कमला दास स्मृति में चर्चा परिचर्चा
सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं असल में सपने वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते, कहने का मतलब सपने देखना अच्छी बात है लेकिन उनको पूरा करना सबसे बेहतरीन बात है क्योंकि मेहनती लोग सपने देखते ही नहीं है लेकिन उनको पूरा करके दिखाते हैं तो आईये आज इसी बात पर चर्चा करते हैं कि सपना देखने से मिलता है मार्ग , कर्म करने से मिलती है कामयाबी, मेरे ख्याल में सपने देखना जीवन को दिशा और प्रेरणा देता है जबकि कड़ी मेहनत व कर्म उस सपने को हकीकत में बदलकर सफलता लाती है, बिना कर्म के सपने सिर्फ कल्पना बन कर रह जाते हैं और यह भी सत्य है कि बिना सपने से कर्म दिशाहीन होते हैं इसलिए सपनों को लक्ष्य बनाकर, ईमानदारी से किए गए निरंतर प्रयास ही सफलता सुनिश्चित करते हैं, इसके साथ साथ सपने हमें लक्ष्य निधार्रित करने, प्रेरित रहने और जीवन में उर्जा बनाये ऱखने में मदद करते हैं, यह हकीकत है कि सपने देखना आसान है लेकिन उन्हें सच करने के लिए हिम्मत, मेहनत और समर्पण की जरूरत है यही नहीं अगर नियमित प्रयास सफलता के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि सपने हमें केवल यही बता सकते हैं कि हमें कहाँ जाना है लेकिन वहां तक पहुँचने के लिए केवल एक ही रास्ता है वो है हमारे कर्म, इसलिए मेहनत का कोई दुसरा विकल्प नहीं है सिर्फ कर्म ही सफलता दिलवा सकते है, आखिरकार यही कहुंगा कि सपने देखना अच्छी बात है क्योंकि यह जीवन में मेहनत, समझ, सोच और लक्ष्य निधार्रित करने की प्रेरणा देते हैं इसलिए सपने केवल देखने से पूरे नहीं हो सकते उन्हें पूरा करने के लिए ईमानदारी, मेहनत और संकल्प जरूरी है, सपने ही हमें नई संभावनाओं की और ले जाते हैं और भविष्य का खाका तैयार करने में मददगार सिद्ध होते हैं, इसलिए सपने देखने चाहिए लेकिन टूटने नहीं चाहिए क्योंकि "रूठे हुए अपने और टूटे हुए सपने बहुत तकलीफ देते हैं।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
भारत के महामहिम राष्ट्रपति अबदुल कलाम ने कहा था "सपने वे नहीं होते जो नींद में देखे जाते है - - सपने वे होते हैं जो जागती आँखों से देखे जाते हैं" - - कितना सही और मार्गदर्शक है यह कथन। सपने देखने से कर्म का मार्ग मिलता है और कर्म करने से मिलती है कामयाबी। जरूरत है कि हम सपने देखकर ही इतिश्री न करें बल्कि सपनों को पूरा करने के लिये जी जान लगा दें तभी इंसान के व्यक्तित्त्व और उसके सामाजिक दायित्व की समता स्थापित होगी और सृष्टि की उन्नति के साथ व्यक्ति की उन्नति भी संभव होगी। सपने और कर्म परस्पर पूरक होते हैं। बालपन से सपने देखें तो सारी कायनात उन सपनो को पूरा करने में अपनी ताकत लगा देती है। जरूरत होती है तो बस हमारे सच्चे निष्ठावान कर्म की। कर्म मार्ग ही हम सामान्य नागरिकों का सपना और कर्तव्य होना चाहिए। आज विश्व जिस क्राइसिस से गुजर रहा है इसमें हम सामान्य नागरिकों और इंसानों के लिये उचित है कि भ्रमों से दूर रहें - - कर्म करें बस। फल की चिंता या भविष्य की चिंता में सकारात्मक रहें।
- हेमलता मिश्र मानवी
नागपुर - महाराष्ट्र
जीवन में जो लक्ष्य बनाकर चलते हैं, वे अपने लक्ष्य में सफल तो होते ही हैं, समृद्ध भी होते हैं। इसका मुख्य कारण यह होता है कि लक्ष्य की मंजिल तक पहुंचने के लिए सजग भी रहना पड़ता है और प्रखर भी। लक्ष्य का भाव सपना से है। जिसमें होता है, एक मार्ग, एक धुन, एक जज्बा और कुछ कर दिखाने का हौसला। जो कर्म करने को उत्साहित करता है और परिणाम में कामयाबी दिलाता है। अत: सार और मर्म यही है कि कामयाबी ऐसे ही नहीं मिल जाती है, उसके लिए सपना देखने और फिर सपने को साधे रहने के लिए श्रम करना होता है, सामर्थ्यवान बनाना होता है ,साथ ही साथ अपने-आप को बहकने, भटकने और टूटने से बचाना होता है।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
प्रकृति का नियम है कि दुनियां में कुछ भी प्राप्त करने के लिए व्यक्ति की नजर में, एक निश्चित उद्देश ब लक्ष्य होना चाहिए , जिसे हम व्यक्ति का सपना भी कह सकते हैं !! किसी सपने , या उद्देश्य के बिना जीवन , निरर्थक लगता है !! जब हम कुछ प्राप्त करने की सोचेंगे , तभी हम उसे प्राप्त करने का प्रयास अथवा कर्म करेंगे !! अतः सपना व्यक्ति के कर्म का मार्ग प्रशस्त करता है !! ये तो सर्वविदित तथ्य है कि जब तक हम कर्म नहीं करेंगे , लंबी नहीं मिलेगी !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
सपना देखने से मार्ग मिलता है। यहां सपने से आशय निद्रा में देखने वाले स्वप्न से नहीं है, बल्कि दिन में या रात में जाग्रत अवस्था में भविष्य के प्रति योजना बनाने से है।इस योजना की सफलता के लिए मार्ग मिलता है संबंधित व्यक्तियों से चर्चा करके।उस क्षेत्र में सफल लोगों से मार्गदर्शन प्राप्त करके। इतना सब हो जाने के बाद उक्त योजना को सफल बनाने के लिए, मूर्त रूप देने के लिए कर्म करना अत्यावश्यक है।उस योजना अनुसार कर्म करके जब सफलता मिलती है तौ अवर्णनीय सुहानुभूति होती है।यह सफलता का फल होता है जो कर्म करके प्राप्त होती है।
- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'
धामपुर - उत्तर प्रदेश
जब किसी कार्य को करने की ठान लेते हैं अर्थात उसी के सपने देखने लगते हैं तब कोई न कोई मार्ग उस सपने को पूर्ण करने का निकल आता है। लक्ष्य को ध्यान रखते हुए जब कर्तव्य पथ पर चलते हैं तो सफलता भी मिल जाती है। यही है चिंतन का विषय,स्वप्न देखो, मार्ग ढूंढ़ो ,और कर्म करो। सफलता निश्चित दौड़ी आएगी।
- गायत्री ठाकुर 'सक्षम'
नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश
सपना देखने की चीज़ है देखना चाहिए. देखने में क्या हर्ज है. सपना देखने से मार्ग नहीं मिलता बल्कि मार्ग ढूंढने में आसानी होती है.मरहूम राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम कहते थे बड़ा बड़ा सपना देखना चाहिए.सपने देखने से ही आदमी बड़ा बन सकता है. लेकिन बिना कर्म किए कुछ भी नहीं हासिल हो सकता है.और कामयाबी के लिए तो कर्म करना ही पड़ेगा.हम काम नहीं करेंगे और कहें कि कामयाबी मिल जाय ये हो नहीं सकता है. सपना भी देखना चाहिए और कर्म भी करना चाहिए. तो सबकुछ हासिल हो सकता है.
- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - पश्चिम बंगाल
सपने मन के अंदर घटित घटनाओं का प्रारूप होते है ! जो हमारी सोच के अनुकूल बनाती है अच्छा सोचते है तो अच्छे सपने आते है ! बुरा सोचते है तो बुरे सपने आते है ! हम अपनी सोच परिस्थितियों के अनुकूल बन जीवन क्रम में कर्म में लगते है ! हर सपनों को जीवन से जोड़ कामयाबी हासिल करते है !तब कहते है सपने मन के अंदर घटित घटनाओं और कर्म के महत्व को समझाता है! हमने अच्छे कर्म किए है !तब कहते है हमने जो सपने देखे वो पूरे हो गए !हमारी आस्था उसने निहित हो जाती है और हम कालखंड परिस्थितियों को जोड़ गुना भाग कर अपने सपने को चुना है ! कर्म क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते है ! और यदि हमारे सपने पूरे नही होते तो हम ख़ुद के भ्रमजाल में फँस मन गढ़ंत कहानियाँ गढ़ते है ! डिप्रेशन में चले जाते है ! बाबा बैगा गुनिया से इलाज कराते हँसी के पात्र मुंगेरी लाल के सपने की तरह बन जाते है ! हमे अपने कर्म पर भरोसा कर आगे बढ़ना चाहिए ! अपने हमें प्रेरणा और ऊर्जा देते हैं और हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।सपने देखने से हमें आंतरिक संतुष्टि मिलती है और हमारा आत्म-विश्वास बढ़ता है।कर्म सफलता की कुंजी है, और इसके बिना हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकते ! इसी ऊहापोह में हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रयास और परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है।और आंतरिक शक्ति कर्म करने से आंतरिक आत्म-विश्वास बढ़ता है।सपनों और कर्म का संयोजन जीवन की सफलता का मार्ग है, और इसके बिना हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकते।जो हमें आंतरिक संतुष्टि देता है और हमारा जीवन सुखी और समृद्ध बनाता है।
- अनिता शरद झा
रायपुर - छत्तीसगढ़
यह पंक्ति जीवन के गहरे सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है। सपना वह दीपक है जो हमारे भीतर दिशा का प्रकाश जगाता है। बिना सपना देखे मनुष्य भटक सकता है, क्योंकि उसके पास लक्ष्य ही नहीं होता। सपना हमें यह बताता है कि हमें कहाँ पहुँचना है, किस दिशा में आगे बढ़ना है। किन्तु केवल सपने देखना पर्याप्त नहीं है। यदि सपनों को कर्म का साथ न मिले, तो वे केवल कल्पना बनकर रह जाते हैं। कर्म वह सेतु है जो सपनों को वास्तविकता से जोड़ता है। जब व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करता है, कठिनाइयों का सामना करता है और धैर्य बनाए रखता है, तभी सफलता उसके कदम चूमती है। इतिहास और वर्तमान दोनों इस सत्य के साक्षी हैं—जिन लोगों ने बड़े सपने देखे और उन्हें साकार करने के लिए अथक परिश्रम किया, वही जीवन में ऊँचाइयों तक पहुँचे। वहीं, जिन्होंने केवल सपनों में खोकर कर्म को नजरअंदाज किया, वे अक्सर निराशा का अनुभव करते हैं। इसलिए जीवन में संतुलन आवश्यक है—सपने भी हों और उन्हें पूरा करने का साहस और परिश्रम भी।सपना दिशा देता है, और कर्म गति।दिशा और गति मिल जाएँ, तो मंज़िल दूर नहीं रहती।
निष्कर्षतः
सपना बीज है, और कर्म उसका पालन-पोषण। जब दोनों साथ होते हैं, तभी सफलता का वृक्ष फलता-फूलता है।
- डाॅ.छाया शर्मा
अजमेर -राजस्थान
सपना वह प्रथम चिंगारी है, जो मनुष्य के भीतर लक्ष्य का प्रकाश उत्पन्न करती है। बिना सपना देखे कोई दिशा नहीं बनती, कोई उद्देश्य जन्म नहीं लेता। परन्तु केवल स्वप्न देखने से ही सफलता नहीं मिलती है बल्कि वह तो मात्र आरम्भ है। वास्तविक परिवर्तन तब होता है जब व्यक्ति अपने सपनों को कर्म की कठोर धरातल पर उतारता है। कर्म ही वह शक्ति है, जो कल्पना को वास्तविकता में परिवर्तित करती है। इतिहास साक्षी है कि जिन्होंने केवल सपने नहीं देखे, बल्कि निरन्तर परिश्रम, संघर्ष और धैर्य के साथ कर्म किया और वही व्यक्ति समाज, राष्ट्र और मानवता के लिए आदर्श बने। यह उक्ति हमें यह सिखाती है कि दृष्टि (Vision) और क्रिया (Action) का संगम ही सफलता का मूल मंत्र है।” वर्तमान समय में, जब अनेक लोग केवल सोचने और कहने तक सीमित रह जाते हैं, वहाँ उक्त प्रेरणा एक आह्वान है जो कहता है कि उठो, जागो और अपने सपनों को कर्म में ढालकर ही सच्ची उपलब्धि प्राप्त करो। अन्ततः यही कहा जा सकता है कि सपना दिशा देता है, पर कर्म ही उसे मंजिल तक पहुँचाता है। जैसे मैं पिछले 32 वर्षों से सामाजिक तन्त्र से जूझते हुए सफलताओं को प्राप्त कर रहा हूॅं और जब तक सम्पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा संघर्ष करता रहूंगा। यही मेरा दृढ़ विश्वास, स्वप्न और कर्म है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और लद्दाख
यह सच है नींद में सपने आते ही हैं और कभी-कभी यह भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का संकेत भी दे जाते हैं क्योंकि सपने मानव जीवन की उथल-पुथल उसकी अवचेतन मन से मस्तिष्क तक हमारे भावों की दुनिया को संसाधित करते हैं। कभी यह शुभ- अशुभ, सकारात्मक- नकारात्मक, प्रगति- अवनति के मार्ग के पूर्व सूचक होते हैं। स्वप्न में हमारी स्थूल इंद्री साथ नहीं देती केवल सूक्ष्म इंद्रियां ही साथ रहती हैं और वह अपनी धारणा के अनुसार जहां चाहें ले जाती हैं। हम नींद से जागने पर ही वास्तविक दशा को जान पाते हैं। अतः हमें किसी भी प्रकार के स्वप्न हो उनके लिए अपनी आंतरिक अवस्था पर विचार करके कर्म पथ पर चलना ही श्रेयस्कर है। सपने में देखा कि बहुत अच्छे नंबर से पास होऊंगा, पता चला स्वप्न को सत्य मान कर तदनुरूप परिश्रम ही नहीं किया तो कामयाबी मिलना तो दुःस्वप्न ही होगा। अत:जीवन की कोई भी अवस्था या क्षेत्र हो पूरी तरह सपनों को प्रशस्तपथ ना माने बल्कि मूल रूप से कर्म से सफलता का सत्य मानना चाहिए। स्वप्नों का कोई भरोसा नहीं । कविवर गोपाल दास नीरज की कविता भी यही सीख देती है-- "स्वप्न झरे फूल से...चुभे शूल से। नींद भी खुली न थी, कि हाय धूप ढल गई।।"
- डाॅ.रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
" मेरी दृष्टि में " कर्म में सपना बहुत महत्वपूर्ण होता है। जो समय समय पर मार्गदर्शन करता है। अनुभव से आगे बढ़ते हैं। फिर अन्त में कर्म अपनी सहजता का प्रर्दशन करता है । जिस से कामयाबी उच्च स्तर प्राप्त होती है। यही सपना से कर्म और कर्म से कामयाबी तक का सफर तय होता है।
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