दारा शिकोह स्मृति में चर्चा परिचर्चा
मैं समय हूँ ।मनुष्य अगर समय का महत्व समझ लेता है तो उसे जीवन में कोई परेशानी नहीं होती है । आप एक दिन समय से हर काम करें तो कुछ समय की बचत हो जाती है । आप और अधिक काम के लिये समय निकाल सकते हैं । समय आपको हर काम के लिए निश्चित रूप तैयार करता है । जीवन में आगे बढ़ना है सफलता पाना है तो अपने लक्ष्य और समय तैय करें। अगर हम तन्मयता से हर काम को करते हैं तो कर्म भी बदलता है। अपने कर्म को सही दिशा सही रास्ते पर लेकर चल सकते हैं ।
- सुधा पाण्डेय
लंदन
अक्सर परखा गया है कि समय का सदुपयोग ही प्रगति का अधार है इसके साथ अगर हम किसी कार्य को नियमित करते हैं तो कार्य समय पर पूर्ण होता है, आईये आज इसी बात पर चर्चा को आगे बढाने का प्रयास करते हैं कि समय से पूरा हो काम तो कर्म से ही संभव है, मेरे ख्याल में कर्म को ही प्रधान माना गया है अगर हम अपने कर्म सही दिशा में लगाते हैं और अपनी सोच को सकारात्मक रख कर नियमित रूप से कार्य करते हैं तो ऐसा कोई भी कार्य नहीं जो समय पर पूरा नहीं होता, क्योंकि समय पर काम पूरा होना अनुशासित प्रयास और उचित समय पर करने से ही संभव है यही नहीं सही समय पर किया गया काम तनाव कम करता है तथा बेहतर परिणाम देता है इसके साथ जीवन में सफलता व संतुष्टि लाता है, लेकिन यह जरूरी हो जाता है कि एक समय पर एक ही काम पर ध्यान केंद्रित रहे ऐसा करने से काम बेहतर व समय पर होता है, वास्तव में कर्म ही काम को संभव बनाता है, केवल सोचने या इच्छा करने से सफलता नहीं मिलती बल्कि सक्रिय प्रयास और मेहनत ही किसी भी कार्य को हकीकत में बदलते हैं अन्त में यही कहुंगा कि कर्म ही वह शक्ति है जो सपनों को लक्ष्य में और लक्ष्य को सफलता में बदलती है, यही नहीं जब कर्म निष्ठा और समपर्क से किए जाएँ तो समय स्वयं परिणाम सामने लाता है, बिना कर्म कुछ भी हासिल नहीं हो सकता जो लोग कर्म और मेहनत से पीछे रह जाते हैं उनके सपने कोरा कागज़ बन कर रह जाते हैं इसलिए कर्म को महान रख कर ही कार्य सही और समय पर होता है।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
समय, कर्म और सफलता का संगम “समय से पूरा हो काम, कर्म से होता है संभव”—यह पंक्ति जीवन के उस गूढ़ सत्य को उजागर करती है, जिसमें सफलता का संपूर्ण रहस्य छिपा हुआ है। समय अपने आप में निष्प्राण है, पर जब उसमें कर्म का स्पंदन जुड़ता है, तब वही समय सृजन का आधार बन जाता है। जीवन की धारा निरंतर बहती रहती है, उसमें ठहराव का कोई स्थान नहीं। जो व्यक्ति समय के साथ कदम मिलाकर चलता है और अपने कर्म को उसी लय में ढाल देता है, वही जीवन के वास्तविक अर्थ को समझ पाता है। केवल समय का होना पर्याप्त नहीं, उसे सार्थक बनाने के लिए कर्म का समर्पण आवश्यक है। कर्म वह शक्ति है, जो असंभव को संभव बना देती है। यदि समय सीमा निर्धारित हो, पर कर्म में शिथिलता हो, तो लक्ष्य अधूरा ही रह जाता है। वहीं यदि कर्म में निष्ठा और परिश्रम हो, तो सीमित समय में भी महान कार्य संपन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि कर्मठ व्यक्ति समय का अभाव नहीं, बल्कि अवसर देखता है। समय पर पूर्ण किया गया कार्य व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, विश्वास और प्रतिष्ठा का निर्माण करता है। यह उसके व्यक्तित्व को निखारता है और उसे समाज में एक आदर्श के रूप में स्थापित करता है। इसके विपरीत, टालमटोल और आलस्य समय को व्यर्थ कर देते हैं, जिससे अवसर हाथ से निकल जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम समय का सम्मान करें और अपने प्रत्येक कार्य को कर्म की पूर्ण निष्ठा के साथ निभाएं। जब समय और कर्म का यह सुंदर संगम होता है, तब सफलता केवल एक संभावना नहीं, बल्कि एक निश्चित उपलब्धि बन जाती है।अंत : यही कहा जा सकता है कि समय हमें अवसर देता है, पर उसे उपलब्धि में बदलने का कार्य केवल हमारे कर्म ही करते हैं। अतः जीवन में ऊँचाइयों को छूने के लिए समय और कर्म दोनों का संतुलन अत्यंत आवश्यक है।
- डॉ अलका पाण्डेय
मुंबई - महाराष्ट्र
किसी भी कार्य का निर्धारित समय से पूर्ण होना,उसके लिए किये गये कर्म पर निर्भर करता है।मात्र सोचने, योजना बनाने से कुछ नहीं हो सकता जब तक कि उस योजना को कार्यान्वित न किया जायें।कर्म बिना कुछ संभव नहीं होता। इसके साथ यह भी महत्त्वपूर्ण है कि कर्म सही दिशा में हो। एक श्लोक कहता है - समये कर्तव्यं कार्यं, विलंबं नाधिकं कुरु।कालो हि फलदायी, विलम्बं हानिकारकः। अर्थात कार्य को सही समय पर करना चाहिए, ज्यादा विलंब (देरी) नहीं करनी चाहिए। समय ही फल देता है, और देर करना हानिकारक होता है। स्पष्ट है कि कर्म, समय अनुसार ही करना चाहिए। इतना ही नहीं सही भी करना चाहिए तभी सफलता के साथ,पूर्व सुनिश्चित समय पर कार्य पूरा होता है।
- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'
धामपुर - उत्तर प्रदेश
जीवन में समय का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, वही अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है। समय पर किया गया कार्य न केवल संतोष देता है, बल्कि हमारे व्यक्तित्व को भी निखारता है। यदि हम अपने कार्यों को टालते रहते हैं, तो अवसर हाथ से निकल जाते हैं और बाद में केवल पछतावा ही शेष रह जाता है। किसी भी कार्य को समय पर पूरा करने के लिए कर्मठता आवश्यक है। केवल सोचने या योजना बनाने से कुछ नहीं होता, उसे कर्म में बदलना पड़ता है। कर्म ही वह शक्ति है जो हमारे सपनों को साकार करती है। परिश्रम, अनुशासन और निरंतर प्रयास से ही हम अपने लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं। समय और कर्म का संबंध एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। यदि हम समय का सही उपयोग करें और निरंतर कर्म करते रहें, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं रहता। अतः हमें चाहिए कि समय का सदुपयोग करें और अपने कर्मों के प्रति सजग रहें, तभी जीवन में सफलता और संतुष्टि प्राप्त होगी।
- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'
मुंबई - महाराष्ट्र
कोई भी काम समय से पूरा करने के लिए कर्म तो करना ही पड़ेगा. बिना कर्म किए कुछ भी नहीं हो सकता है. जैसे समय पर नहीं पहुंचने से ट्रेन खुल जाती है. तो समय पर पहुंचने के लिए हमें जल्दी निकलना पड़ेगा. यहां पर जल्दी निकलना ही हमारा कर्म हो गया. समय से काम पूरा करने के लिए तय समय से पहले और द्रुत गति से कार्य संपन्न करना पड़ेगा, वो भी सटीक रीति से.
- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "
कलकत्ता - पश्चिम बंगाल
मनुज बली नहीं होत है समय होत बलवान - - बचपन से पाठ्य पुस्तकों में और अन्यत्र सब ओर सुनते पढ़ते आ रहे हैं। सचमुच समय की महिमा अपरम्पार है। जो काम समय पर पूरा हो जाता है - - समझिये आधी सफलता मिल गई। इस आधी सफलता को भुनाना है तो कर्म की महत्ता समझनी होगी। हमारा कर्म ही हमारी पूजा है। इसलिये किसी काम की जिम्मेदारी लें तो पहले संकल्प लें - - समय पर पूर्ण करने का। सदुपयोग समय का हो तब ही आपका कार्य आभार और इज्जत पाता है। समय से काम पूरा करने के लिये कर्मशील ता जरूरी है। आलस्य और अकर्मण्यता इंसान को कहीं का. नहीं छोड़ती - - और "अब पछताये होत क्या जब चिडिया चुग गई खेत" - - वाली स्थिति हो जाती है जो हँसी का पात्र बनाती है और समाज में बेइज्जती भी। अतः उचित है कि अपने आप को तौलें - - मजबूत बनायें और जो काम हाथ में लिया है उसे समय पर पूरा करें। समाज में "साख" से बढ़कर कुछ नहीं होता। सामाजिक प्राणी इंसान समाज में साख के लिये ही जीता है - - इसलिये समय से काम पूरा करें - - और कर्मशील कर्तृत्ववान छवि रखेंं।
- हेमलता मिश्र मानवी
नागपुर - महाराष्ट्र
जीवन के परिवेश में समय का महत्व योगदान रहता है, जिसने समय पर कार्य पूर्ण कर लिया, वह सफल हो गया। समय से पूरा हो काम, कर्म से होता है सम्भव। वास्तविक रूप में यही हकीकत दर्शाता है। हमारे अच्छे कर्म रहे तो हर काम संभव हो जाता है, अगर कर्म ही बुरे हो तो किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिल सकती है। समय और कर्म एक दूसरे के पूरक प्रतीत होते है। इसलिए बड़े-बुजूर्ग हमेशा कहा करते थे, समय पर आज का काम, आज ही करे, दूसरे दिन नहीं करें, कल किसी ने नहीं देखा है......।
- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"
बालाघाट - मध्यप्रदेश
समय का बहुत महत्व है. काम को सही समय पर (समय सीमा के अंदर) पूरा करना अनुशासन का प्रतीक है. इसके साथ कर्म ही पूजा है. केवल सोचने या योजना बनाने से कुछ नहीं होता, उसे हकीकत में बदलने के लिए मेहनत (कर्म) करनी पड़ती है. कठिन-से-कठिन कार्य भी जब कर्मठता से किया जाता है, तो वह सम्भव हो जाता है.यह उक्ति हमें आलस्य त्यागकर समयबद्ध तरीके से कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है.
- लीला तिवानी
सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया
काम की सफलता का एक पक्ष यह भी निहित होता है कि वह काम समय पर पूरा हुआ है। इसका आकलन इससे लगाया जाता है कि काम में जो दिशानिर्देश दिये गये थे वे समयबद्ध तरीके से हुए हैं। अत: समय पर काम पूरा होना, कामों के प्रति लगन और मेहनत को इंगित करता है। अत: जो भी काम हाथ में लिया जावे वह नियत समय को ध्यान में रखकर समर्पित भाव से पूरा किया जाना चाहिए। यदि इसमें आलस्य या टाल-मटोल हुआ तो वह काम समय पर पूरे होने में व्यवधान ला सकता है या फिर जल्दबाजी में काम की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है। असल में काम में लगने वाले समय निर्धारण का आधार हर बिंदु के आकलन करने के बाद ही तय होती है। इसीलिए यदि समय से पूर्व या समय पर न होने से इसकी संभावना बनती है कि कहीं न कहीं, कुछ न कुछ लापरवाही हुई है। अत: कर्म ही, समय पर काम होने की सफलता का प्रमुख आधार होता है।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
जीवन की सफलता का मूल मंत्र केवल सपने देखना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर और कर्म के साथ पूरा करना है। समय और कर्म—ये दो ऐसे पहिए हैं, जिन पर जीवन की गाड़ी संतुलित गति से आगे बढ़ती है।समय किसी के लिए नहीं रुकता। वह निरंतर प्रवाहित होता रहता है, जैसे नदी का जल। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, समय भी उसी का सम्मान करता है। यदि हम अपने कार्यों को टालते रहते हैं, तो अवसर हमारे हाथ से फिसल जाते हैं। इसीलिए कहा गया है— “समय से पूरा हो काम” — अर्थात हर कार्य का एक उचित समय होता है, और उसे उसी समय पर पूरा करना सफलता की पहली शर्त है। परंतु केवल समय का ज्ञान पर्याप्त नहीं। यदि कर्म न हो, तो समय भी निष्प्रभावी हो जाता है। यहीं दूसरी पंक्ति अपना महत्व दिखाती है— “कर्म से संभव हो पाता है।” कर्म वह शक्ति है, जो असंभव को संभव बना देती है।मन में कितनी भी योजनाएँ हों, यदि वे कर्म में नहीं उतरतीं, तो वे केवल कल्पना बनकर रह जाती हैं। जैसे बीज को मिट्टी, पानी और श्रम चाहिए, तभी वह वृक्ष बनता है—वैसे ही लक्ष्य को परिश्रम चाहिए, तभी वह साकार होता है। समय और कर्म का संबंध अत्यंत गहरा है— समय दिशा देता है, और कर्म उस दिशा में चलने की ऊर्जा। यदि समय का पालन हो, पर कर्म न हो—तो परिणाम शून्य। और यदि कर्म हो, पर समय का ध्यान न हो—तो परिणाम अधूरा। आज के युग में, जहाँ प्रतिस्पर्धा तीव्र है, वहाँ यह और भी आवश्यक हो जाता है कि हम अपने कार्यों को समयबद्ध और कर्मप्रधान बनाएं। विद्यार्थी हो, कर्मचारी हो या साहित्यकार—हर किसी के लिए यह सिद्धांत समान रूप से लागू होता है।अतः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि— समय हमें अवसर देता है,और कर्म उस अवसर को उपलब्धि में बदल देता है। समय संग जो कर्म हो, जीवन हो उजियार।मेहनत से हर स्वप्न फिर, बन जाता साकार।।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
समय पर कार्य की पूर्णता केवल अनुशासन का परिणाम नहीं, बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र, संकल्प और कर्मनिष्ठा का सजीव प्रमाण होती है। जब मनुष्य समय का सम्मान करता है, तो समय भी उसके प्रयासों को सार्थकता प्रदान करता है। वास्तव में, कोई भी कार्य केवल इच्छाओं से नहीं, बल्कि निरंतर और ईमानदार कर्म से ही सम्भव होता है। कर्म ही वह शक्ति है जो असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य को भी संभव बना देती है। जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समयबद्ध और समर्पण के साथ निभाता है, वही जीवन में उत्कृष्टता और सफलता के उच्चतम शिखर तक पहुँचता है। अतः आवश्यक है कि हम समय की महत्ता को समझते हुए कर्मपथ पर अडिग रहें, क्योंकि यही वह मार्ग है जो हमें आत्मसंतोष, सम्मान और सच्ची उपलब्धियों की ओर अग्रसर करता है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
मनुष्य के जीवन में समय बहुत महत्वपूर्ण है। जिसने समय का मूल्य समझ लिया समझो उसने सब कुछ समझ लिया। समय बहुत अनमोल है। यह हम सभी जानते हैं की बीता समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए समय के मूल्य को समझते हुए हर काम उसके सही समय पर करने का मंत्र अपने जीवन में अपना लिया और उसे कार्यान्वित करना आरंभ कर दिया तो उसके सभी काम समय पर पूरे होते हैं, हर काम के लिए पर्याप्त समय मिलता है । उसके पास अपने किसी भी काम के लिए समय की कमी नहीं होती है। वह नये-नये कामों की योजना बना सकता है, उसके अनुसार अपनी समय सारिणी भी बना कर उस पर कार्य कर सकता है। आवश्यक यह है कि हम अपने सभी काम समय पर करें और यह करने से ही संभव होता है। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सफलता के नये-नये मार्ग खुलते जाते हैं। समय पर अपने सभी काम करते रहने की आदत से इन नये मार्गों पर चल कर सफलता प्राप्त करना सुगम हो जाता है। कबीर दास जी ने भी कहा है-
“ काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरी करेगा।।”
- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई
देहरादून - उत्तराखंड
जब किसी कार्य की समय सीमा तय की जाती है। तब उसे समय पर करना जरूरी हो जाता है।समय पर कार्य पूरा करने के लिए समय पर कर्म करना भी आवश्यक होता है। यदि समय सीमा निश्चित नहीं की गई हो, तब कार्य कभी भी कर सकते हैं। दैनिक जीवन में भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिस कार्य का जो समय हो उसी समय करें ताकि कोई असुविधा न हो।
- गायत्री ठाकुर 'सक्षम'
नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश
देखा जाए तो समय और कर्म जीवन की अमूल्य निधियां हैं पर जो इसका महत्व समझता है और उस पर ही ध्यान केंद्रित करता हुआ जीवन जीता है तो वह मानव अपने जीवन को सार्थक कर लेता है । वह महान व्यक्तित्व की श्रेणी में भी गिना जाता है ।जीवन की सभी अवस्थाओं में समय रहते यदि उससे संबंधित कर्म को कर लिया जाता है, तो सफलता निश्चित रूप से हाथ लगती ही है, जैसे-- शैशवावस्था में परिवार के माता-पिता, दादा दादी का प्यार उचित पालन पोषण होना जरूरी है। बाल्यावस्था में संस्कार देना शिक्षा प्राप्ति के साधन उपलब्ध कराना, किशोरावस्था में जीवि कोपार्जन के लिए स्वयं कर्म करना,तदुपरांत समय से विवाह बंधन में बंधना और गृहस्थ धर्म के कार्यों को तन मन के साथ पूर्ण करना। इसके बाद रिटायरमेंट से पूर्व ही बच्चों की परवरिश करके उन्हें स्वावलंबी बनाना। वृद्धावस्था में टेंशन से फ्री होना अपनी रुचि के अनुसार धार्मिक, साहित्यिक या सामाजिक कार्यों से जोड़ना चाहिए। पर इन सभी कार्यों को यदि समय से पूरा कर दिया तो जीवन चिन्तामुक्त और सुखद होता है। समय की कदर और तदनुरुप कर्म करना सभी को आना चाहिए ।
- डाॅ.रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
समय से पूरा हो काम कर्म से होता सम्भव ! समय से पूरा हो काम, गुणवत्ता से होना जरूरी होता है ! आपके कर्म में यदि साहित्य भाव प्रबल हो तो वह रचनाकार की पहचान रचना से होती हैं वह नाम नही कर्म गुणवत्ता से पहचान जाता है तभी कर्म से संभव । अपने महत्व को समझाता है। समय का सही उपयोग अपने कार्यों को बेहतर ढंग से करता है उसकी उत्पादकता गुणवत्ता को बढ़ाए रखने के प्रयास में लगा रहता है! अधिक कार्य मनमाफिक कर सकते है ! अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और अपने सपनों को पूरा कर सकते। प्रयास और परिश्रम ही सफलता की कुंजी है आंतरिक संतुष्टि मिलती है और हमारा आत्म-विश्वास बढ़ता है। और संतुष्ट और सुखी जीवन जीने में मदद करता है।
- अनिता शरद झा
रायपुर -छत्तीसगढ़
" मेरी दृष्टि में " समय सबसे बलवान है। जिस की कोई कीमत नहीं लगाईं जा सकती है। समय पर किया गया कार्य सर्वोत्तम कहलाता है। इसलिए समय पर किया गया काम ही सफलता के द्वार खोलता है। समय पर किया गया कार्य सार्थक माना जा सकता है ।
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