पूजा अनिल से साक्षात्कार
जन्मतिथि : 12 अक्टूबर 1972
जन्म स्थान : उदयपुर - राजस्थान
शिक्षा : प्राणी विज्ञान में मास्टर डिग्री
लेखन - हिंदी में विविध विधाओं में कहानी, लघुकथा, लम्बी कहानी, कविता, गीत तथा आलेख इत्यादि में रचना कार्य करती हैं।
सम्प्रति : 1999 से मेड्रिड, स्पेन में निवासरत हैं। पिछले - एक दशक से स्पेन की राजधानी मद्रिद में हिंदी की कक्षा चलाती हैं| इन्होंने विदेशी विद्यार्थियों के लिए हिंदी सीखने के रुचिकर नए तरीके बनाये हैं तथा भारत से बाहर हिंदी को प्रतिष्ठा दिलाने में सहयोग करती है।
विशेष : -
- इनकी कहानियाँ, कवितायें एवं आलेख भारत के कई प्रसिद्द पत्र पत्रिकाओं (पाखी, मधुराक्षर, कादम्बिनी, नई दुनिया, अनुभूति, सेतु, उर्वशी इत्यादि) में प्रकाशित हो चुके हैं |
- वे हिंदी एवं स्पेनिश दोनों ही भाषाओँ में कवितायें लिखती हैं और परस्पर अनुवाद भी करती हैं | इनके द्वारा भारतीय एवं स्पेनिश कवियों की अनुदित कविताएँ एक संग्रह में प्रकाशित करने की परियोजना विचाराधीन है।
- साल 2019 मे रविंद्रनाथ टैगोर विश्वद्यालय द्वारा प्रकाशित ''कथादेश'' संग्रह में सम्पूर्ण देश की 650 प्रतिनिधि कहानियों के प्रकाशन के तहत चर्चित कहानी ''भीतरी तहों में'' प्रकाशित।
- ''समकालीन महिला साहित्यकार'' साझा संग्रह पुस्तक में एक कविता प्रकाशित।
- RJ27 प्रोडक्शन की शॉर्ट फिल्म ''द लास्ट केस'' के लिए प्रसिद्द गीत ''सपनों वाली परी'' लिखा। यह गीत यहाँ सुन सकते हैं https://www.youtube.com/watch?v=qVZTXHKJ95w
- 14 सितम्बर 2021 को मैड्रिड स्थित भारतीय दूतावास के आग्रह पर ऑनलाइन हिंदी दिवस कार्यक्रम की रूप रेखा बनाई और संचालित किया, जिसमें स्पेनिश छात्रों द्वारा हिंदी काव्य पाठ किया गया। इसके अलावा साल
- 2020 तथा 2021 में अनेकानेक ऑनलाइन हिंदी वेबिनार और गतिविधियों मे सम्मिलित हुई ।
- इंटरनेट रेडियो साईट “रेडियो प्लेबैकइंडिया” पर हिंदी उर्दू गीत संगीत के कार्यक्रम ''महफ़िल ए कहकशां'' का दो वर्ष तक अपनी आवाज़ में संचालन किया। इसी साईट पर अनेक साहित्यिक कथा कहानियों को अपनी आवाज़ भी देती रही हैं | यहीं पर आजकल काव्य तरंग कार्यक्रम संचालित करती हैं, जो सभी प्रकार की गध्य विधा को आवाज़ रूप में प्रोत्साहित करने हेतु बनाया गया है। इसके अलावा यू ट्यूब पर अपने चैनल में अनेकों रचनाकारों की कविताओं को स्वर दिया है।
- ब्लॉग - poojanil.blogspot.com
पता - 28031, मद्रिद - स्पेन
प्रश्न न.1 - आपने किस उम्र से लिखना आरंभ किया और प्रेरणा का स्रोत क्या है ?
उत्तर - कहने को तो मैं बचपन से ही लिखती थी, माँ और पिता के प्रोत्साहन से पत्राचार के रूप में मैंने 4 वर्ष की उम्र से अपने ननिहाल में पत्र लिखना शुरू किया था। मेरे द्वारा लिखे पत्र सभी के द्वारा बड़े सराहे जाते थे और हर बार अधिक से अधिक पत्र लिखने की मांग आती थी। किन्तु साहित्यिक रचना के रूप में मैंने 13 वर्ष की उम्र से लिखना प्रारम्भ किया जब मैंने अपनी माँ के लिए एक पूरी गीत जैसी कविता लिखी जिसमें मुखड़े के साथ दो अन्तरे भी थे। उस समय माँ की लम्बे समय तक अनुपस्थिति मेरी प्रेरणा बनी कविता लिखने के लिए। मैं, लेखन हेतु प्रेरणा स्त्रोत मेरे घर में उपस्थित अगणित पुस्तकों को भी मानती हूँ, जो मेरे पिताजी लाते थे। वे स्वयं भी बहुत पुस्तकें पढ़ते थे और साहित्य पढ़ने हेतु हमें भी प्रोत्साहित करते थे।
प्रश्न न. 2 - आप की पहली रचना कब और कैसे प्रकाशित या प्रसारित हुई है ?
उत्तर - अब ठीक ठीक याद नहीं, लेकिन सेकेंडरी स्कूल में मैंने एक कहानी लिखी थी, जो मेरी अध्यापिका को बेहद पसंद आई थी, और संभवतः वह कहानी हमारे स्कूल की वार्षिक पुस्तक में छपी थी। जो बिलकुल सही मेरी स्मृति में है, वो मेरी पहली रचना साल 2008 में हिन्द युग्म नाम की ऑनलाइन मैगज़ीन में प्रकाशित हुई थी। ऑनलाइन पत्रिका हिन्द युग्म द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता में अपनी कविता भेजी थी मैंने, जो की तीसरे स्थान पर पुरस्कृत की गई थी। और पत्रिका के वेब पेज पर प्रकाशित प्रसारित की गई थी ।
प्रश्न न. 3 - आप किन-किन विधाओं में लिखते हैं और सहज रूप से सबसे अधिक किस विधा में लिखना पसंद करते हैं ?
उत्तर - मैं मुख्यतः कहानी, कविता, पत्र - लेखन तथा आलेख लिखती हूँ। और ये सभी विधाएँ मुझे बेहद प्रिय हैं। कहानी कहना मैं समझती हूँ कि मुझे सबसे सहज लगता है, यहां तक की कई बार मेरी कविता भी कहानी कहती हुई होती हैं। मेरी कहानियाँ बहुधा पूर्णतः काल्पनिक अथवा यदा कदा मेरे आस पास के किसी चरित्र को लेकर बनी हुई हो सकती हैं।
प्रश्न न. 4 - आप साहित्य के माध्यम से समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
उत्तर - साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है, किन्तु मैं यह मानती हूँ कि समाज के साथ ही साथ साहित्य एक लेखक के मन का भी दर्पण होता है, जिसमें समाज को या उसके पर्यावरण को लेकर लेखक के अपने विचार भी प्रतिबिंबित होते हुए स्पष्टतः अनुभव होते हैं। मैं चाहती हूँ कि पाठक भी लेखक के उस अनुभव तक पहुंचे तथा एक संवेदनशील समाज का निर्माण करने में सहायता हो। मैं जन जन में करुणा तथा प्रेम की भावना का प्रचार करना चाहती हूँ। प्रत्येक व्यक्ति के प्रति समभाव एवं सद्भावना की अनुभूति का सन्देश हर जन तक पहुँचाना चाहती हूँ। एक दूसरे के प्रति सहृदयता का सन्देश देना चाहती हूँ। विश्व शांति एवं विश्व कल्याण की भावना का संचार करना चाहती हूँ।
प्रश्न न. 5 - वर्तमान साहित्य में आप के पसंदीदा लेखक या लेखिका की कौन सी पुस्तक है ?
उत्तर - वर्तमान साहित्य में मुझे बहुत से लेखक लेखिकाएं पसंद हैं। विनोद कुमार शुक्ल, मनीषा कुलश्रेष्ठ, दिव्या माथुर, दिव्य प्रकाश दुबे, गीत चतुर्वेदी, पंकज सुबीर, सुशोभित शक्तावत, अनुराग शर्मा, तेजी ग्रोवर, रश्मि रविजा, वंदना अवस्थी दुबे इत्यादि मेरे पसंदीदा लेखकों में हैं। इनके द्वारा लिखी गई अनेक रचनाएँ तथा पुस्तकें मैंने पढ़ीं हैं। इनकी कुछ पुस्तकें जो मुझे पसंद हैं, वे हैं; दिव्या प्रकाश दुबे की अक्टूबर जंक्शन, गीत चतुर्वेदी की पिंक स्लिप डैडी एवं टेबल लैंप, वंदना अवस्थी दुबे की अटकन चटकन, पंकज सुबीर की अकाल में उत्सव, अनुराग शर्मा की अनुरागी मन, तथा रश्मि रविजा की कांच के शामियाने।
प्रश्न न. 6 - क्या आपको आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रसारित होने का अवसर मिला है ? ये अनुभव कैसा रहा है ?
उत्तर - जी नहीं, मुझे ऐसा कोई अवसर नहीं मिला है। मैं स्वयं एक ऑनलाइन पॉडकास्ट ग्रुप से जुड़ी हुई हूँ, जहाँ हमने अनेक किस्म के पॉडकास्ट बनाये हैं और वह अनुभव बेहद सुखद रहा है।
प्रश्न न. 7 - आप वर्तमान में कवि सम्मेलनों को कितना प्रासंगिक मानते हैं और क्यों?
उत्तर - भूतकाल में कई देशों में कवियों की रची कविता के द्वारा क्रांति लाई गई और कविता के जरिये सम्पूर्ण देश में बदलाव लाये गए। चाहे कोई भी युग हो, निःसंदेह, देश - समाज में व्याप्त अच्छाई अथवा बुराई दर्शाने हेतु कविता एक बेहद कारगर हथियार है। कवि सम्मेलन होंगे तो अधिक लोगों तक कविता पहुंचेगी। मैं समझती हूँ कि कवि सम्मेलन कविता लिखने वालों के लिए भी एक आवश्यक मंच है जहाँ पर न केवल कवियों को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि उन्हें अपनी कलम को संवारने - निखारने का एक माध्यम भी मिलता है, इस कारण मैं समझती हूँ कि आज की तारीख में भी कवि सम्मेलन बेहद प्रासंगिक हैं तथा समय समय पर आयोजित किये जाने चाहिए।
प्रश्न न. 8 - आपकी नज़र में साहित्य क्या है तथा फेसबुक के साहित्य को किस दृष्टि से देखते हैं?
उत्तर - साहित्य वह है जो पीढ़ी दर पीढ़ी पढ़ा जाता रहे मगर कभी भी अशक्त अथवा बूढ़ा न हो। उस पर समय की छाप अवश्य हो किन्तु जब भी, जिस भी पीढ़ी के लोग उसे पढ़ें, तो उस लेखन के साथ उनका एक तारतम्य स्थापित हो जाए। साहित्य वह है जो सही और गलत के आईने तो आपके सामने प्रस्तुत कर सके, मगर स्वयं आपके लिए सही या गलत का कोई चुनाव न करे। साहित्य वह है जो एक संस्कृति को दूसरी संस्कृति से बेहद कोमलता से पहचान करवाए। साहित्य वह है जो आपको अपनी संस्कृति तथा अस्मिता की रक्षा करने के लिए तत्पर करे।
फेसबुक साहित्य में कोई बुराई नहीं मानती मैं। सब कुछ बेहद सुन्दर लिखा जाए, ऐसा कत्तई संभव नहीं। जैसे सभी फ़िल्में हिट नहीं होतीं, मगर फिर भी रोज़ सैंकड़ों फ़िल्में बनती हैं, प्रदर्शित होती हैं, उसी तरह सब कुछ लिखा हुआ भी अच्छा लिखा हुआ हो, यह कदापि आवश्यक नहीं। दूसरी तरफ, लिखना यदि किसी को संतुष्ट करता है तो अवश्य लिखा जाना चाहिए, चाहे कोई पढ़े या न पढ़े। कभी कभी लोग एक दूसरे को लिखते देख कर प्रेरित हो कर लिखने लगते हैं, और उनमें से ही आगे चल कर कोई कोई व्यक्ति अभ्यास करते करते बेहद बढ़िया लिखने लग जाते हैं। अतः लिखने वालों को मैं यह कहना चाहूंगी कि लिखने से पहले पढ़ना सीखें, जो प्रसिद्द लेखक हैं, उन्हें बार बार पढ़ें, तब अपने लेखन को जांचते हुए स्वयं लिखने की पहल करें। हाँ, यह स्वतंत्रता तो पढ़ने वालों को है ही कि पाठक अपने आप तय करें कि उन्हें क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है।
प्रश्न न.9 - वर्तमान साहित्य के क्षेत्र में मिलने वाले सरकारी व गैर सरकारी पुरस्कारों की क्या स्थिति है ?
उत्तर - क्षमा करें, इस बारे में मैंने कभी ध्यान नहीं दिया, मुझे कुछ ज्ञात नहीं है, अतः मैं इस विषय पर कुछ कह पाने में असमर्थ हूँ।
प्रश्न न. 10 - क्या आप अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटना या संस्मरण का उल्लेख करेगें ?
उत्तर - मेरे जीवन की एक बेहद अद्भुत घटना है मेरे स्वप्न। विश्व में घटने वाली घटनाओं का आश्चर्यजनक तरीके से मुझे पहले ही आभास हो जाता है। संभावित दुर्घटनाएं मुझे स्वप्न के जरिये पहले ही दिख जाती हैं। इस से पहले मैंने किसी सार्वजानिक मंच पर इस घटना का ज़िक्र नहीं किया है। हाँ, मेरे परिवारजन एवं कई दोस्त जाने हैं इस बारे में। मैंने अपनी एक पूरी कहानी सपने में देखे गए दृश्यों तथा वास्तविकता में घट रही घटनाओं के मिश्रण के आधार पर बुनी है। मेरे पास एक डायरी है, जिसमें मेरे कई स्वप्न दर्ज हैं, जो पूरी पूरी फ़िल्मी कहानी से प्रतीत होते हैं। और उनमें से कई सांकेतिक रूप में देखे गए स्वप्न बाद में सच हुए हैं।
प्रश्न न. 11 - आपके लेखन में, आपके परिवार की क्या भूमिका है ?
उत्तर - परिवार का सहयोग ही मेरे लेखन का आधार मानती हूँ मैं। मेरी रचनाओं में भी परिवार के सदस्य उपस्थित होते हैं, वो इसी कारण कि मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण है परिवार का साथ। लिखने के लिए आपको एक अलग किस्म का शांत वातावरण दरकार होता है, यदि परिवार में बहुत शोर होता रहे तो आप कभी लिख ही न पाएं! मेरी माँ को मेरा लिखा हुआ बहुत पसंद आता था और वे बड़े गर्व से सभी को मेरा लिखा हुआ दिखातीं थीं। मेरे पति मेरी रचनाओं के पहले श्रोता होते हैं, मेरी अधिकतर रचनाएँ प्रकाशित होने से पूर्व मैं स्वयं उन्हें पढ़कर सुनाती हूँ और उसे बेहतर करने के लिए उनकी राय लेती हूँ। मेरी बहुत सी कहानियां रात में नींद में मुझे जगा कर अपने आप को लिखवाती हैं, मेरे पति साक्षी रहे हैं उन पलों के जब आधी रात में अचानक बत्ती जलाकर उठ कर लिखने लगती हूँ। मैं आभारी हूँ अपने परिवार की, जिसके साथ और सहयोग की वजह से मैं कुछ लिख पाई।




बहुत अच्छा और सच्चे शब्दों में साहित्य, उसकी भूमिका, अपनी भूमिका और प्रेरणा को अंकित किया है पूजा। "साहित्य कभी बूढ़ा न हो" बहुत अच्छी बात कही है।
ReplyDeleteयही वह आईना है जो उस काल के समाज का स्वरूप दिखाता है।
बहुत - बहुत बधाई और शुभकामनाएं ...
हार्दिक आभार
Deleteवाह, पढ़कर आनन्द आगया. गर्व और स्नेह तो है ही.
ReplyDeleteहार्दिक आभार
Deleteबहुत बढ़िया पूजा दी। आप कहती रहें हम सुनते रहे, आप लिखती रहें हम पढ़ते रहें।आप दुनिया में सितारे सी चमकती रहें।
ReplyDeleteहार्दिक आभार
Deleteवाह इस साक्षात्कार के माध्यम से एक अच्छे मित्र को जानने का अवसर मिला अत्यंत हर्ष और आत्मीयता की अनुभूति हुई
ReplyDeleteआभार