सरस्वती राजेश साहू से साक्षात्कार
पिता : श्री गुहाराम साहू
माता : श्रीमती मोंगराबाई साहू
पति : स्व.राजेश साहू
शिक्षा : एम. ए. हिन्दी साहित्य
पद : निजी स्कूल में शिक्षिका
रूचि - साहित्य कला विशेष काव्य क्षेत्र (हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ही भाषा में)
साहित्य विधा - दोहा, सोरठा, चौपाई, मनहरण घनाक्षरी, कुंडलिया, सजल, कविता, गीत,भजन,हाइकु, कुछ लघुकथा व आलेख।
प्रकाशित कृति : -
- माँ मेरी जीवन की प्रेरणा में सहलेखिका
- दैनिक समाचार पत्रिका "लोक सदन " में मेरी कृति "सरस्वती की आत्मवाणी "की दैनिक प्रकाशन
सम्मान : -
"अटल हिन्दी साहित्य रत्न ",
"छंद मर्मज्ञ सम्मान ",
"शब्द शिल्पी सम्मान ",
"हिन्दी साहित्य श्रेष्ठ कलम ",
"श्री साहित्य ",
"डायरी गौरव सम्मान "
....आदि सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
विशेष : -
- साझा संकलन : "सुहाई", "एहसास ", " हम भारतीय हैं", "एंजिल्स "
- गीत लेखन कार्यशाला रायपुर में सहभागिता
- छत्तीसगढ़ही गद्य व पद्य को "झाँपी " में स्थान
- आनलाइन रचनाओं को स्थान।
पता :
गांव चिचिरदा, बिलासपुर - छत्तीसगढ़
प्रश्न न.1 - आपने किस उम्र से लिखना आरंभ किया और प्रेरणा का स्रोत क्या है ?
उत्तर - मैंने 15 वर्ष की उम्र में लिखना शुरू किया और मेरी प्रेरणा का स्त्रोत "सुहाई " नामक शालेय पत्रिका बनी, जिसने मुझे बहुत प्रभावित किया।
प्रश्न न. 2 - आप की पहली रचना कब और कैसे प्रकाशित या प्रसारित हुई है ?
उत्तर - मेरी पहली रचना "गुरु महिमा " तथा "वृक्षारोपण " सन् 2002 में व अन्य कई रचनाएं भी उसी शालेय पत्रिका "सुहाई" प्रथम बार प्रकाशित हुई।
प्रश्न न. 3 - आप किन-किन विधाओं में लिखते हैं और सहज रूप से सबसे अधिक किस विधा में लिखना पंसद करते हैं ?
उत्तर - मैं मुख्य रूप से पद्य रचना करती हूँ । दोहा छन्द व स्वतंत्र कविताओं की रचना करना मुझे अधिक पसंद है।
प्रश्न न. 4 - आप साहित्य के माध्यम से समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
उत्तर - मैं साहित्य के माध्यम से मानव मूल्यों को प्रकट कर मानवता का भाव जागृत करना चाहती हूँ तथा ईश्वर की पराकाष्ठा प्राणी मात्र के सेवा, सहयोग व समर्पण में है यह संदेश देना चाहती हूँ। मेरा मानना है कि प्रकृति, प्राणी की सेवा व आत्म दर्शन ही ईश्वर भक्ति है।
प्रश्न न. 5 - वर्तमान साहित्य में आप के पसंदीदा लेखक या लेखिका की कौन सी पुस्तक है ?
उत्तर - वर्तमान साहित्य में मैंने किसी भी लेखक या लेखिका के प्रति विशेष औचित्य का निर्धारण नहीं किया या किसी विशेष पुस्तक को स्थान नहीं दिया किन्तु मुझे वो सारी भावनाओं से युक्त, प्रेरणास्पद, लोक कल्याण व अध्यात्म से जुड़ी पुस्तकें मुझे प्रभावित करती है।
प्रश्न न. 6 - क्या आपको आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रसारित होने का अवसर मिला है ? ये अनुभव कैसा रहा है ?
उत्तर - नहीं, मुझे आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रसारित होने का अवसर नहीं मिला। मैं शादी के बाद लम्बे समय से साहित्य से दूर हो चुकी थी ।
प्रश्न न. 7 - आप वर्तमान में कवि सम्मेलनों को कितना प्रासंगिक मानते हैं और क्यों?
उत्तर - वर्तमान समय में कवि सम्मेलन सहज व आम हो गई है चाहे वह प्रत्यक्ष कार्यक्रम के रूप में हो या आनलाइन व फेसबुक आदि पर हो। पर आज के दौर में अधिकतर कवि सम्मेलनों में मुख्य उद्देश्य लुप्त होकर प्रदर्शन ही परिलक्षित होता प्रतीत होता है। जिससे साहित्य का मूल प्रसंग प्रभावित हो रहा है।
प्रश्न न. 8 - आपकी नज़र में साहित्य क्या है तथा फेसबुक के साहित्य को किस दृष्टि से देखते हैं ?
उत्तर - **साहित्य*"भाव और अभिव्यक्ति को रचना साहित्य है और साहित्य की पवित्रता छंदों के ज्ञान व विधान से सम्भव है तथा उन पर विचार व कार्य को लेखनी से गति देना साहित्य के उन्नति का प्रमाण है।" फेस बुक का साहित्य सरल व सहज रूप में दूसरों तक पहुँचने में सुगमता होती है मनुष्य को डिजिटल के माध्यम से भी जागृत करने में सहायक सिद्ध करती है परन्तु अधिक डिजिटल का प्रयोग हमारी मूल भावना को संकुचित कर पठन, पाठन व प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति को आहत भी कर रही है। यह मेरा मानना है।
प्रश्न न.9 - वर्तमान साहित्य के क्षेत्र में मिलने वाले सरकारी व गैर सरकारी पुरस्कारों की क्या स्थिति है ?
उत्तर - वर्तमान साहित्य के क्षेत्र में मिलने वाले सरकारी व गैरसरकारी पुरस्कारों में वृद्धि जरूर हुई है प्रमाण पत्रों का तो मानो बरसात हो रहा है जब से यह साहित्य डिजिटल दुनिया में प्रवेश हुआ है।
प्रश्न न. 10 - क्या आप अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटना या संस्मरण का उल्लेख करेगें ?
उत्तर - मैं अपने जीवन की हृदय विदारक घटना का संक्षिप्त में उल्लेख करना चाहूँगीं...
**एक यादगार किस्सा **
मैं वो दिन कभी नहीं भूल सकती जब मैं म ई 2021 में कोरोना से ग्रसित हुई थी। मेरे प्राण पर संकट आ पड़े मेरी तबियत नाजुक हो गई बड़ी मुश्किल से मौत को मात देकर जिंदगी को पुनः प्राप्त किया। उस समय का लगभग एक सप्ताह दिल को दहला देने वाली स्थिति बनी हुई थी और काफी लम्बे समय तक स्वास्थ्य में खराबी बनी रही। मेरे पति ने उन परिस्थिति में मेरी हद से ज्यादा सहायता और सेवा की उन्हीं के वजह से मुझे नई जिंदगी मिली परन्तु उन्होंने उन नाजुक समय और दृश्य को इस तरह से देखा कि वे उस दर्द भरे समय को भुला नहीं पाये और शदमा में चले गए फलतः डेढ़ माह बाद वे मुझे इस दुनिया में अकेला छोड़ कर विदा हो गए। उनका मेरा ख्याल रखना, सेवा करना, मेरे दर्द पर आँसू बहाकर रोना ये सारी यादें आज मेरे मुझे बहुत रुलाती है। उन्होंने मुझे इस कदर चाहा जिसका बयान नहीं किया जा सकता। उनका साथ मेरे लिए ईश्वर का साथ पाना था और आज उनके साथ के बिना ऐसा लगता है मानो ईश्वर ही मुझसे रूठ कर चला गया हो और अब ईश्वर जैसा कोई तत्व ही नहीं।
प्रश्न न. 11 - आपके लेखन में , आपके परिवार की क्या भूमिका है ?
उत्तर - मेरे लेखन में मेरे पति स्व. श्री राजेश साहू का प्रोत्साहन था परन्तु अब वे नहीं रहे और अन्य सदस्यों का मेरे लेखन में कोई खास भूमिका नहीं रही । मेरी बहन द्रौपदी का कुछ योगदान मेरे लेखन के प्रति होता है। क्योंकि अब वह भी साहित्य से जुड़ी हुई है ।








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