निर्मल वर्मा स्मृति में चर्चा परिचर्चा

       प्रतीक्षा का अस्तित्व क्या है। वास्तव में प्रतीक्षा का परिणाम बड़ा ही रोचक होता है। प्रतीक्षा से बुरे काम से भी बचाव किया जा सकता है और प्रतीक्षा से रूकें काम बन जाते हैं। ऐसे में प्रतिक्षा का अर्थ विभिन्न परिस्थितियों में बदल जाता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
       सही समय प्रतीक्षा करने से ही समय का अंदाज मिलता है, जिससे हमारे काम सफल होते हैं। बेसब्री से ज़्यादा इंतजार का फल मीठा होता है! उसका प्रयास रंग लाया ! बिगड़ते काम भी पूरे हो। इंतज़ार करने से हम बुरे काम से बच सकते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।आंतरिक शांति मिलती है और हमारा मन शांत रहता है। धैर्य रखें प्रतीक्षा करने के लिए धैर्य रखें और जल्दबाजी न करें। प्रतीक्षा के दौरान काम करते रहें !और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करते रहें। प्रतीक्षा इंसान को तनाव ग्रस्त बनाती है ! जिसका उदाहरण पिता के जाने के बाद को आत्मनिर्भर बनाने प्रतीक्षा में रुके काम बनते रहे.इतजार की घड़ियाँ समाप्त हुई बेटे के विवाह तिलक करने की बारी आई तो प्रतीक्षा बुरे काम से बचती रही बेटे ने पहल की टीका माँ पहले तिलक करेगी  माँ को अंत का इंतजार करना पड़ा  कई बार नियम नियति के कारण भी रुके काम बनते है ! नियम नीति अंतर्गत काम करने पड़ते है !

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

       उचित समय की प्रतीक्षा करने से रूके हुए काम बन ही जाते हैं,बस सही समय का इंतजार करना जरुरी होता है।एक प्रसिद्ध दोहा है -रहिमन चुप हो बैठिये,देख दिनन को फेर। जब नीके दिन आएंगे बनता न लगिहै देर।।यानि जब समय अनुकूल न हो तो प्रतीक्षा करें, क्योंकि जब समय अनुकूल आएगा तो कार्यसिद्धि में देरी नहीं लगेगी।इस संबंध में यह बात भी बहुत महत्वपूर्ण है कि प्रतीक्षा करने से हम बुरे काम से बचते हैं। जल्दबाजी और विपरीत परिस्थितियों में येन केन प्रकारेण काम सिद्ध करने के चक्कर में भले बुरे का भेद न करते हुए हम बुरा रास्ता भी अपना लेते हैं और तब जाने अनजाने हम बुरी राह के राही भी बन जाते हैं। हर कार्य के होने का वक्त होता है और वक्त की प्रतीक्षा करते हुए जब अनुकूल परिस्थितियां होती है तो कार्य सफल सिद्ध होता है।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

           प्रतीक्षा : धैर्य का वह दीप, जो राह भी दिखाए और गिरने से भी बचाए

“प्रतीक्षा से रुके काम बनते हैं,

प्रतीक्षा से बुरे काम से बचते हैं”—

इन पंक्तियों में जीवन का अत्यंत गहरा सत्य निहित है। यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि अनुभवों की तपस्या से निकला हुआ जीवन-दर्शन है।मानव स्वभाव अधीर है। वह चाहता है कि हर कार्य तुरंत पूर्ण हो, हर इच्छा शीघ्र पूरी हो जाए। किंतु प्रकृति का नियम इससे भिन्न है। वह हर वस्तु को समय के साथ ही परिपक्व करती है। बीज को वृक्ष बनने में समय लगता है, सूरज को उगने के लिए अपनी निश्चित घड़ी का इंतज़ार करना पड़ता है, और नदी को सागर तक पहुँचने के लिए लंबी यात्रा करनी होती है। यही प्रतीक्षा जीवन का संतुलन बनाए रखती है।जब किसी कारणवश हमारे कार्य रुक जाते हैं, तो हम व्याकुल हो उठते हैं। हमें लगता है कि समय व्यर्थ जा रहा है। लेकिन वास्तव में वही रुका हुआ समय हमें कुछ सिखाने आता है। यदि हम उस क्षण को धैर्यपूर्वक स्वीकार कर लें, तो वही प्रतीक्षा हमारे कार्य को और अधिक सशक्त, परिपक्व और सफल बना देती है। अधीरता में किया गया कार्य कई बार अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण होता है, जबकि प्रतीक्षा के साथ किया गया कार्य स्थायी और प्रभावशाली बनता है। प्रतीक्षा का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह हमें बुरे कार्यों से बचाती है। जब मन क्रोध, आवेश या लालच से भर जाता है, तब व्यक्ति बिना सोचे-समझे निर्णय ले बैठता है, जिसका परिणाम अक्सर पश्चाताप होता है। किंतु यदि वह एक क्षण ठहर जाए, अपने मन को शांत करे, और प्रतीक्षा करे, तो वही ठहराव उसे गलत कदम उठाने से रोक सकता है। इस प्रकार प्रतीक्षा हमारे भीतर विवेक और संयम का संचार करती है। प्रतीक्षा केवल समय का व्यतीत होना नहीं, बल्कि आत्मबल का निर्माण है। यह हमें सिखाती है कि जीवन में हर चीज़ तुरंत प्राप्त नहीं होती, और जो चीज़ें समय लेकर मिलती हैं, वे अधिक मूल्यवान और स्थायी होती हैं। प्रतीक्षा हमें भीतर से मजबूत बनाती है, और हमारे व्यक्तित्व में गंभीरता एवं गरिमा का संचार करती है। अंततः यही कहा जा सकता है कि प्रतीक्षा कोई निष्क्रियता नहीं, बल्कि एक सक्रिय साधना है। यह हमें सही समय की पहचान कराती है, हमारे कार्यों को सफल बनाती है, और हमें गलत राह पर जाने से बचाती है। जो व्यक्ति प्रतीक्षा करना सीख लेता है, वह जीवन की आधी समस्याओं पर विजय पा लेता है।

- डा. अलका पांडेय 

मुंबई - महाराष्ट्र 

         अगर प्रतीक्षा , धैर्य या सब्र की बात करें तो इनसे  आत्म-नियंत्रण सुधरता है जिससे जल्दबाजी में होने वाली गलतियों से बचकर सही निर्णय लेने में मदद मिलती है, यह दृष्टिकोण मानसिक शांति प्रदान करता है और लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होता है कहने का मतलब जीवन में  कठिन समय में धैर्य रखने से ही सफलता मिलती है तो आईये आज की चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं कि प्रतीक्षा से रूके काम बनते हैं और प्रतीक्षा से बुरे काम से बचते हैं, मेरे ख्याल में धैर्य और सब्र से आत्म नियंत्रण सुधरता है जिसमें जल्दबाजी में होने वाली गलतियों से बचकर सही निर्णय लेने में मदद मिलती है क्योंकि गलतियों या असफलताओं के बाद थोड़ा रूककर उन पर विचार करने से ही बेहतर परिणाम मिलते हैं   हम ज्यों भी कह सकते हैं कि देर आए दुरूस्त आए की तरह जल्दबाजी से बचने और सही समय का इंतजार करने के लिए प्रेरित करती है, यही नहीं प्रतीक्षा  धैर्य और दृढ़ता जैसे गुण सिखाती है जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए जरुरी है इसके साथ शांत रहकर की गई प्रतीक्षा हमें जल्दबाजी में गलत निर्णय लेने से रोकती है जिससे परिणाम बेहतर होते हैं इससे दृष्टिकोण में स्पष्टता आना संभव है तथा भविष्य  की अच्छी चीजों के लिए सकारात्मक आशा बनाए रखने के लिए मदद करती है, आखिरकार यही कहुँगा कि प्रतीक्षा केवल समय की बर्बादी नहीं है किन्तु धैर्य, चरित्र निर्माण और मानसिक शांति का एक शक्तिशाली माध्यम है यह हमें बेहतर निर्णय लेने आत्मनियंत्रण विकसित करने और  ईश्वर पर भरोसा करना सिखाती है , यह जीवन का  एक अनिवार्य हिस्सा है जो हमें  चरित्र निर्माण, ईश्वर पर विश्वास और अभाव में फलदायी बने रहने  का एक अवसर है इसलिए सही समय की प्रतीक्षा करना हमें आत्मचिंतन की और ले जाता है , वास्तव में प्रतीक्षा आशा में समय बिताने की एक भावनात्मक स्थिति है जिसे इंतजार भी कहते हैं यह धैर्य का इम्तिहान   है  जिससे भविष्य के सकारात्मक परिणाम की उम्मीद की जा सकती है तभी तो कहते हैं इंतजार की घड़ियाँ लम्बी होती हैं क्योंकि यह उत्सुकता, बेचैनी और आशा का एक मिश्रित भाव है यहाँ व्यक्ति किसी के आने या कार्य के पूरा होने की राह देखता है, वास्तव में  प्रतीक्षा केवल समय की बर्बादी नहीं है बल्कि धैर्य और चरित्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण व्यावाहरिक अभ्यास है यह सही सिखाती है कि हर चीज का एक उचित समय होता है जो हमें ईश्वर पर भरोसा रखना, आत्म मूल्यांकन करना और विपरीत परस्थितियों में भी फलदायी बने रहना सिखाती है  इसलिए इससे रूके काम बनते हैं और बुरे काम बचते हैं। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

      कभी-कभी कार्य होते होते भी रुक जाता है। कुछ समय प्रतीक्षा करके पुनर्विचार कर भली भांति करने से कार्य संपादित हो जाने की उम्मीद बढ़ जाती है और आगे चलकर हो भी जाते हैं।कई बार परिस्थितियां ऐसी आती हैं कि दिमाग में उलझन की स्थिति बन जाती है। करूं या न करूं, ठीक रहेगा या नहीं। अनेक प्रकार के विचार मन में आते हैं। उस स्थिति में कुछ समय रुक कर मनोविश्लेषण करना चाहिए। शांत और गंभीर रहकर विचार करने से हल समझ में आ जाएगा और गलती की कोई गुंजाइश नहीं रह पाएगी। मतलब यही कुछ समय की प्रतीक्षा से हम बुरे कार्य से अर्थात गलत करने से बच सकते हैं।

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 

          हर अच्छे काम के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है. जैसे पढ़ाई में अच्छे  प्राप्तांक के लिए साल भर इंतजार करना पड़ता है. किसान फसल बोता है तो उसे भी अच्छी पैदावार के लिए छह माह इंतजार करना पड़ता है. औरत जब माँ बनती है तो स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए नौ माह तक इंतजार करना पड़ता है. एक चित्रकार जब चित्र बनाता है तो एक अच्छे चित्र के लिए बहुत मेहनत और प्रतीक्षा की जरूरत होती है. इस तरह हम देखते हैं कि बहुत सारी चीजें हैं जो  प्रतिक्षा के साथ ही सफल होती हैं.रही बात प्रतीक्षा से बुरे काम से बचने की तो हम प्रतीक्षा के क्षणों में अच्छे और बुरे का विचार कर सकते हैं और बुरे काम से बच सकते हैं. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

    प्रतीक्षा से रुके काम बनते हैं ... इस कथन में सच्चाई है क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है ! जब हम किसी समस्या का हल प्राप्त करने के लिए यथोचित् समय नहीं देंगे , तो वांछित फल कैसे प्राप्त होगा ! हर चीज को प्राप्त करने के लिए समय लगता है , व इस समय की प्रतीक्षा करना हमारा कर्तव्य भी है , और वक्त की पुकार भी !! जल्दबाजी व हड़बड़ाहट मैं काम और बिगड़ जाते हैं , संवारते नहीं !! जब हम प्रतीक्षा करते हैं अपने यथोचित कर्म करने के पश्चात , तो हम कुछ बुरा होने से बचते है ! सोच विचारकर , उचित समय देकर , प्रतीक्षा करके हम वांछित फल प्राप्त करते है !! बिना विचारे जो करे,

सो पाछे पछताए ! 

काम बिगाड़े अपनो, 

जग में होत हंसाए !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

      प्रतीक्षा जीवन में एक अत्यंत मूल्यवान गुण है। यह न केवल हमें धैर्य सिखाती है, बल्कि हमारे कार्यों में सफलता की संभावना भी बढ़ाती है। जब हम किसी कार्य को जल्दबाजी में नहीं करते और सही समय का इंतजार करते हैं, तो हमारे प्रयास अधिक संगठित, प्रभावी और फलदायी होते हैं। प्रतीक्षा से रुके काम बनते हैं—इसका अर्थ यही है कि सही समय पर किए गए प्रयास जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिणाम देते हैं।साथ ही, प्रतीक्षा हमें गलतियों और हानिकारक कार्यों से बचाती है। यदि हम हर निर्णय को तुरंत लेने की कोशिश करें, तो अक्सर अनजाने में नुकसान या असफलता का सामना करना पड़ता है। सोच-समझकर प्रतीक्षा करना हमें विवेकपूर्ण निर्णय लेने का अवसर देता है और हमारे जीवन को सुरक्षित बनाता है। इसलिए जीवन में धैर्य और प्रतीक्षा का महत्व बहुत बड़ा है। यह हमें न केवल सफलता दिलाती है, बल्कि हमें समझदारी और विवेक की राह भी दिखाती है। संक्षेप में कहा जाए तो, प्रतीक्षा एक ऐसी शक्ति है जो जीवन को संतुलित, सुरक्षित और फलदायी बनाती है। यही कारण है कि प्रतीक्षा से रुके काम बनते हैं और बुरे काम से बचा जा सकता है।

-डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

      प्रतीक्षा केवल समय का ठहराव नहीं, बल्कि विवेक और संयम की परीक्षा भी है। कई बार जल्दबाज़ी में लिए गए निर्णय हमें गलत दिशा में ले जाते हैं, जबकि थोड़ी प्रतीक्षा हमें सोचने, समझने और सही विकल्प चुनने का अवसर देती है। इसी कारण प्रतीक्षा से कई रुके हुए कार्य सही समय पर सफल हो जाते हैं। साथ ही, प्रतीक्षा हमें आवेग में आकर किए जाने वाले बुरे कार्यों से भी बचाती है। जब हम ठहरकर विचार करते हैं, तो भावनाओं का आवेग शांत हो जाता है और हम सही-गलत का अंतर स्पष्ट रूप से समझ पाते हैं। इस प्रकार, प्रतीक्षा न केवल सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि हमारे जीवन को संतुलित और सार्थक भी बनाती है।

- अर्चना झा

पानीपत - हरियाणा 

        प्रतीक्षा केवल समय का व्यर्थ व्यतीत होना नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक गहन साधना है। यह हमें संयम सिखाती है, धैर्य का मूल्य समझाती है और निर्णय लेने की परिपक्वता प्रदान करती है। जो कार्य शीघ्रता में अधूरे या त्रुटिपूर्ण हो सकते हैं, वही कार्य प्रतीक्षा के पश्चात अधिक सुदृढ़, संतुलित और सफल बनते हैं। प्रतीक्षा हमें केवल अच्छे अवसरों तक पहुँचने में सहायता नहीं करती, बल्कि यह हमें बुरे निर्णयों, आवेश में किए गए कर्मों और संभावित हानियों से भी बचाती है। यह एक ऐसा अदृश्य संरक्षक है, जो हमारे भीतर विवेक, आत्मनियंत्रण और दूरदर्शिता का विकास करता है।सकारात्मक दृष्टिकोण से देखें तो प्रतीक्षा वह शक्ति है, जो हमारे व्यक्तित्व को तपाकर कुंदन बनाती है। यह हमें सिखाती है कि हर सही समय का अपना महत्व होता है, और सही समय पर किया गया कार्य ही स्थायी सफलता और संतोष देता है। अतः प्रतीक्षा को कमजोरी नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट गुण के रूप में स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि यही वह मार्ग है, जो हमें स्थायी सफलता, आंतरिक शांति और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की ओर अग्रसर करता है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

      यह माना जा सकता है कि जब हम किसी कार्य को करते हैं या किसी के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं तो उस कार्य के पूरा होने पर उसके परिणाम की अथवा किसी आने वाले व्यक्ति के आने तक बहुत उत्सुकता बढ़ जाती है। परिणाम का इंतजार रहता है। इसके लिए हमें धीरज रखना श्रेयस्कर होगा क्योंकि काम तो सही समय पर ही पूरा होगा। लेकिन कभी-कभी काम के प्रति इतनी बेसब्री हो जाती है कि काम बिगड़ जाता है; पैसों का निवेश और कैरियर के लिए अवसर अनुकूल प्रतीक्षारत तो रहना ही पड़ेगा; तभी परिणाम सुदृढ और लाभकारी होते हैं। जल्दबाजी में लिये गए निर्णय हानिकारक हो जाते हैं और कष्टप्रद होते हैं। कभी-कभी किसी बात में निर्णय लेने में बड़ा अंतर्द्वद्व होता है अतः ऐसी अनिश्चितता में प्रतीक्षा करना अवसर  के अनुकूल ही अधिक अच्छा होगा । हो सकता है हम बुरे काम  और उसके परिणाम  से बच जायें  । साथ ही आत्ममंथन करते हुए धैर्यपूर्वक की गई प्रतीक्षा हमारे मानसिक शारीरिक स्थिति को भी संयमित रख सकेगी।

- डाॅ.रेखा सक्सेना

  मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

          प्रतीक्षा  का शाब्दिक अर्थ बाट जोहना, इंतजार आदि होता है,  परंतु इसके भाव में धैर्य यानी धीरज  निहित होता है। जो  " धीरज का फल मीठा होता है" की कहावत पर समाप्त होता है। प्रतीक्षा से रुके काम बनते हैं। इसमें भी यही भाव, धीरज और उसका फल मीठा से है। किसी उद्देश्य के अच्छे परिणाम के लिए हम जब धीरज रखेंगे तब जल्दबाजी से काम बिगड़ने की जो संभावनाएं होती हैं। वे या तो खत्म हो जाती हैं या कम हो जाती है।ऐसा कहा भी गया है, "जल्दी का काम शैतान का होता है " या इसे यूँ भी कह सकते हैं कि" दुर्घटना से देर भली।" इसका सीधा मतलब यह है कि जब हम धैर्य रखेंगे तो हमें जो यह समय मिलेगा वह हमारे लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा,क्योंकि हम फिर इस समय का उस काम के बेहतर परिणाम लाने के लिए उपयोग कर सकेंगे और फिर उस काम से संबंधित जो भी अच्छे - बुरे परिणाम के जितने भी विकल्प होंगे उन सभी के बारे में आसानी से न केवल चिंतन-मनन कर सकेंगे , बल्कि सभी विकल्पों के निदान के लिए सजग भी रहेंगे। इससे अंत में हमें सफलता ही मिलेगी।अत: यह कहना सटीक है कि प्रतीक्षा से रुके काम बनते हैं और प्रतीक्षा से बुरे काम से बचते हैं। सार यही कि हम कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " प्रतीक्षा बहुत बड़ी सज़ा भी होती है। जिसे इंतजार भी कहां जाता है। फिर भी प्रतीक्षा में सफलता भी होती है। जल्दी बाज़ी का काम शैतान का होता है। जिसे कभी भी उचित नहीं समझा गया है। यही प्रतीक्षा को सफल बनता है। बाकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

                - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)




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