शशांक मिश्र भारती से साक्षात्कार
जन्म : 26 जुलाई 1973
शिक्षा : एमए,त्रय,बीएड
सम्पादक : देवसुधा पत्रिका
प्रकाशित पुस्तकें : -
हम बच्चे,
पर्यावरण की कविताएं,
बिना विचारे का फल,
क्यों बोलते हैं बच्चे झूठ,
मुखिया का चुनाव,
आओ मिलकर गाएं,
दैनिक प्रार्थना,
माध्यमिक शिक्षा और मैं,
स्कूल का दादा,
मेरी भी सुनो,
भ्रष्टाचार ही राजधर्म है।
प्रमुख संस्थाओं से सम्मान : -
नागरी लिपि परिषद,युग निर्माण विद्यापति विद्यापरिषद, एबीआई अमेरिका, भारतीय लघुकथा विकास मंच ,बालकन जी इण्टर नेशनल,राष्ट्रीय राजभाषापीठ, भारतीय वाड्मय पीठ,आईएनए, हिन्दी भाषा सम्मेलन, राष्ट्रीय कवि चौपाल, जैमिनी अकादमी ,साहित्य मण्डल श्रीनाथ द्वारा,स्वच्छ भारत निर्माण परिषद, जनचेतना ट्रस्ट आदि।
पता :-
हिन्दी सदन , बडागांव , शाहजहांपुर , उत्तर प्रदेश
प्रश्न .1 आपने किस उम्र से लिखना आरंभ किया और प्रेरणा का स्रोत क्या है ?
उत्तर - मैंने लगभग अठारह आयुवर्ग से लिखना आरम्भ किया ,जिसके प्रेरणास्रोत मेरे पास पिताजी का हिन्दी,संस्कृत का मूल व असमिया, बंगला, उड़िया, कन्नड़, तेलगू,मलयालम, रूसी, अंग्रेजी का अनुवादित साहित्य बने। इस आयु तक अमरचित्रकथाओं के पात्र लव कुश, ध्रुव ,प्रहलाद, अभिमन्यु, एकलव्य, लक्ष्मीबाई, चेनम्मा मन में पूरी तरह रच बस चुके थे। भारत भारती, हल्दीघाटी, कामायनी, अभिज्ञान शाकुन्तलमृ, रघुवंश पढ़ लिया था।
प्रश्न .2आप की पहली रचना कब और कैसे प्रकाशित या प्रसारित हुई ?
उत्तर - मेरी पहली रचना कविता के रूप में बदलाव शीर्षक से समाजप्रवाह मासिक मुम्बई के अक्टूबर 1991 अंक में संपादक श्रद्धेय मधुश्री काबरा जी के सहयोग से छपी,साथ ही यह पत्रिका अभी तक मेरे पास आ रही है।
प्रश्न. 3 आप किन किन विधाओं में लिखते हैं और सहज रूप से सबसे अधिक किस विधा में लिखना पसन्द करते हैं ?
उत्तर - आरम्भ में कविताएं ही लिखीं, फिर निबन्ध,आलेख, हाइकु,क्षणिकाएं,लघुकथाएं व बालसाहित्य में बालकथा, कविता लेख लिखे।सर्वाधिक कविताएं,लघुकथाएं और बालकथाएं लिखीं।पसंद नापसंद मेरं लिए महत्व न रखती आवश्यकतानुसार सृजन स्वंयमेव हो जाता है।
प्रश्न. 4 आप साहित्य के माध्यम से समाज को क्या सन्देश देना चाहते हैं?
उत्तर - साहित्य समाज और देश को दिशा दिखाने का एकमात्र निष्पक्ष माध्यम है, अतः मेरा प्रयास रहता है कि चिन्ता ही न कर चिन्तन भी किया जाए प्रेरणा के साथ प्राणशक्ति भरने का भी कार्य हो,ऐसा मान मैं अपने रचनाकर्म को साधने का प्रयास कर रहा हूं।
प्रश्न. 5 वर्तमान साहित्य में आप के पसंदीदा लेखक या लेखिका की कौन सी पुस्तक है ?
उत्तर - मोहन राकेश की आषाढ़ का एक दिन,भगवती चरण वर्मा की चित्रलेखा व तस्लीमा नसरीन की लज्जा को कई बार पढ़़ा है,प्रभावित भी हुआ हूं।
प्रश्न.6 क्या आपको आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रसारित होने का अवसर मिला है ?
ये अनुभव कैसा रहा है?
उत्तर - एक बार आकाशवाणी पटियाला से कुछ कविताएं सुनाने का अवसर मिला जो अलग हटकर और मेरे लिए नया अनुभव था,इसके अलावा कई आकाशवाणी चैनलों ने मेरी कविताओं, कहानियों को दूसरों के स्वर में कई बार प्रसारित करवाया है।स्थानीय चैनलों पर सीधा प्रसारण हुआ है।
प्रश्न.7 आप वर्तमान में कवि सम्मेलनों को कितना प्रासंगिक मानते हैं और क्यों ?
उत्तर - कवि सम्मेलन आज भी अपना प्रभाव छोड़ने में समर्थ हो रहे हैं लोग सुनने के अलावा चिन्ता और चिन्तन भी कर रहे हैं पर पैरोडी चुटकुला माडल तथाकथित कवि ताबूत की कील बनने में भी कोई कसर न छोड़ रहे हैं।कुछ टीवी चैनल ऐसी वाहवाही में अपनी टीआरपी खोजते रहते हैं।
प्रश्न.8 आपकी नजर में साहित्य क्या है तथा फेसबुक के साहित्य को किस दृष्टि से देखते हैं ?
उत्तर - मेरी दृष्टि में साहित्य वह दर्पण है जिसको साफ सुधरा रख सही प्रतिबिम्ब दिखाने का दायित्व साहित्यकार का है पर निर्वहन की अलग अलग कसीटियां चिन्ता का कारण है।फेसबुक का साहित्य त्वरित फलादेश सा है न स्थायित्व और न ही स्तर युक्त इतिहास गढ़ने वाला।यहां पर अपना सर्वोतम देने वाले अत्यल्प हैं।
प्रश्न.9 वर्तमान साहित्य के क्षेत्र में मिलने वाले सरकारी व गैर सरकारी पुरस्कारों की क्या स्थिति है?
उत्तर - जो हाल पहले था आज भी वही है।आम साहित्यकार अथवा आम जनता को कोई ध्यान नहीं हैं कि किसे मिला किसे नहीं।एक राज्य के संस्थान प्रमुख ने पिछले साल लगभग एक ट्राली पुस्तकें बिना देखे ऐसे ही आने जाने वालों को बांट दी।इसलिए क्या कहूं।मैंने आज तक आवेदन ही न किया।कोई संस्तुति के लिए कहता है तोकर अवश्य देता हूं।
प्रश्न 10 क्या आप अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटना या संस्मरण का उल्लेख करेंगे?
उत्तर - सन् तिरानवे की बात है मैंने एक बाल कविता लिखी और मानवती आर्या जी कानपुर को भेज दी।उधर से एक लम्बा चौड़ा पत्र और वह कविता सुधार के साथ आई कि बेटा बेला का पेड़ नहीं वेल होती है आगे से ऐसी बातों का ध्यान रखना।उसके बाद उनके कई पत्र आए।उनके द्वारा संपादित बालदर्शन मासिक में छपने का सौभाग्य मिला।
प्रश्न 11 आपके लेखन में आपके परिवार की क्या भूमिका है?
उत्तर - मेरे परिवार का लेखन में मुझे विरासत में मिलने वालासाहित्य एक बड़ी भूमिका निभा गया।तंगहाली में रचना प्रकाशन से मिलने वाला पारिश्रमिक संजीवनी बनने से परिवार के लिए आशा की किरण था।अतः आने जाने अलग समय निकालने के लिए कोई समस्या न थी राजकीय सेवा में आने दूरस्थ पहाड़ की नौकरी ने कई बार पारिवारिक दायित्व निर्वहन में बाधा डाली पर मेरे साहित्य के मार्ग की कोई बाधा न बना अपितु मेरे तीनों बच्चे आयु के साथ सहभागी बनने लगे।आज तक हैं।मेरी कई पुस्तकों के लेखन से प्रकाशन तक उनकी भूमिका है।






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