मीरा जैन की लघुकथाएं

              मीरा जैन

जन्म तारीख  : 02 नवम्बर 1960

सम्प्रति-

पूर्व सदस्य बाल कल्यााण समिति

 पद-प्रथम श्रेणी न्यायायिक मजिस्ट्रेट बोर्ड , बा.क.स 

 चेयर पर्सन-गर्ल सेव चाइल्ड कमेटी जे.एस.जी.आई.एफ. 2016-17-18 

2019 गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा  देश के विद्ववानों की सूची में शामिल

लेखन विधा- 

लघुकथा,कविता, व्यंग्य, आलेख, क्षणिकाएं आदि।

  2000 से अधिक रचनाएं निम्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं- 

 कादम्बिनी , सरिता , गृहशोभा, हंस , नया ज्ञानोदय , सरस सलिल , अहा !जिदंगी , मेरी सहेली , गृहलक्ष्मी,  वनिता , बिंदिया. नवनीत , जागरण सखी , मेरी सजनी , वीणा , नई गुदगुदी , साहित्य अमृत, कथादेश, माधुरी , मनस्वी , वेद अमृत , मनोरमा, विश्व हिंदी साहित्य मारीशस, देवपुत्र , नंदन , बाल भारती, मंगलयात्रा , साक्षात्कार . स्वदेश , पंजाब सौरभ, बाल भास्कर, बाल हंस, बच्चो का देश, शबनम ज्योति,अणुव्रत, द्वीप लहरी, अमृत कलश, प्रभात खबर, समाज्ञा ,नई दुनिया, दैनिक जागरण, अमर उजाला, लोकमत,

 समान्तर ,दैनिक भास्कर, नव भारत टाइम्स , राजस्थान पत्रिका ,हरिभूमि, प्रभात खबर, भारतदर्शन न्यूजीलैडं,  ,हिंदी चेतना(कनाडा) नवनीत , बाल किलकारी(बिहार सरकार),

अजीत समाचार,  उजाला, पंजाब केसरी, जनवाणी, नवभारत , वागिश ( यू.के.)सेतू-.यू.एस. , किस्सा कोतहा,साहित्य सरस्वती,  कथा देश , गिरिराज, हिमप्रस्थ, रेशम वाणी,  अक्षरा ,  आदि अनेक।

 प्रकाशित किताबें-

1- पुस्तकों के नाम - 

मीरा जैन की सौ लघुकथाएं 2003,11,13,16

 101 लघुकथाएं -2010,12,14

 दीन बनाता है दिखवा 2013'16-

मीरा जैन की कवितायें,   सम्यकलघुकथाए ,श्रेष्ठ जीवन की संजीवनी, हेल्थ हादसा, मानव मीत लघुकथाएं  जीवन बन जाए आनंद का पर्याय,भोर में भास्कर मीराजैन की सदाबहारलघुकथाएं, दीप मे दिवाकर, बूंद मे सागर।

सम्मान \ पुरस्कार :-

अंतर्राष्ट्रीय , राष्ट्र एंव राज्य स्तरीय अनेक पुरस्कार- 

 नईदुनिया तथा टाटा शक्ति द्वारा लेखन के लिये  प्राइड स्टोरी अवार्ड 2014. 

 युग र्निमाण शिक्षण समिति तथा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा हिंदी सेवा सम्मान 2015 से सम्मानित .

 पुस्तक 101 लघुकथाएं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरूस्कार 2011 .

लघुकथा के लिये हस्ताक्षर संस्था द्वारा विशिष्ट पुरस्कार ,

 दैनिक अग्नि पथ द्वारा वरिष्ठ लघुकथाकार साहित्य सम्मान 2013 ,

 शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान 2013 , 

सामाजिक कार्यो में विशिष्ट योगदान एवम् साहित्यक उपलब्धियों हेतू नवकार सेवा संस्थान द्वारा विशिष्ट सम्मान .

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लेख को प्रथम पुरस्कार

महिला एवं बाल विकास उज्जैन संभाग म.प्र. द्वारा अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस 2016 में सम्मान , 

कथादेश द्वारा 2016 में लघुकथा पुरस्कृत . 

जे.एस.जी.आई.एफ. म.प्र.रीजन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियॉ तथा समाज सेवा के क्षेत्र में  अद्वितीय कार्यो के लिये अवार्ड 2016-17 से नवाजा गया. 

अभिव्यक्ति मंच द्वारा कविता को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार 

जे.एस.जी.आई.एफ. द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट लेखन व समाज सेवा के क्षेत्र में आउट स्टेंडिंग परफारमेंस हेतू अवार्ड 2017 .

महिला सशक्तिकरण उज्जैन ने बेहतर समाज सेवा , समाजिक एकता व उत्कृष्ट लेखन के लिये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2017 पर सम्मानित किया .  

       अभिव्यक्ति विचार मंच द्वारा राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान 2017-18 से सम्मानित   आदि अनेक।

अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच बंगलौर द्वारा राजभाषा साहित्य सम्मान

राष्ट्रीय संगठन सखी संगिनी द्वारा 2018 नारी सेवा सम्मान 

लघुकथाएं व लेख को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 2018 में पुरस्कृत,

भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'साहित्य समीर दस्तक' एंव श्री विभगूंज वेलफेयर सोसायटी' द्वारा 'सम्यक लघुकथाएं' को 'शब्द गुंजन लघुकथा सम्मान-2018' से सम्मानित किया गया।

विचार प्रवाह मंच इंदौर द्वारा सम्मानित 2020

 डॉक्टर एस एन तिवारी  सम्मान 2021

अमृत महोत्सव के तहत माधव महाविद्यालय उज्जैन द्वारा श्रेष्ठ साहित्य साधिका सम्मान 2021

मातृ भाषा उन्नयन संस्थान भारत के द्वारा हिंदी दिवस 2022 सम्मानित

हिंदी साहित्य सम्मेलन बदनावर द्वारा साहित्य सम्मान 2022

मथुरा देवी स्मृति वट स्मृति षोडश सम्मान 20 22

हिंदी साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा व्यंग्य संग्रह 'हेल्थ हादसा ' को शरद जोशी व्यंग्य सम्मान 2019

भारतीय साहित्य परिषद इंदौर द्वारा प्रादेशिक साहित्य गौरव सम्मान 2023

विचार प्रवाह साहित्यिक मंच  इंदौर द्वारा विशिष्ट लघुकथा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान सम्मान 2023

इंटिग्रेटेड सोसायटी ऑफ मीडिया प्रोफेशनल लखनऊ द्वारा 

समग्र सहित्य पर मैथिली शरण गुप्त सम्मान 2022

अथाई समूह द्वारा सर्वश्रेष्ठ कथाकार सम्मान 2023

संस्था विद्यांजलि भारत मंच इंदौर द्वारा समग्र साहित्य पर धरोहर सम्मान 2023

 साहित्य संगीति जयपुर द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर को  सर्वोत्कृष्ट कृति जयपुर सम्मान 2024

अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा अभिनव शब्द शिल्पी अलंकरण से सम्मानित 2023

 अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय महिला लेखन प्रेरणा पुरस्कार 2023

म. प्र लेखिका संघ भोपाल द्वारा लघुकथा संग्रह भोर में भास्कर के लिए राष्ट्रीय स्तर पर श्रीराजकुमार केसवानी सम्मान 2024

जैमिनी अकादमी ( पानीपत - हरियाणा) द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी जन्मशताब्दी सम्मान - 2024 से सम्मानित 

माता कौशल्या साहित्य संस्कृति शोध संस्थान वी डॉ.माया ठाकुर फाउंडेशन रायपुर द्वारा 

लघुकथा भूषण सम्मान 2024

रक्त मित्र फाउंडेशन मथुरा उत्तर प्रदेश द्वारा नारी शक्ति पद्मश्री सम्मान 2024

 पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ द्वारा साहित्य सम्मान 2024

मां राजपति देवी स्मृति साहित्य सम्मान 2024-प्रयागराज

किस्सा कोतहा सम्मान आगरा 2024

राजराजेश्वरी म्यूजिकल ग्रुप इंदौर साहित्य सम्मान 2024

प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट भोपाल द्वारा साहित्य सम्मान 2024

प्रांति इंडिया साहित्य सम्मान 2024

अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय श्लाका सम्मान 2024

अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती साहित्य सम्मान 2025

श्रीमती आशा सुपेकर स्मृति सम्मान 2025

भारतीय लघुकथा विकास मंच (पानीपत - हरियाणा) द्वारा समीक्षा रत्न सम्मान - 2026 से सम्मानित 

डॉक्टर तारा सिंह विशिष्ट राष्ट्रीय सम्मान 2026 

स्वर्गविभा परिवार  नवी मुंबई,

टीजीटी महादेवी वर्मा सम्मान 2026दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह,

श्री जैन श्राविका रत्न सम्मान 2026,

लघुकथा संग्रह दीप मे दिवाकर के लिए लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल द्वारा 

श्री पारस दासोत स्मृति लघुकथा कृति सम्मान 2026

विशेष-                 

 2011में ‘‘ मीरा जैन की सौ लघुकथाएं‘‘विक्रम विश्व विद्यालय उज्जैन द्वारा शोध कार्य करावाया जा चुका है ।    

2022 - महाराष्ट्र, सावित्रीबाई फूले यूनिवर्सिटी पुणे द्वारा लघुकथाओं पर शोध कार्य जारी।

2024 - विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा मेरी लघुकथाओं पर शोधकर जारी ।

अनेक लघुकथाओं पर लघु फिल्मों का निर्माण।

 सन् 2007-8 में निर्धन वर्ग आयोग म.प्र.शासन राज्य स्तर पर मेरे द्वारा भेजे गये सुझावों को

       प्रथम प्रथमिकता में चयनित किया .  

       केंद्रिय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मेरी किताबें क्रय  की  गई है ।

  अनेक भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद एवं प्रकाशन

पंजाबी, ओड़िया तथा मराठी के अनेक पत्र पत्रिकाओं में लघुकथाओं का प्रकाशन।

वे संग्रह जिनमे मेरी लघुकथाएॅ हैं-  तीसरी ऑख , द्वीप लहरी , समान्तर ,क्षितिज ,चर्चित ,मिन्नी (पंजाबी), सेतु , कालीमाटी ,दोहरे चेहरे , महा मानव , सागर के मोती, बुजुर्ग जीवन की, लघुकथाएं , कलश, दृष्टि, मन के मोती, गुलाबी गलियां आदि अनेक।

 नेपाली, गुजराती , पंजाबी , सिंधी , ओड़िया, बंगाली, असमिया, भोजपुरी,  अंग्रेजी,मलयालम , मराठी ,भाषा मेें भी अनुवाद एंव प्रकाशन।

आकाशवाणी जगदलपुर एवम् इंदौर से व्यंग्य,लघुकथाओं व अन्य रचनाओं का प्रसारण. म.प्र.दूरदर्शन से कविताओं का प्रसारण , बोल हरियाणा बोल तथा रेडियो दस्तक से प्रसारण।

अनेक मंचो से बाल साहित्य , बालिका महिला सुरक्षा उनका विकास , कन्या भ्रूण हत्या , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , बालकों के लैगिंग यौन शोषण , निराश्रित बालक बालिकाओं  को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना स्कूल , कॉलेजों के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा आदि के अनेक विषयो पर उद्बोधन एवं कार्यशाला।

पता :-

मीरा जैन 

516,  साईं नाथ कॉलोनी,

सेठीनगर , उज्जैन ,

मध्य प्रदेश - 456010

        1. बचपन बचपन 

दिव्यांम के जन्मदिन पर गिफ्ट में आए ढेर से  नई तकनीक के इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों में कुछ को  दिव्यम चला नहीं पा रहा था घर के अन्य सदस्यों ने भी हाथ आजमाइश की लेकिन किसी को भी सफलता नहीं मिली तभी कामवाली बाई सन्नो का 11 वर्षीय लड़का किसी काम से घर आया सभी को खिलौनों में बेवजह मेहनत करता देख वह बड़े ही धीमे में व संकोची लहजे में बोला -

'आंटी जी ! आप कहें तो मैं इन  खिलौनों को चला कर बता दूं' पहले तो मालती  उसका चेहरा देखती रही फिर मन ही मन सोच रही थी कि इसे दिया तो निश्चित ही तोड़ देगा फिर भी सन्नो का लिहाज कर बेमन से हां कर दी और देखते ही देखते मुश्किल खिलौनों को उसने एक बार में ही स्टार्ट कर दिया सभी आश्चर्यचकित थे , मालती ने सन्नो को हंसते हुए ताना मारा -

' वाह री सन्नो ! तू तो हमेशा कहती है पगार कम पड़ती है और इतने महंगे खिलौने छोरे को दिलाती है जो मैंने आज तक नहीं खरीदे '

 इतना ही सुनते ही सन्नों की आंखें नम हो गई उसने भरे गले से कहा- ' मैडम जी ! यह खिलौनों से खेलता नहीं बल्कि खिलौनों की दुकान पर काम करता है।' ०००

      2.  जमीन आसमान

 15 अगस्त के अवसर पर एक विदेशी सामाजिक संस्था के प्रमुख भारत के एक बाल आश्रम में झंडा वंदन के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए कार्यक्रम समाप्ति के पश्चात उन्होंने उपस्थित बाल समुदाय से पूछा-

' प्यारे प्यारे बच्चों ! मैं आप सबके बीच आज इसलिए उपस्थित हुआ हूं ताकि आपकी जरूरतों को पूरी करने में आप सभी की कुछ मदद कर सकूं क्योंकि हमारी संस्था का मुख्य उद्देश्य आप जैसे अनाथ और बेसहारा बच्चों को सहारा देना है बताओ बच्चों आप लोगों को किन-किन चीजों की सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस होती है हम उसे पूरा करेंगे ?'

किंतु किसी भी बालक ने किसी भी प्रकार की मांग नहीं रखी ज्यादा जोर देने पर बच्चों के मॉनिटर ने अपनी मंशा कुछ यूं व्यक्त की-

' प्रणाम अंकल !आप हमारे शुभचिंतक हैं बहुत-बहुत धन्यवाद ,अंकल बस एक छोटी सी बात आपसे कहना चाहता हूं '

' हां हां बोलो बेटा ! क्या बात है?'

 पूर्ण आत्मविश्वास के साथ उसने तिरंगे झंडे की ओर इशारा करते हुए कहा -

' अंकल ! जिसके सिर पर तिरंगा लहरा रहा हो वे भला अनाथ और बेसहारा कैसे हो सकते हैं '

 एक बच्चे के मुख से देशभक्ति की इतनी सटीक परिभाषा सुन उनकी आंखों से श्रद्धा के आंसू टपक पड़े उन्होंने भारत के बारे में क्या सोचा था और क्या पाया उनके मुख से बरबस ही निकल पड़ा -

' वास्तव में भारत महान है ।'   ००० 

    3. आज्ञा कीअवहेलना 

जैसे ही जलज ने घर मे कदम रखा बुजुर्ग पिता ने बिना किसी लाग लपेट केअपने मन की बात कही या यूँ कहे आदेश दिया -

' बेटा !  मोहल्ले के कम्युनिटी हाल मे वास्तु के सामानों की शानदार प्रदर्शनी लगी है घर मे सुख- शांति, समृद्धि व खुशहाली आदि के लिए ढेर सारी वस्तुएं हैं आस पास के सभी महिला-पुरुष

आवश्यकतानुसार

 वस्तु ले लेकर आ रहे हैं बहू के साथ जाकर चार छ: वस्तुएं ले आ नहीं तो सारी अच्छी अच्छी वस्तुएं बिक जायेंगी '

जलज पिता की बातों से बेपरवाह सोफे पर पसर गया . अपने आदेश कीअवहेलना से खफा मोहन जी भी नाराज से अपने कमरे मे चले गई.

कुछ देर पश्चात जलज कमरे मे पहुँच पिता से मनुहार के अंदाज मे बोला -

' चलो पापा ! चाय बन गई है '

नाराजगी भरे स्वर मे मोहन जी ने जवाब दिया-

' अभी नहीं पीनी है मुझे चाय '

जलज ने पिता का हाथ अपने दोनों हाथों मे लेकर चूमते हुए कहा-

' जिसके पास पिता हो उसे किसी भी वास्तु की आवश्यकता नहीं होती

है  मेरे प्यारे पापा '

इतना सुन मोहन जी  भी भाव विभोर अपने बेटे को अपलक निहारने लगे बेटे द्वारा की गई आज्ञा की अवहेलना से मोहन जी की आँखें खुशी से नम हो गई थी।

             4. उपवास 

   समीर ने घर मे कदम रखते ही सामने अक्षय को देख प्रश्न किया-

' क्या बात है बेटा ! आज तुम खेलने नहीं गये तबियत तो ठीक है ?'

उत्साहित स्वर मे अक्षय ने जवाब दिया-

' पापा ! आज मम्मी  के साथ मैने भी निराहार उपवास किया है अब

उनके साथ पूजा भी करूंगा '

' क्या--- ' अवाक समीर का उत्तेजित स्वर उभरा-

' नीना ! ये क्या तमाशा है अक्षय से भी उपवास करवा लिया इस धर्म कर्म

को अपने तक ही सीमित रखो बच्चों के पीछे नहीं पड़ो समझी  '

नीना ने सफाई पेश की-

' समीर ! अब अक्षय कोई छोटा बच्चा नहीं पूरे चौदह वर्ष का हो चुका

 है और उसने स्वेच्छा से उपवास किया है और इसमे बुराई क्या है तन

 और मन के साथ

श्रेष्ठ समाज का निर्माण भी समाहित है '

समीर ने खीझते हुए पूछा-

' अब तक मैने सुना था उपवास से तन स्वस्थ व आत्मा पवित्र होती है ये

समाज बीच कहाँ से आ गया ?'

नीना ने गंभीरता पूर्वक धीमे से कहा-

' समीर ! बात दरअसल ये है मै चाहती हूँ अक्षय को ये भी ज्ञात हो कि

 भूख क्या होती है भूख का महत्व उसे मालूम होना ही चाहिये

 ताकि बड़ा होकर दीन- हीन , निर्धन व्यक्तियों के प्रति

इसके मन मे सहिष्णुता एवं उदारता के भाव हो भूखों को भोजन कराने

की लालसा इसके मन मे जागृत रहे कुछ नहीं तो किसी जरूरतमंद को हेय दृष्टि से तो नहीं देखेगा ये भी संस्कारों की अनमोल कड़ी है जो स्वस्थ समाज के लिये अति आवश्यक है'

उपवास के इस नये रूप ने समाज सेवी समीर को भाव विभोर कर दिया। ०००       

         5. मासूम वक्ता 

शहीद दिवस पर आयोजित भाषण  प्रतियोगिता मे किशोरवय विद्यार्थियों 

  ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया सभी ने शहीदों की शहादत को नमन करते हुए उनके वीरता व देशभक्ति की भूरी भूरी प्रसंशा करते हुए 

उनकी सेवाओं को अद्वितीय बताया इसके साथ ही और भी बहुत कुछ.

इन सब को श्रोताओं के मध्य बैठी आठ वर्षीय बालिका महिमा बहुत ही ध्यान से सुन रही थी अंत मे वह भी बिना बुलाए स्टेज पर पहुँच गयी

और आयोजन कर्ताओ से अपने मन की बात कही-

' अंकल जी ! आप भले ही मुझे इस प्रतियोगिता मे शामिल ना करें किंतु

मुझे भी अपने विचार रखने का एक मौका दीजिए '

आयोजन कर्ता असमंजस मे पड़ गये  लेकिन बालिका को निराश नहीं करना चाहते थे इसलिए बालिका महिमा का नाम भी माइक पर उद्घोषित

कर दिया गया .  महिमा ने जब बोलना प्रारंभ किया सभी पूर्ण तन्मयता से महिमा के भाषण को सुनने लगे भाषण समाप्ति के पश्चात हाल मे तालियों की गड़गड़ाहट से देर तक गूंजती रही किसी को उम्मीद नही थी कि छोटी सी बच्ची बड़े बड़ों को पीछे छोड़ देगी .मंच पर उपस्थित निर्णायक मंडल के अध्यक्ष ने भाव विभोर हो महिमा

से सस्नेह प्रश्न किया -

' एक बात बताओ महिमा बेटी ! तुम्हें शहीदों के बारे मे इतनी बेहतर जानकारी किसने दी ?'

'  मेरे पापा ने '

खुश हो अध्यक्ष महोदय ने पुनः प्रश्न किया-

' बहुत अच्छी बात है . क्या करते हैं आपके पापा ?'

प्रश्न सुन महिमा के चेहरे पर अचानक मायूसी छा गई और रुंधे गले से बस इतना ही बोल पायी-

' अंकल ! मेरे पापा शहीद हो चुके हैं. ०००                                                        

 मीरा जैन की लघुकथाओं की समीक्षा

1.बचपन बचपन

मीरा जैन जी की इस लघुकथा में संवेदनशील एवं प्रभावी कथानक को सुंदर तरीक़े से पिरोया गया है.घरेलू सेविका सन्नो के किशोर बेटे की परहितभावी -सोच को दर्शाते हुए  झट से खिलौना चलाने के प्रसंग को मनमोहनक तरीक़े से पेश किया गया है. सन्नो का बेटा आधुनिक खिलौने को चलाकर अपना छिपा हुआ परिचय देकर पाक की पाठन-रुचि को चरमोत्कर्ष पर ले जाता है.

2.जमीन आसमान 

दूसरी उक्त लघुकथा में विदेशी अतिथि का भारतीय सामाजिक संस्था में आगमन और बच्चों से वार्तालाप करते हुए उनसे पूछे गए नकारात्मक सवाल का सकारात्मक जवाब पाकर विस्मित होते हुए और सुखानुभूति से भर गए.देश प्रेम का ऐसा जज्बा देखकर निरुत्तर अतिथि भारत के प्रति बच्चों के सच्चे लगाव को देखकर अभिभूत हो गए.

3.आज्ञा की अवहेलना 

इस कथा में जलज के द्वारा अपने पिता की आज्ञा न मानने पर पिता की नाराज़गी जब अचानक ख़ुशी में परिवर्तित हो जाती है, तो पाठक भी कथा के सुखांत चरमोत्कर्ष से  चमत्कृत सा हो जाता है.पिता का सम्मान सर्वोत्कृष्ट बताकर बेटा अपने पिता को अनमोल उपहार देता है.

4.उपवास

नामक लघुकथा में माँ के द्वारा 14 वर्ष के बालक को उपवास कराने पर मॉडर्न पिता का विरोध,तदुपरांत मां की सामाजिक संस्कारों से जुड़ी बात सुनकर पिता की अनुपम सोच और स्वीकृति ममता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति माँ बालक की पहली सच्ची गुरु होने का संदेश देती है 

5.मासूम वक़्ता

देश के लिये जान देने वाले शहीदों से संबंधित आयोजित समारोह में अचानक एक आठ वर्ष की बिटिया का स्वीकृति लेकर अचानक मंच पर आ जाना और शहीदों के बारे में अपने सुलझे विचार रखना सबको बहुत प्रभावित कर गया.सार्थक वक्तव्य का कारण जब बच्ची ने पिता की सीख बताई तो सब विस्मित रह गए और पिता के बारे में पूछा… जब था-मेरे पिता वतन पर शहीद हो गए.

- डा. अंजु लता सिंह गहलौत

           नई दिल्ली

 सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक 

आदरणीया मीरा जैन जी जानी-पहचानी लेखिका हैं। विभिन्न समाचार पत्र--पत्रिकाओं में उनकी लघुकथाएं सतत प्रकाशित होती रहती हैं।उनके सृजन में नैतिकता और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का सदैव प्रयास रहता है :-      

1. बचपन बचपन

 बहुत ही मार्मिक लघुकथा। अच्छा कथ्य। अच्छे शिल्प के साथ बेहतरीन प्रस्तुति।

2.जमीन आसमान

कथ्य और शिल्प में आकर्षण नहीं लगा। प्रारंभ बहुत अच्छा परंतु फिर पाठकों को जो जिज्ञासा थी और अपेक्षा थी वैसा नहीं मिला। जो बात रखी गई उसके लिए दूसरी लघुकथा में कहना ठीक रहेगा।         

 3. आज्ञा की अवहेलना

 अच्छी लघुकथा। अच्छा संदेश।                            

  4. उपवास

बहत अच्छी लघुकथा। अच्छा शिल्प। अच्छा कथ्य।

5.मासूम वक्ता

 बेहतरीन लघुकथा।मार्मिक।सुंदर शिल्प।

        प्रस्तुत सभी लघुकथाएं बेहतरीन कथ्य और शिल्प लिए हुए सामाजिक उत्थान के लिए कोई न कोई संदेश देती हैं। सृजन को नमन।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

सरल भाषा में गहरी संवेदना 

       मीरा जैन की ये पाँचों लघुकथाएँ पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे हम समाज के पाँच अलग-अलग द्वारों से भीतर प्रवेश कर रहे हों—कहीं बाल श्रम की कसक है, कहीं राष्ट्रभक्ति का गौरव, कहीं पारिवारिक स्नेह, कहीं संस्कारों की नई व्याख्या और कहीं शहादत का मौन दर्द। लेखिका की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि वे सरल भाषा में गहरी संवेदना व्यक्त करती हैं और अंत में ऐसा भाव-बिंदु रखती हैं जो पाठक के मन में देर तक बना रहता है।कथाओं की प्रमुख विशेषता है।संक्षिप्तता में सार: प्रत्येक कथा अपने कथ्य को अनावश्यक विस्तार के बिना प्रस्तुत करती है:-

1.  बचपन  बचपन 

यह कथा बाल श्रम की विडम्बना को बहुत मार्मिक ढंग से उद्घाटित करती है। प्रारम्भ में पाठक को एक सामान्य घरेलू प्रसंग दिखाई देता है, परंतु अंतिम पंक्ति—“यह खिलौनों से खेलता नहीं बल्कि खिलौनों की दुकान पर काम करता है”—पूरी कथा का अर्थ बदल देती है। लेखिका ने बिना किसी भाषण के बचपन के छिन जाने की पीड़ा को उभार दिया है। कथा का अंत अत्यंत प्रभावशाली है।

2-जमीन आसमान

देशभक्ति पर आधारित यह लघुकथा सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। बाल आश्रम के बच्चों को ‘अनाथ’ मानने वाले विदेशी अतिथि के सामने एक बालक का उत्तर—“जिसके सिर पर तिरंगा लहरा रहा हो वे भला अनाथ और बेसहारा कैसे हो सकते हैं”—कथा को ऊँचाई प्रदान करता है। यहाँ राष्ट्र को संरक्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है। कथा में भावुकता है, पर वह अतिरेक में नहीं जाती।

3-. आज्ञा की अवहेलना

यह कथा पारिवारिक संबंधों में छिपी भावनात्मक ऊष्मा को उजागर करती है। पिता का वास्तु में विश्वास और बेटे का प्रेमपूर्ण उत्तर—“जिसके पास पिता हो उसे किसी भी वास्तु की आवश्यकता नहीं होती”—कथा का सार बन जाता है। लेखिका ने आधुनिक अंधविश्वास बनाम पारिवारिक मूल्यों का सूक्ष्म विरोध स्थापित किया है।

4-उपवास

यह कथा उपवास की पारंपरिक अवधारणा को नया सामाजिक अर्थ देती है। माँ द्वारा पुत्र को भूख का अनुभव कराकर उसमें सहानुभूति और उदारता के संस्कार जगाने का विचार अत्यंत मौलिक है। कथा केवल धार्मिक कर्मकाण्ड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक संवेदना की ओर बढ़ती है।

5-मासूम वक्ता

पाँचों कथाओं में यह सबसे अधिक भावनात्मक प्रभाव छोड़ने वाली रचना है। एक छोटी बालिका का शहीदों पर प्रभावशाली भाषण और अंत में उसका यह कहना कि “मेरे पापा शहीद हो चुके हैं”—पाठक को स्तब्ध कर देता है। कथा में देशभक्ति, गर्व और व्यक्तिगत पीड़ा का अद्भुत समन्वय है।

सुझाव-

1-कुछ स्थानों पर विराम चिह्नों पर ध्यान दें।

2-कहीं-कहीं संवादों की लंबाई थोड़ी कम करने से लघुकथा का कसाव और बढ़ेगा।

3-“जमीन आसमान” और “उपवास” में संदेश थोड़ा प्रत्यक्ष हो गया है; उसे और संकेतात्मक बनाया जाए तो प्रभाव और गहरा हो सकता है।

- मंजू सक्सेना

लखनऊ - उत्तर प्रदेश 

संवेदना और संदेश का प्रभावी समुच्चय

       मीरा जैन की प्रस्तुत पाँचों लघुकथाएँ अपने-अपने कथ्य में अलग हैं, किंतु सभी में एक समान सूत्र दिखाई देता है—मानवीय संवेदना और सामाजिक चेतना। । भाषा सहज, संवादपरक और प्रवाहपूर्ण है :-

1. बचपन बचपन

यह लघुकथा बाल श्रम और आर्थिक विषमता की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करती है। महँगे इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों को चलाने में असमर्थ परिवार के बीच कामवाली का ग्यारह वर्षीय बेटा उन्हें सहजता से चला देता है। मालती का यह सोचना कि कहीं वह खिलौना तोड़ न दे, उसके वर्गीय पूर्वाग्रह को सामने लाता है।लघुकथा का सबसे प्रभावशाली मोड़ तब आता है, जब सन्नो कहती है—

“यह खिलौनों से खेलता नहीं बल्कि खिलौनों की दुकान पर काम करता है।”

यह पंक्ति पूरी कथा का अर्थ बदल देती है। यहाँ एक ओर सम्पन्न परिवार के बच्चे के लिए खिलौने मनोरंजन हैं वहीं दूसरी ओर गरीब बच्चे के लिए वही खिलौने रोजी-रोटी का साधन हैं। शीर्षक ‘बचपन बचपन’ भी इसी विडंबना को रेखांकित करता है—दोनों बच्चे हैं लेकिन उनके बचपन की दुनिया में जमीन-आसमान का अंतर है।

2. जमीन आसमान

यह लघुकथा देशभक्ति और राष्ट्रीय अस्मिता को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। विदेशी संस्था का प्रमुख भारतीय अनाथ बच्चों को ‘बेसहारा’ मानकर उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना चाहता है। लेकिन बालक का उत्तर उसके दृष्टिकोण को ही बदल देता है—

“जिसके सिर पर तिरंगा लहरा रहा हो वे भला अनाथ और बेसहारा कैसे हो सकते हैं।”

यही कथा का प्राण है। तिरंगा यहाँ केवल राष्ट्रध्वज नहीं बल्कि राष्ट्रीय संरक्षण, आत्मगौरव और सामूहिक पहचान का प्रतीक बन जाता है। बालक का उत्तर भावुक होने के साथ-साथ वैचारिक भी है। शीर्षक ‘जमीन आसमान’ भी विदेशी दृष्टि और भारतीय आत्मबोध के बीच के अंतर को संकेतित करता है।हालाँकि कथा में ‘भारत महान है’ वाला निष्कर्ष थोड़ा प्रत्यक्ष है। यदि विदेशी प्रमुख की आंतरिक अनुभूति को किसी सूक्ष्म दृश्य या मौन प्रतिक्रिया के माध्यम से व्यक्त किया जाता तो अंत और अधिक कलात्मक हो सकता था।

3. आज्ञा की अवहेलना

यह लघुकथा पारिवारिक प्रेम और भावनात्मक संबंधों की सुंदर अभिव्यक्ति है। पिता वास्तु-सामग्री खरीदने का आदेश देते हैं, लेकिन बेटा उनकी बात नहीं मानता। पिता नाराज हो जाते हैं। बाद में बेटा चाय के बहाने पिता के पास आता है और कहता है— “जिसके पास पिता हो उसे किसी भी वास्तु की आवश्यकता नहीं होती है, मेरे प्यारे पापा।”

यह कथन कथा का प्रभाव-बिंदु है। बेटे ने पिता की आज्ञा की अवहेलना अवश्य की लेकिन पिता के प्रति प्रेम और सम्मान की अवहेलना नहीं की। शीर्षक में निहित विडंबना सुंदर है—आज्ञा की अवहेलना अंततः पिता के हृदय को प्रसन्न कर देती है। यहाँ ‘वास्तु’ के अंधविश्वास के सामने पिता का अस्तित्व जीवन के सबसे बड़े शुभ तत्व के रूप में उभरता है। कथा भावुक है और पारिवारिक संबंधों की ऊष्मा पाठक तक पहुँचती है।

4. उपवास

पाँचों रचनाओं में यह लघुकथा विचार की दृष्टि से विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उपवास को केवल धार्मिक कर्मकांड न मानकर सामाजिक संवेदना से जोड़ना इसका मौलिक पक्ष है। अक्षय के उपवास को लेकर पिता की आपत्ति के उत्तर में माँ कहती है कि बच्चे को—“भूख का महत्व मालूम होना ही चाहिए।” यही कथन कथा को सामान्य धार्मिक प्रसंग से उठाकर सामाजिक सरोकार तक ले जाता है। यदि उपवास किसी भूखे व्यक्ति की पीड़ा समझने, जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति जगाने और भोजन के महत्व को समझने का माध्यम बन सके तो उसका अर्थ कहीं व्यापक हो जाता है। कथा का मूल विचार अत्यंत सुंदर है। धर्म यदि करुणा और सामाजिक संवेदना से नहीं जुड़ता तो वह अधूरा है। एक समाजसेवी पिता का अंततः भाव-विभोर होना कथा के विचार को स्वीकार्यता प्रदान करता है।

5. मासूम वक्ता

यह संग्रह की सबसे मार्मिक और प्रभावशाली लघुकथाओं में से एक है। शहीद दिवस पर बड़े-बड़े विद्यार्थी शहीदों की वीरता और देशभक्ति पर भाषण देते हैं। आठ वर्षीय महिमा उन सबको सुनकर मंच पर आती है। जब निर्णायक उससे पूछते हैं कि शहीदों के बारे में इतनी जानकारी उसे किसने दी, तो वह कहती है—

“मेरे पापा ने।” इसके बाद पूछा गया प्रश्न—“क्या करते हैं आपके पापा?”—कथा को अचानक एक गहरे भावात्मक मोड़ पर ले जाता है। महिमा का उत्तर—

“अंकल! मेरे पापा शहीद हो चुके हैं।”

पूरी कथा को भीतर तक हिला देता है। यहाँ भाषण देने वालों और शहादत को जीने वाले परिवार के बीच का अंतर सामने आता है। बालिका का मासूम उत्तर ही सबसे प्रभावशाली ‘भाषण’ बन जाता है। शीर्षक ‘मासूम वक्ता’ अत्यंत सार्थक है, क्योंकि उसकी मासूमियत ही उसकी सबसे बड़ी वक्तृता बन जाती है।

     इन रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता है कि लेखिका सामान्य परिस्थितियों में छिपे असामान्य अर्थों को पहचानती हैं। कथानक सहज हैं, भाषा सरल है और संवाद कथा को गति देते हैं। विशेष रूप से ‘बचपन बचपन’ और ‘मासूम वक्ता’ अपने मार्मिक अंत के कारण पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती हैं, जबकि ‘उपवास’ अपने विचारात्मक पक्ष के कारण उल्लेखनीय है। समग्र रूप से यह पाँचों लघुकथाओं का एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक गुलदस्ता है, जिसमें सामाजिक यथार्थ, पारिवारिक आत्मीयता, राष्ट्रप्रेम और मानवीय करुणा के अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

 सामाजिक चेतना को सशक्त रूप

     मीरा जैन जी की पाँचों लघुकथाएँ अपनी संक्षिप्तता, प्रभावी कथ्य और मार्मिक अंत के कारण पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती हैं। लेखिका ने जीवन के विविध पक्षों—बाल श्रम, देशभक्ति, पारिवारिक संस्कार, मानवीय संवेदना और शहीदों के सम्मान—को सहज भाषा में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है :-

1. बचपन बचपन

यह लघुकथा बाल श्रम की कठोर सच्चाई को अत्यंत मार्मिक ढंग से उजागर करती है। अंतिम संवाद पाठक को भीतर तक झकझोर देता है और समाज के दोहरे यथार्थ पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

2. जमीन आसमान

देशभक्ति की भावना को सरल किंतु प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती यह लघुकथा बताती है कि तिरंगे का साया ही सबसे बड़ा संबल है। इसका अंत प्रेरणादायी और भावपूर्ण है।

3. आज्ञा की अवहेलना

यह लघुकथा अंधविश्वास की अपेक्षा माता-पिता के स्नेह और आशीर्वाद को जीवन का सबसे बड़ा शुभ मानती है। कथ्य सकारात्मक है और अंत अत्यंत आत्मीय व भावस्पर्शी बन पड़ा है।

4. उपवास

लेखिका ने उपवास को केवल धार्मिक कर्मकांड न मानकर उसे मानवीय संवेदना और सामाजिक संस्कार से जोड़ दिया है। यह नई दृष्टि लघुकथा को विचारोत्तेजक और सार्थक बनाती है।

5. मासूम वक्ता

यह लघुकथा शहीदों के प्रति सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना को अत्यंत मार्मिक ढंग से अभिव्यक्त करती है। अंतिम पंक्ति पाठक की आँखें नम कर देती है और शहीद परिवारों के त्याग का स्मरण कराती है।

      मीरा जैन जी की ये पाँचों लघुकथाएँ मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और सामाजिक चेतना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती हैं। 

- डॉ. अलका पांडेय 

   मुम्बई - महाराष्ट्र 

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