लता तेजेश्वर ' रेणुका ' से साक्षात्कार

जन्म - 28 मार्च , परलाखेमुंडी -ओडिशा
पिता : स्व गोलती शाम्भूमुर्ती आचारी
माता : श्रीमती लक्ष्मीबाई आचारी
मातृभाषा: तेलुगु
शिक्षा : डिग्री, ओड़िया , अंग्रेजी व हिंदी

विधाएँ : कविता, संस्मरण, लघुकथा, कहानी, उपन्यास, समीक्षा, आलेख आदि  4भाषाओं में सृजन

प्रकाशित पुस्तकें : -

1.मैं साक्षी इस धरती की, काव्यसंग्रह
2. हवेली, उपन्यास
3. The waves of Life, अंग्रेजी में काव्य और कहानी संग्रह
4. चाँदनी रात में तुम, काव्यसंग्रह
5. सैलाब, उपन्यास
6. भावनाएँ महकतीं हैं, काव्यसंग्रह
7. सुनो हे भागीरथी, काव्यसंग्रह
8. लहराता चाँद, उपन्यास

संपादन : -

1.सीप के मोती (21श्रेष्ठ रचनाकारों का काव्य संकलन),
2.गुलिस्ताँ (25रचनाकारों की कविताएं 21भाषाओं में संकलित)

प्रमुख सम्मान :-

-  2 राष्ट्र स्तरीय सम्मान, और
-  रीडर्स चॉइस अवार्ड,
-  विद्योत्तमा सम्मान ,
-  नारी गौरत सम्मान,
-  बहुभाषी लेखिका सम्मान,
-  महादेवी वर्मा सम्मान,
                सहित कुल 15सम्मानों से सम्मनित।

विशेष : -

-  राष्ट्रीय और विश्व स्तरीय सम्मेलन भूटान और मॉरीशस के 11वी विश्व हिंदी साहित्य सम्मेलन में भागीदारी
- 'विविध भारतीय भाषा संस्कृति संगम' न्यू पनवेल का संस्थापिक और अध्यक्षा जक भारतीय भाषाओं के उत्थान में कार्यरत है।
- 6संकलनों में संकलित, इसके अलावा करीब 50विख्यात पत्र, पत्रिकाओं में और अखबारों, ब्लॉग व अंतर्जाल में प्रकाशित
-  उपन्यास लहराता चाँद मातृभारती पर ऑनलाइन सीरियल तहत प्रकाशित।
-  आकशवाणी, राजस्थान रेडियो, कई बाहर के और मेरे खुदके यू ट्यूब चैनल और ब्लॉग साहित्य संकल्प पर भी रचनाएँ और संस्था के कार्यक्रमों का प्रसारण।

पता :
सैक्टर -3, प्लाट-2, फ्लैट-4 ,रिद्धि सिद्धि को हा सो,
न्यू पनवेल , नवी मुम्बई -410206 महाराष्ट्र

प्रश्न न.1 - आपने किस उम्र से लिखना आरंभ किया और  प्रेरणा का  स्रोत क्या है ?
उत्तर.- हमने 12साल के उम्र से ओड़िआ में कविता लिखना शुरू किया पर प्रकाशित नहीं हो पाई। कभी-कभी अपने नोट्स में या छोटे टूकूड़ों में लिखकर रख देते थे जब साल पूरा होता रद्दी में वह नोट्स भी चले जाते, कभी प्रकाशन का ख्याल नहीं आया ना ही कोई इसका सुझाव देने वाले कवि लेखक जानकारी में थे। उस उम्र में प्रेरणा का स्रोत मेरी दीदी विजया थीं जिन्होंने एक उपन्यास लिखा था लेकिन सही मार्गदर्शक न होने की वजह से प्रकाशित नहीं हो पाई।

प्रश्न न. 2 - आप की पहली रचना कब और कैसे प्रकाशित या प्रसारित हुई है ?
उत्तर - मेरी पहली रचना 2007 में प्रकाशित हुई। मेरे पति तेजेश्वर जी रिलायंस इंडस्ट्रीज, जामनगर में काम कर रहे थे तब उसी कंपनी की ओर से दो पन्ने का एक त्रैमासिक पत्रिका निकलता था (नाम याद नहीं) उस पत्रिका में मेरी पहली कविता छपी थी शीर्षक था 'आर्तनाद'।

प्रश्न न. 3 - आप किन-किन  विधाओं में लिखते हैं और सहज रूप से सबसे अधिक किस विधा में लिखना पंसद करते हैं ?
उत्तर -  मैंने जब लिखना शुरू किया तब पहली चरण में मैं कविताएँ लिखती रही, 40-50 कविताएँ लिखने बाद एक काव्य संग्रह निकाला 'मैं साक्षी इस धरती की'। उसके बाद मैंने उपन्यास लिखना शुरू किया जिसका नाम 'हवेली' रखा। इस तरह अब तक मेरी चार काव्य संग्रह और तीन उपन्यास प्रकाशित हैं। एक किताब अंग्रेजी में भी प्रकाशित हुई है। मैंने अब तक काव्य, लघुकथा, कहानी, संस्मरण, आलेख, हाइकू, मुक्तक, उपन्यास आदि विधाओं में कलम चलाई है, गज़ल का भी प्रयास किया है। मुझे सभी विधाओं में लिखना पसंद होने के बावजूद जब से उपन्यास लिखना शुरू किया तब से उपन्यास लिखना मुझे बहुत अच्छा लगता है। हाँ कविताओं को मैं नहीं भुला सकती।

प्रश्न न. 4 - आप साहित्य के माध्यम से समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
उत्तर - मानव कल्याण के हित में लिखनेवाले लेखन को मैं साहित्य मानती हूँ, साहित्य यानी सब के हित में लिखना, चाहे आप किसी भी विधा में लिखते हों अगर उसमें आपके द्वारा जनता के हित में कोई संदेश जाता है तभी साहित्य को सार्थक है। मैं जीवन में 'आप जिओ और सब को जीने दो' यही संदेश देना चाहूँगी। साथ ही एक ऐसी जिंदगी जीने के लिए कहूँगी जिससे आप के जीवन का कोई मतलब निकले। जीना तो सभी जी लेते हैं, मरने के बाद कोई किसी का नहीं लेकिन अगर अपनी जिंदगी में कुछ व्यक्तियों का भी भला कर सकें या आपके द्वारा किसी की जिंदगी सुधर सके तो ऐसी जिंदगी सार्थक बन जाएगी।

प्रश्न न. 5 - वर्तमान साहित्य में आप के  पसंदीदा लेखक या लेखिका की कौन सी  पुस्तक है ?
उत्तर - मैं अमृता प्रीतम की कविताएं बहुत पढती थी मुझे पसंद भी है, एक तरह से कहा जाए तो मैं हिंदी में लिखना शुरू किया ही अमृता प्रीतम की कविताओं को पढ़कर। फिर महादेवी, कुँवर नारायण आदि के रचनाओं से प्रेरित हुई। जहाँ तक वर्तमान साहित्य की बात है शोधपरक और मिथक और आत्मकथ्या को पसंद करती हूँ। कोई एक पुस्तक तो नहीं बल्कि अभी संतोष श्रीवास्तव जी का एक पुस्तक कैथरिन अंग्रेजी अनुवाद के लिए मेरे पास आई है जो नागा साधुओं को लेकर रची गई है, वही पढ़ रही हूँ और पसन्द भी है। 

प्रश्न न. 6 - क्या आपको आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर प्रसारित होने का अवसर मिला है ? ये अनुभव कैसा रहा  है ?
उत्तर - हाँ आकशवाणी में मैने एक संस्मरण पढ़ा है, और राजस्थान रेडियो में भी कई कविताएँ प्रसारित हुई है। दूरदर्शन यानी DD में न सही लेकिन अन्य बहुत सी चैनलों में मेरी कविताएँ प्रसारित होती रहती है। KCN headlines में खबर के अलावा इसी चैनल के कवि चौपाल में, india tv, kalinga tv,  अपनी रचनाओं को रेडियो में और tv पर सुनना देखने का अनुभव बहुत अच्छा है। मैंने अपनी संस्था की ओर से sahitya_sankalp नाम से एक यूट्यूब चैनल भी खोला है, जिसमें मेरी काफी रचनाओं को प्रसारित किया है, हमारे संस्था के सम्मेलनों, संस्था की सदस्यों के एकल कविता-पाठ,  कवि-सम्मेलन आदि के अलावा लाइव प्रोग्राम भी कराती हूँ। जैसे काव्य, लघुकथा, कहानी, किताब-समीक्षा, और बात - चीत(sakshatkar) आदि ।

प्रश्न न. 7 - आप वर्तमान में कवि सम्मेलनों को कितना प्रासंगिक मानते हैं और क्यों?
उत्तर - कवि-सम्मेलनों की जरूरत बहुत है। कवियों को आमलोगों तक पहुँचने का यह एक ही जरिया है, लेकिन हर बार कवि को एक काव्य पढ़ने दूर-दूर यात्रा कर सम्मेलन की जगह तक पहुंचना बड़ा ही कष्टसाध्य काम है। फिर भी कविसम्मेलन होता रहे और साहित्य और कवियों के प्रयास को लोगों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है ऐसा मैं मानती हूँ। आजकल लोग अपने जीवन मे इतने उलझे हुए होते हैं कि उन्हें मनोरंजन की जरूरत बहुत है, जिससे मन की कुंठा, डिप्रेशन, स्ट्रेस से कुछ बाहर निकलें।  कवि सम्मेलनों में एक स्वस्थ और भावनात्मक से जुड़ी काव्य सुनने को मिलते हैं जिन्हें कई बार लोगों को अपने आप से मिला देता है।

प्रश्न न. 8 - आपकी नज़र में साहित्य क्या है  तथा  फेसबुक के साहित्य को किस दृष्टि से देखते हैं ?
उत्तर - साहित्य जैसे मैंने पहले भी कहा है सब के हित के लिए जो साहित्य लिखी जाती है वही साहित्य है, बाकी मनोरंजन के लिए लिखी साहित्य को मैं असाहित्य कहूँगी। फेसबुक एक जरिया है लोगों तक पहुँचने का अपने शब्दों से लिखी रचनाओं को पढ़ाने का, लेकिन वहाँ साहित्य कम असहित्य ज्यादा होता है।

प्रश्न न.9 - वर्तमान  साहित्य के क्षेत्र में मिलने वाले सरकारी व गैरसरकारी पुरस्कारों की क्या स्थिति है ?
उत्तर - सभी एक सिक्के के दो पहलू हैं। चाहे सरकारी हो या गैर सरकारी सब कुछ दिखावा के लिए होता है और चुने वही जाते हैं जो या तो पर्दे के पीछे के पहचान हो या आपस में सम्मानों का एक्सचैंज।

प्रश्न न. 10 - क्या आप अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटना या संस्मरण का उल्लेख करेगें ?
उत्तर - जी जरूर, मैं मेरी आत्मकथा लिख रही हूँ जो आखरी पड़ाव पर है, जल्दी ही इस आत्मकथा को प्रकाशन के लिए भेजूँगी। और ओड़िआ एबं तेलुगु में अनुवाद करने की इच्छा भी है।

प्रश्न न. 11 - आपके लेखन में , आपके परिवार की क्या भूमिका है ?
उत्तर - मेरे परिवार की प्रेरणा से ही आज मैं 8किताब प्रकाशन कर पाई हूँ। मेरे साथ मेरा परिवार हमेशा खड़ा है। मेरी माँ लक्ष्मीबाई मेरी प्रेरणा हैं, मेरे पिताजी शाम्भुमुर्ती आचारी उनके रहते वे कहीं भी जाते तो मेरी पुस्तक को अपने हाथ में ही रखते और गर्व से उनके पहचान में सभी को कहते मेरी बेटी ने इस पुस्तक को लिखा है। मेरे पति तेजेश्वर जी ने मेरी पुस्तकों का प्रकाशन के लिए हमेशा ही साथ दिया। मेरे बच्चे प्रेम और मेघा जब भी कुछ जरूरत रहती है मेरे साथ खड़े होते हैं और तुरन्त ही समाधान कर देते हैं, जैसे इंटरनेट हो या कैमरा सेटअप या हमारे संस्था की साहित्यिक गोष्ठी के लिए जरूरी कोई काम। मेरा परिवार के बिना एक कदम भी चल नहीं सकती थी। 


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