संतों के लिए भण्डारा का आयोजन
पानीपत - श्री कैलाशी सेवा संस्था लगभग पिछले तीस वर्षों से पानीपत से समान इकठ्ठा कर वर्ष में दो बार भण्डारा अवश्य करते हैं एक बार जब श्री बद्रीनाथ के पट खुलते हैं तो गंगोत्री में दर्शन जाने वाले संतों का भण्डारा करते हैं दूसरा जब पट बंद होते हैं तो संतों का भण्डारा कर जो संत वहां बर्फ में गुफाओं में तप के लिए चले जाते हैं उनके राशन की व्यवस्था करते हैं।इसके अतिरिक्त भी बीच बीच में सेवा के लिए जाते रहते हैं। ये बड़ा ट्रक भर सामान ले जाते हैं परन्तु लौटते समय वहां से बड़ी - बड़ी केनियों में मां गंगा का पावन जल लेकर आते हैं। पानीपत आकर वर्ष भर बल्ड कैम्पों का आयोजन भी करते हैं कभी फौजियों के लिए , कभी रैड क्रास द्वारा असहाय लोगों के लिए। जिसमें ये डोनरज़ को ये रफरैशमैंट के साथ एक लिटर पावन गंगा जल एक तुलसी जी का पौधा भी प्रदान करते हैं। ऐसी निस्वार्थ सेवा स्वंय में एक मिसाल है। सभी सदस्य अपने व्यवसाय से अधिक इस सेवा को वरियता देते हैं सादे कपड़ों में संत ही हैं।दो ग्रन्थ पड़ने,सफेद भगवे कपड़े पहनने या चन्दा इकट्ठा कर आश्रमों की श्रंखला बनाने से कोई संत नहीं बन जाता। संत आचरण से आती है।जब इनके ट्रक विधि विधान पूजन से विदा होते हैं तो शहर के सम्मानित लोग इन्हें आशीर्वाद देने,शुभ कामनाएं देने पहुंचते हैं। करने। ये लोग जो एक एक पैसा इकठ्ठा कर संत सेवा कर रहे हैं फिर वर्ष भर समाज सेवा।पिछले कुछ वर्षों से ये एक छिपे महायोगेश्वर ब्रह्मलीन स्वामी प्रेम भिक्षुक जी महाराज की अनसुनी लीलाओं पर छपी पुस्तक"जोगी एक निराला देखा" पट बंद होते समय गुफाओं में तप करने वाले संतों को वितरित कर रहे हैं।किन्तु इस बार प्रेरणा हुई कि पट खुलते समय जो संत दर्शनार्थ जा रहें हैं और वापस अपने अपने आश्रमों में चले जाएंगे उनको जोगी एक निराला देखा व महायोगेश्वर द्वारा महान संत तुलसीदास जी कृत हनुमान चालीसे पर उन्हीं द्वारा किया टीका भी वितरित किया जायेगा।
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