महादेवी वर्मा स्मृति में चर्चा परिचर्चा

     संघर्ष से ही सफलता मिलती है। बिना संघर्ष के कुछ नहीं मिलता है। इन सबके बीच कर्म की भूमिका अहम होती है। जो संघर्ष से सफलता की सीढ़ी चढ़ता है। तभी सफलता का स्वाद मिलता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
       सफलता के लिए संघर्ष अनिवार्य है। बिना परिश्रम और धैर्य के कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकता। संघर्ष हमें मजबूत बनाता है, हमारी क्षमताओं को निखारता है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करना सिखाता है। जो व्यक्ति कठिनाइयों से घबराता नहीं, वही सच्चे अर्थों में सफलता का स्वाद चख पाता है। इसी प्रकार, कर्म के लिए सफलता भी प्रेरणा का कार्य करती है। जब व्यक्ति अपने प्रयासों में सफल होता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह और अधिक उत्साह के साथ अपने कार्यों में जुट जाता है। सफलता उसे आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है और नए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करती है। संघर्ष और सफलता दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। संघर्ष के बिना सफलता अधूरी है और सफलता के बिना कर्म में उत्साह कम हो जाता है। जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए दोनों का संतुलन आवश्यक है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

       जीवन में अगर संघर्ष न हो तो मजा नहीं आता है। सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है, कर्म के लिए सफलता जरूरी है। वास्तव में सत्य प्रतीत होता है हम संघर्ष ही नहीं करेंगे और सफलता के लिए सपने देखेंगें तो उचित नहीं है। कर्म और सफलता एक दूसरे के पूरक है। कभी-कभी अच्छे कर्म रहने पर भी सफलता नहीं मिलती है, हम कह सकते है, सब पूर्व जन्म के फल है, जो इस जन्म में भोगने पड़ते है.....।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

     बालाघाट  - ‌मध्यप्रदेश

       "सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है, कर्म के लिए सफलता जरूरी है” यह दोनों कथन जीवन के गहरे सत्य को अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं। पहला कथन स्पष्ट करता है कि बिना संघर्ष के सफलता संभव नहीं है। संघर्ष ही व्यक्ति को तपाकर मजबूत बनाता है, उसकी क्षमताओं को निखारता है और उसे लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है। संघर्ष के बिना मिली सफलता अक्सर टिकाऊ नहीं होती। दूसरा कथन—“कर्म के लिए सफलता जरूरी है”—विचार करने योग्य है। वास्तव में कर्म का आधार सफलता नहीं, बल्कि कर्तव्यबोध और निष्ठा है। यदि हम कर्म को केवल सफलता से जोड़ दें, तो असफलता की स्थिति में हमारा प्रयास रुक सकता है। सही दृष्टिकोण यह है कि कर्म निरंतर होना चाहिए, चाहे सफलता मिले या नहीं। सफलता तो कर्म का परिणाम है, प्रेरणा नहीं। अतः कहा जा सकता है— संघर्ष सफलता की सीढ़ी है, और कर्म उसका आधार। यदि कर्म सच्चे मन से किया जाए, तो सफलता स्वयं ही उसके पीछे-पीछे चल पड़ती है। 

- डाॅ. छाया शर्मा 

अजमेर - राजस्थान

      संघर्ष ही सफलता का जन्मदाता है, और सफलता ही कर्म को सार्थक बनाती है। क्योंकि जब मनुष्य संघर्ष करता है, तब वह अपनी सीमाओं को तोड़ता है, अपनी आत्मा को तपाता है और अपने व्यक्तित्व को निखारता है। चारों ओर से निराशा मिलती है। मित्र तक साथ छोड़ देते हैं। वह संघर्ष पागलपन का रूप ले लेता है सम्पूर्ण सिस्टम उससे घृणा करने लगते हैं, यहां तक कि उसकी व्यथा माननीय न्यायालय भी नहीं सुनती। विडम्बना यह है कि सफलता केवल लक्ष्य प्राप्त करना नहीं, बल्कि उस संघर्ष की तपस्या का फल है, जो हमें कर्मपथ पर अडिग रखता है। इसी प्रकार, कर्म केवल क्रिया नहीं, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का संकल्प है—एक निरंतर यात्रा, जिसमें हर प्रयास, हर असफलता और हर अनुभव हमें और सशक्त बनाता है। इसलिए जीवन का सत्य यही है कि बिना संघर्ष के सफलता अधूरी है, और बिना सफलता के कर्म निष्प्राण होता है अर्थात शव होता है। किन्तु वह शव जब भ्रष्ट तन्त्र के सामने आता है तो कफ़न फाड़ देता है और संघर्ष एवं कर्म एक साथ चलते हैं, तभी मनुष्य अपने जीवन को महानता, उद्देश्य और राष्ट्रसेवा की ऊँचाइयों तक ले जाता है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

         जब कोई कार्य किया जाता है तो उसका कोई न कोई उद्देश्य होता है और सफलता की कामना की जाती है। कार्य करते समय अड़चनें भी आती हैं। उनके साथ संघर्ष करना पड़ता है तभी सफलता मिलती है। कार्य ,संघर्ष और सफलता तीनों ही परस्पर संबंधित हैं।

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर मध्य प्रदेश 

    सफलता,संघर्ष,कर्म,फिर सफलता सब एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं. सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है और संघर्ष के लिए कर्म जरूरी है. हम कर्म करेंगे तो संघर्ष होगा ही. हम चुप बैठे रहेंगे तो कोई संघर्ष होगा ही नहीं. न ही कोई कर्म होगा. वैसे देखा जाय तो कर्म के लिए सफ़लता जरूरी नहीं है. सफलता के लिए कर्म जरूरी है. क्योंकि जब हम कोई कर्म करते हैं तो उसमें किसी कारण से असफल हो जाते हैं. मसलन कोई व्यक्ति ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन जाता है और रास्ते में किसी कारण वश देरी हो जाती है और ट्रेन छुट जाती हैं. इसमें व्यक्ति तो कर्म किया पर असफल हो गया. इसलिए कर्म के लिए सफलता नहीं बल्कि सफलता के लिए कर्म जरूरी है वह तगड़े संघर्ष के साथ. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

       सफलता के शिखर पर संघर्ष की राह से गुजरकर ही पहुंचा जा सकता है ! कभी सफलता मिलती है संघर्ष के पश्चात , और कभी नहीं मिलती !! कामयाब वही व्यक्ति होता है , या सफलता उसे ही मिलती है , जो असफल होने के बाद , अपनी कमियों का आकलन कर , स्वयं को सुधारता है , व पुनः दुगुनी ऊर्जा के साथ नया संघर्ष , फिर शुरू कर देता है !! कर्म का फल सफलता होना जरूरी तो है , पर कई बार सफलता के बजाए , असफलता हाथ लगती है ! एक सच्चा व कर्मठ इंसान वह होता है , जो अपने कर्मों द्वारा , संघर्ष तब तक जारी रखता है  , जब तक उसे सफलता प्राप्त नहीं होती ! कर्म करनेवाले के लिए सफलता इसलिए जरूरी होती है , क्योंकि यही व्यक्ति की प्रेरणा होती है , व लक्ष्य भी !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

     सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है, और कर्म के लिए सफलता जरूरी है। सफलता और संघर्ष दोनों ही जीवन में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है, संघर्ष से दृढ़ता और सफलता से पहचान, प्रसिद्धि एवं खुशी मिलती है,

- संघर्ष और सफलता :

    - संघर्ष हमें मजबूत बनाता है।

    - संघर्ष से ही हमें अनुभव और ज्ञान मिलता है।

    - सफलता संघर्ष का ही परिणाम है।

- सफलता और कर्म :

    - सफलता हमें प्रेरणा और आत्मविश्वास देती है।

    - सफलता से हमें आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है।

    - कर्म के लिए सफलता जरूरी है, ताकि हम और बेहतर कर सकें।

कठिनाइयों से कभी भी न डरें और अधिक होकर अपने कर्तव्य मार्ग पर चलते रहे, संघर्ष के बिना सफलता नहीं मिल पाती है। पूरे मनोयोग से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयास करते रहें।

- डा० प्रमोद शर्मा प्रेम 

नजीबाबाद - उत्तर प्रदेश 

      जीवन में सफलता पाने के लिए संघर्ष जरूरी है। संघर्ष करके जब सफलता मिलती है उसका आनंद कुछ और ही होता है। आत्मिक संतुष्टि मिलती है,साथ ही साथ मन में संतोष की प्राप्ति होती है।सुखद अनुभूति होती है। कामयाब होने के लिए कमरतोड़ मेहनत करनी पड़ती है।पूरी निष्ठा ,दृढ़ संकल्पित होकर कार्य करना पड़ता है। एकाग्रता,लगनता, बहुत जरूरी है। संघर्ष का आशय मेहनत चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक करना बहुत जरूरी है।गरीबी से जूझना पड़ता है हालात से निपटना पड़ता है।कुल मिलाकर सफलता हासिल करनी है तो संघर्ष करने के लिए अडिग रहो। विचलित न हो,लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ते चलो। फिर देखो परिणाम बहुत ही स्वर्णिम सुखद अहसास कराने वाला मिलेगा।आप स्वयं ही गर्व महसूस करोगे। कर्म के लिए सफलता जरूरी है कर्म को पूजा मानकर हमें जीवन में आगे बढ़ना है।जिसकी सीख हमें सभी धर्म, ग्रंथों में मिलती है । कर्म करना ही पड़ेगा।मनसा,वाचा, कर्मणा से हम पीछे न हटें। कर्म हमें सफलता की राह दिखाता है। हमें आगे बढ़ने के प्रेरित करता है। कर्म ऐसा करें जिसमें हमें सफलता के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना चाहिए।आलस छोड़कर कर्तव्यनिष्ठ बनकर कर्मवीर की भूमिका निभाना है।जो सफलता के लिए निहायत जरूरी है।अच्छे कर्म का नतीजा अच्छा ही मिलता है। कर्म करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। अपनी प्रतिभा, अपने गुण, अपने ज्ञान,अपना बुद्धि कौशल का परिचय देना चाहिए।काम को फलीभूत करने में पूरजोर प्रयास करना चाहिए।

- डॉ. माधुरी त्रिपाठी 

रायगढ़ - छत्तीसगढ़

     सफलता कोई सहज में उपलब्ध होने वाला फल नहीं है कि आए और तोड़ लिया। सफलता , परिश्रम की कुंजी है। सफलता, उस उद्देश्य का परिणाम  और प्रतिफल है, जिसके लिए सतत परिश्रम किया है। उसके विषय में सुक्ष्मता से जाना है,समझा है, आत्मसात किया है, दिन-रात एक किया है यानी संघर्ष किया है। इसीलिए जो कहा गया है कि " सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है। " ऐसा कहना शत-प्रतिशत सही है,उचित है, आवश्यक है। ठीक ऐसे ही कर्म के लिए व्याख्या है। कर्म के लिए सफलता जरूरी है। सफलता मिलेगी तो उत्साहवर्धन होगा, स्फूर्ति मिलेगी। रुचि बढ़ेगी। असफलता तोड़ने का काम करती है, हतोत्साहित करती है। निराशा देती है। आलस्य जगाती है। अत: कर्म के लिए सफलता जरूरी है, महत्वपूर्ण है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

      आज के तीव्र गति से बदलते समय में सफलता केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्यता बन चुकी है। हर व्यक्ति अपने अस्तित्व को सार्थक करने, पहचान बनाने और आत्मसंतोष प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। किंतु इस सफलता के शिखर तक पहुँचने का मार्ग सरल नहीं होता—यह मार्ग संघर्ष की कठोर चट्टानों और कर्म की अनवरत धारा से होकर गुजरता है। वास्तव में, संघर्ष सफलता मूल मंत्र है और कर्म सफलता की अनिवार्य शर्त।संघर्ष जीवन का वह सत्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता। यह मनुष्य को तपाकर कुंदन बनाता है। जब परिस्थितियाँ प्रतिकूल होती हैं, जब प्रयास बार-बार विफल होते हैं, तब जो व्यक्ति हार नहीं मानता, वही संघर्ष की वास्तविक परिभाषा को आत्मसात करता है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ हर क्षेत्र में होड़ है—चाहे वह शिक्षा हो, रोजगार हो या सामाजिक प्रतिष्ठा—संघर्ष के बिना आगे बढ़ पाना संभव नहीं। संघर्ष व्यक्ति को धैर्य, संयम और साहस प्रदान करता है, जो सफलता के लिए अनिवार्य गुण हैं। परंतु केवल संघर्ष ही पर्याप्त नहीं है। यदि संघर्ष के साथ कर्म का समन्वय न हो, तो वह मात्र एक निष्फल प्रयास बनकर रह जाता है। कर्म ही वह साधन है जो संघर्ष को दिशा देता है। कर्म का अर्थ केवल कार्य करना नहीं, बल्कि सजग, समर्पित और सतत प्रयास करना है। जब व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण निष्ठा और लगन से कर्म करता है, तब सफलता स्वतः उसके चरण चूमने लगती है। आज हम गौर करें तो  आज के युवा वर्ग के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं—बढ़ती बेरोजगारी, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, सामाजिक दबाव और आर्थिक असमानताएँ। ऐसे में केवल सपने देखना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन सपनों को साकार करने के लिए निरंतर कर्म और संघर्ष आवश्यक है। जो युवा कठिनाइयों से घबराकर पीछे हट जाते हैं, वे अवसरों से वंचित रह जाते हैं; जबकि जो विपरीत परिस्थितियों में भी कर्मपथ पर अग्रसर रहते हैं, वही सफलता के शिखर को स्पर्श करते हैं। साथ ही, यह भी सत्य है कि सफलता स्वयं में अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि नए कर्मों और नए संघर्षों की प्रेरणा है। जब व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है, तो उसके सामने नई जिम्मेदारियाँ और नए दायित्व आते हैं। इस प्रकार सफलता, कर्म को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाने का माध्यम बन जाती है। अतः यह स्पष्ट है कि संघर्ष और कर्म एक-दूसरे के पूरक हैं। संघर्ष व्यक्ति को मजबूत बनाता है, जबकि कर्म उसे दिशा और गति प्रदान करता है। दोनों के समन्वय से ही सफलता का वास्तविक स्वरूप साकार होता है। अंततः यही कहा जा सकता है कि— “संघर्ष से ही सफलता का जन्म होता है, और कर्म से ही उसका विस्तार।” जो व्यक्ति इन दोनों को अपने जीवन का आधार बना लेता है, उसके लिए कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।

- डॉ अलका पाण्डेय 

मुम्बई - महाराष्ट्र 

      अगर हम सफलता और कर्म की तरफ रूख करें तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सफलता के लिए संघर्ष अनिवार्य है क्योंकि संघर्ष ही हमें मजबूत बना कर सफलता की तरफ धकेलता है इसके साथ निरंतर कर्म और मेहनत ही भाग्य का निर्माण करते हैं, कईबार हम असफलता से सीख ले कर धैर्य के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं तो हमें सफलता जरूर हासिल होती है तो आईये आज की चर्चा को आगे बढाने का प्रयास करते हैं कि सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है और कर्म के लिए सफलता जरूरी है, मेरा मानना है कि सफलता के लिए कोई सार्टकर्ट रास्ता नहीं है, सही दिशा में निरंतर प्रयास ही परिणाम दे सकता है जो संघर्ष से डर जाता है वो मजबूत व्यक्ति नहीं बन सकता, दुसरी तरफ हमारे कर्म ही हमारे भाग्य बनाते हैं इसलिए उच्च लक्ष्य के लिए दृढ़ संकल्प, एकाग्रता और आत्मविश्वास , और सही दिशा में मेहनत जरूरी है,  वास्तव में  कर्म और सफलता का सीधा संबंध है क्योंकि  मेहनत, कर्तव्य प्रयास वह नींव है जिस पर सफलता यानि लक्ष्य प्राप्ति, परिणाम, उपलब्धि का महल खड़ा होता है तथा कर्म ही भाग्य का निर्माता है और बिना कर्म के भाग्य भी साथ नहीं देता, इसलिए सच्ची, निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तवयों   का पालन करना ही सफलता के मुख्य कारण हैं, अन्त में यही कहुँगा कि सफलता के लिए संघर्ष की सख्त जरूरत है और  अगर कर्म को भी सही दिशा में जोड़ दिया जाए तो ऐसा कोई कार्य नहीं है यहाँ सफलता  मिलना न मुमकिन हो तभी तो कहा है कर्म तेरे अच्छे हों तो किस्मत तेरी दासी है नियत तेरी अच्छी हो तो घर में ही मथुरा, काशी है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -  जम्मू व कश्मीर

         जीवन में चुनौतियों का सामना समाधान मुकाबला अनुभव के पैमाने में रख करना है क्योंकि हर सुख दुख में सफलता अनुभव देती है  ! साथ साथ चलने का शुभ संकल्प ले जीवन को आगे बढ़ाती है !इंसानियत से प्यार करो । जो कर्म की सफलता के लिए जरूरी कहें या कठिन कहे !आज के जमाने में कोई किसी का नही सुनाता ! कहते है सब चल जाएगा सिवाय नसीहत के ! और हमें दृढ़ निश्चयी होना है ! जब कहते हैं आखरी आपने हमारे लिए किया ही क्या है? आप ने तो माँ बाप का फर्ज निभाया ! हम आपसे बेहतर जानते समझते है  ! आप लोगों घूमना, बिंदास खानपान जो हमें अच्छा लगता है वो आपको भी अच्छा लगता है और इन सफलताओं के लिए संघर्ष जरूरी है ! जो सचमुच आज की युवा पीढ़ी कर रही है जिसके लिए उनके ख़ुद के पास समय नहीं होता  !विचारों में सामंजस्य  बिठाते आज से बेहतर कल बनाने की कोशिश लगे रहते है !इसके लिए बुजुर्गों को चाहिए सत्कर्म सिद्धान्तों विचार अपनाये कमियों को नज़र अन्दाज़ कर पारदर्शी जीवन दर्पण दिखाए !सज्ञान लेकर देकर जीवन सँवारे जीवन अपना सफल संघर्षों से शिक्षा ले अनुभवों लेकर से सुखी बनाए ! इस तरह सफलता अनुभव से मिलती है जिसके लिए सत्कर्म संघर्ष दोनों जरूरी है ! 

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

  मेरी दृष्टि में " जीवन में संघर्ष अवश्य होता है। तभी कर्म की पहचान बनती है। और सफलता की सीढ़ी चढ़ता है। सफलता कभी आसान नहीं होता है। संघर्ष का रास्ता सामने होता है। जिसे पार करना होता है। यही संघर्ष से कर्म की सीढ़ी है। जो सफलता का द्वार खोलता है।

            - बीजेन्द्र जैमिनी 

          (संचालन व संपादन)

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