नबेंदु घोष स्मृति में चर्चा परिचर्चा

      सफलता के लिए कर्म करना आवश्यक होता है। तभी सफलता मिलती है। सफलता का एकमात्र सुत्र‌ कर्म है। जो जीवन यात्रा का आधार है। ये सब जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :- 
   कर्म एक ऐसी यात्रा है जो जीवन की अंतिम श्वास तक चलती रहती है। जब तक जीवन है कर्म से संबंध टूट ही नहीं सकता, इसलिए यह कर्म यात्रा निरंतर चलती है। समाप्त होती है तो जीवन के समाप्त होने के साथ ही होती है। तुलसीदास जी ने कहा है..” कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करइ सो तस फल चाखा। इसका अर्थ तो यही निकलता है की जीवन है तो कर्म साथ ही रहेगा। हाँ कर्म की इस यात्रा में कई पड़ाव आते हैं। उन्हें हम सफलता-असफलता का नाम दे सकते हैं। सफलता का सीधा संबंध निरंतर कर्म करते रहने से है। पड़ाव पर रुका तो जा सकता है पर कर्म की यात्रा को रोका नहीं जा सकता।  कर्म करते हुए अपने मार्ग पर चलते हुए सफलता मिलती है और फिर दूसरी मंजिल पर पहुँचने के लिए कर्म यात्रा पूर्ववत चलती है। इसीलिए हम कह सकते हैं की कर्म सिर्फ एक यात्रा है और सफलता एक मार्ग। यात्रा करने के लिए कर्म और मार्ग दोनों अविभाज्य अंग है।

- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई 

देहरादून - उत्तराखंड

        अगर कर्म और सफलता की बात करें तो कर्म जीवन की  वास्तविक यात्रा है जो हमें निरंतर सिखने और विकसित होने का अवसर देती है जबकि सफलता कोई आखिरी मंजिल नहीं है बल्कि कर्म की यात्रा का मार्ग है तो आईये आज इसी बात पर चर्चा करते हैं कि कर्म सिर्फ एक यात्रा है और सफलता एक मार्ग मेरा मानना है कि बिना कर्म के कुछ भी हासिल नहीं होता यही हमें आत्मनिर्भर बनाता है इसलिए सफलता के लिए निरंतर प्रयास जिम्मेदारी और सही दिशा में परिश्रम अनिवार्य है क्योंकि कर्महीन भाग्य हीन तथा अर्थहीन हो जाता है,  इसलिए कर्म एक निरंतर चलने वाली प्रतिक्रिया है न कि परिणाम का इंतजार वास्तव में सही दिशा में किए गए प्रयास ही हमें सफलता का मार्ग दिखा सकते हैं इसलिए मंजिल से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप यात्रा से क्या सीखते हैं, देखा जाए अच्छे विचार और सही कर्म मिलकर ही सफलता का फल देते हैं अन्त में यही कहुंगा कि कर्म एक ऐसी यात्रा है जो सफलता के मार्ग को सही दिशा दिखा कर शिखर तक पहुँचाने में मदद करता है, इसलिए हमें कर्म की यात्रा को सही तरीके से तय करना चाहिए ताकि हम सफलता के मार्ग को ढूंढने में कामयाब हो सकें अगर हमारे कर्म की यात्रा ही छूट गई तो हम अपनी मंजिल तक कदापि नहीं पहुंच सकेंगे तभी तो कहा है, कर्म किए जा फल की इच्छा मत करना इंसान जैसे कर्म करेगा वैसा फल देंगे भगवान। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -  जम्मू व कश्मीर

       कर्म केवल एक यात्रा है, जो हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यह यात्रा कभी आसान नहीं होती, इसमें संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। हर कर्म हमें कुछ न कुछ सिखाता है और हमें अपने लक्ष्य के करीब ले जाता है। सफलता कोई अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक मार्ग है जिस पर चलकर हम अपने जीवन को सार्थक बनाते हैं। यह मार्ग अनुशासन, समर्पण और विश्वास से निर्मित होता है। जो व्यक्ति कर्म की यात्रा को ईमानदारी से तय करता है, उसके लिए सफलता का मार्ग स्वयं ही प्रशस्त हो जाता है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

       कर्म सिर्फ यात्रा है सफलता एक मार्ग है. कर्म की यात्रा से ही सफलता प्राप्त होती है. मेरे विचार से कर्म एक मार्ग है और सफलता एक मंजिल. क्योंकि मनुष्य कोई भी कर्म सफलता के लिए ही करता है. सफलता कभी मार्ग नहीं हो सकती. सफलता तो मंजिल है. चाहे वो किसी भी प्रकार की हो. जैसे पढ़ाई मार्ग यानी कर्म है और पास होना यानी सफलता प्राप्त करना मंजिल है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

      कर्म रूपी यात्रा तय करने के पश्चात ही सफलता मिलती है ! मनुष्य को अपनी जिंदगी जीने के लिए सार्थक , यथासंभव , कर्म करने हो पड़ते हैं !!  कर्म करने के पश्चात सफलता का मार्ग मिलता है , क्योंकि सफलता प्राप्त करना , किसी कर्म का अंतिम पड़ाव नहीं है , अपितु सफलता का मार्ग खोलता है , दिखाता है !! सफलता के मार्ग मैनेल्टी है छोटी सफलता , बड़ी सफलता , व अंत में, वांछित सफलता !! सफलता के इस मार्ग पर , कर्मों द्वारा ही पहुंचा जा सकता है !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

     कर्मवीर बनते जाइए, फल की चिन्ता नहीं करते हुए अपने लक्ष्य की ओर अग्रसरित होते जाते है। कर्म सिर्फ एक यात्रा है, सफलता एक मार्ग है। हमें यह देखने को मिलता है, जिस तरह हम यात्रा करते है, गंतव्य की ओर पहुंच जाते है, उसी तरह से ही कर्म पथ पर चलते जाइए, सफलतापूर्वक मार्ग फन ही जाता है। घर बैठ कर यात्रा तो कर हीं नहीं सकते। कर्म करने के बाहर जाना ही पड़ता है.....।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

     बालाघाट - मध्यप्रदेश

     कर्म की अविराम यात्रा इंसान को जीवन का सर्वोत्तम उपहार है। कर्म की प्रत्याशी इंसान को जीने का मतलब समझाती है--और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। सफलता करम से नहीं कर्म से मिलती है। गति और सद्गगति का फर्क हम अच्छे से जानते हैं लेकिन आँखे मूंदकर दूध पीने वाली भोली बिल्ली का किरदार निभाते हैं। मराठी में एक कहावत है "येडा़ बनकर पेड़ा खाना" अर्थात सब कुछ समझते हुए भी अनजान अज्ञानी बनने का ढोंग करना।। आज के दौर में सभी कुछ समझ कर भी अज्ञानता का चोला पहनने वाले चहुंओर दिख पड़ते हैं। लेकिन ये थोडे समय का स्वांग बाद में आपके लिये ही घातक सिद्ध होता है।अतः उचित है कि कर्म की यात्रा के मील के पत्थर ना गिने। जमा जमा कर कदम आगे बढायें और स्वयं के साथ परिवार समाज देश और वसुधैव कुटुम्बकम के लिये जीने का संकल्प पूर्ण करें।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर -  महाराष्ट्र

        हम जो भी कर्म करते हैं, उसके पूरा होने और फिर उसके परिणाम आने तक यह  अंदेशा तो बना रहता ही है कि सफल होंगे कि नहीं। क्योंकि कर्म एक यात्रा है। जो हम पूरी तो लेते हैं किंतु उस यात्रा हमने किस तरीके से पूरी की। उस अंतराल में जो दायित्व थे, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में शर्तें या कायदे थे, वे निष्ठा से निभाये गये कि नहीं।  समय का सदुपयोग पूरी तरह शुचिता  से किया गया कि नहीं आदि अनेक विषय बिंदु होते हैं तब जाकर सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। अत:  सफलता एक मार्ग है, इसके आशय और कथ्य को समझना महत्वपूर्ण भी होता है और आवश्यक भी है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

       कर्म ही प्रधान है और जीवन में जो इसे अपना लेता है वह लक्ष्य प्राप्त करता है ।कर्म किसी न किसी रूप में हम करते ही रहते हैं ।चाहे वह किसी मकसद से करें ।

कर्म ही सफलता के करीब लाता है ।

सफलता की सीढ़ी चढ़ते रहना है ।

सफलताएँ आपको करम करने के लिए उकसाती हैं । और आप लगातार अपने काम को आत्मसात् कर लेते हैं ।

- सुधा पाण्डेय 

 पटना - बिहार 

         यह कथन जीवन के दर्शन को गहराई से समझाने वाला है। “कर्म सिर्फ एक यात्रा है” — इसका अर्थ है कि जीवन में कर्म निरंतर चलते रहने वाली प्रक्रिया है। यह कोई एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हर दिन, हर क्षण किया जाने वाला प्रयास है। कर्म हमें अनुभव देता है, सिखाता है, और आगे बढ़ाता है।वहीं “सफलता एक मार्ग है” — यह बताता है कि सफलता कोई अंतिम मंज़िल नहीं, बल्कि वह दिशा है जिसमें हम अपने कर्मों के माध्यम से आगे बढ़ते हैं। सफलता हमें प्रेरित करती है, लेकिन यह स्थायी नहीं होती; हर नई सफलता एक नए मार्ग की शुरुआत करती है।यदि हम कर्म को केवल सफलता पाने का साधन मानेंगे, तो असफलता हमें रोक सकती है। परंतु यदि कर्म को एक यात्रा समझकर करेंगे, तो हर अनुभव—चाहे वह सफलता हो या असफलता—हमारे विकास का हिस्सा बन जाएगा। अतः निष्कर्ष यही है—कर्म करते रहना ही जीवन का सार है, और सफलता उस यात्रा में मिलने वाले पड़ावों का संकेत मात्र।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

      कर्म सतत करते ही रहना है, रुकना नहीं है. हमारे वेदों ने कहा है- चरैवेति चरैवेति का अर्थ है- "चलते रहो, चलते रहो" या "निरंतर आगे बढ़ते रहो". यह ऋग्वेद के ऐतरेय ब्राह्मण से लिया गया एक प्रसिद्ध संस्कृत प्रेरणादायक मंत्र है, जो विषम परिस्थितियों में भी बिना थके और बिना रुके लगातार मेहनत करने व प्रगति करने का संदेश देता है. सफलता भी मंजिल नहीं है, महज एक मार्ग है, जिस पर सतत चलते ही रहना है. जैसे मंजिल पर पहुंचने के लिए एक पड़ाव के बाद दूसरा पड़ाव आता है, उसी तरह एक सफलता के बाद दूसरी सफलता के लिए अग्रसर होना ही जीवन है. रुके या थके तो समझो सफलता गई! कहने का तात्पर्य यह है कि सफलता के मार्ग पर चलते हुए कर्म करते रहो, यही जीवंत रहने की निशानी है. चलना जीवन या सफलता है, रुकना मृत्यु या असफलता!  

- लीला तिवानी

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

     जीवन को यदि गहराई से समझा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि कर्म और सफलता दोनों ही एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हुए भी अलग-अलग अर्थ रखते हैं। कर्म एक यात्रा है—जो निरंतर चलती रहती है, जिसका कोई अंत नहीं होता। और सफलता एक मार्ग है—जो हमें दिशा देता है, लेकिन अंतिम पड़ाव नहीं होता। कर्म का अर्थ केवल कार्य करना नहीं, बल्कि निष्ठा, समर्पण और निरंतरता के साथ जीवन जीना है। जब हम कर्म करते हैं, तो हम किसी मंज़िल के लिए नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य के लिए आगे बढ़ते हैं। यह यात्रा हमें हर दिन कुछ नया सिखाती है—कभी धैर्य, कभी संघर्ष, तो कभी विनम्रता। दूसरी ओर, सफलता को हम अक्सर एक लक्ष्य या उपलब्धि मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में सफलता केवल एक मार्ग है—जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जब हम किसी एक सफलता को प्राप्त कर लेते हैं, तो वहीं ठहर जाना जीवन नहीं है; बल्कि उस सफलता को आधार बनाकर आगे बढ़ना ही असली जीवन है। यदि हम केवल सफलता के पीछे भागते हैं, तो हम अधीर हो जाते हैं। लेकिन जब हम कर्म की यात्रा को अपनाते हैं, तो सफलता अपने आप हमारे रास्ते में आती जाती है। कर्म हमें गढ़ता है, और सफलता हमें दिशा दिखाती है। जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हमें तुरंत सफलता नहीं मिलती। ऐसे समय में यही विचार हमें संभालता है कि हम यात्रा पर हैं—और हर कदम हमें कुछ सिखा रहा है। असफलताएँ भी इस यात्रा का हिस्सा हैं, जो हमें और मजबूत बनाती हैं। सच्चाई यह है कि कर्म ही हमारा सच्चा साथी है। सफलता तो केवल एक पड़ाव है, जो कभी आता है, कभी चला जाता है। लेकिन कर्म—वह निरंतर चलता रहता है, हमें आगे बढ़ाता रहता है।अतः हमें सफलता के मोह में नहीं, बल्कि कर्म की साधना में विश्वास रखना चाहिए। क्योंकि—

“जब कर्म की राह सच्ची होती है,

तो सफलता स्वयं उस राह की यात्री बन जाती है।”

- डा अलका पान्डेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

      कर्म मानव जीवन की पवित्र यात्रा है। कर्म ही वह अनवरत साधना है, जिस पर चलकर मनुष्य न केवल अपने अस्तित्व को पहचानता है, बल्कि उसे उच्चतम शिखरों तक स्थापित भी करता है। यह यात्रा सरल नहीं होती, यह संघर्षों, चुनौतियों, धैर्य, तप और आत्मविश्वास की अग्निपरीक्षा से होकर गुजरती है, जहाँ प्रत्येक पग मनुष्य के संकल्प को दृढ़ करता है और उसके व्यक्तित्व को परिष्कृत करता है। वर्णननीय है कि सफलता इस यात्रा का मात्र एक पड़ाव नहीं, बल्कि वह उज्ज्वल प्रकाश है जो कर्मपथ पर अग्रसर साधक को दिशा, प्रेरणा और आत्मसंतोष प्रदान करता है। जब मनुष्य अपने कर्म को ही अपना धर्म, अपनी साधना और अपना सर्वोच्च कर्तव्य मान लेता है, तब वह बाहरी परिणामों की चिंता से मुक्त होकर निरंतर प्रगति करता है। ऐसी अवस्था में सफलता उसके पीछे चलने को बाध्य हो जाती है, क्योंकि सच्चे कर्मयोगी के लिए सफलता कोई लक्ष्य नहीं होती बल्कि वह उसकी निष्ठा, परिश्रम, त्याग और समर्पण का स्वाभाविक प्रतिफल बन जाती है। अतः मनुष्य को सफलता के मार्ग की खोज में भटकने की आवश्यकता नहीं, बल्कि अपने कर्म की यात्रा को ईमानदारी, निष्ठा, समर्पण और निर्भीकता के साथ पूर्ण करना चाहिए। क्योंकि जब कर्म शुद्ध होता है, उद्देश्य स्पष्ट होता है और संकल्प अडिग होता है, तब कोई भी बाधा उसे उसकी सर्वोच्च सफलता तक पहुँचने से नहीं रोक सकती।यही जीवन का शाश्वत सत्य है कि कर्म ही वास्तविक मार्ग है और सफलता उसी मार्ग की स्वाभाविक मंज़िल। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

      कर्म सिर्फ एक यात्रा है जो जीवन से जुड़ा है ! जिसकी अच्छी बुरी यादों को उसके दुनिया से जाने के बाद याद किया जाता है ! यदि उसने अच्छे कर्म किए तो उसकी हर बात की सराहना की जाती है !पर व्यक्ति गलत कार्य करता है उसे यह कह छोड़ दिया जाता ! अब तो इस दुनिया में रहा नहीं उसके बुरे काम की चिंता हम क्यों करे !  परंतु यदि कोई नेक राह चलना सिखाया होता उस व्यक्ति की गिनती सफलता के मार्ग में सीख होती ! इसलिए कहते हर इंसान दिल से बुरा नहीं होता उसके अपने ही उसे सफलता की राह चलने नहीं देते ! क्योंकि वे उसकी प्रगति के मार्ग में अवरोधक होते है ! इन बातों का ख्याल रखने हुए .कर्म सिर्फ एक यात्रा है !जो हमें कर्म और सफलता के महत्व को समझाता है।जिसमें हमें हर कदम का आनंद लेना चाहिए।प्रयास और परिश्रम कर्म हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रयास और परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है।से हमें आंतरिक संतुष्टि मिलती और हमारा आत्म-विश्वास बढ़ता है।सफलता का महत्व धर्य से समझता है ! सफलता एक मार्ग है, जो हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ,दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करता है।प्रेम सफलता हमें प्रेरित करती है और हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए और अधिक प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है। सफलता से हमें नए अवसर मिलते हैं और हम अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ा सकते हैं। कर्म और सफलता का संयोजन जीवन की सफलता का मार्ग है, और इसके बिना हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकते।‌कर्म और सफलता का संयोजन हमें आंतरिक संतुष्टि देता है और हमारा जीवन सुखी और समृद्ध बनाता है।

- अनिता शरद झा 

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

       जीवन में मानव को कर्म करना ही पड़ेगा। कर्म सिर्फ एक यात्रा है,जो अनवरत जारी रहेगा।एक छोर से दूसरे छोर हमें गंतव्य तक पहुंचने में सफल तय करना ही पड़ेगा।चाहे आंधी आये या तूफान,हर परिस्थितियों का सामना करते हुए यात्रा करनी होगी।इस दौरान कई अटकलें, व्यवधान आते हैं उसका हमें डटकर मुकाबला करना होगा।तभी यात्रा आसान होगी।हम फिर अपने लक्ष्य को हासिल कर सकेंगे।वरना हम भटके हुए मुसाफिर की तरह हो जायेंगे जिसका कोई ठौर न ठिकाना बस यूं ही चलते जाना।ये हाल हमारा हो जायेगा।इसी बीच सफलता एक मार्ग है जो हमें सच्चाई के मार्ग पर चलने को कहता है। सफलता के मार्ग में कहीं फूल तो कहीं शूल बिखरे हैं उन सबसे हमें निजात पाकर आगे कदम बढ़ाकर लक्ष्य हासिल करना है।हमारे कदम सफलता के मार्ग में न डगमगाएं इस बात कि हमें ध्यान रखना है।कर्म करते रहना चाहिए, सफलता हाथ आयेगी ही जायेगी कहां। कर्मवीर को ही सफलता हासिल होती है। अकर्मण्य को विफलता मिलती है। कार्य के अनुरूप परिणाम मिलता है।जो सही कार्य करेगा।उसे सफलता हाथ लगेगी।यही उसका पुरस्कार है।काम के बदले मिलने वाला पुरस्कार, अर्थात सफलता हमें विकास की चरम सीमा तक ले जाता है।हम सफलता पाकर खुशी से झूम उठते हैं।अपनी कर्म को,लगन को,मेहनत को सलाम करते हुए । हमेशा सक्रिय रहते हैं। सक्षमता हम कर्म से साबित करते हैं। ईमानदारी हमारा परिधान है जो आवरण हम धारणकर सफलता का परचम लहराते हैं। हमारी यात्रा सुखद व अविस्मरणीय यादगार बनकर रह जाती है जब हम सफलता का पारितोषिक हाथ में रखते हैं।

- डॉ. माधुरी त्रिपाठी

 रायगढ़ - छत्तीसगढ़

" मेरी दृष्टि में " सफलता सभी को नहीं मिलती है। सफलता के लिए कर्म आवश्यक है। कर्म का निर्धारण ही सफलता का स्तर तय करता है। कर्म और सफलता एक दूसरे का परिणाम है। जो समय समय पर एक दूसरे की परीक्षा का परिणाम है। 

      - बीजेन्द्र जैमिनी 

      (संचालन व संपादन)

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