पद्मश्री नेकचन्द सैनी स्मृति सम्मान - 2025

         आस्था और विश्वास ही जीवन का आवश्यक रंग है। जो कर्म संसार की भूमिका निभाते है । जिससे जीवन में सकारात्मक उत्पन्न होती है। सकारात्मक ही आस्था और विश्वास का स्वरूप है। जीवन में बहुत कुछ होता है। परन्तु सकारात्मक से जीवन के विभिन्न पहलुओं की विवेचना होती है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
       मानव जीवन में आस्था के भाव का किसी के विचारों, दैवीय शक्ति, किसी धर्म या परंपरा से मुख्य रूप से जुड़ाव होता है। कभी-कभी लोगों को बोलते हुए सुना जाता है कि ईश्वर में मेरी बड़ी आस्था है। अक्सर इसी आस्था से प्रभावित होकर हम कह उठते हैं-- 

"मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।

करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है"। 

वहीं कुछ लोग तर्क और अनुभवी सिद्धांतों पर ही किसी मनुष्य की विचारधारा और उसके व्यवहार पर भरोसा यानि विश्वास करते हैं। इन दोनों ही भावनात्मक और विचारात्मक स्थितियों में जुड़ाव है। विश्वास में मानना होता है । आस्था में मानकर उसके अनुसार कर्म करना और जीवन को रंग देना होता है। धार्मिक जीवन में आस्था चमत्कारों से जुड़ी होने के कारण कर्मों का फलीभूत होने से आम मनुष्य का विश्वास पक्का होने लगता है । महाभारत में अर्जुन युद्ध को तैयार नहीं था पर कृष्ण के द्वारा उपदेश देकर और फिर अपना विराट रूप दिखाकर अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार होना पड़ा, तभी उसका विश्वास  जागृत हुआ और वह कर्म की ओर उन्मुख हुआ । मानव जीवन एक रंगमंच है जहां स्थितियों को मानना होता है फिर अपने-अपने हिसाब से आस्था विश्वास के संगम के अनुरूप जीवन को  सुगम सुंदर सार्थक बनाता चलता है। जीवन कर्मोंन्मुखी होता है। देखा जाए तो आस्था विश्वास एक सिक्के के दो पहलू हैं।

 - डाॅ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

          आस्था और विश्वास जीवन का रंग है, जीवन का रंग कर्म का संसार होता है अर्थात हमारा जीवन उसी समय सार्थक बनता है, जब आस्था और विश्वास हमारे मन और हृदय में जीवंत रहते हैं। आस्था हमें अडिग बनाती है, कठिनाइयों में भी दृढ़ता और साहस देती है। विश्वास हमें यह समझाता है कि हर परिस्थिति में कोई न कोई समाधान अवश्य है। इसी प्रकार जीवन का रंग तभी पूर्ण होता है जब हम कर्मशील हों। कर्म ही वह माध्यम है जो हमारी आस्था और विश्वास को वास्तविकता में बदलता है। केवल विश्वास होने भर से जीवन नहीं चलता, कर्म के बिना जीवन सूना और निर्जीव लगता है। क्योंकि सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो हर कर्म का उद्देश्य समाज, परिवार और स्वयं के लिए उन्नति और प्रगति लाना होना चाहिए। जब हम अपने कर्मों में निष्ठा और सत्यनिष्ठा रखते हैं, तो जीवन में संतोष और सुकून स्वतः उत्पन्न होता है। कर्म का संसार केवल भौतिक प्रयास नहीं है, बल्कि यह हमारी मानसिक, भावनात्मक और आत्मिक ऊर्जा का भी प्रतिबिंब है।आस्था और विश्वास हमें प्रेरणा देते हैं, कर्म हमें दिशा। यही तीनों तत्व मिलकर जीवन को रंगीन, सार्थक और पूर्ण बनाते हैं। इसलिए हमें निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और जीवन के प्रत्येक क्षण को अपने कर्मों और विश्वास के माध्यम से उज्ज्वल बनाना चाहिए। यही जीवन का वास्तविक संदेश और सबसे ज्वलंत सत्य है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

      आस्था और विश्वास जीवन के सबसे महत्वपूर्ण रंग हैं। यह केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आत्म-विश्वास, दूसरों पर भरोसा और सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक हैं। जीवन में आस्था और विश्वास होने से व्यक्ति कठिनाइयों में भी आशा नहीं खोता और साहसपूर्वक आगे बढ़ता है। उदाहरण स्वरूप, विद्यार्थी की शिक्षा में विश्वास उसे कठिन विषयों को सीखने की प्रेरणा देता है, और समाज में पारस्परिक भरोसा सहयोग और भाईचारे को प्रोत्साहित करता है। वहीं, कर्म जीवन का वास्तविक रंग हैं। कर्म केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि विचार, वचन और व्यवहार का समुच्चय हैं। कर्म के बिना जीवन निर्जीव और अधूरा प्रतीत होता है। किसान के परिश्रम से खेतों में अन्न उगता है, शिक्षक के कर्म से विद्यार्थियों का भविष्य संवरता है। आस्था और कर्म मिलकर जीवन को सार्थक और जीवंत बनाते हैं।यदि कर्म न हों, तो जीवन निर्जीव और रंगहीन प्रतीत होता है। कर्म ही जीवन में परिणाम, संतोष और उपलब्धि का रंग भरते हैं।जीवन का रंग केवल बाहरी सुख-सुविधाओं से नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सतत कर्म के समन्वय से आता है। व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक, रंगीन और प्रेरणादायक बनता है जब वह विश्वास के प्रकाश में कर्म के संसार को निभाता है। इस प्रकार, जीवन केवल विश्वास और भावना से ही नहीं, बल्कि सतत कर्म से ही रंगीन और प्रेरक बनता है। आस्था से मन में दृढ़ता और आशा आती है, और कर्म के माध्यम से वही आशा वास्तविकता में बदलती है। जीवन का पूर्ण आनंद और सार्थकता इसी संयोजन में निहित है।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

       आस्था और विश्वास ही जीवन का रंग होता है. आस्था और विश्वास पर ही ये सारी दुनिया टिकी है. अगर आस्था और विश्वास न हो तो हम आगे बढ़ ही नहीं सकते हैं. हमारी आस्था हमारी प्रकृति में है, जल में है, अग्नि में है ,सूर्य में है  चंद्रमा में है पृथ्वी में है तभी तो हम अपने जीवन मे रंग भरते हैं. और जीवन का रंग हमारे कर्मों से बनता संवरता है. जैसे जैसे हमारे कर्म बनते बिगड़ते है वैसे- वैसे रंग बदलते रहते हैं. जो हमारे कर्मों के संसार को रंगीन बनाते हैं. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

      आस्था और विश्वास जीवन के अद्भुत और खूबसूरत रंग हैं. आस्था में है असली सुंदरता और विश्वास में है जीवन की शक्ति. आस्था और विश्वास से हमारे संस्कार बनते हैं और संस्कार ही हमारी पहचान हैं. आस्था और विश्वास का रंग जब मन में बस जाए, तो हर पल प्रभु का स्पर्श महसूस होता है और मन में श्रद्धा, संगीत और शांति की मधुर ध्वनि गूँजती है. जीवन का रंग कर्म का संसार होता है. आस्था और विश्वास से ही कर्म सुकर्म हो सकते हैं. अपने कर्मों को सुधारकर हम अपने आत्म-विश्वास और आत्म-संयम को बढ़ा सकते हैं, जो हमें जीवन में सफलता की ओर ले जाने में सहायक होते हैं. ईमानदारी और बुद्धिमानी से किया गया काम कभी व्यर्थ नहीं जाता और न ही बुराई और असफलता का कारण बनता है. जीवन के रंग में आस्था और विश्वास का रंग अत्यंत आवश्यक है. इसी रंग से कर्म का संसार उज्ज्वल होता है.

- लीला तिवानी 

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

         जीवन का परिदृश्य एक अजीब पहली है, जहाँ आस्था और विश्वास पर टीका रहता है, छोटी-छोटी बातों से महायुद्ध भी हो जाता है, जिसके परिप्रेक्ष्य में जीवन नष्ट भी हो जाता है, जिसके परिवेश में तीसरा फायदा उठा लेता है। आस्था और विश्वास जीवन का रंग है, जीवन का रंग कर्म का संसार होता है। यह सत्य का अहसास तो करवाता ही साथ ही हम अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो जाते है। जितना हम एक  दूसरे पर विश्वास करते चले जाते है, वैसे-वैसे रंग पक्का होता चला जाता है, उसके उपरान्त ही जीवन का रंग कर्म से संसार बन जाता है, बस समझने का प्रयास करना ही, कर्मता की ओर अग्रसर हो जाता है...।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

       बालाघाट - मध्यप्रदेश

     आस्था और विश्वास जीवन के वे खूबसूरत रंग होते हैं, जो हमारे मन को आशा, धैर्य और सकारात्मकता से भर देते हैं। कठिन परिस्थितियों में जब रास्ते धुंधले हो जाते हैं, तब आस्था हमें आशा देती है और संभालती भी है। विश्वास आगे बढ़ने का साहस देता है और हमारे कदमों को मजबूती प्रदान करता है। इनके बिना हमारा जीवन नीरस और दिशाहीन प्रतीत होता है।जीवन का वास्तविक रंग हमारे कर्म पर निर्भर करता है यानी कर्मों से ही उभरता है। हमारे विचार चाहे जितने भी सुंदर क्यों न हों, उनका मूल्य कर्म से ही सिद्ध होता है। जैसे रंग बिना चित्र  अर्थहीन है, वैसे ही कर्म के बिना आस्था और विश्वास अधूरे हैं। जब आस्था और विश्वास को कर्म का आधार मिलता है, तब जीवन सशक्त, संतुलित और सार्थक बनता है। यही समन्वय मनुष्य को उसके लक्ष्य तक पहुँचाता है और जीवन को सुंदर अर्थ प्रदान करता है।

- नूतन गर्ग 

    दिल्ली

         जीवन विविध रंगी है इन रंगों में आस्था और विश्वास का रंग सबसे चमकीला होता है इसलिए अन्य रंगों की चमक इनके सामने ही फीकी पड़ जाती है। यह भी ठीक है कि जीवन के रंग ही कर्म का संसार होते हैं। आस्था और विश्वास के रंग वाले व्यक्ति के कर्म पूरे समाज को लाभान्वित करते हैं। उनके कर्म देवताओं सरीखे होते हैं। उनके व्यक्तित्व से देवत्व झलकता है। जबकि इसके विपरीत रंग वाले दुष्ट प्रकृति के होते हैं,छल छद्म और झूठ से भरपूर राक्षसी कर्म वाले। ये रंग ही प्रवृत्ति निवारण करते हैं और प्रवृत्ति के अनुरूप ही कर्म होते हैं। हमारे सामने समाज में इसके अनेक उदाहरण है।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश 

        आस्था और विश्वास जीवन के रंग है ! जीवन का रंग कर्म का संसार होता है ! ऐसे बहुत से संघर्षशील व्यक्ति महापुरुष होते है जो अपना समय जनहित परहित में समाज सेवा कर जीवन व्यर्थ नहीं गवांते जीवन के महत्व को कर्तव्यनिष्ठ समझने के लिए प्रेरित करते है। जीवन के अनेक रंगों को दिखाते है !सकारात्मक पहलुओं को बढ़ावा देते हैं ! और हमें जीवन के चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं गार्गी से ले लक्ष्मी बाई गांधी से लेकर कलाम ख़ुद टेकचंद जी पाकिस्तान विभाजन के समय भारत चंडीगढ़ अपने काम जंगल में  रोड बनाना ,टायरों को जला अग्नि प्रज्वलित कर सायकिल से यात्रा कर साहस के साथ आये । ऐतिहासिक राक गार्डन बनाया सरकार पूर्णरुत्थान कर पर्यटन स्थल बच्चों आने वाली पीढ़ी जीवन का रंग कर्म का संसार होता है  दशरथ माझी की कर्मठता ने पहाड़ काट जल श्रोत मार्ग बनाया ।अब तक अपनी ज्ञान वर्धक कर्मशील पहलूओं को गढ़ जो समाज में आस्था विश्वास हमें आंतरिक शांति प्रदान करते हैं और हमारे मन को संतुष्ट जागरूक रखते हैं। जीवन आस्था और विश्वास हमें जीवन का उद्देश्य समझने में मदद करते हैं !और हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं कर्म जीवन का रंग होता है और हमारे जीवन को रंगीन बनाता है।हमें आंतरिक संतुष्टि मिलती है और हमारा मन संतुष्ट रहता है।

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

    जीवन में हमें, ईश्वर द्वारा अनेक नैसर्गिक विशेषताएं दी है। जिनके माध्यम से हम अपने जीवन को आनंदमयी बना सकते हैं। इनमें  प्रेम भी एक है। हमारा जिससे प्रेम होता है, हम उसके पास या साथ रहकर  इतने उत्साहित और आनंदित रहते हैं कि पूरी दुनिया की सारी खुशियां उन पलों में समाहित हो जाती हैं। असल में यह प्रेम, आस्था और विश्वास का होता है, समर्पण का होता है। भटकाव से परे का होता है।  जीवन के सारे रंगों को जोड़कर इन्द्रधनुषी करने वाला होता है। यह इतना पवित्र, कौतूहल से भरा और खुशमिजाज कर देने वाला होता है कि फिर हम सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाते हैं। हम में सद्भाव, नेकी और निष्ठा के भाव  पल्लवित हो उठते हैं। इससे हमारी कर्मनिष्ठा बलवती होती है। हमारे हर कर्म, सामाजिक जीवन के उत्थान के लिए होते हैं। मैत्रेय होते हैं।यानी जीवन का रंग कर्म का संसार होता है। अत: सार यह कि जीवन में प्रेम भावना का होना नितांत आवश्यक और महत्वपूर्ण है। इससे हमारे सद्गुण समृद्ध होते हैं, जो हमें सद्कर्म करने की सामर्थ्य देते हैं और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में जीवन धर्म का विशुद्ध निर्वहन कराते हैं। 

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

        निःसंदेह सिद्धांत यही कहते हैं। युगों-युगों की युगधारा और युगप्रवर्तक युगपुरुष यही कह गये है। राम और कृष्ण से लेकर गाँधी तक और आधुनिक युग के आज तक के भारतीय प्रधानमंत्री सभी ने  "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" कहकर संसार और संस्कृति को दिशानिर्देश किया है। हम अपने कार्य का लेखा-जोखा रखें बिना इस तुलना के कि दूसरा क्या कर रहा है। हम सब अपना कर्म करें  - - हर व्यक्ति अपना मार्ग निर्मल और निर्णायक रखे तो इस दुनिया को सर्वश्रेष्ठ बनने से कौन रोक सकता है। इंसान को सर्वश्रेष्ठ प्रजाति बनने से कौन रोक सकता है। प्रकृति का तो धर्म है परिवर्तनशीलता  - - परिवर्तन के साथ सरश्रेष्टता का संधान यही तो मानव धर्म - - इंसानी कर्म है। इन्ही राहों पर चलें स्वयं सुखी हो और दूसरों को सुखी करें।औरों के सुख को देखें मनु और स्वयम सुख पाकर इंसान बने--तो होने और बनने को क्या बचता है--?

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र

      आईये आज का रूख आस्था और विश्वास की तरफ ले चलते हैं की क्या आस्था और विश्वास जीवन का रंग है तथा जीवन का रंग कर्म का संसार होता है   यही आज की चर्चा का विषय है, अगर आस्था और  विश्वास की बात करें तो आस्था और विश्वास जीवन के रंग हैं जबकि आस्था का मतलब गहरा भरोसा और विश्वास का मतलब यकीन होता है, यह दोनों ही हमारे जीवन को अर्थ और शक्ति की दिशा‌ देते हैं,यह सिर्फ धार्मिक शब्द ही नहीं हैं बल्कि जीवन जीने का तरीका बताते हैं जो हमें अच्छा जीवन गुजारने का रास्ता  बताते हैं,तथा‌ हमें अच्छा इंसान बनने का‌ तरीका बताते‌ हैं सत्य भी है विश्वास ‌ और आस्था के‌ बिना ‌जीवन‌ संभव नहीं है, क्योंकि ‌हर‌ व्यक्ति किसी न किसी चीज पर भरोसा ‌करता‌ है जिससे जीने का‌‌ सही  ढंग व मजा‌आता है, इस में कोई शक नहीं की आस्था की भावना प्रधान और गहरी मान्यता है जो अक्सर बिना किसी प्रमाण के होती है, और विश्वास किसी व्यक्ति वस्तु या विचार पर दृढ़ यकीन है जिसमें तर्क या अनुभव का अंश हो सकता है अन्त में यही कहुंगा की आस्था और विश्वास जीवन के वे रंग हैं जो जीवन को  बेरंग  नहीं होने देते बल्कि इसमें आशा,शक्ति और उदेश्य भर देते हैं जिससे जीवन एक खूबसूरत यात्रा बन जाती है, यही नहीं आस्था विश्वास ‌से‌‌ जुड़ी हुई है और विश्वास ‌जीवन का आधार है और विश्वास हमारी आत्मा को असीम बल प्रदान करता है,और यह सत्य है की जीवन का रंग कर्म का‌‌ संसार होता है, क्योंकि हमारा जीवन भावनाओं औरअनुभवों से भरा एक रंगीन संसार है।

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -  जम्मू व कश्मीर 

       यह धरती कर्मभूमि है और हर किसी को यहाँ कर्म करना ही होता है। कर्म हमारे अच्छे या बुरे दो प्रकार के होते हैं। अच्छे और बुरे कर्म का प्रभाव हमारे जीवन में पड़ता ही है और यह ही कर्म हमें जीवन के भिन्न भिन्न रंगों से मिलवाता है। अच्छे कर्म करने वाले निश्चित है ईश्वर से डरते हैं, उन्हें ईश्वर पर गहरा विश्वास होता है और भरोसा भी होता है।ये धैर्यवान होते हैं क्योंकि उन्हें ईश्वर में आस्था भी होती है। उन्हें पता है कि जल्दबाजी का कर्म शैतान का ही है।यह उचित निर्णय लेने में बहुत  सफल नहीं है।

- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'

वाराणसी - उत्तर प्रदेश 

        आस्था और विश्वास दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण रंग हैं। मूल्यवान धरोहर हैं हमारे जीवन की। हमारे जीवन की धारा व प्रवाह दोनों को नियोजित करते हैं। हमारी आस्था व विश्वास  से ही हमारे जीवन के मूल्य,  हमारी सोच, नैतिकता व हमारा चरित्र बनता है। यह  हमें हमारी जड़ों से जुड़े रहने, एकजुटता बनाए रखने के साथ-साथ हमें ऊँचे और ऊँचे उठने, ऊँचे उड़ने  व अपने सपनों को साकार करने की दिशा भी प्रदान करते हैं । अर्थात हमें कर्म के लिए प्रेरित करते हैं। जीवन, कर्म का ही दूसरा नाम है। जीवन के अनेक रंगों में कर्म का अपना एक विशेष रंग है जो कि आस्था और विश्वास के रंगों के आधार पर ही बनता है। अतः यह कहना अतिश्योक्ति न होगी कि जीवन का रंग कर्म का संसार होता है। 

- रेनू चौहान 

नई दिल्ली

" मेरी दृष्टि में " आस्था और विश्वास ही सकारात्मक का वह पहलु होता है । जो जीवन के विभिन्न रंगों में समावेश करता है। जिससे जीवन फलता फूलता है। और यही जीवन के रंगों का समावेश नज़र आता है।

               - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)

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