डॉ. बालकृष्ण शिवराम मुंजे स्मृति सम्मान - 2025
संसार में कोई भी समस्या बिना समाधान के नहीं आती। अपना ध्यान समाधान पर केंद्रित ना कर हम समस्या पर केंद्रित करते हैं तो समस्या बहुत बड़ी और बिना समाधान के नज़र आती है, जिससे हम परेशान हो उठते हैं। स्वयं को कमज़ोर और असहाय महसूस करते हैं। समस्या हम से बड़ी हो जाती है और हम ऊहापोह अर्थात अपने ही मस्तिष्क से उपजे विभिन्न विचारों में डूबे इधर उधर घूमते, परेशान होते हैं तथा कोई निर्णय नहीं ले पाते। यही, यदि हम अपना ध्यान समस्या नहीं समाधान पर केंद्रित करें वह भी परेशान हुए बिना अर्थात सकारात्मक सोच से तो सकारात्मक समाधान अवश्य निकलेगा। अमूमन समाधान सकारात्मक होते हैं क्योंकि वे हमारी समस्याओं का निराकरण करते हैं।
- रेनू चौहान
नई दिल्ली
मानव मस्तिष्क में विचार धारा वृहद रुप में रहती है। पल-पल में विचार आते है, बदले रहते हैं। मन में विचारों का उदय होता है, अन्त तभी होता है जब जाने उपरान्त। विचारों को रोक पाना मुश्किल है। अच्छे और बुरे, सुख और दुख में विचारों का सिलसिला चलते रहता है। हम एक जगह बैठकर विचारों में ही कहीं के कहीं पहुंच जाते है। समस्या विचारों की होती है, समाधान सकारात्मक होता है। यह सत्य की परिभाषा का परिदृश्य है। समस्यों का समाधान विचारों से ही सकारात्मक और नकारात्मक पारदर्शिता होती है। किसी से उलझने से अच्छा है उसे समय रहते समझाईस शीघ्र हो जाए......।
- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
बालाघाट - मध्यप्रदेश
हाँ! देखना यह है कि हम आने वाली समस्या को अपने जीवन में कैसे लेते हैं । हर समस्या का समाधान होता है ,किंतु जो पहले ही घबराकर, समस्या के आगे घुटने टेक देते हैं कि मुझसे नहीं होगा, ऐसी नकारात्मक निम्न सोच रखने वाले पहले ही हार मान लेते हैं....और दुखी रहते हैं...किंतु सकारात्मक विचार रखने वालों के लिए ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो ...वे समस्या का समाधान ढूंढ़ते हैं...उनकी सोच उच्च-स्तर की, लचिलापन लिए दूर तक दौड़ती है। वे पहले समस्या की बारिकियों को ढूंढ़ते, परखते हैं तत्पश्चात निर्णय ले उसे दूर करने की कोशिश करते हैं...हार नहीं मानते... सकारात्मक सोच ही समस्या का समाधान है...।
- चंद्रिका व्यास
मुंबई - महाराष्ट्र
समस्या विचारों की होती है, समाधान सकारात्मक होता है, क्योंकि समस्याएँ कभी बाहरी रूप में हमें रोकती नहीं; उन्हें रोकता है हमारा दृष्टिकोण और हमारी मानसिक स्थिति। यदि विचार उलझे हों, तो छोटी-सी चुनौती भी पर्वत बन जाती है, और असमान्य परिस्थितियाँ असम्भव प्रतीत होने लगती हैं। परन्तु जब सोच सकारात्मक हो, उद्देश्य स्पष्ट हो और मन दृढ़ संकल्प से प्रज्वलित हो, तब वही समस्या अवसर में बदल जाती है और जीवन के मार्ग को नई दिशा प्रदान करती है। सकारात्मकता केवल भाव या मानसिकता नहीं है; यह वह सक्रिय शक्ति है जो असफलता को सीख में, चिंता को साहस में और रुकावट को प्रेरणा में बदल देती है, जो व्यक्ति को हर कठिनाई के ऊपर उठने का सामर्थ्य देती है। यही दृष्टिकोण व्यक्ति को न केवल व्यक्तिगत सफलता देता है, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र के लिए भी उपयोगी बनाता है। हम जब अपने विचारों को नियंत्रित करना सीखते हैं, उन्हें सकारात्मक ऊर्जा से प्रज्वलित करते हैं और प्रत्येक परिस्थिति में अवसर खोजने का साहस रखते हैं, तो कोई भी बाधा हमें पीछे नहीं खींच सकती। कठिनाइयाँ केवल हमारे अनुभव और धैर्य को परखती हैं, और वही अनुभव व्यक्ति को और अधिक सशक्त, विवेकशील और दूरदर्शी बनाते हैं। जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सच्ची दिशा तभी आती है जब हम समस्याओं को भय की दृष्टि से नहीं, बल्कि सीख और विकास की दृष्टि से देखें। यही जागरूक, अडिग और सकारात्मक भारतीय विचारों की असली सॉंस्कृतिक शक्ति है, जो राष्ट्र और व्यक्ति दोनों के भविष्य को उज्जवल बनाती है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू )-जम्मू और कश्मीर
मनुष्य के जीवन में समस्याएँ उतनी भारी नहीं होतीं, जितने भारी उनके चारों ओर बुने जाने वाले नकारात्मक विचार होते हैं। मन जब धुंधला हो, तो साफ़ आकाश भी धूसर दिखाई देता है; और जब भीतर आशा का एक दीपक जल उठे, तो अंधकार भी दिशाएँ बताने लगता है। वास्तव में समस्या बाहर की नहीं, भीतर की बेचैनियों की होती है—विचारों की उस उलझन की, जो परिस्थिति को कठिन और मार्ग को अवरुद्ध दिखाती है। पर जैसे ही मन आशावादी होता है, वही परिस्थिति अवसर का रूप धारण कर लेती है; समाधान कोई बाहरी चमत्कार नहीं, बल्कि विचारों की उजली किरणें होती हैं, जो राह को प्रकाशित कर देती हैं। इसीलिए कहा गया है कि जीवन में परिवर्तन का आरंभ बाहर नहीं, भीतर से होता है—जहाँ समस्या की जड़ भी है और समाधान का अंकुर भी। सकारात्मकता उस अंकुर को फलने-फूलने की शक्ति देती है, और वही शक्ति मनुष्य को हर चुनौती से पार ले जाती है।मानव जीवन में समस्याएँ प्रायः परिस्थितियों से कम और हमारे विचारों की दिशा से अधिक जन्म लेती हैं। जब मन नकारात्मक होता है, तो छोटी-सी बाधा भी असहनीय प्रतीत होती है, परंतु सकारात्मक सोच कठिन परिस्थितियों में भी मार्ग खोजने का साहस देती है। समस्या वास्तव में हमारे भीतर उत्पन्न होने वाली शंकाओं, भय और नकारात्मक भावनाओं से विस्तृत होती है, जबकि समाधान आशावादी दृष्टि, शांत चिंतन और रचनात्मक प्रयासों से निर्मित होता है। यही कारण है कि किसी भी चुनौती का सामना करते समय विचारों को संयमित और सकारात्मक बनाए रखना आवश्यक है। सकारात्मकता हमें परिस्थिति का संतुलित विश्लेषण करने, व्यावहारिक उपाय चुनने और सफलता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि समस्या का मूल हमारे विचारों में होता है, और समाधान सदैव सकारात्मक सोच के सहारे ही संभव होता है।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
मानव जीवन में विचार समस्यात्मक, सुखात्मक, प्रेरणास्पद और सकारात्मक होते हैं । हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में जब भी समस्याएं आती हैं तो उनके पीछे मन मस्तिष्क में दूषित मनोवृत्तियां इतनी हावी हो जाती हैं कि पग- पग पर जीवन समस्याओं से और विपदाओं से घिर जाता है अयोग्य,अशुद्ध,स्वार्थी, कलहकारी ,विनाशकारी विचारों से जूझते-जूझते व्यक्ति भ्रष्टाचारी, कुपथगामी होकर जीवन को समस्यात्मक बना लेता है फिर गलत कार्य करने से वह डरता नहीं। भले ही परिणाम जीवन को जेल के सलाखों में गुजरना पड़े। अतः नकारात्मक विचारों को त्यागे, सतर्क रहें। अपनी इच्छा आकांक्षाओं को नियंत्रण में रखकर हरसंभव सकारात्मक स्थिति में रहें । इससे मन को अद्भुत शांति मिलेगी ।अत:सुखी जीवन के लिए बुरे विचारों पर नियंत्रण जरूरी है सकारात्मक विचार ही सफलता खुशियां देखकर जीवन को समस्याविहीन बनाते हैं।
- डॉ. रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
। अगर समस्याएं की बात करें तो कोई भी समस्या छोटी या बड़ी नहीं होती बल्कि उन्हें देखने का नजरिया और उन्हें सुलझाने की हमारी क्षमता ही तय करती है की हमें समस्या बड़ी या छोटी महसूस होगी तो आईये आज इली विषय पर बात करते हैं की क्या समस्या विचारों की होती है या समाधान सकारात्मक होता है, मेरा मानना है की अक्सर हम अपनी क्षमता से ज्यादा समस्याओं को आंकते हैं जबकि शांत रहकर छोटे छोटे कदम उठाकर और सही नजरिए से देखने से कोई भी मुश्किल चुनौती बन जाती है जिसका हल संभव हो सकता है इसका मतलब हमारा नजरिया मायने रखता है क्योंकि जब हम घबराते हैं समस्या बड़ी दिखती है और जब हम स्थिर होते हैं तो वो चुनौती लगती है और जब हम मजबूत होते हैं तो वही अवसर बन जाती है, कहने का भाव समाधान हमेशा सकारात्मक होता है यह दर्शाता है कि सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ समस्याओं को सुलझाया जा सकता है और जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है क्योंकि सकारात्मक सोच ही हमें समाधान खोजने की दिशा और शक्ति देती है जिससे बड़ी से बड़ी समस्या का हल संभव हो जाता है इसलिए हमें अपने विचारों को बदलना चाहिए और समस्या कभी भी भागने का प्रयास नहीं करना चाहिए और उसे चुनौती समझ कर हल करने के लिए हर पल तैयार रहना चाहिए ताकि हमारे सकारात्मक विचार बन सकें न की नकारात्मक क्योंकि हमारे विचार ही हमें जीत और हार की तरफ ले जा सकते हैं,अन्त में यही कहुंगा की समस्या विचारों पर निर्भर करती है जैसे हमारे विचार बनेंगे बैसे ही समाधान हो जाते हैं यहां तक की सकारात्मक विचार ही समस्या के समाधान होते हैं।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
समस्या विचारों से पैदा होती है, और समाधान सकारात्मक सोच में होता है; सकारात्मक सोच हमें तनाव कम करने, रचनात्मकता बढ़ाने और समस्याओं को अवसर के रूप में देखने में मदद करती है, जिससे हम प्रभावी समाधान ढूंढ पाते हैं, लेकिन इसके साथ ही, समस्या के नकारात्मक पहलुओं को अनदेखा किए बिना, संतुलित और निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं ताकि हम वास्तविक समाधान तक पहुँच सकें. किसी भी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए 7 चरण हो सकते हैं-समस्या को समझना, विश्लेषण करना, संभावित समाधान तैयार करना, जरूरी हो तो विशेषज्ञ से सलाह लना, सभी संभावित समाधानों में से सबसे उपयुक्त को चुनना, समाधान को कार्यान्वित करना और परिणामों का मूल्यांकन करना. सच तो यह है कि हमारी समस्या का समाधान सिर्फ हमारे पास ही होता है दूसरों के पास तो सिर्फ सुझाव ही होते हैं.
- लीला तिवानी
सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया
अलग-अलग विचारों से ही समस्या उत्पन्न होती है. अगर सबके विचार एक जैसे हो तो कोई समस्या ही पैदा न हो. हर किसी के विचार हर किसी को पसंद नहीं आता है इसलिए समस्या हो जाती है. चाहे परिवार हो समाज हो या देश दुनिया हो. जहां विचार नहीं मिलेंगे वहाँ समस्या होगी ही. परिवार के सदस्यों के विचार नहीं मिलते परिवार में समस्या पैदा हो जाती है और परिवार टूटने के कगार पर आ जाता है या टूट जाता है. पति पत्नी के विचार नहीं मिलते तो तलाक की नौबत आ जाती है. इस तरह जहाँ विचार नहीं मिलते समस्या आती जाती है. रही बात समाधान की तो वह हमेशा सकारात्मक ही होती है. समाधान यदि सकारात्मक नहीं होगा तो वो समाधान होगा ही नहीं. दोनों पक्षों को जो मान्य होता है वहीं समाधान होता है यानी समाधान सकारत्मक ही होगा,औ होता है. विचार मिल जाते है तो समाधान हो जाता है.
- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - प. बंगाल
" मेरी दृष्टि में " समस्याओं का अंत कभी नहीं होता है। समस्याओं का सामना करना पड़ता है। परन्तु समाधान के लिए सकारात्मक जरूरी होती है। जिससे समाधान सम्भव होता है। यही समस्याओं का समाधान होता है।
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