बीज ही सबकुछ होता है। बीज से दुनियां का जन्म हुआ है। जिससे इतनी बड़ी दुनियां बन गई है। बीज की महिमा अपरंपार है। देखते ही देखते विशाल रूप बन जाता है। जैसे बीज से वृक्ष बन जाता है।यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- यह प्रकृति का सरल नियम होते हुए भी गहन जीवन-दर्शन समेटे हुए है। एक छोटा सा बीज अपने भीतर विशाल वृक्ष बनने की संभावना छिपाए रहता है। उचित भूमि, जल, प्रकाश और समय मिलने पर वही बीज छाया देने वाला, फल देने वाला और जीवन को पोषित करने वाला वृक्ष बन जाता है। इसी प्रकार फूल अपनी सुगंध और सौंदर्य से आकर्षित करता है, पर उसका अंतिम उद्देश्य फल में परिवर्तित होना है, जो पोषण और निरंतरता का प्रतीक है। यह क्रम हमें सिखाता है कि हर आरंभ छोटा होता है, पर निरंतर परिश्रम, धैर्य और सही दिशा से वह महान परिणाम में बदल सकता है। मनुष्य के भीतर भी संस्कार रूपी बीज होते हैं, जो सही वातावरण में विकसित होकर चरित्र रूपी वृक्ष बनते हैं और कर्म रूपी फल के ...