ज्ञानी जैल सिंह की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

       कर्म कैसा भी हो सकता है। वैसे भी भाग्य बन‌कर सामने आता है। कर्म आप बदल सकते हैं। परन्तु भाग्य नहीं बदला नहीं जा सकता है। यही भाग्य और कर्म का संबंध है। कर्म की दुनियां आपके हाथ में है। परन्तु भाग्य अपना रास्ता खुद बनता है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है।‌अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं:-
       अक्सर देखा गया है कि निरंतर प्रयास और कर्म ही वह रास्ता है जो दौलत, शोहरत तथा बेहतर भविष्य की और ले जा सकता है बशर्ते हमारे कर्म  मानसिक, वाचिक और शरीर द्वारा भली भाँति परिपूर्ण हों क्योंकि कठिन परिस्थितियों में भी सत्कर्म और मेहनत से अनुकूल परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं तो आईये आज की चर्चा  को आगे बढाने का प्रयास करते हैं कि आज का होता है कर्म, भविष्य का होता है भाग्य, मेरे ख्याल में यह शत प्रतिशत सही है कि हमारा आज का कर्म ही कल के भविष्य  का निर्माण करता है क्योंकि बर्तमान का परिश्रम, सही दिशा में की गई मेहनत और कर्म ही ऐसी नींव है जिससे सुखद और सफल भविष्य का निर्माण होता है न कि भाग्य के भरोसे बैठ कर स्वंय कर्म करने से ही व्यक्ति  अपना भाग्य बदल सकता है कहने का भाव जो हम आज करते हैं वोही भविष्य में हमारे जीवन का रूप ले लेता है  इसलिए मनुष्य को भाग्य के भरोसे न बैठकर कर्म को ही प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि कर्म तो प्रक्रिया है और भाग्य उस  प्रक्रिया का परिणाम  इसलिए सकारात्मक कर्म  ही भाग्य के स्वंय निर्माता है वास्तव में हमारे आज के कर्म ही हमारे कल का भाग्य  तय करते हैं क्योंकि भाग्य कर्म के अधीन माना जाता है इसलिए कर्मशील बन कर ही उत्तम भाग्य का निर्माण हो सकता है, इसमें कोई शक नहीं की कर्म के बिना भाग्य का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है यदि कोई मेहनत नही करेगा तो भाग्य भी साथ नहीं देगा अन्त में यही कहुँगा कि अच्छे कर्म अच्छे भाग्य को जन्म देते हैं और बुरे कर्म बुरे भाग्य  का निर्माण करते  हैं कहने का मतलब भाग्य पर कर्म का गहरा प्रभाव पड़ता है वास्तव में हमारे वर्तमान कर्म पिछले जन्म के संचित भाग्य को बदल सकते हैं इसलिए कर्म भाग्य पर हावी रहते हैं, देखा जाए भाग्य कोई स्वतंत्र वस्तु नहीं है बल्कि पिछले जन्मों का परिणाम हो सकता है लेकिन वर्तमान के कर्म ही हमारे भविष्य के भाग्य के निर्माता होते हैं हाँ पिछले कमजोर कर्मों के फल को वर्तमान के कर्मों का प्रयोग सही दिशा दे सकता है अगर हम अपने कर्मों को सही दिशा में लगाते हैं इसलिए यह मत भूलें  कि भाग्य सिर्फ दिशा देता है लेकिन रास्ते का निर्माण तो कर्म ही करते हैं इसलिए आज का कर्म ही भविष्य का भाग्य है और कर्मशील होने से ही भाग्य का सुधार संभव है क्योंकि भाग्य पिछले कर्मों का हिसाब है और हमारे कर्म आने वाले भाग्य की तैयारी है  कहने का भाव इंसान अपने कर्मों द्वारा अपने भाग्य का रचयिता स्वंय ही होता है। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

        आज का कर्म ही कल का भाग्य बनकर हमारे सम्मुख उपस्थित होता है। जो हम वर्तमान में सोचते, करते और जीते हैं, वही भविष्य की दिशा निर्धारित करता है। कर्म बीज के समान है—यदि उसे श्रम, ईमानदारी और संकल्प की मिट्टी में बोया जाए, तो समय के साथ वह भाग्य के रूप में फलित होकर सुखद परिणाम देता है।भाग्य कोई आकस्मिक चमत्कार नहीं, बल्कि निरंतर किए गए कर्मों का संचित प्रतिफल है। मनुष्य अक्सर भविष्य को लेकर चिंतित रहता है, जबकि उसके हाथ में केवल वर्तमान का कर्म है।मैं हमेशा अपनी गुरु मां अनीता दीदी के मुख से भी यही सुनती हूं कि हमें सिर्फ अपने कर्म सुधारने चाहिए और फल की इच्छा नहीं करना चाहिए यदि कम हम सही करेंगे तो भविष्य हमारे लिए सुखद परिणाम लेकर आएगा। दीदी कहती है। यदि वर्तमान सजग, सकारात्मक और परिश्रमी है, तो भविष्य स्वयं ही उज्ज्वल हो उठता है।अतः आवश्यक है कि हम भाग्य के भरोसे न रहकर अपने कर्म को श्रेष्ठ बनाएं, क्योंकि कर्म ही वह सृजन शक्ति है जो हमारे भाग्य को आकार देती है और जीवन को सार्थकता प्रदान करती है।

- अलका पांडेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

        हमारे कर्म ही वह बीज होते हैं जिनके फलने पर भविष्य बनता है और भाग्य रुपी फल मिलता है। आज के कर्म कल को भाग्य बनते हैं। कर्मफल चक्र में फंसा जीव जन्म दर जन्म अपने कर्मों का फल भोगता है। क्योंकि कहा भी गया है - अवश्यमेव भोक्तव्यं शुभाशुभ कर्मफलम्।कितने ही उदाहरण है जिनमें वर्तमान कर्म के चलते भविष्य को बनते, बिगड़ते देखने की कथाएं मिलती है। कुछ कर्मों के फल तुरंत दिखाई देते हैं, जबकि अधिकांश को फलने में एक लंबा समय लगता है।कई कई जन्मों पूर्व के कर्म भी भविष्य में भाग्य का निर्माण करते हैं।ध्रुव, प्रह्लाद, सुदामा,शबरी, पूतना, हरिश्चंद्र आदि की कथाएं इस तथ्य की पुष्टि करते उदाहरण है।भाग्य का निर्माण कर्मों के आधार के साथ साथ विचारों से भी होता है। इसलिए हमेशा ही सकारात्मक विचार रखते हुए सही कर्म करने चाहिए।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

कबीर का सुप्रसिध्द दोहा है :::

काल करे सो आज कर। 

    आज करे सो अब्ब।। 

पल में  परलय  होयगी।

      बहुरि. करेगो कब्ब।।

संपूर्ण जीवन की सच्चाईयों को समर्पित है यह दोहा। आज जो कर्म करोगे उसका फल भविष्य में आपका साथ देगा। स्कूली छात्रों को यह दोहा छोटी कक्षाओं से लेकर स्नातकोत्तर तक पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है क्योंकि सच्चा सच है कि इंसान के आज के कर्म ही उसके साथी होते हैं। भविष्य तो सदैव भाग्य पर निर्भर करता है। रामायण महाभारत जैसे महत् ग्रंथ भी ऐसी ही सीखों से भरे पड़े हैं। गीताज्ञान हर युग में शुचि सर्वमान्य है। भाग्य तो प्राणीमात्र का होता है। शक्कर का एक दाना ले जाने के लिये पचासों चीटियों का श्रम अर्थात कर्म लगता है। सर्वथा स्पष्ट है कि आज का कर्म ही भविष्य का संचित फल अर्थात भाग्य होता है। कर्म सदैव भविष्य का फलित फल होता है। युनावस्था में कर्म करेंगे कमाई कर लेंगे तो भविष्य शांति - संपन्नता से बीतेगा। बुढापा शांतिपूर्ण जीना है तो यौवन कर्म को समर्पित होना ही चाहिए। यदि जवानी में "कर्म" से जी चुराया तो "करम"फूट गये बुढापे में मान के चलिए। अच्छा हो कि इस गूढ़ सत्य को समय रहते पहचान लें और कर्म की राह चुन लें ताकि भविष्य अच्छा रहे  - - सुखपूर्वक दिन बहुरें। खैर कर्म पर इतना अधिक लिखा जा चुका है कि जितना लिखें सब दोहराया ही प्रतीत होता है लेकिन मूढ़मति मानव कर्म की महत्ता और श्रेष्ठता को कभी नहीं समझ पाते और आलस्य में जीवन व्यतीत कर देते हैं लेकिन "अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत" की तरह भविष्य चौपट हो जाता है। "नींद भी खुली न थी कि हाय धूप छँट गयी - - आँख भी खुली न थी कि जिंदगी गुजर गयी" - - बस यही सुनते-सुनते कर्म फल सामने आ जाते हैं और "माया मिली न राम" - - हम भाग्य और कर्म के लेखेजोखे में ही जनम गँवा देते हैं।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र 

       आज का होता है कर्म, भविष्य का होता है भाग्य. ये बात बिल्कुल सत्य है, आज हम जो कुछ भी कर रहे हैं वह हम कर्म कर रहे हैं. जो हमारा कल का भाग्य होगा. तो  भविष्य ही भाग्य होता है या कहें भाग्य ही भविष्य है. भविष्य का आधार आज ही होता है जो हमारे कर्म पर निर्भर करता है. न हम भाग्य को जान सकते हैं न हम भविष्य को ही जान सकते हैं. पर आज को जानते हैं और आज क्या कर्म कर रहे हैं उसको जानते हैं. इसलिए आज जो होता है वह कर्म है और भविष्य में जो होगा वह भाग्य है.आज हम जो बीज बो रहे हैं ये आज का कर्म हो गया. वो बीज भविष्य में कैसा पेड़ होगा कैसा फल देगा. फल देगा भी या नहीं ये हमारे भाग्य में जैसा होगा वैसा होगा जो भविष्य यानी आने वाले कल को ही पता चलेगा. 

- दिनेश चन्द्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

     आज का होता है कर्म जो हमारे हाथ में होता है ! जिसका उपयोग समय रहते या समय से पहले करने की सोच प्रयास विचार निर्णय लेने की क्षमता तत्काल हमारे कर्म स्वभाव आचरण के अनुकूल बताता बनाता हैं हमारे जीवन में परिवार समाज में दिखता दिखाता है ! हम भविष्य दिखाते है या वर्तमान में जीते है हमारे कर्म का निर्धारण हमारी सोच पर निर्भर करती है ! वही हमारे भविष्य का आधार उद्देश्य लक्ष्य निर्धारित करते है अच्छी सोच तो अच्छा भाग्य बुरी सोच तो बुरा भाग्य उसे कर्म से जोड़ भविष्य वक्ता बन ज्योतिष भाग्य निर्माता बन जाता हैं अंत कहते है बाकी सब अच्छा ही होगा भाग्य पर छोड़ दीजिए !  भाग्य सत्यता प्रमाणित नही कर सकती पहुँचने का मार्ग बन सकती है ! अंत में कहते हैं अब भाग्य पर छोड़ दो जो होना होगा हो के रहेगा जैसा गढ़ोगे वैसा पाओगे । भाग्य कोई पहले से लिखा हुआ नहीं, वो हमारे कर्म से बनता है।'भाग्य असल कर्म का ही दूसरा नाम है !बोएंगे जो आज मेहनत,रंग लाएगा सौभाग्य। जो रूकते नही राहों में मंजिल उन्हे ही मिलती है ! भाग्य से और जो थक जाते है वो अपने कर्मों से चूक जाते है और दोष भाग्य को देते है !, सच्चे मन कर्म धर्म से दूर होते हैं ।

- अनिता शरद झा

रायपुर -छत्तीसगढ़ 

           “आज का होता है कर्म, भविष्य का होता है भाग्य” यह पंक्ति जीवन का सार बता देती है। इसका सीधा अर्थ है कि हमारा वर्तमान कर्म ही हमारे भविष्य का भाग्य तय करता है। इसलिए हमें आज के हर काम को ईमानदारी, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ करना चाहिए।ज्ञानी जैल सिंह जी की स्मृति में यह चर्चा और भी सार्थक हो जाती है, क्योंकि उनका जीवन भी कर्म, संघर्ष और समर्पण का उदाहरण रहा है।मेरी राय में भाग्य कोई अलग चीज़ नहीं, बल्कि हमारे कर्मों का ही परिणाम है।अगर आज सही दिशा में मेहनत करेंगे, तो कल अपने आप अच्छा बनेगा। “कर्म ही असली ताकत है, भाग्य उसी का फल है।”

- सुनीता गुप्ता 

कानपुर - उत्तर प्रदेश 

        हमारे पास जो है वह वर्तमान ही है। अत: जो भी कर सकते हैं वह आज यानी वर्तमान यानी अभी ही कर सकते हैं। जो चला गया वह स्मृति बन जायेगा और जो आने वाला है वह अभी स्वप्न रूप में है , संभावित है। अत: अभी जो कर सकते हैं वह करना चाहिए । जितना अच्छे से अच्छा हो सकता है, उसे करने में पूरा जोर देना चाहिए। क्योंकि आज जो कर्म होगा। वह आने वाले कल को भी संवारेगा और वह ही परिणाम के रूप में हमारा भाग्य निर्माण भी करेगा। कर्म से भाग्य का निर्धारण होता है। हमें यह बात अपने दिलो-दिमाग में बिठा लेना चाहिए। 

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

        आज का किया गया कर्म ही आने वाले कल की दिशा तय करता है। मनुष्य अक्सर भाग्य को एक रहस्यमयी शक्ति मानकर उससे आशाएं जोड़ लेता है, परंतु यह भूल जाता है कि भाग्य कोई अचानक मिलने वाली वस्तु नहीं, बल्कि हमारे ही कर्मों का संचित परिणाम है।जब हम अपने वर्तमान में ईमानदारी, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ कार्य करते हैं, तब अनजाने में ही हम अपने भविष्य की नींव मजबूत कर रहे होते हैं। आज की छोटी-छोटी कोशिशें, त्याग और निर्णय मिलकर कल के बड़े परिणामों का निर्माण करते हैं।इसके विपरीत, यदि हम आज आलस्य, टालमटोल और नकारात्मकता को चुनते हैं, तो भविष्य में मिलने वाला भाग्य भी उसी अनुरूप होगा। इसलिए भाग्य को कोसने से बेहतर है कि हम अपने कर्मों को सुधारें। यह सत्य है कि आज का कर्म ही कल का भाग्य बनता है। जो व्यक्ति इस सिद्धांत को समझ लेता है, वह अपने जीवन का निर्माता स्वयं बन जाता है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

मुंबई - महाराष्ट्र 

        सर्वप्रथम तो हर व्यक्ति आज में जीता है । आज महत्वपूर्ण होता है कर्म की वजह से । क्योंकि जो भी हम आज कर रहे हैं वही हमारे भविष्य यानी आने वाले कल का भाग्य बन रहा है। देखा जाए तो कर्म बीज की तरह है और आगे आने वाला समय (भविष्य )उस बोये गए बीज का फल यानि भाग्य । यह निश्चित है आज में  किए गए अच्छे- बुरे कर्म व्यर्थ नहीं जाते क्योंकि हिंदू दर्शन में पुनर्जन्म की मान्यता के आधार पर पिछले जन्मों के पुण्यात्मक- पापात्मक संचित कर्म फल  को ही भाग्य माना गया है। अतः भविष्य का भाग्य (किए गए कर्म फल) और आज के कर्म मिलकर ही जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमें सुख की अनुभूति कराते हैं। कोई भी मंजिल पानी है तो शत -प्रतिशत परिश्रम के बाद प्राप्ति जो भविष्य में होगी वह भाग्य ही है। फिर भी भाग्य के भरोसे न रहकर कर्म करते रहें । जीवन क्षणवादी है अतः काल्ह करें सो आज कर, आज करे सो अब । पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब ।। कबीर के साथ तुलसीदास भी कर्म के महत्व को बताते हुए कहते हैं-" सकल पदारथ हैं जग माहिं । कर्महीन कछु पावत नाहिं।अत: आज में किए गए सभी कर्मों से जीवन का भविष्य- भाग्य बनता है। कितना, कब तक, कैसे जिएंगे, सब कर्मों का ही खेल है।

- डाॅ.रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

         मनुष्य का जीवन दो धुरी पर घूमता है—कर्म और भाग्य।आज जो हम करते हैं, वही हमारे जीवन की दिशा तय करता है। कर्म वर्तमान की शक्ति है—यह हमारे हाथ में है, हमारे निर्णयों और प्रयासों में निहित है।दूसरी ओर, भाग्य भविष्य का वह फल है, जो हमारे आज के कर्मों से निर्मित होता है। हम अक्सर भाग्य को संयोग या पूर्वनिर्धारित मान लेते हैं, पर वास्तव में यह हमारे कर्मों का संचित परिणाम होता है।यदि आज हम परिश्रम, ईमानदारी और सकारात्मक सोच के साथ कार्य करें, तो भविष्य में वही हमारे भाग्य का स्वरूप बनकर सामने आता है। और यदि हम कर्म से दूर भागते हैं, तो भाग्य को दोष देना मात्र आत्म-प्रवंचना बन जाता है।इसलिए कहा भी गया है—

"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" अर्थात हमारा अधिकार केवल कर्म पर है, फल (भाग्य) पर नहीं।अंततः यह स्पष्ट है कि कर्म बीज है और भाग्य उसका फल।आज की मेहनत ही कल की किस्मत बनाती है।

- डाॅ. छाया शर्मा

 अजमेर - राजस्थान

       मनुष्य ने धरती पर जब जन्म लिया है तो उसे जिंदगी जीनी पड़ती है !! जीने के लिय उसे समयानुसार , उचित व वांछित कर्म भी करने पड़ते है , मेहनत करनी पड़ती है !!जो कर्म मनुष्य वर्तमान मैं करता है , सत्कर्म या पाप कर्म , उसके आज का निर्धारण करते है ,व जिंदगी जीने मैं सहायक होता हैं !!जिस प्रकार के कर्म व्यक्ति आज करता है , उनके अनुसार उसके भविष्य का निर्धारण होता है !!आज किए गए कर्म , उसका भाग्य निर्माण करते हैं ,चाहे वो भाग्य अच्छा हो , या बुरा !!

ठीक ही कहा गया है ,.....

कर्म किए जा , फल

की इच्छा मत कर ए 

इंसान , जैसे कर्म करेगा 

वैसा फल देगा भगवान ,

ये है गीता का ज्ञान ,

ये है गीता का ज्ञान !!

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

          जीवन में आज ही सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा आज ही हमारा कल और कल ही आगे चल कर हमारा भविष्य और भाग्य बनता है। सीधी सी बात है अपने कार्यों की योजना ऐसी बनायें मानों हजार वर्षों तक जीना है पर उसे पूरा करने के लिए इस तरह कार्य करें जैसे कल ही मर जाना है। संत कवि कबीर दास जी ने भी कहा है-

काल करे सो आज कर, 

आज करे सो अब। 

पल में परलय होएगी, 

बहुरी करेगा कब॥

अर्थात् जो कल करना है वो आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो। यदि अभी नहीं किया और इसी या अगले ही पल में प्रलय आ गया, मृत्यु आ गई तो फिर अपने काम को करने का अवसर कब, कहाँ और कैसे मिलेगा? जो इसको अपने जीवन का मूलमंत्र मान कर आज का काम आज ही पूरा करने में विश्वास रखते हैं और उसे क्रियान्वित करते हैं ऐसे ही लोग अपने अच्छे भविष्य का निर्माण करता है, अपना अच्छा भाग्य बनाता है। इसलिए जीवन में आज को महत्वपूर्ण मान कर अपने सभी काम समय पर करते चलना चाहिए। आज ही सुखद भविष्य और भाग्य का निर्माण करेगा।आज के किये हुए काम ही कल फलदायी वृक्ष बन कर जीवन का स्वर्णिम अध्याय लिखेंगे। इसलिए यह सत्य ही कहा गया है कि आज का होता है कर्म भविष्य का होता है भाग्य।

- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई 

देहरादून - उत्तराखंड

" मेरी दृष्टि में "  भाग्य तो कर्म से बनता है। परन्तु कर्म आपके हाथ में होता है यानी दिमाग में होता है। कर्म कैसा भी हो। वह भाग्य के रूप में सामने आता है। जो कर्म से बना होता है। यही चक्र सभी के साथ चलता है। यह जन्म दर जन्म चलता हुआ भाग्य है। कर्म कब भाग्य बन जाएं। कभी किसी को पता नहीं चलता है। 

               - बीजेन्द्र जैमिनी 

         (संचालन व संपादन)  


Comments

  1. हमें अपने कर्म में विश्वास करना चाहिए।जो इंसान अच्छे कर्म करेंगे,उनके फल भी अच्छे मिलेंगे।अतः हमें हमेशा अच्छे कर्म करना चाहिए।इससे लोग महान बनते हैं।वर्तमान कर्म है और भविष्य भाग्य। मनुष्य को सदैव सकारात्मक कार्य करना चाहिए।जिससे सही क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलती है।ऐसे इंसान का दुनिया में नाम होता है।ऐसे ही भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह थे।इनके योगदान अविस्मरणीय हैं।उन्हें मेरी ओर से कोटि_कोटि नमन।🙏
    - दुर्गेश मोहन
    पटना - बिहार
    (WhatsApp से साभार)

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  2. इंसान के हाथ में केवल कर्म करना है। आज अर्थात वर्तमान में निश्चित कर्म करके इंसान अपना भविष्य बनाने का प्रयास करता है। कभी सफल होता कभी असफल भी। लेकिन कर्म करना जरूरी है। भाग्य में क्या है यह तो भविष्य ही बता सकता है इंसान स्वयं नहीं। इसलिए भविष्य की चिंता छोड़कर अपना कर्म करते जाएं।
    "होई है सोई जो राम रचि राखा"
    - गायत्री ठाकुर 'सक्षम'
    नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश
    (WhatsApp से साभार)

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