डॉ. बिंदेश्वर पाठक स्मृति में चर्चा परिचर्चा

        जिंदगी का सफ़र संघर्ष से भरा होता है। सुबह अवश्य होती है परन्तु शाम का पता नहीं होता है। यही जिंदगी अनमोल रत्न की परिभाषा लिखतीं है। जहां सुबह भी होती है और रात भी होती है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
       जन्म और मृत्यु के बीच का कालखंड बहुत ही अनिश्चिताओं और विविधताओं से परिपूर्ण होता है। संक्षेप और निष्कर्ष के रूप में हम इसे उथल-पुथल लिए या संघर्षमय भी कह सकते हैं। जीवनकाल में कभी खुशी का दौर आता है तो कभी दुख का। कभी कोई मिलता है तो कभी कोई बिछड़ता भी जाता है। कभी कोई बीमारी घेर लेती है तो कभी हम बिल्कुल स्वस्थ   होते हैं। वास्तव में यही विविधता है और यही अनिश्चितता। कवियों ने जिंदगी के इन दोनों रूप को नया उपनाम दिया है। जो सुख-चैन वाला समय होता है उसे सुबह और जो दुख एवं परेशानियों वाला समय होता है, उसे रात की तरह माना है। इसे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सामाजिक सहमति भी मिली हुई है। इसलिए जब कभी कोई परेशानी या दुख में होता है तब यही कहकर समझाइश दी जाती है कि यह संकट भरी रात है और रात के बाद सुबह होती ही है। संक्षेप में कहा जाये या माना जावे तो जीवन का यही सत्य है,यही मर्म है और यही पक्ष है। जैसे सुबह,दोपहर,शाम, रात का क्रम सतत चलता रहता है, इसी तरह जिंदगी में सुख-दुख का आना-जाना लगा रहता है। बस,धैर्य और साहस के साथ हौसला बनाये रखने की आवश्यकता होती है। 

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

           जीवन एक निरंतर चलने वाली यात्रा है, जिसमें उजाले और अंधेरे दोनों का अपना-अपना महत्व है। जैसे हर दिन की शुरुआत एक सुंदर सुबह से होती है और अंत एक शांत रात में होता है, वैसे ही हर इंसान की जिंदगी में भी सुख-दुख, सफलता-असफलता, आशा-निराशा के पल आते-जाते रहते हैं। यही जीवन का संतुलन है, यही उसकी सच्चाई है।‌सुबह जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक है। यह आशा, उत्साह और ऊर्जा लेकर आती है। जब सूरज की पहली किरण धरती को स्पर्श करती है, तो ऐसा लगता है मानो हर चीज़ एक नई कहानी लिखने को तैयार है। इसी तरह इंसान के जीवन में भी ऐसे क्षण आते हैं जब सब कुछ नया-नया, ताजा और संभावनाओं से भरा होता है। ये वो समय होता है जब हम सपने देखते हैं, लक्ष्य बनाते हैं और उन्हें पाने के लिए पूरे जोश से आगे बढ़ते हैं। परंतु हर सुबह के बाद रात का आना भी निश्चित है। रात जीवन के उन क्षणों का प्रतीक है, जब हम थक जाते हैं, निराश हो जाते हैं या कठिनाइयों से घिर जाते हैं। अंधेरी रातें हमें यह सिखाती हैं कि हर संघर्ष के पीछे कोई न कोई सीख छुपी होती है। ये पल हमें धैर्य, संयम और आत्मचिंतन का अवसर देते हैं। रात भले ही अंधेरी हो, लेकिन वह स्थायी नहीं होती—उसके बाद फिर एक नई सुबह आती है। जीवन का वास्तविक सौंदर्य इसी चक्र में छिपा है। यदि केवल सुबह ही होती, तो हम उसकी महत्ता नहीं समझ पाते, और यदि केवल रात ही होती, तो जीवन निराशा में डूब जाता। सुख और दुख, दोनों मिलकर ही जीवन को पूर्ण बनाते हैं। जो व्यक्ति इस सत्य को स्वीकार कर लेता है, वह हर परिस्थिति में संतुलित और शांत रहना सीख जाता है। इसलिए, जब जीवन में उजाला हो तो उसे पूरी तरह जीना चाहिए, और जब अंधेरा हो तो धैर्य रखकर यह विश्वास बनाए रखना चाहिए कि यह भी बीत जाएगा। क्योंकि हर रात के बाद एक नई सुबह निश्चित है, और हर कठिनाई के बाद सफलता का उजाला अवश्य आता है।

- अलका पाण्डेय

 मुम्बई - महाराष्ट्र 

        जीवन मात्र रात और दिन जैसी घटनाओं का क्रम नहीं है, यह एक सतत संघर्ष, जागरूकता और आत्मनिर्माण की प्रक्रिया है। सुबह आशा का प्रतीक है, नई ऊर्जा, नए संकल्प और नए अवसरों का उद्घोष है। वहीं रात आत्ममंथन का समय है, जहाँ हम अपने कर्मों का मूल्यांकन करते हैं और स्वयं को और बेहतर बनाने का संकल्प लेते हैं। जो व्यक्ति हर सुबह को केवल एक और दिन नहीं, बल्कि एक नए अवसर के रूप में देखता है, वही अपने जीवन को उत्कृष्टता की ओर ले जाता है। और जो हर रात को निराशा नहीं, बल्कि सीख और सुधार का माध्यम मानता है, वही सच्चे अर्थों में प्रगति करता है। उल्लेखनीय है कि सकारात्मकता कोई परिस्थिति नहीं, बल्कि दृष्टिकोण है जिसमें अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दीपक उसे चुनौती दे सकता है। उसी प्रकार, कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी हों, दृढ़ संकल्प और सत्यनिष्ठ कर्म उन्हें परास्त कर सकते हैं। मेरे विचार में, जीवन की श्रेष्ठता इस बात में नहीं कि हमारे पास क्या है, बल्कि इस बात में है कि हम अपने पास उपलब्ध साधनों से क्या निर्माण करते हैं। संघर्ष हमें तोड़ने नहीं, बल्कि गढ़ने आते हैं। अतः हर सुबह को संकल्प और हर रात को आत्मचिंतन कर जीवन को उत्कृष्ट कर्मों की एक प्रेरणादायक गाथा बनाइए। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

हर ज़िंदगी की सुबह भी होती है और हर ज़िंदगी की रात भी होती है, इस बात का जीता- जागता  उदाहरण  हम लोगों ने 2020 में कोरोना काल में देखा जिसे अपनी जिंदगी की रात कह सकते है। पर आज जब वह समय बीत गया, तो जिंदगी की सुबह भी आ गई। सुख और दुख हमारे जीवन में आते -जाते रहते हैं,यही जीवन का सबसे सच्चा और सरल नियम है।  सुबह उम्मीदों का संदेश लेकर आती है।वहीं रात आत्ममंथन का अवसर देती है, जब हम दिनभर के अनुभवों को समझते हैं और अपनी गलतियों से सीखते हैं। सुबह हमें उत्साह और ऊर्जा देती है, तो रात हमें धैर्य और शांति का महत्व सिखाती है। जीवन में अगर केवल सुबह ही होती, तो शायद हम विश्राम का अर्थ नहीं समझ पाते, और अगर केवल रात होती, तो आशा की किरण कभी दिखाई नहीं देती। इस प्रकार, दोनों का संतुलन ही जीवन को पूर्ण बनाता है। हर कठिन रात के बाद एक नई सुबह जरूर आती है, जो यह संदेश देती है कि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, उजाला अपना रास्ता बना ही लेता है।

-  सीमा रानी                          

 पटना - बिहार 

            डाॅ. बिन्देश्वर पाठक की स्मृति में लिखी गई ये पंक्तियाँ जीवन के शाश्वत सत्य को बहुत सहजता से सामने रखती हैं—

“हर ज़िन्दगी की सुबह होती है,

हर ज़िन्दगी की रात भी होती है।”

इन दो पंक्तियों में ही जीवन का पूरा दर्शन समाहित है। “सुबह” यहाँ आशा, आरंभ, नवचेतना और संभावनाओं का प्रतीक है, जबकि “रात” अंत, विश्राम, संघर्षों के विराम और कभी-कभी विदाई का संकेत देती है। डॉ. बिन्देश्वर पाठक का जीवन भी इसी क्रम का एक प्रेरक उदाहरण रहा—उन्होंने समाज में स्वच्छता, मानव गरिमा और सामाजिक सुधार की “सुबह” जगाई, और अपने कर्मों से एक ऐसी रोशनी छोड़ी जो उनकी “रात” के बाद भी निरंतर प्रकाशित हो रही है। यह पंक्तियाँ हमें यह भी समझाती हैं कि जीवन में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं। कोई भी जीवन केवल उजाले या केवल अंधेरे का नहीं होता। महत्वपूर्ण यह है कि हम अपनी “सुबह” को सार्थक बनाएं, ताकि “रात” आने पर भी हमारे कार्य और विचार समाज में प्रकाश फैलाते रहें। डॉ. पाठक के संदर्भ में ये पंक्तियाँ और भी गहराई ग्रहण कर लेती हैं, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की हर सुबह को समाजसेवा के लिए समर्पित किया। उनका जीवन संदेश देता है कि व्यक्ति भले ही नश्वर हो, पर उसके द्वारा किए गए सत्कर्म अमर हो जाते हैं। अतः यह परिचर्चा हमें इस निष्कर्ष तक ले जाती है कि— जीवन का मूल्य उसकी लंबाई में नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता और समाज पर पड़े प्रभाव में निहित होता है।

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर -  राजस्थान

         घने अंधकार के बाद ही सबेरा होता हैं जो जिंदगी महत्ता बताती है ! जो हमें जीवन की द्वैतता को समझाती है।जो हमें जीवन की अनिश्चितता को समझाते हैं।जीवन में सुख और दुख की परिभाषा दिन और रात की तरह जीवन की वास्तविकता को समझाते हैं। जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव दोनों होते हैं, जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। जीवन को कैसे देखें?सकारात्मक दृष्टिकोण देखें, और हर स्थिति में अच्छाई ढूंढने की कोशिश करें। समय का महत्व समझ हर पल को जीने की कोशिश करते रहना है । आंतरिक शांति को ढूंढते है ! आने वाली पीढ़ियों के लिए कर्मठता का उदाहरण बने ! हमारे पूर्वज , ज्ञानी मानी बुद्धजीवी महिलाएँ पुरुष साधु महात्मा दिग्गज साहित्यकार उदाहरण प्रस्तुत करते कहते है सुबह होती है शाम होती जिंदगी यूँ हीं ना गूजरों अंधेरों को रोशनी का पता बता जाओं ! वरना जिंदगी में टाइगर माश्क लगा सभी जीते है ! वरना ज़िन्दगी की सुबह भी होती है उत्साह से कठिनाइयों का सामना करने । रोशनी का पता बताने के लिये डर जाते है ! अंधेरों में जिल्लते सहते रह जाते है! जिंदगी में काम कुछ ऐसा कर जाओ! सुबह शाम की तरह सुकून उसे भी हो जाए और हमे भी वरना जिंदगी सुबह होती है शाम होती जिंदगी यू ही तमाम होती है ! 

- अनिता शरद झा

रायपुर -छत्तीसगढ़ 

     जिंदगी की सुबह और रात पर शायरों कवियों ने खूब लिखा है लेकिन सच्चाई ये है इस विषय पर हर एक के विचारों में अतिशय भिन्नता है।" मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना" के अनुसार किसी के भी विचार सामान्यतः मेल नहीं खाते। वास्तव में यह विषय गूढ होने के साथ साथ विचारोत्तेजक भी है। आशावादी व्यक्ति को जीवन वरदानित प्रतीत होता है लेकिन जिंदगानी की कठिन सच्चाईयों से जूझ रहे इंसान के लिये यह जीवन अभिनंदनीय नहीं - - अभिशप्त होता है। आज की दौड़ती भागती दुनिया में कठपुतली सा जीवन बहुत कठिन हो गया है जिसकी डोर उपरवाले के हाथ में नहीं है बल्कि कलयुगी परिस्थितियों के साथ में है। सुबह के सूरज के साथ ही चिताओं का पुलिंदा सिर ढोते हुये व्यक्ति जीवन की दौड़ में शामिल हो जाता है। यहाँ तक कि तीन साल का छौना और पाँच साल का बच्चा भी किंडरगार्टन और स्कूलों की घुडदौड़ में दौड़ते दौड़ते बेजार हो जाता है। जरूरज है बड़े बदलावों की जहाँ दिन और रात दोनों ही सुहाने सुहावन हों। जिंदगी दौड़ेयन नहीं बल्कि एक विश्वास - - एक आशा  - - एक उम्मीद के साथ जीने का बहाना बने।जिंदगी की सुबह अपने साथ आशीष लेकर आये और रात आशीर्वाद के साथ गुजरे। सहज - - सरल  - - सापेक्ष - - समुन्नत - - सहजीवन ही   सच्चा जीवन हो।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र

        हर जिंदगी की सुबह होती है , व हर जिंदगी की रात भी होती है !! सरल दिखने वाले इस कथन मैं बहुत गहराई है !! इस कथन का यदि हम विश्लेषण करें , तो हम पाएंगे कि इसका अर्थ  है कि हर व्यक्ति की जिंदगी मैं एक काली रात होते है ऐबक उजला सवेरा होता है ! रात अर्थात मुसीबतें होती है और सवेरा अर्थात मुसीबतों का अंत !! जिंदगी में मुसीबतें आती हैं , व चली भी जाती हैं !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

        यह अटूट सत्य है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब क्यों न हों वो हमेशा के लिए नहीं रहती कहने का भाव हमें अंधेरी रात में भी आशा की किरण देखनी चाहिए क्योंकि हर रात के बाद नई सुबह होती है और हर सुबह जीवन का एक नया मौका देती है इसलिए मुश्किल समय में भी धैर्य रखना चाहिए, तो आईये आज की चर्चा इसी बात पर   करते हैं कि हर जिंदगी की सुबह होती है, हर जिंदगी की रात भी होती है, मेरा मानना है कि यह कथन जीवन के सत्य और आशावाद को दर्शाता है जैसे रात के बाद सुबह और दिन के बाद रात आना निश्चित है बैसे ही जीवन  में दुखों के बाद सुख और संघर्ष के बाद सफलता आना तय है और यही सच्चाई हमें धैर्य रखना हार न मानने और हर सुबह एक नई शुरुआत करने की प्रेरणा देती है,  कहने का भाव जिंदगी की नई सुबह उम्मीदों, ऊर्जा और सुनहरे सपनों के साथ आती है जबकि शाम तजुर्बों, सुकून और ढलते पलों का अहसास कराती है यही नहीं सुबह शर्त लेकर आती है, कि दिनभर मेहनत की  जाए और रात यह सिखाती है कि हमने जीवन से क्या सीखा,  कहने का मतलब  जिंदगी की सुबह नई उम्मीद, सकारात्मकता, उर्जा और कर्म की शुरुआत है जबकि रात संघर्षों के बाद शांति, आराम व आत्म चिंतन और फल मिलने न मिलने का समय है यह चक्र यही दर्शाता है कि मुश्किलें यानि रात स्थायी नहीं है उसके बाद खुशियों का सबेरा आना निश्चित है, अन्त में यही कहुंगा कि,  हर सुबह जीवन को एक नया मौका देती है लेकिन सुख, दुख दिन रात की तरह जीवन के अभिन्न अंग हैं तथा हर रात के बाद नई सुबह आने का मतलब यही है कि परिस्थितियां एक जैसी नहीं रहती अंधेरी रात में भी कभी न कभी आशा की किरण जरूर दिखती है, कितनी भी अंधेरी रात क्यों न हो पर सुबह नई उम्मीद जरूर लेकर आती है, इसलिए जीवन में सफलता और संतोष के लिए  मेहनत और आराम दोनों जरूरी हैं क्योंकि हर रात के बाद एक नई सुबह होती है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा 

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

             प्रत्येक मनुष्य जब जन्म लेता है तो जब तक वह जीवित रहता है प्रतिदिन सुबह का सूर्य देखता है हर रोज उसकी जिन्दगी की सुबह कितनी सुखद होती है जो उसकी नई उम्मीद ऊर्जा से भरपूर भविष्य की योजनाएं क्रियान्वयन एवं उसके निर्माण से जुड़ी आशावादी होती हैं। जब तक जीवन रहता है प्रत्येक दिन अगले दिन की सुबह के इंतजार में शयन भी करता है। कुछ भाग्यशाली ईश्वर से लंबी आयु का वरदान लेकर आते हैं जिसमें वह जीवन की चारों अवस्थाओं के सूर्योदय को सहर्ष देखते हैं। पर कुछ अल्पायु होते हैं और उनके जीवन की रात जल्दी हो जाती है। शरीर समाप्ति के  साथ-साथ सब कुछ समाप्त हो जाता है। मनुष्य क्या सभी सजीव प्राणी, पेड़- पौधे, जीव- जंतु दिन-रात के जीवन चक्र को झेलते हैं ।परिवर्तन प्रकृति का नियम है ।जो आया है , सो जाएगा। कुछ भी स्थिर नहीं है। जिंदगी में सुबह हुई है तो रात भी आएगी, यह निश्चित है। यह सच है--- "सुबह हुई शाम हुई ज़िंदगी तमाम हुई"।

 - डाॅ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

      कहते हैं 84 लाख योनियों में मानव भटकता रहता है।मुश्किल से मानव तन उपलब्ध होता है। प्रत्येक नव जीवन उसके लिए एक नई सुबह की तरह होता है जो आशा की किरणों के साथ उदय होता है। उसके द्वारा जीवन सुधारने का मौका मिलता है। हम सत्कार्य और परमार्थ के द्वारा अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं ताकि भव सागर के झमेले से मुक्ति मिले। मृत्यु जिंदगी की रात के समान होती है। जो निश्चित रूप से होना ही है। इसलिए उसकी आने के पूर्व ही सभी कार्य संपादित करने का प्रयास करें

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " जिंदगी प्रभु देता है। अंतिम सांस इंसान लेता है। फिर भी सारी उम्र हाय - हाय करता है। कहीं झूठ का साहरा लेता है। कहीं मार पीट करता है। फिर भी जिंदगी से बेखबर रहता है। वास्तव में जिंदगी कार्म का खेल है। ये कर्म हमारे होते हैं । जो वर्तमान में भाग्य के रूम में नज़र आते हैं।

             - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)




Comments

Popular posts from this blog

हिन्दी के प्रमुख लघुकथाकार ( ई - लघुकथा संकलन ) - सम्पादक : बीजेन्द्र जैमिनी

हिन्दी की प्रमुख महिला लघुकथाकार ( ई लघुकथा संकलन ) - सम्पादक : बीजेन्द्र जैमिनी

जीवन की प्रथम लघुकथा ( लघुकथा संकलन ) - सम्पादक : बीजेन्द्र जैमिनी