बीजेन्द्र जैमिनी : व्यक्तित्व व कृतित्व
डाँ. बीजेन्द्र कुमार जैमिनी : बिम्ब - प्रतिबिम्ब
सम्पादक : संगीता रानी ( 25 मई 1999)
डाँ. बीजेन्द्र कुमार जैमिनी : अभिनन्दन मंजूषा
सम्पादक : लाल चंद भोला ( 14 सितम्बर 2000)
फिर भी आमंत्रित विचारों का उपयोग हो रहा है। बिना किसी विवादों के संग्रह में शामिल किया गया है।
प्रेरक विचार सशक्त नेतृत्व
बीजेन्द्र जैमिनी का व्यक्तित्व एक प्रेरक नेतृत्व का प्रतीक है, जिसमें साहस, दूरदर्शिता और स्थिर नैतिक मूल्यों का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। उनके कार्यों से यह स्पष्ट होता है कि सच्चा नेतृत्व केवल अधिकारों में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मौलिक कर्तव्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी में निहित है। वास्तव में वह राष्ट्र के उत्थान के आधार का निर्माण कर रहे हैं।
सृजनात्मक कृतित्व : -
उनके कृतित्व में नवाचार और सृजनशीलता की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। चाहे साहित्य, समाज सेवा या सार्वजनिक कार्य हों, उनके योगदान में विचारों की गहराई और समाजोपयोगिता हमेशा सामने आती है।
नैतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता : -
बीजेन्द्र जैमिनी का व्यक्तित्व समाज के लिए एक नैतिक दीपस्तंभ है। उनके कृतित्व में हमेशा समाज के निर्बल वर्गों, न्याय के प्रति सजगता और मानवीय मूल्यों की रक्षा का भाव झलकता है।
सकारात्मक सोच और प्रेरणा का स्रोत : -
उनका दृष्टिकोण और विचारधारा लोगों को सकारात्मक दिशा में सोचने और स्वयं को ऊर्जावान बनाने के लिए प्रेरित करती है। उनका व्यक्तित्व बताता है कि चुनौतियों और कठिनाइयों में भी उम्मीद और कर्मशीलता का मार्ग अपनाया जा सकता है।
सामाजिक और बौद्धिक प्रभाव : -
बीजेन्द्र जैमिनी न केवल अपने कर्मों से समाज में प्रभाव छोड़ते हैं, बल्कि अपने विचारों और चिंतन से बौद्धिक जागरूकता का संचार भी करते हैं। उनका व्यक्तित्व यह सिखाता है कि ज्ञान और अनुभव को समाजोपयोगी रूप में प्रस्तुत करना ही सच्ची उपलब्धि है।
समानुभूति और सहयोग : -
उनका व्यक्तित्व संवेदनशील और सहकारी है। वे दूसरों के दृष्टिकोण और समस्याओं को समझते हैं, और समाज की प्रगति में सामूहिक प्रयासों को निशुल्क महत्व देते हैं।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) - जम्मू और कश्मीर
प्रथम परिचय वर्ष 2002 में पानीपत में
आदरणीय बीजेंद्र जैमिनी सिर्फ हरियाणा के ही नहीं बल्कि भारत भर में जाने माने एक अतुलनीय हिंदी sahityakar और विशेष तौर पर एक हिंदी लघु कथाकार के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने n सिर्फ स्वयं श्रेष्ठ लघु कथाओं का सर्जन किया है अपितु इन्होंने अनेक उभरते लघु कथाकारों को प्रोत्साहित किया है और उनकी रचनाएं छपवाने में बड़ा योगदान दिया है । उनका यह व्यक्तित्व n सिर्फ उनकी शख्शियत को महान बनाता है परंतु साथ ही साथ उनको हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम भी बनाता है। जैमिनी जी पिछले अनेक वर्षों से न सिर्फ साहित्य की सेवा अपनी रचनाधर्मिता से कर रहे हैं बल्कि साथ ही वे उस समय से कवि लेखकों को पानीपत बुलाकर सम्मानित कर रहे हैं जब सम्मानित करने की यह परंपरा हिंदी साहित्य जगत में बहुत ही कम थी। मेरा उनसे प्रथम परिचय वर्ष 2002 में पानीपत में ही तब हुआ था जब उन्होंने मुझे इनकी जैमिनी अकादमी की ओर से रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान प्रदान करने हेतु पानीपत बुलाया था । मेरा इनसे परिचय लगातार तभी से रहा है । इन्होंने अभी तक अनेकों स्वयंरचित पुस्तकें और साथ ही अपने संपादन में अनेक सहयोगी काव्य संकलन और लघु कथा संकलन प्रकाशित किए हैं और इनके माध्यम से अनेक नए कवि लेखकों को साहित्य की सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया है। मेरे अनुमय पर इन्होंने वर्ष 2022 में प्रकाशित मेरे प्रथम लघु कथा संग्रह ' कदंब की छांव ' की भूमिका भी लिखी है और इस प्रकार मेरा उत्साहवर्धन किया है। ख़ुद के लिए तो खैर सभी जीते हैं मगर अच्छा और श्रेष्ठ साहित्यकार वह होता हैं जो दूसरे उदीयमान रचनाकारों को भी प्रकाशन का अवसर दे और जैमिनी जी ने यह काम बखूबी किया है। ईश्वर उन्हें यह शक्ति लगातार प्रदान करते रहें ताकि वे साहित्य की सेवा इसी प्रकार आने वाले वर्षों में भी करते रहें , यही अभ्यर्थी है।
- प्रो डॉ दिवाकर दिनेश गौड
गोधरा (गुजरात)
संवेदनशील और प्रेरणादायी
बीजेन्द्र जैमिनी समकालीन साहित्य जगत का एक , संवेदनशील और प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से न केवल स्वयं की पहचान स्थापित की है, बल्कि असंख्य नवोदित रचनाकारों के लिए भी मार्ग प्रशस्त किया है। वे जैमिनी अकादमी, पानीपत के संस्थापक के रूप में साहित्यिक चेतना को जन-जन तक पहुँचाने का सतत प्रयास कर रहे हैं। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं मानते, बल्कि उसे समाज में जागरूकता और सृजनशीलता का सशक्त साधन मानते हैं। इसी सोच के साथ वे निरंतर नए विषयों का चयन कर रचनाकारों को लेखन के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी यह पहल विशेष रूप से नई पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरणास्पद सिद्ध हो रही है। बीजेन्द्र जैमिनी का कृतित्व केवल सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक व्यापक साहित्यिक आंदोलन का स्वरूप धारण कर चुका है। वे उभरती प्रतिभाओं को डिजिटल सम्मान-पत्र प्रदान कर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें साहित्य की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उनके इस प्रयास से अनेक नए लेखक साहित्य की दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं।डिजिटल युग में उनकी सक्रियता विशेष रूप से उल्लेखनीय है। फेसबुक जैसे ऑनलाइन मंचों के माध्यम से वे नियमित रूप से साहित्यिक चर्चाओं का आयोजन करते हैं, जहाँ विभिन्न विषयों पर रचनात्मक संवाद को बढ़ावा मिलता है। वे प्रतिदिन किसी न किसी नए विषय के साथ चर्चा प्रारंभ कर रचनाकारों को निरंतर सृजन के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी एक विशेष पहल यह भी है कि वे प्रत्येक दिन किसी महान साहित्यकार की जयंती के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हैं। इस माध्यम से वे न केवल स्थापित साहित्यकारों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, बल्कि भूले-बिसरे साहित्यिक व्यक्तित्वों को भी पुनः स्मृति में लाने का सराहनीय कार्य करते हैं। साथ ही, उस विषय पर उत्कृष्ट लेखन करने वाले रचनाकारों को डिजिटल सम्मान देकर उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करते हैं। उनकी अकादमी से जुड़े अनेक साहित्यप्रेमी लेखन की बारीकियाँ सीखकर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। इस प्रकार उनका योगदान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रहकर, साहित्य के व्यापक विकास और नई प्रतिभाओं के संवर्धन में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहा है। अंततः, यह कहा जा सकता है कि विजेंद्र जैमिनी का व्यक्तित्व प्रेरणा, समर्पण और सृजनशीलता का अद्भुत संगम है, और उनका कृतित्व साहित्य के क्षेत्र में एक निरंतर प्रवाहित होने वाली सृजनधारा के समान है।
- डॉ. अलका पाण्डेय
मुंबई - महाराष्ट्र
चमकता रहे और आगे बढ़ता रहे
आज डिजिटल मीडिया के युग में बीजेंद्र जैमिनी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. बीजेंद्र जैमिनी का कृतित्व उनके व्यक्तित्व की तरह ही महान है. डिजिटल दुनिया और साहित्य को लेकर उन्होंने बहुत कार्य किया है. मैं यहां पर उनके दो तीन कार्यों की चर्चा करूंगा. लघुकथा के बारे में,महान हस्तियों के जन्म दिन के बारे में और चर्चा परिचर्चा के बारे में. इनमें से भी " चर्चा परिचर्चा " के बारे में. हम सभी जानते हैं कि ये चर्चा परिचर्चा कई सालों से चल रहा है. जो कितने लोगों को लेखक बनने के लिए प्रेरणा का काम किया है. बीजेंद्र जी ने बहुत सारे लेखकों को मंच दिया है. ये उनके व्यक्तित्व को ही दर्शाता है कि उन्होंने कितना महान कार्य किया है. प्रत्येक लोगों के अंदर विचार पैदा होते हैं लेकिन उन्हें व्यक्त करने के लिए कोई उपर्युक्त माध्यम नहीं मिलता है जिस माध्यम से वो अपने विचार व्यक्त कर सकें. इस चर्चा परिचर्चा से जुड़े जितने भी लेखक मित्र हैं वो सहज भाव से मेरे इस कथन की स्वीकृति देंगे कि बीजेंद्र जी ने हम सभी के अंदर जो एक लेखक बैठा है उसे किस तरह से उन्होंने बाहर निकलने का सुअवसर प्रदान किया है. ये उनके महान व्यक्तित्व और महान कृतित्व को दर्शाता है. जो अपने ब्लाग पर प्रकाशित कर हमें पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं. मैं उनके इस कृतित्व को सलाम करता हूँ. कहा जाता है कि प्रतिभा सबके अंदर होती है उसे बाहर निकालने वाले की जरूरत है. बीजेंद्र जी वही कार्य कर रहे हैं. जिस तरह से बेहतरीन डायरेक्टर वह होता है जो किसी भी कलाकार से बेहतरीन अभिनय करवा ले. बीजेंद्र जी उसी तरह के साहित्यकार हैं जो इस मंच के सभी सदस्यों से बेहतर से बेहतर रचना करवा लेते हैं. सबको साथ लेकर चलना भी एक महान कार्य में में गिनती होता है जो कार्य बीजेंद्र जी कर रहे हैं. भगवान से प्रार्थना है कि बीजेंद्र जी का व्यक्तित्व और कृतित्व ऐसे ही चमकता रहे और आगे बढ़ता रहे.
- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "
कलकत्ता - पश्चिम बंगाल
नि:स्वार्थ भाव से सोचते है
बीजेन्द्र जैमिनी जी से हमारा परिचय 1999 में, उन्होंने हमें "आचार्य" की उपाधि दी। जो मेरे लिए अद्भुत तो था ही, लेकिन हमारे मित्रों को आश्चर्य चकित हुआ, जरूर उन्हें उपाधि हजम नहीं हुई। तब से निरन्तर जैमिनी जी के साहित्य पड़ाव पर हूँ। जैमिनी जी वह क्षितिज है, जो हमेशा उभरते, वरिष्ठ साहित्यकारों को अपनी "जैमिनी अकादमी" के माध्यम से प्रतिदिन परिचर्चा आयोजित कर, प्रशस्ति-पत्र वितरित कर उनके आत्मविश्वास को रेखांकित करते है। वास्तव में बीजेन्द्र जी समयबद्ध सब कार्य करते हुए, साहित्य को जीवित रखते हुए, शिखर पर पहुंचा दिया है। ऐसे बिरले कम होते है, जो सबके बारे में नि:स्वार्थ भाव से सोचते है। जिस तरह से डिजिटल सम्मान सम्प्रेषित करना बहुत बड़ी बात है। हम इनके इस साहित्य महा यज्ञ में आहूति हेतु कटिबद्ध है।
डॉ.बीजेन्द्र जैमिनी जी पानीपत अपने शिखरतम पहुंचे और विशिष्ट सम्मान से अलंकृत हो, यही हमारी शुभ कामना है।
- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
बालाघाट - मध्यप्रदेश
पत्रकारिता और साहित्य के बीच एक सेतु
बीजेंद्र जैमिनी एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं—वे एक संवेदनशील पत्रकार, सजग संपादक, समर्पित हिन्दी सेवी और सशक्त लेखक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनका जीवन और कार्य हिंदी भाषा, साहित्य और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का परिचायक है। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने निष्पक्षता, जागरूकता और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दी है। उनकी लेखनी जनसरोकारों से जुड़ी होती है, जो समाज को जागृत करने और सकारात्मक दिशा देने का कार्य करती है। एक संपादक के रूप में वे भाषा की शुद्धता, विचारों की स्पष्टता और विषय की गंभीरता पर विशेष ध्यान देते हैं। हिन्दी सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है। वे निरंतर हिंदी के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक गतिविधियों के आयोजन और नवोदित रचनाकारों को मंच देने में सक्रिय रहते हैं। लेखक के रूप में उनकी रचनाएँ सरल, प्रभावी और संवेदनशील होती हैं, जिनमें सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों की गहरी छाप दिखाई देती है। मीडिया क्लब, पानीपत से जुड़े रहते हुए उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण किया है। उनके प्रयासों से अनेक रचनात्मक गतिविधियाँ और संवाद मंच विकसित हुए हैं, जो समाज में जागरूकता और रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं।अंततः कहा जा सकता है कि बीजेंद्र जैमिनी का व्यक्तित्व प्रेरणादायक है और उनका कृतित्व समाज तथा साहित्य दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सार्थक है। जैमिनी अकादमी द्वारा आयोजित परिचर्चाएँ साहित्यिक चेतना को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी हैं। यह मंच केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं, बल्कि रचनाकारों को अपनी अभिव्यक्ति को निखारने और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। इन परिचर्चाओं की विशेषता यह है कि इनमें विविध विषयों पर सार्थक और गंभीर संवाद होता है—चाहे वह साहित्य हो, संस्कृति, समाज या समकालीन मुद्दे। प्रतिभागियों के विचारों में परिपक्वता, संवेदनशीलता और नवीनता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो अकादमी की गुणवत्ता को दर्शाती है। जैमिनी अकादमी नए और स्थापित रचनाकारों के बीच एक सुंदर सेतु का कार्य कर रही है। यहाँ न केवल अनुभवी साहित्यकारों का मार्गदर्शन मिलता है, बल्कि नवोदित प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन और पहचान मिलती है।अंततः कहा जा सकता है कि जैमिनी अकादमी की परिचर्चाएँ साहित्यिक विकास, बौद्धिक संवाद और रचनात्मक उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल हैं। यह मंच निश्चित ही साहित्य के भविष्य को सशक्त बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। “जैमिनी जी ने श्रेष्ठ लघुकथाओं का ऐसा संकलन प्रस्तुत किया है, जो विषय-विविधता, संवेदनशीलता और साहित्यिक उत्कृष्टता का सुंदर उदाहरण है।” जैमिनी अकादमी द्वारा आयोजित परिचर्चाएँ साहित्यिक चेतना को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी हैं। यह मंच केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं, बल्कि रचनाकारों को अपनी अभिव्यक्ति को निखारने और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। इन परिचर्चाओं की विशेषता यह है कि इनमें विविध विषयों पर सार्थक और गंभीर संवाद होता है—चाहे वह साहित्य हो, संस्कृति, समाज या समकालीन मुद्दे। प्रतिभागियों के विचारों में परिपक्वता, संवेदनशीलता और नवीनता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो अकादमी की गुणवत्ता को दर्शाती है। जैमिनी अकादमी नए और स्थापित रचनाकारों के बीच एक सुंदर सेतु का कार्य कर रही है। यहाँ न केवल अनुभवी साहित्यकारों का मार्गदर्शन मिलता है, बल्कि नवोदित प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन और पहचान मिलती है। अंततः कहा जा सकता है कि जैमिनी अकादमी की परिचर्चाएँ साहित्यिक विकास, बौद्धिक संवाद और रचनात्मक उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल हैं। यह मंच निश्चित ही साहित्य के भविष्य को सशक्त बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
मैंने जैमिनी जी को रूबरू नही देखा
आज श्री बीजेंद्र जैमिनी जी जैसे महान शख्सियत की बात करें उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर बात करें तो उनको हिंदी प्रेंम के लिए लिखने को शब्द कम पड़ जाएंगे ।मैंने जैमिनी जी को कभी रूबरू नही देखा । लेकिन उनका हिंदी भाषा का विविध आयामों पर काम करना उनकी राष्ट्र भक्ति को दर्शाता है कि उन्हें इस मातृभूमि से अपनी हिंदी भाषा से कितना प्रेम है जिस पर वह निश्वार्थ रूप से अनवरत कार्य कर रहे हैं व हिंदी के उत्थान व प्रचार प्रसार के लिए काम करते रहे हैं ,निश्चय ही उनको अपने उद्देश्य में सफलता मिलेगी व मिल भी रही है ।कभी कभी कभार जैमिनी जी के व्हाट्सअप स्टेटस देखने पर उनकी भक्ति भावना व खाटूश्याम जी के प्रति अगाध प्रेम देखने को मिलता रहता है ।जेमिनी जी एक कर्मठ ,निष्पक्ष व समदर्शी व्यक्ति हैं । इन्होंने हिंदी की अनेक विधाओं के उठान हेतु सराहनीय योगदान दिया है जैसे लघुकथा लेखन ।उन्होंने ज्वलन्त मुद्दों पर देश भर अनेक विद्वानों के विचारों को हमेशा शोशल मीडिया के जरिये प्रसारित किया है व समाज को सकारात्मक संदेश देकर समाज सुधार में अपना अमूल्य योगदान दिया है ।समय समय पर विद्वानों को साहित्यकारों को उनके रचनात्मक योगदान के लिए सम्मानित कर प्रोत्साहन देने का श्रेष्ठ कार्य किया है । हो सकता है कि मेरी भी किसी साहित्यिक मंच पर जेमिनी जी से भेंट हो जाए । मैं श्री जेमिनी जी के लक्ष्य प्राप्ति ,अच्छे स्वास्थ्य व सुख शांति के लिए प्रभु से प्रार्थना करती हूँ ।
- सुषमा दीक्षित शुक्ला
लखनऊ - उत्तर प्रदेश
मेरी नजर में एक समर्पित लघुकथाकार
लघुकथा के प्रति रुचि होना, पढ़ते हुए अच्छी लघुकथाओं का सार सम्भाल करने की इच्छा जागृत होना, उसके लिए विभिन्न तरीकों से विचार करने के उपरांत मूर्त रूप देने के लिए उस पर चल पड़ना, लघुकथा के लिए काम करते हुए नवीन ऊर्जा का संचार महसूस करना ही लघुकथा के लिए समर्पित एक अच्छे कार्यकर्ता की पहचान है। यह पहचान आज के कार्यों को देखते हुए नहीं बल्कि हमने बीजेंद्र जैमिनी के कार्यों में विविधता और निरंतरता देखने के बाद बनाया है। पिछले 7 सालों से लगातार लघुकथा के क्षेत्र में कुछ ना कुछ करते हुए उन्हें पाया है। कभी तो वह किसी विषय विशेष को लेकर लोगों से लघुकथाएं मंगवाते हैं और कभी अन्य जानकारी। फिर उन सामग्रियों को संयोजित कर तरीके से अपने ब्लॉग पर स्थान देना। सालों निर्बाध गति से बिना किसी अपेक्षा के अपने काम में लगे हुए बीजेन्द्र जैमिनी मुझे दशरथ मांझी के समान लगते हैं। पूर्व में लघुकथा में कार्य करते हुए कई बार ऐसा भी हुआ कि जब कभी मुझे किसी व्यक्ति विशेष की लघुकथा पर बात करने की जरूरत महसूस हुई थी तब मैंने गूगल क्रोम में जाकर उस व्यक्ति के नाम से लघुकथाएं ढूंढने की कोशिश की। सर्च करने पर वह लघुकथा जो सोशल मीडिया पर समूहों में नहीं मिल रहा था जो मुझे ओपन बुक्स ऑनलाइन में उपलब्ध नहीं हो पाया था वह मुझे बीजेंद्र जैमिनी के ब्लॉग पर आसानी से मिल गया। उस दिन यह एक बड़ी बात थी मेरे लिए। उस दिन मैंने इस ब्लॉग पर संकलित लघुकथाओं की उपादेयता को समझा था।कुछ ऐसे रचनाकार जो फेसबुक, वेबसाइटों पर बहुत कम या नहीं के बराबर सक्रिय होते हैं, उनकी रचनाएँ व्हाट्सएप पर सम्पर्क कर उनसे मांगी जाती है तो वे आसानी से प्रेषित कर देते हैं। ये रचनाएं पाठकों, शोधकर्ताओं, संपादकों के साथ ही आलोचना के लिए सामग्री तलाशने वालों को भी सहज सुलभ हो जाया करती है। हम सब जानते हैं कि किसी भी संग्रह, संकलन, पत्र पत्रिकाओं का उद्देश्य पाठकों तक रचनात्मक कार्यों को पहुंचाया जाना ही मुख्य रूप से है। हम सब जानते हैं कि प्रिंट मीडिया में प्रकाशन का खर्च हम लेखकों पर बहुत भारी पड़ता है। प्रकाशन चाहे में प्रिंट मीडिया के माध्यम से हो अथवा अंतर्जाल पर उपलब्ध माध्यमों से, रचनाओं को सुरक्षित रखना ही प्रमुख उद्देश्य होता है। सामग्रियों का दस्तावेजीकरण होना महत्वपूर्ण है। उसे किस तरह से किया जा रहा है वह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। बीजेद्र जैमिनी का कार्य इस लिए भी अधिक महत्व रखता है कि उनका उद्देश्य लघुकथा है। वे व्यक्ति विशेष के लिए काम नहीं करते। वे अपनी योजनाओं के संदर्भ में विज्ञप्ति जारी करते हैं। उनके साथ जो जुड़ता है, वे उन्हें साथ में लेकर आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए चलते रहते हैं। आपने जिस तरह से अपने कार्य को अंजाम दिया है यह बात मुझे बहुत प्रभावित करती है। मैं अपनी व्यस्तता के चलते आपको अपना साक्षात्कार नहीं भेज सकी इसका मुझे अफसोस है।आपने जिस पथ का चुनाव किया है उस पथ पर सदा अग्रसर रहें यह कामना करती हूँ।
- कान्ता रॉय
भोपाल - मध्यप्रदेश
जैमिनी का व्यक्तित्व बेमिसाल
भाई बीजेन्द्र जैमिनी से मेरे परिचय को लगभग 12 वर्ष हो गये हैं। तब से मैंने देखा है कि वे लगातार साहित्य-सेवा- सृजन में लगे रहते हैं। वे सामाजिक विषयों पर खोज-खोज कर विषय लाते हैं और लेखकों के विचारों एवं रचनाओं को पूरी निष्पक्षता से स्थान देते हैं। यही कारण है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर पूरे राज्यों के चुनिंदा लेखकों से आत्मीयता से जुड़े हुए हैं। यही नहीं समय-समय पर वे विशेष पर्व पर विशेष आयोजन कर सब को सम्मानित भी करते हैं। उनकी साहित्य के प्रति इतनी रुचि, साहित्यकारों से आत्मीयता अद्भुत और अनुपम है। कभी किसी प्रकार की अकुलाहट नहीं, खिसियाहट नहीं। न गुस्सा, न उपेक्षा। न गिला, न शिकवा। वास्तव में जैमिनी का व्यक्तित्व और कृतित्व बेमिसाल है। मैं उनका विशुद्ध ह्रदय से प्रशंसक हूं और उनके इस व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन करता हूं। वे सदैव स्वस्थ और सानंद रहें। ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
पत्रकारिता जगत का एक मज़बूत स्तंभ
आज के व्यक्तित्व बीजेन्द्र जैमिनी जी से आभासी दुनिया से ही जुड़ी हूँ।गत पांच छह वर्षों से फेस बुक और वाटसैप के ज़रिए इनके साहित्यिक कार्यक्रम में भाग ले रही हूँ जो अत्यंत ही उत्साहवर्धक,प्रेरणादायक रहता है । आपने इ लघुकथा संकलन प्रकाशित कर हमारे जैसे कई नव अंकुरों को मौक़ा दिया । समय समय पर गद्य ,पद्य ,आलेख लेखन प्रतियोगिता आयोजित कर निःस्वार्थ पत्रकारिता का परिचय देते रहें हैं । डिजिटल सम्मान से सम्मानित कर अनेकों साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने में आप निरंतर लगे रहते हैं । जिससे साहित्यकारों को अपने आप को निखारने,तराशने तथा कुछ सीखने का मौक़ा मिलता है।आपका व्यक्तित्व निसंदेह पत्रकारिता जगत का एक मज़बूत स्तंभ है ।
- सविता गुप्ता
राँची - झारखंड
लघुकथा में इनकी अहम भूमिका है
बीजेंद्र जेमिनी जी एक ऐसी शख्सियत का नाम है , जिन्होने अपना संपूर्ण जीवन , हिंदी भाषा के उत्थान , प्रचार , प्रसार में लगा दिया है !! ये शांत स्वभाव के व्यक्ति है , व सरल , निर्मल , कर्मठ व्यक्तित्व है इनका !! इन्हें मैं व्यक्तिगत तौर से , पिछले 26 वर्षों से जानती हूं !! समय समय पर ये आज की चर्चा , में ज्वलंत विषयों पर चर्चा परिचर्चा का आयोजन कर , विभिन्न लेखकों को विचार रखने का मौका भी देते है , व समय समय पर इन्हें सम्मानित भी करते हैं ! इसी प्रकार लघुकथा उठान मैं भी इनकी अहम भूमिका है !! लघुकथा लेखन मैं विभिन्न लेखकों को अवसर देकर , उन्हें सम्मानित भी करते हैं! समय समय पर , विभिन्न अवसरों पर , ये ऑनलाइन कवि सम्मेलन भी आयोजित करते है , व लेखन के आधार पर उन्हें सम्मानित भी करते हैं !! आज के इस युग में, कोई बिरला ही होगा जो इस प्रकार हिंदी भाषा के उत्थान हेतु कार्य करता होगा !! उनकी मेहनत को , लगन को , हिंदी प्रेम को , शख्सियत को , प्रोत्साहन को , शत शत नमन !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
संवेदनशील कर्मयोगी
बीजेन्द्र जैमिनी जी पानीपत की जैमिनी अकादमी के संस्थापक हैं। अपनी इस अकादमी के तहत वे हिंदी, समाज सेवा और पत्रकारिता से जुड़े रह कर विभिन्न आयामों में अपनी सेवायें दे रहे हैं। मैं साहित्य के माध्यम से इनसे जुड़ी हूँ। फेसबुक, वाट्सअप, एक्स के माध्यम से ये निरंतर हिंदी के लिए काम कर रहे हैं। वाट्सअप पर परिचर्चाओं के लिए नित्य नये विषय देना, विभिन्न महत्वपूर्ण दिवसों पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन करवाना, विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट व्यक्तित्वों की जन्मतिथियों पर इन कार्यक्रमों को करवा कर सम्मान पत्र देना आसान कार्य नहीं है जिसे बीजेन्द्र जैमिनी एक लंबे समय से करते चले आ रहे हैं। पुराने और विशेष रूप से नये रचनाकारों को सृजन से जोड़े रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज भी मोबाइल खोल कर मेरा सबसे पहला कार्य यही देखना होता है की आज किस विषय पर अपने विचार लिखने हैं। अपने कार्यों को ये जिस निस्वार्थ भाव और समर्पण से कर रहे हैं वह इनकी साधना और कर्मभक्ति की पराकाष्ठा ही कहीं जा सकती है। अपना जीवन हिंदी और समाज की सेवा में अर्पित करने वाले बीजेन्द्र जी वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए सदा प्रेरणास्तंभ और मार्गदर्शक बने रहेंगे ऐसा मेरा विश्वास है। मैं अपने को सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे इनसे बहुत कुछ सीखने को मिला और सदा सृजनरत रहने की प्रेरणा मिलती है। ईश्वर से यही कामना है कि इन्हें उत्तम स्वस्थ दीर्घ आयुष्य प्रदान करे ताकि हम सभी इनके मार्गदर्शन में सृजनरत रह कर इनकी अपेक्षाओं पर खरे उतरने का प्रयास करते रहें।ऐसे निष्काम संवेदनशील कर्मयोगी को शत शत नमन है।
- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई
देहरादून - उत्तराखंड
प्रत्यक्ष रूप से कभी मिली नहीं
बीजेंद्र जैमिनी जी से मैं प्रत्यक्ष रूप से कभी मिली नहीं । लेकिन 2018 में उन्होंने अपने ब्लॉग के लिए लघु कथाएं मंगवाई थी और तभी से लगातार मैं उनसे जुड़ी हुई हूं । नए लोगों के विचारों को साहित्यिक रुचि से जोड़ना, विभिन्न विषयों पर विचार चर्चा का आयोजन करवाना, प्रख्यात कवियों पर कवि गोष्ठी आयोजित करना और उनको प्रोत्साहित करने के लिए ई सर्टिफिकेट भेजना ये सब साहित्य के प्रति उनके स्नेह को दर्शाता है । हर साल विभिन्न साहित्यकारों से लघुकथाएं मंगवाना और उन्हें संकलित कर ब्लॉग पर डालना । बिना किसी स्वार्थ के वह निरंतर साहित्य साधना में लगे हुए हैं ।बिना किसी से कोई प्रशंसा की उम्मीद किए । वो अपने साहित्यिक सफर में पथ प्रदर्शक बने हुए हैं । नई राहों पर चल रहे हैं और साथ ही अपने साहित्यिक साथियों का भी मार्गदर्शन कर रहे हैं । अनवरत उनकी साहित्यिक साधन जारी है। साहित्यिक साथियों का उनका कारवां निरंतर बढ़ता जा रहा है। न सिर्फ आशा करती हूं बल्कि दुआएं भी करती हूं की आने वाले समय में उनका साहित्यिक सफर ऐसे ही जारी रहे । ना सिर्फ स्वयं ध्रुव तारे की तरह चलते रहेंगे बल्कि दूसरे साथियों को भी राह दिखाते रहेंगे।
- डॉ नीलम नारंग एडवोकेट
मोहाली - पंजाब
साहित्य में बेहतरीन व्यक्तित्व
जैमिनी अकादमी के निदेशक श्री बीजेंद्र जैमिनी जी को जितना जाना है, उनके बारे में पढ़ा है और दूसरों से सुना है उससे यही प्रतीत होता है कि श्री बीजेंद्र जैमिनी जी निदेशक के साथ- साथ प्रकाशक, लेखक, समाचारपत्र के संपादक हैं। साहित्य के क्षेत्र में सिद्धहस्त हैं। इनके लेखन में शुचिता, निश्छलता, सच्चाई, सादगी, विश्वास एवं सौजन्य का भाव पुष्ट होता है। इनके लेखन में लोक-मानस, लोक - विश्वास का आईना झलकता है। इनकी लोकप्रियता फेसबुक, समाचारपत्र, एवं लेखों के फोलोवर्स, या अनुयायियों की प्रतिक्रियाओं से लक्षित होता है। आॅनलाइन प्रतियोगिता एवं चर्चा-परिचर्चा कराने में सिद्धस्त हैं सभी महापुरुषों की जयंतिया मनाकर श्रेष्ठ लेखन पर सभी को सम्मान प्रदान करते हैं। मेरी पुस्तक 'आशाओं के पंख' कुंडलिया संग्रह के लिए उन्होंने थोड़े ही समय में लेख लिखा और गागर में सागर भर दिया जो पुस्तक को द्विगुणित बेहतरीन एवं शोभायमान बना रहा है। सभी नवोदित साहित्यकारों को अपना आशीर्वाद देकर प्रेरित करते हैं। मैं श्री बीजेंद्र जैमिनी जी के स्वस्थ जीवन की कामना करती हूँ
- कृष्णा जैमिनी
गुरुग्राम - हरियाणा
सार्थक जन्म और गौरवान्वित जन्मभूमि
03 जून 1965 को पानीपत हरियाणा की बेशकीमती उपज के रूप में आपका इस पृथ्वी पर जन्म लेकर साहित्य, पत्रकारिता और संपादन तीनों क्षेत्रों में सुंदर समन्वय से युक्त आपका निरंतर सक्रिय, कर्मठ व्यक्तित्व मानवीय चेतना का जीवंत दस्तावेज है। "कृतित्व" आपकी रचनात्मकता क्रियाशीलता प्रतिवर्ष लघुकथा संकलन का संपादन इस नवीन रोचक विधा के सुव्यवस्थित विकास के सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान की परिचायक है ।कभी-कभी लघुकथा-संग्रह का विषयानुरूप भी सजगता के साथ संपादन किया गया है। सन 2019 में 'लोकतंत्र में चुनाव' संबंद्ध विषय में मेरी भी प्रथम लघुकथा थी जिसे संग्रह में स्थान मिला। इसी प्रकार "नारी के विभिन्न रूपों" पर आधारित मौलिक लघुकथा संग्रह नारी की सामर्थ्य,शक्ति, नए- पुराने रूप, उसकी मर्यादाएं, समाज में स्थिति इत्यादि से जुड़ी लघुकथाएं नारी- विमर्श पर शोधात्मक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं । डिजिटल माध्यम पर आपकी सक्रियता उल्लेखनीय है ।आपका चर्चित ब्लॉग चर्चा- परिचर्चा बेबाक अभिव्यक्ति का मंच है। जहां निर्धारित विषय पर वरिष्ठ एवं नवोदित लोगों के विचारों से जीवनमूल्यों को, सामाजिक यथार्थ, मानवीय रिश्तों में उचित- अनुचित स्थिति को दर्शाता है। फेसबुक पर भी विशिष्ट अवसरों पर त्वरित विषय अनुकूल कविताएं तथा लघुकथा लेखन का आयोजन करना फिर रचनाकारों को सम्मान पत्र प्रदान करके बहुतायत प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन होता देखा जाता है। आपके द्वारा लिखित लघु कथाओं में लक्ष्य की विचारात्मकता, भावनात्मक गहराई साथ ही शिल्पगत कसावट देखने को मिलती है। आपकी निरंतर रचनात्मकता व्यापक विस्तृत लघुकथा संग्रहों के संपादन में नई पीढ़ी भरपूर सामग्री सहजता से जुटाकर गहनता और गंभीरता से शोध कर सकती है । स्वार्थ से कोसों दूर अनुशासनात्मक, बौद्धिक गंभीरता के साथ-साथ बहुमूल्य व्यक्तित्व के धनी आप हिंदी साहित्याकाश के देदीप्यमान नक्षत्र हैं। सदैव आपका यशालोक ध्रुवतारा सा प्रसरित हो।
- डाॅ. रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
भिन्न- भिन्न विषयों पर लिखना सिखाया
मैं 2020 से जैमिनी अकादमी पानीपत हरयाणा जो साहित्यकारों, कवियों,लेखकों के लेखन सक्षमता को उत्कृष्टता प्रदान करता है। भिन्न -भिन्न विषयों पर चर्चा परिचर्चा हेतु लेखन कार्य को विस्तार देते हुए अनेकों बार प्रतियोगिताओं के माध्यम से हमारा उत्साहवर्धन करते हैं। श्रेष्ठ लेखन के लिए यह पटल अति उपयोगी सिद्ध होता है। मैं आदरणीय बीजेन्द्र जैमिनी भाई साहिब की हृदय से धन्यवादी हूँ जिन्होने मुझे भिन्न- भिन्न विषयों पर लिखना सिखाया और हर विधा का लेखन क्षेत्र में महत्व बताया। कविता, लघुकथा, चर्चा परिचर्चा लेख अर्थात जैमिनी जी के प्रयासों से अनुभवी लेखकों के साथ-साथ नवोदित लेखकों को सुअवसर प्रदान किया। किसी विशेष दिवस, विषय काव्य प्रतियोगिता का आयोजन कर समस्त कवियों कवयित्रीयों, लेखकों, साहित्यकारों का उत्साहवर्धन करते हुए सम्मान पत्रों से नवाजा जाता रहा है। अनेक महापुरषों के जयन्ती दिवस,त्यौहार तथा कोई विशेष विषय पर साहित्यिक कार्यक्रम अवश्य होता है और सभी लेखकों को लिखने का मौका प्रदान किया जाता रहा है।साहित्यिक क्षेत्र में जैमिनी जी की मेहनत, लगन ,तल्लीनता अति प्रसंशनीय है। जैमिनी जी एक अनुभवी कवि, लेखक, कथाकार और साहित्यकार है। मैं अपने अनुभव के आधार पर यह मानती हूंँ कि जैमिनी जी को राष्ट्रीय, अन्तरार्ष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान से नवाजा जाए। बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ।
- शीला सिंह
बिलासपुर - हिमाचल प्रदेश
कुछ कहने का साहस जुटाया
आपका हमारा संबंध वर्षों पुराना है ! लगभग 30 वर्ष पुराना ! जब मैं " अवसर " पत्रिका निकाला करता था! और आपसे अक्सर पत्र व्यवहार भी होता था l कई बार आपने हमें पुरस्कार और सम्मान पत्र भी भेजा था! हम आपके इस आत्मीयता के प्रति सदा कृतज्ञ रहे हैं l आप निष्पक्ष और निर्भीक भाव से सिर्फ लघुकथा नहीं बल्कि पूरे साहित्य के लिए, आरंभ से ही समर्पित और जुझारू प्रवृत्ति के रहे हैं l इसलिए भी आप हमारे स्मरण सदा बने रहते हैं l
लेकिन इधर आप लघुकथा के लिए जो काम कर रहे हैं, अविस्मरणीय है l आपने देश के प्रत्येक प्रांत से, चुनिंदा लघुकथाकारों की लघुकथाएं प्रस्तुत किया है l वह काबिले तारीफ है .........। लघुकथा के कुछ मठाधीश लोग, जो अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवाना चाहते हैं,लघुकथा के इतिहास में, उनकी लघुकथाएं कितनी कमजोर है, वह कौन नहीं जानता ? लेकिन आज के समय में, कुछ लोग गुट और समूह बनाकर, अपने ही कुछ लोगों को उछालने में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं l आप इन लोगों से कुछ अलग दिखते हैं l शायद इसलिए आपकी नजर सब पर है ............ । जिस घेराबंदी में, लघुकथा का दम घुट रहा है l कुछ लोगों का नाम लेकर मैं विवाद पैदा करना नहीं चाहता l लेकिन उन सभी लोगों को आप भी जानते हैं l लघुकथा के विकास में किसकी कितनी उपादेयता और हाथ है, इसे कितने दिनों तक दबाया जा सकता है ? लोग आगे बढ़ने के लिए, अपने सामने, अपनी लकीर लंबा नहीं करना चाहते हैं, बल्कि बगल वाली लकीर मिटा देना चाहते हैं l एक दूसरे को आगे ढकेलने की, और लघुकथा का मसीहा घोषित करने की, बेचैनी इतनी बढ़ गई है कि, लोग लघुकथा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षरों को अनदेखा करने लगे हैं l ऐसे में श्रेष्ठ लघुकथाओं को सामने कैसे रखा जा सकता है ? आज जिनके पास पैसा है, प्रेस है और अपना प्रकाशन है, पैरवी है, वे भले कमजोर या श्रेष्ठ लघुकथाएं लिख रहे हों, लेकिन उनकी नजर उन लघुकथाकारों के ऊपर.खाश है, जो एक दूसरे की पीठ थपथपाने में अपना समय गवां रहे हैं l उनकी चिंता और श्रम श्रेष्ठ लघुकथाओं को तलाश कर सामने लाना बिल्कुल नहीं है l ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना ही, लघुकथा के प्रति न्याय और साहित्य के प्रति ईमानदारी होगी l वरना समय अच्छा, बुरा किसी भी चीजों को भुला नहीं पाताl और इतिहास भी उसे कभी माफ नहीं करता l आप उन सब से कुछ अलग दिख रहे हैं l इसलिए इतना कुछ कहने का साहस जुटा पाया हूं आपसे l मुझे विश्वास है आप लघुकथा के इतिहास के प्रति तटस्थ रहेंगे, ईमानदार रहेंगे और समय सापेक्ष भी l
आदरणीय बीजेंद्र जैमिनी सिर्फ हरियाणा के ही नहीं बल्कि भारत भर में जाने माने एक अतुलनीय हिंदी साहित्यकार और विशेष तौर पर एक हिंदी लघुकथाकार के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने ने सिर्फ स्वयं श्रेष्ठ लघुकथाओं का सर्जन किया है अपितु इन्होंने अनेक उभरते लघुकथाकारों को प्रोत्साहित किया है और उनकी रचनाएं छपवाने में बड़ा योगदान दिया है । उनका यह व्यक्तित्व ने सिर्फ उनकी शक्फशिया को महान बनाता है
ReplyDelete- प्रो डॉ दिवाकर दिनेश गौड़
गोधरा ( गुजरात)
(WhatsApp से साभार)