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Showing posts from January, 2026

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

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रिजर्व बैंक द्वारा कर्ज़ में डूबे राज्यों की सूची जारी

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भारतीय लघुकथा साहित्य में क्षेत्रीय भाषाओं का योगदान ?

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            क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका सभी साहित्य में होती है। क्योंकि क्षेत्रीय भाषा बहुत खुबसूरत होती है। जहां पर क्षेत्र की पहचान साबित होती है। वहीं लोगों की भावना को प्रकट करने का साधन बन जाता है। रही बात लघुकथा साहित्य में योगदान की ...। लघुकथा यथार्थ पर आधारित होती है। कल्पना का प्रयोग नहीं के बराबर होता है। जिससे क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग स्वाभाविक होता है।‌ जो लघुकथा को यथार्थ पर लाकर खड़ा करता है। परन्तु यह सब हिन्दी लघुकथा में विशेष रूप से देखने को मिलता है। विशेष कर लघुकथा में समय-समय पर नयें - नयें प्रयोग होते रहते हैं।अब फिलहाल आयें विचारों को भी देखते हैं :-        भारतीय लघुकथा साहित्य में क्षेत्रीय भाषाओं का योगदान अत्यंत समृद्ध, बहुआयामी और साहित्यिक चेतना को जनजीवन से जोड़ने वाला रहा है। लघुकथा, अपने संक्षिप्त आकार के बावजूद, समाज की गहरी सच्चाइयों, विडंबनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने में सक्षम विधा है—और इसमें क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका आधारस्तंभ की तरह रही है। 1. लोकजीवन से सीधा सरोकार क्ष...

जोराशी धाम में संगीतमय राम कथा

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सभी स्कूलों को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया

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सुनेत्रा पवार कल शाम पांच बजें शपथ लेंगी

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पीटी उषा के पति का निधन

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जयशंकर प्रसाद स्मृति सम्मान - 2026

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      हर कर्म का हिसाब होता है यानि फल अवश्य मिलता है। कर्म कैसा भी , जैसा कर्म वेसा फल। यही प्राकृतिक का नियम है। जो समय के अनुसार सम्भव होता है। फिर भी कर्म की अपनी महिमा है। कर्म सर्वोत्तम है। जो जन्म दर जन्म क्रमशः चलता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-          यह निःसंदेह सत्य है कि हर मनुष्य को अपने जीवन में प्रत्येक चीज को पाने के लिए प्रतीक्षा बनी रहती है। हम जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन में जितने भी कार्य करते हैं तो उस कार्य को क्रियान्वित करने के बाद उसके फल की इच्छा भी बनी रहती है।  हर कार्य करने पर कभी कभी तो मनुष्य को मनमाफिक चीज मिल जाती है।पर कभी कर्म या किसी कार्य के प्रतीक्षा करने के बाद भी मंशा माफिक परिणाम नहीं मिलता ।इसके लिए यही कहा जाएगा हमने उस कार्य को करने में धैर्य , शांत मस्तिष्क ,अनुकूल परिस्थितियां और  वातावरण नही देखा । आनन फानन में बहुत अधिक उतावला होकर कार्य तो किया पर उसका फल सुखद और सफल नहीं हुआ तो इसके लिए...