गिरीश कर्नाड की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

        अच्छा - बुरा कुछ नहीं होता है। सिर्फ कर्म होता है। जो जीवन को प्रभावित करता है। यही स्पष्ट करता है कि अच्छा क्या है बुरा क्या है। बाकि तो कर्म का परिणाम है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
      आज का विषय बहुत ही सुंदर और दमदार है. बुरा काम करने के लिए न सोचने की जरूरत है न समय की  एक सेकेंड का काम होता है यह. एक सेकेंड में किसी पर उठा दो एक सेकेंड में गाली दे दो.कुछ नहीं लगता है बुराई करने में. बुराई का मार्ग बहुत आसान होता है. पर अच्छाई का मार्ग बहुत कठिन होता है. किसी को गोली मारने में एक सेकेंड लगता है पर उसे ठीक होने में महिनों लग जाता है. एक पेड़ काटने में कुछ ही घंटों का समय लगता है या किसी में कुछ पल ही लग सकता है पर उस पेड़ को बड़ा होने में बरसों लग जाता है. इस तरह की और कई उदाहरणों से इस बात को सिद्ध किया जा सकता है कि बुराई का मार्ग हमेशा आसान होता है. पर अच्छाई का मार्ग हमेशा कठिन होता है. उसमें बाधा देने वाले अनेक होते हैं. राह में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. लोग तरह-तरह की बातेँ करते हैं. उसमें अड़ंगा डालते हैं. इसलिए अच्छा मार्ग हमेशा कठिन होता है. बुराई के मार्ग के अपेक्षा. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

       बुरा मार्ग हमेशा आसान होता है अच्छा मार्ग हमेशा कठिन होता है क्योंकि बुरा मार्ग आकर्षक होता है ललक बनाए हुए प्रलोभन देता है बुरा मार्ग छोटी सीढ़ी है जो अक्सर गड्ढे में गिराती है। क्योंकि बुरा मार्ग आकर्षक होता है ! ललक बनाए हुए प्रलोभन देता है ! झूठ बोलो, काम बन जाता है शॉर्टकट मारो, समय बच गया।इसमें मेहनत, अनुशासन, धैर्य की ज़रूरत ही नहीं पड़ती !  बुरे रास्ते में तुरंत फायदा दिखता है -  सी सावधानी हटी दुर्घटना घटी ? अच्छा मार्ग सच्चाई की सीढ़ी है चढ़ाई चढ़ने वालों को मंजिल तक पहुंचाती सीढ़ी, ऊँचाई ले जाती है। ये बात सुनने में एकदम सही लगती है, और ज़िंदगी में अक्सर सच भी लगती है। पूरी तस्वीर इससे थोड़ी बड़ी है क्यों लगता है कि बुरा मार्ग आसान होता है:बुरे रास्ते में तुरंत फायदा दिखता है - झूठ बोलो, काम बन गया। शॉर्टकट मारो, समय बच गया। इसमें मेहनत, अनुशासन, धैर्य की ज़रूरत कम पड़ती है। ज़िम्मेदारी से बचा जा सकता है। इसीलिए थके-हारे मन को बुरा मार्ग पहले लुभाता है। क्यों अच्छा मार्ग कठिन लगता है:अच्छे रास्ते पर चलने के लिए आत्म-संयम चाहिए। लालच, क्रोध, आलस से लड़ना पड़ता है। फल देर से मिलता है। ईमानदारी से मेहनत करो तो रिज़ल्ट तुरंत नहीं आता।लोग सवाल उठाते हैं, "इतना ईमानदार बनकर क्या उखाड़ लिया?" लेकिन यहाँ एक बात समझने की है: बुरा मार्ग शुरुआत में आसान लगता है, पर अंत में वो ही मुश्किल हो जाता है। झूठ को छुपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं। शॉर्टकट का खामियाज़ा बाद में चुकाना पड़ता है - मन की शांति चली जाती है, भरोसा टूटता है।जैसे सावधानी हटी और दुर्घटना घटीअच्छा मार्ग शुरुआत में कठिन है, पर धीरे-धीरे आसान हो जाता है। आदत बन जाए तो ईमानदारी, मेहनत, दया - ये सब बोझ नहीं लगते। और अंत में जो सम्मान, संतोष और नींद की चैन मिलती है, वो बुरे रास्ते पर कभी नहीं मिलती।

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

      बुरा मार्ग हमेशा आसान होता हो या न होता हो, लेकिन अच्छा मार्ग हमेशा कठिनाई भरा होता ही है। सतयुग से कलयुग तक अनेकानेक उदाहरण भरे पड़े हैं। ध्यान रहे हम मार्ग की बात कर रहे हैं, परिणाम की नहीं। परिणाम तो बुरे का बुरा,और अच्छे का अच्छा ही होता है। बुरा मार्ग यानि अनैतिक,गैरकानूनी,समाज विरोधी मार्ग आसान लगता है। छल फरेब, धोखाधड़ी,ठगी का मार्ग आसान होता है,कम श्रम में अधिक कमाई। जबकि सच्चाई, नैतिकता का मार्ग बुरे की अपेक्षा कठिन ही होता है।महाराजा हरिश्चंद्र के समय से यही देखने को मिल रहा है। वर्तमान में तो बुराई का प्रतिशत बढ़ जाने के कारण इस मार्ग के आसान तरीकों को व्यवहार कहा जाने लगा है। इसका कारण धन लोलुपता और समाज में अर्थ (धन) की महत्ता का बढ़ना है जिसके कारण नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

     जीवन में मार्गों का भी अपना चरित्र होता है।कुछ मार्ग बुराई से  चमकीले और भीड़ से भरे होते हैं। वहाँ चलना आसान लगता है, क्योंकि वहाँ संघर्ष कम और आकर्षण अधिक दिखाई देता है। परंतु ऐसे मार्ग प्रायः मनुष्य को उसकी ऊँचाइयों तक नहीं ले जाते, केवल सुविधाओं के भ्रम में बाँध देते हैं।इसके विपरीत अच्छा मार्ग प्रायः कठिन होता है।सत्य, ईमानदारी, संयम, परिश्रम और धैर्य का पथ कभी सरल नहीं रहा। उस पर चलने वाला व्यक्ति अनेक बार अकेला पड़ जाता है। उसे उपहास भी सहना पड़ता है और अपने भीतर के मोहों से भी युद्ध करना पड़ता है। किंतु यही कठिनाई उसके व्यक्तित्व को तपाकर कुंदन बनाती है। नदी यदि सरल राह चुनती, तो समुद्र तक कभी न पहुँचती। बीज यदि मिट्टी का अंधकार सहने से डरता, तो वृक्ष न बन पाता। इसी प्रकार मनुष्य भी संघर्षों की अग्नि से गुजरकर ही अपने श्रेष्ठ स्वरूप को प्राप्त करता है।वास्तव में बुरा मार्ग जल्दी सफलता  दे सकता है, कुछ समय बाद वह उपहास और निंदनीय  हो जाता है पर अच्छा मार्ग मनुष्य को गरिमा देता है। देर से ही सही पर शिखर तक पहुँचाता है, दूसरा श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण करता है जो मार्ग आत्मा को ऊँचा उठाए, वही श्रेष्ठ है — चाहे वह कितना ही कठिन क्यों न हो।

- अलका पांडेय 

मुंबई - महाराष्ट्र 

        यह जीवन का  एक गहरा सत्य है कि गलत या आसान रास्ता लुभावना लगता है लेकिन उसका परिणाम हमेशा दुखद होता है लेकिन इसके विपरीत सही या अच्छा रास्ता मुश्किल जरूर होता है लेकिन इसकी सफलता में संतुष्टि और संतोष  का भरपूर आनंद भरा होता है, तो आईये आज इसी चर्चा पर बात करते हैं कि बुरा मार्ग हमेशा आसान होता है और अच्छा मार्ग हमेशा कठिन होता है, मेरा मानना है कि शार्टकट का रास्ता या झूठ अथवा बेईमानी का रास्ता हमेशा आसान होता है लेकिन यह हमको ऐसे रास्ते पर ले जाता है यहाँ से लौटना मुश्किल हो जाता है, जबकि ईमानदारी और अनुशासन का मार्ग कठिन होता है और त्याग जरूर माँगता है लेकिन इसमें मिलने वाली सफलता स्थाई और सम्मानजनक होती है कहने का भाव जो रास्ता कठिन और चुनौतिपूर्ण लगता है वही रास्ता आपके चरित्र का निर्माण करता है और आपको बेहतर भविष्य की और ले जाता है,  अगर बुरे मार्ग के आसान होने की बात करें तो यह आसान इसलिए लगता है  क्योंकि इसमें तात्कालिक सुख, कम मेहनत आराम व  तन का सुख जुड़ा होता है जबकि अच्छे मार्ग में अनुशासन, धैर्य और निरंतर प्रयास की जरूरत होती है जिसमें मानसिक और शारीरिक ऊर्जा की अधिक खपत होती है बैसे भी बुरे मार्ग या गलत आदतें जैसे आलस, जंक फूड, गलत संगति तरुतं खुशी या राहत देती हैं  इसलिए हमारा दिमाग इन सभी की तरफ जल्दी आकर्षित होता है,  आखिरकार  यही कहुँगा बुरे मार्ग अक्सर आकर्षक और आसान लगने वाले सामान्य और स्वीकार्य लगते हैं क्योंकि इनमें कोई पावंदी,  खींचातानी या नियमों की ताक की जरूरत नहीं पड़ती जबकि अच्छे मार्ग जैसे पढ़ाई करना, व्यायाम करना, सच्चाई पर चलना व नियमपूर्वक ही हर कार्य को करना छिपा होता है और अक्सर इनको हासिल करने में लंबे समय की जरूरत होती है तभी जा कर परिणाम हासिल होते हैं क्योंकि आत्म नियंत्रण को विकसित करने में समय लगता है और मानसिक मजबूती रखनी पड़ती है इसलिए बुरा मार्ग आजाद होने के कारण हमेशा आसान लगता है और अच्छा मार्ग हमेशा नियमों से बंधा होता है और हमेशा कठिन लगता है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -  जम्मू व कश्मीर

       एक दृष्टि से देखा जाए तो बुरा मार्ग इसलिए आसान लगता है क्योंकि उसमें तत्काल लाभ, कम परिश्रम और शीघ्र संतोष दिखाई देता है। झूठ बोलना, छल करना या अनुचित लाभ उठाना अक्सर तुरंत परिणाम दे देता है इसलिए कमजोर मनुष्य उसी ओर आकर्षित हो जाता है। लेकिन यह “आसानी” केवल प्रारंभिक होती है जिसका अंत पछतावे, असुरक्षा और नैतिक पतन में होता है। इसके विपरीत अच्छा मार्ग कठिन इसलिए होता है क्योंकि उसमें धैर्य, संयम, ईमानदारी और त्याग की आवश्यकता होती है। सत्य बोलना, मेहनत करना और सही निर्णय लेना कई बार तत्काल लाभ नहीं देता अपितु संघर्ष और प्रतीक्षा की परीक्षा लेता है लेकिन यही कठिनाई व्यक्ति को मजबूत बनाती है और अंततः स्थायी शांति, सम्मान और आत्म-संतोष प्रदान करती है। सामाजिक दृष्टिकोण से भी यह सत्य स्पष्ट होता है कि यदि व्यक्ति आसान बुरे मार्ग को अपनाता है तो समाज में अविश्वास और अराजकता बढ़ती है। जबकि कठिन अच्छे मार्ग पर चलने वाले लोग समाज की नींव मजबूत करते हैं। यही लोग चरित्र, मूल्य और आदर्शों की स्थापना करते हैं।आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो अच्छा मार्ग आत्मा के विकास का मार्ग है जबकि बुरा मार्ग केवल इंद्रियों की तृप्ति का। इंद्रियों का सुख क्षणिक होता है पर आत्मा का सुख स्थायी और गहरा होता है।अंततः निष्कर्ष यही निकलता है कि आसान मार्ग भले ही आकर्षक लगे पर वह व्यक्ति को नीचे ले जाता है और कठिन मार्ग भले ही चुनौतीपूर्ण हो पर वही व्यक्ति को ऊँचाई और वास्तविक सफलता तक पहुँचाता है।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

          " बुरा मार्ग हमेशा आसान होता है।अच्छा मार्ग हमेशा कठिन होता है। " आसान इसलिए कि बुरे मार्ग में जाने की कोई पाबंदी नहीं होती। जो करना है, जैसा करना है, जब करना है, जिससे करना है, कर लीजिए पूरी छूट है। परंतु इसके विपरीत अच्छा मार्ग कठिन इसलिए होता है कि उसमें पाबंदियां हैं, शर्तें हैं, कानून हैं ,कायदे हैं, शर्म है, मर्यादा है, दया है। इन सब बातों का ध्यान रखना होता है। निभाना होता है। तब जाकर कर्म या व्यवहार किया जाता है। अत: स्वभाविक है इन्हें निभाने में कठिनाई तो होगी ही।इसका प्रतिफल भी है। बुरा मार्ग आसान होता है तो उसके प्रतिफल भी बुरा होता है। सामाजिक प्रतिष्ठा भी गिरती है।   बात-बात पर, कदम-कदम पर मान-सम्मान को चोट पहुंचती है। जलील होना पड़ता है। अपराध के अनुसार कानून से सजा भी मिलती है। इसके विपरीत अच्छा मार्ग कठिन अवश्य होता है लेकिन उसका प्रतिफल अच्छा ही होता है। मान-सम्मान मिलता है। आपकी कही गई बात  का विश्वास किया जाता है, उनका अनुशरण किया जाता है। आपको आवश्यकता पड़ने पर लोग  उत्साहपूर्वक सहयोग करते हैं। अत:  सार यही कि कठिन भले ही है, परंतु सदैव अच्छे मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। इससे जीवन में मान-सम्मान तो मिलता ही है, सुख-सुकून के साथ-साथ समृद्धि भी  मिलती है। जीवन की यही सार्थकता है, यही सफलता है।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

       बुरा मार्ग हमेशा आसान होता है, अच्छा मार्ग हमेशा कठिन होता है..... बहुत सुंदर ,और यही जीवन की सच्चाई है। बुराई का रास्ता इसलिए आसान होता है चूंकि इसमें कोई नियम, अनुशासन, त्याग, धैर्य, संयम और अधिक मेहनत की आवश्यकता नहीं होती। बुरे मार्ग या गलत रास्ते से व्यक्ति झूठ, छल कपट, क्रोध अथवा किसी का अहित कर सफलता तो प्राप्त कर लेता है किंतु वह स्थायी नहीं क्षणिक होता है साथ ही वह व्यक्ति के अन्तर्मन को कमजोर कर देता है। वहीं अच्छा मार्ग और सच्चाई का मार्ग कठिन अवश्य होता है किंतु मन में शांति होती है चूंकि उसके कार्य में ईमानदारी, परिश्रम,त्याग, करूणा,और संयम का समावेश होता है। सत्य के मार्ग पर चलने वालों को अनेक कठिनाई एवं आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। अनेक बाधाओं को पार कर वह सफलता की सीढ़ी को चूमता है। जिस तरह सोना आग में तपकर कुंदन बन निखरता है, ठीक उसी तरह अच्छाई के मार्ग और सत्य के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को देर से और कठिनाई से ही सफलता और सुख मिलता हो किंतु वह क्षणिक नहीं हमेशा का आत्म संतोष और स्थायी सुख प्राप्त होता है....।

- चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

       मनुष्य के समक्ष जीवन में सदैव दो मार्ग उपस्थित रहते हैं। उनमें एक सरल किन्तु अनैतिक और दूसरा कठिन किन्तु सत्य और न्याय का होता है। बुरा मार्ग तत्काल लाभ, सुविधा और आकर्षण प्रदान कर सकता है, इसलिए वह प्रायः आसान प्रतीत होता है। इसके विपरीत अच्छा मार्ग संघर्ष, धैर्य, त्याग और आत्मबल की माँग करता है, इसलिए वह कठिन दिखाई देता है। भले ही वह रास्ता कठिन होता है, परीक्षाएँ भी कठिन होती हैं, किन्तु कोई न कोई उस कठिन पथ पर चलने का साहस अवश्य करता है। इतिहास इस सत्य का साक्षी है कि बलिदानी सर्वश्री भगत सिंह जी, राजगुरु जी और सुखदेव जी जैसे अमर क्रांतिकारियों ने अन्याय और दासता के विरुद्ध कठिनतम मार्ग को चुना था। उन्होंने भय, लोभ और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्र, सत्य और आत्मसम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। कठिन मार्ग पर चलना सरल नहीं होता, क्योंकि वहाँ संघर्ष, त्याग, उपहास और अनेक परीक्षाएँ होती हैं, किन्तु वही मार्ग अंततः मानवता, न्याय और सच्चे आदर्शों की ओर ले जाता है। इतिहास और समाज अंततः उन्हीं व्यक्तियों को सम्मान देता है जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद सत्य, न्याय और मानवीय मूल्यों का साथ नहीं छोड़ा। यही वास्तविक चरित्र, मानवता और सभ्यता की पहचान है।” 

- डॉ. इंदु भूषण बाली 

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर

        बुरा मार्ग हमेशा आसान होता है इसीलिए कहा जाता है क्योंकि कोई भी बुराई 100 कोस की तेजी से बड़ी भीड़ के साथ चलती है । बुरे लोग बुरे रास्ते का प्रतिशत अच्छाई के मुकाबले बड़ा होता है। बुरा मार्ग शॉर्टकट है ; जहां व्यक्ति को शीघ्रातिशीघ्र कम से कम परिश्रम में लाभ होने की उम्मीद लगती है। चाहें आगे चलकर वह लाभ उसको कष्टकारी स्थिति पैदा करके उपहास का पात्र बनाकर छोड़ सकता है। अक्सर झूठ ,फरेब, मक्कारी, चोरी, डकैती, बेईमानी, असावधानी, नकारात्मकता से युक्त, उथल-पुथल वाले लोगों के लिए आसान राह प्रशंसा युक्त तथा लाभकारी लगती है पर अधिकतर परिणाम विपरीत ही होते हैं ।वहीं नेक नौ कोस चलती है । यानि उसकी गति मन्द पर सत्पथी, सर्वतोन्मुखी होती है। इसीलिए नेकी का पाठ हमेशा स्थाई शांति देने वाला , आत्मसम्मान से भरा संसार के महान पुरस्कार प्राप्त करने के उत्तरदायित्व से जुड़ा होता है क्योंकि उसने ईमानदारी का पथ चुना है; वह भी तप और चुनौतियों से भरा। कठिन तो है पर आजीवन संतोषात्मक  अनुभूति कराने वाला तथा मरणोपरांत भी यश गाथा से युक्त होता है ।

- डॉ. रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

       देखिए! अच्छे बुरे मार्ग पर चलाने वाला मन होता है। मन को अच्छा बनाने के लिए सबसे पहले हमारा आहार ठीक होना चाहिए। 'जैसा खाएं अन्न वैसा बने मन' खान-पान अच्छा होगा तो हम अच्छाई की ओर एक कदम बढ़ा पाएंगे। काया की स्वच्छता और स्वस्थ्ता, मीठी वाणी और ध्यान योग इत्यादि भी हमारे मन की प्रसन्नता-अप्रसन्नता का कारण बनते हैं। मन अच्छा होगा तो हम कार्य भी अच्छे करते हैं। विपरीत होगा तो बुराई की ओर भी भाग उठता है मन, क्योंकि बुराई की ओर चलना बहुत आसान होता है और अच्छाई की ओर चलने के लिए सतर्क रहना पड़ता है। अनुशासन में रहना आवश्यक है। इंद्रियों पर काबू हो, त्याग हो, समर्पण हो, सेवा भाव हो- तब कहीं जाकर मन टिकता है और अच्छे मार्ग की ओर प्रशस्त होता है। इन सब कार्यों के लिए मन अभ्यास या वैराग्य के द्वारा स्वत: ही अच्छे मार्ग की ओर चल पड़ता है फिर इसे परिश्रम की आवश्यकता नहीं पड़ती। बुरे मार्ग की ओर मन कभी नहीं जाता अगर कभी सूक्ष्म अहम् के कारण भटक भी जाए तो वह क्षण मात्र के लिए ही होता है पुनः अच्छाई की ओर लौट आता है। ऐसे में यदि मन वश में हो जाए तो बुराई के रास्ते पर चलना कठिन होता है बल्कि अच्छाई का मार्ग आसान हो जाता है फिर हम कभी नहीं कहते कि बुरा मार्ग हमेशा आसान होता है और अच्छा मार्ग कठिन होता है।

 - डॉ. संतोष गर्ग 'तोष' 

पंचकूला - हरियाणा 

        सहज और सरल रास्ता चुनना इंसान की मानवीय प्रवृत्ति होती है। अधिकांश लोग यही प्रक्रिया अपनाते हैं। इसीलिए कई बार कार्य सिद्धि हेतु या स्वार्थवश या अन्य कोई व्यवस्था के चलते इंसान बुरा मार्ग अपना लेता है। वह उसे आसान प्रतीत होता है। अच्छे मार्ग में अर्थात अच्छे कार्य में अनेक कठिनाइयां आती हैं। इसीलिए वह हमेशा कठिन प्रतीत होता है। इसीलिए किसी भी कार्य हेतु उचित मार्ग का चयन करें।बुरा मार्ग कभी नहीं अपनाएं भले ही थोड़ा समय अधिक लग जाए और कुछ परेशानियां उठाने पड़ें। लेकिन परिणाम सुखद मिलेगा।

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 

       अच्छाई को अपनाना और सत्य की राह पर चलना सदा कठिन होता है ! सत्य की डगर पर चलना ठीक उस तरह है , जैसे तलवार की नोक पर चलना ! जहां कदम डगमगाए , तो खाई मैं गिरना निश्चित है ! अच्छे मार्ग पर चलते समय , अनेक कठिनाइयां आती हैं , व राह में रोड़े आते हैं , परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है , तब जाकर कहीं सफलता मिलती है !  बुराई का मार्ग सरल होता है , क्षणिक सफलता भी मिलती है , पर भविष्य मैं प्रणाम बुरे ही होते हैं ! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

       बुरा मार्ग सदा बेनियंत्रण होता है। उसकी कोई भी निर्धारित  निति नहीं है।न ही मान-अपमान  का भय होता है इसलिए  वह आसान  लगता है।अच्छा मार्ग हमेशा, उसूलों से होकर  गुजरता है। मन पर नियंत्रण  रखना होता है और  नियंत्रण  के लिए  कठिनाई  का सामना करना पड़ता है। मार्ग  हमेशा अच्छा मार्ग ही चुनना चाहिए  । चाहे कठिनाई  का सामना करना पड़े। कठिन राह काँटो भरी, पर देती  सुख अंत।गलत राह आसां लगे,  अंत मारती दंत।।

- कमला अग्रवाल 

गाजियाबाद - उत्तर प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " जीवन में कुछ भी आसान नहीं होता है। सब कुछ कर्म का रास्ता क्या है। उस पर निर्भर करता है। और जीवन में क्या कुछ पाया है या कुछ खोया है। यह सब कर्म का परिणाम तय करता है। बाकि कुछ भी शेष नहीं रहता है। जीवन पर सब कुछ का प्रभाव अवश्य पड़ता है। 

   - बीजेन्द्र जैमिनी 

  (संचालन व संपादन)


Comments

  1. दुनिया में जब इंसान आता है तो उसे कई प्रकार के कर्म करना पड़ते हैं। कभी अच्छे तो कभी बुरे। यह स्थिति की मांग पर निर्भर करता है। कभी-कभी ऐसे हालात बन जाते हैं कि अच्छा कर्म करने वाले व्यक्ति को भी बुरा मार्ग स्वीकार करना पड़ता है। भले ही उसकी आत्मा उसके लिए गवाही न दे। कुल मिलाकर जब कोई कार्य आसानी से हो जाए तो उसे सहज और जब दिक्कत आए तब कठिन काम कह सकते हैं। कर्म का चयन व्यक्ति को स्वयं करना होता है अच्छा करे या बुरा।

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