दिल की बात दिल ही जाने और न जाने कोय,
जो ग़म की बात जान जाए फिर दर्द कैसे होय.
सही में दिल की बात दिल ही जानता है. जैसे हम कभी किसी को याद करते हैं तो अचानक से उसका फोन आ जाता है. या जब हम किसी को दिल से चाहते हैं तो उसके पास तरंग पहुंच जाती हैं और उसके दिल में भी कम्पन होने लगता है भले वह प्रकट करे या न करे. य़ह अलग बात है. औरों की क्या बात करें मेरे साथ अनेकों बार इस तरह की घटनायें हो चुकी हैं. पर ग़म की बातेँ कोई नहीं जान पाता है उसे तो बतलाना ही पड़ता है. किसी को क्या गम है कोई जानना भी नहीं चाहता है. सोचता है पूछने पर या जानने पर कुछ मदद करनी पड़ेगी. इत्यादि इत्यादि. गम तो कई तरह का होता है. कुछ प्रकृति प्रदत होता है कुछ मनुष्य प्रदत. लेकिन कुछ गम ऐसे होते हैं जो कोई जान नहीं पता है. ग़म की बात तो केवल वही जान सकता है जो गम देता है. या यदि कोई ईश्वर है तो वही जनता हैं कि किसको क्या गम है.
- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - पश्चिम बंगाल
मनुष्य का हृदय एक अथाह सागर है—शांत भी, गहरा भी, और कभी-कभी तूफ़ानी भी और ठहरा हुआ भी । “दिल की बातें दिल जाने, ग़म की बातें कौन...? ज—यह पंक्ति मानव जीवन के उसी अदृश्य सत्य को उजागर करती है, जहाँ भावनाएँ शब्दों से परे चली जाती हैं और भीतर ही भीतर अपना संसार रचती हैं। हर व्यक्ति अपने भीतर एक अलग कहानी लिए चलता है। बाहर से मुस्कुराता चेहरा, भीतर से कितनी पीड़ा समेटे हुए है—यह जान पाना सहज नहीं। कई बार हम दूसरों के जीवन को देखकर यह मान लेते हैं कि वे पूर्णतः सुखी हैं, परंतु उनके मन की गहराइयों में छिपे संघर्ष, टूटन और ग़म हमारे लिए अनदेखे ही रह जाते हैं। यही कारण है कि कहा गया—“ग़म की बातें कौन जाने।” वह तो मानव का अपना हृदय ही जानता है। दिल की बातें अक्सर शब्दों में ढल नहीं पातीं। कुछ भाव ऐसे होते हैं जिन्हें व्यक्त करना कठिन होता है—जैसे अधूरी इच्छाएँ, अनकही मोहब्बत, या फिर किसी अपने को खो देने का दर्द। ये भाव भीतर ही भीतर मनुष्य को परिपक्व बनाते हैं, उसे संवेदनशील बनाते हैं, और जीवन की वास्तविकताओं से परिचित कराते हैं। यह भी सत्य है कि हर व्यक्ति अपनी पीड़ा को अलग-अलग ढंग से जीता है। कोई आँसुओं में बहा देता है, तो कोई मुस्कान के पीछे छिपा लेता है। समाज में अक्सर हम बाहरी व्यवहार के आधार पर ही निर्णय कर लेते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हर दिल अपने भीतर एक गुप्त संसार समेटे होता है। यह पंक्ति हमें एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है—हमें दूसरों के प्रति संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए। जब हम यह समझते हैं कि हर व्यक्ति अपने भीतर कुछ अनकहा दर्द लिए जी रहा है, तब हमारे व्यवहार में विनम्रता और करुणा स्वतः आ जाती है। हम किसी को आहत करने से बचते हैं और जहाँ संभव हो, किसी के मन का सहारा बनने का प्रयास करते हैं। अंततः, जीवन की सच्चाई यही है कि दिल की गहराइयों को पूरी तरह कोई नहीं समझ सकता। परंतु यदि हम एक-दूसरे के प्रति थोड़ा सा भी अपनापन और समझ विकसित करें, तो यह संसार कहीं अधिक सुंदर और मानवीय बन सकता है।
- अलका पाण्डेय
मुम्बई - महाराष्ट्र
दिल तो है, दिल क्या चीज है, दिन की शुरुआत दिल से ही होती है, जब दिल कहे तब काम कीजिए। दिल की बातें दिल जानें, गंम की बातें कौन जानें। यह हकीकत की दास्तान है। जिसे गंम है, उसकी हकीकत आप ही जान सकते, दूसरा क्या जाने, दूसरा हमारे गंम पर मजाक उड़ा सकता है गंम को कम नहीं कर सकता है......।
-आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
बालाघाट - मध्यप्रदेश
सच ही कहा है कि किसी के दिल की बात कौनजान सकता है !! दिल की बात तो उस व्यक्ति को ही पता होती है , जिसके दिल में कोई बात चल रही होती है ! हर व्यक्ति के जीवन में , खुशी व गम , दोनों होते है !! कई बार व्यक्ति अपनी खुशी भी प्रकट कर पाता , अपने निजी कारणों से , और कई बार व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट के पीछे , अपने गम छुपा लेता है !! किसी को देखकर पता नहीं चलता , की वह खुश है या उदास !! आधुनिक भौतिक युग में , व्यक्ति को देखकर यह अंदाजा लगाना अत्यंत कठिन है कि खुशी या गम का मुखौटा ओढ़ा है व्यक्ति ने , या वह वाकई खुश है , व इसी प्रकार यह भी पता नहीं चलता कि व्यक्ति वाकई दुखी है , या दुखी होने का नाटक कर रहा है !! किसी व्यक्ति की दिल की बात , तो वही व्यक्ति जान सकता है !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
हमारे फिल्म जगत ने "दिल" पर हजारों खूबसूरत गाने दिलकश गजलें दी हैं कि - -
"दिल तो है दिल, दिल का एतबार क्या कीजे"
- - और हजारों हजार गम के मारे - - गम की मारी, लक्ष्मण रेखाओं में बँधी-- गीतों के साथ गीतों के सहारे जिये चले जाते हैं।वैसे भी गम दिखाने की चीज नहीं होती कि "रहिमन निज मन की व्यथा मन ही रखिए गोय।
सुन इठलैंहैं लोग सब बाँट न लैंहैं कोय।।
अतः मेरे विचार से आज के ह्दयहीन क्रूर दौर में अपने गमों की भनक तक दूसरों को ना लगने दें यही उचित है। आज राजनीति सिर्फ़ देश तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों और घरों के भीतर तक इसकी पैठ है। अजनबी रिश्ते नहीं बल्कि सगे रिश्ते आपके दिल तक नहीं पहुंच पाते गम बाँटना तो सपनों की बात है। संसार के देशों की बात छोडिए आज विश्व स्तर पर जो स्थिति है वहाँ क्या चल रहा है? विनाश के कगार पर खड़ी है दुनिया। कैसी दिलजोई - - कैसा अपनापन - - हर ओर महासमर की गूँज महाविनाशक हथियार मिसाइलें विश्व युद्ध की आहटें। खैर - - जीवन है दुनिया है तो युग बदलते ही रहेंगे विनाश की लीलाओं के साथ और हम सामाजिक प्राणी टीवी से चिपके बस बहस प्रोग्राम देखते रहेंगे - -अपने-आप को दिये इस गरिमामय झूठे आश्वासन के साथ कि "हमारे हाथ में क्या है"?
- हेमलता मिश्र मानवी
नागपुर - महाराष्ट्र
इसमें कोई शक नहीं कि दिल और गम का रिश्ता गहरा और अटूट होता है जो अक्सर यादों, जुदाई और अधूरी ख्वाहिशों से उपजता है, यह एक ऐसा भावनात्मक दर्द है जो रुह को भारी कर देता है मगर कईबार इसे आत्मचिंतन का जरिया भी मन जाता है तो आईये आज की चर्चा इसी बात पर करते हैं कि दिल की बातें दिल जानें, गम की बातें कौन जानें, मेरे ख्याल में दिल की बातें भावना प्रधान होती हैं जैसे प्यार, डर, कोई गहरा सच यह बातें दिल से निकल कर दुसरे दिल तक सीधे पहुंचती है जिसे हम दिल जान से चाहते हैं क्योंकि दिल अहसास और सुकून या गम का केन्द्र है, इसलिए सच्चे हमदर्द लोग जो हमसे निस्वार्थ प्रेम करते हैं जैसे माता, पिता, सच्चे दोस्त, भले ही वे शब्द न कहें या उतारें पर भावनाओं को महसूस कर लेते हैं, दुसरी तरफ गम की बातें और गहरा दर्द केवल वही समझ सकता है जिसने खुद भी बैसी ही पीड़ा झेली हो या निस्वार्थ प्रेम किया हो, यह बातें अक्सर अपनों की खामोशी, आँखों के आँसू अथवा दिल की गहराइयों से सुनी व अनसुनी होती हैं, यह सत्य है कि दिल प्रेम, भावनाओं और कई अनकही बातों का केंद्र है तथा आत्मा, चेतना और जीवन के रहस्यों से जुड़ा होता है इसलिए दिल की भावनाओं को केवल सच्चा साथी या व्यक्ति स्वंय महसूस कर सकता है, दिल की बातें ही घटनाओं की गहराई और प्रेम की समझ को दर्शाती हैं जिनको अक्सर शब्दों से ज्यादा दिल महसूस करता है क्योंकि दिल ही विचारों, भावनाओं, खुशी और उदासी का केंद्र माना जाता है, मेरा मानना है कि दिल की बातें अक्सर अनकही रह जाती हैं जबकि गम की बातें हमेशा दिल में ही सुलगती रहती हैं क्योंकि गहरा दुःख इंसान को सुन्न कर देता है उस समय कुछ अमिट यादें भी सुकून देने के बजाय पुराने जख्म कुरेदती हैं इसलिए सच्ची दिल की बात वोही होती है जो लबों पर न आकर सिर्फ रुह को महसूस करती है उस समय गम और खुशी दोनों मिल कर जीवन के गहरे अनुभव को सांझा करते हैं, अन्त में यही कहुँगा कि बात चाहे दिल की हो या गंम की वो अक्सर इंसान का अपना मन, रूह या आत्मा या रूहानी हमसफर जानता है जो बिना कहे सब समझ लेता है क्योंकि कुछ जज्बात या प्यार भरे किस्से, बेरूखी या तन्हाई से जुड़े सफर जिन्हें हर किसी के लिए समझना न मुमकिन होता है, जबकि जीवन के गहरे भावनात्मक अनुभवों का मिश्रण सच्चाई, अकेलेपन, नाकामीयों के बोझ में एक संतुलन है यहाँ दिल की बातें सच्चे ज्जबातों को उजागर करती हैं वही गम हमें संघर्ष और आत्म खोज सिखाता है इसलिए व्यक्ति को भावनाओं को स्वीकार कर दुखों को पीछे छोड़ कर आगे बढ़ने की हिम्मत रखनी चाहिए ताकि दिल की बात दिल ही जान सके, और गम की बात या मन का हाल सिर्फ करीबी मित्र, हमदर्द साथी ही जान सके ताकि उसको आपकी भावनाओं की कद्र होती है और वोही ध्यान से आपको सुन सकेगा।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
“दिल की बातें दिल जाने, ग़म की बातें कौन जाने” — यह पंक्ति मानवीय भावनाओं की उस गहराई को छूती है, जहाँ शब्द अक्सर असमर्थ हो जाते हैं और अनुभूति ही सच्ची भाषा बन जाती है। मनुष्य के भीतर एक ऐसा संसार होता है, जिसे वह सबके सामने नहीं खोल पाता। दिल की बातें—प्रेम, पीड़ा, उम्मीद, टूटन, स्मृतियाँ—ये सब बाहर से जितनी साधारण लगती हैं, भीतर उतनी ही जटिल होती हैं। हर व्यक्ति अपने अनुभवों, परिस्थितियों और संवेदनाओं के आधार पर इन्हें जीता है। इसलिए कहा गया कि “दिल की बातें दिल जाने”—अर्थात् जो महसूस करता है, वही उसकी वास्तविक गहराई समझ सकता है। दूसरी ओर “ग़म की बातें कौन जाने” जीवन की उस सच्चाई को सामने लाती है कि दुःख का अनुभव अत्यंत व्यक्तिगत होता है। हम किसी के आँसू देख सकते हैं, उसकी कहानी सुन सकते हैं, पर उसके भीतर चल रही पीड़ा की तीव्रता को पूरी तरह महसूस नहीं कर सकते। यही कारण है कि कई बार व्यक्ति भीड़ में रहकर भी अकेला महसूस करता है। यह पंक्ति हमें एक महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य की ओर भी संकेत करती है—संवेदनशीलता और सहानुभूति। भले ही हम किसी के ग़म को पूरी तरह समझ न सकें, पर उसे महसूस करने का प्रयास, उसके साथ खड़े रहने की भावना, उसके दुःख को हल्का कर सकती है। साहित्य के दृष्टिकोण से देखें तो यह पंक्ति अंतर्मन की अनुभूति, व्यक्तित्व की निजता और भावनात्मक एकांत को बहुत ही सरल शब्दों में अभिव्यक्त करती है। यही इसकी सुंदरता है—कम शब्द, गहरा अर्थ।निष्कर्षतः, यह केवल एक भाव नहीं, बल्कि जीवन का सत्य है कि हर हृदय अपने भीतर एक अनकही कहानी समेटे होता है—जिसे वही जानता है, और शायद वही पूरी तरह समझ सकता है।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
ईश्वर द्वारा प्रदत्त हमारा तन-मन एक जीवन के रूप में बेहतरीन और अनुपम उपहार है। जो निश्चित ही हमारे लिए सौभाग्य का प्रतीक है। ये बात अलग है कि यह उपहार किसे कितना और कब तक के लिए मिलता है। विविधता और विभिन्नता का अंतर ही हमारे कर्म का प्रतिफल है, इसी मर्म को समझकर चलना भी है और संभलना भी है। ईश्वर ने हम शक्तियां भी दी हैं, सामर्थ्य भी दी है और अवसर भी। इसी मर्म को जिसने समझकर अवसर का लाभ ले लिया, वही सिकंदर बन गया। वर्ना जितना समझा, जितना जाना और जितना माना, उतना ही पाया। हमारे तन-मन की एक और विशेषता है, वह है हमारी गोपनीयता। हम बाह्य रूप में जैसे है, वैसे नजर आयें, ये तन है, परंतु हमारे भीतर से हम कैसे हैं? हमारे मन में क्या है? यह केवल हम ही जानते हैं, दूसरा कोई नहीं। अनुमान कोई कितना भी लगा ले, धारणा कोई कैसी भी बना ले। लेकिन जो गोपनीयता है, वह केवल हमारी हमारे पास है और हम तक ही सीमित है। अत: दिल की बातें हों या गम और खुशी की बातें सबकी अपनी- अपनी हैं और इन्हें कोई दूसरा नहीं जान सकता।यह स्वयं के लिए अद्भुत है, परंतु दूसरों के लिए परेशानी का सबब। दूसरे उतना ही जान सकेंगे, जितना हम बता पायेंगे।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
दिल की बड़ी बातें सच में वही समझ सकता है, जो दिल की गहराइयों से जुड़ा हो। हर व्यक्ति के भीतर एक ऐसा संसार होता है, जहाँ उसके सपने, उसकी भावनाएँ और उसके अनकहे शब्द छिपे रहते हैं। ये बातें अक्सर शब्दों में व्यक्त नहीं हो पातीं, बस महसूस की जाती हैं। ग़म की बात भी कुछ ऐसी ही होती है। बाहर से मुस्कुराता हुआ चेहरा भी अंदर से टूटा हुआ हो सकता है। लोग अक्सर सिर्फ हँसी देखते हैं, लेकिन उस हँसी के पीछे छिपे दर्द को बहुत कम लोग समझ पाते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम दूसरों के प्रति संवेदनशील रहें। हर किसी की कहानी अलग होती है—किसी के दिल में खुशी छिपी होती है, तो किसी के दिल में ग़म। सच यही है कि दिल की बातें दिल ही जाने, और ग़म की बातें वही समझे जो उसे महसूस कर सके।
- डॉ. अर्चना दुबे
मुंबई - महाराष्ट्र
उक्त पंक्तियाँ अत्यन्त मार्मिक और गहराई से भरी हुई हैं। इनका दृष्टिकोण मात्र संवेदना नहीं, बल्कि मानव जीवन का एक सूक्ष्म सत्य है। हर व्यक्ति अपने भीतर एक पूरा संसार लिए चलता है लेकिन उसकी खुशियाँ, उसके संघर्ष, उसके अनकहे दर्द। दुनिया अक्सर बाहरी मुस्कान देखती है, परन्तु उसके भीतर के तूफ़ानों को कोई भी समझ नहीं पाता है। यही वह बिंदु है जहाँ से सकारात्मकता का जन्म होता है। जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि हर किसी का दर्द अनदेखा है, तब हमारे भीतर करुणा, सहानुभूति और संवेदनशीलता का प्रकाश प्रज्ज्वलित होता है। यही भाव हमें केवल स्वयं तक सीमित नहीं रखता, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायी बनाता है। ये पंक्तियाँ हमें यह प्रेरणा देती हैं कि हम दूसरों के दुःख को समझने का प्रयास करें, भले ही वह दिखाई न दे। हम अपने ग़म को कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति में परिवर्तित करें और सबसे महत्वपूर्ण, हम अपने हृदय की सच्चाई को सकारात्मक कर्मों में ढालकर समाज में आशा का दीप जलाएँ, मौलिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें। वास्तव में, जो व्यक्ति अपने दर्द को समझकर भी दूसरों के लिए मुस्कान बनता है, वही सच्चे अर्थों में महान होता है। उक्त पंक्तियॉं वह आग हैं जो केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि परिवर्तन का संदेश देती है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
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