चैत्र नवरात्रि - पाँचवा दिन - माँ स्कदंमाता


              नवरात्रि का पाँचवा दिन 

                   माता का  स्वरूप





                       माँ स्कदंमाता



नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। जिससे शास्त्रों में पुष्कल महत्व बताया गया है। इस चक्र में अवस्थित मन वाले साधक की समस्त बाह्य क्रियाओं एवं चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है। वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर हो रहा होता है। साधक का मन समस्त लौकिक, सांसारिक, मायिक बंधनों से विमुक्त होकर पद्मासना माँ स्कंदमाता के स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन होता है। 
          भगवान स्कंद 'कुमार कार्तिकेय' नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।

                     

                          ध्यान 



सिंहासनगता     नित्यं    पद्माश्रितकरद्वया।
 शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

 

                            मंत्र



  या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
  नमस्तस्यै   नमस्तस्यै।  नमस्तस्यै    नमो   नम:॥

          

              🙏🌹  जय माता दी 🌹🙏



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