क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका सभी साहित्य में होती है। क्योंकि क्षेत्रीय भाषा बहुत खुबसूरत होती है। जहां पर क्षेत्र की पहचान साबित होती है। वहीं लोगों की भावना को प्रकट करने का साधन बन जाता है। रही बात लघुकथा साहित्य में योगदान की ...। लघुकथा यथार्थ पर आधारित होती है। कल्पना का प्रयोग नहीं के बराबर होता है। जिससे क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग स्वाभाविक होता है। जो लघुकथा को यथार्थ पर लाकर खड़ा करता है। परन्तु यह सब हिन्दी लघुकथा में विशेष रूप से देखने को मिलता है। विशेष कर लघुकथा में समय-समय पर नयें - नयें प्रयोग होते रहते हैं।अब फिलहाल आयें विचारों को भी देखते हैं :- भारतीय लघुकथा साहित्य में क्षेत्रीय भाषाओं का योगदान अत्यंत समृद्ध, बहुआयामी और साहित्यिक चेतना को जनजीवन से जोड़ने वाला रहा है। लघुकथा, अपने संक्षिप्त आकार के बावजूद, समाज की गहरी सच्चाइयों, विडंबनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने में सक्षम विधा है—और इसमें क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका आधारस्तंभ की तरह रही है। 1. लोकजीवन से सीधा सरोकार क्ष...