योगेश स्मृति में चर्चा परिचर्चा

.       सत्य तो सत्य होता है। जो कभी छुपता है। सत्य खुद बोलता है। सत्य को कभी खोजना नहीं पड़ता है। यही सत्य पहचान है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
.      सत्य केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यह वह प्रकाश है जो अज्ञान, भ्रम और असत्य के अंधकार को दूर करता है। जब हम कहते हैं कि “सत्य से बड़ा कुछ नहीं”, तो यह केवल एक नैतिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा है।भारतीय संस्कृति में सत्य को परम मूल्य माना गया है। “सत्यमेव जयते” का उद्घोष हमें यह सिखाता है कि अंततः जीत सत्य की ही होती है, चाहे असत्य कुछ समय के लिए कितना ही प्रभावी क्यों न दिखे। सत्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है, परंतु यही मार्ग आत्मशांति, विश्वास और स्थायी सम्मान की ओर ले जाता है। सत्य का पालन करने वाला व्यक्ति भीतर से निर्भय होता है। उसे किसी दिखावे या झूठ का सहारा नहीं लेना पड़ता। वहीं असत्य क्षणिक लाभ तो दे सकता है, परंतु अंततः वह व्यक्ति को अशांत और अस्थिर बना देता है। समाज में भी सत्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि हर व्यक्ति अपने व्यवहार, वचन और कर्म में सत्य को अपनाए, तो विश्वास, न्याय और सद्भाव का वातावरण स्वतः निर्मित हो जाता है। यही कारण है कि सत्य को धर्म, न्याय और नीति का मूल माना गया है। किन्तु आज के युग में, जहाँ प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ बढ़ रहे हैं, सत्य का पालन चुनौतीपूर्ण हो गया है। फिर भी, यही वह समय है जब सत्य की आवश्यकता और भी अधिक है—क्योंकि यही हमें मानवीय मूल्यों से जोड़ता है। निष्कर्ष - सत्य केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि जीवन की आत्मा है। यह हमें सही और गलत के बीच अंतर समझाता है और हमें एक सशक्त, ईमानदार और संतुलित व्यक्तित्व की ओर ले जाता है। इसलिए न केवल यह कहना, बल्कि जीना भी आवश्यक है कि— “सत्य ही सबसे बड़ा है, और वही सबसे सुंदर भी।”

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

            सत्य एक ऐसी शक्ति है जो हर परिस्थिति में स्थिर रहती है। यह न केवल एक मूल्य है, बल्कि जीवन का आधार भी है।

   सत्य की महत्ता :

    - सत्य से ही आत्मविश्वास बढ़ता है।

    - सत्य संबंधों में मजबूती लाता है।

    - सत्य से ही न्याय और विकास संभव है।

   सत्य की ताकत :

    - सत्य कभी छिपता नहीं, समय के साथ उजागर होता है।

    - सत्य बोलने वाले को कभी पछताना नहीं पड़ता।

    - सत्य से बड़ा कोई हथियार नहीं।

संक्षेप में:सत्य ही जीवन का मूल है, और इससे बड़ा कुछ नही होता ।

- डा० प्रमोद शर्मा प्रेम 

नजीबाबाद - उत्तर प्रदेश 

        सत्य तो सब कुछ होता है, सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता...  यह बिल्कुल सच है... सत्य ही जीवन है चूंकि सत्य ही हमारे जीवन का मूल आधार है... हमारे जीवन के कितने अध्याय होते हैं। कभी हम अपने सत्य को झूठ के साथ लिए झूलते हैं, कभी अंधकार से प्रकाश की ओर कूच करते हैं...मानव अवतार लिया है अतः मनुष्य जीवन का यही सत्य है। सत्य सदा अकेला रहता है और झूठ को कितने सहारे लेने पड़ते हैं किंतु सत्य अकेला है तो क्या आखिर जीत सत्य की ही होती है क्योंकि सत्य शाश्वत,निर्विकार और सर्वोच्च है जो समय और परिस्थिति के साथ नहीं बदलता। जीवन का सर्वोच्च धर्म सत्य ही है, इसका कारण यही है कि जो आया है उसे एक दिन जाना ही है। यही हमारे जीवन का सबसे बड़ा सत्य है ...यही जीवन- सार है।

- चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

       अगर सत्य की बात करें तो इस बात से सभी सहमत होंगे की सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है लेकिन सत्य ही मानसिक सुकून और आत्म संतुष्टि प्रदान करता है क्योंकि सत्य ही जीवन का मूल आधार है और इसी  से सर्वोच्च सफलता, आंतरिक शान्ति और विश्वास का निर्माण होता है, तो आईये आज इसी  चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं कि सत्य तो सब कुछ होता है, सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता है, मेरा मानना है कि सत्य से बढ़कर कोई तप या यज्ञ नहीं है तथा सत्य चरित्र का आधार है तभी तो कहा गया है सत्य ही सर्वोच्च धर्म और सत्यमेव जयते कहने का भाव चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हो अंत में सत्य ही विजयी होता है लेकिन झूठ पर आधारित जीवन अस्थिर होता है जबकि सत्य जीवन को स्थिरता और अर्थ प्रदान करता है, इसके साथ साथ देखा जाए ईमानदारी, नैतिकता और सच्चाई ही इस ब्रह्माण्ड का आधार है जो सूर्य की चमक, वायु के प्रवाह और जीवन को नियंत्रण करती है और सत्य ही हमारे चरित्र को गढता है, विश्वास पैदा करता है तथा जीत भी सुनिश्चित करता है इसमें ही परम शक्ति है, अन्त में यही कहुंगा कि, सच्चाई में वो ताकत है जो निडरता, मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्रदान करती है, जबकि इतिहास गवाह है कि झूठ की आखिर हार होती है और सच्चाई में अक्सर जीत जैसे राजा हरिश्चन्द्र जी की जीत कथा सभी जानते हैं,  जिससे साफ जाहिर होता है कि सत्य हमारे चरित्र और जीवन का मूल आधार है इसके बिना जीवन नहीं टिक सकता, सत्य ही मुक्ति और स्थिरता का एक मात्र मार्ग है जिसके साथ स्वंय ईश्वर रहते हैं इसलिए सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -  जम्मू व कश्मीर

    सत्य और असत्य दो ऐसे तथ्य हैं जिन पर संसार चलायमान है।फिर भी सत्य से यह दुनिया चल रही, सत्य से ही सारा संसार है। सत्य शाश्वत है,अमर है। कभी छुपता नहीं, मिटता नहीं। देर सबेर भले ही हो मगर अंत में सत्य प्रकट होता ही है। सत्य के आगे हमेशा असत्य हार जाता है। कोई झूठ उसे दबा नहीं सकता। सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता है। वही सबसे बड़ा न्यायाधीश है।

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर -  मध्य प्रदेश 

     सत्य सर्वोपरि होता है !! लाख परतों मैं छुपा लो सच को , पर अंततः सत्य सामने आ ही जाता है ! असत्य , अर्थात झूठ , पाप, फराब , का राज  उस समय तक ही होता है , जब तक सत्य प्रकट नहीं होता ! उस क्षणिक राज पर इतराते हैं लोग , व हंसते हैं अन्य सच्चे लोगों पर , लेकिन जब सत्य उजागर होता है , ये अंधकार समाप्त हो जाता है !! सत्य को जितना भी छुपाओ , यह नहीं छुपता इसलिए सत्य सर्वशक्तिमान है , व इस से बड़ा कुछ नहीं नहीं हो सकता !!  सत्य ईमानदारी है , सत्य सच्चाई है , सत्य यथार्थ है व सत्य नेकी की वह राह है , जिसपर सबको चलना चाहिए !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

       सत्य तो सब कुछ होता है,सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता है।ईश्वर सत्य है। सत्यं शिवम् सुंदरम्। सत्यमेव जयते। जैसे वाक्य सत्य की महत्ता को बता रहे हैं। हमारे यहां तो ईश्वर के भी सत्यनारायण रुप की पूजा होती है। व्रत रखें जाते हैं, कथा होती है। सच्चे का बोलबाला और झूठे का मुॅंह काला जैसी कहावतें हैं।श्लोक मिलता है -

नास्ति सत्यसमो धर्मो न सत्याद्विद्यते परम् ।

न हि तीव्रतरं किञ्चिदनृतादिह विद्यते ॥

अर्थात सत्य के समान कोई धर्म नहीं है और सत्य से बड़ा कुछ नहीं है। असत्य (झूठ) से बढ़कर और कोई पाप नहीं है।इसी बात को कबीरदास ने भी कहा -

सांच बराबर तप नहीं,झूठ बराबर पाप। जाके हिरदय सांची है ताके हिरदय आप।। सत्य के पथ पर चलकर देवत्व को प्राप्त किया जा सकता है -

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

अर्थात सत्य की ही जीत होती है, झूठ की नहीं। सत्य के मार्ग पर चलकर ही देवत्व को प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए सत्य मार्ग से भटकना नहीं चाहिए।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल' 

धामपुर - उत्तर प्रदेश

      सत्य ही सब कुछ है “सत्य” केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार, आत्मा की आवाज़ और मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। यह वह शक्ति है जो अंधकार में भी प्रकाश का मार्ग दिखाती है। सत्य से बड़ा इस संसार में कुछ नहीं, क्योंकि यह न तो समय के साथ बदलता है और न ही परिस्थितियों से प्रभावित होता है। सत्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है, परंतु अंततः वही विजय दिलाता है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन्होंने सत्य को अपनाया, उन्होंने ही समाज में सम्मान और स्थायी पहचान प्राप्त की। चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यों न हों, सत्य पर चलने वाला व्यक्ति अंत में निडर और आत्मविश्वासी रहता है। झूठ और असत्य कुछ समय के लिए लाभ दे सकते हैं, लेकिन वे स्थायी नहीं होते। असत्य की नींव कमजोर होती है, जो कभी भी गिर सकती है। इसके विपरीत, सत्य की नींव मजबूत होती है, जो जीवन को स्थिरता और शांति प्रदान करती है। सत्य हमें नैतिकता, ईमानदारी और न्याय की राह पर चलना सिखाता है। यह हमारे व्यक्तित्व को निखारता है और समाज में विश्वास स्थापित करता है। जब व्यक्ति सत्य का पालन करता है, तो उसके भीतर आत्मबल बढ़ता है और वह हर परिस्थिति का सामना साहस के साथ कर सकता है। अंततः, सत्य केवल बोलने की चीज़ नहीं, बल्कि जीने का तरीका है। यह हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों में झलकना चाहिए। यदि हम अपने जीवन में सत्य को अपनाते हैं, तो न केवल हमारा जीवन सफल होगा, बल्कि समाज भी एक बेहतर दिशा में अग्रसर होगा। निष्कर्ष :- सत्य ही जीवन का सबसे बड़ा धन है। यह हमें सच्ची खुशी, सम्मान और आत्मसंतोष प्रदान करता है। इसलिए हमें हर परिस्थिति में सत्य का साथ देना चाहिए, क्योंकि सच में ही सच्ची शक्ति और वास्तविक सफलता छिपी होती है।

- डा अलका पान्डेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

        सत्य सब कुछ होता है. सत्य से बड़ा कुछ भी नहीं हो सकता है. झूठ मनुष्य का बनाया होता है जबकि सत्य ईश्वर का बनाया होता है. सत्य उस अदृश्य शक्ति के द्वारा बनाया गया है जिसके दम पर ये दुनिया चलती है. सबसे बड़ा सत्य तो ये है कि जो बनता है उसे एक दिन बिगड़ना है.ये मानव जीवन एक दिन खत्म होना है जिसे हम मृत्यु कहते हैं. सूरज पूर्व दिशा में उगता है पश्चिम में डूबता है, रात के पीछे दिन के पीछे रात होना है. बहार के बाद पतझड़ आना है. ये सब सत्य है. इस वर्तमान जगत में जो कुछ भी दृष्टि गोचर होता है सब सत्य पर ही तो आधारित है. सत्य हमेशा सत्य ही रहता है, इसे बदला नहीं जा सकता है. सत्य से बड़ा कुछ नहीं इसके वश में भगवान भी रहते हैं. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

     सत्य ही सर्वोपरि है, अटल है, सिद्ध होकर ही रहता है. सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता है. सबसे बड़ी बात यह है कि सत्य बोलने वाले को याद नहीं रखना पड़ता कि किसको क्या बोला-कहा था! जिस प्रकार प्रकाश के बिना कोई वृक्ष फल-फूल नहीं सकता, उसी प्रकार सत्य के बिना जीवन सफल तथा सार्थक नहीं हो सकता. जिस घर की दीवारें सीधी खड़ी न हों उसके किसी भी क्षण गिरने की सम्भावना बनी ही रहेगी. इसी प्रकार सत्य-विहीन जीवन में पतन की आशंका का बना रहना स्वाभाविक है. सत्य को कितना भी झुठलाया जाए, सत्य सदा सत्य ही रहता है और एक दिन उजागर होकर ही रहता है. चाहे कितनी भी बार झूठ बोला जाए, सत्य को झूठ नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता है.

- लीला तिवानी 

सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया

     इतिहास गवाह है, सत्य की राह में सब कुछ मिट जाता है। असत्य का बोल बाला रहता जरुर है, परन्तु सत्य तो सब कुछ होता है, सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता है। वास्तव में सत्य परिभाषित होकर रहता है। हम असत्य को कितना भी छूपा लीजिए, समय आने पर सत्य आ ही जाता है। आखिरकार झूठ, झूठ ही होता है। जिसने सामने वालों को पहचान लेता है, वही गुणकार है.....।

-आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

       बालाघाट -‌ मध्यप्रदेश

       सत्य के सार में सबकुछ है पूरी सृष्टि सत्य के सार में ॐका उद्घोष है सुंदर शिव भू रूपा अर्धनारीश्वर ईश्वर ने प्रकृति की कल्पना की बताया सत्य से बड़ा कुछ नही है ! ईश्वर के दिये रूप गुण का मान रख अपने अंदर के सत्य को स्वीकारो बाहर ला प्रकृति का सुंदर रूप दिखाओं जोगमाया,काली  सत्य रूप सत्य निरूपित सरस्वती  संसार में असत्य का ज्ञान होन न देगी ! सरस्वती ही लक्ष्मी रूप में विराजमान प्रगट रहती है रौद्र रूप ले काली ,दुर्गा बन सत्य को स्थापित करने निरंतर प्रयासरत हरविधाओं का आंकलन भगवती करती मन के सत्य भाव को निरूपित करती है ! तभी अकसर इंसान के मुँह से निकलता जब भी जरूरत पड़ी तो बुला लेना झूठ का सहारा ना लेना इसकी माँग इतनी तगड़ी है अच्छे अच्छों को पानी पिला कर सत्य का दंभ भरते अपनी प्रतिभा दिखाने में कभी कम या कमी नही दिखाते! असत्य मुँह कालिक पोत सत्य का दंभ भरते निडर होकर स्वयं के आत्मलोकन में लीन हो! जन सेवा में जुट जाते है ! सार में जनसेवा और जन सेवा में सत्य विश्वास के साथ बैठता है मुकाम हासिल कर लेता है ! स्वीकारता है सत्य से बड़ा कुछ नही है 

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

     " सत्यमेव जयते ",  ' सत्य ही शिव है , " "सत्य ही सुंदर है " ये ऐसे अनमोल कथन है जिनमें जीवन का सार है, मर्म है और कर्म भी। सत्य से बड़ा न कोई है, न हो सकता। सत्य सब कुछ है, अपराजेय है।  मंजिल है। इसलिए जो सत्य को छिपाने का जतन करते हैं, झूठ के लबादे से ढाकने का प्रयास करते हैं। एक दिन उन्हें मुँह की खानी होती है। पराजित होना पड़ता है। अत: हमें सदैव सत्य का पक्षधर रहना चाहिए और साथ भी देना चाहिए। यह न्यायसंगत भी है,तर्कसंगत भी है,व्यवहारिक भी है और नैतिक भी है। इससे हमारा भाग्य, सौभाग्य बनाता है और ईश्वर हमारे संरक्षक रहते हैं।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

      "सत्य मेव जयते" - - बचपन से देखते सुनते आ रहे हैं। सच है सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता। लेकिन आज के दौर में "सत्य" दबाया जाता है सत्ता के द्वारा सत्ता के लिये! राजनीति गंदली हो रही है  - - आज की पीढी सत्य के नहीं असत्य के घिनौने रूप देख रही है। राजनीति घर से लेकर - - नौकरी तक और केजी क्लास से लेकर यूनिवर्सिटी तक हर ओर नजर शतरंजी राजनीति आ रही है जिसमें सत्य की कोई बिसात ही नहीं है। राष्ट्रीयता की भावना थोथी और भोथरी हो गई है। हर ओर असत्य का बोलबाला है। जिसका झूठ जितना बड़ा है उसका झंडा उतना ऊंचा है। सिर्फ राजनीति में ही नहीं हर ओर असत्य का बोलबाला है। जरूरत इस बात की है कि हर व्यक्ति अपने असत्य को पहचाने  - - अपने आपको माँजे - - परिष्कृत करें तभी व्यष्टि की बात समष्टि की बात बनेगी  - - - और सिद्ध होगा कि 

बात से बात चली और बात  बन बैठी! 

तुम बनाना ही न चाहो तो ये और बात है!!

सभी को अपने मन के भीतर सत्य की ज्योत जलानी होगी - -अपने मन के साथ जन मन को जगाना तभी सत्य का ज्योति-कलश छलकेगा और सत्य की आब से समाज देश विश्व और ब्रम्हांड आप्लावित होगा।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र 

              सत्य केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का मूल आधार, आत्मा का प्रकाश और समाज का नैतिक कम्पास है। सत्य वह अदृश्य शक्ति है जो व्यक्ति के अंतर्मन को जागृत करती है। वह उसे अपने कर्तव्यों का बोध कराती है और अन्याय, छल एवं भ्रम के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होने की प्रेरणा देती है। जब परिस्थितियाँ विपरीत होती हैं और व्यवस्था मौन हो जाती है।  जब झूठ अपने प्रभाव से सत्य को दबाने का प्रयास करता है तब भी सत्य अपनी शांत लेकिन अडिग शक्ति से स्वयं को सिद्ध करता है। सत्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है। उसमें संघर्ष, उपेक्षा और कभी-कभी अत्यधिक असहनीय अपमान भी सहना पड़ता है। किन्तु यही संघर्ष व्यक्ति के चरित्र को निखारता है और उसे नैतिक ऊँचाइयों तक पहुँचाता है। इतिहास साक्षी है कि जिन व्यक्तियों ने सत्य को अपना धर्म बनाया, उन्होंने न केवल स्वयं को बल्कि समाज और राष्ट्र को भी नई दिशा दी। सत्य से ही विश्वास उत्पन्न होता है और विश्वास से ही न्याय, समानता और लोकतंत्र की नींव सशक्त होती है। यदि व्यक्ति अपने विचारों, वचनों और कर्मों में सत्य को धारण कर ले, तो वह न केवल अपने जीवन को सार्थक बनाता है बल्कि सम्पूर्ण समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बनता है। इसलिए सत्य को केवल एक विचार के रूप में नहीं बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षण में अपनाना ही वास्तविक उत्कृष्टता है। यही सच्ची देशभक्ति है और मानवता की सर्वोच्च सेवा है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) - जम्मू और कश्मीर

      सत्य जीवन का आधार है। यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य के चरित्र और विश्वास की नींव है। सत्य से ही विश्वास जन्म लेता है और विश्वास से ही संबंध मजबूत होते हैं। जिस जीवन में सत्य होता है, वहाँ शांति, सम्मान और स्थिरता बनी रहती है। सत्य से बड़ा कुछ नहीं होता, क्योंकि असत्य चाहे कुछ समय के लिए आकर्षक लगे, पर अंततः वह टूट जाता है। सत्य कठिन हो सकता है, लेकिन उसका परिणाम हमेशा स्थायी और श्रेष्ठ होता है। यही कारण है कि महान व्यक्तियों ने हमेशा सत्य के मार्ग को अपनाया। हमें हर परिस्थिति में सत्य का साथ देना चाहिए, क्योंकि सत्य ही जीवन को सही दिशा और सच्चा अर्थ देता 

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

" मेरी दृष्टि में " सत्य जीवन का सत्य है । मौत अपने आप में अटल सत्य है। यह सब से बड़ा सत्य है। शायद इस से बड़ा सत्य नहीं है। फिर भी लोग सत्य से परेशान है। यह उनके कर्म का परिणाम है।‌ जो सत्य से भटक रहा है।

          - बीजेन्द्र जैमिनी 

        (संचालन व संपादन)


Comments

  1. लाख पर्दे में छुपाओ सत्य कभी छुपता नहीं। समय आने पर प्रमाण सहित अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। वह सर्वोपरि है ।किसी के दबाव में नहीं रहता।

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