पद्मश्री लाला मुल्क राज सराफ की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

     सबसे कठीन कार्य जीवन जीना होता है। जो जीत जाएं। वहीं कामयाब इंसान कहलाता है। जो टूट जाएं । वह इंसान नहीं कहलाता है। जीवन से बढ़ कर कुछ नहीं है। फिर भी इधर उधर की बातें करता है। जीवन वास्तव में कर्म का परिणाम है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- 
       जीवन स्वभाव से ही कठिन और संघर्षपूर्ण है, यही उसकी वास्तविकता है। कठिन परिस्थितियाँ हर व्यक्ति के सामने आती हैं और कई बार इंसान उनसे प्रभावित होकर टूट भी जाता है, परंतु यह टूटना उसकी अंतिम पहचान नहीं होता। वास्तविकता यह है कि सच्चा इंसान वही है जो विपरीत परिस्थितियों के दबाव में स्थायी रूप से हार नहीं मानता, बल्कि स्वयं को संभालकर पुनः खड़ा करता है और अपने सिद्धांतों, आत्मसम्मान तथा साहस को बनाए रखता है। इसलिए यह कहना अधिक उचित है कि इंसान का मूल्य इस बात से नहीं आँका जाता कि वह कभी टूटा या नहीं, बल्कि इस बात से आँका जाता है कि वह टूटने के बाद कितनी दृढ़ता से फिर उठ खड़ा हुआ। जीवन की कठिनाइयाँ व्यक्ति को समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उसे मजबूत, परिपक्व और जागरूक बनाने के लिए आती हैं, और जो व्यक्ति इस सत्य को समझकर निरंतर आगे बढ़ता है, वही वास्तविक अर्थों में सशक्त और पूर्ण इंसान कहलाने योग्य होता है। यदि सत्य को माना जाए तो मैं स्वयं रोज टूटता अर्थात मरता हूॅं और सुबह पुनः संघर्ष करने का सशक्त प्रयास करता हूॅं और पुनः खड़ा होकर विजयश्री प्राप्त करने के जीवित हो जाता हूॅं। कहने का अभिप्राय यह है कि जीवन फूलों की नहीं बल्कि कॉंटों की शय्या है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू)- जम्मू और कश्मीर

           सच ही तो है, कहाँ होता है यह जीवन सरल! जीवन की जटिलताओं से तो हम सभी भली-भाँति परिचित हैं। मानव का जन्म ही जटिलताओं के साथ होता है। एक भ्रूण का शिशु रूप में परिवर्तित होना कितनी जटिल प्रक्रिया है यह तो हम सभी जानते ही हैं और फिर माँ के गर्भ से बाहर आते ही शिशु को क्षण-क्षण, पल-पल जटिलताओं का ही सामना करते हुए जीवन को आगे बढ़ना होता है। एक गर्भस्थ शिशु को जो आहार बिना किसी प्रयास के सहजता से प्राप्त हो जाता है, इस दुनिया में आने के पश्चात उसे इसी आहार को ग्रहण करने का तरीका सीखना पड़ता है। फिर! बोलना सीखो, चलना सीखो, पढ़ना सीखो, लिखना सीखो। बस सीखते ही रहो। सीखने का सिलसिला तो फिर भी ठीक है लेकिन जैसे-जैसे जीवन चक्र आगे बढ़ता है और शिशु का बालपन आता है, फिर किशोरावस्था और युवावस्था आता है, अंततः में बुढ़ापा भी आ जाता है। जीवन के हर पड़ाव पर संघर्ष चलता ही रहता है नाना प्रकार की जटिलताओं का सामना करते हुए ही हम जीवन को आगे बढ़ाने में सफल हो पाते हैं। पहले शिक्षा प्राप्ति, फिर शिक्षित होने के बाद रोजगार की समस्या, रोजगार मिलने के पश्चात प्रचुर मात्रा में धनोपाजर्न की समस्या, सुखी जीवन हेतु विभिन्न साधनों को अर्जित करने की समस्या, दुनिया की इस भीड़ में अपनी एक पहचान बनाने की समस्या, समाज में प्रतिष्ठा पाने की समस्या, न जाने कितनी समस्याएँ,  इन सभी समस्याओं का समाधान करते हुए एक सफल जीवन जीना कहाँ सरल होता है। लेकिन यह तो इंसान की जिजीविषा ही है जो उसे इस संघर्षशील जीवन को जीने की कला सिखाती है और वह प्रसन्नचित रहते हुए आगे बढ़ता है। जो इन कठिनाइयों से हार मान लेता है या उनके सम्मुख अपना हौसला छोड़ देता है वह तो सच्चा इनसान कदापि नहीं हो सकता है। सच्चा इनसान तो वही है जो जीवन की कठिनाइयों का सामना करे,  उनसे लड़े, आगे बढ़े तथा अपने जीवन को सफल और सार्थक सिद्ध कर सके।

- रूणा रश्मि 'दीप्त'

राँची -  झारखंड

      किसी शायर ने कहा था-
चला जाता हूं हॅंसता खेलता मौजे हवादिस में,अगर आसानियां हो ज़िंदगी दुश्वार हो जाये। शायर का मंतव्य है कि कठिनाई जीवन को मस्त कर देती है, आसानी उसे दुश्वार बना देती है। वैसे भी जीवन सरल कब होता है।पग पग पर परेशानियां, दिक्कतें सामने आ ही जाती है।उनसे रोज ही दो चार होना पड़ता है। सुबह उठे तो पानी न आने की परेशानी, फिर दुकान या दफ्तर को जाने में देरी, रास्ते में वाहन की परेशानी आदि के साथ देर रात सोने तक विभिन्न परेशानियां रहती है। इनको रुटीन में मान लें तो हर समय कोई न कोई परेशानी सामने रहती ही है। इन सबके बीच सहजता से अपना काम कर रहे है।इन परेशानियों के बीच जो टूट जाए वो इंसान नहीं क्योंकि इंसान के सामने परेशानी होना उसके इंसान होने का प्रमाण है इसी के चलते मानव संघर्ष का पर्याय बनते हुए सफलता की कहानी लिखता है ‌

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

       “जीवन कभी भी सरल नहीं होता” – यह पंक्ति हमें बताती है कि जीवन स्वभाव से ही संघर्षपूर्ण है। हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में कठिनाइयों, चुनौतियों और असफलताओं का सामना करना पड़ता है। कोई भी जीवन पूरी तरह सहज और निर्विघ्न नहीं होता। यही संघर्ष हमें परिपक्व बनाते हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। “जो टूट जाए वह इंसान नहीं होता” – इसका अर्थ यह नहीं कि इंसान को भावनाएँ नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह कि सच्चा मनुष्य वही है जो टूटकर भी खुद को संभाल ले, गिरकर फिर उठ खड़ा हो। जीवन में हार या निराशा आना स्वाभाविक है, परंतु उनसे हार मान लेना ही वास्तविक पराजय है। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में अपने आत्मबल को बनाए रखता है, वही सच्चे अर्थों में ‘इंसान’ कहलाता है। परिचर्चा का सार – यह कथन हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है। कठिनाइयाँ हमें रोकने के लिए नहीं, बल्कि हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। जो व्यक्ति धैर्य, साहस और विश्वास के साथ इनका सामना करता है, वही अंततः सफलता और संतोष प्राप्त करता है। उदाहरण: एक विद्यार्थी कई बार असफल होने के बाद भी प्रयास जारी रखता है और अंततः सफलता प्राप्त करता है। एक किसान सूखे के बावजूद हिम्मत नहीं हारता और अगली फसल के लिए फिर से मेहनत करता है।अतः यह विचार हमें सिखाता है कि जीवन में संघर्ष अनिवार्य है, पर टूटना विकल्प नहीं—संघर्ष ही हमारी पहचान बनाता है। 

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर -  राजस्थान

         जीवन कभी भी सरल नहीं होता ये बात पूर्णतः सत्य है क्योंकि यह जीवन समस्याओं से भरा है. एक समस्या जाती है तो दूसरी आ जाती है.यहां हर काम टेढ़े-मेढ़े हो रहे हैं. लोग भी टेढ़े-मेढ़े हो गये हैं. तो इस जीवन को सरल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता है. आप जीवन सरल रूप से चलाना चाहे तो भी लोग उसे सीधा नहीं चलने देंगे. कभी पारिवारिक समस्या तो कभी सामाजिक समस्या तो कभी व्यक्तिगत समस्या तो कभी देशीय समस्या आती ही रहती है. फिर जीवन सरल कैसे होगा. रही बात इंसान की तो वह इंसान ही क्या जो जीवन की समस्याओं से टूट जाये. टूटना तो कमजोरों और कायरों का काम होता है. सच्चा इंसान वही है जो समस्याओं से जूझते हुए उनका सामना करते हुए कर्म पथ पर आगे बढ़ते रहे. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

          "जिंदगी के रंग कई रे साथी रे" बड़ा है प्रसिद्ध है यह गीत। यह गीत बताता है कि जीवन कभी भी सरल नहीं होता - - उसके रंग कभी-कभी बेरंग भी होते हैं। लेकिन इंसान वह है जो हर स्थिति में राहें खोज ले। जो हिम्मतहार दे - - टूट जाये वह इंसान नहीं होता। हर स्थिति में हिम्मत और हौसला बनाये रखें यही हम सामान्य मानवों का भाव विभाव अनुभाव होना चाहिए। विधियों को उखाड़ फेंकना यह हमारा लक्ष्य न हो लेकिन पुरातन को बंदरिया के मरे बच्चे सा चिपकाय रखना यह भी उचित नहीं है। जीवन की कठिनाइयों और परेशानियों से डर कर जीवन की सरलता को मिटा देना - -? कदापि नहीं। ऐसा करने से हम इंसानी कर्तव्यों के प्रति समर्पण भाव खो देंगे। जरूरत इस बात की हो कि हम जीवन को सरल बनाने के साथ साथ जीवन की गरिमा कायम रखें। सरलता के साथ समझौता करने के प्रवाह में जीवन का उद्देश्य ही न भूल जायें। ऐसा हुआ तो हम इंसान इंसान कहलाने के लायक नहीं रहेंगे। अतः यह बात गाँठ बाँध लें कि जीवन सरल सहज हो और हम इंसान इसी सहजता और सरलता का अभिनंदन करें - - और इंसानियत की राह पर सदैव चलते रहें।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र 

           जीवन एकाकी रहकर नहीं जिया जा सकता। जीवन में इतनी जरूरतें होती हैं कि औरों का सहारा लेना ही पड़ता है। जब औरों  का सहारा लिया जाता है तो शर्तें भी होती है, समझौते भी।इन्हीं के मानने, न मानने या टूटने पर संघर्ष होता है। यही जीवन को असहज और कठिन बनाता है। दुविधा यही है कि सभी की सोच और नीयत में अंतर होता है।  किसके मन में क्या है? कोई पहले नहीं समझ पाता। इसका पता परिणाम के बाद चलता है। इसीलिए कहा गया है कि जीवन सरल नहीं होता। इसी परिप्रेक्ष्य में यह भी कहा गया है कि  परिस्थितियां कैसी भी हों? हिम्मत और हौसला बनाए रखना चाहिए। क्योंकि समय बदलता रहता है। परिस्थितियां बदलना भी निश्चित है। यदि धैर्य नहीं रखा और घबराकर टूट गए तो फिर   जुड़ना कठिन हो जाता है। अत: जीवन के संघर्ष में  स्वयं को बचाना पहला काम होता है और यही सफलता इंसान होने की पहचान है। जो टूट गया तो वह फिर लोगों की नजर में इंसान नहीं होता, कायर और कमजोर माना जाता है या दया या तिरस्कार का पात्र बन जाता है। सार यही कि जीवन में अपने-आप को सुदृढ़ बना के रखना चाहिए। कभी भी घबराकर नहीं बल्कि डटकर सामना करना चाहिए।

  - नरेन्द्र श्रीवास्तव

 गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

          सचमुच जीवन सरल नहीं होता संघर्ष से भरा होता है ।जीवन का हर पल संघर्ष करता रहता है चाहे जिस रूप में सामने खड़ा हो । जो इन परिस्थितियों को सहर्ष स्वीकार करता है उसके लिये जीना आसान हो जाता है वरना जीवन का बोझ बनकर आगे नहीं बढ़ने देता है । इंसान हर पल बिखरता है टूटता रहता है ।फिर हिम्मत कर आगे बढ़ता है।आँधी तूफ़ान खायी पहाड़ सब सामने रहता है । अगर जीना है तो हर परिस्थिति को अपने जीवन का हिस्सा बना ले और सामना करते रहे तो ज़िंदगी को ऊंचाइयों तक ले जाने में सफलता पा सकते हैं ।

- सुधा पाण्डेय 

        लंदन

         यह अटूट सत्य है कि जीवन कभी भी पूरी तरह सरल नहीं होता, जिंदगी में उतार चढ़ाव संभव है, देखा जाए संघर्ष, सुख, दुख और चुनौतियां जीवन में आती जाती हैं लेकिन हमको इन सभी को संघर्ष से जीतना होता है, जिंदगी के उतार चढ़ाव से तंग आकर पीछे मुड़ना कायरता है हमें जीवन की सच्चाई का सामना  धैर्य, सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प के साथ करना चाहिए तो आईये आज इसी पर चर्चा करते हैं कि जीवन कभी भी सरल नहीं होता जो टूट  जाए वह इंसान नहीं होता, मेरा मानना है कि  जीवन  में सफलता या विकास के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है जिससे इंसान में मजबूती आती है इसके साथ साथ कठिन समय में जो अनुभव मिलता है वोही हमें आत्मनिर्भर और मजबूत बनाता है क्योंकि जीवन को सरल बनाने के लिए हमें मानसिक रूप से जागरूक रहना पड़ता है, इसलिए इंसान को विपरीत परिस्थितियों में भी टूटना नहीं चाहिए हौंसला और आत्मविश्वास बनाए रखना ही सबसे बड़ी शक्ति है जबकि असफलताएं और दुख जीवन का  हिस्सा है जो हमें मजबूत बनाती हैं न कि हमारा अन्त करती हैं, यह अटूट सत्य है कि अंधेरी रात के बाद ही सबसे सुनहरी सुबह होती है इसलिए हमें हमेशा आगे की तरफ बढ़त रखनी चाहिए और उम्मीद कायम रखनी चाहिए चाहे हालात कैसे भी हों लेकिन इंसान का हौंसला कभी नहीं टूटना चाहिए, कहने का भाव।  हौंसला और आत्मविश्वास बनाये रखना चाहिए क्योंकि यही सबसे बड़ी शक्ति हैं जबकि असफलता और दुख जीवन का हिस्सा है जो हमें  मजबूत बनाती हैं न कि हमारा अन्त करती  हैं इसलिए जीवन को  आनंदमय भाव से ही जीना चाहिए, अन्त में यही कहुंगा कि जीवन की जटिलता ही उसका  सच है  यह उतार, चढ़ाव, सुख, दुख और लगातार मिलने वाली चुनौतियों का एक सुंदर सफर है और यह कभी भी सीधा  या सरल नहीं होता क्योंकि मुश्किलें ही हमें मजबूत बनाती हैं सिखाती हैं और अनुभव देती हैं और इनसे लड़ने से ही व्यक्ति महान बनता है, इसलिए जीवन का अर्थ या उदेश्य सरल होने से नहीं है बल्कि उसके संघर्षों को स्वीकार कर उसे सुंदर और अर्थपूर्ण बनाना है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -  जम्मू व कश्मीर

         जीवन चुनौतीपूर्ण होता है !बल्कि जो लोग चुनौतियों का सामना करते हैं और आगे बढ़ते हैं, वे इंसान होते हैं। बचपन मात पिता गुरु भाई सखा बहिन दिखाते हैं!सत्कर्मों से मंजिल तक पहुंचाते है अनुभव अनुमोदन की देती अग्नि परीक्षा है माँ की पाती अपार स्नेह आशीष दिया है ख़ुद करके देखो अलख जागती राह दिखाती है दिनचर्या महत्व बता समय के साथ चलती पिता कहते मैं समय हूँ झूठ फ़रेब समय कद्र करना। विषमीत ,दिग्भ्रमित ,भयभीत ना होना । जागरुक आत्मनिर्भर समय साथ बनाती है !जो टूट जाए वह इंसान नहीं होता ऐसा नहीं है उन्हें संघर्ष पूर्ण चुनौतियों का सामना करने केलिए सहनशील कर्तव्यनिष्ठ बनाना ज़रूरी होता है ।इलाक्ट्रानिक गैट्स इंटरनेट । संबंधों को जीना आना चाहिए  । ऊहापोह की स्थिति विषमीत ,दिग्भ्रमित ,भयभीत ना होना अंतर्द्वंद से  बचना सबसे जरुरी है निर्णय सोच समझ से लेना , कई बार ये आत्मघाती होती बच्चे अपना विस्वास खों माता पिता का विश्वास खों देते है अनुचित कदम उठा जान गवाँ देते है । जागरुक आत्मनिर्भर बनाने के साथ सहनशील कर्तव्यनिष्ठ बनाना ज़रूरी होता है इस तरह जीवन कभी सरल नही होता ।

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

     जीवन दर्शन एक पहली है, उतार-चढ़ाव के बीच सरलता के साथ जीवन यापन एकाग्रचित होकर करना चाहिए। जीवन कभी भी सरल नहीं होता, जो टूट जाए वह इंसान नहीं होता। वास्तविक पहचान यही है। सबको साथ लेकर चलने की कला होनी चाहिए, तभी हम तैरते हुए, अपनी मंजिल तक पहुंच जाते है। बहुत गम्भीरता और सामंजस्य के साथ टूटने से बचाना चाहिए, वही इंसान होता है, बहकाने वाले कई मिलते है, जोड़ने वाले बहुत ही कम.....।

-आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर" 

       बालाघाट - मध्यप्रदेश

    किसी कवि ने ठीक कहा है-- "दुनिया में हम आए हैं, तो जीना ही पड़ेगा। जीवन है अगर जहर, तो पीना ही पड़ेगा "।।बचपन से लेकर अंतिम समय तक सभी कार्य अवस्था अनुसार करना ही पड़ते हैं। विद्याअध्ययन ,जीविकोपार्जन और परिवार का भरण- पोषण करने के लिए तथा अपने नाम की पहचान बनाने के लिए मनुष्य को निरंतर अपने मन और तन से परिश्रम  तो करना ही पड़ता है । जीवन है तो सुख भी आते हैं दुख भी आते हैं। लेकिन समय का आकलन करते हुए धैर्य, अनुशासन, कर्मठता से जीवन को उपयोगी और सरल बनाया जा सकता है। कविवर मैथिलीशरण गुप्त ने भी कहा है-" यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो। समझो जिससे यह व्यर्थ ना हो।। कुछ तो उपयुक्त करो तन को । नर हो न निराश करो मन को।।" जो इंसान कर्म करते हुए टूट जाए और अंत में आत्महत्या कर ले ; तो वह इंसान नहीं है ,जानवर से भी बदतर  है। 84 लाख योनियों में भ्रमण करने के बाद  मनुष्य  का जन्म  मिलता है।वह भी यदि उसके कर्म अच्छे हैं तो उसे मनुष्य का जन्म मिलता है । देवता लोग भी मनुष्य के जन्म को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं ।अतः जीवन का महत्व समझना अति अनिवार्य है।

-  डॉ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

         इन पंक्तियों में जीवन का गहरा सार छिपा है। जीवन कभी सीधी, सरल नहीं होता—यह उतार-चढ़ाव, संघर्ष, पीड़ा और चुनौतियों से भरा होता है। हर व्यक्ति अपने हिस्से की कठिनाइयों से गुजरता है। यही कठिनाइयाँ हमें परखती हैं, और हमें मजबूत बनाती हैं,हमारे व्यक्तित्व को गढ़ती हैं।“जो टूट जाए वह इंसान नहीं होता”—इसका अर्थ यह नहीं कि इंसान को दर्द नहीं होता या वह कभी बिखरता नहीं। बल्कि इसका आशय यह है कि सच्चा इंसान वही है जो टूटकर भी खुद को फिर से जोड़ ले, जो गिरकर भी उठ खड़ा हो, जो हारकर भी उम्मीद का दामन न छोड़े। इंसान की असली पहचान उसकी मजबूती में नहीं, बल्कि उसकी टूटकर भी संभलने की क्षमता में होती है। जो विपरीत परिस्थितियों में भी बिखरे नहीं,जीवन की कठिनाइयाँ हमें यह सिखाती हैं कि धैर्य, साहस और आत्मविश्वास ही हमारे सबसे बड़े साथी हैं। जब सब कुछ हमारे खिलाफ होता है, तब भी अगर हम अपने भीतर की रोशनी को बुझने नहीं देते, तो वही हमें आगे बढ़ने की ताकत देती है। इसलिए, इन पंक्तियों का सार यही है कि

संघर्ष ही जीवन का सौंदर्य है,

और हिम्मत ही इंसान की असली पहचान।

जो हालात से हार मान ले, वह सिर्फ जीता है,

पर जो हालात से लड़कर आगे बढ़े—

वही सच में इंसान कहलाने के योग्य होता है। 

- अलका पांडेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

" मेरी दृष्टि में " जीवन में कोई किसी प्रकार का घमंड नहीं होना चाहिए । साधारण जीवन ही श्रेष्ठ जीवन की व्याख्या करता है। सकारात्मक जीवन से ही आगे बढ़ा जा सकता है। जो जीवन को श्रेष्ठतम प्रदान करता है। यही जीवन परमात्मा के नज़दीक ‌होता‌ है। बाकी जीवन तो जन्म मृत्यु के चक्र में फंसा रहता है। 

            - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)


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