अयोध्यासिंह उपाध्याय ' हरिऔध ' की स्मृति में चर्चा परिचर्चा

      शोषण से मुक्ति सिर्फ शिक्षा दिला सकतीं हैं। नारी शोषण प्राचीन काल से चला आ रहा है। आज तक शोषण खत्म नहीं हो पाया है। सिर्फ शिक्षा के माध्यम से रोजगार मिल सकता है। रोजगार ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। जो शोषण से मुक्ति दिला सकतीं है । यही कुछ जैमिनी अकादमी की चर्चा परिचर्चा का प्रमुख विषय है। अब आयें विचारों में से कुछ विचार पेश करते हैं :-
     नारी शोषण क्या,हर शोषण का समाधान शिक्षा है। लेकिन यह समाधान ही इस कड़ी को मजबूती दे जाता है।देखा गया है कि जब तक अशिक्षित तब तक शोषित और जब शिक्षित तो फिर शोषक। यही चल रहा है बरसों से और चलता रहेगा।यदि ऐसा न होता तो समानता आ ही जाती अब तक।अब बात नारी का भी अधिकार है रोजगार की। सभी का अधिकार है रोजगार। कितने ही क्षेत्र हैं जहां रोजगार में नारी,नर से आगे है। चिकित्सा, नर्सिंग, शिक्षा, ब्यूटी पार्लर,बुटीक आदि कुछ ऐसे ही क्षेत्र हैं।रोजगार सबका अधिकार है,जो भी पात्र हैं उनको रोजगार मिलना ही चाहिए। शिक्षित होना बहुत जरूरी है, इससे अपने अधिकारों और कर्तव्य पालन के प्रति जागरूकता मिलती है ।

- डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर -  उत्तर प्रदेश

      शिक्षा वो रोशनी है , जो शोषण रूपी अंधकार को मिटाने की शक्ति रखती है !! नारी शिक्षा से अज्ञान दूर होता है , व कई कठिन परिस्थितियों का हल ढूंढने व जूझने मैं सहायक होती है ! नारी का भी बराबर का अधिकार है शिक्षा प्राप्त करने पर भी , और रोजगार पर भी !! पहले नारी को घर से निकलने नहीं दिया जाता था , न शिक्षा के लिए , न रोजगार के लिए ! अब तस्वीर , स्थिति , परिस्थिति बदल चुकी है !! शिक्षित नारी स्वयं की रक्षा बेहतर कर सकती है , व स्वयं को शोषण से बचा सकती है !! 

- नंदिता बाली 

सोलन - हिमाचल प्रदेश

     पूर्व कालीन इतिहास के पन्नों को पलटते जाईए, नारी सशक्तिकरण का इतिहास मिल जाएगा। नारी शोषण का समाधान है शिक्षा, नारी का भी अधिकार है रोजगार।  प्राचीन काल से वर्तमान परिदृश्य देखिए नारियों का उत्थान होता गया है, राजसिंहासन से अब तक सम्मान प्राप्त हुआ है। शिक्षित और रोजगार विविधतापूर्ण हो रहा है। किसी भी क्षेत्राधिकार में उनका योगदान सराहनीय कदम पर चमक रहा है। समाधान और अधिकार उनका विवेकाधिकार है......।

- आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार "वीर"

     बालाघाट - मध्यप्रदेश

       नारी सृष्टि की आधारशिला है, परंतु विडंबना यह है कि आज भी अनेक स्तरों पर वह शोषण, भेदभाव और असमानता का सामना कर रही है। ऐसे में यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस शोषण का स्थायी समाधान क्या है? इसका सबसे सशक्त उत्तर है—शिक्षा और रोजगार।शिक्षा केवल अक्षरज्ञान नहीं, बल्कि आत्मबोध, अधिकारों की समझ और आत्मसम्मान का द्वार है। जब एक नारी शिक्षित होती है, तो वह अपने अधिकारों को पहचानती है, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का साहस जुटाती है और अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बनती है। शिक्षा उसे निर्भरता से स्वतंत्रता की ओर ले जाती है।इसी प्रकार, रोजगार नारी को आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। जब उसके पास अपनी आय का स्रोत होता है, तो वह केवल परिवार की सहायक नहीं, बल्कि निर्णयकर्ता भी बनती है। आर्थिक सशक्तिकरण से उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में उसकी स्थिति मजबूत होती है।परंतु केवल अवसर देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता में भी परिवर्तन आवश्यक है। आज भी कई स्थानों पर नारी की शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता या उसे घर की सीमाओं में बाँधकर रखा जाता है। यह सोच बदलनी होगी—क्योंकि नारी का सशक्त होना केवल उसका नहीं, पूरे समाज का उत्थान है। अंततः कहा जा सकता है कि— “शिक्षा नारी को जागरूक बनाती है और रोजगार उसे मजबूत।” जब ये दोनों साथ होते हैं, तब नारी शोषण की जंजीरें स्वतः टूटने लगती हैं।यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक सामाजिक आवश्यकता है—जहाँ हर नारी शिक्षित हो, आत्मनिर्भर हो और सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। 

- डाॅ. छाया शर्मा

अजमेर -  राजस्थान

          नारी शिक्षा अधिकार न केवल एक संवैधानिक और मानवाधिकार है बल्कि यह राष्ट्र विकास की नींव है शिक्षित महिलाएं न केवल खुद सशक्त बनती हैं  बल्कि अपने परिवारों को भी मजबूत अर्थव्यवस्था का आधार भी तैयार करती हैं तो आईये आज इसी चर्चा पर बात करते हैं कि नारी शोषण का समाधान है शिक्षा नारी का अधिकार है रोजगार, मेरा मानना है कि नारी शोषण का सबसे प्रभावी और स्थायी ईलाज शिक्षा ही है क्योंकि शिक्षित नारी आत्मनिर्भर, जागरूक और अपने  अधिकारों के प्रति सजग होती है देखा जाए शिक्षा न केवल महिलाओं में आत्मविश्वास बढाती है बल्कि उनको शोषण के खिलाफ लडने की क्षमता भी प्रदान प्रदान करती है देखा जाए शिक्षित महिलाओं में घरेलू हिंसा और यौन शोषण की जोखिम काफी कम हो जाता है यही नहीं शिक्षा से नारियां अपने कानूनी और मानविय अधिकारों को समझती हैं जिनसे वे गलत के खिलाफ आवाज़ उठा सकती हैं और शिक्षित महिलाएं घर और बाहर के महत्वपूर्ण फैसलों में बराबरी में भाग ले सकती हैं,इसके साथ नारी का संवैधानिक और मूल अधिकार  है रोजगार  जो न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता बल्कि समाजिक न्याय और राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक है अन्त में यही कहुँगा कि  नारी शोषण का समाधान है शिक्षा और रोजगार ताकि नारी जाति को  बराबरी का हक मिल सके ताकि वो हर समस्या हा खुद हल करके आत्मनिर्भर बन सकें और देश की कुरुतियों को दूर भगाने में कामयाब हो सकें। 

- डॉ सुदर्शन कुमार शर्मा

जम्मू -  जम्मू व कश्मीर

      यह बिल्कुल सच है कि नारी शोषण का समाधान शिक्षा है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं है, शिक्षा उसका वह आधार है जो नारी को आत्मबल तो देती है साथ ही स्वावलंबी बनाती है। एक शिक्षित नारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है। घरेलू हिंसा, पति द्वारा प्रताणित होना वह नहीं सहन करती है चूंकि शिक्षित होने की वजह से उसे अपने अधिकारों का ज्ञान होता है । उसे क्या करना है, वह स्वयं फैसले ले सकती है। रोजगार उसे आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र बनाता है। घर में एक शिक्षित नारी पूरे परिवार की सोच बदल सकती है। आज स्थिति यह है कि इस महंगाई के दौर में पति पत्नी दोनों को काम करना पड़ता तभी गृहस्थी सुचारू रूप से चलती है । दोनों की परख एक दूसरे से है। नारी सशक्तिकरण में नारी का अधिकार एवं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना आवश्यक है और इसके लिए शिक्षा का होना एवं रोजगार का होना नारी के लिए अनिवार्य है।कहते हैं ना कि एक शिक्षित नारी परिवार को क्या पूरे देश को उठा सकती है।

 - चंद्रिका व्यास 

 मुंबई - महाराष्ट्र 

      नारी का पक्ष हमेशा कमजोर रहा है। इतिहास के पन्ने हों या  वर्तमान नारी के शोषण की घटनाएं भरी पड़ी हैं और उनकी वेदनाओं और व्यथाओं  को जानकर मन द्रवित हो उठता है। सच कहा है, नारी शोषण का समाधान है शिक्षा।   शिक्षा से नारी जागरूक भी होती है, जिससे उसे अपनी शक्तियों का और अपनी सुरक्षा के लिए, अपनी जीविका के लिए जो कानून हैं उनका ज्ञान भी होता है और भान भी। इस परिप्रेक्ष्य में वह वह  अपने लिए ढाल भी बना सकती है और शोषण के विरुद्ध समाधान का न केवल रास्ता निकाल सकती है बल्कि शोषित करने वालों के विरुद्ध दंडित करने के लिए न्यायालय की शरण में भी जा सकती है। इसलिए नारी का शिक्षित होना आवश्यक भी है और महत्वपूर्ण भी और इसके लिए उनके माता-पिता एवं पालकों का यह विशेष दायित्व बनता है कि वह नारी को शिक्षित करने के सौ प्रतिशत प्रयास किए जावें ताकि उनके रहते वह इतनी शक्तिमान,ज्ञानवान और सामर्थ्यवान हो जावे कि विवाह उपरांत या यूं कहें के बड़े होने पर कोई उसका शोषण न कर सके। शिक्षित होने का एक और लाभ है वह है, अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार पाने का अवसर। इस तरह नारी शिक्षा से मजबूत भी होगी और मजबूर भी नहीं होगी।

- नरेन्द्र श्रीवास्तव

गाडरवारा - मध्यप्रदेश 

       निसंदेह नारी शोषिता है समाज में - - अशिक्षा ही इसका मूल कारण है। समाज के निचले तबके की औरतें जो मरमर कर के लोगों के घर बर्तन साफ सफाई का काम करके कमा कर घर चलाती है बच्चों का पालन पोषण करती है क्योंकि वह पढी़ लिखी नहीं है। यदि वह भी पढी-लिखी होती तो अपने लिये आवाज उठा सकती। आज का सबसे बड़ा सच है नारी शिक्षा। लेकिन यह एक तरफा सोच हो सकती है। शिक्षित नारी भी शोषिता है। अनेकानेक मामलों में हम देखते हैं कि वह घर और बाहर दोनों मोर्चों पर दुरदुराई जाती है। "नारी तुम केवल श्रध्दा हो " जैसी काव्य पंक्तियों से उसे बहलाया जाता है। खैर मेरा मानना है कि यह एकांगी सोच है। आज रोजगार के क्षेत्र में नारी-नारायणी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। शिक्षा के साथ-साथ रोजगार भी पा रही है। इसके चलते एक काला सच ये भी है कि आज नारी शोषक बन गई है वह पुरुष के लिए कालिका बन गई है। एकल परिवार की हिमायती नौकरी शुदा महिलाओं का बोलबाला यत्र-तत्र-सर्वत्र दिखाई देता है। खैर यह एक अनसुलझा सवाल है आज के दौर में जिसे वक्त के साथ चलना है मिटना और फिर उठना है ।

- हेमलता मिश्र मानवी 

नागपुर - महाराष्ट्र 

       नारी शोषण का समाधान है शिक्षा ये बात पूर्ण रूप से सही भी है और नहीं भी है. आजकल प्रायः सभी लोग शिक्षित हैं और वही ज्यादा गलतियाँ करते हैं. पढ़े लिखे लोगों के यहाँ भी नारी का शोषण होता है.  उनके यहाँ भी तलाक, divorce, हिन्दी में छोड़ देना हो रहा है. बड़े- बड़े ऑफिसर के घर वाले भी दहेज के लिए बहु को सताते रहते हैं और पढ़ा लिखा लड़का उनका (अपने माँ-बाप का) साथ देता है देता है. आजकल हर कोई पढ़ी लिखी लड़की से ही शादी करना चाहता है और करता भी है फिर भी उनकी जिंदगी में शांति नहीं है. लड़की पैसा भी कमा कर लाती है घर का भी काम करती है फिर भी अशांति होती है. इसलिए शिक्षा तो हर क्षेत्र में जरूरी है लेकिन इसके लिए अपनी मानसिकता बदलनी होगी. जबतक मानसिकता नहीं बदलेगी तबतक शोषण होता रहेगा. नारी के प्रति अपने विचार बदलने होंगे. नजरिया बदलना होगा तभी उसे शोषण से मुक्ति मिलेगी. अन्यथा नहीं. केवल शिक्षित होने से शोषण बंद नहीं होगा. आज सबको नारी के अधिकार के बारे में पता है फिर भी नहीं मिल पा रहा हैं क्यों? रहा रोजगार का अधिकार तो सबको रोजगार का अधिकार है सबको रोजगार मिलना चाहिए. लेकिन नारी के रोजगार में भी अहम का टकराव होता है. और परेशानियाँ शुरू हो जाती है. नारी का शोषण सदियों से होता आया है और होता रहेगा. नारी भी चाहती है उसका शोषण हो. नहीं तो इतना सब कुछ जानते हुए भी क्यों प्रेम के चक्कर में पड़ती है और अपने को बर्बाद करती हैं. प्रेम के चक्कर में फंसने और बर्बाद होने वाली अधिकांश पढ़ी लिखी लड़कियां ही होती हैं. आज की यही सच्चाई है. चाहे कोई कुछ भी कहे. नारी को सम्मान की नजरों से देखिए और उसके प्रति अपने विचार बदलने की कोशिश कीजिए. तभी नारी शोषण बंद होगा. 

- दिनेश चंद्र प्रसाद " दीनेश "

कलकत्ता - पश्चिम बंगाल 

       समाज की प्रगति तभी संभव है जब उसमें स्त्री और पुरुष दोनों को समान अवसर प्राप्त हों। दुर्भाग्यवश आज भी नारी को कई स्तरों पर शोषण का सामना करना पड़ता है—चाहे वह घरेलू हो, सामाजिक हो या आर्थिक। ऐसे में यह विचार अत्यंत सार्थक है कि नारी शोषण का सबसे बड़ा समाधान शिक्षा है और रोजगार उसका अधिकार।सबसे पहले, शिक्षा नारी को जागरूक बनाती है। एक शिक्षित महिला अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझती है, सही और गलत में अंतर कर पाती है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस भी रखती है। अशिक्षा के कारण ही कई बार महिलाएं अपने साथ हो रहे अत्याचार को सहती रहती हैं, क्योंकि उन्हें यह ज्ञात ही नहीं होता कि उनके पास विकल्प भी हैं। इसलिए शिक्षा न केवल ज्ञान देती है, बल्कि आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच भी विकसित करती है।दूसरी ओर, रोजगार नारी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है। जब महिला अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो वह किसी पर निर्भर नहीं रहती। आर्थिक स्वतंत्रता उसे निर्णय लेने की शक्ति देती है और उसे समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाती है। रोजगार के माध्यम से नारी अपने जीवन के साथ-साथ अपने परिवार और समाज के विकास में भी योगदान देती है।आज के आधुनिक युग में महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध की है—चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान, राजनीति या व्यापार। फिर भी, समाज के कुछ हिस्सों में आज भी महिलाओं को समान अवसर नहीं मिल पाते। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा कि नारी केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज की प्रगति की आधारशिला है। अंततः, यह कहा जा सकता है कि यदि हम नारी शोषण को समाप्त करना चाहते हैं, तो हमें हर महिला को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर प्रदान करने होंगे। यही एक ऐसा मार्ग है, जिससे एक सशक्त, समान और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है।

 - अलका पांडेय

 मुंबई - महाराष्ट्र 

       नारी शोषण का वास्तविक समाधान शिक्षा है और सम्मानजनक रोजगार उसका मौलिक अधिकार है। परन्तु अधिकारों के साथ मूल उत्तरदायित्व का भी संतुलन अनिवार्य है। नारी सशक्तिकरण कोई दया का विषय नहीं, बल्कि न्याय और संवैधानिक समानता का प्रश्न है। एक शिक्षित नारी केवल अपने अधिकारों की रक्षक नहीं होती, बल्कि वह समाज की नैतिक दिशा भी निर्धारित करती है। शिक्षा उसे आत्मसम्मान, विवेक और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की शक्ति देती है। रोजगार उसे आत्मनिर्भर बनाता है, जिससे वह किसी भी प्रकार के शोषण के विरुद्ध खड़ी हो सके। सत्यमेव जयते का पड़ाव आ जाए तो शिक्षित नारी अपने बीमार पति के लिए भी उच्च/उच्चतम न्यायालय में भी खड़ी हो जाती है। किन्तु, आधुनिकता की आड़ में एक कड़वा सत्य भी उभर कर सामने आ रहा है, जहाँ कुछ मामलों में कानूनी प्रावधानों, विशेषकर गुजारा भत्ता (maintenance) जैसी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग एक प्रवृत्ति का रूप लेता जा रहा है। जो कानून कभी पीड़ित नारी के संरक्षण हेतु बनाए गए थे, उन्हीं का सीमित किन्तु गम्भीर दुरुपयोग न्याय की आत्मा को आहत कर रहा है और नारी ही नहीं बल्कि मातृशक्ति का भी अपमान हो रहा है। नारी बहन का रूप है, धर्मपत्नी का रूप है बेटी का रूप है और मॉ का स्वरूप है। इसलिए जब न्याय का औजार ही भय का कारण बनने लगे, तो सामाजिक संतुलन डगमगाने लगता है। आज का शिक्षित और जागरूक युवक विवाह जैसे पवित्र बंधन में प्रवेश करने से पहले भय और संशय से घिर जाता है। उसे यह आशंका सताती है कि कहीं वैवाहिक असहमति एकतरफा कानूनी बोझ में परिवर्तित न हो जाए। यह भय केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक संकट का संकेत है, जहाँ विश्वास की नींव कमजोर हो रही है। इसलिए अब समय आ गया है कि हम स्पष्ट और निर्भीक रूप से कहें कि नारी सशक्तिकरण का अर्थ पुरुष-विरोध नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण संतुलन है, कानून संरक्षण का साधन बने, प्रतिशोध या लाभ का माध्यम नहीं, प्रत्येक मामले में सत्य की गहराई तक जाकर निष्पक्ष निर्णय हो, और समाज में मौलिक अधिकारों से पूर्व मौलिक कर्तव्यों की चेतना भी उतनी ही प्रबल हो। यदि नारी शिक्षा से सशक्त होती है, तो उसे न्याय के उच्च आदर्शों का भी पालन करना होगा। और यदि पुरुष समानता की बात करता है, तो उसे भी नारी के सम्मान और अधिकारों का पूर्ण समर्थन करना होगा। सच्चा सशक्तिकरण वही है, जहाँ अधिकार और कर्तव्य दोनों समान रूप से प्रतिष्ठित हों, और न्याय किसी एक पक्ष का नहीं, बल्कि सत्य का साथ दे अर्थात महिला आयोग के समतल पुरुष आयोग भी होना चाहिए। इसी समानता का पक्ष संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है और यही गरिमा अनुच्छेद 21 देता है। क्योंकि संविधान की आत्मा "हम भारत के लोग" है। 

- डॉ. इंदु भूषण बाली

ज्यौड़ियां (जम्मू) – जम्मू और कश्मीर

     कहावत है कि एक बेटी को पढ़ाने से दो परिवार शिक्षित होते हैं। पढ़ी-लिखी नारी ,घर-घर की उजियारी । जब बिटिया को हाथ में किताब थमाई जाती है  तब ही उसे अपने अधिकार मिलने का सहारा मिल जाता है वह बिटिया किताब ही नहीं पढ़ती बल्कि अपना हक पढ़ती है। पढ़ने से उसकी सोच बदलती है । अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती है और आत्मविश्वास के बल पर आगे बढ़ती है जिसके कारण वह आत्मनिर्भर भी बनती है जिस बेटी के  जीवन में किताब का सहारा होगा उस लड़की  का खुद ब खुद शोषण कम हो जाएगा । यानि शिक्षा ही शोषण तोड़ने का मजबूत हथियार है शिक्षा के बल पर ही 'सही और गलत' का फर्क करना सीख जाते है एक अशिक्षित महिला को डरा कर धमका कर दबाया जा सकता है परंतु शिक्षित नारी   अन्याय का विरोध कर करते हुए सवाल पूछ सकती है ‌...जवाब दे सकती हैं शिक्षा के बल पर ही हमें अपने अधिकार और कर्तव्य जानने की  समझ मिलती है शोषण के खिलाफ हेल्पलाइन नंबर का प्रयोग करना सीख जाते है अब नारी अबला नहीं सबला है बस उसे एक पढ़ने का और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिले तो शोषण खुद में खुद कम हो जाता है । दुर्भाग्य बस अगर कोई शोषण करता भी है तो कानून उसे दंड भी देता है जो बेटी पढ़ती है वो सच में आगे बढ़ती है। शिक्षा के बल पर सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भर होना नारी का जन्म सिद्ध अधिकार  है। 

- रंजना हरित 

बिजनौर - उत्तर प्रदेश 

" मेरी दृष्टि में " शिक्षा से रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। रोजगार ही नारी शोषण से मुक्ति दिला सकतीं है। रोजगार यानी नौकरी दिलाने में शामिल महत्वपूर्ण रोल अदा करतीं है। बिना शिक्षा के नौकरी का कोई महत्व नहीं होता है। शिक्षा और रोजगार का सीधा संबंध है। 

          - बीजेन्द्र जैमिनी 

         (संचालन व संपादन)


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