बलवंतराय मेहता स्मृति सम्मान - 2026

        समय हमेशा अनमोल होता है। समय का आदर करना सीखना चाहिए। तभी समय से कुछ प्राप्त कर सकते हैं। यही समय जीवन भर का चक्र बनता है। जो सत्य की व्याख्या करता है। सत्य से समय का खेल होता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
         अगर हम  सत्य के महत्व की बात करें तो सत्य से बढ़कर कुछ नहीं, यहाँ तक की ईश्वर भी सत्य के अधीन माने जाते हैं, देखा जाए सत्य व्यक्तिगत विकास और नैतिक जीवन का आधार है  तो आईये आज की चर्चा को आगे ले चलते हैं कि सत्य से बड़ा कुछ नहीं है, समय तो अनमोल होता है, मेरा मानना है कि जीवन में एक समय में एक काम के साथ सत्य के रास्ते पर चलना ही सबसे बड़ी बुदिमत्ता है क्योंकि सत्य ही ईश्वर और सर्वोच्च मुल्य है  सत्य ही समाज में विश्वास और स्थिरता लाता है इसके साथ साथ समय भी बहुत अनमोल वस्तु है समय को नष्ट करना स्वयं को नष्ट करने जैसा है क्योंकि समय जब गुजर जाता है  तो दोबारा वापस नहीं आता, इसलिए समय की कदर करना  ही बुद्धिमत्ता है वास्तव में सत्य और समय दोनों ही जीवन के सर्वोच्च मुल्य  हैं, सत्य तो विश्वास का अधार है जो हर युग में समान रहता है वहीं समय सबसे बलवान और निंरतर चलने वाली कड़ी है जो एक बीर बीत जाने पर वापस नहीं आता इसका सदुपयोग सफलता की कुन्जी है और इसकी राह कठिन तो है लेकिन इसकी राह पर चलने से आत्मिक संतोष मिलता है, सत्य तो विश्वास, ईमानदारी और संवेदनशीलता की नींव है, आखिरकार यही कहुंगा कि सत्य और समय जीवन के दो सबसे अमूल्य और शाश्वत तत्व हैं जिनसे बढ कर कुछ नहीं है समय जो कभी किसी की प्रतीक्षा नहीं करता और सबकी सही पहचान करा देता है तथा सत्य अस्थायी परेशानियों के बावजूद उजागर होकर रहता है और हमेशा इसकी जीत होती है कहने का भाव सत्य और समय दोनों का संगम हमें धैर्य, सही कर्म और संतोष के साथ जीवन जीने की राह दिखाता है इसलिए सत्य से बड़ा कुछ नहीं और समय से अनमोल कुछ नहीं होता इसलिए सृष्टि पर आकर हमें दोनों की कदर करनी चाहिए ताकि हम अपनी जिंदगी के हर पल का दृश्य सुंदर और सुशील दिखने लगे जिससे हर प्राणी  इसी सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करे। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

     "मनुज बली नहीं होत है समय होत बलवान " बचपन से यह उक्ति सुनते आ रहे हैं लेकिन क्या कभी मनन किया है इसहपर। समय की सीमा नहीं होते। समय को मापने की कोई मशीन ईजाद नहीं हुई है आजतक। हजारों हजार घडियां दिन रात की गणना क सकती है लेकिन समय की सुई को आज तक कोई नहीं पकड़ पाया है। दिन निकलता है रात होती है उम्र यूँ हीं तमाम होती है । कवियों और शायरों की पसंदीदा पंक्तियां होती हैं लेकिन ईश्वर की बनाई इ. सृष्टि में समय का पंछी कोई नहीं पकड़ पाया है। हर एक का अपनी समय होता है। किसी का समय दूसरे के समय से भिन्न होता है। किसी के लिये आज अच्छा समय है किसी के लिये आनेवाला समय अच्छा होगा। युगों-युगों से धरती अपनी धुरी पर घूर रही है। लेकिन समय को नहीं थाम सकीं युगधाराएं। जररत है कि स्वयं को जाने परखें समय के साथ चलें - - आप पायेंगे कि - - "जब नीके दिन आयेंगे बनत न लगिहैं देर"

- हेमलता मिश्र मानवी

 नागपुर - महाराष्ट्र 

          सत्य से बड़ा कोई नहीं, क्योंकि सत्य ही शिव है,शिव ही सुन्दर है इसलिए सत्यं शिवम् सुंदरम् कहा गया है। बिना शिव के कुछ नहीं होता।शिव ही सत्य होता है। शिव के बिना जीव शव हो जाता है। यह बात सत्य है और सत्य सदैव अनमोल होता है। इसी के साथ समय भी वास्तव में अनमोल होता है कितनी भी धन दौलत, संसार की कोई भी वस्तु समय से बढ़कर नहीं है,इसे खरीदा नहीं जा सकता। कहते हैं गया समय वापस नहीं आता। समय और सत्य हमेशा अनमोल हैं, इनसे बढ़कर कुछ नहीं होता इसलिए सत्य से  विमुख हुए बिना कभी भी समय की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। सत्य के साथ समय पालन से सभी कुछ प्राप्त किया जा सकता है।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

       मनुष्य के जीवन में दो तत्व सबसे अधिक प्रभावशाली हैं,  वे हैं—सत्य और समय। सत्य वह आधार है जिस पर व्यक्तित्व की विश्वसनीयता खड़ी होती है, और समय वह धुरी है जिस पर जीवन का संपूर्ण चक्र घूमता है। सत्य केवल नैतिक मूल्य नहीं, बल्कि अस्तित्व की शक्ति है। असत्य क्षणिक लाभ दे सकता है, परंतु स्थायी सम्मान केवल सत्य से ही मिलता है। इतिहास साक्षी है कि जिसने सत्य का साथ दिया, अंततः वही विजयी हुआ। सत्य आत्मबल देता है, मन को निर्भय बनाता है और व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाता है। सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, परंतु यही मार्ग स्थायी और उज्ज्वल है। सत्य हमें अपने अंतरात्मा के निकट ले जाता है, जहाँ अपराधबोध या भय का स्थान नहीं होता। समय सबसे बड़ा शिक्षक है। यह न रुकता है, न लौटता है। धन, पद, प्रतिष्ठा सब पुनः प्राप्त हो सकते हैं, पर बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए कहा गया है कि समय का सदुपयोग ही जीवन की सफलता का मूल मंत्र है। समय हमें सिखाता है कि हर क्षण का मूल्य समझें, क्योंकि यही क्षण भविष्य का निर्माण करते हैं। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, समय भी उसे सम्मानित करता है। सत्य और समय का गहरा संबंध है। समय सत्य को उजागर कर देता है। चाहे असत्य कितनी भी परतों में छिपा हो, समय के साथ उसका पर्दाफाश हो जाता है। इसी प्रकार, सत्य के साथ किया गया कार्य समय के साथ और अधिक प्रतिष्ठित होता जाता है।सत्य जीवन की दिशा है, और समय उसकी गति। यदि दिशा सही हो और गति संतुलित, तो लक्ष्य अवश्य प्राप्त होता है।अतः कहा जा सकता है कि सत्य जीवन का सर्वोच्च मूल्य है और समय उसका सबसे अनमोल संसाधन। जो व्यक्ति सत्य को आधार और समय को साधन बना लेता है, उसका जीवन सार्थक और सफल बन जाता है।सत्य हमें ऊँचा उठाता है, और समय हमें आगे बढ़ाता है। दोनों का सम्मान ही जीवन की सच्ची साधना है। 

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर - राजस्थान

      इस दुनिया में सत्य से बड़ा कुछ भी नहीं है. और सबसे बड़ा सत्य है मृत्यु जो होना ही है. इस दुनिया से एक दिन सबका नामोनिशान मीट जाएगा. सब यहाँ से चले जायेंगे. इससे बड़ा सत्य और कुछ है ही नहीं. आदमी का सबकुछ यही रह जाएगा. सारी दुनिया की दौलत देने पर भी कोई इस सत्य को बदल नहीं सकता है. यहां तक कि सृष्टि के रचयिता भगवान भी नही । समय तो बड़ा अनमोल होता है. क्योंकि जो समय बीत जाता है वह फिर नहीं आता, चाहे कोई लाख कोशिश कर ले. न कोई मृत्यु टाल सकता है न कोइ समय को रोक सकता है. इसलिए इस मानव जीवन का भरपूर आनंद लेना चाहिए. समय का भरपूर सदुपयोग करना चाहिए. जीवन में सब कुछ पा सकते हैं पर बीता समय नहीं पा सकते हैं. समय बड़ा अनमोल है यही सत्य है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - प. बंगाल 

     कहा गया है " सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। " सत्य की यह खूबी है कि उसे न कुछ छिपाने की जरूरत पड़ती है, न ही कुछ अतिरिक्त कहने-सुनने की। न जोड़ और न घटाना, जो है,जैसा है, वही  सब कुछ है। शांत, धैर्य और साहस लिए। मन ही मन मुस्कुराते हुए, प्रतीक्षारत। सत्य का विरोधी  असत्य यानी झूठ है। जिसे मेहनत करना पड़ती है। चीखना पड़ता है। बचने के लिए लबादा ओढ़ना पड़ता है। समर्थक जुटाने पड़ते हैं।... देर भले ही हो, पराजित भी होना ही पड़ता है। इसलिए यह कि सत्य से बड़ा कुछ नहीं है। बाकी सब बौने हैं। दूसरा समय है जो अनमोल है। समय की कीमत वे आँक सकते हैं जिन्होंने समय की कद्र की है और वे भी जिन्होंने समय की कद्र नहीं की और वे तो और अच्छी तरह समय की कीमत जानते हैं जो एक मिनट से, एक नंबर से चूके हैं।  समय अनमोल है, वह इसलिए भी समय पर जो हो जाता है, उसकी महक सदैव बनी रहती है अगर समय चूकता है, उसकी कसक भी जीवन पर्यन्त रहती है। कहा भी जाता है," समय चूक फिर का पछताने। " सार यही कि समय अनमोल है, उसकी कीमत जाने, जो अभी है , वही हाथ में है, वही साथ में है। 

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

       यह शत प्रतिशत सच है की सत्य से बड़ा कुछ नहीं है। अतः ईश्वर सबसे बड़ा सत्य है ।ईश्वर ने संसार बनाया और यही संदेश दिया जीवन में सत्य के मार्ग पर चलो। यह सत्य मात्र बोलने से ही सत्य नहीं है बल्कि हमारे अंतःकरण में बैठ जाए की हर परिस्थिति हर समय पर जो भी मैं कुछ बोलूं या करूं वह सत्य हो, सत्य का मेरा व्यवहार हो। अतः हमारे आचरण व्यवहार में दूसरे को भी इस सत्य का दर्शन हो ।माना सत्य आसान नहीं है लेकिन हर स्थिति में अपने आप को सत्य के पक्ष में खड़ा रखना ही सत्य की पूजा है। श्री राम का जीवन सत्य का प्रतीक रहा भले ही बनवास के समय में विचलित परिस्थितियां थीं पर विषम परिस्थितियों एवम कठिन समय के दौर में भी उन्होंने सत्य को नहीं छोड़ा ।अंततः समय बढ़ता रहा पर वह विजय हुए । समय वास्तव में अनमोल और अमूल्य होता है। सफलता असफलता समय के  उपयोग पर बहुत निर्भर रहती है अत: बुरे समय को जीवन की प्रगति पथ में बाधक न माने बल्कि विवेक से जीवन निर्वाह करें यही सत्य है और समय के मूल्य की पहचान है।

- डाॅ.रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

         सत्य इस ब्रह्मांड का सबसे शुद्ध, सबसे शक्तिशाली और सबसे स्थायी तत्व है। क्योंकि सत्य ही वह आधार है जिस पर न्याय, नैतिकता, विश्वास और मानव गरिमा की संपूर्ण संरचना स्थापित होती है। सत्य किसी व्यक्ति, संस्था या परिस्थिति पर निर्भर नहीं होता, बल्कि यह स्वयं में पूर्ण, स्वतंत्र और अटल होता है; समय उसकी परीक्षा अवश्य लेता है। परन्तु अन्ततः समय स्वयं सत्य का साक्षी बनकर उसे प्रमाणित करता है। असत्य प्रारम्भ में आकर्षक और लाभकारी प्रतीत हो सकता है, वह भ्रम और अन्याय के माध्यम से कुछ समय के लिए वास्तविकता को ढक भी सकता है, कष्ट भी दे सकता है, परंतु उसकी नींव खोखली होती है और समय के प्रवाह के साथ उसका पतन निश्चित होता है, जबकि सत्य धैर्य, संयम और आत्मबल के साथ धीरे-धीरे उजागर होकर अपनी विजय सुनिश्चित करता है। इसी प्रकार समय जीवन की सबसे अनमोल और अपरिवर्तनीय संपत्ति है। क्योंकि धन, पद, प्रतिष्ठा और अवसर पुनः प्राप्त किए जा सकते हैं, परंतु व्यतीत हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता है। उल्लेखनीय है कि समय ही वह शक्ति है जो व्यक्ति के चरित्र, उसके कर्म और उसकी निष्ठा को परखता है तथा उसे या तो महानता की ऊँचाइयों तक ले जाता है या फिर उपेक्षा के अंधकार में छोड़ देता है। यह भी वर्णननीय है कि जो व्यक्ति सत्य को अपना सिद्धान्त और समय को अपना अनुशासन बना लेता है, वह परिस्थितियों से विचलित नहीं होता है। वह अन्याय के सामने  भी झुकता नहीं है और माननीय न्यायालय में न्यायाधीशों के समक्ष भी डट जाता है। वह अपने जीवन को उद्देश्यपूर्ण, सम्मानित और प्रेरणादायक बना देता है। सत्य व्यक्ति को आंतरिक शांति, नैतिक साहस और आत्मसम्मान प्रदान करता है, जबकि समय का सम्मान उसे अनुशासित, परिपक्व और दूरदर्शी बनाता है। सत्य और समय का यह समन्वय ही जीवन की वास्तविक सफलता का आधार है। क्योंकि सत्य व्यक्ति की आत्मा को प्रकाश देता है और समय उसके जीवन को दिशा देता है, जो व्यक्ति इन दोनों का सम्मान करता है, वही वास्तविक अर्थों में स्वतंत्र, जागरूक, जिम्मेदार और महान व्यक्तित्व का निर्माण करता है, और वही समाज, राष्ट्र तथा मानवता के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर इतिहास में सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाता है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

     जब तक मुख से सत्यता न निकले तब तक काम हो ही नहीं सकता है। हम सत्य और असत्य,सच और झूठ के सायें में विचरण करता हुआ, चलते जाता है। सत्य से बड़ा कुछ नहीं है, समय तो अनमोल होता है। हकीकत ही है। न्यायालय में देख लीजिए सत्य और असत्य की परिभाषित करते जीता जागता उदाहरण प्रस्तुत होता है.....।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर" 

      बालाघाट - मध्यप्रदेश

" मेरी दृष्टि में " सत्य से ऊपर कुछ नहीं है। समय आने पर अपने आप सब कुछ बोलता है। समय किसी का इंतजार नहीं करता है। बल्कि समय इंतजार करवाया करता है। और यही सत्य है। समय - समय पर सत्य की ताकत देखने को मिलती है। जिससे समय अनमोल स्पष्ट होता है।

             - बीजेन्द्र जैमिनी 

         (संचालन व संपादन)

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