जो व्यक्ति निरंतर कर्म करते रहने पर विश्वास करता है ।वह नसीब के विषय में ना चिंतन करता है ना वरीयता देता है बल्कि कर्मठ व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से ही अपने नसीब का निर्माण कर लेते हैं। इसके विपरीत यदि" देव देव आलसी पुकारा" कहावत पर रहे तो बिना कर्म किए भाग्य से जीवन संवर जाएगा ; कल्पना तीत है। अतः कर्म पर ही विश्वास रखने की प्रधानता होनी चाहिए। शास्त्र भी कहते हैं-- "कर्म प्रधान विश्व रचि राखा ।जो जस करें सो तस फल चाखा।" कर्म के बल पर ही मनुष्य सब उपलब्धियों को प्राप्त कर पाता है । जीवन जगत के सभी क्षेत्रों में कर्म के कारण ही मनुष्य आदिमानव से अन्तरिक्ष की उड़ान तक सफल हुआ है। पर्वतों दुर्गम स्थानों को काट छांट कर सुगमता तक कम समय में पहुंचने के लिए सड़कों के जाल, नए एक्सप्रेस वे के निर्माण, भौतिक दृष्टि से देश में नए-नए अविष्कार होना, हमेशा विकास की ओर अग्रसर रहना, मानसिक और शारीरिक रूप से कार्यशील सत्ता ही समय अनुसार शासन करती है। भारत को विश्व गुरु की ओर ले जाने की कार्ययोजना, विधि ,तदनुसार गति, केवल कार्यशील कर्म प्रधान व्यक्तित्व की सत्तात्मकता के बल पर ही है तथा भाग्य के भरोसे में बैठे रहने से कुछ प्राप्त नहीं होता।
- डाॅ.रेखा सक्सेना
मुरादाबाद - उत्तर प्रदेश
अगर कर्म की बात करें तो कर्म पूरी तरह व्यक्ति के नियंत्रण में होता है क्योंकि यह वर्तमान में किया जाता है जिससे भविष्य का निर्माण होता है, वास्तव में कर्म ही हमारे भाग्य के निर्माता होते हैं तो आईये आज का रूख इस चर्चा पर करते हैं कि कर्म पर जो करते हैं विश्वास वो नसीब के पीछे नहीं भागते मेरे ख्याल में यह कथन बिलकुल सत्य है कि कर्म पर विश्वास करने वाले नसीब के पीछे नहीं भागते क्योंकि कर्म पर विश्वास करने वाले अक्सर यही मानते हैं कि उनका भविष्य उनके भाग्य से नहीं बल्कि उनके द्वारा किए गए कार्यों से निधार्रित होता है क्योंकि मेहनती लोग हमेशा अपने नसीब को अपनी तरफ मोडने की क्षमता रखते हैं, उनके मुताबिक अगर कर्म निस्वार्थ, नेक और सही दिशा में हैं तो आपका भाग्य अवश्य उज्जवल और अच्छा होगा इसमें कोई शक नहीं कि अच्छे कर्म ही भविष्य सुरक्षित करते हैं और समय आने पर सुखद परिणाम देते हैं इसलिए इंसान अपने कर्मों से अपना भाग्य बदल सकता है, हाँ परिस्थितियां बदल सकती हैं लेकिन अच्छे कर्म वर्तमान के अतिरिक्त भविष्य में भी आपके साथ रहते हैं, क्योंकि अच्छाई एक ऐसा निवेश है जिसका मुनाफा ईश्वर स्वयं देता है और ईश्वर का दिया हुआ कभी कम नहीं होता, कईबार ऐसा भी सुनने को मिलता है कि नसीब को बदला नहीं जा सकता लेकिन कर्मों को सुधार करके नसीब सुधारा जा सकता है इसलिए भाग्य के भरोसे न रह कर अपने कर्मों को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए अन्त में यही कहुँगा कि वर्तमान में किए गए अच्छे कर्म ही सुनहरे भविष्य की नींव हैं इसलिए हमें अपने कर्मों पर विश्वास होना चाहिए,क्योंकि अपने कार्यों , मेहनत और ईमानदारी पर विश्वास रखना ही जीवन की सफलता और संतुष्टि का अधार है, भाग्य तो कर्म की ही देन है इसलिए सकारात्मक कर्मों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए यही सिद्धांत जीवन के हर मोड़ पर सही दिशा और संतुष्टि प्रदान करता है तथा काम को समर्पित भाव से करना ही सच्ची ईश्वर की पूजा है जिससे नसीब भी फलता फूलता नजर आता है इसलिए कर्म पर विश्वास ही नसीब की उच्चतम देन है।
- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा
जम्मू - जम्मू व कश्मीर
कर्म पर विश्वास रखने वाले लोग जीवन को एक जिम्मेदारी की तरह जीते हैं, न कि एक संयोग की तरह। उनके लिए सफलता किसी चमत्कार का परिणाम नहीं होती, बल्कि निरंतर प्रयास, धैर्य और समर्पण का फल होती है। वे जानते हैं कि भाग्य केवल अवसर देता है, लेकिन उसे साकार करने का कार्य कर्म ही करता है।ऐसे लोग परिस्थितियों को दोष देने के बजाय अपने प्रयासों को और मजबूत करते हैं। वे यह नहीं सोचते कि “जो लिखा है वही होगा”, बल्कि यह मानते हैं कि “जो करेंगे, वही मिलेगा।” यही सोच उन्हें भीड़ से अलग बनाती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।नसीब के पीछे भागने वाले अक्सर इंतजार में रह जाते हैं, जबकि कर्म पर विश्वास करने वाले अपनी राह खुद बना लेते हैं। उनके लिए हर दिन एक नया अवसर होता है, और हर प्रयास उन्हें उनके लक्ष्य के करीब ले जाता है। जीवन में वही आगे बढ़ता है जो अपने कर्मों पर भरोसा करता है, क्योंकि नसीब भी उन्हीं का साथ देता है जो खुद पर विश्वास रखते हैं और कर्म करने से कभी पीछे नहीं हटते।
- डॉ. अर्चना दुबे 'रीत'
मुंबई - महाराष्ट्र
कर्म पर विश्वास करने वाले कभी नसीब के पीछे नहीं भागते हैं. जिनको अपने आप पर विश्वास होता है वह न किसी व्यक्ति के भरोसे रहते हैं न किसी देवी देवता के भरोसे रहते हैं न ही वह नसीब के भरोसे रहते हैं. रामायण में भी कहा गया है कि "कर्म प्रधान विश्व रची राखा." यानी कर्म से ही विश्व की रचना होती है नसीब या भाग्य से नहीं. हम बीज बोयेंगे नहीं तो फल कैसे आएगा. नसीब तो आकर पेड़ नहीं न लगाएगा. पेड़ तो लगाना ही पड़ेगा, जो कि कर्म हुआ. कर्म करने वालों को नसीब के पीछे भागने की जरूरत नहीं होती.
- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "
कलकत्ता - पश्चिम बंगाल
यह खरा सत्य है कि जो कर्म पर विश्वास करते हैं वे नसीब यानी भाग्य के पीछे नहीं भागते। जिन्हें अपने ऊपर विश्वास होता है, जो यह सोचते हैं मैं कर सकता हूँ.. वही व्यक्ति अपनी कार्य योजना बना कर उसके अनुसार कार्य करना आरंभ कर देता है। वह किसी से अपने हाथ की रेखाओं को दिखा कर अपने भविष्य की जानकारी नहीं लेता, क्योंकि वह जानता है उसके किये हुए कार्य ही उसकी सफलता की कहानी बनेंगे, उसका उज्जवल भविष्य बनायेंगे। उसके कार्य और कार्यों की सफलता ही दूसरों के लिए आदर्श और प्रेरणा बनेगी। जो कर्म नहीं करते, केवल बातें बनाने में लगे रहते हैं ना तो उन्हें कोई पसंद करता है, ना उससे कोई बात करना चाहता है। सब उससे किनारा कर लेते हैं। ऐसे लोग अपना आज और कल सब स्वयं अपने ही हाथों समाप्त कर देते हैं। इसके विपरीत कर्मशील, कर्मठ व्यक्ति अपने श्रम से सफलता अर्जित करके अपना स्वर्णिम भविष्य बनाते हैं, स्वयं को और दूसरों को खुशी देते हैं तथा औरों को भी कर्मनिष्ठ बनने की राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
- डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई
देहरादून - उत्तराखंड
जो अपने कर्म के प्रति जागरूक तो होते ही हैं , निष्ठावान भी होते हैं और समर्पित भाव से तन्मयता से पूरा करने में विश्वास रखते हैं, उन्हें स्वयं पर इतना अटूट विश्वास रहता है कि वे जानते हैं कि वो जो कर रहे हैं उसके परिणाम अच्छे ही होंगे। इसलिए वे परिणाम के प्रति निश्चिंत होते हैं यानी वे परिणाम के प्रति न उतावले होते हैं और न भागते हैं। सार यही कि अपने काम में सदैव समर्पित भाव, निष्ठा और लगन रखना चाहिए, क्योंकि फिर इसके परिणाम अच्छे ही मिलते हैं और भाग्य भी साथ देता है।
- नरेन्द्र श्रीवास्तव,
गाडरवारा - मध्यप्रदेश
कर्म पर जो करते हैं विश्वास, वो नसीब के पीछे नहीं भागते—यह विचार जीवन का एक गहरा सत्य प्रस्तुत करता है। जो व्यक्ति अपने कर्म को ही अपनी शक्ति मानता है, वह भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय निरंतर प्रयास करता है। भारतीय दर्शन, विशेषकर भगवद्गीता में भी यही संदेश दिया गया है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता करने में नहीं। ऐसे कर्मशील लोग कठिनाइयों से घबराते नहीं, बल्कि उन्हें चुनौती मानकर आगे बढ़ते हैं। वे जानते हैं कि नसीब कोई अलग शक्ति नहीं, बल्कि हमारे ही कर्मों का परिणाम है। इसलिए वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए परिश्रम, धैर्य और आत्मविश्वास को अपनाते हैं। अंततः यही कर्मठता उन्हें सफलता के शिखर तक पहुँचाती है और नसीब स्वयं उनके कदमों में आकर झुक जाता है।
यह पंक्तियाँ हमें यह प्रेरणा देती हैं कि—
“कर्म ही असली पूँजी है, और नसीब उसका ब्याज।”
यदि कर्म सशक्त है, तो नसीब स्वयं अनुकूल हो जाता है।
- डाॅ. छाया शर्मा
अजमेर - राजस्थान
पूजा कर लो कर्म की यही साथ दे जाय
कर्म बिना कुछ भी नहीं साथ में तेरे जाय
इन पंक्तियों से स्पष्ट है कि कर्म ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और कर्म पर हमारा विश्वास नसीब खोलता है। अपने अपने कर्म श्रेत्र में मन लगाकर काम करें तो सफलता कदम चूमती है लेकिन कामचोरी आपकी कुछ दिन छिप सकती है हमेशा नहीं। कर्म से आनेवाली निपुणता जीवन के हर क्षेत्र में सम्मान और सफलता दिलाती है जबकि नाकारा और कामचोर लोग हर जगह से दुत्कार पाते हैं।कर्म करने वाले नसीब का रोना नहीं रोते बल्कि विश्वास से भरे होते हैं। ज्ञानवर्धन उनका लक्ष्य होता है ताकि उनका कार्य अच्छा - - और अच्छा उत्कृष्ट हो। कर्म प्रधान व्यक्ति हर ओर कर्म की महत्ता पर भरोसा करते हैं। इन्हें चाटुकारिता नहीं आती। कामचोरी इनके स्वभाव में नहीं होती। "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" इनका लक्ष्य होता है। भाग्य का शुभाशीष इन पर सदैव बरसता है।नसीब साथ दे या ना दे. - - इन्हें परवाह नहीं होती। ये तन मन धन से जुटे रहते हैं। इनकी मानसिकता काम से जी चुराने की नहीं होती बल्कि इनका आदर्श व्यक्तित्व इन्हें सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रखता है। तात्पर्य यही कि "करमवा बैरी हो गये हमार" ये कर्म वीर कभी नही सोचते बल्कि अपने विचारों और व्यवहार व्यक्तित्व से दूसरों के लिये रोलमाडेल बन जाते हैं।
- हेमलता मिश्र मानवी
नागपुर - महाराष्ट्र
*कर्म पर जो करते हैं विश्वास वह नसीब के पीछे नहीं हैं भागते* अपने जीवन के हर पल आप और हम काम करते हैं-शरीर से, दिमाग से, भावनाओं से और ऊर्जा से। हर काम किया हुआ कुछ न कुछ याददाश्त बनता है।उसी को कर्म कहा गया है।कर्म निर्णायक है-सुख और दुख का। पाप कर्म से दुख, शुभ कर्म से सुख प्राप्त होता है। और ना किया हुआ कर्म कोई फल नहीं देता। कर्म करने से पहले यह तय कर लेना चाहिए कि उससे पछतावा होगा या प्रसन्नता होगी। ऐसा सोच विचार कर किया हुआ कर्म शुभ कर्म करवाता है। जैसी करनी वैसी भरनी-जैसा करोगे वैसा भरोगे-कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर इंसान, जैसे कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान हाजी अनेक उदाहरण हमें ज्ञान शास्त्रों के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। उपरोक्त बात कर्म पर जो करते हैं विश्वास वो नसीब के पीछे नहीं भागते सही साबित होती है।
- रविंद्र जैन रूपम
जिला धार - मध्य प्रदेश
मनुष्य के जीवन में सफलता का आधार क्या है—नसीब या कर्म ? यह प्रश्न सदियों से विचार का विषय रहा है। कुछ लोग अपने हर छोटे-बड़े कार्य का श्रेय नसीब को देते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने कर्म पर अटूट विश्वास रखते हैं। वास्तव में, जो लोग “करने” पर विश्वास करते हैं, वे कभी भी नसीब के पीछे नहीं भागते, बल्कि अपने प्रयासों से अपना नसीब स्वयं गढ़ते हैं। कर्म ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को साधारण से असाधारण बना देती है। नसीब एक अनिश्चित अवधारणा है, जिस पर निर्भर रहना अक्सर आलस्य और निराशा को जन्म देता है। इसके विपरीत, कर्मशील व्यक्ति परिस्थितियों से घबराता नहीं, बल्कि उनका सामना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ता रहता है। वह जानता है कि यदि आज का परिश्रम सच्चा है, तो कल का परिणाम भी सार्थक होगा। इतिहास साक्षी है कि महान व्यक्तियों ने कभी भी अपने भाग्य के भरोसे जीवन नहीं जिया। उन्होंने अपने कर्म, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर असंभव को संभव किया। उनके लिए नसीब कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि उनके कर्मों का प्रतिफल था। यही कारण है कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते और अंततः सफलता प्राप्त करते हैं।इसके विपरीत, जो लोग केवल नसीब के भरोसे रहते हैं, वे अक्सर अवसरों को खो देते हैं। वे हर असफलता का दोष भाग्य को देते हैं और अपने प्रयासों में कमी को अनदेखा कर देते हैं। इस प्रकार उनका जीवन एक ठहराव में बदल जाता है, जहाँ न प्रगति होती है और न ही आत्म-संतोष मिलता है।अतः यह स्पष्ट है कि सच्ची सफलता उन्हीं को मिलती है जो “करने” में विश्वास रखते हैं। वे अपने कर्म को ही अपना धर्म मानते हैं और नसीब को अपने प्रयासों का परिणाम समझते हैं। हमें भी चाहिए कि हम नसीब के पीछे भागने के बजाय अपने कर्म को प्राथमिकता दें, क्योंकि जब हम पूरे मन से प्रयास करते हैं, तो नसीब भी हमारे साथ चलने लगता है।
- अलका पांडेय
मुंबई - महाराष्ट्र
हमें हमेशा कर्म में विश्वास करना चाहिए।रामचरित मानस में भी कर्म को प्रधान माना गया है।कर्म का सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।कर्म करने वाला मनुष्य अवश्य सफल होता है।इसलिए हमें कर्म का मार्ग ही अपनाना चाहिए। हमें नसीब के पीछे नहीं भागना चाहिए।हर काम हमें नसीब के ऊपर नहीं छोड़ना चाहिए।अगर हमारे नसीब में होगा,तो हमें ईश्वर जरूर देंगे।अतः हम सभी को कर्म में विश्वास करना चाहिए।नसीब के पीछे भागना बुद्धिमानी नहीं है।इसलिए कहा गया है कि कर्म सर्व प्रधान होता है।जो इसे समझ गया,वह सफल हो गया।
- दुर्गेश मोहन
पटना - बिहार
कर्म ही पूजा विश्वास की नीव है जिसकी मजबूती को बनाए रखने के लिए रिश्तों को निभाना पड़ता है ! वही कामयाबी की मंजिल है ! जिससे भाग्य ख़ुद बदल जाता हैं !और इंसान इंसानियत की नेक राह चलने लगता है ! दुनिया में ये बातें यदि हर इंसान की समझ ऐसी हो जाए ! यदि इंसान नसीब जैसे शब्द हट जाए ,तो कोई अपने भाग्य को नही कोसेगा ! या ये नही कहेगा तेरी मेरी उसका भाग्य ख़राब था इसलिए मैं यहाँ जन्म लिया ! आपके यहाँ नौकरी की या अमीरों के घर पैदा होता ! पर देखो मेरा भाग्य कहाँ ले जाएगा ! इंसान का कर्म ही भाग्य है जिस पर सच्चाई विश्वास के साथ आगे बढ़ ! समृद्धि को हासिल कर अपने जीवन में आगे कामयाबी हासिल कर सकते है ! वो नसीब के पीछे भागते नही हैं ! ईमान ही विश्वास की खुद्दारी है ! जो जीवन जीने की नीव को मजबूर बनाती हैं!
मेरी सोच यही है !
- अनिता शरद झा
रायपुर - छत्तीसगढ़
मेरे विचार में “जो व्यक्ति कर्मवीर होते हैं, वे भाग्य के पीछे नहीं भागते बल्कि स्वयं भाग्यविधाता बनते हैं” जीवन का अत्यंत प्रेरणादायक और यथार्थवादी सिद्धांत यही है।मेरी स्पष्ट राय यह है कि कर्मवीर व्यक्ति परिस्थितियों के अधीन नहीं होते, बल्कि अपने परिश्रम, साहस और निरंतर प्रयास से परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लेते हैं। वे यह नहीं देखते कि भाग्य क्या देगा, बल्कि यह तय करते हैं कि उन्हें अपने कर्मों से क्या प्राप्त करना है।कर्मवीर व्यक्ति असफलताओं से विचलित नहीं होते, बल्कि उन्हें सीख में बदलकर आगे बढ़ते हैं। उनका विश्वास बाहरी संयोगों पर नहीं, बल्कि अपनी क्षमता, अनुशासन और संघर्षशीलता पर होता है। यही कारण है कि वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे व्यक्तित्व हमें यह सिखाते हैं कि भाग्य कोई स्थिर वस्तु नहीं है, बल्कि यह हमारे कर्मों का परिणाम है। जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है, वही अपने जीवन का निर्माता बनता है। अतः यह विचार केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि एक जीवन-पथ है कि कर्म करो, निरंतर करो, और अपने कर्मों से ही अपना भाग्य स्वयं गढ़ो। अर्थात संघर्ष भले ही स्वर्गीय राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से आरम्भ होकर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी तक चला आए संघर्षरत व्यक्ति कभी हारता नहीं है और एक दिन "विधि का विद्यार्थी" नहीं होते हुए भी माननीय न्यायपालिका में विजयश्री अवश्य प्राप्त करता है।
- डॉ. इंदु भूषण बाली
ज्यौड़ियॉं (जम्मू) -जम्मू और कश्मीर
कर्म पर विश्वास करनेवाले नसीब के पीछे नहीं भागते, अपितु अपने भविष्य का निर्माण स्वयं करते हैं !! कहते हैं कि भगवान भी उनकी सहायता करते हैं , जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं अर्थात भगवान से हम तभी शिकायत या शिकवा कर सकते हैं , जब हम अपने हिस्से का प्रयास , मेहनत , करें और वांछित परिणाम न मिले !! कुछ लोग बिना कर्म किए , चाहते हैं फल प्राप्त हो , नसीब बदल जाए , जो कि असंभव है !! कुछ लोग बैठे बैठे ही नसीब बदलना चाहते है , व जब ऐसा नहीं होता , तो अपने नसीब को कोसने लग जाते हैं !! मेहनती , कर्मठ , व्यक्ति , अपना नसीब अपनी हिम्मत , हौसले , व सतत प्रयासों से , स्वयं लिखते है !!
- नंदिता बाली
सोलन - हिमाचल प्रदेश
ReplyDeleteकर्मशील व्यक्ति अपने कर्म पर ध्यान देता है किसी की बातों पर नहीं। वह केवल कर्म पर विश्वास करता है। भाग्य का पीछा नहीं करता। जब कर्म करेंगे तो फल अवश्य मिलेगा।कम या अधिक जैसा भी हो, पर मिलेगा। नसीब के पीछे हाथ बांधकर नहीं बैठता।सतत कर्मशील रहता है।
- गायत्री ठाकुर 'सक्षम'
नरसिंहपुर - मध्य प्रदेश
(WhatsApp से साभार)