत इस बात की है कि समय को पहचानें - - सही रास्ते जानें और आगे बढें। समय आपका और सिर्फ आपका होगा ।
- हेमलता मिश्र मानवी
नागपुर - महाराष्ट्र
जीवन संग्राम है कुरुक्षेत्र के महाभारत जैसा, कौरवों और पांडवों के समान सुख दुख का आगमन है। जीत जाते हैं हम स्थिति परिस्थितियों को संयम और हौसले से,।बुरा कुछ नहीं होता, केवल समय बुरा होता है,समय ही बलवान है। यदि हम इस समय चक्र की गति और चाल के भेद को जान ले तो मोह माया भी हमारे दिमाग से छूट जाती है ।फिर हमें सुख और दुख एक समान लगते हैं।जीवन में वैराग्य आ जाता है । बैराग्य ही परम परमेश्वर के मार्ग तक जाने का रास्ता है ।समय ही हमसे सब कुछ कराता है। कई बार कुछ फैसलों को समय पर छोड़ देना चाहिए। हमारे ग्रंथ पुराण सभी यही जीवन का सार हमें समझाते हैं।
- ज्योतिराज मधुरिमा
धामपुर -उत्तर प्रदेश
" मेरी दृष्टि में " बुरा कुछ नहीं होता है कुछ भी अच्छा नहीं होता है। यह सिर्फ एक भ्रम होता है। जो हमारा कर्म होता है जिससे जीवन चक्र भी कहते हैं या समय चक्र कहते हैं।
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