उत्सव शब्द से तात्पर्य है--- त्यौहार ,समारोह ,आनंद, खुशियों के मौके एवं मंगल कार्य। जब भी मनुष्य के जीवन में प्रसन्नता, उल्लास, उमंग से जुड़े कार्य होते हैं ,तब वह तन- मन- धन से सक्रिय होकर उत्सव का जश्न मनाता है ।भारत सांस्कृतिक ,धार्मिक , विरासत का देश है। यहां सभी धर्म संप्रदायों से जुड़े लोगों के त्यौहार आए दिन होते रहते हैं, जो बच्चों की उमंग, युवाओं के जोश, तल्लीनता एवं बड़ों के आशीर्वाद से हर्षोल्लास साथ मनाए जाते हैं। हमारी परंपराएं, संस्कृति, प्रकाश, रंग, रोशन और मिठाइयों से जीवन को आनंददायक बनाकर मेलजोल एकता का संदेश देती हैं । जिसमें खुशियां बांटी जाती है। देखा जाए तो यह ऐसे उत्सवी रंग- ढंग से युक्त जीवन सुघर व सुदीर्घी भी होता है ,जो हर वर्ग, आयु के लिए अति आवश्यक है। हम अपने प्रतिदिन के कार्यों को भी यदि मन लगाकर उत्सव की तरह संपादित करें तो सच में मानव का जीवन उत्सव बन जाएगा ।
- डॉ. रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
जीवन केवल सांसों का क्रम नहीं है, बल्कि भावनाओं, अनुभवों, संबंधों और आशाओं का सुंदर संगम है। यदि जीवन को केवल संघर्ष, जिम्मेदारियों और चिंताओं में बाँध दिया जाए तो वह बोझिल हो जाता है। इसलिए कहा गया है कि उत्सव ही जीवन का वास्तविक स्वरूप है और जीवन में उत्सव का होना आवश्यक है। उत्सव केवल त्योहारों तक सीमित नहीं होते। यह हमारे मन की वह अवस्था है जिसमें हम छोटी-छोटी खुशियों को भी पूरे हृदय से स्वीकार करते हैं। बच्चे की मुस्कान, मित्र से मुलाकात, परिवार के साथ बिताए कुछ पल, प्रकृति की हरियाली या वर्षा की पहली बूंद—ये सब जीवन के छोटे-छोटे उत्सव ही तो हैं। भारतीय संस्कृति में तो जीवन को उत्सवमय बनाने की परंपरा रही है। जन्म से लेकर विवाह और ऋतु परिवर्तन तक हर अवसर को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य केवल आनंद लेना नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना भी है। आज के तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में मनुष्य अक्सर खुशी के क्षणों को भूल जाता है। यदि हम जीवन को केवल लक्ष्य और उपलब्धियों तक सीमित कर दें, तो भीतर खालीपन रह जाता है। ऐसे में उत्सव हमें यह याद दिलाते हैं कि जीवन केवल मंज़िल नहीं, बल्कि यात्रा का आनंद भी है। उत्सव मनाने से मन प्रसन्न होता है, रिश्ते मजबूत होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा आती है। यह हमें निराशा से बाहर निकालकर आशा और उत्साह की ओर ले जाता है। इसलिए सच ही कहा गया है— “उत्सव का नाम जीवन है, और जीवन को सुंदर बनाने के लिए उत्सव का होना अनिवार्य है।” जो व्यक्ति हर दिन में खुशी ढूँढ लेता है, वही वास्तव में जीवन को उत्सव बना देता है।
-डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
सोचा जाए जीवन एक उत्सव है इसे निराशा के बजाय, हंसी, खुशी और प्रेम के साथ जीना चाहिए यह तभी संभव हो सकता है जब हम किसी भी कार्य को बोझ नहीं बल्कि एक रचनात्मक गतिविधि मानें तो आईये आज इसी बात पर चर्चा करते हैं कि उत्सव का नाम जीवन है और जीवन का उत्सव जरूरी है, मेरा मानना है कि उत्सव का मतलब मन, चरित्र और विचारों का उत्थान है जो हमें अवसाद से ऊपर उठाने का प्रयास करता है यही नहीं उत्सव लोगों को एक साथ जुड़े रहने को कहता है जिससे समाजिक और सामुदायिक भावनाएं मजबूत होती हैं, तथा हम खुशी, उत्साह के साथ मिलजुल कर आनंद प्राप्त कर सकते हैं तथा रोजमर्रा की जिंदगी को सकारात्मक ढंग से जी सकते हैं, देखा जाए जीवन का आनंद पाना हर मनुष्य का अधिकार है जिसको उत्सवों के माध्यम से खुल कर मनाया जा सकता है क्योंकि जीवन को एक बोझ के रूप में नहीं बल्कि एक उपहार के रूप में देखना ही जीवन का सार है, इसलिए उत्सव को ही जीवन कह सकते हैं यह एक गहरा दर्शन है जो जीवन को हर पल हर सांस के साथ खुशी और उत्साह को साथ जीने का संदेश देता है आखिरकार यही कहुंगा कि उत्सव का मतलब केवल पार्टियां नहीं है बल्कि छोटी, छोटी खुशियों में शामिल होना है, प्रकृति को निहारना, प्रियजनों के साथ जुडना, यादें सांझा करना और प्रेम तथा भाईचारे को बढ़ावा देना है ताकि हम जीवन के अनूठेपन का सम्मान कर सकें और दुखों के बीच भी साकारात्मक यादें बनाये रखें, मेरे ख्याल में जीवन का उत्सव मनाना जीवन की यात्रा का आनंद लेना है तथा जीवन के उतार चढ़ाव को स्वीकार करते हुए सकारात्मकता को हासिल करके मेल जोल के साथ भाईचारा अपनाना और एक दुसरे के दुख तकलीफ को सांझा करते हुए हर पल को आनंदपूर्वक गुजारने का नाम ही जीवन का उत्सव है।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
उत्सव का नाम जीवन है, जीवन का उत्सव जरूरी है जीवन अपने आप में एक सुंदर उत्सव है। हर दिन, हर पल हमें कुछ नया अनुभव करने और सीखने का अवसर देता है। यदि हम जीवन को केवल समस्याओं और चिंताओं के रूप में देखेंगे, तो उसका आनंद नहीं ले पाएँगे। इसलिए जीवन को उत्सव की तरह जीना आवश्यक है।उत्सव केवल बड़े पर्व-त्योहारों तक सीमित नहीं होता। छोटी-छोटी खुशियाँ, परिवार के साथ बिताया समय, मित्रों से मिलना, प्रकृति की सुंदरता को महसूस करना—ये सब भी जीवन के उत्सव ही हैं। जब हम सकारात्मक सोच के साथ हर क्षण को स्वीकार करते हैं, तब जीवन में आनंद और संतोष का अनुभव होता है।जीवन का उत्सव मनाने का अर्थ है हर परिस्थिति में आशा बनाए रखना, दूसरों के साथ खुशियाँ बाँटना और अपने कर्मों से समाज में सुख फैलाना। यही दृष्टिकोण जीवन को सार्थक और सुंदर बनाता है। इसलिए कहा जा सकता है कि जीवन स्वयं एक उत्सव है, और इस उत्सव को प्रेम, उत्साह और कृतज्ञता के साथ मनाना ही सच्चा जीवन जीना है।
- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'
मुंबई - महाराष्ट्र
जीवन है तो सब कुछ है, जीवन नहीं तो कुछ भी नहीं है. ये जीवन दुबारा मिलने वाला नहीं है. जीवन को खुशहाल रखने के लिए ही तो हम उत्सव करते हैं. अगर कोई उत्सव न करें तो यह जीवन नीरस उदास बेकार का हो जाएगा. जीवन में हम जो कुछ भी करते हैं सब किसी न किसी प्रकार उत्सव का ही रंग रूप है. हमारे जीवन के हर गतिविधियों में उत्सव का समावेश होना चाहिए. या हर कर्म उत्सव समझ कर ही करना चाहिए. और इस जीवन का भरपूर आनंद उठाना चाहिए. क्या खुशी क्या ग़म हर परिस्थिति में समान्य रहना चाहिए. ऐसे रहना चाहिए जिसे लगे कि हमें कुछ हुआ ही नहीं है. दुःख को भी एक उत्सव के रूप में ही लेना चाहिए. क्योंकि होता वही है जो होने को है या होना चाहिए. जो होना चाहिए वही होता है. गीता में भी कहा गया है होनी हो कर रहती है. उसमें किसी को कुछ करने का नहीं रहता है. सुबह हुई है तो शाम जरूर होगी. शाम हुई हैं तो सुबह होना ही है. दुःख है तो सुख आएगा ही. सुख है तो दुःख भी आयेगा. दोनों भाई हैं. इसलिए इस जीवन का भरपूर लाभ लेना चाहिए. जीवन को उत्सव की तरह जीना चाहिए. जीवन में उत्सव जरूरी है.
- दिनेश चन्द्र प्रसाद "दीनेश "
कलकत्ता - प. बंगाल
जीवन को यदि हम उत्सव मानें टो यह उत्सव ऐसा है जो हम सबको , अपनी पसंद , अपनी परंपरा , वो अपने माहौल के साथ मनाना पड़ता है ! यदि हम अलग अलग त्योहारों की तुलना अलग अलग निजी परिस्थितियों से करें , तो सब त्यौहार मनाते हैं !! जिंदगी को जीना जैसे ज़रूरी है अपने सामर्थ्य के अनुसार , इसे उत्सव समझकर या मानकर भी किया जा सकता है !! अर्थात उत्सव रूपी जीवन को जीना या जीवन का उत्सव मनाना भी आवश्यक है ,!!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
उत्सव का नाम जीवन है, जीवन का उत्सव जरूरी है... बहुत ही सुंदर एवं सकारात्मक विषय है। वास्तव में जीवन केवल जीने का नाम नहीं है, जी तो सभी लेते हैं किंतु जीवन में रस का होना आवश्यक है, अर्थात जीवन के हर पल को उत्सव की तरह , त्योहार की तरह जीना चाहिए। जीवन में आनंद का होना जरूरी है । आनंद लेने का हमारा पूरा अधिकार है। मनुष्य अपने जीवन में एक ही शैली में रहते रहते उब जाता है। अपने जीवन में वह परिवर्तन चाहता है। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है अतः हमारे जीवन शैली में भी परिवर्तन का आना स्वाभाविक है। आनंद के लिए वह अपने सुख- दुख को स्वीकार कर सभी के साथ मिलकर खुशीयों का जश्न मनाता है। जिसे हम उत्सव का नाम देते हैं। जीवन हर पल को खुशी, उमंग एवं सकारात्मकता के साथ जीने का नाम है ना की निराशा के साथ....! किसी के चले जाने पर हमें केवल दुखी नहीं होना चाहिए बल्कि उनकी हसीन और अच्छी यादों को याद कर उसका आनंद भी लेना चाहिए। हमारे यहाँ दीवाली, होली, मकर संक्रांति,राम-नवमी, जन्माष्टमी ऐसे साल में 12- 13 पर्व आते हैं जिसे हम सभी के साथ अपने जीवन में उत्सव की तरह मना आनंद उठाते हैं। मैंने कहा न...मानव जीवन में अपनी रोज की शैली में कुछ परिवर्तन चाहता है अतः ऐसे उत्सव हमें मनाते रहना चाहिए।उत्सव हमें खुशीयां बांटने एवं सुखद पलों को दूसरों के साथ साझा करने का अवसर देता है। वह हमें एक जुट बांधे रखता है। वैसे भी मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जीवन में खट्टे, मीट्ठे पल तो आते रहते हैं किंतु आनंद और उमंग के साथ उत्सव के रूप में सभी के साथ मिलकर साझा करें तो जीवन सार्थक है। जीवन में रस से भरी जिंदगी जीने के लिए उत्सव का होना आवश्यक है...।
- चंद्रिका व्यास
मुंबई - महाराष्ट्र
मानव जीवन बहुत कठिनता से मिलता है और जिसे मिलता है उसके लिए यह सबसे बड़ा सौभाग्य है। सौभाग्य से मिले जीवन का एक-एक पल मूल्यवान है या कहा जाए अनमोल है। “ कल हो ना हो” film का एक गीत भी है. जिसका एक अंश है..
“हर घड़ी बदल रही है रूप ज़िंदगी
छाँव है कभी, कभी है धूप ज़िंदगी
हर पल यहाँ जी भर जियो
जो है समाँ कल हो न हो”
जीवन सदा एक सा नहीं रहता। हर पल बदलता रहता है। इसलिए आज जी अभी हमारे पास है उसे जी भर जिया जाये, अपने मन का करके, अच्छे कामों को करके, अपनों के साथ समय बिता कर, घूम कर, पेंटिंग करके, गीत सुन-गा कर, पढ़-लिख कर, सेवा करके जो भी मन करे, जिसे करके खुशी मिले किया जाये। तभी जीवन के हर पल को हम उल्लासपूर्ण बना सकते हैं। हम निराश रहें, दुखी रहें या उत्साहित होकर समय का सही उपयोग करें.. जीवन तो दोनों स्थितियों में बीत ही जायेगा। पर प्रश्न यह है जीवन के कौन से रूप ने हमें खुशी दी। जो पल हमारे हमें खुशी देते हैं, हमारे जिस काम से दूसरे के अधरों पर मुस्कुराहट आती है। वही पल, वही समय सार्थक है, वही उत्सव है और इसी का नाम जीवन है। कल का सूर्य हम देख पायेंगें या नहीं यही सोच कर हर पल को उत्सव की तरह जीना चाहिए। सौभाग्य से मिले जीवन के हर पल को खुशियों के साथ अच्छे काम करते हुए जीना ही जीवन का उत्सव मनाना है।
- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई
देहरादून - उत्तराखंड
उत्सव का नाम जीवन है और जीवन का उत्सव मनाना वास्तव में आवश्यक है, क्योंकि जीवन केवल सांसों का यांत्रिक क्रम नहीं बल्कि आशाओं, संघर्षों, अनुभवों, सपनों और सत्कर्मों का एक अद्भुत संगम है। मनुष्य जब हर परिस्थिति अर्थात सुख या दुःख, सफलता या असफलता को धैर्य, विवेक और सीख के रूप में स्वीकार करता है, तब उसका जीवन स्वतः ही एक प्रेरणादायी उत्सव का रूप ले लेता है। सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, कर्तव्यनिष्ठा, मानवता और सतत परिश्रम से जीया गया जीवन ही वास्तविक अर्थों में उत्सवमय बनता है, क्योंकि ऐसा जीवन व्यक्ति को निराशा और विपरीत परिस्थितियों के बीच भी आशा, साहस और संकल्प का प्रकाश प्रदान करता है। जीवन का वास्तविक उत्सव बाहरी आडंबरों, दिखावे या क्षणिक आनंद में नहीं बल्कि भीतर की सजगता, नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना में निहित होता है। जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए न्याय, सत्य और मानवता के मार्ग पर दृढ़ता से चलता है, वही जीवन की वास्तविक गरिमा और उत्सव की सार्थकता को समझ पाता है। संघर्षों के बीच भी मुस्कुराने की क्षमता, असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने का साहस, दूसरों के दुःख को समझने और उसे कम करने की संवेदना तथा समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित दृष्टिकोण—यही वे गुण हैं जो जीवन को केवल जीने की प्रक्रिया नहीं बल्कि एक सतत प्रेरणादायी उत्सव बना देते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम प्रत्येक दिन को कृतज्ञता, सकारात्मकता, सृजनात्मकता और उच्च आदर्शों के साथ जिएँ, ताकि हमारा जीवन केवल हमारे लिए ही नहीं बल्कि समाज, मानवता और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा, आशा और उजाले का स्रोत बन सके।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
उत्सव का नाम जीवन है. जीवन में खुशी और परिवर्तन का बहुत महत्व है. उत्सव खुशी भी देते हैं और जीवन की एकरसता में समरसता भर देते हैं. नीरसता से उदास होने में यह परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है. उत्सव का अर्थ केवल त्योहार नहीं है, जीवन का उत्सव जरूरी है. जीवन का हर पल उत्सव बन सकता है अगर हम नैतिकता और सकारात्मकता का अनुसरण करें. सुख-दुःख आने-जाने हैं, ऐसा मानकर हर पल खुश रहना, मुस्कुराते रहना उत्सव है. मानव जीवन पाना सौभाग्य की बात है प्रभु का शुक्रगुजा़र रहना उत्सव है. दूसरों की भलाई की साथ अपना भी ध्यान रखना उत्सव है. प्रभु ने खुशियों से भरा संसार दिया, इसलिए लोगों से मिलकर प्यार बांटना चाहिए. हर दिन हर पल हमारे लिए उत्सव के समान है. वास्तव में जीवन सिर्फ उत्सव ही नहीं है बल्कि महोत्सव है या हम यूं कह सकते हैं मानव जीवन का हर पल त्योहारों का त्योहार है. इसलिए उत्सव म्नाकर हर पल को हमें यादगार बनाना चाहिए, तभी उत्सव का नाम जीवन सार्थक हो सकता है.
- लीला तिवानी
सम्प्रति - ऑस्ट्रेलिया
मानव जीवन ईश्वर का दिया एक वरदान है। वह बहुत मुश्किल से प्राप्त होता है।84 लाख योनियों की भटकन के बाद वह नसीब होता है, ऐसी शास्त्रों की मान्यता है। इसलिए उसे प्रसन्नता पूर्वक व्यतीत करें।सुख और दुख आते जाते रहते हैं। प्रकृति का नियम है पतझड़ के बाद ही नए किसलय आते हैं। अतः परिस्थितियों से समन्वय करते हुए जीवन को खुशी-खुशी व्यतीत करें एक उत्सव की तरह। जीवन का उत्सव बहुत जरूरी है। उससे आत्मिक शांति और सुकून मिलता है।
- गायत्री ठाकुर 'सक्षम'
नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश
जीवन का नाम ही उत्साह है ! वो जीवन जीने के लिए जरूरी है ! उत्सव का नाम जीवन है, जो हमें सकारात्मक सोच के साथ उत्साहित हो जीने के लिए प्रेरित करता है।जीवन को उत्सव वर्धक बनाने के तरीके दृष्टिकोण से देखना और हर पल को उत्सव बनाना है !आध्यात्मिकता को शामिल करना और अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाना ! अपनों के साथ संबंधों को मजबूत बनाना और उनके साथ समय बिताना।अपने नए अनुभव से जीवन को रोमांचक बना ,शांति को ढूंढना और जीवन को संतुष्ट बनाना। उत्साह जीवन को हमेशा ऊर्जावान बनाने नए आयाम ,गढ़ना अपने बीते हुए दिनों को अच्छी बाते ले आगे बढ़ना नए लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें प्राप्त करने के लिए काम करना।आने जीवन का अवलोकन कर जीवनमें आने वाली चुनौतियों से सामना करना ! आंतरिक शांति को ढूंढना और जीवन को संतुष्ट बनाना ! हमारे पूर्वज कहते जैसा बो ओगे वैसा पाओगे! नियति और नीति में विश्वास जरूरी है तभी आप अपने गंतव्य तक पहुँचने का सही मार्ग पकड़ सकते हो ! यदि तुमसे कुछ माँगता है तो वो ये सोच माँगता है ! आप में सहृदयता है आप उसकी सीमित मात्रा में मदद कर सकते हो और आप उसे ख़ुश होकर अपने समझ औक़ात से उसकी ज़रूरत पूरी कर आत्म संतुष्टि पा सकते हो ! जीवन का नाम ही उत्साह है ! वो जीवन जीने के लिए जरूरी है ! मानव में ही वो इंसानी तार्किक बुद्धि है जिसका प्रयोग यो समय के अनुकूल मिलता है !
- अनिता शरद झा
रायपुर - छत्तीसगढ़
हमें जीवन को एक उत्सव की तरह जीना चाहिए। अपने को प्रफुल्लित और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होकर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उत्सव हमारे जीवन में एक नया पन दे जाते है।
ReplyDelete- अर्विना गहलोत
प्रयागराज - उत्तर प्रदेश
(WhatsApp से साभार )
सकारात्मक भाव रखते हुए जीवन को एक उत्सव की तरह जीना चाहिए। जिसमें उत्साह, ऊर्जा और उल्लास का समावेश हो। खुशियों का आदान-प्रदान हो और जीवन को सार्थकता मिले।
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