रमेश चंद्र झा की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

      मौन हर कोई नहीं रह सकता है। क्योंकि शब्द गायब हो जाता है। जो साधना का एक पड़ाव कहलाता है। ऐसी स्थिति पर सभी नहीं पहुंचाते हैं। यह काफी अभ्यास के बाद सम्भव होता है।‌ दिल से बड़ा कुछ भी नहीं है। यह सिर्फ ब्रह्म है। यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
       मौन से बड़ा नहीं है शब्द, दिल से बड़ा नहीं है हाथ..... विषय मन के भावों की गहराइयों को छू जाता है.... यह एक भावनात्मक कथन है जो अर्थपूर्ण है... कभी कभी ऐसी विकट स्थिति आ जाती है जब हम अपनी बात को बोलकर अथवा शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते चूंकि उस समय मुख से निकले शब्दों से गलत फहमी भी हो सकती है। शब्दों की अपनी एक सीमा रेखा होती है और हम मौन हो जाते हैं। मौन रहकर हम अपने धैर्य,  समझ और अपनी भावनाओं को समेट लेते हैं किंतु यही 'मौन' हमारे अंदर के भावों को बिना किसी शब्द के व्यक्त कर देता है... अर्थात बिना कुछ कहे उन्मुक्त हो शांति और सत्य को परिलक्षित करता है । रही बात दिल से बड़ा नहीं है हाथ...यह उक्ती भी शत-प्रतिशत सही है। यदि हम किसी की किसी भी तरह से चाहे धन से अथवा अन्य किसी  तरह से सहायता करने के लिए उसकी तरफ मदद का हाथ बढ़ाते हैं तो उसके लिए हमारा दिल बड़ा होना चाहिए  अर्थात हमारी भावना निःस्वार्थ, दया, प्रेम एवं सहानुभूतिपूर्ण हो। वहीं मदद असली है किंतु अहम्, अहंकार एवं अपनी धाक को बनाए रखने के स्वार्थ को लेकर की गई मदद कोई मायने नहीं रखती। द्वेष ,स्वार्थ, अहंकारऔर कपट से बढ़े मदद के हाथ बुरे कर्म को दर्शाते हैं। निःस्वार्थ, दिल से, सच्ची भावना से बढ़ा मदद का हाथ हमारे अच्छे कर्म का फल होता है।

- चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

      अगर मौन और दिल कि बात करें तो मौन  वह शक्ति है जो शब्द भी   बयान नहीं कर सकते क्योंकि  कभी कभी चुप्पी भी शब्दों के शोर से अधिक प्रभावशाली और स्पष्ट होती है, अगर दिल की बात करें तो दिल से दी गई भावना, प्रेम, सहानुभूति और संवेदना हाथों से दी हुई चीजों से  अधिक मूल्यवान होती है तो आईये आज इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हैं कि मौन से बड़ा नहीं है शब्द और दिल से बड़ा नहीं है हाथ, देखा जाए यह बहुत ही गहरा और भावनात्मक सुविचार जो जीवन में संवेदना और आंतरिक भावना का महत्व दर्शाता है क्योंकि  सच्चा जुड़ाव या संवाद जरूरी नहीं की बातचीत से ही हो कभी कभी दो दिलों की खामोशी एक दुसरे को बेहतर समझती है  देखा जाए भावनाओं की गहराई ऊपरी दिखावे से कहीं अधिक सशक्त होती है कहने का  मतलब मौन से जो कहा  जा सकता है वो शब्द नहीं कह सकते और दिल से जो दिया जा सकता है वो हाथ नहीं दे सकते इससे जाहिर होता है कि प्रेम, सहानुभूति और भावनाओं का समपर्क सच्चे मन से होता है न कि भौतिक वस्तुओं से, हाथ से तो सिर्फ तोहफे दिए जा सकते हैं लेकिन हृदय से प्रेम और अपनापन दिया जा सकता है क्योंकि सहानुभूति किसी के प्रति सच्ची समझ और संवेदनशीलता हृदय से ही  महसूस होती है  अगर मौन की बात करें तो कभी कभी  बिना कुछ कहे सिर्फ खामोशी के माध्यम से शब्दों से अधिक गहरी भावनाएं व्यक्त की जा सकती हैं अन्त में यही कहुँगा कि , चुप रहने से ही हमें स्थिति को गहराई से समझने का मौका मिलता है जिससे सही निर्णय लिया जा सकते हैं और चुप रहने से व्यक्तित्व का समान बढता है  तथा मन की शक्ति  से सीमित साधन होते हुए भी हाथों से ज्यादा दिया जा सकता है क्योंकि भौतिक मदद से ज्यादा महत्वपूर्ण दिल की भावनाएं होती हैं यानि दया, प्रेम, सेवा इत्यादि कहने का मतलब शारिरिक रूप से कुछ भी कर लो लेकिन जो बात दिल से निकलती है वह सबसे सच्ची, गहरी और भावनात्मक होती है , इसलिए मौन से बड़े शब्द नहीं हो सकते और दिल से बड़े हाथ नहीं हो सकते। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू - जम्मू व कश्मीर

       यह पंक्तियाँ जीवन के गहरे सत्य को अत्यंत सरलता से व्यक्त करती हैं। शब्दों की अपनी शक्ति होती है, वे भावनाओं को व्यक्त करते हैं, प्रेरित करते हैं और संबंधों को जोड़ते हैं; परंतु कई बार मौन वह कह देता है, जिसे शब्द भी व्यक्त नहीं कर पाते। मौन में आत्मचिंतन, धैर्य, संवेदना और समझ की गहराई छिपी होती है। जब मन अत्यधिक प्रसन्न, दुखी या भाव-विभोर होता है, तब शब्द छोटे पड़ जाते हैं और मौन ही सबसे सशक्त अभिव्यक्ति बन जाता है। इसलिए कहा गया है कि मौन की भाषा सबसे प्रभावशाली होती है। इसी प्रकार हाथ शक्ति और कर्म का प्रतीक हैं, परंतु यदि उनमें हृदय की संवेदना न हो, तो उनका महत्व अधूरा रह जाता है। दिल प्रेम, करुणा, दया और अपनत्व का स्रोत है। किसी की सहायता केवल हाथों से नहीं, बल्कि सच्चे मन और भावनाओं से होती है। एक स्नेहभरा हृदय कठोर परिस्थितियों को भी सरल बना देता है। इसलिए दिल को हाथों से बड़ा कहा गया है, क्योंकि हाथ केवल कार्य करते हैं, जबकि दिल उन कार्यों में प्रेम और मानवता का भाव भरता है। ये पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि जीवन में बाहरी प्रदर्शन से अधिक महत्व भीतर की संवेदनाओं, शांति और सच्चे भावों का है। 

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर -  राजस्थान

       मौन से बड़ा नहीं है शब्द दिल से बड़ा नहीं है हाथ। बहुत रोचक विषय है यह। मौन से जो शब्द निकलते हैं,वह कोई सामान्य शब्द नहीं होते।वह होते हैं अंतर आत्मा की आवाज, हमारे विवेक और बुद्धि का प्रतीक।मौन रहकर हम उस ईश्वरीय शक्ति से साक्षात्कार कर सकते हैं,जिसे भगवान  कहते हैं।यह है मौन का प्रभाव।अब दूसरी बात दिल से बड़ा नहीं है हाथ, जितना दिल होता है हाथ उतना ही काम करता है। यानि सामर्थ्य होते हुए भी यदि दिल में भावना नहीं तो वह सामर्थ्य सक्रिय नहीं होती।दिल की नीयत और उदारता होने पर ही वह सामर्थ्य सक्रिय होती है। इसी बात को प्रतीक रुप में कहा गया कि दिल से बड़ा नहीं है हाथ। मौन की शक्ति से भी दिल को वह ताकत मिलती है जो दिल दरिया करती है।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर - उत्तर प्रदेश

      मौन ही वह भाषा है जो बिना बोले सब कुछ कह जाती है। शब्द अक्सर सीमित होते हैं—वे भावों को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाते, कभी गलत समझे जाते हैं, तो कभी अपने अर्थ खो देते हैं। लेकिन मौन में एक गहराई होती है, एक सच्चाई होती है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है। मौन में धैर्य है, समझ है और आत्मचिंतन का अवसर भी। इसी तरह, हाथ से बड़ा कोई दिल नहीं होता। हाथ तो केवल माध्यम है, लेकिन उसके पीछे जो भावना होती है, वह दिल से ही निकलती है। अगर दिल में करुणा, प्रेम और सच्चाई है, तो वही हाथ किसी के आँसू पोंछ सकता है, किसी को सहारा दे सकता है। लेकिन यदि दिल में संवेदना नहीं, तो हाथ का कोई महत्व नहीं रह जाता। इसलिए जीवन में शब्दों से अधिक मौन को और कर्मों से अधिक भावनाओं को महत्व देना चाहिए। क्योंकि सच्ची शक्ति वहीं होती है, जो दिखाई नहीं देती, पर महसूस होती है।

- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'

  मुंबई - महाराष्ट्र 

       एक साधे सब सधे, सब सधे एक चुप. यानी सब मिलकर एक को ठीक नहीं कर सकते हैं पर एक चुप सौ को साध सकता है. सबको हरा सकता है. मौन की शक्ति का अंदाज आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वह क्या कर सकता है.मौन की भाषा जो समझे अन्तर का सुख वो पाता है. उसी तरह दिल से बड़ा हाथ नहीं होता है. दिल से हम जहाँ तक पहुँच सकते हैं हाथ वहाँ नहीं पहुंच पाता है. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

      "मौनं सर्वस्व साधनम्" दुनियां का सबसे बड़ा सच जो  हर युग में सर्वसम्मत सर्वसिद्ध सर्वोपरि सर्वोत्कृष्ट है। मौन से बड़ा कोई मार्ग नहीं - - मार्गदर्शक नहीं। मौन निःशब्द होता है लेकिन हजारों हजार मुखों से निःसृत होता है। इसलिये सच्ची सच्चाई है कि मौन से बड़ा कोई शब्द नहीं है। - - और मौन जब दिल से सजता है तो उसके सजदे में सारी कायनात झुक जाती है। दिल से आशीर्वाद के लिये जब उठता है हाथ तो उस हाथ में हजारों शब्द होते हैं।शब्दातीत होता है वह  अनुभाव  - - वह अनुभूति। ब्रम्हांड का सबसे बड़ा सत्य है मौन। जब तक मौन है यह ब्रम्हांड तभी तक सृष्टि का सृजन है। ब्रम्हांड की हुंकार विनाशकारी होती है  - - उसी तरह अनर्गल शब्द विवाद और विनाश का कारण बनते। इंसान की सत्ता इंसानियत और दिल से चलती रहे तभी तक अविनाशी है। आज विश्व में जो हो रहा है   - - साक्षी है हर पल "विनाश काले विपरित बुद्धि "इस उक्ति का। इंसान की कुबुद्धि सृष्टि के विनाश का कारण बन रही है। आवेश में उठाया गया एक कदम समूची दुनिया के लिए घातक हो सकता है। भारत जैसे शांतिप्रिय देश के लिए सर्वथा अनुचित है आज के विश्व की चाल और हाल। भारतीय दिल से सोचते हैं - - भावना  करुणा दया क्षमा शांति ये भारतीय मानस और मानक हैं। मौन और दिल अर्थात मन भारतीयता का सबसे बड़ा गुण है - - भारतीयता का सबसे बड़ा संरक्षक है। मौन से दूरी और   दिल की मजबूरी भारतीय मानस और भारतीय मानक के लिये उचित नहीं है। जरूरत इस बात की है कि भावुकता से उपर उठकर शत्रु और मित्र को पहचानें और तद्नुसार अपना अगला कदम रखें।

- हेमलता मिश्र "मानवी"

 नागपुर - महाराष्ट्र

        अज्ञान की शक्ति क्रोध , ज्ञान की शक्ति मौन है ! समय की दस्तक अंतिम घड़ियों एकाकी बना देती हैं चुप्पी की ताकत शब्दों से ज्यादा है।  कई बार जो बात मौन कह देता है, वो हजार शब्द नहीं कह पाते बुजुर्गों का अनुभव कहता है ! कि जहां बोलना बेकार हो, वहां चुप रह जाना ही श्रेयस्कर है मौन में स्वीकृति भी है, असहमति भी है, और गहरा दर्द भी। शब्द तो बस सतह हैं ! शब्द मौन समंदर है।शब्द से विचार और विचार से कर्म से आदत बन आचरण में सुधार बदलाव परिवर्तन समाहित हो । आदेश निर्देश निर्णय ले मन बुद्धि से एकाग्र चित हो सोचता है कहा बोलना कहा चुप रहना है ! पर जब बुद्धि पर आक्रोश क्रोध हावी हो जाता है बुद्धि परख नियंत्रण सब भूल जाता है ! फिर दिल से बड़ा नहीं है हाथ ,हाथ भावना नीयत के आगे कर्म भी छोटा पड़ जाता है। हाथ से किया गया काम तभी सार्थक है जब दिल से किया जाए। बिना भावना के दी गई मदद सिर्फ एहसान होती है, पर दिल से दिया गया एक रुपया भी आशीर्वाद बन जाता है। कबीर भी कह गए: "मन चंगा तो कठौती में गंगा"।असली ताकत दिखावे में नहीं, गहराई में है। न बोलने में बल है, न सिर्फ करने में। असली बल है भाव में, नीयत में, मौन की गरिमा में होती हैं 

- अनिता शरद झा

रायपुर - छत्तीसगढ़ 

        मौन में धैर्य, आत्मचिंतन और सहनशीलता की शक्ति छिपी होती है, किन्तु जब अन्याय, असत्य और अत्याचार समाज को जकड़ने लगें, तब अत्यधिक मौन को कई बार कायरता, भय अथवा स्वार्थपूर्ण चुप्पी भी मान लिया जाता है। मेरी राय में सच्चा मनुष्य वह है जो हृदय की करुणा और शब्दों की मर्यादा दोनों को साथ लेकर चले। जहाँ प्रेम आवश्यक हो वहाँ मौन भी महान है, किन्तु जहाँ सत्य और न्याय पर प्रहार हो रहा हो, वहाँ साहसपूर्ण शब्द ही मानवता का सबसे बड़ा अस्त्र बन जाते हैं। इतिहास गवाह है कि समाज को बदलने वाले लोग केवल मौन साधक नहीं थे, बल्कि वे निर्भीक सत्यवक्ता भी थे। यदि अन्याय के सामने सज्जन लोग निरंतर मौन रहें, तो अत्याचारी की शक्ति बढ़ती जाती है। इसलिए विवेकपूर्ण वाणी, संवेदनशील हृदय और कर्मशील हाथ मानव जीवन की वास्तविक पहचान हैं। अतः प्रतिवादी मौन को कायरता समझने से पूर्व प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य बनता है कि वह शाब्दिक ज्ञान से अपना मौन भंग करे। 

- डॉ इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियॉं (जम्मू) - जम्मू और कश्मीर

        यह पंक्ति जीवन का अत्यंत गहरा सत्य अपने भीतर समेटे हुए है।मौन मन की वह अवस्था है, जहाँ भावनाएँ शब्दों से परे चली जाती हैं। कई बार आँखों की नमी, चेहरे की थकान और एक शांत चुप्पी वह कह जाती है, जिसे हजारों शब्द भी व्यक्त नहीं कर पाते। दुःख, प्रेम, त्याग और प्रतीक्षा—इनकी सबसे सच्ची भाषा अक्सर मौन ही होती है। पर शब्द भी कम शक्तिशाली नहीं हैं। वे टूटे मन को सहला सकते हैं, आशा जगा सकते हैं और संबंधों में मधुरता भर सकते हैं। एक मधुर शब्द जीवन बदल देता है, जबकि एक कठोर वचन मन को भीतर तक घायल कर देता है। शब्द मनुष्य की संवेदनाओं का दर्पण हैं। किन्तु शब्दों से भी बड़ा यदि कुछ है, तो वह हैं—हाथ। क्योंकि हाथ केवल कहते नहीं, निभाते हैं। वे आँसू पोंछते हैं, सहारा देते हैं, सेवा करते हैं और प्रेम को कर्म में बदल देते हैं। किसी दुखी व्यक्ति के कंधे पर रखा एक स्नेहिल हाथ कई बार लंबे उपदेशों से अधिक प्रभावी होता है। अंततः जीवन यही सिखाता है कि—

मौन आत्मा की गहराई है, शब्द संवेदना की अभिव्यक्ति हैं, और हाथ मानवता का सबसे सुंदर रूप। जब दिल में करुणा हो, तो हाथ प्रार्थना बन जाते हैं और मनुष्य सच अर्थों में इंसान बन जाता है।

 - अलका पांडेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

        कहाँ बोलना चाहिए और कहाँ मौन रहना अच्छा होता है।यह सब तात्कालिक परिस्थिति और मन: स्थिति पर अनुकूल रहता है इससे परिणाम भी ठीक निकलते हैं। अन्यथा बात बिगड़ भी सकती है। कई बार ऐसा भी होता है कि जो बात कही जा रही है, उसका दूसरा अर्थ निकालकर बात का बतंगड़ भी बना लिया जाता है। यानी भ्रम की स्थिति भी बन जाती है। अत: सोच-समझकर बोलना चाहिए। अन्यथा मौन रहना ही श्रेयस्कर होता है। दिल...दिल की बात निराली होती है।इसीलिए दिल को बड़ा माना गया है। क्योंकि दिल से जुड़े भाव हों या कार्य विशुद्ध होते हैं। उनमें न स्वार्थ होता है, न छल और न ही आडंबर। सब कुछ बाहर-भीतर एक समान। इसलिए सुदृढ़ भी होते हैं।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

      मौन की गहराई बड़प्पन बुद्धिमत्ता को शब्द नहीं माप सकते क्योंकि शब्दों से हम आत्म चिंतन नहीं कर सकते और ना ही आंतरिक शांति पा सकते हैं। यह दिल से अधिक जुड़ा होता है इसी कारण मौन व्यक्ति के अहंकार को मिटाता है।  इसलिए मौन व्यक्ति अपनी और दूसरे की भावनाओं को अच्छी प्रकार से समझ पाता है ।हर प्रकार की सहायतार्थ उसके दिल की आवाज हाथों को सेवार्थ भी जोड़ देती है। अतः स्थिति समय और अपनी मानसिक शारीरिक शक्ति व योग्यता के अनुसार मौन अवस्था या दिल की आवाज सुने। तदनुरूप ही कार्य करें। यह माना जा सकता है कि आज के दौर में बातूनी शब्द चातुर्य में निपुण लोग अधिक प्रिय हैं और फिर मौन को हर कोई समझ भी तो नहीं पाता है अतः ऐसी स्थितियों में आवश्यकता अनुसार दोनों का प्रयोग ही उपयोगी एवं कारगर है। 

- डॉ रेखा सक्सेना

मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश 

      जो बात शब्द व्यक्त नहीं कर पाते, उसे मौन आसानी से व्यक्त कर देता है। मौन से बड़ा नहीं है शब्द। बड़े-बड़े व्याख्यान जो काम नहीं कर पाते वह एक पल का मन कर देता है।मौन की ताकत ने बड़े-बड़े राजाओं को भी झुका दिया। दिल बड़ा होना चाहिए। सभी के लिए उसमें जगह होना चाहिए। प्रेम और स्नेह से भरपूर जिसका दिल होता है वह जग जीत लेता है।जिसका दिल बड़ा होता है उसके बड़प्पन की कोई सीमा नहीं। हाथ से इंसान कितना दे पाएगा। मगर विशाल दिल बहुत कुछ दे जाता है। 

- गायत्री ठाकुर 'सक्षम' 

 नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " मौन से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। जो सिर्फ शान्ति से ही सम्भव होता है। फिर भी मौन सर्वश्रेष्ठ अवस्था कहा जाता है। बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। कहते हैं कि मौन शान्त मन की अवस्था का परिणाम है। 

          - बीजेन्द्र जैमिनी 

       (संचालन व संपादन)


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